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किसानों के कल्याण और कृषि विकास की हितग्राही मूलक योजनाओं के नाम पर सायबर ठगों से सावधान करने के लिये कृषि अभियांत्रिकी द्वारा एडवायजरी जारी की है। संचालक अभियांत्रिकी ने बताया कि कस्टम हायरिंग सेंटर योजना का लाभ दिलाने के नाम पर स्वयं को विभागीय अधिकारी के रूप में अपना परिचय देकर सायबर ठगी करते है। ऐसे प्रकरण सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषक हितग्राही योजनाओं के अंतर्गत कस्टम हायरिंग योजना की प्रक्रिया पूर्णत: पारदर्शी है। इस प्रक्रिया में किसी भी हितग्राही से योजना संबंधी संपर्क नहीं किया जाता है।
संचालक कृषि अभियांत्रिकी ने हितग्राहियों से अपेक्षा की है कि वे अनजान नंबरों से आने वाले कॉल, वॉट्सऐप कॉल/वीडियो कॉल/अन्य सोशल मीडिया से प्राप्त होने वाले कॉल नबंर जिनमें मुख्यत: 07056847570, 07088438459, 0756847570, 9520711020 हो तो उन्हें बिल्कुल भी न उठाये जाए। अनजान व्यक्तियों पर विश्वास न करें, उनसे किसी भी प्रकार की सूचना व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। हो सकता है वह आपकी जानकारी अन्य माध्यम से प्राप्त कर आपको परेशान करे। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को विभागीय अधिकारी बताकर/विभागीय अधिकारी के नाम से भी आपसे बात करे तो एकदम से उसकी बात पर विश्वास न करें। आपके साथ कोई सायबर अपराध घटित होता है तो उसकी शिकायत अपने नजदीकी पुलिस थाने में cybercrime.gov.in या Cyber Crime Help Line (Toll Free) नम्बर 1930 पर अवश्य करें।
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इंदौर जिला न्यायालय के खाते में साइबर ठगों की ऐसी सेंध से हड़कंप मच गया। उन्होंने थोड़े बहुत नहीं 64 लाख रुपये निकाले हैं। यह मामला तब खुला जब एक एडीजे (एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज) का वाउचर बाउंस हो गया। वाउचर बाउंस होने पर पता चला कि खाते में पर्याप्त पैसे नहीं हैं। इसके बाद धोखाधड़ी का पता चला। मैनेजर पुनीत तिवारी ने साइबर हेल्पलाइन और क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को कुछ सुराग मिले हैं जिसके आधार पर गुजरात में भी छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने दो आरोपियों की पहचान कर ली है। ये वे लोग हैं जिनके नाम पर सिम कार्ड जारी हुआ था।
वाउचर रुकने पर ठगी का खुलासा
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि मैनेजर पुनीत तिवारी ने 64 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने साहिल रंगरेज और उसके पिता साजिद अब्दुल सत्तार रंगरेज के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ये दोनों गुजरात के बलसाड़ के रहने वाले हैं। एडीसीपी के अनुसार, 17वें एडीजे जिला न्यायालय के नाम से एक खाता है। इस खाते में लाखों रुपये का लेनदेन होता रहता है। 11 जून को एडीजे ने 6 लाख 50 हजार रुपये का वाउचर जारी किया था। यह वाउचर एक अन्य शाखा के लिए था। लेकिन खाते में पर्याप्त पैसे नहीं होने के कारण वाउचर रोक दिया गया।
टीम जांच के लिए रवाना
