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महाराष्ट्र के नगर महापालिका परिषद चुनाव नतीजों की चर्चा दिल्ली तक हो रही है, लेकिन सभी की निगाहें मुंबई के मेयर पद पर लगी हुई हैं. पिछले 28 सालों से बीएमसी पर काबिज रही उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को करारी मात खानी पड़ी है. ऐसे में बीजेपी को पहली बार मुंबई में मिली भारी जीत के बाद सवाल उठ रहा है कि देश की सबसे समृद्ध माने जाने वाली महानगर पालिका बीएमसी के मेयर कौन बनेगा?
मुंबई नगर महापालिका चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो शिंदे के शिवसेना के साथ बीएमसी पर अपना कब्जा जमाए रखने का नंबर गेम भी हैं. इसके बाद भी मेयर के चुनाव की प्रक्रिया में वक्त लगेगा, इसलिए इस बीच कई उतार चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं.
बीएमसी के नए मेयर का चुनाव निगम सदन में पार्षदों के मतदान के जरिए किया जाएगा. मुंबई नगर प्रशासन द्वारा नवनिर्वाचित पार्षतों की बुलाई जाने वाली विशेष बैठक में यह चुनाव होने की संभावना है, लेकिन उससे पहले मेयर किस जाति और किस वर्ग का होगा, ये फॉर्मूला एकनाथ शिंदे के मंत्रालय के द्वारा 'लॉटरी सिस्टम' से तय होगा?
शिंदे के 'लॉटरी सिस्टम' से तय होगा मेयर
मुंबई में बीएमसी का मेयर किस जाति और किस वर्ग से होगा, इसका फैसला राज्य के अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (शहरी विकास विभाग) के द्वारा तय होता है. राज्य के शहरी विकास विभाग का जिम्मा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है. ऐसे में मेयर पद के आरक्षण का फैसला शिंदे के विभाग के द्वारा तय किया जाना है.
बीएमसी में मेयर का पद रोटेशन के आधार पर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित होता है. महाराष्ट्र का शहरी विकास विभाग मेयर पद के श्रेणी तय करने के लिए लॉटरी की प्रक्रिया कराता है.
मेयर पद के लिए आरक्षण प्रक्रिया को चुनाव के पहले तय नहीं किया. इसी कारण किस महापालिका मे कौन सी जाति या वर्ग का मेयर होगा ये अभी तक तय नहीं हुआ है. ऐसे में मुंबई के मेयर का पद भी तय नहीं है. पुरुष, महिला, ओबीसी, अनुसूचित जाति के आधार पर रोटेशन अभी तय होना है.
माना जा रहा है कि इसी हफ्ते अब एकनाथ शिंदे के अगुवाई वाला शहरी विकास विभाग मेयर पद के आरक्षण तय करने के लिए लॉटरी प्रक्रिया अपना सकता है. ऐसे में पहले शहरी विकास विभाग के द्वारा मेयर का आरक्षण तय होगा. सूत्रों की मानें तो 22 जनवरी को आरक्षण तय हो सकता है और उसके बाद मेयर ही कौन बनेगा, उसे लेकर फैसला होगा.
महाराष्ट्र में कैसे होगा नए मेयरों का चुनाव
मेयर पद पर आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीएमसी के नए मेयर का चुनाव होगा. इस तरह से महाराष्ट्र के मुंबई को आखिरकार चार साल बाद मेयर मिलने जा रहा है. मुंबई के मेयर का पद संभालने वाली आखिरी शख्स शिवसेना की किशोरी पेडनेकर थीं, जो इस बार भी जीतकर आईं है, लेकिन उद्धव की सेना को बहुमत का नंबर नहीं मिल सका है. इसके चलते उनका मेयर बनने की राह काफी मुश्किल है.
बीएमसी मेयर को काफी ताकतवर माना जाता है और इस पद के लिए दावेदारी भी बड़ी होती है. मुंबई के बीएमसी में अलग-अलग वॉर्डों से कुल 227 पार्षद (नगर सेवक) चुनाव जीतकर आए हैं, जिन्हें मुंबई में नगर सेवक या फिर कॉरपोरेटर कहा जाता है. ऐसे में जिस पार्टी का बहुमत होता है, वही मेयर पद की उम्मीदवारी में सबसे बड़ी दावेदार होती है.
