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खाद्य नागरिक आपूर्ति उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि राज्य शासन द्वारा 24 लाख से अधिक लाड़ली बहनों को 450 रूपये में रसोई गैस का सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। योजनान्तर्गत जुलाई 2023 से मई 2024 तक 2 करोड़ 57 लाख 56 हजार गैस सिलेंडर (रिफिल) के लिए 632 करोड़ 16 लाख रूपये का अनुदान लाड़ली बहनों के खाते में जमा कराया गया है। योजना का क्रियान्वयन सतत् रूप से किया जा रहा है।
मंत्री श्री राजपूत ने बताया है कि महिलाओं को परम्परागत ईंधन के साधनों से भोजन पकाने में स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को रोकने एवं पर्यावरण की सुरक्षा तथा सुरक्षित एवं स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के एलपीजी कनेक्शनधारी एवं गैर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के गैस कनेक्शनधारी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (MMLBY) की पंजीकृत बहनों को उनके द्वारा लिए गए गैस रिफिल को 450 रूपये में उपलब्ध कराने की योजना माह जुलाई, 2023 से लागू की गई है।
उमरिया जिले की झिरिया मोहल्ला निवासी श्रीमती सीमा शर्मा ने बताया कि हम जैसे गरीब लोगों के लिये 450 रूपये में सिलेंडर मिलने से हमारे रसोई की आधी समस्या दूर हो जाती है। उन्होंने बताया कि यह हमारे मुख्यमंत्री एवं लाड़ले भईया डॉ. मोहन यादव की लाड़ली बहनों के प्रति एक महत्वपूर्ण सौगात है।
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मंत्री श्री सिंह ने कहा है कि पीओएस मशीन खराब होने अथवा दुकान बंद होने पर हितग्राही किसी अन्य दुकान से राशन ले सकते हैं। निवास स्थान परिवर्तन होने पर भी दुकान परिवर्तन कराने की जरूरत नहीं है। इससे उचित मूल्य दुकानदारों के बीच सकरात्मक प्रतिस्पर्धा से सेवाओं सें सुधार होगा। दुकान समय पर नहीं खोलने या राशन वितरण में अनियमितता करने वाले दुकानदार स्वत: ही इस व्यवस्था से बाहर हो जायेंगे।
प्रदेश के 34 हजार 682 परिवारों ने अन्य राज्यों में लिया खाद्यान्न
अगस्त माह में मध्यप्रदेश के 34 हजार 682 परिवारों ने पोर्टेबिलिटी के माध्यम से अन्य राज्यों में खाद्यान्न प्राप्त किया। साथ ही अन्य राज्यों के 3647 परिवारों ने मध्यप्रदेश में खाद्यान्न प्राप्त किया। इसी तरह प्रदेश के 14 लाख 40 हजार 966 परिवारों ने प्रदेश में ही पोर्टेबिलिटी के माध्यम से खाद्यान्न प्राप्त किया।
श्री राजपूत ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार सभी पात्र उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण राशन उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को भी निर्देशित किया है कि शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन तत्परता से करें। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
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मेडिकल कॉलेज में मर्ज होगा जिला चिकित्सालय सागर
मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस एवं पीजी की सीटों में वृद्धि के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन की शर्तों के अनुसार 900 बेड का अस्पताल आवश्यक है। वर्तमान में बुन्देलखण्ड मेडिकल कॉलेज सागर में 750 बेड का अस्पताल है और इसी से लगे हुए जिला चिकित्सालय में 300 बेड उपलब्ध हैं। इसलिए जिला अस्पताल को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में हस्तांतरित करने से मेडिकल कमीशन की शर्त पूरी हो जायेगी। इसके अलावा जिला चिकित्सालय में 100 बेड का मेटरनिटी अस्पताल का निर्माण भी चल रहा है। श्री राजपूत ने बताया कि इस प्रयास के बाद मेडिकल कॉलेज सागर में कुल 1150 बेड का अस्पताल उपलब्ध हो जायेगा।
खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
सागर के बुन्देलखण्ड अस्पताल में पीजी और एमबीबीएस सीटों में बढ़ोतरी को सरकार द्वारा कैबिनेट से मंजूरी प्रदान करने पर श्री राजपूत ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं पूरी कैबिनेट का आभार जताते हुए कहा कि बुन्देलखण्ड मेडिकल कॉलेज में सीटों की वृद्धि से सागर तथा सम्पूर्ण बुन्देलखण्ड क्षेत्र के मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सहृदयता पर आभार व्यक्त करने हुए खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन से आने वाले समय में सागर सहित सम्पूर्ण बुन्देलखण्ड क्षेत्र में विकास और बदलाव की एक नई तस्वीर उभरकर सामने आयेगी।
मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम बैंक ऑफ महाराष्ट्र द्वारा उपलब्ध कराये गये सॉफ्टवेयर के माध्यम से जिलों के द्वारा प्रेषित धन मांग-पत्र एवं उनको राशि उपलब्ध कराने का कार्य किया जाता था। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जिलों को राशि उपलब्ध कराने की संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण करने में जहां एक ओर अत्याधिक समय लगता था वहीं दूसरी ओर बैंक के खातों में राशि रखने के कारण उस पर ब्याज के रूप में निगम को अनावश्यक वित्तीय भार वहन करना पड़ता था।
प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम श्री पी.एन. यादव ने बताया है कि इस समस्या का समाधान निगम द्वारा एनआईसी से विकसित कराये गये ऑनलाईन सॉफ्टवेयर के माध्यम से कराया गया है। इसके कारण जिलों की मांग एवं उन्हें राशि उपलब्ध कराने की संपूर्ण प्रक्रिया में लगने वाले समय में काफी कमी आई है। साथ ही जिला स्तर पर अनावश्यक राशि रखने के कारण होने वाले ब्याज के व्ययभार से बचत की स्थिति निर्मित हुई है। अन्य संसाधनों की भी बचत हुई है। एनआईसी के द्वारा विकसित किया गया साफ्टवेयर ओटीपी आधारित होने के कारण ज्यादा सुरक्षित है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जिलों द्वारा की जा रही मांग को नियंत्रित करने के लिये विभिन्न राइडर्स लगाये गये हैं। विभिन्न कार्यालयीन व्यय जैसे टैक्सी किराया, स्टेशनरी, टेलीफोन, कम्प्यूटर रख-रखाय व्यय एवं विभिन्न आकस्मिक व्यय पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है। निगम द्वारा किये गये इन बदलावों से करोड़ो रूपये की वार्षिक बचत होना संभावित है।
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