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ग्वालियर में दिल्ली के रिंग रोड की तर्ज पर प्रदेश की पहली एलिवेटेड रोड बन रही है। यह 2027 तक बनकर तैयार हो जाएगी। साथ ही यह मध्यप्रदेश की पहली ऐसी एलिवेटेड रोड होगी, जो किसी नदी के ऊपर बनाई जा रही है।
मुरैना रोड पर जलालपुर तिराहा के पास से यह एलिवेटेड रोड शुरू हुई है, जो गिरवाई में शिवपुरी लिंक रोड के पास तक जाएगी। 293 पिलर पर बनाई जा रही इस एलिवेटेड रोड की लंबाई स्वर्ण रेखा नदी के बराबर मतलब 13.85 किलोमीटर है।
एलिवेटेड रोड पर 14 लूप बनाए जा रहे हैं। इससे शहर का ट्रैफिक एलिवेटेड रोड पर चढ़ और उतर सकेगा। यह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का ड्रीम प्रोजेक्ट है। फिलहाल इसका 60 फीसदी काम हो चुका है। उम्मीद है कि अगले साल तक यह सौगात ग्वालियर के लोगों को मिल जाएगी।
कम से कम एक घंटे का समय बचेगा
ग्वालियर में इस एलिवेटेड रोड का काम पूरा होने के बाद जब यह रोड पर ट्रैफिक शुरू हो जाएगा तो ग्वालियर की रफ्तार को नई उड़ान मिलेगी। मुरैना से शिवपुरी जाने वाले जलालपुर तिराहा से इस एलिवेटेड रोड पर आएंगे और गिरवाई से निकलकर सीधे शिवपुरी या झांसी के लिए निकल जाएंगे।
उन्हें शहर के बीच से नहीं निकलना पड़ेगा। इससे शहर में एंट्री कर जाम में फंसने और लगने वाले समय की बचत होगी। इससे कम से कम एक घंटे का समय बचेगा। यह रोड अपने आप में खास इसलिए भी है कि यह मध्यप्रदेश की एक मात्र एलिवेटेड रोड है जो नदी के ऊपर है।
इस तरह की रोड उत्तराखंड, हिमाचल में देखने को मिलती हैं। यह शहर के बीच में स्वर्ण रेखा नदी (स्वर्ण रेखा नाला) के ठीक ऊपर बन रही है। यह रोड बनने के बाद इसकी सुंदरता भी देखते ही बनेगी।
एलिवेटेड रोड मुख्य मार्ग से कनेक्ट रहेगी
स्वर्ण रेखा नदी पर तैयार होने वाले एलिवेटेड रोड को शहर के प्रमुख मार्गों से जोड़ा जा रहा है, जिससे वहां से एलिवेटेड रोड पर जाने और शहर की मौजूदा सड़क पर उतरने का रास्ता मिल सके। ये कनेक्टिविटी जीवाजीगंज, छप्परवाला पुर, फूलबाग पर लक्ष्मीबाई समाधि और हजीरा क्षेत्र से दी जाएगी।
इन स्थानों पर ट्रैफिक लोड काफी रहता है। यहां से लोग दूसरे रास्तों के लिए डायवर्ट भी होते हैं। एलिवेटेड रोड हनुमान बांध से शुरू होकर तारागंज, जनकगंज, गेंड़ेवाली सड़क, शिंदे की छावनी, फूलबाग, तानसेन नगर, रानीपुरा, हजीरा, मछली मंडी रोड से होते हुए जलालपुर तिराहा तक पहुंचाएगी।
ग्वालियर, लश्कर और फूलबाग का घटेगा ट्रैफिक
एलिवेटेड रोड से शहर के यातायात के हिसाब से एक बड़ी क्रांति होगी। पूरे शहर में सड़कों की स्थिति खराब है। जबकि पिछले 6 साल में सवा लाख चार पहिया वाहन सड़कों पर नए बढ़ गए हैं।
जिस कारण जगह-जगह पर जाम के हालात लग रहे हैं। एलिवेटेड रोड बनने से लोगों को आए दिन लगने वाले ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। शहर के ग्वालियर, लश्कर और फूलबाग पर 50 फीसदी ट्रैफिक लोड कम हो जाएगा।
293 पिलर, 108 गाटर, 14 लूप
ग्वालियर में दिल्ली की रिंग रोड की तर्ज पर बनाई जा रही एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट में समय और चुनौती के आधार पर बदलाव होते जा रहे हैं। 293 पिलर, 14 लूप और 108 गाटर से बन रही 13.85 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि शहर के पांच अलग-अलग सर्कल को जोड़ने वाला नया हाईवे है। जब यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ था तो इसमें लगभग 13.85 किलोमीटर के रास्ते पर 19 लूप बनाए जा रहे थे।
जिससे शहर का ट्रैफिक इन लूप के जरिए एलिवेटेड रोड पर चढ़-उतर सकेगा। बाद में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस पर आपत्ति ली थी। उनका कहना था कि जब इतने लूप बना दिए जाएंगे तो एलिवेटेड रोड का महत्व ही खत्म हो जाएगा। इसके बाद लूप घटाकर अब 14 कर किए हैं। इसी तरह से पिलर और लूप की संख्या बदलती रही है।
1 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट, 9-9 मीटर चौड़ी 2 सड़क
लगभग एक हजार करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही एलिवेटेड रोड का काम दो फेस में किया जा रहा है। दूसरे फेस की सड़क- गिरवाई पुलिस चौकी के पास से तारागंज, जीवाजीगंज, नदीगेट होते हुए लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक दूसरे चरण में 7.420 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाया जा रहा है। रिवाइज प्लान में रोड की चौड़ाई 19.5 मीटर हो गई है।
उसमें 9-9 मीटर की दो सड़कें (कैरिज-बे) होंगी। बाकी डेढ़ मीटर में डिवाइडर बनेंगे। इसमें 9 पॉइंट पर 13 लूप बनाए जाएंगे। जिसमें गिरवाई, फूलबाग, रामदास घाटी, शिंदे की छावनी पर 2-2 लूप और हनुमान बांध, तारागंज, जनकगंज, जीवाजीगंज व महलगेट पर एक-एक लूप तैयार हो रहे हैं। जबकि पहले चरण या फेस की एलिवेटेड रोड जलालपुर तिराहा से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक 6.5 किलोमीटर की बनाई जा रही है।