नगर महापालिका चुनाव जीतकर आने वाले पार्षद ही मेयर का चुनाव करते हैं. मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है, वहीं पार्षद 5 साल के लिए चुने जाते हैं. एक मेयर का कार्यकाल पूरा होने के बाद दूसरे मेयर का चुनाव होता है. ऐसे में प्रशासन नवनिर्वाचित निगम पार्षदों की विशेष बैठक बुलाएगा, जिसमें मेयर और उपमेयर का चुनाव होगा. 28 जनवरी को नगर प्रशासन पार्षदों की विशेष बैठक बुला सकता है.
बैठक में मेयर पद के लिए सभी निर्वाचित पार्षद मतदान करेंगे और जिसे सबसे अधिक वोट मिलेंगे, वही मेयर चुना जाएगा. हालांकि. यह जरूरी नहीं है कि सबसे ज्यादा पार्षदों वाली पार्टी का उम्मीदवार ही मेयर बने, लेकिन बीते वर्षों के अनुभव बताते हैं कि आमतौर पर बहुमत या मजबूत गठबंधन वाली पार्टी इस पद पर काबिज होती रही है. माना जा रहा है कि बीजेपी पहली बार मुंबई में अपने मेयर बना सकती है.
मेयर के साथ उपमेयर का भी होगा चुनाव
शहरी विकास विभाग (यूडीडी) इसी हफ्ते मेयर पद के आरक्षण को लेकर लॉटरी निकालेगा. इसमें यह तय होगा कि मेयर पद सामान्य वर्ग, महिला या किसी आरक्षित श्रेणी के लिए होगा. आरक्षण की घोषणा के बाद पात्र पार्षद नामांकन दाखिल करेंगे और उसके कुछ दिनों बाद मेयर का चुनाव कराया जाएगा. इस तरह मेयर चुनाव जनवरी के अंतिम सप्ताह में होना तय माना जा रहा है. मेयर के साथ उपमेयर का भी चुनाव होगा. इसके अलावा स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन के पद भी सभी की निगाहें हैं.
बीएमसी में भले ही मेयर का पद सबसे बड़ा हो, लेकिन असली ताकत किसी और के पास होती है. सबसे अमीर नगरपालिका में दो विंग होती है, पहली राजनीतिक विंग और दूसरी प्रशासनिक विंग. राजनीतिक विंग के मुखिया मेयर होते है जबकि प्रशासनिक विंग को नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) हेड करते हैं. ऐसे में बीजेपी के पास अपने दम पर मेयर बनाने का नंबर नहीं है, जिसके चलते शिंदे के समर्थन से ही बीएमसी पर कब्जा जमा सकता है. इस वजह से शिंदे की बार्गेनिंग पावर बढ़ गई है और उनकी नजर भी बीएमसी के अहम पद है.
बीजेपी और एकनाथ शिंदे में होगी शह-मात
मेयर चुनाव की प्रक्रिया के तहत पहले आरक्षण तय किया जाता है, फिर विशेष बैठक में सभी पार्षद मतदान करते हैं. साधारण बहुमत हासिल करने वाला उम्मीदवार मेयर और उपमेयर घोषित किया जाता है. हालांकि, किसी दल के पास अगर स्पष्ट बहुमत नहीं होता, तो गठबंधन और चुनाव के बाद की राजनीतिक बातचीत निर्णायक भूमिका निभाती है.
मुंबई में इस बार मेयर चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार 227 निर्वाचित पार्षदों के साथ 10 नामांकित पार्षद भी होंगे। मार्च 2023 में मुंबई नगर निगम अधिनियम में संशोधन कर नामांकित पार्षदों की संख्या पांच से बढ़ाकर दस कर दी गई थी. माना जा रहा है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी को नामांकित पार्षदों में बड़ा हिस्सा मिल सकता है, जिससे मेयर चुनाव के नतीजों पर असर पड़ सकता है. ऐसे में देखना होगा कि मेयर पद के शह-मात के खेल में कौन किस पर भारी पड़ता है?
