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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा और खतरनाक कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन भोपाल में इसका पालन आसान नहीं दिख रहा। निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में करीब 1.20 लाख आवारा कुत्ते हैं, लेकिन शहर में एक भी डॉग शेल्टर नहीं है। अगले कुछ महीनों में इसके बनने की उम्मीद भी नहीं है।
आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन पर निगम पिछले पांच साल में 8.5 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। फिर भी रोजाना डॉग बाइट के शिकार करीब 81 लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। 15 शिकायतें निगम में रोज आ रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। रात के समय कई इलाकों में बाइक सवारों और पैदल लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा है।
शेल्टर होम होगा आवारा श्वानों का ठिकाना
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई श्वान खतरनाक या रेबीज से संक्रमित पाया जाता है, तो उसे इंजेक्शन देकर समाप्त किया जा सकता है। साथ ही अदालत ने नवंबर 2025 में जारी पुनर्वास और नसबंदी संबंधी निर्देशों को प्रभावी बताते हुए कहा है कि इनका पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।
810 नो डॉग जोन बनने थे, पर यहां से एक भी कुत्ता नहीं हटा
पिछले साल भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और खेल परिसरों समेत 810 सार्वजनिक जगहों को ‘नो-डॉग जोन’ के रूप में चिह्नित किया था। दावा था कि यहां से कुत्तों को हटाया जाएगा, लेकिन शेल्टर होम नहीं होने के कारण अब तक एक भी कुत्ता नहीं हटाया गया।
शहर में सवा लाख से ज्यादा आवारा श्वान
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार भोपाल में आवारा श्वानों की संख्या सवा लाख से अधिक है। इसके मुकाबले हर साल केवल 20 से 25 हजार श्वानों की ही नसबंदी हो पाती है।
वर्ष 2024-25 में निगम ने 21,452 श्वानों की नसबंदी और 26,427 श्वानों का एंटी-रेबीज टीकाकरण किया, जिस पर करीब 2.35 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 23,363 श्वानों की नसबंदी और 29,766 श्वानों का टीकाकरण किया जा चुका है। इस पर 2.56 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए।
इसके बावजूद शहर में श्वानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिंसक और संक्रमित श्वानों पर नियंत्रण की कार्रवाई तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
इन इलाकों में ज्यादा खतरा अशोका गार्डन, अयोध्या बायपास, पिपलानी, कोहेफिजा, शाहजहांनाबाद, करोंद, मीनाल रेसीडेंसी, पटेल नगर, छोला, बैरागढ़, लालघाटी-हलालपुर रोड, रेलवे स्टेशन, आईएसबीटी और न्यू मार्केट के आसपास रात में कुत्तों के झुंड सबसे ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। कई जगह फुटपाथों पर कुत्तों के डेरों के कारण पैदल निकलना मुश्किल हो रहा है।
600 कुत्तों की क्षमता, डॉग सवा लाख जानकारी के अनुसार नगर निगम के पास फिलहाल अरवलिया, आदमपुर छावनी और कजलीखेड़ा में तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर हैं। तीनों की कुल क्षमता सिर्फ 600 कुत्तों की है। यहां रोज 20 से 25 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो रहा है। ये सेंटर केवल नसबंदी के लिए हैं, जबकि कोर्ट के निर्देश के मुताबिक स्थायी डॉग शेल्टर एक भी नहीं है।
अब तक इतनी नसबंदी पिछले 5 साल में नगर निगम ने नसबंदी और टीकाकरण पर 8.56 करोड़ रुपए खर्च किए। इस दौरान 81,207 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का दावा किया गया, लेकिन शहर में डॉग बाइट और आवारा कुत्तों की शिकायतें लगातार बढ़ती रहीं।
इंदौर में अप्रैल में हर दिन 146 केस इंदौर में अप्रैल के 24 दिनों (24 अप्रैल तक) में डॉग बाइट के 3493 मामले सामने आए हैं। यानी औसतन करीब 146 केस प्रतिदिन दर्ज किए गए हैं। जनवरी में 5198, मार्च में 5109 मामले आए थे। वहीं दिसंबर में 5471 केस थे।
शहर में तीन एबीसी सेंटर संचालित
फिलहाल भोपाल में कजलीखेड़ा, अरवलिया गोशाला के पीछे और आदमपुर कचरा खंती क्षेत्र में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक सेंटर की क्षमता करीब 150 श्वानों की है।
नगर निगम की टीमें रोजाना शहर के अलग-अलग इलाकों से 50 से 65 आवारा श्वानों को पकड़कर नसबंदी और उपचार के लिए इन केंद्रों तक पहुंचा रही हैं।
