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मध्य प्रदेश के पन्ना की धरती ने एक बार फिर गरीब की किस्मत बदल दी। जिले के बेनीसागर मोहल्ले के निवासी वृद्ध मजदूर महादेव प्रसाद प्रजापति को दो हफ्तों के भीतर उथली हीरा खदान पटी से एक नहीं, बल्कि तीन चमचमाते हीरे मिले हैं। महादेव प्रसाद ने इन हीरों को हीरा कार्यालय में जमा किया। जानकारी के अनुसार, उन्होंने करीब 20 दिन पहले ही पट्टा लेकर हीरा खदान शुरू की थी।
इस दौरान उन्हें क्रमशः 2.58 कैरेट, 2.75 कैरेट और 3.09 कैरेट वजन के जेम्स क्वालिटी के तीन हीरे प्राप्त हुए, जिनका कुल वजन 8.42 कैरेट है। हीरा पारखी अनुपम सिंह के मुताबिक, इनकी अनुमानित कीमत 15 लाख रुपये से अधिक हो सकती है।
वृद्ध महादेव प्रसाद ने बताया कि वह मजदूर तबके से हैं, सुनने में कठिनाई होती है और कच्चे घर में रहते हैं। उन्होंने कहा कि नीलामी के बाद मिलने वाली राशि से वे अपनी आर्थिक स्थिति सुधारना चाहते हैं।
बताया गया कि आज दो लोगों ने कुल चार हीरे जमा किए हैं, जबकि अक्टूबर माह में अब तक 10 हीरे और साल की शुरुआत से अब तक 68 हीरे हीरा कार्यालय में जमा किए जा चुके हैं।
मध्य प्रदेश में हीरे उगलने वाली नगरी पन्ना की धरती कब किसकी किस्मत पलट दे और कब किसे रंक से राजा बना दे, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसा ही कुछ देखने को मिला, जब माधव आदिवासी नाम के सामान्य मजदूर की किस्मत पलट गई और वह अचानक लखपति बन गया।
पन्ना की कृष्णा कल्याणपुर पट्टी की उथली खदान में मजदूरी करने वाले आदिवासी युवक माधव को आज उस वक्त बड़ी सौगात मिली, जब उसने किस्मत आजमाने के लिए पहली बार खदान खोदी और पहले ही दिन पहली ही बार में हीरा मिलने के साथ ही उसकी किस्मत भी चमक उठी। इस मजदूर ने खदान की खुदाई चालू की थी और पहले ही दिन उसे 11 कैरेट 95 सेंट का उज्ज्वल किस्म का बेशकीमती हीरा मिल गया।
40 लाख रुपए से भी ज्यादा है कीमत
इस बारे में जानकारी देते हुए हीरा अधिकारी रवि पटेल ने बताया कि माधव को मिला हीरा बेहद साफ और कीमती है, साथ ही उन्होंने बताया कि इस हीरे की अनुमानित कीमत 40 लाख रुपए से भी ज्यादा आंकी जा रही है। हीरा मिलने के बाद माधव मजदूर ने इसे नियम के अनुसार पन्ना स्थित हीरा कार्यालय में जमा कर दिया। पटेल ने आगे की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि अब यह हीरा आगामी नीलामी में जाएगा और नीलामी की रकम में से 12.5% रॉयल्टी काटकर बाकी रकम माधव को दी जाएगी।
माधव को मिले इस हीरे से ना केवल एक साधारण आदिवासी मजदूर की जिंदगी बदल जाएगी, बल्कि इसके साथ ही उसने अपने हौसले और मेहनत से वहां काम कर रहे अपने जैसे लाखों मजदूरों के मन में भी इसी तरह की उम्मीदें जगा दी हैं। पन्ना की धरती से हर दिन ऐसे चुनिंदा भाग्यशाली लोगों की झोली में हीरे डालकर उनके सपने पूरे करती है।
]]> किस्मत कब और कहां बदल जाए, कहा नहीं जा सकता. ऐसा ही कुछ मध्य प्रदेश के पन्ना की रहने वाली सवित्री सिसोदिया के साथ हुआ है. सावित्री की रातोंरात किस्मत चमक गई और वो लखपति बन गई है. दरअसल, मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में खुदाई के दौरान महिला को 2.69 कैरेट का कच्चा हीरा मिला है. यह हीरा अब नीलामी के लिए भेजा जाएगा. महिला की किस्मत दो साल की अथक मेहनत के बाद चमकी है.