]]>बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव नतीजों के बाद मुंबई की सियासत में जबरदस्त खींचतान शुरू हो गई है. सत्ता के इस संग्राम के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है. शिंदे गुट की शिवसेना ने अपने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में एकत्रित होने का आदेश दिया है.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शिंदे सेना के सभी पार्षदों को आज दोपहर 3 बजे तक होटल पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं. इन्हें अगले तीन दिनों तक होटल में ही ठहराया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की हॉर्स ट्रेडिंग या टूट की कोशिश को नाकाम किया जा सके.
29 सीटों के साथ शिंदे गुट बना 'किंगमेकर'
BMC चुनाव में शिंदे गुट की शिवसेना ने 29 सीटें जीती हैं. मौजूदा गणित के मुताबिक बीजेपी अपने दम पर बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पाई है. ऐसे में शिंदे गुट की भूमिका निर्णायक हो गई है और वही अब सत्ता की चाबी माना जा रहा है.
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी के लिए बीएमसी में सरकार बनाना शिंदे सेना के समर्थन के बिना संभव नहीं है. यही वजह है कि शिंदे गुट किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहता है.
'No Risk' के मूड में एकनाथ शिंदे
सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे खुद पूरे हालात पर नजर बनाए हुए हैं. उनका मानना है कि जब तक बीएमसी में सत्ता का औपचारिक दावा नहीं हो जाता, तब तक पार्षदों को एकजुट रखना बेहद जरूरी है. इसी रणनीति के तहत सभी पार्षदों को 5-स्टार होटल में ठहराने का फैसला किया गया है.
शिंदे गुट को आशंका है कि विपक्षी दल या दूसरे राजनीतिक खिलाड़ी उनके पार्षदों को तोड़ने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे सत्ता का समीकरण बिगड़ सकता है.
कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन का तंज
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, उन्हें डर किससे है? कौन उनके पार्षदों को तोड़ सकता है? और किसे पार्षद तोड़ने का सबसे ज्यादा अनुभव है, यह सब जानते हैं.
नसीर हुसैन ने आगे कहा कि बीजेपी हमेशा अपने सहयोगी दलों और टूटे हुए गुटों की कीमत पर बढ़ी है. उन्होंने सवाल उठाया कि महाराष्ट्र और बिहार में किस पार्टी का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा रहा है. उन्होंने कहा, एकनाथ शिंदे जितनी जल्दी यह समझ लें, उतना ही उनके लिए बेहतर होगा.
बीएमसी में सस्पेंस बरकरार
फिलहाल, बीएमसी में मेयर और सत्ता गठन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. एक तरफ बीजेपी बहुमत के लिए जोड़-तोड़ में जुटी है तो दूसरी तरफ शिंदे गुट अपने पत्ते खोलने से पहले पूरी तरह सुरक्षित रणनीति के तहत आगे बढ़ रहा है. आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि मुंबई की सत्ता किसके हाथ जाएगी.
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शिंदे ने किया नया प्रयोग
शिवसेना प्रमुख और राज्य के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने रविवार को अपने गांव में सहकर्मियों के साथ मिलकर नए पेड़ लगाए। शिंदे ने पिछले दौरों में स्ट्रॉबेरी, हल्दी, चीकू और बांस के पौधे लगाए थे। इस साल उन्होंने पहली बार एक विदेशी फल एवोकाडो, लगाने का निर्णय लिया। शिंदे ने उन्होंने फावड़े और कुदाल का उपयोग करके स्वयं एक एवोकाडो का पेड़ लगाया। उन्होंने अपने खेत में यह प्रयोग इस आशा के साथ किया है कि यदि यह प्रयोग स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभकारी एवोकाडो फल की खेती में सफल होता है, तो यह स्थानीय किसानों को भी वैकल्पिक फसल के रूप में एवोकाडो की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
नए प्रयोग से नई फसल उगेगी
डिप्टी सीएम शिंदे इससे पहले सतारा जिले के महाबलेश्वर तालुका में कोयना नदी के तट को काफी उपजाऊ बता चुके हैं। वह कहते आए हैं कि दरे गांव के आसपास की मिट्टी बहुत अच्छी है। इसमें उगाई जाने वाली कोई भी फसल अच्छी तरह से उगती है। इसलिए उन्हें पूरा विश्वास है कि यहां एवोकाडो की खेती का यह प्रयास अवश्य सफल होगा। यदि ऐसा होता है, तो उनका मानना है कि इस क्षेत्र के किसान, जो स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसे जामुन उगाते हैं, एवोकाडो की खेती के माध्यम से एक और नई नकदी फसल पा सकेंगे। इसीलिए उन्होंने अपने खेतों में इस प्रयोग को सफल बनाने का प्रयास किया है। इस अवसर पर उनके साथ दरे गांव के ग्रामीणजन और शिंदे के सभी साथी उपस्थित थे।
एवोकाडो के क्या हैं फायदे?
