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एमपी की राजधानी भोपाल में इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां भड़काऊ वीडियो मामले में संस्कृति बचाओ मंच अध्यक्ष पर एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। दरअसल, संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और पुलिस कमिश्नर के आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप लगे है। यहां टी.टी. नगर थाने में मामला दर्ज किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस को सूचना मिली थी कि चंद्रशेखर तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया है। इस वीडियो में उन्होंने गोविंदपुरा क्षेत्र में हुई एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कथित तौर पर भड़काऊ टिप्पणी की थी। पुलिस का कहना है कि इस वीडियो के कारण दो समुदायों के बीच तनाव पैदा होने और शांति भंग होने की स्थिति बन रही थी।
इन धाराओं में हुआ मामला दर्ज:
* धारा 163 (BNSS): भोपाल पुलिस कमिश्नर द्वारा लागू किए गए प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन के लिए।
* धारा 223(A) (BNS): सरकारी लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवहेलना करने के लिए।
पुलिस ने बताया कि शहर की शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 163 पहले से ही प्रभावी है, जिसके तहत किसी भी समुदाय के विरुद्ध उत्तेजना फैलाने वाले भाषण या कार्यक्रम प्रतिबंधित हैं। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
]]>मौके से आरोपी फरार
जानकारी के अनुसार हल्का पटवारी मयंक फुलेरिया जांच के लिए मौके पर पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि शासकीय भूमि पर अवैध रूप से मुरम का उत्खनन किया जा रहा था। मौके पर एक जेसीबी मशीन और चार ट्रैक्टर मौजूद थे, जिनके जरिए मुरम को पास के मुर्गी केंद्र तक ले जाया जा रहा था। पटवारी को देखकर मौके पर मौजूद लोग भागने लगे। इस दौरान ट्रैक्टर चालक कुंदन पिता गजेंद्र राजपूत ने पटवारी पर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया। हालांकि पटवारी ने सतर्कता दिखाते हुए किसी तरह अपनी जान बचाई।
जेसीबी जब्त, अन्य वाहन मौके से भागे
घटना के बाद सभी ट्रैक्टर चालक अपने वाहन लेकर फरार हो गए, लेकिन जेसीबी मशीन गड्ढे में फंसने के कारण मौके से नहीं निकल सकी। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जेसीबी को जब्त कर थाना जावर की अभिरक्षा में सौंप दिया है। प्रारंभिक जांच में जेसीबी चालक की पहचान सावन भिलाला निवासी बांगरदा और एक अन्य ट्रैक्टर चालक की पहचान मुकेश सोलंकी निवासी बिजोरा भील के रूप में हुई है।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 221, 132, 110, 303(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा खान एवं खनिज अधिनियम की धारा 21 और 4 के अंतर्गत भी कार्रवाई की गई है।
महेश सोलंकी, तहसीलदार, खंडवा
खंडवा डीआईजी मनोज कुमार राय ने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्य में बाधा डालना और जान से मारने की कोशिश जैसे गंभीर अपराधों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि अवैध उत्खनन में लिप्त माफियाओं के हौसले पस्त किए जा सकें।
]]>मामूली विवाद से शुरू हुआ हिंसक घटनाक्रम-समीक्षा टाउन निवासी अधिवक्ता पंकज शर्मा के अनुसार 11 अप्रैल की शाम बच्चों के शोर को लेकर हुए विवाद के बाद मदनमहल थाने में पदस्थ आरक्षक साकेत तिवारी उनके घर पहुंचे और गाली-गलौच करते हुए मारपीट करने लगे। बीच-बचाव करने आई महिलाओं और पड़ोसियों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया।
