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शराब व डीएमएफ घोटाले और अन्य बड़े भ्रष्टाचार मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने सामूहिक कार्रवाई की है। जांच एजेंसियों ने घोटाले के मुख्य सूत्रधार अनवर ढेबर और रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा के संगठित सिंडिकेट के खिलाफ शिकंजा कसते हुए अब तक 1,400 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्तियां कुर्क की हैं।
जांच एजेंसी ने अकेले शराब घोटाले में कुल 85 आरोपितों को नामजद किया है। इस सिंडिकेट ने सरकारी व्यवस्था को ढाल बनाकर शराब से ही 3,200 करोड़ से ज्यादा का अवैध कालाधन बटोरा था। जबकि कुल चार बड़े घोटाले में करीब 4,000 करोड़ रुपये की कमाई की है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अब तक दोनों आरोपियों और उनसे जुड़े लोगों की 1400 करोड़ रुपए से अधिक की चल-अचल संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। इसी के साथ जांच का भी दायिरा बढ़ा दिया गया है।
ईडी की जांच में दावा किया गया है कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान सक्रिय रहे इस कथित सिंडिकेट ने चार बड़े घोटालों के जरिए करीब 4,000 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की। इनमें सबसे बड़ा शराब घोटाला बताया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से अवैध रूप से कच्ची शराब बेचकर 3,200 करोड़ रुपए से अधिक का काला धन अर्जित किया गया। इस मामले में ईडी अब तक 85 लोगों को आरोपी बना चुकी है।
ढेबर–टुटेजा घोटालों के मास्टरमाइंड
जांच एजेंसियों के मुताबिक अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर इस पूरे नेटवर्क के नीति-निर्धारक और प्रमुख संचालक थे। डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) फंड घोटाले में पद का दुरुपयोग कर चाहेते ठेकेदारों को काम दिलाने और 25 से 40 प्रतिशत तक कमीशन लेने के आरोप लगाए गए हैं।
ईडी के मुताबिक, गोवा का यह होटल शराब घोटाले की 110 करोड़ रुपये की काली कमाई से खरीदा गया था। सिंडिकेट से जुड़ी तीन सप्लायर कंपनियों,ओम साई बेवरेजेस, दिशिता वेंचर्स और नेक्सजेन पावर इंजीटेक के 51 करोड़ रुपये के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड फ्रीज किए गए हैं। इन कंपनियों से जबरन 50-60 प्रतिशत मुनाफा वसूला जाता था। केवल शराब घोटाले से ही 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की गई। यह खेल नकली होलोग्राम वाली अवैध देसी शराब बेचने, डिस्टिलर्स से प्रति पेटी फिक्स कमीशन वसूलने और मनमाने लाइसेंस बांटकर खेला गया।
उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय ने रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में मामले की छठी पूरक चार्जशीट 1 जून 2026 को दाखिल की है। इस छठी पूरक चार्जशीट में ईडी ने चार नए लोगों को आरोपित किया है, जिनमें व्यवसायी विजय भाटिया , टी. भुवनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर शामिल हैं। चार नए नामों के जुड़ने के बाद इस पूरे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कुल आरोपितों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है।
जांच में कई अनियमितताएं उजागर
इसके अलावा नकली होलोग्राम घोटाले में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर अवैध टेंडर दिए गए, जबकि प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए 183 करोड़ रुपए के ओवरटाइम भुगतान में गड़बड़ी सामने आई। जांच एजेंसियों ने कस्टम मिलिंग मामले में भी बड़ी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया है।
इतने करोड़ की ये संपत्ति जब्त
बेनाम संपत्ति: 1110 करोड़
अन्य संपत्ति(प्लॉट, बेनामी जमीनें, शेल कंपनियां,होटल): 116 करोड़
बैंक खातों, शेयरों, म्यूचुअल फंड निवेश, नकदी, फिक्स्ड डिपॉजिट: 28 करोड़
अचल संपत्ति: 15.82 करोड़ रुपए
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच तेज
ईडी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी है।
अब विशेष अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की सुनवाई तेज होने की संभावना है। जांच एजेंसियां इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
]]>जांच एजेंसी ने अकेले शराब घोटाले में कुल 85 आरोपितों को नामजद किया है। इस सिंडिकेट ने सरकारी व्यवस्था को ढाल बनाकर शराब से ही 3,200 करोड़ से ज्यादा का अवैध कालाधन बटोरा था। जबकि कुल चार बड़े घोटाले में करीब 4,000 करोड़ रुपये की कमाई की है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अब तक दोनों आरोपियों और उनसे जुड़े लोगों की 1400 करोड़ रुपए से अधिक की चल-अचल संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। इसी के साथ जांच का भी दायिरा बढ़ा दिया गया है।