एवोकाडो का तेल त्वचा और बालों के लिए अच्छा होता है। एक बहु-उपयोगी फल है जो कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। यह स्वस्थ वसा, फाइबर, और विटामिन से भरपूर होता है जो हृदय स्वास्थ्य, पाचन, और आंखों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। एवोकाडो में पोटेशियम, मैग्नीशियम, और अन्य महत्वपूर्ण खनिज भी पाए जाते हैं। इतना ही नहीं एवोकाडो में अनसैचुरेटेड फैट होता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है और हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करता है। इसके अलावा यह फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और कब्ज से राहत दिलाता है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तीन प्रमुख दलों के गठबंधन के बीच "शक्ति राजनीति" में संतुलन बनाए रखने के लिए अधिकारों का समान वितरण सुनिश्चित किया है. आजतक के जिस सरकारी आदेश की कॉपी है उसे 18 मार्च, 2025 को मुख्य सचिव सुजाता सौनिक ने जारी किया है.
इस आदेश में कहा गया है कि वित्त और योजना विभाग, जो वर्तमान में अजित पवार के अधीन है, उसकी हर फाइल अब अंतिम मंजूरी के लिए सीएम देवेंद्र फडणवीस तक पहुंचने से पहले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से होकर गुजरेगी. इसे सियासी संतुलन बनाए रखने के लिए एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है.
महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के दौरान जब उद्धव ठाकरे सीएम थे और अजित पवार के पास वित्त विभाग था. तब शिंदे के शिवसेना गुट ने पवार पर पक्षपात का आरोप लगाया था. उन्होंने दावा किया कि पहले एनसीपी, फिर कांग्रेस और अंत में शिवसेना को पैसा आवंटित किया गया, जो एमवीए के पतन का एक प्रमुख कारण बन गया.
शिंदे के सीएम रहने के दौरान भी ऐसा ही था नियम
राजनीतिक बदलाव के बाद एकनाथ शिंदे सीएम बने और फडणवीस डिप्टी सीएम बने और एक साल के भीतर ही शिंदे के नेतृत्व में अजित पवार भी डिप्टी सीएम बन गए. हालांकि पवार ने वित्त विभाग अपने पास रखा, लेकिन अंतिम फैसले का अधिकार शिंदे के पास ही रहा.तब भी 2023 में आदेश जारी किया गया था कि फाइलें तत्कालीन डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के माध्यम से अंतिम मंजूरी के लिए सीएम एकनाथ शिंदे के पास भेजी जाएंगी.
हालांकि, अब वित्त विभाग को सत्ता संतुलन को बाधित होने से रोकने के लिए फडणवीस ने फाइल अनुमोदन प्रक्रिया को पहले ही बदल दिया और उनके पास फाइल पहुंचने से पहले दोनों उप मुख्यमंत्रियों के पास जाएगी. राजनीतिक हलकों में इसे सीएम फडणवीस का “मास्टरस्ट्रोक” बताया जा रहा है.
महायुति में हुआ था विवाद
तीनों महायुति दलों के नेता पहले भी लगातार कहते रहे हैं कि उनके बीच “कभी कोई विवाद नहीं था”. हालांकि, अजित पवार को अब अपनी फाइलों के लिए शिंदे की मंजूरी की जरूरत होगी. इससे शिंदे की शिवसेना को एनसीपी पर बढ़त मिल गई है, जो पहले टकराव का कारण बनी थी.
इस निर्णय के माध्यम से एकनाथ शिंदे को सशक्त बनाकर, फडणवीस ने सुनिश्चित किया है कि शिंदे का गुट फंड आवंटन और निर्णय लेने से संतुष्ट रहे. वहीं इस कदम के जरिए अजित पवार को भी नियंत्रण में रखा जा सके. इस कदम को महायुति के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखा जा रहा है.