सबूत होने के बावजूद नहीं हुई तत्काल कार्रवाई-घटना के बाद पीड़ित अधिवक्ता सिविल लाइन थाने पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से पूरी घटना की जानकारी दी। आरोप है कि पुलिस ने स्पष्ट सबूत होने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में रुचि नहीं दिखाई और समझौते के लिए दबाव बनाया।
कोर्ट की शरण के बाद हरकत में आई पुलिस-कार्रवाई न होने पर अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। इसके बाद 25 अप्रैल को, घटना के लगभग 14 दिन बाद, सिविल लाइन थाने में आरक्षक साकेत तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।
एफआईआर की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल-पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता धर्मेंद्र सोनी ने दर्ज एफआईआर की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एफआईआर जल्दबाजी में और त्रुटिपूर्ण तरीके से दर्ज की गई, जिसमें न तो आवेदक को सूचित किया गया और न ही उनके हस्ताक्षर लिए गए।
आरोपी ने खाली किया मकान, दबाव के आरोप-एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी आरक्षक ने अपना किराए का मकान खाली कर दिया। वहीं, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए पुलिस द्वारा दबाव बनाया जा रहा था और मना करने पर काउंटर केस की धमकी दी गई।
29 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई-अब इस पूरे मामले पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस बी.पी. शर्मा की एकलपीठ 29 अप्रैल को सुनवाई करेगी, जिसमें मारपीट और कथित तौर पर त्रुटिपूर्ण एफआईआर से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
बच्चों के शोर से आगबबूला हुआ आरक्षक
सिविल लाइन समीक्षा टाउन में रहने वाले अधिवक्ता पंकज शर्मा 11 अप्रैल की शाम करीब 6:30 बजे घर पर आराम कर रहे थे। बाहर बच्चों का शोर हो रहा था, जिस पर उनकी पत्नी ने उन्हें शांत होकर खेलने के लिए कहा।
यह बात पास में ही किराए से रहने वाले पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी को पता चली। वह शहर के मदन महल थाने में पदस्थ है। आरक्षक अधिवक्ता के घर पहुंचा और गाली-गलौच करने लगा। पास खड़े पड़ोसियों ने विवाद को शांत कराने की कोशिश की।
इसी बीच अचानक आरक्षक साकेत तिवारी ने वकील पर हमला कर दिया। पड़ोसी वकील को बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आरक्षक लगातार हमला करता रहा, जिससे उनके चेहरे पर चोट आई।
घटना के बाद अधिवक्ता पंकज शर्मा सिविल लाइन थाने पहुंचे और टीआई को वीडियो फुटेज के जरिए सिपाही साकेत तिवारी की करतूत बताई, लेकिन पुलिस ने इस पर ध्यान नहीं दिया। पीड़ित का कहना था कि कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उस पर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा था।
वकील बोले- 3 घंटे तक थाने में बैठे रहे
अधिवक्ता पंकज शर्मा का कहना था कि बहुत ही मामूली बात पर वर्दी का रौब दिखाते हुए पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी ने उनके साथ मारपीट की। साकेत पड़ोस में प्रकाश सराठे के घर किराए से रहते हैं।
वकील पंकज शर्मा का आरोप है कि वे रात में तीन घंटे तक थाने में बैठे रहे, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने FIR दर्ज नहीं की, बल्कि उस पुलिसकर्मी को भी वहां से अलग कर दिया, जो रिपोर्ट दर्ज करता है, ताकि वह शिकायत न लिख सके।
पंकज शर्मा ने घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपे, जिसमें विवाद होता दिख रहा है। मारपीट की जानकारी मिलते ही साथी अधिवक्ता सिविल लाइन थाने पहुंच गए। सीएसपी और टीआई ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए जांच की बात कही।
लगातार शिकायतें कीं, कार्रवाई नहीं हुई