पन्ना की इस महिला की चमकी किस्मत, 2.25 लाख रुपये का मिला चमचमाता हीरा
पन्ना जिले की चोपड़ा स्थित एक निजी खदान में दो साल की अथक मेहनत के बाद एक महिला की किस्मत चमक उठी है. सावित्री सिसोदिया नामक की इस महिला को अपनी खदान से 2 कैरेट 69 सेंट का एक चमचमाता हीरा मिला है. इस हीरे की अनुमानित कीमत 2.25 लाख रुपये बताई जा रही है.
दो साल से कर रही थी कोशिश
सवित्री पिछले दो साल से पन्ना के चोपड़ा क्षेत्र में एक निजी खदान में हीरा खोजने की कोशिश कर रही थीं. उन्होंने बताया कि तेज धूप, धूल और मिट्टी की परवाह किए बिना उन्होंने लगातार मेहनत की. उनका विश्वास था कि एक दिन किस्मत जरूर साथ देगी और अब वह दिन आ ही गया.
सवित्री ने कहा, 'यह प्रकृति का अनमोल तोहफा है. मुझे लगता है कि इस हीरे से मेरे और मेरे परिवार का भविष्य बदल सकता है.'
हीरा अधिकारी अनुपम सिंह ने इस हीरे का निरीक्षण किया और उसे जमा करवा दिया. उन्होंने बताया कि यह हीरा नीलामी में रखा जाएगा और नीलामी से प्राप्त रकम में से सरकारी रॉयल्टी और टैक्स काटकर शेष राशि सवित्री को दी जाएगी.
लाखों रुपये में बिक सकता है हीरा
पन्ना जिला हीरों के लिए जाना जाता है, जहां आम लोग भी सरकारी अनुमति लेकर छोटी खदानें लीज पर लेकर हीरा खोजने का काम करते हैं. हालांकि बहुत कम लोगों को इस तरह का बेशकीमती हीरा हाथ लगता है. सवित्री का यह हीरा नीलामी में लाखों रुपये में बिक सकता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार हो सकता है.
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह उदाहरण उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मेहनत और विश्वास के दम पर अपनी किस्मत बदलने की कोशिश करते हैं.
पन्ना जिला भारत में हीरे की खुदाई के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थान है. यहां कई सरकारी और निजी खदानें हैं, जिनमें से हर साल कई लोग बेशकीमती हीरे खोजते हैं. पन्ना में कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जैसे- पंडव गुफाएं, बालाजी मंदिर, महेंद्रगिरी हिल्स. यह क्षेत्र धार्मिक आस्था और पौराणिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है.
पन्ना में स्थित वन्यजीव अभयारण्य बाघों, तेंदुओं, मगरमच्छों और अन्य दुर्लभ प्रजातियों का घर है. यह प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता के लिए पर्यटकों को आकर्षित करता है.
2.69 कैरेट का मिला कच्चा हीरा, आगामी नीलामी में रखा जाएगा
महिला ने बताया कि पिछले दो सालों से चोपड़ा की एक निजी खदान में हीरे की तलाश कर रही थीं. कड़ी धूप, धूल और अथक परिश्रम के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. उनकी यह लगन और धैर्य आखिरकार रंग लाया और आज उन्हें यह बेशकीमती तोहफा प्रकृति से मिला है. हीरा पारखी ने हीरे का निरीक्षण कर उसे जमा कर लिया है, जिसे आगामी नीलामी में रखा जाएगा. नीलामी से मिलने वाली राशि, शासकीय रॉयल्टी और टैक्स की कटौती के बाद महिला को सौंप दी जाएगी.
]]>क्या है सबसे बड़े हीरे के भंडार की कहानी?