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शिंदे ने कहा कि महायुति सरकार लोगों की बात सुनेगी। मैंने पहले ही संगठन नेतृत्व को अपना बिना शर्त समर्थन दे दिया है। उनका जो भी फैसला होगा हम उसका सम्मान करेंगे। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के बारे में बात करते हुए शिंदे ने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले 2.5 सालों में जो काम किया है उसे इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। सीएम ने कहा कि हमारी सरकार के बेहतर प्रदर्शन के कारण ही लोगों ने हमें ऐतिहासिक जनादेश दिया है। जनता पर हमारा आशीर्वाद ऐसा रहा कि विपक्ष के पास विपक्ष का नेता चुनने की भी ताकत नहीं है। उन्होंने कहा कि महायुति के तीनों सहयोगियों की आपसी समझ बहुत अच्छी है, जहां तक मुख्यमंत्री के पद का सवाल है तो उसका फैसला कल हो जाएगा।
इससे पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जनता ने महायुति को ऐतिहासिक जनादेश दिया है। चुनावी नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर लगातार सस्पेंस बना हुआ है। महायुति में सबसे ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की तारीख का ऐलान तो कर दिया है लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री कौन होगा इसकी घोषणा नहीं की है। भाजपा के सूत्रों की मानें तो देवेन्द्र फडणवीस का नाम सीएम पद की रेस में सबसे आगे है। फडणवीस पहले भी एक पंचवर्षीय में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जबकि निवर्तमान एकनाथ शिंदे सरकार में वह उपमुख्यमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं।
]]>शिंदे ने क्याें उठाया कदम?
शिंदे ने आगे कहा कि शिवसेना कार्यकर्ता होने के नाते हमने पार्टी अनुशासन का पालन किया और बदलाव की जरूरत को महसूस किया। हमने शिवसेना-बीजेपी गठबंधन सरकार बनाने का प्रयास किया लेकिन हम असफल रहे और दुर्भाग्य से हमारी पार्टी और कार्यकर्ताओं को जो नुकसान हो रहा था, हमने महाराष्ट्र के लोगों की सुनने का फैसला किया, जो शिवसेना-बीजेपी गठबंधन चाहते थे। हमारे विधायक भी थके हुए थे क्योंकि उनके क्षेत्रों में कोई काम नहीं हो रहा था। इसलिए हमने सरकार बदली और बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन के साथ एक नई सरकार बनाई।
महायुति सरकार की तारीफ
महायुति सरकार की सराहना करते हुए सीएम शिंदे ने गर्व किया कि इस सरकार ने निजी लाभ से ऊपर लोगों के हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार ने उन परियोजनाओं को फिर से शुरू किया जिन्हें MVA सरकार ने रोक दिया था। महायुति की उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि उनके शासन के दौरान महाराष्ट्र जीडीपी, एफडीआई, जीएसटी या स्वच्छता, हर क्षेत्र में शीर्ष पर रहा। उन्होंने कहा कि राज्य ने उनके शासनकाल में ही 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया।
दो साल के काम का बखान
सीएम शिंदे ने कहा कि मुझे गर्व और खुशी है कि हमने निजी लाभ से ऊपर लोगों के हितों को प्राथमिकता दी। पिछले दो सालों में हमारी सरकार को उसके काम के लिए सराहना मिली है। पहले दिन से ही हमने किसानों, श्रमिकों, युवाओं पर ध्यान केंद्रित किया, और विकास परियोजनाएं। हमने मेट्रो, बुलेट ट्रेन और राजमार्गों जैसी रुकी हुई परियोजनाओं को फिर से शुरू किया। इससे महाराष्ट्र निवेश के अनुकूल बना। आज मैं गर्व से कहता हूं कि हमने 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। MVA शासन के दौरान महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर था, लेकिन जब हम आए, तो महाराष्ट्र जीडीपी, एफडीआई, जीएसटी और स्वच्छता में शीर्ष पर रहा। हमारी कल्याणकारी योजनाएं, जैसे लाडली बहना योजना आदि लड़कियों को वजीफा और मुफ्त उच्च शिक्षा प्रदान करती हैं। हमने दो सालों में बहुत कुछ हासिल किया है और मैं आभारी हूं।
केंद्र की कठपुतली वाले आरोप पर क्या बोले?
