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चुनाव आयोग ने देशभर में मतदाता सूचियों को और ज्यादा पारदर्शी व सटीक बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के तीसरे चरण की घोषणा कर दी है। आयोग ने 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से यह अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया के तहत करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं के घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा। चुनाव आयोग के मुताबिक, इस चरण में उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना और पंजाब जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है।
किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा SIR?
आयोग ने बताया कि यह कार्यक्रम जनगणना के तहत चल रहे हाउस लिस्टिंग अभियान को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है, ताकि दोनों कार्यों में तालमेल बना रहे। SIR फेज-III में निम्नलिखित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं:
राज्य
ओडिशा
मिजोरम
सिक्किम
मणिपुर
उत्तराखंड
आंध्र प्रदेश
अरुणाचल प्रदेश
हरियाणा
तेलंगाना
पंजाब
कर्नाटक
मेघालय
महाराष्ट्र
झारखंड
नागालैंड
त्रिपुरा
केंद्र शासित प्रदेश
दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव (DNH & DD)
चंडीगढ़
दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र)
आयोग ने स्पष्ट किया कि इस तीसरे चरण के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इन तीनों क्षेत्रों में जनगणना के दूसरे चरण और बर्फबारी वाले इलाकों की परिस्थितियों को देखते हुए बाद में अलग कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 9.86 करोड़ मतदाता
आंकड़ों के अनुसार, इस फेज में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 9.86 करोड़ मतदाता हैं, जहां 97,924 BLO और 96,949 BLA तैनात किए जाएंगे। कर्नाटक में 5.55 करोड़, आंध्र प्रदेश में 4.16 करोड़ और तेलंगाना में 3.39 करोड़ मतदाता इस अभियान के दायरे में आएंगे। दिल्ली में करीब 1.48 करोड़ मतदाताओं के लिए 13,026 BLO और 28,881 BLA नियुक्त किए गए हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना, फर्जी या दोहराए गए नाम हटाना और सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया और अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय बन सके।
पहले दो चरणों में 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 59 करोड़ मतदाताओं का पुनरीक्षण पूरा किया जा चुका है। अब तीसरे चरण के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर देशभर में यह विशेष पुनरीक्षण अभियान लगभग पूरा हो जाएगा। इन क्षेत्रों में बाद में कार्यक्रम जारी किया जाएगा, क्योंकि वहां जनगणना प्रक्रिया और मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जा रहा है।
तीसरे चरण के तहत अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तारीखों पर प्रक्रिया पूरी की जाएगी और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन निर्धारित समयानुसार किया जाएगा। इस चरण में शामिल प्रमुख राज्यों में Haryana, Karnataka, Maharashtra, Punjab, Odisha और Jharkhand सहित कई राज्य शामिल हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को और अधिक सटीक बनाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करना है।
चुनाव आयोग ने जारी किया पूरा कार्यक्रम
जारी कार्यक्रम के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया मई से सितंबर 2026 के बीच चलेगी। इसमें घर-घर सत्यापन, मतदान केंद्रों का पुनर्गठन, ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन, दावे और आपत्तियां लेने की प्रक्रिया तथा अंतिम मतदाता सूची जारी करना शामिल है। सबसे पहले ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में 30 मई से 28 जून तक घर-घर सत्यापन अभियान चलेगा और 6 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक, झारखंड, मेघालय और दिल्ली में यह प्रक्रिया जून के अंत से शुरू होकर 7 अक्टूबर 2026 तक पूरी होगी।
आयोग ने बताया कितने BLO और BLA होंगे शामिल