एडीजे, जिला न्यायालय के कर्मचारी और बैंक अधिकारी यह देखकर हैरान रह गए। जांच करने पर पता चला कि 5 मार्च से 11 जून के बीच साइबर अपराधियों ने यूपीआई के माध्यम से पैसे निकाले हैं। प्रबंधक पुनीत तिवारी ने साइबर हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। निरीक्षक माधवसिंह भदौरिया ने खाते की जानकारी मांगी। पता चला कि पैसे पेटीएम से निकाले गए हैं। पैसे एक अन्य एसबीआई के खाते में भेजे गए हैं। यह खाता साहिल और साजिद का है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर टीम को गुजरात रवाना कर दिया।
]]>प्रयागराज में रविवार से शुरू हो रहे महाकुंभ में शामिल होने देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इस अवसर को साइबर ठग भी भुनाने में जुट गए हैं। दूसरे शहरों से आ रहे लोगों को साइबर ठग होटल बुकिंग के दौरान निशाना बना रहे हैं।
भोपाल से भी बढ़े श्रद्धालु महाकुंभ जा रहे हैं। इस दौरान कई बार गूगल पर होटल सर्च करने के दौरान उनका संपर्क साइबर ठगों से हो रहा है और उनके खाते खाली हो रहे हैं। साइबर क्राइम सेल में एक सप्ताह में कई शिकायतें पहुंची हैं। हालांकि पांच लाख रुपए तक की साइबर ठगी कि शिकायतें थानों में ही दर्ज की जा रही हैं, जिसके चलते फरियादियों को संबंधित थाने भेज दिया गया।
पैसे जमा करने के बाद पता चला कोई होटल हीं नहीं –
केस-1:—
भोपाल के इंद्रपुरी निवासी सुमित मालवीय ने 4 जनवरी को प्रयागराज के होटल में बुकिंग के लिए गूगल सर्च किया था। सबसे ऊपर दिख रही वेबसाइट पर क्लिक किया, तो अंदर कई होटलों के नाम और बुकिंग के लिए ऑप्शन मिला। 2 दिन की बुकिंग के लिए उन्होंने एक होटल में दो रूम के लिए 14 हजार रुपये का पेमेंट किया था। काफी देर तक जब बुकिंग का मैसेज नहीं पहुंचा और दिए गए नंबर पर फोन किया तो नंबर बंद था। मालूम हुआ कि वहां ऐसा कोई होटल है ही नहीं।
केस-2:–
वन विभाग से रिटायर्ड कर्मचारी ने बताया कि उन्होंने होटल बुकिंग के लिए ऑनलाइन सर्च किया था। वहां दिए गए नंबर पर फोन किया, तो पेमेंट के लिए कार्ड की जानकारी मांगी गई। फोन करने वाले को ओटीपी बताने के बाद उनके बैंक खाते से 26 हजार रुपये निकाले जाने का मैसेज आया। बाद में उस व्यक्ति को फोन किया तो ब्लॉक कर दिया। फिर उन्होंने पुलिस से सम्पर्क किया।
अधिकृत वेबसाइटों और एजेंसियों से ही बुकिंग करें-
0- हमेशा सरकारी या विश्वसनीय टूरिज्म वेबसाइट्स से ही होटल बुक करें। फर्जी वेबसाइट्स पर कभी भी अपनी निजी जानकारी न दें।
0- सुनिश्चित करें कि वेबसाइट के यूआरएल में एक ग्रीन लॉक का निशान हो, जो वेबसाइट की सुरक्षा का संकेत है।
0- ऑनलाइन भुगतान करते समय विश्वसनीय और सिक्योर गेटवे का ही इस्तेमाल करें। अनजाने गेटवे से भुगतान न करें।
0- होटल और बुकिंग साइट की रेटिंग और उपयोगकर्ताओं की समीक्षाएं देखें। यह पता चलता है कि यह सही और विश्वसनीय है या नहीं।
0- किसी भी मेल या संदेश में दिए गए संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें, खासकर अगर यह अज्ञात स्रोत से आया हो।
मध्य प्रदेश में साइबर ठगी का हाई प्रोफाइल मामला सामने आया है. जालसाज ने मोहन यादव सरकार में मंत्री कृष्णा गौर के बेटे को बेटे निशाना बनाया है. लेबर सप्लाई का ठेका दिलाने के नाम पर आकाश गौर से 3.19 लाख का चूना लगा दिया गया.