एमपी में डॉग बाइट के इतने आंकड़े पूरे मध्यप्रदेश में कुत्तों के काटने का खतरा बना रहता है। कई इलाके ऐसे हैं, जहां कुत्तों के डर से बच्चे घरों के बाहर खेलने तक नहीं जाते। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 2024 के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश में 10.09 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। इनमें से 6 लाख से अधिक बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में हैं।
9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 से जनवरी 2025 तक प्रदेश में करीब 3.39 लाख डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। इनमें 2022 में 66,018, 2023 में 1,13,499, 2024 में 1,42,948 और 2025 (जनवरी) में 16,710 मामले दर्ज हुए। इसी अवधि में कम से कम 9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई है।
देशभर के आंकड़ों से तुलना करें तो मध्यप्रदेश डॉग बाइट मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है, जहां हर साल मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। 2022 में जहां करीब 21.89 लाख मामले देशभर में थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 37.15 लाख से अधिक हो गई।
गर्मी में क्यों बढ़ते हैं कुत्तों के हमले पशु चिकित्सक एसआर नागर के मुताबिक गर्मी का मौसम कुत्तों के व्यवहार को आक्रामक बना देता है। कुत्तों के शरीर में स्वेट ग्लैंड (पसीना निकालने वाले छिद्र) नहीं होते, इसलिए वे इंसानों की तरह शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते।
इस वजह से उनमें चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ जाती है। अगर उन्हें खाने-पीने की कमी हो या किसी तरह का खतरा महसूस हो, तो वे तुरंत हमला कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल से जून के बीच तापमान बढ़ने के साथ डॉग बाइट के मामलों में और तेजी आ सकती है। इस दौरान कुत्तों के खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें पर्याप्त पानी देना और तेज धूप से बचाना जरूरी है, ताकि उनका व्यवहार शांत बना रहे।
]]>ये मामला खागा क्षेत्र के कैनाल स्थित एक मैरिज हॉल की है। जानकारी के मुताबिक कल रात 19 फरवरी इस मैरिज हॉल में शादी थी। रात करीब तीन बजे वरमाला के बाद वैवाहिक रस्मों की तैयारी चल रही थी। चर्चा रही कि इसी दौरान कन्या पक्ष के साथ आया पालतू कुत्ता मंडप के पास पहुंच गया। उसे हटाने को लेकर शुरू हुई कहासुनी ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया। आरोप प्रत्यारोप के बीच दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। लोगों को कमरों में बंद करना पड़ा। इस लेकर मौके पर अफरा तफरी मच गई। दोनों तरफ से हुई मारपीट में महिला समेत चार लोग घायल हो गए। वहीं, महिलाएं बचाव के लिए चिल्लाती रहीं।
मैरिज हॉल में मारपीट की सूचना पर पहुंची पुलिस ने हालात काबू में किए और घायलों को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया। जहां हालत गंभीर देख प्राथमिक उपचार के बाद सभी को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। इस मामले में कोतवाली प्रभारी रमेश पटेल ने बताया कि सूचना पर पुलिस गई थी। कुत्ते को लेकर वर एवं वधू पक्ष में झगड़ा और मारपीट हो गया था। बाद में दोनों ने आपसी समझौता करते हुए शादी तोड़ने का फैसला किया है।
लेनदेन कर तोड़ दी शादी
गुरुवार को मारपीट के बाद दोनों पक्षों ने आपसी समझौते के अंतर्गत शादी न करने का फैसला किया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पक्षों से मिले उपहार एवं आभूषणों को लौटा दिया। घटना के बाद चर्चा का विषय यही रहा कि जहां विवाह जैसे पवित्र संस्कार को केंद्र में होना चाहिए था, वहां एक कुत्ते की एंट्री ने पूरा माहौल बिगाड़ दिया।
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बागमुगलिया कटारा हिल्स स्थित पेबल बे फेस 1 में आवारा कुत्तों का आतंक एक बार फिर सामने आया है। ताज़ा घटना में एक बच्चे को आवारा कुत्ते ने काट लिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, निगम की टीम कई बार इन कुत्तों को पकड़ने आती है, लेकिन वहां मौजूद कुछ डॉग लवर्स इन कुत्तों को पकड़ने नहीं देते।
निवासियों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में जिन लोगों ने कुत्तों को पकड़ने से रोका, उन पर भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
]]>कर्नाटक के राजधानी बेंगलुरु के आवारा कुत्तों के लिए सरकार ने नई पहल की शुरुआत की है. बेंगलुरु की बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) ने ‘कुक्किर तिहार’ नाम के योजना के तहत शहर के 5,000 आवारा कुत्तों के लिए पोषण युक्त भोजन प्रदान किया जाएगा. इसके तहत रोजाना स्ट्रीट डॉग्स को 367 ग्राम चिकन राइस परोसा जाएगा.
