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विद्युत नियामक आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड को कास्ट डाटा बुक का उल्लंघन करने के मामले में उपभोक्ताओं का पैसा वापस करने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों में उल्लेख किया गया है कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के करीब एक लाख उपभोक्ताओं का 40 करोड रुपए वापस किया जाए। यह धनराशि बिजली विभाग को अप्रैल 2026 से जुलाई 2026 के बिजली बिलों में समायोजित करनी होगी l
बिजली विभाग ने कास्ट डाटा बुक की अनदेखी करते हुए बिजली उपभोक्ताओं से कनेक्शन का निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क लिया था। इस पूरे मामले को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और केंद्र व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया था।
अधिक पैसा देने वाले उपभोक्ता भी इससे अंजान थे। मामला आयोग पहुंचा तो उपभोक्ताओं ने भी बिजली विभाग द्वारा अधिक कनेक्शन शुल्क लेने पर नाराजगी जताई थी। विद्युत नियामक आयोग में मामले की सुनवाई कई महीनों से चल रही थी इस पर विद्युत नियामक आयोग ने बिजली विभाग को निर्देश दिए हैं कि कास्ट डाटा बुक के हिसाब से ही कनेक्शन शुल्क लिया जाए।
कनेक्शन शुल्क के मुताबिक बिजली विभाग को सिंगल फेस का 2800 रुपये लेना चाहिए लेकिन बिजली विभाग के अभियंताओं ने 6,016 रुपए लिए। l इसी तरह थ्री फेस का 4,100 लेना चाहिए लेकिन बिजली विभाग ने 11,341 रुपए लिए। इस संबंध में बिजली अभियंताओं का तर्क है कि जो कंप्यूटर पर धनराशि आती है, वही अभियंता व काउंटर पर बैठा कर्मी काटता है। उसमें फेरबदल उच्च स्तर पर ही हो सकता है। इसमें अभियंता की कोई गलती नहीं है। वहीं बिजली विभाग अधिक कनेक्शन धनराशि देने वाले उपभोक्ता को शेष धनराशि बिल में समायोजित करेगी। वर्मा के मुताबिक इससे पहले भी बिजली विभाग ने कास्ट डाटा बुक के नियमों की अनदेखी की थी, तब बिजली विभाग को एक करोड़ 75 लाख रुपये वापस करने पड़े थे।
क्या है कास्ट डाटा बुक
कष्ट डाटा बुक में बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं से जो बिजली के अलग-अलग मद का शुल्क लिया जाता है उसका उल्लेख होता है। इससे अतिरिक्त बिजली विभाग नहीं ले सकता। यह कास्ट डाटा बुक विद्युत नियामक आयोग द्वारा अभियंताओं व उपभोक्ताओं की आपत्तियां सुनने के बाद तैयार की जाती है। उसके आधार पर ही पूरे उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं से हर मद का शुल्क लेने का नियम है।
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स्मार्ट मीटर लगते ही बढ़ गया बिल
प्रकरण में सामने आया कि स्मार्ट मीटर लगाने के दो दिन के भीतर ही उपभोक्ता का बिजली बिल चार गुना बढ़ गया। अप्रैल 2025 में 159 यूनिट खपत पर 437 रुपए का बिल जारी हुआ था, लेकिन दो दिन बाद ऑनलाइन पोर्टल पर 157 यूनिट खपत के साथ 1830 रुपए की राशि दर्शा दी गई।
दो दिन में चार गुना बढ़ा बिल
शशि वाजपेयी ने आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि बिजली कंपनी ने बिना स्पष्ट सहमति के उनका पुराना मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर स्थापित कर दिया। विरोध के बाद पुराना मीटर दोबारा लगाया गया, लेकिन इसका सही रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया। आयोग ने माना कि एक ही माह में दो अलग बिल जारी करना और शिकायत के बावजूद सुधार न करना सेवा में कमी है।
आयोग ने मानी कमी
आयोग ने कंपनी को 45 दिनों में वास्तविक खपत के आधार पर संशोधित बिल जारी करने के आदेश दिए। साथ ही 2,000 रुपए मानसिक क्षति और 2,000 रुपए वाद व्यय देने के निर्देश दिए।
स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ता विवाद
शहर में अब तक करीब 23 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का आरोप है कि इनसे बिजली बिल बढ़ रहा है। विरोध के चलते फिलहाल स्मार्ट मीटर लगाने का काम रोक दिया गया है।
ये स्थिति केवल ग्वालियर शहर में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में बनी हुई है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद लगातार दो-तीन गुना बिल बढ़ने की शिकायतें बिजली विभाग तक पहुंच रही हैं।
]]>कोई शख्स बिजली के बिल से परेशान है, तो उसे क्या करना चाहिए? कोई कहेगा कि बिजली का कम से कम इस्तेमाल करें, ज्यादा खपत वाले उपकरणों (जैसे AC या हीटर) को सीमित समय के लिए चलाएं. लेकिन अगर कोई इस समस्या का बिल्कुल अलग समाधान बताए.
ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक पाकिस्तान के मौलाना ने बिजली का बिल कम करने का ऐसा अनोखा तरीका बताया कि सुनने वाले हैरान रह गए. यह क्लिप अब तेजी से वायरल हो रही है.
पाकिस्तान के एक प्राइवेट चैनल पर एक शो प्रसारित होता है, जिसका कॉन्सेप्ट यह है कि मौलाना आजाद जमील नाम के शख्स लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उनके समाधान बताते हैं.
बिजली के मीटर और 'जमजम' का क्या कनेक्शन?
इसी कड़ी में, कराची के एक शहरी ने शो में सवाल किया कि उसका बिजली का बिल बहुत ज्यादा आता है और उसने इसका कोई हल जानना चाहा. इस पर मौलाना आजाद जमील ने बिजली का बिल कम करने का एक अनोखा हल बताया. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के घर में बिजली का बिल ज्यादा आता है, वे अपने बिजली के मीटर पर उंगली से 'जम-जम' लिखें, इससे उनके बिल में कमी आएगी.
पाकिस्तानी मौलाना का यह बयान देखते ही देखते वायरल हो गया. कुछ लोगों ने इसे सुनकर सिर पकड़ लिया, जबकि कुछ का मानना था कि शायद यह एक तंज था.
हालांकि, पाकिस्तान के कई लोगों ने इस पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं. किसी ने कहा कि दरअसल, मौलाना साहब का असली मतलब यह था कि उंगली उन स्विचों पर रखें, जो बेवजह चालू हैं-जैसे पंखे या AC के स्विच पर उंगली रखें. अगर ऐसा किया जाए, तो अगले महीने तक बिजली का बिल खुद ही कम हो जाएगा!
हालांकि, कई लोगों ने इस नुस्खे को आजमाया और अपने अनुभव कमेंट में अपने अनुभव भी शेयर किए. किसी ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ा, जबकि किसी और का कहना था कि उन्होंने दो बार 'जम-जम' लिख दिया, जिससे उनका बिजली का बिल अब दोगुना आने लगा.
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गौरतलब है कि बिजली कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने इस संबंध में कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी 16 जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखकर शासकीय विभाग में कार्यरत सेवकों से राशि जमा करने का आग्रह किया था। इसके बाद कलेक्टरों ने भी जिले के सभी विभाग प्रमुखों को पत्र लिखकर इस बात की आवश्यकता बताई थी। पत्र में कहा था कि जिले के विभिन्न शासकीय विभाग में कार्यरत अनेक शासकीय सेवक, नियमित, संविदा, बाहय स्रोत आदि के द्वारा अपने बिजली बिल का नियमित भुगतान नहीं किया जाता है। ऐसे कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए बिजली कंपनी के प्रबंध संचालक ने पत्र लिखा था। कलेक्टर ने पत्र के माध्यम से विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए कि वह अपने-अपने कार्य क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को वेतन मानदेय आदि भुगतान किया जाता है, उनके विरुद्ध बिजली बिल भुगतान समय पर नहीं करने पर उचित कार्रवाई करें। कंपनी ने कहा है कि इनमें से कई कर्मचारियों के ऊपर लाखों रुपए का बिल बकाया है।
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