आयोग ने बताया कि SIR के तहत करीब 3.94 लाख बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मतदाताओं के घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। उनके साथ राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी सहयोग करेंगे। चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे हर मतदान केंद्र पर अपने BLA नियुक्त करें, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सभी की भागीदारी वाली बन सके। आयोग के मुताबिक, इससे पहले पहले और दूसरे चरण में 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 59 करोड़ मतदाताओं के लिए SIR हुआ था। उस दौरान 6.3 लाख से ज्यादा BLO और 9.2 लाख से अधिक BLA इस प्रक्रिया में शामिल हुए थे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ रहे हैं। अब तक के रुझानों में भाजपा ने शतक जड़ दिया है और लगातार टीएमसी पर बढ़त बनाए हुए है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक भी भाजपा अब तक 171 सीटों पर बढ़त बना चुकी है, जबकि टीएमसी को 100 सीटों पर ही बढ़त है। ऐसी स्थिति में साफ माना जा रहा है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल कर लेगी। हालांकि आधिकारिक नतीजों के लिए इंतजार करना होगा, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल कर सकती है। इस बीच भाजपा ने नतीजे आने के बाद टीएमसी के रुख को लेकर भी चिंता जता दी है।
खड़गपुर सदर सीट से भाजपा कैंडिडेट दिलीप घोष का कहना है कि टीएमसी की ओर से नतीजे मानने से इनकार किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज ही नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में हालात तब से ठीक हुए, जब चुनाव आयोग ने कमान संभाली। उन्होंने कहा कि बंगाल के हालात चिंताजनक ही रहे हैं और खूनखराबा होता रहा है, लेकिन इस बार इलेक्शन शांतिपूर्ण रहे हैं। आयोग ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए, जिससे गड़बड़ी नहीं हो सकी। किसी व्यक्ति का कत्ल नहीं हो पाया। बता दें कि 2021 के चुनाव में हिंसा काफी हुई थी।
यहां तक कि भाजपा कार्यकर्ताओं में इसे लेकर असंतोष भी था। ऐसे में इस बार जिस तरह की सुरक्षा की गई, उससे भी माहौल बदला दिखा। दिलीप घोष ने कहा कि चुनाव का नतीजा तो तय है और अब सिर्फ औपचारिक घोषणा होनी है। उन्होंने कहा कि भाजपा कोशिश करेगी कि जनता ने जिस विश्वास के साथ मतदान किया है, उस पर खरा उतरा जाए। नई सरकार और बंगाल अब भारत के साथ आगे बढ़ेंगे, वे बांग्लादेश के साथ नहीं जाएंगे। जनता बदलाव चाहती है और उन्होंने भाजपा को अच्छी संख्या में सीटें देकर सरकार बनाने का मौका दिया है। घोष ने कहा कि बंगाल में कोई कानून नहीं चल रहा था।
घोष बोले- चुनाव आयोग ने संभाली व्यवस्था तो संभले हालात
उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले जब निर्वाचन आयोग ने व्यवस्था संभाली तो कानून व्यवस्था में सुधार आया। चुनाव शांतिपूर्ण हुए थे और अब काउंटिंग में भी बवाल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि अब नई सरकार भी इसी तरह से शपथ लेगी। घोष ने कहा कि पहले के चुनाव में गड़बड़ियां की जाती थीं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को घरों में ही बंद कर दिया जाता था। उन्हें 15 सालों तक वोटिंग करने से रोका गया। इस बार उन्हें चांस मिला तो उन्होंने बदलाव के लिए मतदान किया है।
पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होना है। 23 अप्रैल को पहले राउंड की वोटिंग होने जा रही है और 29 को दूसरे चरण में मतदान होगा। उससे पहले कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग पूरी तरह सख्त है। इस बीच बंगाल के कुल 8000 पोलिंग बूथ को आयोग ने सुपर सेंसेटिव घोषित किया है। ये उन इलाकों के ही बूथ हैं, जहां पहले चरण में ही मतदान होना है। इसका अर्थ है कि यहां हिंसा, बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा सकता है। चुनाव आयोग ने इस बीच 135 ऐसे लोगों को पकड़ा है, जो दबंग प्रवृत्ति के माने जाते हैं और उनका अराजकता फैलाने का इतिहास रहा है। चुनाव संपन्न होने तक इन लोगों को हिरासत में रखा जाएगा।
पुलिस ने जिन 135 लोगों को उठाया है, उनमें से ज्यादातर मुर्शिदाबाद, मालदा, बलूरघाट, उत्तर और दक्षिण 24 परगना के रहने वाले हैं। दरअसल पहले के चुनावों में भी ऐसे करीब 200 स्थान हैं, जहां पहले हिंसा होती रही है। ऐसे में चुनाव ने इन इलाकों से जुड़े पोलिंग बूथ को सुपर सेंसेटिव की कैटिगरी में डाला है। फिलहाल चुनाव आयोग के निर्देश पर इन सभी इलाकों में डीएम और एसपी भी दौरे कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना की आशंका को टाला जा सके। इसके अलावा जनता के बीच साफ-सुथरे चुनाव होने और डर से परे रहने का भरोसा जगाया जा सके।