ईडी की जांच में दावा किया गया है कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान सक्रिय रहे इस कथित सिंडिकेट ने चार बड़े घोटालों के जरिए करीब 4,000 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की। इनमें सबसे बड़ा शराब घोटाला बताया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से अवैध रूप से कच्ची शराब बेचकर 3,200 करोड़ रुपए से अधिक का काला धन अर्जित किया गया। इस मामले में ईडी अब तक 85 लोगों को आरोपी बना चुकी है।
ढेबर–टुटेजा घोटालों के मास्टरमाइंड
जांच एजेंसियों के मुताबिक अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर इस पूरे नेटवर्क के नीति-निर्धारक और प्रमुख संचालक थे। डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) फंड घोटाले में पद का दुरुपयोग कर चाहेते ठेकेदारों को काम दिलाने और 25 से 40 प्रतिशत तक कमीशन लेने के आरोप लगाए गए हैं।
ईडी के मुताबिक, गोवा का यह होटल शराब घोटाले की 110 करोड़ रुपये की काली कमाई से खरीदा गया था। सिंडिकेट से जुड़ी तीन सप्लायर कंपनियों,ओम साई बेवरेजेस, दिशिता वेंचर्स और नेक्सजेन पावर इंजीटेक के 51 करोड़ रुपये के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड फ्रीज किए गए हैं। इन कंपनियों से जबरन 50-60 प्रतिशत मुनाफा वसूला जाता था। केवल शराब घोटाले से ही 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की गई। यह खेल नकली होलोग्राम वाली अवैध देसी शराब बेचने, डिस्टिलर्स से प्रति पेटी फिक्स कमीशन वसूलने और मनमाने लाइसेंस बांटकर खेला गया।
उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय ने रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में मामले की छठी पूरक चार्जशीट 1 जून 2026 को दाखिल की है। इस छठी पूरक चार्जशीट में ईडी ने चार नए लोगों को आरोपित किया है, जिनमें व्यवसायी विजय भाटिया , टी. भुवनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर शामिल हैं। चार नए नामों के जुड़ने के बाद इस पूरे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कुल आरोपितों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है।
जांच में कई अनियमितताएं उजागर
इसके अलावा नकली होलोग्राम घोटाले में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर अवैध टेंडर दिए गए, जबकि प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए 183 करोड़ रुपए के ओवरटाइम भुगतान में गड़बड़ी सामने आई। जांच एजेंसियों ने कस्टम मिलिंग मामले में भी बड़ी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया है।
इतने करोड़ की ये संपत्ति जब्त
बेनाम संपत्ति: 1110 करोड़
अन्य संपत्ति(प्लॉट, बेनामी जमीनें, शेल कंपनियां,होटल): 116 करोड़
बैंक खातों, शेयरों, म्यूचुअल फंड निवेश, नकदी, फिक्स्ड डिपॉजिट: 28 करोड़
अचल संपत्ति: 15.82 करोड़ रुपए
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच तेज
ईडी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी है।
अब विशेष अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की सुनवाई तेज होने की संभावना है। जांच एजेंसियां इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
]]>विपक्ष बार-बार शोर मचाता है कि ईडी को सरकार ने विपक्षी नेताओं के पीछे छोड़ रखा है. इसके बावजूद सरकार ने ऐलान कर दिया है कि जो घालमेल करेगा, वो नपेगा. सरकार ने ईडी की ताकत अचानक बढ़ा दी है. दरअसल सरकार ने ईडी में बड़े स्तर पर कैडर रिस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दे दी है.इसका सीधा मतलब है कि बड़ी संख्या में ईडी में अफसरों की तैनाती की जाएगी. यह बढ़ोतरी कोई छोटी मोटी नहीं है, बल्कि दोगुनी तीन गुनी हो गई. अब ईडी में बड़े अफसरों से लेकर जमीन पर जाकर रेड मारने वाले अधिकारियों तक, सबकी फौज बड़ी होने जा रही है।
नई व्यवस्था के तहत सबसे ज्यादा बढ़ोतरी डिप्टी डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर, एनफोर्समेंट ऑफिसर और असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पदों में की गई है. सरकार का कहना है कि बढ़ते मामलों और जांच के दायरे को देखते हुए ED की क्षमता मजबूत करने के लिए यह फैसला लिया गया है. यह आदेश सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया गया है और इसका खर्च ED के मौजूदा बजट से ही उठाया जाएगा।
क्या होने जा रहा?
