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मनेन्द्रगढ़/एमसीबी
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के जनकपुर क्षेत्र में एक हृदय विदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। जीवनयापन की साधारण दिनचर्या निभाने जंगल गए एक ग्रामीण की जंगली हाथी के हमले में असमय मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा जनकपुर पार्क परिक्षेत्र के खोहरा गांव में घटित हुआ, जहां अब हर ओर सन्नाटा और भय पसरा हुआ है।
मृतक की पहचान 55 वर्षीय प्रेमलाल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि 19 अप्रैल की शाम करीब 6 बजे वे खड़घाट जंगल में महुआ बीनने गए थे, शायद रोज की तरह कुछ उम्मीदों के साथ। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। जंगल में अचानक सामने आए एक हाथी ने उन पर हमला कर दिया। असहाय प्रेमलाल उस भीषण हमले का सामना नहीं कर सके और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार का सहारा छीन लिया, बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं गांव में मातम का माहौल बना हुआ है।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है तथा मृतक के परिजनों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।
इधर, इस हादसे के बाद ग्रामीणों में हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही को लेकर डर और चिंता दोनों बढ़ गए हैं। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में सतत निगरानी, अलर्ट सिस्टम और सुरक्षा के ठोस इंतजाम करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी और घर का चिराग यूं न बुझ जाए।
मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एक अनोखी और पहली बार की जा रही पहल के चलते एक बार फिर सुर्खियों में है। जहां अब तक यह टाइगर रिजर्व बाघों के संरक्षण और गणना के लिए प्रसिद्ध रहा है, वहीं अब यहां जंगली हाथियों की पहचान भी डिजिटल तरीके से की जा रही है। प्रबंधन द्वारा एलीफेंट आईडी परियोजना शुरू की गई है, जिसके तहत हर हाथी की तस्वीर खींचकर उसे एक विशेष कोड और पहचान क्रमांक दिया जा रहा है।
यह प्रक्रिया प्रदेश में पहली बार किसी टाइगर रिजर्व में अपनाई जा रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य यह है कि अब तक जिन जंगली हाथियों की संख्या का सिर्फ अनुमान ही लगाया जाता था, उनकी सटीक गिनती और गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इसके साथ ही यह भी पता चल सकेगा कि कौन-कौन से हाथी किस-किस झुंड का हिस्सा हैं और वे किन क्षेत्रों में ज्यादा सक्रिय हैं।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के नौ परिक्षेत्रों की 139 बीटों में समय-समय पर हाथियों की गतिविधियां देखी जाती हैं। जब भी किसी क्षेत्र में हाथियों का मूवमेंट दिखाई देता है, तो रिजर्व प्रबंधन द्वारा हाथी विशेषज्ञों की टीम मौके पर भेजी जाती है। यह टीम हाथियों के सिर, कान, पूंछ और पीठ की तस्वीरें लेती है। इन अंगों की तस्वीरों को आधार बनाकर कंप्यूटर पर उनकी विशिष्ट पहचान यानी आईडी तैयार की जाती है। इसके बाद हर हाथी को एक कोड नंबर दिया जाता है, जो E-1 , E-2 जैसे प्रारूप में होता है।
इस परियोजना की अनुमति प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) से ली गई है, जिसके तहत टाइगर रिजर्व की टीम और विशेषज्ञ मिलकर यह कार्य कर रहे हैं। इस दौरान पूरी सावधानी बरती जाती है ताकि जंगली हाथियों से टीम की सुरक्षा बनी रहे और उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे।
हाथियों की पहचान की इस प्रक्रिया से न केवल उनकी सटीक संख्या सामने आएगी, बल्कि उनकी लोकेशन, गतिविधियों और समूहों की निगरानी भी संभव हो सकेगी। इसके चलते हाथी मानव संघर्ष जैसी घटनाओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है, क्योंकि समय रहते हाथियों की लोकेशन का पता लगाकर एहतियाती कदम उठाए जा सकेंगे।
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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में आए दिन जंगली हाथियों के आतंक की खबरें आती रहती हैं. आज सुबह करीब 6 बजे फिर से एक घायल हाथी जंगल से निकल कर गांव के अंदर आ गया, जिसे देखते ही ग्रामीणों में दहशत फैल गई. इसके बाद सैंकड़ों की सख्या में ग्रामीणों ने हाथी को गांव में घुसने से रोकने के लिए कई कोशिशें की जिसके बाद हाथी मौके से दूर चला गया.