प्रशासन का कहना है कि कई दबंगों ने तो एक नोटिस मिलते ही खुद सरेंडर कर दिया। कुछ लोगों को पकड़ना पड़ा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक बार फिर से कहा है कि हम बंगाल में भयमुक्त और अपराध मुक्त चुनाव कराएंगे। उनका कहना है कि इसके लिए हरसंभव तैयारी हमने की है। इस चुनाव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी चुनाव आयोग खूब सहारा ले रहा है।
चुनाव में सुरक्षा के लिए AI का इस्तेमाल, गड़बड़ी पर करेगा अलर्ट
बूथ के अंदर या फिर बाहर किसी तरह की गड़बड़ी होने पर यह सिस्टम तुरंत अलर्ट करेगा। इसके अलावा एक एआई से लैस कंट्रोल कमांड सेंटर भी बनाया जा रहा है। इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारी और राज्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तरों में भी कंट्रोल सेंटर होंगे। यहां से संबंधित जिलों की निगरानी की जाएगी। कुल मिलाकर निगरानी के लिए थ्री-टियर सिस्टम स्थापित किया जाएगा। बता दें कि चुनाव आयोग ने प्रदेश की कुल 55 विधानसभाओं को भी खर्च के लिहाज से संवेदनशील माना है। इन सीटों में ममता बनर्जी की भबानीपुर विधानसभा भी शामिल है। यहां से उन्हें भाजपा के सीनियर नेता शुभेंदु अधिकारी चुनौती दे रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच वोटर लिस्ट को लेकर नया अपडेट आ गया है। चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा और अहम डेटा जारी किया है। इस बार खास बात यह रही कि आयोग ने पहली बार जिलावार तरीके से नाम जोड़ने और हटाने की पूरी जानकारी सार्वजनिक की है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर काफी बड़ी और जटिल दिखती है। आयोग के मुताबिक, अब तक कुल 90.66 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यह बड़ा डेटा माना जा रहा है।
अबतक 90.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए
चुनाव आयोग ने पहली बार जिलेवार तरीके से नाम जोड़ने और हटाने की भी जानकारी शेयर की है. आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में एसआईआर की इस प्रक्रिया में अब तक कुल 90.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. पहले चरण में दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट लिस्ट के दौरान 58.2 लाख नाम हटाए गए थे, जबकि फरवरी 2026 की अंतिम सूची तक 5.46 लाख अतिरिक्त नाम हटाए गए हैं।
चुनाव आयोग के मुताबिक लॉजिकल विसंगति यानी डेटा में तकनीकी गड़बड़ियों के आधार पर 60 लाख से ज्यादा वोटरों को जांच के दायरे में रखा गया था. इन मामलों को अंडर एडजुडिकेशन की कैटेगरी में रखा गया था ताकि अधिकारी गहराई से इनकी जांच कर सकें. आयोग के मुताबिक, अब तक लगभग 59.84 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है. इस जांच के बाद करीब 32.68 लाख पात्र लोगों के नाम दोबारा जोड़े गए हैं, जबकि अपात्र मिले 27.16 लाख लोगों के नाम काटे गए।
ECI के इतिहास में पहली बार हुआ ये काम
इलेक्शन कमीशन के इतिहास में ये पहली बार है जब पश्चिम बंगाल को लेकर एसआईआर के संबंध में जिलेवार नाम जोड़ने और हटाने का डेटा सार्वजनिक किया गया है. आयोग का मकसद पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और चुनावी सूचियों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है. बता दें कि ये डेटा अब सार्वजनिक तौर पर भी उपलब्ध है।
न्यायिक अधिकारियों के ई-हस्ताक्षर होते ही जारी होंगे आंकड़े
जबकि पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक निर्णय के लिए भेजे गए कुल 60,06,675 मामलों में से 59,84,512 मामलों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिन पर न्यायिक अधिकारियों के ई-हस्ताक्षर भी हो चुके हैं। इसके अलावा, 59,84,512 मामलों में से, जिन मतदाताओं को न्यायिक अधिकारियों द्वारा हटाए जाने योग्य माना गया है। उनके नामों को हटा दिया गया है। उनकी संख्या 27,16,393 है।
91 लाख वोटरों के कट जाएंगे नाम
इसका मतलब यह है कि पश्चिम बंगाल में हटाए गए मतदाताओं की कुल संख्या वर्तमान में 90,83,345 है। मालूम हो कि पिछले साल नवंबर में पश्चिम बंगाल के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की अधिसूचना जारी होने से पहले, राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 7,66,37,529 थी। पिछले साल दिसंबर में प्रकाशित मतदाताओं की मसौदा सूची में, कुल 58,20,899 नाम हटाए गए थे। 28 फरवरी को जारी की गई अंतिम वोटर लिस्ट में, हटाए गए नामों की संख्या बढ़कर 63,66,952 हो गई।
अब, न्यायिक अधिकारियों ने 27,16,393 मामलों को हटाने लायक पाया है। इसके बाद, पूरे SIR प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल में हटाए गए वोटरों की कुल संख्या बढ़कर 90,83,345 हो गई है। इसके अलावा CEO कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि जिन वोटरों के नाम न्यायिक जांच प्रक्रिया में "हटाने लायक" पाए गए हैं। उन्हें अपनी बात रखने का और अपील करने का एक अवसर मिलेगा।
