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आज एक सितंबर 2025 से 7 बड़े वित्तीय बदलाव हो गए हैं, जो लोगों की जेब पर असर डाल सकते हैं। LPG रेट, पेंशन, क्रेडिट कार्ड, इनकम टैक्स रिटर्न, भारतीय डाक के नियम, FD स्कीम आदि से जुड़े बदलाए हुए हैं, जो लोगों के महीनेभर के बजट को बिगाड़ सकते हैं। आइए इन बदलावों के बारे में जानते हैं…
कमर्शियल सिलेंडर के आज से घटे दाम
बता दें कि आज से 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम घट गए हैं। रात 12 बजे से ही नए दामों की लिस्ट आ गई थी और रात को ही नए दाम लागू हो गए थे। सिलेंडर के दामों में 51 रुपये की कटौती है, जिसके बाद आज से कमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में 1581 रुपये, कोलकाता में 1683 रुपये, मुंबई में 1531 रुपये और चेन्नई में 1737 रुपये में मिलेगा।
भारतीय डाक व्यवस्था आज से बदली
बता दें कि आज एक सितंबर से भारतीय डाक व्यवस्था भी बदल गई है। आज से डाक सर्विस और स्पीड पोस्ट सर्विस मर्ज हो गई है। ऐसे में अब साधारण डाक सेवा बंद हो गई है। अब डाक से नहीं, बल्कि स्पीड पोस्ट से लोग कुछ भी भेज सकेंगे।
क्रेडिट कार्ड नियम भी आज से बदले
बता दें कि आज से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने क्रेडिट कार्ड का नियम बदल दिया है। बैंक ने जारी किए जाने वाले कुछ क्रेडिट कार्ड्स के लिए रिवॉर्ड पॉइंट्स प्रोग्राम चेंज किया है। अब क्रेडिट कार्ड होल्डर्स को डिजिटल गेमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और गवर्नमेंट वेबसाइट पर लेन-देन करने पर रिवॉर्ड पॉइंट्स नहीं मिलेंगे।
2 बैंकों की FD स्कीम में बदलाव
बता दें कि आज से 2 बड़े बैंकों की फिक्स्ड डिपोजिट (FD) भी बदल गई है। इंडियन बैंक और IDBI बैंक ने FD स्कीम लेने की डेडलाइन खत्म हो गई है। आज से इंडियन बैंक की 444 और 555 दिन वाली स्कीम लोग नहीं ले सकेंगे। IDBI बैंक की 444, 555 और 700 दिन वाली स्कीम भी आज से बंद हो गई है।
UPS यानी पेंशन की डेडलाइन बढ़ी
बता दें कि आज से नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के तहत आने वाली यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) सेलेक्ट करने की डेडलाइन बढ गई है। यह नियम केंद्रीय कर्मचारियों के लिए है, जिनके लिए नई पेंशन स्कीम लागू हुई है। पहले स्कीम सेलेक्ट करने की तारीख 30 जून थी, जिसे बढा़कर पहले 30 अगस्त किया गया था और अब 30 सितंबर कर दिया गया है।
ATM से ट्रांजेक्शन के नियम लागू रहेंगे
बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने दूसरे बैंक के ATM से पैसे निकालने पर लगने वाली फीस बढ़ाई थी। यह नियम एक मई 2025 से लागू हुआ था, जो आज एक सितंबर 2025 से भी लागू रहेगा। इस नियम में कटौती या बढ़ोतरी अभी तक नहीं हुई है। कई बैंकों ने फ्री ट्रांजेक्शन लिमिट भी बदली थी, जो एक अप्रैल को जारी नियमों के अनुसार ही रहेगी।
चांदी की हॉलीमार्किंग होगी अनिवार्य
बता दें कि सितंबर महीने में चांदी की हॉलमार्किंग अनिवार्य हो सकती है। ऐसा होने के बाद चांदी की कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसा होने से चांदी खरीदने में रुचि रखने वालों को फायदा हो सकता है। दाम बढ़े तो झटका भी लग सकता है।
सिल्वर ज्वेलरी हॉलमार्किंग: चांदी के गहनों के लिए छह शुद्धता ग्रेड तय किए
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने घोषणा की है कि सोने की तरह ही 1 सितंबर से चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग की जाएगी। ये गुणवत्ता नियंत्रण में एक बड़ा कदम है।
इस कदम का मकसद पारदर्शिता बढ़ाना है। हॉलमार्किंग से शुद्धता की गारंटी मिलती है। हॉलमार्क साबित करता है कि ज्वेलरी में दी गई चांदी कितनी शुद्ध है। इससे ग्राहक का भरोसा बढ़ता है।
स्वैच्छिक लागू करना: 1 सितंबर से चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग स्वैच्छिक होगी, जैसा कि पहले सोने के लिए स्वैच्छिक लागू किया गया था।
शुद्धता के ग्रेड: BIS ने चांदी के गहनों के लिए छह शुद्धता ग्रेड तय किए हैं: 800, 835, 900, 925, 970, और 990।
हॉलमार्किंग प्रक्रिया: हर गहने को एक 6-अंकीय HUID मिलेगा, जो इसकी प्रामाणिकता और शुद्धता को दर्शाएगा।
कंज्यूमर प्रोटेक्शन: ग्राहक BIS Care एप के 'Verify HUID' फीचर का इस्तेमाल करके हॉलमार्क किए गए गहनों की प्रामाणिकता की जांच कर सकते हैं।