हालांकि ग्रामीणों में हाथियों के कभी भी घुस आने और उत्पात मचाने को लेकर ग्रामीणों में भय का माहौल बना हूआ है. जानकारी के मुताबिक, घायल हाथी जंगल से करतला बस्ती में महाविद्यालय के सामने आ पहुंचा. हाथी को देखते ही लोगों में अफरा तफरी मच गई, जिसके बाद स्थानीय लोग और आस-पास के गांव से ग्रामीणों ने भारी संख्या में पहुंचकर उसे गांव से वापस जंगल भेजने की कोशिश करते रहे. लोगों ने ट्रैक्टर-बाइक को चालू कर और टीपा बजाकर हाथी को भगाने की कोशिश की. हालांकि पुलिस कर्मचारी और वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों को हाथी के करीब जाने से रोका और हाथी पर नजर बनाए हुए हैं.
]]>मनेंद्रगढ़ चिरमिरी
मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर चिरमिरी के सिद्ध बाबा पहाड़ में एक दंतैल हाथी ने पिछले दो दिनों से आतंक मचा रखा है. वन विभाग के मुताबिक, यह हाथी लगातार क्षेत्र में विचरण कर रहा है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है. वन विभाग ने लोगों को जंगल में प्रवेश न करने की हिदायत दी है. साथ ही ग्रामीणों को हाथी से दूर रहने की सलाह दी जा रही है.
हाथी को लेकर वन विभाग अलर्ट
चिरमिरी रेंजर सूर्यदेव सिंह ने बताया कि हाथी सिद्ध बाबा पहाड़ के आसपास मौजूद है. वन विभाग की टीम लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही है. उन्होंने कहा है कि अभी तक इस हाथी ने किसी जगह और लोगों पर हमला नहीं किया है. किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है, लेकिन लोगों को सावधान रहने अलर्ट जारी किया गया है.
सिद्ध बाबा पहाड़ पर दिखा दंतैल हाथी
हम टीम के साथ चौक पर तैनात हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जा सके. हमारा उद्देश्य मानव हाथी संघर्ष को रोकना है. इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं- सूर्यदेव सिंह, रेंजर, चिरमिरी वन परिक्षेत्र
हाथी के आमद से ग्रामीणों में भय का माहौल
इस क्षेत्र में हाथी के विचरण से आसपास के गांवों के लोग दहशत में हैं. हालांकि, वन विभाग की टीम सतर्कता के साथ हर कदम पर हाथी की निगरानी कर रही है. ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी को टाला जा सके. वन विभाग लोगों को सावधान रहने और हाथी के पास न जाने की अपील कर रहा है.
पाली वन मंडल के धारपखना घुईचुआ सर्किल में दंतैल हाथी ने एक ग्रामीण को मौत के घाट उतार दिया। पिछले एक माह में हाथी ने चार लोगों को मौत के घाट उतार चुका है। इस घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल देखा जा रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग के टीम मौके पर पहुंची और घटनाक्रम की जानकारी ली।
बताया जा रहा कि मृतक 60 वर्षीय मेवा राम धनवार रात 10:00 बजे लगभग मुख्य सड़क पर जा रहा था। इस दौरान अचानक हाथी से उसका सामना हो गया और हाथी ने उसे सूंड से उठाकर सड़क पर पटक दिया। जहां उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हाथी रोड पार कर रहा था। इस दौरान यह घटना घटी और ग्रामीण की नजर हाथी पर नहीं पड़ी। जिसके चलते यह घटना घटी। इस घटना के बाद देखते ही देखते ग्रामीण के भीड़ एकत्रित हो गई और इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। वहीं हाथी ग्रामीण को मौत के घाट उतारने के बाद हाथी गांव की तरफ घुस गया। जहां कुछ लोग घर छोड़कर भागने लगे और किसी दूसरे के घर में सहारा लेकर छुपे हुए थे। बताया जा रहा है कि मृतक सोनाईपुर का रहने वाला था। वन विभाग की टीम इस घटना के बाद ग्रामीणों को हाथी के पास जाने के लिए मन कर रही थी। वहीं हाथी के पीछे-पीछे वन विभाग की टीम जा रही थी और लाउडस्पीकर के माध्यम से अलाउंस कर रही थी कि गांव में हाथी घुस गया है। घर से बाहर न निकलें। यह मंजर देर रात तक चलता रहा। जहां हाथी को बिंझरा जंगल की ओर खदेड़ा गया।
