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मृत्यु के बाद का सफर: कर्मों का लेखा-जोखा
गरुड़ पुराण भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के बीच का संवाद है. इसमें बताया गया है कि जब आत्मा शरीर का त्याग करती है, तो उसे यमदूतों द्वारा यमलोक ले जाया जाता है. वहां चित्रगुप्त व्यक्ति के जीवन भर के कार्यों का रिकॉर्ड पेश करते हैं. यदि जीवन में पुण्य कर्म अधिक हैं, तो आत्मा को सुख मिलता है, लेकिन यदि झोली पापों से भरी हो, तो यमराज के कठोर दंड का सामना करना पड़ता है.
गौ हत्या: सबसे बड़ा और अक्षम्य अपराध
सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और उसे पूजनीय माना गया है. गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति गौ हत्या करता है या गायों को कष्ट पहुंचाता है, उसे महापापी की श्रेणी में रखा जाता है. ऐसे व्यक्ति की आत्मा को मृत्यु के बाद कभी शांति नहीं मिलती और उसे यमलोक में युगों तक कष्ट भोगने पड़ते हैं.
माता-पिता और गुरु का अनादर
आज के दौर में लोग अक्सर अपने बुजुर्गों और गुरुओं का सम्मान करना भूल जाते हैं. गरुड़ पुराण चेतावनी देता है कि जो अपनी संतान होने का धर्म नहीं निभाते या अपने गुरु का अपमान करते हैं, उन्हें यमलोक में अत्यंत पीड़ादायक सजा दी जाती है. माता-पिता और गुरु को ईश्वर का रूप माना गया है, इसलिए उनका दिल दुखाना सीधे तौर पर यमराज के क्रोध को आमंत्रण देना है.
भ्रूण हत्या: मानवता पर कलंक और उसकी सजा
समाज में भ्रूण हत्या को एक जघन्य अपराध माना गया है. गरुड़ पुराण में भी इसे सबसे गंभीर पापों में गिना गया है. एक अजन्मे जीव की हत्या करने वाले व्यक्ति को नर्क में ऐसी यातनाएं दी जाती हैं, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाए. ऐसे पापियों के लिए मोक्ष के द्वार हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं.
विश्वासघात और झूठी गवाही का परिणाम
किसी का भरोसा तोड़ना या स्वार्थ के लिए झूठी गवाही देकर किसी निर्दोष को फंसाना भी नरक का रास्ता खोलता है. गरुड़ पुराण कहता है कि जो व्यक्ति दूसरों के साथ छल-कपट करता है या विश्वासघात को अपना हथियार बनाता है, उसे मृत्यु के बाद वैतरणी नदी जैसी भयानक जगहों पर कष्ट झेलने पड़ते हैं.
मृत्यु के बाद का सफर: कर्मों का लेखा-जोखा
गरुड़ पुराण भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के बीच का संवाद है. इसमें बताया गया है कि जब आत्मा शरीर का त्याग करती है, तो उसे यमदूतों द्वारा यमलोक ले जाया जाता है. वहां चित्रगुप्त व्यक्ति के जीवन भर के कार्यों का रिकॉर्ड पेश करते हैं. यदि जीवन में पुण्य कर्म अधिक हैं, तो आत्मा को सुख मिलता है, लेकिन यदि झोली पापों से भरी हो, तो यमराज के कठोर दंड का सामना करना पड़ता है.
गौ हत्या: सबसे बड़ा और अक्षम्य अपराध
सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और उसे पूजनीय माना गया है. गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति गौ हत्या करता है या गायों को कष्ट पहुंचाता है, उसे महापापी की श्रेणी में रखा जाता है. ऐसे व्यक्ति की आत्मा को मृत्यु के बाद कभी शांति नहीं मिलती और उसे यमलोक में युगों तक कष्ट भोगने पड़ते हैं.
माता-पिता और गुरु का अनादर
आज के दौर में लोग अक्सर अपने बुजुर्गों और गुरुओं का सम्मान करना भूल जाते हैं. गरुड़ पुराण चेतावनी देता है कि जो अपनी संतान होने का धर्म नहीं निभाते या अपने गुरु का अपमान करते हैं, उन्हें यमलोक में अत्यंत पीड़ादायक सजा दी जाती है. माता-पिता और गुरु को ईश्वर का रूप माना गया है, इसलिए उनका दिल दुखाना सीधे तौर पर यमराज के क्रोध को आमंत्रण देना है.
भ्रूण हत्या: मानवता पर कलंक और उसकी सजा
समाज में भ्रूण हत्या को एक जघन्य अपराध माना गया है. गरुड़ पुराण में भी इसे सबसे गंभीर पापों में गिना गया है. एक अजन्मे जीव की हत्या करने वाले व्यक्ति को नर्क में ऐसी यातनाएं दी जाती हैं, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाए. ऐसे पापियों के लिए मोक्ष के द्वार हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं.
विश्वासघात और झूठी गवाही का परिणाम
किसी का भरोसा तोड़ना या स्वार्थ के लिए झूठी गवाही देकर किसी निर्दोष को फंसाना भी नरक का रास्ता खोलता है. गरुड़ पुराण कहता है कि जो व्यक्ति दूसरों के साथ छल-कपट करता है या विश्वासघात को अपना हथियार बनाता है, उसे मृत्यु के बाद वैतरणी नदी जैसी भयानक जगहों पर कष्ट झेलने पड़ते हैं.