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छत्तीसगढ़ में धान खरीद व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) द्वारा अपनाई गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि तकनीक का सही दिशा में उपयोग किया जाए, तो न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाएं सुदृढ़ होती हैं, बल्कि सरकारी खजाने को भी बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विजन और मार्कफेड के चेयरमैन जितेंद्र कुमार शुक्ल (IAS) के नेतृत्व में इस तकनीकी पहल के माध्यम से राज्य ने बिना किसी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में कटौती किए, सिस्टम की कमियों को दूर कर लगभग ₹2,780 करोड़ की प्रत्यक्ष बचत सुनिश्चित की है।
वित्तीय वर्ष 2025–26 की धान खरीद प्रक्रिया के समापन के बाद आए आंकड़े चौंकाने वाले और सुखद हैं। इस अवधि के दौरान राज्य में कुल 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई, जिस पर सरकार का कुल व्यय ₹43,720 करोड़ रहा। इसके विपरीत, यदि पिछले वित्तीय वर्ष 2024–25 के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो 149.24 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पर लगभग ₹46,500 करोड़ खर्च हुए थे।
आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर पता चलता है कि इस बार खरीद की मात्रा में करीब आठ लाख मीट्रिक टन की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी उत्पादन घटने के कारण नहीं, बल्कि गैर-प्रामाणिक प्रविष्टियों, फर्जी पंजीकरण और अन्य सीमावर्ती राज्यों से लाये जाने वाले धान की अवैध रूप से ख़रीदारी पर कड़ाई से लगाए गए नियंत्रण का प्रत्यक्ष परिणाम है।
चुनौतियां और तकनीकी समाधान: विगत वर्षों में धान खरीदी के दौरान फर्जी किसान पंजीकरण, रिकॉर्ड में हेराफेरी और भंडारण केंद्रों से धान की चोरी जैसी गंभीर चुनौतियां सामने आती रही थीं। विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, इस विशाल प्रक्रिया में यदि मात्र एक प्रतिशत की भी लीकेज या गड़बड़ी होती है, तो सरकारी खजाने को सालाना कई सौ करोड़ की चपत लगती है।
इन्हीं गंभीर चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मार्कफेड ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम 'आईटीआई लिमिटेड' के साथ हाथ मिलाया। आईटीआई लिमिटेड ने इस परियोजना के लिए आवश्यक नेटवर्क प्रबंधन, अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना और निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान कर इस मॉडल को धरातल पर उतारा।
ये कैमरे संदिग्ध गतिविधियों को स्वतः पहचानने में सक्षम हैं। रायपुर में एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष के रूप में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किया गया है, जहां लाइव फीड के जरिए पूरे प्रदेश की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर यहीं से तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए जाते हैं।
मार्कफेड के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार शुक्ल ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि, “इस प्रणाली ने न केवल वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया है, बल्कि वास्तविक किसानों के हक को भी सुरक्षित किया है। अब बिचौलियों के लिए व्यवस्था में सेंध लगाना लगभग मुश्किल हो गया है।”
महज़ ₹48.92 करोड़ की कुल लागत से तैयार इस परियोजना ने निवेश के अनुपात में कई गुना अधिक प्रतिफल (Return on Investment) सुनिश्चित किया है।
आईटीआई लिमिटेड के अनुसार, “यह परियोजना 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस (Minimum government, maximum governance)' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। आज छत्तीसगढ़ का यह डेटा-संचालित मॉडल न केवल देश के अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मानक बन गया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि डिजिटल क्रांति कैसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।”
छत्तीसगढ़ का यह मॉडल यह स्पष्ट करता है कि पारदर्शी सुशासन के लिए तकनीक का अपनाना अनिवार्य है। ₹2,780 करोड़ की यह बचत न केवल वित्तीय सफलता है, बल्कि यह उन हजारों किसानों की जीत है जिन्हें अब बिना किसी बिचौलिए या परेशानी के उनकी फसल का सही दाम मिल रहा है। यह सफलता 'डिजिटल इंडिया' के सपने को ग्रामीण स्तर पर हकीकत में बदल रही है।
]]>कृषि उपज मंडी इटारसी में लगातार धान की आवक हो रही है, जिससे किसानों को सुविधा देने के लिए मंडी प्रशासन ने अब शासकीय अवकाश के दिनों में भी काम करने का फैसला लिया है। मंडी प्रशासन ने 21 मार्च से 29 मार्च तक सातों दिन मंडी को खुला रखने का निर्णय लिया है। मंडी समिति के सचिव अरविंद परिहार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस अवधि में मंडी में हर दिन नियमित रूप से धान की नीलामी और तौल का काम होगा। इस दौरान शनिवार और रविवार को भी मंडी में कार्य होगा। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस अवधि में मंडी कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द (leave cancelled) कर दी गई हैं।
किसानों से की अपील
मंडी प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे व्यवस्था में सहयोग करें ताकि धान की नीलामी और तौल की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सके। यह आदेश अतिरिक्त विकास अधिकारी (राजस्व) और भारसाधक अधिकारी मंडी की ओर से जारी किया गया है। इसके अलावा, इस संबंध में मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड भोपाल, कलेक्टर नर्मदापुरम, व्यापारी संगठनों और मीडिया को भी सूचना दी गई है।
कर्मचारियों की भारी कमी से मंडी प्रशासन परेशान
इटारसी कृषि उपज मंडी को स्टाफ की कमी के चलते कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले की ए-ग्रेड इटारसी कृषि उपज मंडी में कुल 72 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से आधे से अधिक वर्षों से खाली पड़े हैं। वर्तमान में केवल 32 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से कुछ महिलाएं और विकलांग कर्मचारी भी शामिल हैं।
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छत्तीसगढ़ में इन दिनों किसानों की बल्ले-बल्ले है. प्रदेश के किसानों ने महज 6 दिन में ही 502 करोड़ 53 लाख रुपये की कमाई कर ली है. यह कमाई किसानों को धान बेचने के एवज में हुई है. राज्य में 14 नवंबर से सरकारी सोसायटियों में धान खरीदी का महाअभियान चल रहा है. इस अभियान के तहत 68 हजार 668 किसानों ने 3.09 लाख मीट्रिक टन धान बेचा है. इसकी एवज में उन्हें 500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान 6 दिनों में किया जा चुका है.धान खरीदी की यह प्रक्रिया करीब 70 दिन और चलेगी.