बता दे कि कोरबा के कटघोरा वन मंडल में तीन लोगों को मौत के घाट उतारने के बाद जांजगीर के पंतोरा जंगल मे डेरा डाला था। जिसके बाद बिलासपुर जंगल में था। दो दिन से कोरबा पाली वन मंडल पहुंचा और फिर से ग्रामीण को मौत के घाट उतार दिया। अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है और हाथी पिछले एक माह से कोरबा जांजगीर चापा और बिलासपुर वन मंडल में घूम रहा है। कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। आसपास मुनादी गांव में कराई जा रही है।
]]>जंगल प्रकृति का एक बेहद ही खूबसूरत चेहरा है। जंगल हरे-भरे पेड़ और कई प्रकार के जीव-जंतुओं के अलावा अनेकों प्रकार के पशु-पक्षियों का आशियाना है। छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला चारों तरफ घने जंगलों और पहाड़ों से घिरा हुआ है और यहां के जंगलों में कई तरह के वन्यप्राणी विचरण करते हैं। जंगली हाथियों की बात करें तो जिले के रायगढ़ व धरमजयगढ़ दोनों वन मंडलों में बीते कई सालों से जंगली हाथियों का उत्पात लगातार जारी है। इनकी लगातार बढ़ती संख्या ग्रामीणों के लिये समस्या बनी हुई है।
हर साल 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस के रूप में मनाया जाता है और यह दिन हाथियों के संरक्षण और उनकी सुरक्षा के लिये कई प्रकार के जागरूक कार्यक्रम करके मनाया जाता है। रायगढ़ जिले में जंगली हाथियों की मौजूदगी साल भर रहती है। रायगढ़ एक ऐसा जिला है, जिसमें दो वन मंडल हैं। रायगढ़ व धरमजयगढ़ वन मंडल दोनों एक ही जिले में होनें से यहां जंगली हाथियों का आना-जाना दोनों ही वन मंडल में लगा रहता है।
108 हाथी कर रहे विचरण
रायगढ़ जिले का जंगल कोरबा एवं पड़ोसी राज्य ओडिसा के जंगलों से जुड़ा हुआ था, जिस वजह से इसे हाथियों का कॉरीडोर भी कहा जाता है। वर्तमान स्थिति की अगर बात करें तो अभी मौजूदा समय में दोनों वन मंडलों को मिलाकर जिले में कुल 108 हाथी अलग-अलग दलों में विचरण कर रहे हैं। जिसमें धरमजयगढ़ वन मंडल जहां 103 हाथी तो वहीं रायगढ़ वन मंडल में कुल 5 हाथी अलग-अलग दलों में विचरण कर रहे हैं।
किस रेंज में कितने हाथी
हाथियों के इस दल में सबसे अधिक हाथी छाल रेंज के पुरूंगा बीट में 37 हाथी, लैलूंगा रेंज के कहरचुवां बीट में 21 हाथी, छाल रेंज के एडु बीट में 14 हाथी, कापू रेंज में 10 हाथी के अलावा अलग-अलग रेंज व बीट में हाथियों का दल विचरण कर रहा है। हाथियों के इस दल में नर हाथी 29, मादा हाथी 49 के अलावा 30 बच्चे शामिल हैं। रायगढ़ जिले के जंगलों में विचरण करने वाले हाथियों का दल कभी कोरबा तो कभी सरगुजा क्षेत्र के जंगलों में चले जाने के कारण इनकी संख्या में कभी कमी तो कभी बढ़ोतरी देखी जाती रही है।
12 किसानों की फसलों को पहुंचाया नुकसान
शनिवार रात जंगली हाथियों ने 12 से अधिक जगहों में जमकर उत्पात मचाया है। इसमें धरमजयगढ़ क्षेत्र के शेरबन में चार किसानों की फसलों को नुकसान, छाल क्षेत्र के कुडेंकेला में चार किसानां की झटका मशीन एवं पाइप को नुकसान, छाल के पुरूंगा में चार किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंचाया गया है। जिले में हाथियों की बढ़ी हुई संख्या के कारण इस तरह के नुकसान के आंकड़े रोजाना आ रहे हैं।
ड्रोन कैमरे से रखी जाती है नजर
रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल के घने जंगलों में हाथियों की मौजूदगी हमेशा से ही अधिक रही है। इस वजह से हाथी मित्र दल एवं हाथी ट्रैकरों के द्वारा यहां हाथियों पर विशेष रूप से ड्रोन कैमरे के जरिये नजर रखी जाती है, ताकि हाथी के हर मूवमेंट की जानकारी लेकर प्रभावित गांव के ग्रामीणों को सचेत किया जा सके। इस दौरान हाथियों के मस्ती करते हुए के अलावा नहाते हुए कई मनमोहन वीडियो भी अब तक ड्रोन कैमरे में कैद हो चुके हैं।