एडिशनल डायरेक्टर के पद 10 से बढ़ाकर 24 किए गए हैं।
जॉइंट डायरेक्टर के पद 28 से बढ़ाकर 49 किए गए हैं.
डिप्टी डायरेक्टर के पद 148 से बढ़ाकर 267 कर दिए गए हैं.
असिस्टेंट डायरेक्टर के पद 255 से बढ़ाकर 531 किए गए हैं.
एनफोर्समेंट ऑफिसर के पद 355 से बढ़ाकर 606 किए गए हैं.
असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पद 425 से बढ़ाकर 803 कर दिए गए हैं.
इसके अलावा ED की लीगल टीम में भी भारी मैनपावर दिया गया है. एडजुडिकेशन, सिस्टम, सिक्योरिटी और सपोर्ट स्टाफ कैडर में भी कई नए पद मंजूर किए गए हैं.
ग्राउंड फोर्स हुई डबल से भी ज्यादा!
इस आंकड़े को ध्यान से देखिए. सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कहां हुई है? डिप्टी डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर, एनफोर्समेंट ऑफिसर और असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पदों पर. ये वो लोग होते हैं जो सिर्फ फाइलों में साइन नहीं करते, बल्कि कोर्ट-कचहरी की दौड़ भाग संभालते हैं, मनी लॉन्ड्रिंग के सुराग ढूंढते हैं, रेड मारने जाते हैं और आरोपियों से पूछताछ की कमान संभालते हैं।
इसके अलावा, बात सिर्फ अधिकारियों तक सीमित नहीं है। सरकार ने ईडी के लीगल, एडजुडिकेशन, सिस्टम, सिक्योरिटी और सपोर्ट स्टाफ कैडर कैडर में भी कई नए पद मंजूर किए हैं. यानी कि अब अगर ईडी किसी पर हाथ डालेगी, तो उसके पास कोर्ट में केस लड़ने के लिए वकीलों की फौज भी बड़ी होगी और डेटा खंगालने के लिए डिजिटल सिस्टम के उस्ताद भी ज्यादा होंगे।
लेकिन अचानक इतनी ताकत क्यों?
सरकार का इसके पीछे सिंपल तर्क है। देश में आर्थिक अपराधों का ग्राफ और डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए होने वाले हेर-फेर के मामले तेजी से बढ़े हैं. पीएमएलए और फेमा के तहत दर्ज होने वाले मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है. सरकार का कहना है कि बढ़ते मामलों और जांच के दायरे को देखते हुए ईडी की कार्यक्षमता को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया था. अब जब मैनपावर बढ़ गई है, तो मनी लॉन्ड्रिंग और फेमा से जुड़े मामलों की जांच में और तेजी आएगी।
टाइमिंग बेहद खास
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईडी को लेकर देश में एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है. विपक्ष के तमाम नेता चाहे वो कांग्रेस के हों, आप के हों, टीएमसी के हों या आरजेडी के हमेशा यह आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से कर रही है। चुन-चुनकर विपक्षी नेताओं के घरों पर रेड मारी जाती है, उन्हें परेशान किया जाता है, ताकि विपक्ष को कमजोर किया जा सके. इन आरोपों की तपिश के बीच सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि एजेंसियां कमजोर नहीं होंगी, बल्कि उन्हें और धारदार बनाया जाएगा. राजनीति अपनी जगह चलती रहेगी, लेकिन आर्थिक अपराधों पर कार्रवाई अब और तेज और आक्रामक होगी।
शरिया कानून के मुताबिक ब्याज (रिबा) कमाना हराम होता है और कई मुसलमान इस वजह से अपना पैसा बैंकों में भी जमा नहीं कराते हैं। ऐसे ही मुसलमानों को टारगेट करके एक महिला ने 6 हजार करोड़ रुपये जुटा लिए और 3000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। लालच दिया जाता था कि शरिया के नियमों का पालन करते हुए निवेश पर सालाना 36 फीसदी का मुनाफा मिलेगा। शुरुआत में कुछ लोगों को इसी तरह मोटा मुनाफा देकर विश्वास जीता गया और फिर हजारों करोड़ रुपये डकार लिए गए।
पीटीआई के मुताबिक, ईडी ने कहा कि शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य पर 36 प्रतिशत से अधिक वार्षिक मुनाफे का वादा करके लोगों से 5,978 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाने का आरोप है। हालांकि, वे मूल राशि भी वापस करने में विफल रहे जिससे 1.72 लाख से अधिक निवेशकों से 3,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में ईडी की अब तक की जांच और अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि पिछले सप्ताह गुरुग्राम से गिरफ्तार की गई नौहेरा शेख ने शरिया कानून के मुताबिक मुसलमानों को निवेश और भारी मुनाफे का लालच दिया था और हजारों करोड़ रुपये जुटा लिए।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से बेल खारिज किए जाने और सरेंडर के आदेश के बाद नौहेरा एक महीने से अधिक समय से फरार चल रही थी। महाठगी की आरोपी शेख ने अदालतों और जांच एजेंसियों को कई बार गच्चा दिया था। उसने सुप्रीम कोर्ट को यह कहकर भी भ्रमिक करने की कोशिश की कि उसने हैदराबाद पुलिस के सामने सरेंडर किया था, लेकिन उसे हिरासत में लेने से इनकार कर दिया गया।