इस योजना के तहत हर कुत्ते पर प्रतिदिन 22 रुपये खर्च आएंगे और सालाना खर्च लगभग 2.88 करोड़ रुपये होगा. शुरुआत में इसे ‘कुक्किर तिहार’ नाम से पेश किया गया था, जो एक जनभागीदारी अभियान है. इसका उद्देश्य सिर्फ कुत्तों को खाना देना नहीं, बल्कि लोगों को भी यह समझाना है कि आवारा पशुओं की देखभाल सामूहिक जिम्मेदारी है.
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने जताई आपत्ति
बेंगलुरु में स्ट्रीट डॉग्स को चिकन राइस खिलाने की योजना पर तमिलनाडु से कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा, 'क्या यह सच है? कुत्तों की सड़कों पर कोई जगह नहीं होनी चाहिए. उन्हें शेल्टर होम में स्थानांतरित किया जाना चाहिए, जहां उनका टीकाकरण और नसबंदी हो सके. उन्हें सड़कों पर घूमने की आज़ादी देकर खाना खिलाना एक गंभीर स्वास्थ्य और सुरक्षा खतरा है'.
28 मार्च 2025 को कार्ति चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की थी, जिसमें उन्होंने देशभर में आवारा कुत्तों से जुड़ी बढ़ती स्वास्थ्य और सुरक्षा समस्याओं पर चिंता जताई.
कार्ति चिदंबरम ने साथ ही में एक्स पर लिखा, भारत में करीब 6.2 करोड़ आवारा कुत्ते हैं, जो दुनिया में सबसे बड़ी आबादी में से एक है.
इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भारत आज भी रेबीज से प्रभावित देशों में शामिल है, और दुनिया में होने वाली रेबीज से मौतों में 36 फीसदी सिर्फ भारत में होती हैं.
उन्होंने ये भी कहा कि भले ही 2023 में पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम लागू किए गए हों, लेकिन उनका प्रभावी इम्प्लीमेंटेशन नहीं हो पाया.
राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाने का सुझाव
कार्ति चिदंबरम ने इस संकट के लिए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाने का प्रस्ताव रखा, जो व्यापक, मानवीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस समस्या का हल तलाशे और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर काम करे.
उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि देशभर में स्थायी शेल्टर हाउस और एक दीर्घकालिक रणनीति बनाई जानी चाहिए, ताकि आवारा पशुओं से जुड़ी समस्या को स्थायी रूप से सुलझाया जा सके.
BBMP ने आमंत्रित किए टेंडर, 8 जोन में रोजाना कुत्तों को खाना खिलाने की योजना
BBMP के पशुपालन विभाग ने एक नई पहल के तहत आठ जोन में आवारा कुत्तों को रोज़ाना भोजन उपलब्ध कराने के लिए टेंडर जारी किया है.
प्रस्ताव के अनुसार, हर ज़ोन में 500 कुत्तों को खाना खिलाने की योजना है, जिनमें ईस्ट, वेस्ट, साउथ, आरआर नगर, दसरहल्ली, बोम्मनहल्ली, येलहंका और महादेवपुरा शामिल हैं. पहले चरण में कुल 4,000 कुत्तों को प्रतिदिन खाना देने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि आखिरी लक्ष्य 5,000 कुत्तों तक पहुंचना है.