दरअसल, मध्य प्रदेश के बक्सवाहा के जंगलों में यह सर्वे आस्ट्रेलियाई कंपनी रियोटिंटो ने कराया था. देश की सबसे बड़ा माइनिंग कंपनी रियोटिंटो ने सन् 2000 से 2005 के बीच पूरे बक्सवाहा जंगल में सर्वे कराया. एक दिन सर्वे टीम की खुशी का ठिकाना न रहा जब उन्हें किंबरलाइट पत्थरों की बड़ी-बड़ी चट्टानें नजर आईं. दरअसल, हीरा इसी किंबरलाइट की चट्टान में पाया जाता है.
तब 55 हजार करोड़ थी हीरों की अनुमानित कीमत
25 साल पहले रियोटिंटो कंपनी को यहां हीरों के भंडार का पता चला था. कंपनी को यहां बड़े पैमाने पर किंबरलाइट की चट्टानें मिली थीं. दावा था कि जमीन के नीचे 55 हजार करोड़ तक के हीरे हो सकते हैं. दावा था कि जंगल में जमीन के नीचे साढ़े तीन करोड़ कैरेट (लगभग 6000kg) से ज्यादा के हीरे हैं. हालांकि, इसकी खोज करने वाली कंपनी 2017 में इस प्रोजेक्ट से बाहर हो गई, जिसके बाद बक्सवाहा के जगंल को सरकार ने हीरा निकालने के लिए नीलम किया था. ये प्रोजेक्ट लीज पर आदित्य बिड़ला ग्रुप की एसेल माइनिंग कंपनी को 2019 में मिला पर हाईकोर्ट ने इसपर स्टे लगा दिया था.
खुदाई से पहले लगा हाईकोर्ट का स्टे
छतरपुर जिले की बक्सवाहा हीरा खदान 2019 में नीलाम की गई थी. आदित्य बिड़ला ग्रुप की एसेल माइनिंग कंपनी ने 50 साल की लीज पर इसे लिया था. कंपनी को लगभग 364 हेक्टेयर जमीन मिली थी. खुदाई शुरू हो पाती उसके पहले ही पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था. बताया गया था कि इस जंगल में 62.64 हेक्टेयर क्षेत्र हीरे निकालने के लिए चिह्नित किया गया था, पर कंपनी ने 382.131 हेक्टेयर का जंगल मांगा, जिससे बाकी जमीन का उपयोग खनन करने और प्रोसेस के दौरान खदानों से निकला मलबा डंप करने में किया जा सके. इसी दौरान हाईकोर्ट ने इसपर स्टे लगा दिया.
बन जाती एशिया की सबसे बड़ी डायमंड माइन
खनिज अधिकारी अमित मिश्रा के मुताबिक, '' बक्सवाहा के जंगलों में बंदर डायमंड के नाम से एक ब्लॉक बनाया गया था, जिसे रियोटिंटो कंपनी ने एक्सप्लोर किया था लेकिन रियो टिंटो उसे छोड़ कर चली गई थी. उस समय फॉरेस्ट से उन्होंने रकबा बहुत बड़ा मांगा था, जो किसी वजह से नहीं दिया गया. उसके बाद एक छोटा रकबा 364 हेक्टेयर का बनाया गया था. अगर बक्सवाहा की माइंस चलती तो एशिया की सबसे बड़ी माइंस होती, उस समय 55 हजार करोड़ के हीरे निकलने की वेल्युएशन की गई थी.''
लाखों पेड़ कटने की अफवाहें थीं
वहीं खनिज अधिकारी ने आगे कहा, '' 364 हेक्टेयर क्षेत्र की लीज दी गई तो अफवाहें उड़ीं कि पूरे में खुदाई होगी और लाखों पेड़ कटेंगे. ये महज अफवाह थी. अब खुदाई की आधुनिक तकनीकें आ गई हैं, ज्यादा से ज्यादा एक फुटबॉल ग्राउंड के बराबर जमीन पर ही खुदाई होती है, इससे न तो ज्यादा पेड़ कटते हैं और न वन्य जीवों को नुकसान होता है. जितने पेड़ कटते हैं उसके 10 गुने पेड़ लगवाए भी जाते है,और उनकी पूरी देखरेख की जाती है.''