3 लाख टन के पार पहुंचा आंकड़ा
छत्तीसगढ़ सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयालदास बघेल के हवाले से मिली जानकारी में कहा गया है कि 14 नवंबर से 19 नवंबर तक राज्य में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का आंकड़ा 3 लाख टन के पार पहुंच गया है.
मंत्री बघेल ने कहा कि धान खरीदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रदेश के पंजीकृत किसानों से 2 हजार 739 उपार्जन केन्द्रों में समर्थन मूल्य पर धान खरीद रही है. चालू विपणन वर्ष में 160 लाख टन धान उपार्जन का अनुमान है.
31 जनवरी तक चलेगा अभियान
बता दें कि देव-दीवाली 14 नवंबर से शुरू हुए धान खरीदी महापर्व के 6वें दिन तक 3.09 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है. धान खरीदी का यह महाअभियान 31 जनवरी 2025 तक चलेगा. खाद्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में आज 20,296 किसानों से 93 हजार 581 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है. राज्य में धान बेचने के लिए इस साल 27.68 लाख किसानों का पंजीयन हुआ है, जिसमें 1.42 लाख नए किसान शामिल हैं. 19 नवंबर के लिए कुल 23791 टोकन जारी किए गए थे. आगामी दिवस के लिए 19934 टोकन जारी किए गए हैं.धान खरीदी व्यवस्था पर निगरानी के लिए अलग अलग जिलों के लिए राज्य स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों की टीम बनाई गई है, जो लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं.
]]>मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर (Jabalpur) जिले समेत राज्य भर में इस साल धान खरीदी का कार्य 2 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है. वहीं जबलपुर में धान खरीदी की तैयारियां भी जोरों पर हैं. इसके लिए 86 केंद्र बनाए गए हैं. इस बार धान विक्रय के लिए 55,000 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है. पिछले वर्ष खरीदी प्रक्रिया में आई गड़बड़ियों को रोकने और किसानों की सुविधा बढ़ाने के लिए प्रशासन ने कई व्यापक कदम उठाए हैं.
इस बार धान खरीदी की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) की जगह नागरिक आपूर्ति निगम (नान) को सौंपी गई है. दरअसल, पिछले वर्ष हुए धान खरीदी घोटाले में मार्कफेड की भूमिका पर सवाल उठने के बाद शासन ने यह फैसला लिया है.
धान खरीदी को लेकर जोरों पर तैयारियां
किसान पंजीयन की प्रक्रिया: सभी किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन करना अनिवार्य है. पिछले वर्ष पंजीकृत किसानों को इस वर्ष स्वतः पंजीकृत माना गया है. उनकी भूमि और फसल से संबंधित रिकॉर्ड को अद्यतन करने के लिए राजस्व विभाग को निर्देश दिए गए हैं. यह प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध है.
गड़बड़ियों पर नियंत्रण: पिछले वर्ष की अनियमितताओं को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील उपार्जन केंद्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं. सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध धान परिवहन रोकने के लिए 16 चेकपोस्ट पर अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है. इसके अतिरिक्त, विशेष जांच दल का गठन भी किया गया है.
उपार्जन केंद्रों का प्रबंधन: सभी केंद्रों पर भंडारण व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है. धान के सुरक्षित रख-रखाव के लिए मानक स्टैकिंग और जल निकासी की सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं. इसके अलावा किसी भी तकनीकी समस्या के समाधान के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है.
समर्थन मूल्य और खरीदी अवधि: किसानों को उचित समर्थन मूल्य देने और धान खरीदी प्रक्रिया को 14 नवंबर से शुरू करने की योजना है. प्रक्रिया की निगरानी के लिए नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं.
शिकायत निवारण: किसानों की शिकायतों को तेजी से सुलझाने और खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए हेल्पडेस्क और संबंधित अधिकारियों की व्यवस्था की गई है.
इन तैयारियों का उद्देश्य किसानों को पारदर्शी और कुशल प्रणाली के माध्यम से अपनी फसल बेचने की सुविधा प्रदान करना है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह व्यापक तैयारी सुनिश्चित करेगी कि जबलपुर जिले के किसान बिना किसी बाधा के अपनी फसल का विक्रय कर सकें.
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