किया जाता है प्रचार-प्रसार
वन विभाग की टीम भी हाथी और मानव के बीच द्वंद्व को रोकने हाथी प्रभावित गांवों में लगातार प्रचार-प्रसार करते हुए हाथी विचरण करने वाले जंगलों में ग्रामीणों को किसी भी हाल में जंगल तरफ नही जाने की समझाइश दी जाती रही है, ताकि किसी तरह की जनहानि की घटना घटित न हो। साथ ही साथ गांव-गांव में मुनादी कराकर हाथी से सावधानी बरतने की बात कही जाती है।
दल से भटकता नहीं हाथी
बताया जाता है कि नर हाथी दल से बिछड़ता नहीं है, बल्कि बरसात के समय उनका उत्पात अधिक हो जाने के चलते मादा हथनियां जो कि हाथियों के दल की प्रमुख होती हैं, उनके द्वारा ही उस नर हाथी को दल से खदेड़ दिया जाता है जो कि कुछ समय बाद पुनः अपने दल में वापस मिल जाता है।
फसलों से प्रभावित होते हैं हाथी
जानकार लोगों का कहना है कि हाथियों में सूंघने की शक्ति अधिक होती है। इस वजह से जंगलों में विचरण करने वाले हाथी अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में लगे फसलों केला, गन्ना, कटहल, धान से प्रभावित होकर गांव तक पहुंच जाते हैं और यहां उत्पात मचाकर वापस जंगलों में लौट जाते हैं।
झटका मशीन का करते हैं उपयोग
एक अन्य जानकारी के मुताबिक, धरमजयगढ़ वन परिक्षेत्र के कई किसान ऐसे भी हैं जो जंगली हाथियों से अपनी फसलों को बचाने के लिये झटका मशीन का उपयोग करते हैं, ताकि जंगली हाथी जब उनके खेतों में धान की फसल को खाने पहुंचते हैं, तब तार के संपर्क में आते ही हल्का सा हटका लगने पर जंगली हाथी वापस भाग जाते हैं। इस झटका मशीन से जंगली हाथियों को किसी प्रकार की कोई हानि नही होती।
हाथी मानव द्वंद्व रोकने की गई पहल
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी मन की बात में छत्तीसगढ़ में हाथियों के लिए शुरू किये गये रेडियो कार्यक्रम ‘हमर हाथी हमर गोठ’ का जिक्र किया था। 2017 में छत्तीसगढ़ में हाथी और मानव के बीच द्वंत और उनके आतंक को कम करने के उद्देश्य से आकाशवाणी के रायपुर केंद्र से ‘हमर हाथी-हमर गोठ’ कार्यक्रम का प्रसारण किया गया।
जिले में हाथियों की हलचल से बढ़ रही जनहानि को रोकने के लिए इन दिनों वन विभाग के कर्मचारी प्रभावित क्षेत्र के हर घर में दस्तक दे रहें हैं। वनकर्मी हाथी विचरण क्षेत्र के रहवासियों को लिखित में इसकी सूचना देकर रात के समय विशेष रूप से सतर्क रहने और कच्चे मकान में निवासरत ग्रामीणों को पास के पक्के मकान में रात गुजारने की सलाह दे रहें हैं।
वन विभाग ने यह कदम बीते 15 दिनों के अंदर में जिले में हाथी के हमले में 5 ग्रामीणों की मौत के बाद उठाया है। डीएफओ जितेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि वन विभाग का लक्ष्य जनहानि को शून्य करना है। इसके लिए आवश्यक है कि प्रभावित क्षेत्र के रहवासियों का अपेक्षित सहयोग मिले। इसलिए विभाग ने बीट गार्ड को जिले के जिस क्षेत्र में हाथी विचरण कर रहें है,उस क्षेत्र के रहवासियों को लिखित में सूचना देने को कहा गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लोगों को इस बात की जानकारी दे दी गई है कि उनके क्षेत्र में हाथी विचरण कर रहें हैं और उन्हें विशेष सावधानी बरतनी है।
सूचना के देने के दौरान वनकर्मी ग्रामीणों से रात के समय घर से बाहर ना निकलने के साथ ही घर में महुआ, शराब, कटहल ना रखने की समझाइश दे रहें हैं। इन वस्तुओं की खुश्बू से हाथी मानव बस्ती की ओर आकर्षित होते हैं। घर में रखे हुए धान को खाने के लिए हाथी कच्चे मकानों को निशाना बनाते हैं।
वनकर्मियों और ग्रामीणों के बीच हो रहा रोचक संवाद