]]>पन्ना में एक किसान की तकदीर उस वक्त बदल गई, जब उसे खेत में खुदाई के दौरान एक बेशकीमती हीरा मिला. यह हीरा 4.24 कैरेट का बताया जा रहा है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 20 लाख रुपये आंकी जा रही है. किसान ने यह हीरा हीरा कार्यालय में जमा करा दिया है, जहां इसे नीलामी के लिए रखा जाएगा.
पन्ना जिले को देशभर में हीरों की धरती कहा जाता है. यहां की मिट्टी कब किसे रंक से राजा बना दे, कोई नहीं जानता. ऐसा ही कुछ हुआ गहरा गांव के किसान ठाकुर प्रसाद यादव के साथ. वे कई वर्षों से अपने खेत में हीरे की खदान चला रहे थे. लगातार मेहनत और उम्मीदों के बाद आखिरकार 4 कैरेट 24 सेंट का चमचमाता हीरा उनके हाथ लगा. हीरा मिलते ही ठाकुर प्रसाद की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने इसे हीरा कार्यालय में जमा करा दिया.
हीरा मिलने के बाद किसान ठाकुर प्रसाद यादव ने बताया कि नीलामी के बाद मिलने वाली रकम से वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारेंगे और एक नया काम शुरू करेंगे. वहीं, खेत के मालिक धर्मदास ने भी इस पर खुशी जताई कि उनके खेत में बेशकीमती हीरा मिला.
इस मामले में हीरा पारखी अनुपम सिंह ने बताया कि यह हीरा सरकोहा क्षेत्र की खदान से निकला है और इसे अगली नीलामी में बोली के लिए रखा जाएगा. पन्ना में पहले भी कई किसान और मजदूरों की किस्मत यहां की मिट्टी ने बदल दी है. पन्ना के हीरा व्यापारी रविंद्र जड़िया ने बताया कि यहां की धरती लोगों को रातोंरात अमीर बना सकती है. पिछले ही साल हीरा नीलामी में 5 करोड़ रुपये से अधिक के हीरे बेचे गए थे.
आने वाले दिनों में पन्ना का हीरा बाजार और भी आगे बढ़ने की उम्मीद है. हीरा कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, इस बहुमूल्य हीरे की नीलामी में बड़ी संख्या में व्यापारी हिस्सा ले सकते हैं. यदि बाजार में इसकी मांग अधिक रही, तो इसकी कीमत 20 लाख से भी ज्यादा पहुंच सकती है. इससे पहले भी पन्ना के कई मजदूर और किसान हीरे की बदौलत लखपति और करोड़पति बन चुके हैं. पिछले साल भी कई किसानों ने नीलामी के जरिए लाखों-करोड़ों रुपये कमाए थे. अब सबकी नजरें इस बहुमूल्य हीरे की नीलामी पर टिकी हैं.
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पांच प्रमुख हीरों पर सबकी रहेगी नजर
नीलामी में पांच प्रमुख हीरे आकर्षण का केंद्र होंगे। इनमें सबसे बड़ा हीरा 32.80 कैरेट का है, जबकि अन्य बड़े हीरे क्रमशः 19.22 कैरेट, 16.10 कैरेट, 6.97 कैरेट और 6.65 कैरेट के हैं। इन हीरों पर व्यापारियों की नजरें रहेंगी। इस बार नीलामी में कुल 313 कैरेट के हीरे रखे जाएंगे।
सुरक्षा का विशेष ध्यान
हीरा निरीक्षक नूतन जैन ने जानकारी दी कि नीलामी में सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। नीलामी प्रक्रिया के दौरान व्यापारियों के लिए विशेष लेंस की व्यवस्था की गई है ताकि वे आसानी से हीरों का परीक्षण कर सकें। नीलामी की प्रक्रिया सुबह 9:00 बजे से 2:00 बजे तक होगी, जिसके बाद आधे घंटे के भोजन के बाद बोली प्रक्रिया शुरू होगी।
शासन के राजस्व में जमा होगी 11% राशि
नीलामी के अंत में जो भी व्यापारी सफल बोली लगाकर हीरे खरीदेंगे, उन्हें कुल राशि का 11% शासन के राजस्व में जमा करना होगा, जबकि बाकी राशि सीधे हीरे के मालिक के खाते में जाएगी।
पन्ना में यह हीरा मेला हर वर्ष विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहां की उथली खदानों से प्राप्त हीरे देशभर में प्रसिद्ध हैं। पन्ना जिले की इस नीलामी में व्यापारियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। यह गांव के गरीब लोगों को लखपति बनने का बड़ा अवसर देता है।
खनिज एवं हीरा निरीक्षक नूतन जैन ने बताया कि व्यापारियों के लिए सर्वसुविधायुक्त नीलामी हॉल तैयार किया गया है. इसमें एलईडी लाइट्स, सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं. नीलामी में भाग लेने के लिए व्यापारियों को मात्र 5,000 रुपये की अमानत राशि जमा करनी होगी.