FSSAI-पंजीकृत कैटरर्स ही कर सकेंगे निविदा में भाग
इस योजना के तहत केवल वे ही कैटरिंग सर्विस प्रोवाइडर्स निविदा में भाग ले सकते हैं, जो भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से पंजीकृत हैं.
अनुबंध शुरू में एक वर्ष के लिए वैध होगा, और प्रदर्शन के आधार पर इसे BBMP मुख्य आयुक्त की मंजूरी से एक साल और बढ़ाया जा सकता है.
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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपने टाइगरों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। हाल ही में यहां सोन कुत्तों का एक झुंड देखा गया है। ये कुत्ते बहुत ही अजब-गजब होते हैं और दूसरे जंगली जानवर भी इनसे डरते हैं। ये कुत्ते शिकार को जिंदा ही नोच-नोच कर खा जाते हैं। इसी खूंखार व्यवहार के कारण इनसे आमने सामने भिड़ने की कोई सोचता नहीं है।
दुर्लभ प्रजाति में आते हैं सोन कुत्ते
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के साथ साथ कई दुर्लभ जीवों का घर माना जाता है। इसी के चलते हाल ही में यहां दुर्लभ सोन कुत्तों का झुंड देखा गया। ये झुंड बाकी जंगली जानवरों के लिए एक सीधा संदेश देते हुए दाखिल हुआ है कि हर इलाके में शेर से बड़ा बब्बर मिल सकता है। सोन कुत्ते की प्रजाति को अंग्रेजी में ढोले कहते हैं। इनका वैज्ञानिक नाम क्युन अल्पिनस है।
गश्त लगाते दिखा पूरा परिवार
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारी बताते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क के पतौर जोन की पनपथा बीट में कर्मचारियों को गश्त लगाते हुए सोन डॉग्स का एक ग्रुप मिला। पूरा परिवार लेक के किनारे पानी पी रहा था। उन्होंने आगे बताया कि एक्टिविटी के समय ये डॉग्स भोंकने की जगह सीटी की तरह आवाज निकालकर एक दूसरे से संचार करते हैं। यह अपने आप में एक गजब की चीज है।
बाघ से टक्कर लेने में नहीं डरते
बांधवगढ़ के उप संचालक ने बताया कि ये दुर्लभ जानवर अपने शिकार करने के तरीके के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि बाघ या चीता जैसे मांसाहारी जानवर शिकार को मारने के बाद ही उसे खाना शुरू करते हैं। लेकिन सोन कुत्ते शिकार के जिंदा रहते ही उसे खाने लगते हैं। यहां तक की बाघ के बच्चों को भी शिकार करने से पहले ये सोचते नहीं है।
]]>घटनाक्रम के मुताबिक शहर के पुलिस लाइन 16 बीघा इलाके में बुधवार की शाम एक श्वान का बच्चा बोरवेल में गिर पड़ा। बच्चा बोरवेल के पाइप के बगल से मिट्टी धंसकने से खाली हुई जगह में गिरा है। पहले लोगों ने प्रयास किया, लेकिन वह निकला नहीं।
रात नौ बजे नगर निगम के कर्मचारी लोडर मशीन लेकर पहुंचे थे। तब से रात तक मशीन से खुदाई जारी रही। श्वान का बच्चा लगभग 30 से 40 फीट गहराई में बताया जा रहा है। लेकिन रात में बच्चे की आवाज आना बंद हो गया। इसके बाद रेस्क्यू आपरेशन बंद कर दिया गया।
सुबह आवाज आई तो शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
गुरुवार सुबह जब बोरवेल से फिर कुत्ते के बच्चे की आवाज आना शुरू हुआ तो पुलिस लाइन के आरआई के नेतृत्व में फिर से कुत्ते के बच्चे को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। मौके पर लगातार खुदाई की जा रही है। जिससे बच्चे को निकाला जा सके।
मानवीयता की झलक दिखी पुलिस में
पूरा ऑपरेशन पुलिस बल निगम के सहयोग से चला रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन को देखने के लिए शहर के लोग भी एकत्रित हो गए हैं। सभी को उम्मीद है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद कुत्ते के बच्चे को बचा लिया जाएगा। चूंकि इस तरह का किसी पशु को बचाने के लिए रेस्क्यू आपरेशन चलाया जा रहा है। इसलिए भी शहर भर में चर्चा का विषय बना है। पुलिस के अफसरों का कहना है कि सब कुछ ठीक रहा तो कुत्ते के बच्चे को सकुशल बचा लिया जाएगा!