नौहेरा शेख की 400 करोड़ की संपत्ति जब्त
नौहेरा शेख के पास मौजूद 400 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है और पीड़ितों को इसे लौटाने की प्रक्रिया चल रही है। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, नौहेरा शेख, उसके परिजनों और अन्य ने लाखों लोगों को अपनी पोंजी स्कीम में निवेश के लिए लालच दिया और उनकी कमाई हड़प ली। शुरुआत में निवेश करने वालों को भारी-भरकम मुनाफा भी दिया गया, लेकिन बाद में करीब 1.7 लाख जमाकर्ताओं ने अपनी गाढ़ी कमाई शरिया वाले निवेश के नाम पर गंवा दी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच का आदेश दिया था और ईडी से कहा था कि जब्त संपत्तियों की नीलामी करके पीड़ितों को रकम लौटाई जाए। आरोपी और उसके सहयोगियों ने कई शपथ पत्र दायर करके संपत्तियों की बिक्री में देरी की भरसक कोशिश की। उसके एक सहयोगी ने अपना नाम 'कल्याण बनर्जी' बताते हुए खुद को पीएमओ का अधिकारी बताने की कोशिश की। उसे जनवरी में गिरफ्तार कर लिया गया था।
हीरा ग्रुप के जरिए की गई ठगी
2024 में जब एजेंसी ने नौहेरा के घर पर छापेमारी की तो 12 लग्जरी गाड़ियां बरामद की गईं, जिनमें बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज बेंज जैसी महंगी कारें शामिल थीं। 92 लाख रुपये कैश भी बरामद किया गया था। नौहेरा शेख ने 'हीरा ग्रुप' नाम से कंपनी बनाई थी, जिसके जरिए इतनी बड़ी रकम की ठगी की गई। शेख ने हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के जरिए लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया। उसने खासतौर पर मुसलमानों को टारगेट बनाया जो शरिया के कानून के मुताबिक निवेश करना चाहते थे। ईडी के मुताबिक उसने 36 फीसदी सालाना मुनाफे का लालच दिया। लेकिन बाद में लोगों को मूलधन भी वापस नहीं कर पाई।
गुरुग्राम में पहचान बदल रह रही थी नौहेरा
गुरुग्राम में पकड़ी गई नौहेरा शेख यहां अपनी पहचान बदलकर रह रही थी। ईडी और हरियाणा पुलिस के जॉइंट ऑपरेशन के दौरान पकड़ी गई नौहेरा शेख सेक्टर 45 में रह रही थी। फर्जी आधार के जरिए उसने अपना नाम शेख खामर जहां बताया था।
पश्चिम बंगाल में कथित रंगदारी रैकेट की जांच को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह बड़े पैमाने पर छापेमारी की है. मुर्शिदाबाद ज़िले के कांडी शहर में कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DC) और कालीघाट पुलिस स्टेशन के पूर्व इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IC) शांतनु सिन्हा विश्वास के आलीशान पैतृक आवास पर ईडी की टीम ने ताला तोड़कर धावा बोला. यह घर कांडी नगर पालिका के वार्ड नंबर 8 में स्थित है और पिछले एक हफ्ते से पूरी तरह बंद पड़ा था।
शांतनु सिन्हा विश्वास कोलकाता के कालीघाट पुलिस स्टेशन के पूर्व इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IC) और डिप्टी कमिश्नर (DC) रह चुके हैं और फिलहाल ज़मीन से जुड़े एक वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में ED की हिरासत में हैं।
शांतनु सिन्हा विश्वास का कांडी में एक आलीशान घर है जो कांडी नगर पालिका के वार्ड नंबर 8 में स्थित है. यह घर पिछले सात दिनों से बंद पड़ा है. शांतनु सिन्हा विश्वास की बहन, गौरी सिन्हा विश्वास, फिलहाल कांडी नगर पालिका की उपाध्यक्ष हैं. छापेमारी के दौरान वह भी घर पर मौजूद नहीं थी. चूंकि घर बंद था, इसलिए ED के अधिकारियों ने घर के बाहर से ही अपनी जांच-पड़ताल शुरू कर दी और स्थानीय लोगों से बातचीत की और इसके बाद ताला तोड़कर घर में घुसे।
सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित तौर पर ‘सोना पप्पू’ नाम से जुड़े उगाही नेटवर्क और शांतनु सिन्हा बिस्वास से संबंधित जांच के तहत की जा रही है. जानकारी के अनुसार, ED की टीमों ने सुबह करीब 6 बजे एक साथ कई ठिकानों पर दबिश दी।