बता दें नीलामी में 4 करोड़ 17 लाख 49 हजार 726 रूपये अनुमानित कीमत के कुल 127 नग छोटे-बड़े हीरे रखे जाएंगे. इसके साथ ही कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित नीलामी में अन्य छोटे-बड़े हीरे भी नीलाम किए जाएंगे.
खनिज अधिकारी रवि पटेल ने बताया कि ऐसे व्यापारी जो बोली लगाकर रॉयल्टी जमा नहीं करते, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा. इससे न केवल हीरा मालिक बल्कि सरकार को भी नुकसान होता है.
नीलामी से पहले व्यापारियों को हीरों का निरीक्षण करने का मौका दिया जाएगा. पिछले अनुभवों को देखते हुए इस बार सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए अतिरिक्त उपाय किए गए हैं.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए
यह नीलामी तीन दिनों तक चलेगी, जिसमें लगभग 127 हीरे रखे जाएंगे. इनका कुल वजन 300.13 कैरेट बताया जा रहा है. जिसकी कीमत 4 करोड़ 11 लाख रुपये बताई जा रही है. इसमें दूर-दूर से ई-पेपर के माध्यम से पोर्टल के माध्यम से व्यापारियों को सूचित कर दिया गया है. साथ ही, सूरत मुंबई और दिल्ली से व्यापारी इसमें शामिल होने के लिए आने वाले हैं.
पन्ना में फिर एक मजदूर की किस्मत उस समय चमक गई, जब उसे हीरा खदान में खुदाई के दौरान एक चमचमाता बेशकीमती हीरा मिल गया. हीरे को देखा तो शख्स की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. इस 5.87 कैरेट के नायाब हीरे की कीमत करीब 20 लाख रुपये आंकी जा रही है. इस हीरे को पन्ना के हीरा कार्यालय में जमा करवा दिया गया है, जिसे आगामी 4 दिसंबर को कलेक्ट्रेट में होने वाली नीलामी में बोली के लिए रखा जाएगा.
पन्ना को देश-दुनिया में उच्च क्वालिटी के हीरों के लिए जाना जाता है. यहां रातों-रात लोगों की किस्मत चमक उठती है. ऐसे ही एक मजदूर की किस्मत ने साथ दिया और वह रातों रात लखपति बन गया.
जिला मुख्यालय पन्ना से करीब 12 किलोमीटर दूर बिलखुरा के रहने वाले मजदूर सुरेंद्र सिंह गौड़ को कृष्णा कल्याणपुर पटी कि उथली हीरा खदान से खुदाई के दौरान 5.87 कैरेट का बेशकीमती चमचमाता हीरा मिला. इस हीरे की अनुमानित कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई जा रही है.
मजदूर ने ये हीरा कार्यालय में जमा कर दिया. इस हीरे को 4 दिसंबर से शुरू हो रही बोली में रखा जाएगा और जो राशि आएगी, उसमें से 11.50 प्रतिशत रॉयल्टी काटकर बाकी पैसा सुरेंद्र सिंह को दे दिया जाएगा.
हीरा पारखी अनुपम सिंह ने बताया कि ग्राम बिलखुरा के सुरेंद्र ने कृष्णा कल्याणपुर पटी में उथली हीरा खदान लगाई थी. खदान में खुदाई के दौरान 5.87 कैरेट का हीरा मिला. आगामी 4 दिसंबर को कुल 81 नग हीरे बोली के लिए रखे जाएंगे, जिनका वजन 241.71 कैरेट है. इनकी अनुमानित कीमत तीन करोड़ 80 लाख आंकी गई है.