वहीं, विपक्षी दल (खासकर तृणमूल कांग्रेस) इस बड़े पैमाने पर नाम हटाने को वोटरों को बाहर करने की साजिश बता रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि अल्पसंख्यक और सीमावर्ती इलाकों पर ज्यादा असर पड़ा है. वहीं, बीजेपी और चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने का जरूरी कदम बता रहे हैं।
दो चरणों में मतदान
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों- 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है. ऐसे में इस SIR प्रक्रिया और नाम हटाने के आंकड़ों पर सियासी घमासान तेज हो गया है।
एक बार अपील करने का मिलेगा मौका
CEO कार्यालय से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक जांच अभ्यास के दौरान "हटाने लायक" पाए गए मामलों की सबसे अधिक संख्या अल्पसंख्यक-बहुल मुर्शिदाबाद जिले से थी। मुर्शिदाबाद से हटाए गए नामों की कुल संख्या 4,55,137 है।
इसके बाद उत्तर 24 परगना का नंबर आता है। जहां 3,25,666 नाम हटाए गए। बता दे कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे। पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होगा और दूसरे चरण में बाकी 142 सीटों पर मतदान होगा। इसके बाद चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डेटा जारी
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट आज मंगलवार तक हर हाल में पब्लिश करने के आदेश दिए थे. साथ ही यह भी कहा था कि अगर सभी दस्तावेजों पर डिजिटल साइन नहीं भी हुए तो भी लिस्ट निकाली जाए. इसके अलावा कलकत्ता हाईकोर्ट को 3 पूर्व जजों की एक कमेटी बनाने के आदेश दिए. वोटर लिस्ट पब्लिश करने की आखिरी तारीख सोमवार थी, लेकिन काम न पूरा होने के चलते संभव नहीं सका. लिहाजा आज मंगलवार को चुनाव आयोग ने डेटा जारी किया है।
चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघनों पर त्वरित कार्रवाई के लिए 5,000 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड्स (उड़नदस्ते) और 5,200 से ज्यादा स्टेटिक सर्विलांस टीमों की तैनाती की है। शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के अंदर करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों की शिकायतों के लिए 1950 टोल-फ्री नंबर और सी-विजिल ऐप के माध्यम से रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है। राजनीतिक दलों को रैलियां, जुलूस या सभाओं के लिए पहले से पुलिस को सूचित करना अनिवार्य है, लाउडस्पीकर आदि की इजाजत लेनी होगी। सार्वजनिक स्थलों जैसे मैदानों या हेलीपैड के उपयोग के लिए सुविधा पोर्टल पर पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवेदन करना होगा।
EC का सख्त निर्देश
मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आधिकारिक कार्यों को चुनाव प्रचार से न जोड़ें व सरकारी मशीनरी, वाहनों या कर्मचारियों का दुरुपयोग न होने दें। निजी संपत्तियों पर बिना मालिक की अनुमति के पोस्टर, बैनर या झंडे नहीं लगाए जा सकेंगे। नागरिकों की निजता का सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा व निजी आवासों के बाहर प्रदर्शन या धरना प्रतिबंधित रहेगा। चुनाव आयोग ने सभी स्तर के अधिकारियों से निष्पक्षता बरतने और सभी दलों के साथ समान व्यवहार करने का आह्वान किया है।
मतदान की तिथियां चार चरणों में निर्धारित की गई हैं। 9 अप्रैल को केरल, असम और पुडुचेरी में एक ही चरण में, 23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल का पहला चरण और तमिलनाडु, जबकि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल का दूसरा चरण होगा। सभी राज्यों में मतगणना 4 मई 2026 को होगी। साथ ही 6 राज्यों में उपचुनाव भी घोषित किए गए हैं। चुनाव आयोग का उद्देश्य है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और कानून के अनुसार चले, जिससे लोकतंत्र की मजबूती बनी रहे।
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भारत के छह राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम पूरा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिन्हें अयोग्य पाया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या मिलाकर 1 करोड़ 70 लाख से ज्यादा घट गई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह हटाए गए मतदाताओं और नए जोड़े गए योग्य मतदाताओं के अंतर के आधार पर नेट बदलाव है।
कितने घटे मतदाता?
मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार द्वीप, गोवा और केरल समेत कुल नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर शुरू होने से पहले मतदाताओं की संख्या लगभग 21.45 करोड़ थी। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद यह घटकर करीब 19.75 करोड़ रह गई, यानी कुल मिलाकर 1.70 करोड़ से अधिक मतदाता कम हो गए।
गुजरात में 68 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे
सबसे ज्यादा नाम गुजरात में हटाए गए हैं। यहां कुल 68 लाख 12 हजार 711 मतदाताओं के नाम सूची से हटे, जिससे कुल मतदाता संख्या लगभग 5.08 करोड़ से घटकर 4.40 करोड़ रह गई, यानी करीब 13.40% की कमी दर्ज हुई। इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर रहा, जहां करीब 34.25 लाख नाम हटाए गए और मतदाता संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.39 करोड़ हो गई।
राजस्थान में 31 लाख तो छत्तीसगढ में 25 लाख मतदाता के नाम हटे
अन्य राज्यों में भी बड़ी कटौती देखी गई। राजस्थान में लगभग 31.36 लाख मतदाताओं के नाम हटे, छत्तीसगढ़ में करीब 24.99 लाख, जबकि केरल में करीब 8.97 लाख नाम कम हुए। छोटे राज्यों में गोवा में लगभग 1.27 लाख नाम हटे। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान-निकोबार, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भी मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई।
किस वजह से हटाए गए मतदाताओं के नाम?
चुनाव आयोग के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटाने के मुख्य कारणों में मौत, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना, एक से अधिक जगह पंजीकरण होना या पात्रता से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करना लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और पात्र नागरिक अब भी नाम जुड़वाने, हटवाने या सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं।
यूपी, बंगाल और तमिलनाडु में SIR जारी
आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के आंकड़े इस महीने के अंत तक जारी किए जाएंगे। देशभर में 12 राज्यों में चल रहे इस अभियान का अगला चरण अप्रैल से शुरू होगा, जिसके तहत पूरे देश में मतदाता सूचियों का सत्यापन जारी रहेगा।
विवाद और कानूनी चुनौती, असम में अलग प्रक्रिया
इस पूरे अभियान के दौरान कई जगह शेड्यूल में बदलाव भी किए गए। बिहार की तरह ही तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह अभियान मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट रखने के लिए किया जा रहा है। असम में एसआईआर की जगह स्पेशल रिविजन प्रक्रिया अपनाई गई थी, जो 10 फरवरी को पूरी हो चुकी है।
देशभर में चल रहा है अभियान
चुनाव आयोग का यह विशेष पुनरीक्षण अभियान देश के कई हिस्सों में जारी है। बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अभी 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह काम चल रहा है, जहां लगभग 60 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके बाद अगले चरण में 17 राज्यों और 5 केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 40 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जाएगा।
चुनाव आयोग ने बिहार के बाद अब 12 और राज्यों, एक केंद्र शासित प्रदेश में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का ऐलान किया है. इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्य भी शामिल हैं. एसआईआर की प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू होगी, जो 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के साथ पूरी होगी.
एसआईआर के लिए प्रिंटिंग और प्रशिक्षण का कार्य 28 अक्टूबर से शुरू हो गया है. यह कार्य 3 नवंबर तक चलेगा. बिहार में एसआईआर पर उठे सवाल, इसे लेकर हुए विवाद के बाद इसमें क्या बदलाव हुए हैं और आम मतदाता को इस दौरान क्या करना होगा?
दरअसल, देश के तीन केंद्र शासित प्रदेशों समेत 12 राज्यों में होने जा रहा एसआईआर बिहार से काफी अलग होगा. सबसे बड़ा बदलाव आधार कार्ड को लेकर है. बिहार में एसआईआर के दौरान पहचान के दस्तावेजों की लिस्ट में आधार को शामिल नहीं किया गया था, जिसे लेकर जमकर सियासी विवाद हुआ था. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग को बाद में इसे दस्तावेज के तौर पर स्वीकार करना पड़ा था.