भारत, अंडमान सागर में एक बेहद बड़ी ऑफशोर तेल खोज कर सकता है। इस तेल भंडार में 184,440 करोड़ लीटर कच्चा तेल हो सकता है और यह गुयाना की परिवर्तनकारी खोज को टक्कर दे सकता है। यह बात केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने द न्यू इंडियन के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कही। अगर यह तेल भंडार मिल जाता है तो यह भारत के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित होगा। पुरी ने कहा कि सरकार के हालिया सुधार और आक्रामक खोज अभियान एक बड़ी खोज के लिए आधार तैयार कर रहे हैं।
पुरी के मुताबिक, छोटी खोजों के अलावा, अंडमान क्षेत्र में गुयाना जैसी बड़े पैमाने पर तेल की खोज भारत की अर्थव्यवस्था को 3.7 लाख करोड़ डॉलर से 20 लाख करोड़ डॉलर तक बढ़ाने में मदद कर सकती है। अगर कनफर्म हो गया कि अंडमान सागर में इतना बड़ा तेल भंडार है तो यह खोज भारत के एनर्जी लैंडस्केप को नया आकार दे सकती है। पुरी ने कहा कि कुछ वक्त की बात है, उसके बाद हो सकता है कि हम अंडमान सागर में एक बड़ा गुयाना खोज लें।
क्या है गुयाना मॉडल
गुयाना के तट पर एक्सॉनमोबिल, हेस कॉरपोरेशन और सीएनओओसी ने 11.6 अरब बैरल से अधिक का विशाल भंडार खोजा था। उस खोज ने गुयाना को तेल भंडार वाले दुनिया के टॉप 20 देशों में शामिल कर दिया, जिससे उस देश की अर्थव्यवस्था में नया बदलाव आया। पुरी का मानना है कि अगर मौजूदा ड्रिलिंग प्रयास सफल होते हैं तो भारत इसी तरह की सफलता की ओर बढ़ सकता है, विशेष रूप से अंडमान क्षेत्र में।
हमारी एनर्जी की जरूरतें एक झटके में होंगी पूरी
माना जा रहा है कि इसके मिलने के बाद हमारी एनर्जी की जरूरतें एक झटके में पूरी हो जाएंगी। अगर अंडमान में खोज सफल होती है, तो भारत ऑयल इंपोर्ट्स को काफी हद तक कम कर सकता है और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है।
होर्मुज का रास्ता बंद होने से महंगे पड़ेंगे तेल व गैस
ईरान और इजरायल के बीच युद्ध भारत के लिए भी नुकसानदायक है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि युद्ध के कारण, भारत पर आर्थिक संकट का खतरा बढ़ रहा है। खासकर होर्मुज जलडमरुमध्य को लेकर चिंताएं हैं। अगर यह बंद होता है तो भारत के लिए तेल और गैस का आयात महंगा पड़ेगा।
दोनों देशों से व्यापारिक रिश्ते
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का माल निर्यात किया और 44.19 करोड़ डॉलर का आयात किया। वहीं, इजरायल के साथ 2.15 अरब डॉलर का निर्यात और 1.61 अरब डॉलर का आयात किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित है, जो खाड़ी के देशों (इराक, कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात) से समुद्री मार्ग को अरब सागर और उससे आगे तक जोड़ता है। यह जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे बिंदु पर केवल 33 किमी चौड़ा है। यहां प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल और तेल उत्पाद जहाजों पर लादे जाते हैं।
सस्ता नहीं है तेल के कुएं खोदना
भारत ने कई क्षेत्रों में एक्सप्लोरेशन के लिए ड्रिलिंग को बढ़ाया है, खासकर उन क्षेत्रों में जिन्हें पहले दुर्गम माना जाता था। पुरी ने तेल की खोज के लिए कुएं खोदने की हाई कॉस्ट पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इसमें बहुत सारा पैसा लगता है। उन्होंने कहा कि गुयाना में उन्होंने 43 या 44 कुएं खोदे, जिनमें से प्रत्येक की लागत 10 करोड़ डॉलर थी। उन्हें 41वें कुएं में तेल मिला। आगे कहा कि सरकारी कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने इस साल जितने कुएं खोदे हैं, वे 37 साल में सबसे ज्यादा हैं। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी ने 541 कुओं की खुदाई की। इसमें 103 एक्सप्लोरेटरी और 438 डेवलपमेंटल कुएं शामिल हैं। इन सब में कंपनी ने ₹37,000 करोड़ का अपना रिकॉर्ड हाई पूंजीगत खर्च भी दर्ज किया।
समुद्री इलाके में खुदाई शुरू
सरकार ने पिछले कुछ सालों में अनछुए समुद्री बेसिनों में तेल और गैस की खोज के लिए नीतिगत सुधार किए हैं और निवेश बढ़ाया है. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जैसे ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड ने अंडमान के गहरे समुद्री इलाके में खुदाई शुरू कर दी है.