हाथियों के विचरण की सूचना और समझाइश देने के लिए ग्रामीणों के घर पहुंच रहें वनकर्मियों और ग्रामीणों के बीच रोचक संवाद देखने को मिल रहा है। ऐसा ही एक वीडियों इंटरनेट मिडिया वाट्सएप और फेसबुक में प्रसारित हो रहा है। इस वीडियों में तपकरा वन परिक्षेत्र के पुरईनबंध गांव में हाथियों के विचरण करने की सूचना देने के पहुंचे वनकर्मियों ने जैसे ही यहां के रहवासी जगमोहन को जंगल की ओर ना जाने की सलाह दी उसने अपने मूंछ को ऐंठ कर कहा आपका काम है बताना और मेरा काम है लकड़ी लेने के लिए जंगल में जाना। ऐसे ही रात के समय अपना घर छोड़ कर पक्के मकान में रात बिताने के लिए ग्रामीणों को राजी करने में भी वनकर्मियों के पसीने छूट रहें हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घर में उनके अलावा पालतू मवेशी और कीमती सामान भी होते हैं। घर खाली होने पर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।
हाथियों के हलचल की जानकारी जुटाने की चुनौती
जिले में इस समय 17 हाथी अलग-अलग क्षेत्र में विचरण कर रहें हैं। हाथियों की चहल कदमी की जानकारी जुटाने की बड़ी चुनौती वन विभाग के सामने खड़ी है। डीएफओ उपाध्याय ने बताया कि इसके लिए सूचना तंत्र के साथ नाइट विजय थर्मल कैमरायुक्त ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। लोगों को हाथी विचरण क्षेत्र में लिखित सूचना देने के साथ ही मुनादी और एनीमल ट्रेकर डिवाईस के माध्यम से सूचना दी जा रही है। डिवाईस के माध्यम से एक बार में 10 हजार लोगों के मोबाइल में टैक्ट और वाइस मैसेज पहुंचता है।
ये सावधानी बरतें
डीएफओ जितेन्द्र उपाध्याय हाथियों से बचने के लिए आवश्यक है कि विचरण क्षेत्र में रात के समय अधिक से अधिक सावधानी बरता जाए। उन्होनें बताया कि वनकर्मी लोगों से अनाज वाले कमरे में ना सोने,रात के समय कच्चे मकान छोड़ कर,पक्के मकान में सोने और हाथी से सामना हो जाने पर उस पर टार्च की रोशनी ना डालने की समझाइश दे रहें है। उन्होनें बताया कि टार्च की रोशनी से हाथी के भड़कने का खतरा रहता है। इसी तरह कच्चे मकान को तोड़ने के दौरान हाथी घर के उसी हिस्से को निशाना बनाते हैं जहां धान या खाना रखा होता है।
वर्जन
जंगल के किनारे रहने वाले सभी लोगों को हाथी विचरण की लिखित सूचना देने के साथ ही उन्हें हाथियों से सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक उपाय की जानकारी भी जा रही है। कच्चे मकान में रहने वालों को रात के समय पक्के भवन में रहने को भी कहा जा रहा है। थोड़ी सी सावधानी बरत कर जिले में हाथी से होने वाली जनहानि को शून्य किया जा सकता है।
-जितेन्द्र उपाध्याय, डीएफओ,जशपुर
गुस्साए हाथी ने महावत को जमीन पर पटका
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाथी के गुस्से का शिकार हुए महावत का नाम बालकृष्णन (62) था और वह कई साल से कल्लर में एक निजी हाथी सफारी केंद्र में काम कर रहा था। गुरुवार शाम 6 बजे वह पर्यटकों को घूमाने के लिए हाथी को तैयार कर रहा था। वह लगातार हाथी को अपने स्थान पर खड़े होने के लिए पैर पर छड़ी मार रहा था। हाथी कुछ देर तक उसका आदेश मानता रहा, मगर अचानक वह भड़क गया। उसने गुस्से में पहले बालकृष्णन को पटक दिया, फिर दम तोड़ने तक कुचलता रहा।
मौजूद पर्यटक हाथी के गुस्से का शिकार होने से बच गएवीडियो में हाथी को हमले देखकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे। हालांकि वहां मौजूद दूसरे महावत ने हाथी का रोका। बताया जा रहा है कि बालकृष्णन काफी दिनों से इस हाथी की देखरेख कर रहा था। गनीमत यह रही कि वहां मौजूद पर्यटक हाथी के गुस्से का शिकार होने से बच गए। वन विभाग के अनुसार, पोस्टमॉर्टम के बाद महावत का शव परिजनों को सौंप दिया गया है। महावत को कुचलने वाला हाथी व्यस्क नहीं है।
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