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हीरा कार्यालय पहुंचकर जमा कराया हीरा
इसको देखते ही लड़के ने अपने पिता दिखाया। दोनों को हीरा देखते ही खुशी का ठिकाना न रहा। किसान स्वामीदीन पाल बेटे और अपने गांव के दोस्त के साथ हीरा कार्यालय पहुंच कर 32.80 कैरेट का हीरा जमा किया। जैसे लोगो को खबर लगी हीरा कार्यालय में मेला लग गया और लोग हीरे को देखने पहुंचे।
डेढ़ करोड़ से ज्यादा आंकी जा रही हीरे की कीमत
स्वामी दीन पाल ने हीरा कार्यालय में हीरा जमा करते हुए बताया कि आज मेरी किस्मत बदल गई है। अब मैं सीधे से घर की स्थितियां एवं अपनी आर्थिक स्थितियों में सुधार कर लूंगा। मैं नहीं सोचा था कि शायद मुझे भगवान इतना बड़ा हीरा देंगे। वहीं, हीरा अधिकारी रवि पटेल का कहना है कि यह हीरा अच्छी क्वालिटी का है। जो डेढ़ करोड़ की ऊपर की कीमत आंकी जा रही है। आने वाली नीलामी में इन बड़े हीरो को रखा जाएगा और इस किसान को एक बढ़िया राशि मिलेगी। दीपावली के पहले ही जमा हुए हीरो की नीलामी की जाएगी।
किसान के बेटे ने कहा कि यह हीरा मोटी चमड़ी का बताया जाता है। हीरा बनने के बाद अच्छा आकार एवं अपनी चमक बिखेर देगा। इससे हीरे की कीमत अत्यधिक हो जाएगी और यह जेम क्वालिटी का अच्छा हीरा है।
]]>हीरा कार्यालय पन्ना के हीरा पारखी अनुपम सिंह ने बताया कि किसान दिलीप मिस्त्री ने विगत पांच माह पूर्व फरवरी में अपनी निजी कृषि भूमि में हीरा खदान का पट्टा बनवाया था। उसकी इसी खदान से यह बेशकीमती हीरा निकला है जो उज्जवल किस्म (जेम क्वालिटी) का है। इस क्वालिटी का हीरा सबसे अच्छा माना जाता है। हीरा अधिकारी पन्ना रवि पटेल ने बताया कि हीरा धारक किसान दिलीप मिस्त्री ने आज जिला मुख्यालय में संयुक्त कलेक्ट्रेट स्थित हीरा कार्यालय में इस हीरा को जमा करा दिया है। आगामी होने वाली नीलामी में 16.10 कैरेट वजन वाले जेम क्वालिटी के इस हीरे को बिक्री के लिए रखा जायेगा।
पन्ना की धरती ने फिर बदली किसान की किस्मत
पन्ना की धरती कईयों की किस्मत बदल चुकी है। ऐसा ही वाकया आज फिर हुआ जिसमें किसान दिलीप मिस्त्री को अपने ही खेत (पन्ना के जरूआपुर) में हीरा की चाल मचाते समय हीरा मिला है। जब यह चमचमता हीरा दिखा तो आंखें चका-चौंध हो गईं और किसान की खुशी का ठिकाना न रहा और झूम कर नाच उठे। हीरा मिलने के बाद किसान दिलीप अपने परिवार सहित अपने पार्टनरों को फोन पर जानकारी देता है और जानकारी देने के बाद पार्टनरों के साथ 16 कैरेट 10 सेंट के हीरे को हीरा कार्यालय में जमा करता है। जहां उसकी कीमत 60 लाख से अधिक आंकी गई है। जमा होने के पश्चात हीरा अगली हीरा नीलामी में रखा जाएगा। बता दें कि वर्ष 2024 में अभी तक 11 हीरे जमा हुए हैं।
यह है पूरा मामला…
दिलीप मिस्त्री ने जनवरी 2024 माह में पन्ना के जरुआपुर खदान के नाम से हीरा कार्यालय से पट्ट बनावा कर हीरा खदान लगवाया था, जिसे आज यह 16.10 कैरेट का हीरा मिला है। पहले भी किसान पार्टनरों ने यहां खदान लगाकर बड़े हीरे जमा किये हैं, अब किसान बहुत खुश है। उसने कहा है कि वह हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बड़ा भंडारा करेगा और अपने जीवन-यापन की जरूरतों को पूरा करेगा।