अधिवक्ता पंकज शर्मा का कहना है कि पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी के खिलाफ लगातार शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में 23 अप्रैल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर 29 अप्रैल को सुनवाई होनी है।
पीड़ित को नहीं दी जानकारी
याचिकाकर्ता पंकज शर्मा के वकील धर्मेंद्र सोनी का कहना है कि साकेत तिवारी के खिलाफ जल्दबाजी में जो एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें कई खामियां हैं, जिन्हें सुनवाई के दौरान कोर्ट को अवगत कराया जाएगा। उनका कहना है कि जब एफआईआर दर्ज की जा रही थी, तब आवेदक को न तो इसकी जानकारी दी गई और न ही उनके हस्ताक्षर लिए गए। जहां पंकज शर्मा के हस्ताक्षर होना थे, वहां किसी और के हस्ताक्षर कर दिए गए।
धर्मेंद्र सोनी ने बताया कि एफआईआर की कंडिका 7 में आरोपी साकेत तिवारी का नाम होना था, वहां उसके अलावा एक और नाम शैलेंद्र सिंह मार्को का भी लिखा है। वह सिविल लाइन थाने में एएसआई के पद पर पदस्थ हैं और उनका इस केस से कोई ताल्लुक नहीं है। अधिवक्ता ने बताया कि जानबूझकर एफआईआर इस तरह लिखी गई है, ताकि बाद में उस पर सवाल खड़े हो सकें।
]]>इंदौर नगर निगम के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का अनादर करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। जांच के बाद एमजी रोड पुलिस ने कांग्रेस की दो महिला पार्षदों, रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम के खिलाफ बुधवार को मुकदमा दर्ज कर लिया है।पुलिस ने यह कदम भाजपा पार्षदों की शिकायत और वायरल वीडियो के आधार पर उठाया है।एमजी रोड थाना पुलिस ने बीते सोमवार और मंगलवार को दोनों आरोपी पार्षदों को पूछताछ के लिए तलब किया था। थाने में दोनों से घंटों तक सघन पूछताछ की गई और उनके बयान दर्ज किए गए।इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196/1 (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सद्भाव बिगाड़ना) के तहत दोनों पार्षदों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
एमजी रोड पुलिस ने पार्षद रुबीना और पार्षद फौजिया अलीम के खिलाफ केस दर्ज कर लिया
इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान वंदे मातरम् गीत के अपमान को लेकर उपजा विवाद अभी भी जारी है। सभापति और भाजपा के कई पार्षद विरोध स्वरूप थाने में बयान दर्ज करवा चुके हैं। पुलिस ने शिकायत के बाद पार्षद रुबीना खान के भी बयान लिए। अब एमजी रोड पुलिस ने पार्षद रुबीना और पार्षद फौजिया अलीम के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
साढ़े चार घंटे चली पूछताछ दर्ज किए बयान
एसीपी विनोद दीक्षित ने बताया कि इस मामले में भाजपा पार्षद दल ने एमजी रोड थाने में आकर शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद ही पूरे मामले की जांच की जा रही है।
इस मामले में पार्षद फौजिया शेख अलीम के सोमवार को बयान दर्ज किए गए थे। मंगलवार को पार्षद रूबिना इकबाल खान के बयान दर्ज किए गए है। इसके साथ ही उनसे मामले को लेकर सवाल-जवाब भी किए गए।
बयान देने के पहले रुबीना ने यू टर्न लेते हुए पत्र लिखने की बात पर मीडिया से कहा- सभी पार्षद मेरे भाई हैं, मुझे उस दौरान दो शब्द नहीं बोलने थे
इससे पहले एमजी रोड पुलिस ने सोमवार को कांग्रेस पार्षद फौजिया अलीम तो मंगलवार को कांग्रेस पार्षद रुबीना खान के बयान लिए। बयान देने के पहले रुबीना ने यू टर्न लेते हुए पत्र लिखने की बात पर मीडिया से कहा कि सभी पार्षद मेरे भाई हैं। मुझे उस दौरान दो शब्द नहीं बोलने थे, इसके लिए खेद प्रकट करती हूं। मैं वंदे मातरम् का सम्मान करती हूं, अब कान पकड़ लिए, ऐसा नहीं होगा।
मेरा गुस्सा ठंडा हुआ तो समझ आया कि मैंने गुस्से में गलत बोल दिया, मैं तो दोनों दिन वंदे मातरम् के लिए खड़ी थी