पूर्व मंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर के पोते आकाश गौर की शिकायत पर साइबर क्राइम ब्रांच ने 9 नवंबर को अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया है. उन्होंने बताया कि जालसाज ने महिन्द्रा कंपनी में लेबर सप्लाई, ट्रांसपोर्ट का ठेका दिलाने का झांसा देकर रकम हड़पी है.
वारदात को अंजाम देने के लिए जालसाज ने डीएसपी साइबर क्राइम की मिलती जुलती ई-मेल आईडी का बैंक अकाउंट खुलवाने में उपयोग किया गया. आकाश ने बताया कि 20 मार्च 2024 को प्राइवेट कंपनी महिन्द्रा में लेबर सप्लाई के टेंडर दिलाने का फोन कॉल आया. कॉलर ने पूछा कि आप लेबर सप्लाई का काम करते हैं.
मंत्री के बेटे से लाखों की धोखाधड़ी
आकाश ने बताया कि ठेकेदारी करते हैं. कॉलर ने कहा कि आपको काम का टेंडर मिल जाएगा. आपको क्यूआर कोड पर एक एंट्री करनी होगी और काम अलॉट हो जाएगा. जालसाज ने आकाश के व्हाट्सएप पर क्यूआर कोड भेजकर निर्धारित शुल्क जमा करने को कहा.
जालसाज ने जानें कैसे लगाया चूना
झांसे में आए आकाश ने जालसाज के कहे अनुसार अलग अलग बैंक खातों से रकम ट्रांसफर कर दिये. ठगी का अहसास होने के बाद आकाश ने टोल फ्री नंबर 1930 पर भी शिकायत दर्ज कराई थी. साइबर क्राइम ब्रांच की टीम धोखाड़ी के हाई प्रोफाइल मामले की जांच कर रही है. बता दें कि साइबर जालसाज ठगी के नये नये तरीके निकाल रहे हैं. मध्य प्रदेश में साइबर अपराधियों के निशाने पर आम आदमी के साथ अब वीआईपी भी हैं. वर्तमान में डिजिटल अरेस्ट कर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा है.
]]>कोरोना वायरस के लॉकडाउन के बाद से छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी के मामले बढ़ने लगे हैं। बीते दिनों राजधानी में 3 अलग-अलग मामलों में साइबर ठगों ने शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को करोड़ों का चूना लगा दिया। इन मामलों के सामने आने के बाद रायपुर रेंज पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा के निर्देशन पर साइबर थाना रेंज रायपुर ने बड़ी कार्रवाई की।
साइबर थाना रेंज रायपुर ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल, दिल्ली, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश से 4 अंतरराज्यीय ठगों को गिरफ्तार किया है। इन सभी आरोपियों को पुलिस ने रायपुर कोर्ट में पेश किया था, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया है।
पहला मामला
राजधानी की रहने वाली एक महिला से साइबर ठगों ने शेयर ट्रेडिंग में मुनाफा कमाने के नाम पर 88 लाख रुपये की ठगी की थी। महिला की शिकायत के बाद रेंज साइबर थाना में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर पुलिस मामले की जांच में जुट गई। इस मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश, बिहार, चेन्नई, कोलकाता से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि दो आरोपी सुमन सिल (उम्र 28 साल) और देवराज कुशवाहा (उम्र 40 साल) फरार चल रहे थे, जिन्हें रायपुर पुलिस ने क्रमशः 24 परगना, पश्चिम बंगाल और भोपाल, मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के विभिन्न बैंक खातों में मौजूद ठगी के 84 लाख रुपये होल्ड करवाए हैं।
दूसरा मामला
राजधानी के ही एक युवक ने शेयर ट्रेडिंग में मुनाफा कमाने के नाम पर 99 लाख रुपये की ठगी होने की रिपोर्ट थाना तेलीबांधा में दर्ज कराई थी। इस मामले में तेलीबांधा पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर मामले की जांच रेंज साइबर थाना रायपुर को सौंपी थी। मामले की जांच के दौरान साइबर टीम ने दिल्ली में छिपकर बैठे एक आरोपी दीपक (उम्र 29 साल) को जेजे कॉलोनी, द्वारका सेक्टर 3 में दबिश देकर गिरफ्तार किया। यह ठग मूल रूप से उत्तर प्रदेश के संभल जिले का रहने वाला है।