मंगलम बिल्डकॉन इंडिया कर रही है काम
एलिवेटेड रोड का कार्य श्री मंगलम बिल्डकॉन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड गुजरात कर रही है। प्रोजेक्ट में 90 प्रतिशत पैसा केंद्र और 10 प्रतिशत पैसा राज्य सरकार दे रही है। कंपनी की ढिलाई के कारण यह प्रोजेक्ट लगातार लेट हो रहा है।
निर्माण एजेंसी लोक निर्माण सेतु संभाग से हुए अनुबंध के अनुसार कंपनी को पहले चरण (6.5 किमी) जलालपुर चौराहे के पास से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के पास तक का काम फरवरी 2025 में पूरा करना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
कंपनी ने शासन स्तर से दिसंबर तक का समय बढ़वा लिया। अभी तक कंपनी 60 प्रतिशत काम कर पाई है। अब कंपनी प्रबंधन ने एक बार फिर जून 2026 का समय मांगा है। जिसके पीछे मानसून को कारण बताया है।
ऐसे बढ़ता जा रहा बार-बार समय
23 जून 2022 के अनुबंध अनुसार 30 माह यानी 17 फरवरी 2025 तक काम पूरा होना था। लेकिन, तब तक कंपनी 50 प्रतिशत भी काम नहीं कर सकी थी। इसके बाद दिसंबर 2025 तक का वक्त लिया।
कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 38 महीने से अधिक समय बीतने के बाद अब फिर आवेदन देकर निर्माण कार्य पूरा करने के लिए जून 2026 तक का समय लिया है। साल 2027 तक दोनों फेस का काम पूरा होने के बाद एक एलिवेटेड रोड ग्वालियर को मिलेगी।
]]>भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय भूतल सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस साल के अंत तक हरियाणा का हाईवे इन्फ्रास्ट्रक्चर अमेरिका से बेहतर हो जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दिल्ली-गुरुग्राम के बीच दिल्ली-जयपुर हाईवे को एलिवेटेड बनाया जाएगा।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लगे गुरुग्राम और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे के बीच ट्रैफिक को और बेहतर बनाने के मकसद से सुझाव देने के लिए दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (डायल) और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने एक कसंलटैंट को नियुक्त किया था. अब कंसल्टेंट कंपनी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.
कंपनी ने द्वारका के पास अतुल कटारिया चौक और समालखा के बीच पुरानी दिल्ली गुरुग्राम रोड पर पांच किलोमीटर लंबी एलिवेटेड सड़क के निर्माण करने की सिफारिश की है.
एलिवेटेड रोड जरूरी क्यों?
इस बीच जीएमआर और जीएमडीए अधिकारियों के बीच 30 जुलाई को हुई परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान कंसलटैंट की सिफारिश के मुताबिक सड़क बनाने का फैसला लिया है. कंसलटैंट कंपनी के अनुसार गुरुग्राम और आईजीआई हवाई अड्डे के बीच ट्रैफिक में सुधार लाना अहम पहलू है. ऐसा इसलिए कि दिल्ली हवाई अड्डे पर कुल ट्रैफिक का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा गुरुग्राम से आता है. डायल और जीएमडीए द्वारा एलिवेटेड सड़कों के निर्माण की सिफारिश करने से पहले कंसलटैंट कंपनी ने 'एयरपोर्ट-गुरुग्राम कनेक्टिविटी को लेकर एक अध्ययन भी किया था.
कंसलटैंट कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि गुरुग्राम के अतुल कटारिया चौक और समालखा में टी-जंक्शन के बीच पुरानी दिल्ली-गुरुग्राम रोड पर पांच किलोमीटर लंबी एलिवेटेड सड़क बनाने की जरूरत है. यह एलिवेटेड सड़क छह लेन की होगी. यह 10 प्रमुख जंक्शनों को पार करेगी, जिससे इस खंड पर यातायात की आवाजाही में सुधार होगा.
कंपनी की रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि रेजांगला चौक से द्वारका एक्सप्रेसवे तक एक फ्लाईओवर बनाया जाए, जो गुरुग्राम और रेवाड़ी रेलवे ट्रैक के ऊपर से गुजरेगी. इससे ओल्ड गुरुग्राम में यातायात को सुगम बनाने में मदद मिलेगी.
95 प्रतिशत लोग करते हैं इन साधनों का इस्तेमाल
बता दें कि जनवरी 2024 में जीएमडीए और डायल ने गुरुग्राम और दिल्ली एयरपोर्ट के बीच मौजूदा यातायात को बेहतर बनाने की स्थिति और भविष्य में यातायात की स्थिति का आकलन करने के लिए कंसल्टिंग फर्म निप्पॉन कोई इंडिया प्राइवेट लिमिटेड स्टडी की जिम्मेदारी सौंपी थी. दरअसल, गुरुग्राम से लगभग 95 प्रतिशत यात्री आईजीआई एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए कारों और निजी टैक्सियों का उपयोग करते हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए कंसल्टेंट ने गुरुग्राम और आईजीआई के बीच और अधिक बस मार्ग विकसित करने के सुझाव दिए हैं.
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