बिहार से कितना अलग होगा इस बार का एसआईआर
इस बार के एसआईआर के दौरान स्वीकृत किए जाने वाले दस्तावेजों की लिस्ट में एसआईआर पहले से ही शामिल है. दूसरा बड़ा बदलाव समय सीमा में देखने को मिल रहा है.
बिहार में एसआईआर का पहला चरण 27 जून को शुरू हुआ था और 1 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन हुआ था. बिहार में एसआईआर की पूरी प्रक्रिया करीब सवा दो महीने में पूरी हो गई थी. वहीं, इस बार एसआईआर का पहला चरण 4 नवंबर से शुरू हो रहा और मतदाता सूची का प्रकाशन 7 फरवरी को होना है. यानी इस बार एसआईआर की प्रक्रिया तीन महीने से भी अधिक समय तक चलनी है.
बिहार एसआईआर में उन सभी मतदाताओं से दस्तावेज मांगे गए थे, जिनके नाम 2003 के बाद वोटर लिस्ट में शामिल हुए थे. इस बार ऐसे कॉलम बनाए गए हैं, जिससे अंतिम एसआईआर में अगर पिता का नाम शामिल था तो बिना दस्तावेज ही उस व्यक्ति का नाम मान्य कर लिया जाएगा.
एक बदलाव यह भी हुआ है कि पिछली एसआईआर के समय किसी और राज्य में रहे व्यक्ति के रिश्तेदार या पुत्र को भी किसी दूसरे राज्य में भी दस्तावेज नहीं देना होगा. बिहार एसआईआर में ऐसा नहीं था.
एन्युमरेशन फॉर्म के साथ ही इस बार के एसआईआर में वोटर लिस्ट में नाम शामिल करवाने के लिए फॉर्म 6 भी भरा जा सकेगा. बिहार में ऐसा नहीं था. वहां एसआईआर के दूसरे चरण में फॉर्म 6 स्वीकार किए गए थे.
दूसरे चरण में भी बदलाव
एसआईआर का दूसरा चरण भी बिहार से अलग होगा. 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में एसआईआर का दूसरा चरण दावे और आपत्तियों का होगा. इस बार उन सभी को नोटिस भेजा जाएगा, जिनके नाम वोटर लिस्ट में नहीं जोड़े जा सके हैं. उन सभी की सुनवाई भी की जाएगी. बिहार में ऐसा नहीं था. बिहार नोटिस केवल उनको ही भेजा गया था, जो डॉक्यूमेंट्स नहीं दे पाए थे.
इन राज्यों में होना है एसआईआर
बिहार के बाद जिन 12 राज्यों में एसआईआर होनी है, उनमें तीन केंद्र शासित प्रदेश- पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप भी शामिल हैं. एसआईर के इस फेज में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, गोवा, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल राज्य शामिल हैं. इसके लिए 5 लाख 33 हजार बूथ लेवल ऑफिसर्स की ड्यूटी लगाई गई है और 7 लाख 64 हजार के करीब राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे.
]]>मध्य प्रदेश में प्रशासनिक स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने राज्य के कलेक्टरों, एसडीएमों और तहसीलदारों के तबादलों पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है. यह फैसला मुख्य रूप से विशेष गहन पुनरक्षिण कार्य (Special Intensive Revision – SIR) के महत्व को देखते हुए लिया गया है, जो मतदाता सूची पुनरीक्षण से संबंधित है.आयोग के निर्देशानुसार ये तबादले अब 7 फरवरी 2026 तक नहीं किए जाएंगे.
MP में अफसरों के ट्रांसफर पर रोक!
दरअसल, राज्य में कलेक्टर, SDM (जॉइंट कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर) और तहसीलदारों के ट्रांसफर 7 फरवरी तक नहीं हो पाएंगे. चुनाव आयोग ने चीफ सेक्रेटरी को निर्देश जारी कर कहा है कि SIR प्रोसेस पूरा होने तक इन अधिकारियों का ट्रांसफर न किया जाए. बहुत ज़रूरी होने पर ही चुनाव आयोग से परमिशन लेकर ट्रांसफर किए जा सकेंगे. सरकार इस दौरान सीनियर IAS अधिकारियों का ट्रांसफर कर सकेगी और इस पर कोई रोक नहीं होगी.