कोलकाता के रॉय स्ट्रीट स्थित एक होटल और एक कारोबारी के घर पर छापेमारी की गई. इसके अलावा कोलकाता पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के आवास पर भी जांच एजेंसी पहुंची. एजेंसी कथित उगाही, अवैध लेनदेन और पुलिस अधिकारियों से जुड़े संभावित आर्थिक नेटवर्क की जांच कर रही है।
हालांकि ED की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन शुरुआती जानकारी के मुताबिक कार्रवाई का फोकस कथित जबरन वसूली गिरोह और उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन पर है. जांच एजेंसी दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत जुटाने में लगी हुई है।
बंगाल में एक साथ कई जगहों पर हुई इस कार्रवाई से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
]]>ये पूरा मामला 'महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड' के खिलाफ दर्ज वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है. जांच एजेंसी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ये छापेमारी मुख्य रूप से दीपक सिंगला, महेश सिंगला, अमरीक गिल और कुछ अन्य संदिग्धों से जुड़े परिसरों और ठिकानों पर की जा रही है।
ईडी की टीमें सुबह-सुबह ही सभी संदिग्धों के घरों और व्यावसायिक ठिकानों पर पहुंच गईं. जांच के दौरान कई अहम दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है, ताकि 155 करोड़ रुपये के इस कथित बैंक घोटाले की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा सके।
संजीव अरोड़ा से जुड़े मामले के तार
दीपक सिंगला का नाम आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में शुमार किया जाता है. बताया जा रहा है कि इन संदिग्धों के तार पंजाब सरकार के गिरफ्तार मंत्री संजीव अरोड़ा से भी जुड़े हुए हैं. संजीव अरोड़ा को पहले ही भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों के एक मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
अब इस नए बैंक फ्रॉड केस में भी संजीव अरोड़ा, उनके करीबियों और पार्टी सहयोगियों का नाम आने से आम आदमी पार्टी की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।
बता दें कि महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एक बैंक फ्रॉड केस दर्ज है. कंपनी पर कई बैंकों से लगभग 155 करोड़ रुपये का लोन लेकर उसमें हेराफेरी करने और बैंकों को बड़ा नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
]]>बंगाल में चुनाव से पहले ईडी का ताबड़तोड़ ऐक्शन जारी है। कोयला घोटाला मामले में ईडी की टीम कोलकाता डीसीपी शांतनु सिन्हा विश्वा के ठिकानों पर छापा मारने पहुंची है। जानकारी के मुताबिक ईडी की टीम शांतनु विश्वास के अलावा बलयुगुंगे ऐंड सन एटरप्राइजेज के मैनेजिंग डायरेक्टर जय कामदार के घर पर भी छापेमारी कर रही है। जानकारी के मुताबिक शांतनु विश्वास के दो ठिकानों और जय कामदार के एक ठिकाने पर छापेमारी जारी है।
रिपोर्ट के मुताबिक शांतनु विश्वास के बेहाला स्थित आवास पर ताला लगा हुआ है और गेट के अंदर के कुत्ता मौजूद है। ऐसे में ईडी की टीम बाहर ही खड़ी है। कोयला तस्करी की जांच में शांतनु सिन्हा विश्वास का भी नाम आया था। इसके बाद ईडी ने उन्हें तलब भी किया था। ईडी कोयला तस्करी मामले में कम से कम 8 आईपीएस अधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है।
बीते दिनों ईडी की टीम इंडियन पॉलिटिकल ऐक्शन कमेटी (IPAC) के ठिकानों पर छापपेमारी की थी। आईपैक के को फाउंडर विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद दिल्ली की अदालत ने विनेश चंदेल को 20 दिनों की ईडी की हिरासत में भेजा था। ईडी दिल्ली पुलिसद्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर जांच कर रही है। ईडी ने इस मामले में पुलकित जैन और प्रतीक जैन की पत्नी बार्बी जैन को भी दिल्ली स्थित मुख्यालय में तलब किया था।
टीएमसी नेताओं के घर पर भी छापेमारी
दो दिन पहले आयकर विभाग ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक देबाशीष कुमार के आवास के साथ-साथ पार्टी के दो अन्य नेताओं के घरों और कार्यालयों सहित कई परिसरों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई से विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र में राजनीतिक तनाव पैदा हो गया है।