हालांकि हीरे में उसके चार पार्टनर हैं और करीब 3 सालों से यह हीरा खदान में लगे हुए थे। हीरा पाकर उसके पार्टनर भी बहुत प्रसन्न हैं। दरअसल अब वह रातों-रात लखपति जो बन गए हैं। बीते एक पखवाड़े में पन्ना की उथली खदान से मिला यह दूसरा बड़ा हीरा है। जेम क्वालिटी वाले इस हीरे की अनुमानित कीमत 75 लाख रुपये से भी अधिक बताई जा रही है।
हीरा कार्यालय पन्ना के हीरा पारखी अनुपम सिंह ने बताया कि किसान दिलीप मिस्त्री ने विगत पांच माह पूर्व फरवरी में अपनी निजी कृषि भूमि में हीरा खदान का पट्टा बनवाया था। उसकी इसी खदान से यह बेशकीमती हीरा निकला है, जो उज्जवल किस्म (जेम क्वालिटी) का है। इस क्वालिटी का हीरा सबसे अच्छा माना जाता है। हीरा धारक किसान दिलीप मिस्त्री ने आज जिला मुख्यालय में संयुक्त कलेक्ट्रेट स्थित हीरा कार्यालय में इस हीरा को जमा करा दिया है। आगामी होने वाली नीलामी में 16.10 कैरेट वजन वाले जेम क्वालिटी के इस हीरे को बिक्री के लिए रखा जाएगा।
]]>मध्य प्रदेश के पन्ना में एक मजदूर को 19.22 कैरट का हीरा मिला है। इस हीरे की कीमत 80 लाख रुपए बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक मजदूर पन्ना के कृष्णा कल्याणपुर इलाके की एक खदान में काम करता है। मजदूर की पहतान राजू गौड़ के तौर पर हुई है जिसे खदान में काम करने वक्त हीरा मिला। पन्ना जिला कलेक्टर सुरेश कुमार ने पुष्टि की कि राजू गौड़ को मिला हीरा 19.22 कैरेट का है, जिसकी कीमत कम से कम 80 लाख रुपये है। हीरे कोनीलामी में खुली बोली के लिए रखा जाएगा। गौड़ पिछले दस सालों से कृष्णा कल्याणपुर में एक पट्टे वाली खदान में काम कर रहे हैं। राजू गौड़ को हीरा उस वक्त मिला जब वह रोज की तरह खदान में मिट्टी खोद रहे थे।
राजू गौड़ ने बताया कि उनको यह हीरा उस वक्त मिला जब वह रोज की तरह मिट्टी खोदकर एक तरफ कर रहे थे। हीरा मिलते ही उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने इस हीरे को सरकारी अधिकारियों के पास जमा कर दिया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने मिट्टी खोदते वक्त हीरे को देखा तो हैरान रह गए। उन्होंने कहा, अब मेरी सारी वित्तीय परेशानी जल्द ही दूर हो जाएंगी। राजू गौड़ पार्ट टाइम ड्राइवर भी हैं। उन्होंने कहा, मैंने कई लोगों का गरीबी से अमीरी तक का सफर देखा है। मैंने खदान लीज पर ली हुई थी, इस उम्मीद में कि मेरी भी किस्मत जल्द बदलेगी। यह खदान दो महीने पहले ही ली गई थी और सौभाग्य से मुझे हीरा मिल गया।
अन्ना डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीनिवास रिछारिया ने कहा कि जेम क्वालिटी वाले हीरे सबसे उन्नत किस्म के होते हैं। इसका वजन लगभग 3 लाख रुपये से 6 लाख रुपये प्रति कैरेट है इसलिए, नीलामी में इसकी कीमत 80 लाख रुपये से 1.25 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। यह इस साल का सबसे कीमती खनन हीरा है। पन्ना हीरा खनन के लिए लोकप्रिय है।
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