]]>बेटमा थाना क्षेत्र के काली बिल्लौद में रहने वाले श्रवण कुमार ने बताया कि सोमवार शाम को उनकी 10 वर्षीय भतीजी का अपहरण करने की कोशिश की गई। सोमवार शाम 7 बजे करीब पिताजी घर से कुछ ही दूरी पर पान की दुकान पर थे। भाभी छत पर थी। घर के पास में ही बड़ा खेत हैं। वहां पर एक व्यक्ति खड़ा था और दूसरा व्यक्ति मेन गेट से आकर पोर्च में आया और उसने घर का दरवाजा खटखटाया।
बालिका ने दरवाजा खोला और बाहर देखा तो कोई नहीं था। वह घर के बाहर आकर देखने लगी, तभी बाहर छिपा हुआ बदमाश आया और उसने बालिका का मुंह दबाकर उसे उठाया और दीवार की दूसरी ओर खेत में खड़े बदमाश की तरफ फेंक दिया। इसके बाद वह भी दीवार कूद कर दूसरी ओर चला गया। दोनों बच्ची को बाइक पर लेकर भागने वाले थे। तभी क्षेत्र के कुत्ते भौंकने लगे और उन पर हमला कर दिया। इससे वह घबराकर गिर गए। तभी बच्ची उनकी पकड़ से छूट गई।
बच्ची वहां से भागी और पास में बने शिव मंदिर में चली गई। तब तक बदमाश वहां से भाग गए। कुत्तों के भौंकने की आवाज से घर वालों को पता चला और घर वालों ने बच्ची को ढूंढना शुरू किया। बच्ची मंदिर में मिली तो उसने पूरा घटनाक्रम बताया। इसकी जानकारी स्वजनों ने तुरंत बेटमा थाने को दी। थाने से देर रात में दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और जानकारी ली।
शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है
श्रवण कुमार निषाद ने बताया कि थाने पर मंगलवार सुबह शिकायती आवेदन दिया था। परंतु कोई प्रतिसाद नहीं मिला। उस पर कोई सील साइन भी नहीं लगाई गई। स्वजनों ने पास की कॉलोनी में लगे सीसीटीवी देखने का प्रयास किया।
इसके बाद मंगलवार देर शाम स्वजनों ने फिर से थाने में आवेदन दिया। वहीं इस मामले में देपालपुर एसडीओपी राहुल खरे ने बताया कि स्वजनों द्वारा आवेदन दिया गया है। उसके आधार पर कार्यवाही की जा रही है। हालांकि सूचना मिलने पर जरूरी जांच शुरू कर दी गई है।
]]>खरगोन जिले में एक निर्माण स्थल पर खेल रही दो साल की बच्ची को आवारा कुत्तों ने नोच-नोच कर मार डाला. आंखों के सामने से ही बच्ची मौत के बाद माता पिता बुरी तरह गमगीन हो उठे.
कोतवाली थाना प्रभारी बीएल मंडलोई ने बताया कि बच्ची के पिता संजय जिले के उपड़ी गांव के निवासी हैं और मंगरुल रोड पर एक निर्माणाधीन मकान की चौकीदार का काम करते थे और अपने परिवार के साथ वहीं रहते थे. सोमवार रात जब उनकी बेटी खेलते हुए सड़क पर निकली तो पिता खाना बना रहे थे और पत्नी नहा रही थी.
पुलिस अधिकारी ने बताया कि कुछ आवारा कुत्तों ने बच्ची पर हमला कर दिया और उसे 100-150 मीटर तक घसीटते हुए ले गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई. चीखने चिल्लाने की आवाज सुनकर मदद के लिए भागे दंपती बच्ची को जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन अमर सिंह चौहान ने बताया कि कुत्ते के काटने से बच्ची के सीने और कमर पर गंभीर चोटें आई थीं, जिससे उसकी मौत हो गई. मृतक बच्ची का आज पोस्टमार्टम किया जाएगा.
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