कुमार रासबिहारी निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों ने दक्षिण कोलकाता के मनोहरपुकुर रोड स्थित कुमार के आवास पर सुबह-सवेरे तलाशी शुरू की। छापेमारी शुरू होने के समय तृणमूल उम्मीदवार वहीं मौजूद थे। इसके साथ ही पास में स्थित उनके चुनावी कार्यालय और मोतीलाल नेहरू रोड स्थित एक पार्टी कार्यालय में भी तलाशी ली जा रही है। इसी बीच आयकर विभाग के अधिकारियों की एक अन्य टीम ने कालीघाट में तृणमूल कांग्रेस नेता कुमार साहा के आवास की तलाशी ली।
आयकर अधिकारी स्थानीय तृणमूल नेता मिराज शाह के एल्गिन रोड स्थित आवास पर भी पहुंचे। मिराज शाह भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी की उम्मीदवारी के चार प्रस्तावकों में से एक हैं।इस बीच, दिन के दौरान साल्ट लेक और मिडलटन स्ट्रीट सहित शहर के कई अन्य स्थानों पर भी आयकर विभाग की छापेमारी देखी गयी।
]]>सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए कहा कि अब किसी भी नागरिक की गिरफ्तारी से पहले पुलिस, ED, CBI या कोई भी जांच एजेंसी आरोपी को लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी मनमाने ढंग से नहीं हो सकती, बल्कि उसके पीछे ठोस, स्पष्ट और कानूनी आधार होना जरूरी है। अदालत ने कहा कि गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को यह जानने का संवैधानिक अधिकार है कि उसे किस मामले में और किस धारा के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है। इसके साथ ही एजेंसी को गिरफ्तारी के समय लिखित नोटिस/गिरफ्तारी मेमो देना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पुलिस, ईडी, सीबीआई सहित सभी जांच एजेंसियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले या गिरफ्तार करने के तुरंत बाद, उसे उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य होगा। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि यदि गिरफ्तारी की वजह आरोपी को उसकी भाषा में लिखित रूप से नहीं बताई गई, तो ऐसी गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा।
बता दें कि यह फैसला जुलाई 2024 में मुंबई में हुए बहुचर्चित बीएमडब्ल्यू हिट-एंड-रन केस से जुड़े ‘मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र सरकार’ मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी से पहले या तुरंत बाद उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताना आवश्यक है।
इस फैसले में न्यायमूर्ति मसीह ने 52 पन्नों का विस्तृत निर्णय लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मौलिक सुरक्षा है।अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को कारणों की जानकारी ‘यथाशीघ्र’ दी जानी चाहिए, ताकि आरोपी को अपने अधिकारों और कानूनी स्थिति का स्पष्ट ज्ञान हो सके।
अदालत ने अपने फैसले में निम्न प्रमुख बिंदु निर्धारित किए हैं
गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार बताना संविधान का आदेश है, और यह किसी भी परिस्थिति में टाला नहीं जा सकता।
गिरफ्तारी का कारण लिखित रूप में दिया जाना अनिवार्य होगा, और वह भाषा वही होनी चाहिए जिसे आरोपी समझ सके।
यदि गिरफ्तारी के समय अधिकारी तत्काल लिखित कारण देने में असमर्थ हो,
तो पहले मौखिक रूप से कारण बताए जाएं, और
बाद में लिखित नोटिस, रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने से कम से कम दो घंटे पहले, आरोपी को सौंपा जाना चाहिए।
यदि गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में नहीं बताए गए, तो
गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा, और आरोपी को रिहा होने का अधिकार होगा।
देशभर में लागू होगा आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस आदेश की प्रति देश के सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजी जाएगी। इससे सुनिश्चित होगा कि यह फैसला पूरे भारत में तुरंत प्रभाव से लागू हो।