रुबीना ने मीडिया से कहा, वे लोग (विपक्षी पार्षद) मुझे उकसा रहे थे। उस समय मैंने कहा था कि आपके बाप में दम हो और दूसरा शब्द था-कांग्रेस पार्टी भाड़ में जाए। ये दोनों शब्द आपत्तिजनक थे। जब मेरा गुस्सा ठंडा हुआ तो समझ आया कि मैंने गुस्से में गलत बोल दिया। मैं तो दोनों दिन वंदे मातरम् के लिए खड़ी थी।
एएसपी विनोद दीक्षित ने बताया, करीब साढ़े चार घंटे बयान चले, पुलिस अब वीडियो का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी
एएसपी विनोद दीक्षित ने बताया, थाने में करीब साढ़े चार घंटे बयान चले। पुलिस अब वीडियो का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई तय करेगी। हालांकि अभी कोई निष्कर्ष नहीं निकला।
रुबीना ने की थी आपत्तिजनक टिप्पणी
कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने वंदे मातरम विवाद को लेकर सदन में आपत्तिजनक टिप्पणी भी की थी। उन्होंने कहा था कि किसी के बाप में दम हो तो वे हमने गवा कर दिखाए। इसके अलावा उन्होंने खुद की पार्टी के पार्षदों द्वारा वंदे मातरम विवाद में कुछ न बोलने पर भाड़ में जाए कांग्रेस जैसी टिप्पणी भी की थी। इसे लेकर उनके निष्कासन का प्रस्ताव शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजा है।
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा हरदा वृत्त के अंतर्गत ग्राम बड़झिरी में बिजली के तार चोरी करने वाले अज्ञात आरोपित के विरूद्ध थाना रहटगांव में एफ.आई.आर दर्ज कराई गई है।
सहायक प्रबंधक सिराली योगेश कुमार गौर ने बताया कि सिराली वितरण केन्द्र के ग्राम बड़झिरी में 24 सितंबर को अज्ञात व्यक्ति द्वारा 11 केवी पटाल्दा फीडर के 4 पोल के विद्युत लाइन से कीमत 53,434 रूपए के तार चोरी कर लिए गए थे। ग्रामीणों द्वारा 30 सितंबर को चोरी की जानकारी मिलने पर कंपनी द्वारा पंचनामा तैयार कर थाना रहटगांव में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध चोरी की एफआईआर दर्ज कराई गई है।
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल ने चोरी की घटना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कानूनी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। प्रबंध संचालक ने मैदानी कर्मचारियों और अधिकारियों को सजग रहने को कहा है, जिससे चोरी की घटनाएं न हों और बिजली कंपनी को आर्थिक हानि न हो। कंपनी ने मैदानी अधिकारियों/कर्मचारियों से कहा है कि विद्युत आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखें और जिले के कलेक्टर / पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर किसी भी अप्रिय स्थिति में उनसे आवश्यक सहयोग प्राप्त करें।
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पूरा मामला 25 अगस्त को अर्जुनगंज क्षेत्र के मस्तेमऊ गांव में करीब डेढ़ करोड़ की सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान बत्तमीजी करने पर नायब तहसीलदार ने किसान को धक्का मार दिया था। इस मामले में 28 अगस्त को नायब तहसीलदार रत्नेश कुमार और लेखपाल सुभाष कौशल पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर दर्ज होने से नगर निगम में तैनात लेखपाल और नायब तहसीलदार लामबंद हो गए और सोमवार दोपहर एक से शाम पांच बजे तक मुख्यालय पर धरना दिया। इसमें निगम संपत्ति विभाग के साथ-साथ चकबंदी संघ के पदाधिकारी भी शामिल हुए।
नायब तहसीलदार रत्नेश ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमों के अनुसार हुई थी। फरवरी में कब्जेदार राममिलन को नोटिस जारी किया गया था। अप्रैल में भी कब्जा हटाने के लिए पुलिस बल के साथ टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन विरोध और गाली-गलौज के कारण लौटना पड़ा। आखिरकार 25 अगस्त को पुलिस बल के साथ कार्रवाई करनी पड़ी।
धरने में रखी गईं यह प्रमुख मांगें
– डीसीपी दक्षिणी, एसीपी गोसाईंगंज और सुशांत गोल्फ सिटी के थानाध्यक्ष का ट्रांसफर किया जाए।