भारत निर्वाचन आयोग ने इसको लेकर जारी निर्देश में मुख्य सचिव से साफ तौर पर कहा है कि मतदाता सूची के काम में जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (जॉइंट कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर), सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (तहसीलदार या नायब तहसीलदार) के तबादले एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद नहीं होंगे।
आयोग ने कहा है कि मुख्य सचिव की यह भी जिम्मेदारी होगी कि किसी भी विधानसभा क्षेत्र में रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी का पद रिक्त नहीं होना चाहिए ताकि आयोग द्वारा तय टाइमलाइन में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की कार्यवाही की जा सके। इस काम में आवश्यक बीएलओ और सुपरवाइजर्स की कमी भी नहीं हो, इसका ध्यान कलेक्टर और राज्य शासन रखेगा।
7 फरवरी 2026 के बाद होंगे तबादले
बता दें कि तबादलों पर रोक SIR यानी विशेष गहन पुनरक्षिण कार्य के कारण लगाई गई है. मूल्यांकन/प्रशिक्षण 28 अक्टूबर से 3 नवंबर, 2025 तक होगी. घर-घर जाकर गिनती 4 नवंबर से 4 दिसंबर, 2025 तक होगी. प्रारंभिक मतदाता सूची का प्रकाशन 9 दिसंबर, 2025 को किया जाएगा. दावे/आपत्तियों की का समय 9 दिसंबर, 2025 से 8 जनवरी, 2026 तक होगा. फाइनल वोटर लिस्ट 7 फरवरी 2026 को पब्लिश की जाएगी. निर्देशों के मुताबिक ये ट्रांसफर अब 7 फरवरी, 2026 तक नहीं किए जाएंगे.
अपर कलेक्टर प्रभावित नहीं, संभागायुक्त मॉनिटरिंग करेंगे चुनाव आयोग ने वैसे तो तबादले से संभागायुक्तों को सीधे तौर पर प्रतिबंधित नहीं किया है लेकिन मतदाता सूची के परीक्षण की पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी संभागायुक्तों को सौंपी गई है। इसलिए संभागायुक्त भी तबादले से बचे रह सकते हैं। जिलों में पदस्थ अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारी जो अपर कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत की जिम्मेदारी निभाते हैं वे जरूर चुनाव आयोग के तबादला प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे। सरकार उनके तबादले कर सकती है।
आईपीएस, एसपीएस और सीनियर आईएएस पर भी रोक नहीं चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि पुलिस अधीक्षक, आईजी और अन्य सीनियर आईपीएस के अलावा एसडीओपी, सीएसपी, डीएसपी स्तर के अधिकारी या टीआई भी किसी तरह के तबादले के प्रतिबंध में नहीं रहेंगे। सरकार चाहे तो मंत्रालय और विभिन्न विभागों में पदस्थ सीनियर आईएएस अफसरों के भी तबादले कर सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये अधिकारी मतदाता सूची के रजिस्ट्रीकरण की कार्यवाही से किसी तरह से सीधे तौर पर नहीं जुड़े हैं।
कलेक्टरों, संभागायुक्तों को आज मिलेगी ट्रेनिंग
उधर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा ने बुधवार को प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी तथा संभागायुक्तों को SIR की ट्रेनिंग देगा। इसको लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मंगलवार को सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि कलेक्टरों, संभागायुक्तों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये दी जाने वाली ट्रेनिंग में उपस्थित रहने के निर्देश शासन स्तर पर जारी किए जाएं।
चुनाव से जुड़ी मुख्य तारीखें
मूल्यांकन/प्रशिक्षण: 28 अक्टूबर से 3 नवम्बर 2025
घर-घर गणना: 4 नवम्बर से 4 दिसम्बर 2025
प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशन: 9 दिसम्बर 2025
दावे/आपत्तियों की अवधी: 9 दिसम्बर 2025 से 8 जनवरी 2026
अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन: 7 फरवरी 2026
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राजनीतिक दलों को भी बढ़ानी होगी बीएलए की संख्या
राजनीतिक दलों की ओर से 1,18,500 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त किए गए हैं। भाजपा के निर्वाचन आयोग समन्वय विभाग के प्रदेश संयोजक एसएस उप्पल ने बताया कि भाजपा के प्रदेश में 64 हजार 500 बीएलए है और कांग्रेस के 54 हजार बीएलए हैं। बूथों की संख्या बढ़ने से राजनीतिक दलों को भी अपने बीएलए बढ़ाने होंगे। उनका प्रशिक्षण से लेकर उनकी जानकारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को देनी होगी। इसी आधार पर वे आगामी चुनाव में पार्टी के लिए कार्य कर पाएंगे।
इसलिए पड़ी जरूरत
1500 मतदाताओं पर एक बूथ की व्यवस्था है लेकिन इतनी संख्या होने पर समय से मतदान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है। कई बार देर रात तक मतदान की स्थिति देखी गई है। ऐसे में निर्वाचन आयोग ने इसकी नई गाइडलाइन तय कर किसी भी पोलिंग बूथ पर अधिकतम 1200 मतदाता ही रखे जाने का निर्णय लिया।
राजनीतिक पार्टियों ने क्या कहा?