]]>कोड्रिफ सिरप मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। सोमवार को ED यानी प्रवर्तन निदेशालय ने श्रीसन फार्मा से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की है। खबर है कि मध्य प्रदेश में इस जहरीले कफ सिरप के कारण 20 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है। फिलहाल जांच जारी है। सिरप बनाने कंपनी श्रीसन फार्मा के मालिक जी रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया है।
ईडी चेन्नई कोल्ड्रिफ कफ सिरफ मामले में PMLA के तहत तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित श्रीसन फार्मा के 7 ठिकानों पर छापेमारी की है। खास बात है कि इनमें तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल ऑफिस के शीर्ष अधिकारियों के ठिकाने भी शामिल हैं।
वर्तन निदेशालय (ED) ने फार्मा से जु़ड़े कई परिसरों में सोमवार को छापामारी की है। हालांकि, छापामारी से जुड़ी अधिक डिटेल आनी बाकी है। बता दें कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप को श्रीसन फार्मा ही बनाती है।
कंपनी के मालिक हो चुके हैं गिरफ्तार
बता दें इस फार्मा कंपनी के केस दर्ज किया गया है। फार्मास्युटिकल कंपनी स्रसेन फार्मा के मालिक रंगनाथन को चेन्नई में मध्य प्रदेश पुलिस ने पिछले दिनों गिरफ्तार किया था। अब कंपनी से जुड़े परिसरों में ईडी की छापामारी चल रही है।
गौरतलब है कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप के सेवन से मध्य प्रदेश में 22 बच्चों की जान गई है। वहीं, राजस्थान में भी इस सीरप के सेवन से बच्चों ने अपनी जान खोई है।
श्रीसन फार्मा के मालिक जी रंगनाथन की भी हो चुकी गिरफ्तारी
कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने की वजह से मध्य प्रदेश राजस्थान में हाल के दिनों में 20 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। मौत होने की वजह किडनी खराब होना रहा। श्रीसन फार्मा कंपनी द्वारा ही कोल्ड्रिफ कफ सिरप का उत्पादन किया जाता है। इस मामले में कंपनी के मालिक 73 वर्षीय जी रंगनाथन को भी 9 अक्तूबर को गिरफ्तार किया जा चुका है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की जांच में कंपनी और तमिलनाडु खाद्य एवं औषधि प्रशासन (टीएनएफडीए), दोनों के द्वारा तय मानकों के उल्लंघन का खुलासा हुआ। जिसमें कंपनी का खराब बुनियादी ढांचा और बार-बार सुरक्षा चूक का पता चला। कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मा ने अपने खराब बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय औषधि सुरक्षा नियमों के कई उल्लंघनों के बावजूद एक दशक से अधिक समय तक बिना किसी रोक-टोक के परिचालन जारी रखा।
औषधि नियंत्रकों के खिलाफ हुई कार्रवाई
बच्चों की मौत के बाद, मध्य प्रदेश सरकार ने दो औषधि निरीक्षकों और एफडीए के एक उप निदेशक को निलंबित कर दिया। साथ ही राज्य के औषधि नियंत्रक का तबादला भी कर दिया और मौतों की जांच के आदेश दिए, जबकि पुलिस ने लापरवाही के आरोप में छिंदवाड़ा जिले के एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया। तमिलनाडु सरकार ने राज्य के दो वरिष्ठ औषधि निरीक्षकों को भी निलंबित कर दिया है और श्रीसन फार्मास्युटिकल्स को बंद करने का आदेश दिया है।
कफ सिरप में पाई गई डाइएथिलीन ग्लइकॉल की घातक मात्रा
बच्चों की मौत के बाद कोल्ड्रिफ सिरप की जांच में उसमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की घातक मात्रा पाई गई। यह एक ऐसा रसायन है, जिसका इस्तेमाल अक्सर एंटीफ्रीज में किया जाता है, जिसे कई राज्यों में प्रतिबंधित कर दिया गया है। माना जाता है कि इस सिरप के कारण बच्चों की किडनी खराब हुई। बच्चों को हल्की खांसी और बुखार के लिए यह सिरप दिया गया था।
कई राज्यों में बैन हुई कोल्ड्रिफ सीरप
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कफ सीरप के सेवन से 20 से अधिक बच्चों की जान गई है। इसके बाद राज्य सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए इस दवा की बिक्री पर बैन लगा दिया। इसके बाद राजस्थान समेत कई राज्यों में कोल्ड्रिफ कफ सीरप की बिक्री पर रोक लगा दी गई। इसमें गुजरात, पंजाब, यूपी, तमिलनाडु, बंगाल इत्यादि शामिल है।
गंभीर खामियां हुईं उजागर