– अतिक्रमण हटाने के दौरान नगर निगम टीम को पुलिस पूरी सुरक्षा दे।
– एफआईआर तत्काल निरस्त की जाए और उच्चस्तरीय जांच टीम गठित हो।
– कब्जा हटाते वक्त जब टीम से गाली-गलौज हुई तो पुलिस ने क्या कार्रवाई की, इसकी जांच हो।
पूरा मामला 25 अगस्त को अर्जुनगंज क्षेत्र के मस्तेमऊ गांव में करीब डेढ़ करोड़ की सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान बत्तमीजी करने पर नायब तहसीलदार ने किसान को धक्का मार दिया था। इस मामले में 28 अगस्त को नायब तहसीलदार रत्नेश कुमार और लेखपाल सुभाष कौशल पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर दर्ज होने से नगर निगम में तैनात लेखपाल और नायब तहसीलदार लामबंद हो गए और सोमवार दोपहर एक से शाम पांच बजे तक मुख्यालय पर धरना दिया। इसमें निगम संपत्ति विभाग के साथ-साथ चकबंदी संघ के पदाधिकारी भी शामिल हुए।
नायब तहसीलदार रत्नेश ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमों के अनुसार हुई थी। फरवरी में कब्जेदार राममिलन को नोटिस जारी किया गया था। अप्रैल में भी कब्जा हटाने के लिए पुलिस बल के साथ टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन विरोध और गाली-गलौज के कारण लौटना पड़ा। आखिरकार 25 अगस्त को पुलिस बल के साथ कार्रवाई करनी पड़ी।
धरने में रखी गईं यह प्रमुख मांगें
– डीसीपी दक्षिणी, एसीपी गोसाईंगंज और सुशांत गोल्फ सिटी के थानाध्यक्ष का ट्रांसफर किया जाए।
– अतिक्रमण हटाने के दौरान नगर निगम टीम को पुलिस पूरी सुरक्षा दे।
– एफआईआर तत्काल निरस्त की जाए और उच्चस्तरीय जांच टीम गठित हो।
– कब्जा हटाते वक्त जब टीम से गाली-गलौज हुई तो पुलिस ने क्या कार्रवाई की, इसकी जांच हो।
हालांकि, इस मामले में सियासत तेज होने के बाद दोनों कथावाचकों पर फर्जी आधार कार्ड बनाने और जाति छुपाकर कथा करने का आरोप लगा था। इस मामले में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि मुकुट मणि यादव के पास दो आधार कार्ड मिले हैं, जिन पर दो अलग-अलग नाम हैं। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले में जांच शुरू कर दी है।
कथावाचकों के साथ हुई अभद्रता को लेकर सपा अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने एक्स अकाउंट पर लिखा था, “इटावा के बकेवर इलाके के दान्दरपुर गांव में भागवत कथा के दौरान कथावाचक और उनके सहायकों की जाति पूछने पर पीडीए की एक जाति बताने पर कुछ वर्चस्ववादी और प्रभुत्ववादी लोगों ने साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उनके बाल कटवाए, नाक रगड़वाई और इलाके की शुद्धि कराई। हमारा संविधान जातिगत भेदभाव की अनुमति नहीं देता है, ये व्यक्ति की गरिमा और प्रतिष्ठा से जीवन जीने के मौलिक अधिकार के विरुद्ध किया गया अपराध है। सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो और यथोचित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। अगर आगामी 3 दिनों में कड़ी कार्रवाई नही हुई तो हम ‘पीडीए के मान-सम्मान की रक्षा’ के एक बड़े आंदोलन का आह्वान कर देंगे।”
इसके बाद, दोनों कथावाचकों ने लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी मुलाकात की थी। अखिलेश ने एक्स पर फोटो शेयर करते हुए लिखा था, “‘इटावा कथावाचन पीडीए अपमान कांड’ के पीड़ितों का सम्मान किया गया और उनकी आर्थिक हानि के लिए सहायता राशि दी गई और जिस दृष्टिहीन कलाकार की ढोलक छीनी गयी, उसे नई ढोल भी दी गई।”
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बीएसएनएल (BSNL) द्वारा जारी की गई निविदा में भाग लेने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर चिप्स (छत्तीसगढ़ राज्य सूचना प्रौद्योगिकी विभाग) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड के खिलाफ सिविल लाइन थाने में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं.
चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत अनुभव प्रमाण पत्र के संबंध में जांच करने पर यह संज्ञान में आया कि ऐसा अनुभव प्रमाण पत्र चिप्स द्वारा मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड को कभी जारी ही नहीं किया गया था. चिप्स ने पत्राचार के माध्यम से मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड से यह जानने का हर संभव प्रयास किया कि यह अनुभव प्रमाण पत्र उन्हें (मे. दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड) कैसे और किसकी मदद से प्राप्त हुई परन्तु मे. दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड ने अब तक अपेक्षित जानकारी नहीं दी है. उक्त घटना की गंभीरता को देखते हुए इस घटना की पूर्णतः निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए सीईओ चिप्स ने 2 फरवरी 2025 मेसर्स दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड के विरुद्ध सिविल लाइन्स थाने में आवश्यक कार्यवाही करने के लिए पत्र भेजा गया है. गौरतलब है कि बीएसएनएल द्वारा जारी की गई निविदा में भाग लेने के लिए दिनेश इंजीनियरिंग लिमिटेड ने चिप्स के भारतनेट फेज-2 परियोजना के अनुभव प्रमाण पत्र निविदा दस्तावेज में इस्तेमाल किया है.
]]>भिलाई के खूबचंद बघेल कॉलेज के प्रोफेसर विनोद शर्मा पर जानलेवा हमले के आरोपी प्रोबिर शर्मा की पत्नी के पक्ष में कोर्ट ने एक बड़ा आदेश दिया है। आरोपी प्रोबिर शर्मा की पत्नी के वकील ने पुरानी भिलाई के व्यवहार न्यायालय में याचिका दायर की थी।
याचिका में कहा कि आरोपी प्रोबिर शर्मा की पत्नी डॉक्टर पूर्णिमा शर्मा को पुरानी भिलाई पुलिस ने 15 घंटो तक बिना कारण के हिरासत में लेकर थाने में रखा गया था। थाने के सीसीटीवी फुटेज की जांच पर न्यायालय ने पुरानी भिलाई थाना के टीआई महेश ध्रुव और महिला थाना की टीआई श्रद्धा पाठक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के लिए दुर्ग रेंज के आईजी को आदेश दिया है। हाई प्रोफाइल प्रोफेसर हमले के आरोपी प्रोबीर शर्मा की पत्नी डॉक्टर पूर्णिमा शर्मा का कहना है कि इस मामले में पुलिस ने जब उनके पति को आरोपी बनाया है तो उन्हें क्यों पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया गया है। उन्हें काकीनाडा के पीठापुरम से पहले तो बिना महिला आरक्षक के डिटेन कर लाया गया। उसके बाद पुरानी भिलाई थाना में उसे 15 घंटे से ज्यादा समय तक बैठाया गया था। महिला होने के साथ मानसिक प्रताड़ना से पीड़ित होकर उन्होंने न्यायालय में अर्जी लगाई थी। जिस पर न्यायालय ने आदेश दिया है।
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