भाजपा प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कि निर्वाचन आयोग की तैयारियों के साथ हमारी भी तैयारी है। हमारे अभी करीब 64 हजार 500 बीएलए है। इनकी चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्ति की गई है। जैसे ही निर्वाचन आयोग बूथों की संख्या बढ़ाएगा, हम अपने बीएलए भी उसी अनुरूप बनाएंगे।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के सलाहकार केके मिश्रा ने कहा कि निर्वाचन आयोग के हर पारदर्शी निर्णय का कांग्रेस पार्टी पालन करने को तैयार है। हमारी पूरी तैयारियां भी है, किंतु निर्वाचन आयोग को अपनी ईमानदार और निष्पक्षता वाली शैली को देश के सामने प्रस्तुत करना होगा।
]]>बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठे विवादों और कानूनी चुनौतियों के बाद, चुनाव आयोग (EC) अब इस प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने जा रहा है। इसका उद्देश्य मतदाताओं की परेशानियों को कम करना और प्रक्रिया को मतदाता अनुकूल बनाना है। बिहार में SIR के दौरान दस्तावेजों की जटिल मांग, फॉर्म न भरने पर नामों की बड़ी संख्या में हटाई गई प्रविष्टियां (डिलीशन) और बहुत कम समय सीमा जैसी समस्याओं को लेकर मतदाताओं में असंतोष था। अब आयोग इन तीनों बिंदुओं पर लचीलापन लाने की योजना बना रहा है।
दस्तावेजों की अनिवार्यता में ढील
बिहार में पहली बार हर मतदाता से नए दस्तावेजों की मांग की गई थी, जिससे लोगों में भ्रम और तनाव फैला। अब आयोग इस नीति में बदलाव पर विचार कर रहा है ताकि कम से कम मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने पड़ें। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) पुराने रजिस्टरों और पारिवारिक लिंक के आधार पर ऐसे मतदाताओं की पहचान कर रहे हैं जिनसे नए सिरे से प्रमाण पत्र नहीं मांगे जाएंगे।
फॉर्म न भरने पर नाम हटाने की नीति में बदलाव
बिहार में इस साल SIR के दौरान करीब 65 लाख नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे इनमें मृतक, स्थानांतरित व्यक्ति और वे लोग शामिल थे जिन्होंने एन्यूमरेशन फॉर्म या दस्तावेज जमा नहीं किए। यह प्रक्रिया पहले के रिवीजन की तुलना में असामान्य थी। अब आयोग विचार कर रहा है कि ड्राफ्ट सूची से नाम न हटाए जाएं, बल्कि हर मतदाता को अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले फिर से शामिल होने का अवसर दिया जाए।
समय सीमा बढ़ाने पर विचार
बिहार में SIR प्रक्रिया तीन महीने तक चली। 25 जून से एक महीने तक एन्यूमरेशन, फिर 30 दिन में वेरिफिकेशन, और 30 सितंबर को अंतिम सूची जारी की गई। यह कार्यक्रम विधानसभा चुनावों की घोषणा से सिर्फ छह दिन पहले पूरा हुआ। इस तंग समय सीमा ने मतदाताओं और सरकारी कर्मचारियों दोनों पर बेहद दबाव डाला। अब आयोग मानता है कि इतनी कठोर समय सीमा, वह भी चुनाव से ठीक पहले, व्यावहारिक नहीं है। इसलिए भविष्य के SIR में अवधि बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है।
बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी में होंगे SIR
चुनाव आयोग के पास अगले SIR के लिए ज्यादा समय नहीं है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में मई 2026 तक नई विधानसभा बननी है। आयोग आम तौर पर फरवरी के अंत तक चुनाव कार्यक्रम घोषित करता है, इसलिए दीपावली के तुरंत बाद इन राज्यों में SIR की घोषणा की संभावना है।
हाल ही में बाढ़ या मौसम की विपरीत परिस्थितियों से प्रभावित राज्य तथा वे राज्य जहां स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं, उनमें SIR को अगले चरण में आयोजित किया जाएगा।
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