यह पूछे जाने पर कि विपक्ष उनकी सरकार को केंद्र सरकार की कठपुतली बता रहा है। इस पर सीएम शिंदे ने कहा कि जब से महाराष्ट्र में डबल इंजन की सरकार आई है, राज्य को केंद्र से कई लाभ मिले हैं। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार की 'कड़ी मेहनत' को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सराहा है। शिंदे ने कहा, मुझे खुशी है कि पिछले दो सालों में हमारी सरकार की कड़ी मेहनत को पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने सराहा है।
एमवीए सरकार पर हमला
पिछली MVA सरकार पर परोक्ष हमला करते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि सीएम होने का मतलब लोगों की सेवा करना है, न कि केवल फेसबुक लाइव के जरिए सरकार चलाना। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार सुनती है और काम करती है, बहरी या गूंगी नहीं है। हमारी सरकार किसानों को प्राथमिकता देती है, सहायता और समर्थन प्रदान करती है। हमने किसानों के लिए 15,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं और विभिन्न योजनाएं लागू की हैं। यह किसानों की सरकार है।
अपने गृह नगर ठाणे में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शिंदे ने अपने गुरु आनंद दीघे और शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे को विनम्र श्रद्धांजलि दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके नेतृत्व वाली शिवसेना दीघे और ठाकरे की सीख और सिद्धांतों का पालन करती रहेगी।
शिंदे ने वहां मौजूद दर्शकों से पूछा, ‘‘क्या आप महायुति सरकार द्वारा शुरू की गई सारी योजनाओं और कार्यक्रमों को जारी रखना चाहते हैं?’’ इस पर लोगों ने हां में जवाब दिया।
आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उप मुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नीत सत्तारूढ़ ‘महायुति’ या महागठबंधन की उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी), शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (एसपी) और कांग्रेस के महाराष्ट्र विकास आघाडी गठबंधन के साथ कांटे का मुकाबला होने की संभावना है। राज्य में अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने वाले हैं।
राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का जिक्र करते हुए शिंदे ने कहा, ‘‘उन्हें गलियों या दिल्ली जाने दीजिए। उन्हें महत्व मत दीजिए। हम अपना काम जारी रखेंगे।’’ उन्होंने हालिया लोकसभा चुनाव में ठाणे सीट से शिवसेना नेता नरेश म्हास्के को उतारने के अपने फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इस कदम का कुछ लोगों ने विरोध किया लेकिन म्हास्के ने इस सीट से जीत दर्ज की।
अपने विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए शिंदे ने दावा किया कि उनके विरोधी लगातार उन्हीं पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से राजाराम प्रथम के शासनकाल के दौरान मुगल सेनाओं का मुकाबला करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए मशहूर संताजी और धनाजी उनके दुश्मनों ने पानी में हर जगह दिखाई देते थे, उसी तरह वे एकनाथ शिंदे को हर जगह देखते हैं।’’ उन्होंने कहा कि जब तक लोगों का समर्थन उनके साथ है, तब तक वे आलोचनाओं से घबराने वाले नहीं हैं।
शिंदे ने अपनी सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं का जिक्र किया और कहा कि महाराष्ट्र में हर परिवार की खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए इन योजनाओं को शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र पहला राज्य है जिसने शिक्षित युवाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता की पेशकश की है।’’ उन्होंने एक परिवार की मदद के दौरान मार्मिक क्षण का भी जिक्र किया।
शिंदे ने कहा, ‘‘मुझे आधी रात को पता चला कि एक लड़की ने आत्महत्या कर ली है क्योंकि उसके माता पिता उनकी शिक्षा का शुल्क वहन नहीं कर सकते थे। देर रात करीब दो बजे मैंने उच्च शिक्षा की पढ़ाई करने वाली सभी लड़कियों का शुल्क माफ करने का फैसला किया।’’