ED अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी तमिलनाडु के वरिष्ठ ड्रग नियंत्रण अधिकारियों के आवासों और जहरीले सिरप की निर्माता कंपनी श्रीसन फार्मा से जुड़े परिसरों पर की गई। बता दें कि जो दवा जीवन बचाती है, उसने बच्चों को मौत दी। इस मामले ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया है। वहीं, नियामक निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में भी गंभीर खामियों को उजागर किया है।
श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के मालिक हो चुके हैं गिरफ्तार
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने कंपनी और तमिलनाडु खाद्य एवं औषधि प्रशासन (TNFDA) दोनों द्वारा कई उल्लंघन पाए। खराब बुनियादी ढांचे और बार-बार सुरक्षा उल्लंघनों के बावजूद, श्रीसन 2011 में लाइसेंस प्राप्त करने के बाद से बेरोकटोक काम करती रही।
चिकित्सकों ने दी ये सलाह
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की इस घटना ने लोगों को हिला कर रख दिया है। इस बीच चिकित्सकों ने कहा कि बिना किसी सलाह के बच्चों को दवा देना खतरनाक साबित हो सकता है। बाल रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि सीरप के सेवन से बलगम पतला हो जाता है, जिसको नवजात बाहर नहीं निकाल पाते हैं। बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के छोटे बच्चों को इस प्रकार दवाएं देना हानिकारत साबित हो सकता है।(
]]>ईडी की ओर से शनिवार को जारी अधिकारिक बयान में कहा गया है कि अब तक की जांच में साफ हुआ है कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के डीएमएफ फंड की 350 करोड़ रुपये का उपयोग बीज निगम के जरिए किया गया था। बीज निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से विक्रेताओं, ठेकेदारों को कृषि व उपकरणों की आपूर्ति करने का काम दिया गया था।
60 प्रतिशत तक बंटा कमीशन
ईडी की जांच से साफ हुआ कि मिनी दाल मिल, बीज आदि कारोबारियों से अनुबंध मूल्य का 60 प्रतिशत तक कमीशन रिश्वत के तौर पर संपर्ककर्ताओं द्वारा ली गई थी और बाद में कुछ अधिकारियों और अन्य सहयोगियों तक यह राशि पहुंचाई गई। राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड (बीज निगम) से संबंधित कारोबारियों, ठेकेदारों और बिचौलियों के ठिकानों से नकदी,चांदी के जेवर आदि जब्त कर आगे की जांच की जा रही है।
इससे पहले ईडी ने 21.47 करोड़ रुपए की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की थी। इसके अलावा रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में एक अभियोजन शिकायत भी दायर की गई है, जिसमें 16 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा इस मामले में निलंबित आइएएस रानू साहू, राज्य सेवा अधिकारी माया वारियर और मनोज कुमार द्विवेदी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। फिलहाल रानू साहू अंतरिम जमानत पर राज्य से बाहर रह रही है।
इन जगहों पर मारा था छापा
तीन सितंबर को तड़के पांच बजे ईडी की अलग-अलग टीम ने छापेमारी की कार्रवाई की थी। रायपुर के शंकरनगर में कृषि कारोबारी विनय गर्ग, स्वर्णभूमि कालोनी स्थित होटल व्यवसायी मनीदीप चावला, कृषि उपकरणों का कारोबार करने वाले राजेश अग्रवाल, ला विस्टा कॉलोनी अमलीडीह में पवन पोद्दार और सतपाल छाबड़ा के घर पर देर रात तक एजेंसी ने छानबीन की थी। सतपाल छाबड़ा का ओडिशा और छत्तीसगढ़ में एग्रीकल्चर उपकरणों का कारोबार है।
इसके साथ ही दुर्ग जिले के पुरानी भिलाई में अन्ना भूमि ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर शिवकुमार मोदी,शांति नगर स्थित विवेकानंद कालोनी में रहने वाले सीए आदित्य दिनोदिया के यहां भी टीम ने दबिश दी थी। अन्ना भूमि ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड कृषि और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में काम करती है। यह कंपनी ड्रिप सिंचाई प्रणाली, कांटेदार तार, चेन लिंक, आरसीसी बाड़ के खंभे,सौर पंप और कृषि उपकरणों की आपूर्ति करती है।
वहीं राजिम-महासमुंद मार्ग स्थित उगम राज कोठारी के घर और दुकान में भी छापा पड़ा था। उमग राज कृषि यंत्रों की आपूर्ति का सरकारी ठेका लेते है। जांच टीम ने उनके घर और दुकान को सील कर रखा है।
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