तीसरा मामला
राजधानी के रहने वाले एक व्यक्ति ने शेयर ट्रेडिंग के नाम पर उनसे 1.16 करोड़ रुपये की ठगी होने की रिपोर्ट पंडरी थाना में दर्ज कराई थी। इस मामले में साइबर टीम ने एक आरोपी को पहले गिरफ्तार किया था। इसी कड़ी में साइबर ठगी के लिए बैंक खाता उपलब्ध कराने के आरोप में पुलिस ने सैयद जानी बासा (उम्र 46 साल) को विजयवाडा, आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार किया है। प्रकरण में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है।
4 महीनों में 400 करोड़ की ठगी का भंडाफोड़, 28 गिरफ्तार
गौरतलब है कि रायपुर रेंज साइबर पुलिस ने बीते 4 महीनों के दौरान बड़े साइबर घोटालों का पर्दाफाश किया है। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अब तक 37 मामलों में पुलिस ने 400 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का भंडाफोड़ करते हुए 28 आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। इन ठगों के खिलाफ देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 7900 से अधिक मामले दर्ज हैं।
साइबर ठगी से बचने इन बातों का रखें खास ख्याल —
A) शेयर ट्रेडिंग के फर्जी एप्लीकेशन के जरिए होने वाले ठगी का शिकार होने से बचने के लिए अत्यधिक लाभ प्राप्त करने के फेर में ना पड़ें।
B) डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान कानून में नहीं है, कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर ऐसी धमकी नहीं देती, वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती है और ना ही पैसा की मांग करती है। अगर डर लगे तो समझिए कुछ गड़बड़ है। साइबर अपराधियों के झांसे में ना आएं।
C) साइबर अपराधियों द्वारा सोशल मीडिया के द्वारा गूगल में रिव्यू लिखने के नाम से पैसे कमाने का झांसा दिया जाता है जिसके चक्कर में पड़कर कई लोग साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं, इससे सावधान रहें।
D) इसी प्रकार वर्क फ्रॉम होम के बहाने फ्रॉड हो रहे हैं जिसके माध्यम से साइबर फ्रॉडस्टर आपको घर बैठे पेंसिल पैकिंग या पीडीएफ फाइल को वर्ड में कन्वर्ट करने का आदि झांसा देकर काम निकलवा लेते हैं, उसके पश्चात किए गए कार्य में गलतियां बता कर पेनल्टी लगाने की बात पर पैसे की मांग की जाती है और पैसे ना देने पर कोर्ट में झूठा मुकदमा का पेपर तैयार कर फर्जी वारंट भेजा जाता है। जिससे घबराकर लोग आरोपियों को रूपये देने तैयार हो जाते हैं। किसी लालच में ना फंसे ना ही घबराएं। कभी भी कोई भी व्यक्ति आपको घर बैठे रुपए कमाने का अवसर नहीं देगा।
पुलिस की जनता से अपील
रायपुर पुलिस ने नागरिकों से आग्रह किया है कि अगर वे किसी भी तरह के साइबर अपराध का शिकार बनते हैं, तो तुरंत अपने निकटतम पुलिस थाने में जाकर एफआईआर दर्ज कराएं। इस संबंध में पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर रेंज ने सभी पुलिस अधीक्षकों और थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी साइबर अपराध की सूचना मिलने पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। अपराध पंजीकरण के बाद, आगे की जांच के लिए प्रकरण को रेंज साइबर थाने में भेजा जाएगा, जहां साइबर अपराध समाधान के लिए आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। यदि किसी कारणवश थाना में एफआईआर दर्ज नहीं होती है, तो नागरिक पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय, रेंज रायपुर से संपर्क कर सकते हैं।