महिलाओं के खातों में नकद हस्तांतरण की ‘‘लाडकी बहिन’’ योजना का जिक्र करते हुए शिंदे ने कहा कि 1,500 रुपये मासिक वित्तीय सहायता राशि का भुगतान बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि ‘‘अगर आप इस सरकार की ताकत को और बढ़ाते हैं तो इसमें और इजाफा ही किया जाएगा’’।
उन्होंने कहा, ‘‘आप जितनी ताकत देंगे, लाभ भी उतना ही होगा। यही बात पुरुषों पर भी लागू होती है।’’ शिंदे ने ठाणे में गायमुख चौपाटी के दूसरे चरण का उद्घाटन किया और शिवाजी महाराज और कान्होजी आंग्रे का एक स्मारक बनाने की घोषणा की।
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मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा, "लोकसभा में हार विपक्ष की ओर से फैलाए गए झूठे बयानों के कारण हुई, लेकिन महाराष्ट्र के लोग विधानसभा चुनाव के दौरान इस पर विश्वास नहीं करेंगे। वे महायुति को काम के आधार पर एक और मौका देंगे। किसी भी सरकार के प्रदर्शन का विश्लेषण करने के लिए दो साल पर्याप्त नहीं होते हैं। लेकिन विभिन्न फैसलों के आधार पर यह साफ है कि इस सरकार ने न केवल बुनियादी ढांचे के विकास को तेज किया है, बल्कि लोगों को यह विश्वास दिलाने में भी सफल रही है कि यह कमजोर वर्गों, महिलाओं, युवाओं, किसानों और मजदूरों की सरकार है।"
सीएम ने कहा कि राज्य की जनता के प्यार, शिव सैनिकों के समर्थन और महागठबंधन में शामिल दलों के बीच बेहतर तालमेल की वजह से जनहित के सैकड़ों काम हो रहे हैं। राज्य के किसान, मजदूर, महिला, बुजुर्ग और युवाओं के चेहरे पर संतोष की मुस्कान देखी जा सकती है। हमें इस बात का गर्व है कि राज्य की जनता ने भी हमारे निर्णयों पर विश्वास जताते हुए समर्थन किया। हम इसके साथ बनी जिम्मेदारी को भी समझते हैं। 'सबको खुश करने वाला' बजट पेश करने के बाद, महायुति सरकार विधानसभा चुनाव से पहले किसानों, महिलाओं, युवाओं, अल्पसंख्यकों, दलितों और विकास के पक्षधर प्रस्तावों को लोगों तक पहुंचाने के लिए कमर कस रही है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को विभिन्न राज्यों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा, लेकिन यह 500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था को पार करने वाला पहला राज्य बन गया है। सरकार ने 2028 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 3.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है। महाराष्ट्र बिजली की स्थापित क्षमता (10.4 प्रतिशत) और कुल निर्यात में 16 प्रतिशत योगदान के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा, राज्य जैविक कृषि उत्पादन (27 प्रतिशत हिस्सेदारी) में मध्य प्रदेश के बाद देश में दूसरे स्थान पर है।
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उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता संजय राउत ने एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री पद को लेकर बड़ा खुलासा किया है। राउत के दावे के मुताबिक, मौजूदा सरकार में शामिल भाजपा और एनसीपी के नेता साल 2019 में एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहते थे। राउत ने संवाददाताओं से बात करते हुए यह भी दावा किया कि एनसीपी नेताओं ने शिंदे के नाम का विरोध किया था।
अजित पवार, दिलीप वाल्से पाटिल और सुनील तटकरे जैसे एनसीपी नेताओं ने मुख्यमंत्री पद के लिए शिंदे के नाम का विरोध किया था और कहा था कि वे उनके जैसे कनिष्ठ और अनुभवहीन व्यक्ति के अंदर काम नहीं करेंगे। राज्यसभा सदस्य ने कहा, 'कांग्रेस और एनसीपी का कहना था कि उनके पास कई वरिष्ठ नेता हैं। गठबंधन का नेता ऐसा होना चाहिए जो अनुभवी, वरिष्ठ हो तथा सबको साथ लेकर चल सके। वहीं, सरकार बनाने के लिए शिवसेना ने महा विकास अघाड़ी के तौर पर कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिलाया था। लेकिन हाथ मिलाने से पहले ही देवेंद्र फडणवीस, गिरीश महाजन और सुधीर मुनगंटीवार जैसे भाजपा नेताओं ने शिवसेना से कहा था कि वे शिंदे को मुख्यमंत्री के रूप में पसंद नहीं करेंगे।'
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