कारोबारी साल 2024 में ONGC ने 37 सालों में सबसे अधिक 541 कुएं खोदे, जिसमें 103 खोज कुएं और 438 विकास कुएं शामिल थे. कंपनी ने ₹37,000 करोड़ का अधिकतम कैपिटल एक्सपेंडिचर भी रिकॉर्ड किया.
भारत की वर्तमान कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात पर निर्भर है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा कमजोर होती है. अंडमान सागर में सफल खोज से आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की एनर्जी स्वतंत्रता मजबूत होगी. इसके साथ ही, तेल की घरेलू उपलब्धता बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता आएगी और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी.
पुरी ने बताया कि गुयाना में तेल खोजने के लिए 43-44 कुएं खोदे गए थे, जिनमें से 41वें कुएं में तेल मिला था. भारत भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही सफलता मिलेगी.
अंडमान सागर में तेल की खोज भारत के लिए न केवल एनर्जी सेक्टर में क्रांति लाएगी, बल्कि ग्लोबल तेल बाजार में भी देश की स्थिति मजबूत करेगी. यह खोज भारत को एक प्रमुख तेल उत्पादक देश के रूप में स्थापित कर सकती है और आर्थिक रूप से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी.
तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है भारत
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत में से 85% को आयात के जरिए पूरा करता है। देश कच्चे तेल के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर है, इसके आगे केवल अमेरिका और चीन हैं। कच्चे तेल का घरेलू उत्पादन वर्तमान में असम, गुजरात, राजस्थान, मुंबई हाई और कृष्णा-गोदावरी बेसिन में केंद्रित है। विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाकर रखे गए हैं, ओडिशा और राजस्थान में नई साइट्स की योजना बनाई गई है।
भारत की तेल आवश्यकता और आयात
भारत के लिए यह तेल कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85-86 फीसदी दूसरे देशों से मंगाता है। भारत 42 देशों से कच्चा तेल आयात करता है, और इनमें से अधिकतर तेल मिडल ईस्ट से आता है। ईरान और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष का असर इस तेल आयात पर पड़ सकता है, जिससे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। अगर अंडमान के समुद्र में मिले तेल भंडार का अनुमान सही निकला तो यह भारत के लिए एक बहुत बड़ा अवसर होगा।
अंडमान का तेल भंडार कितना बड़ा हो सकता है?
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, अंडमान के समुद्र में पाया गया तेल भंडार गुयाना में हाल ही में मिले भंडार के समान हो सकता है। गुयाना में 11.6 अरब बैरल तेल और गैस का भंडार मिला है, जिसे चीन की एक कंपनी के साथ मिलकर खोजा गया था। अगर भारत का तेल भंडार भी करीब 12 अरब बैरल के आसपास है, तो यह देश के लिए एक ऐतिहासिक खोज हो सकती है। इससे भारत का तेल उत्पादन बढ़ेगा और ऊर्जा की जरूरतें पूरी हो सकेंगी।
भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
अगर अंडमान का तेल भंडार सचमुच वैसा ही है जैसा अनुमान लगाया जा रहा है, तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अगर यह तेल भंडार निकाला जा सका तो न सिर्फ भारत की ऊर्जा की जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि देश की जीडीपी भी पांच गुना बढ़ सकती है। वर्तमान में भारत की जीडीपी करीब 3.7 ट्रिलियन डॉलर है, और इस तेल भंडार के मिलने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था 20 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।
भारत के अन्य तेल भंडार
अंडमान के तेल भंडार से पहले, भारत में अन्य कई स्थानों से कच्चा तेल निकाला जाता है। असम, गुजरात, राजस्थान, मुंबई और कृष्णा-गोदावरी बेसिन जैसे क्षेत्रों से तेल निकाला जा रहा है। इसके अलावा, भारत ने रिफाइन किए गए कच्चे तेल का भी बड़ा भंडार तैयार किया है, जो विशाखापट्टनम, मैंगलोर और पुदुर में स्थित है। ओडिशा और राजस्थान में भी तेल रिजर्व बनाए जा रहे हैं।
]]>भोपाल गैस त्रासदी के कचरे को धार के पीथमपुर में नष्ट करने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, मध्यप्रदेश सरकार, मध्यप्रदेश पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड को नोटिस जारी किया है. याचिका में कहा गया है कि इस कचरे से इलाके में विकिरण का खतरा हो सकता है. 24 फरवरी को मामले में अगली सुनवाई होगी.
याचिका के मुताबिक, कचरा निपटान स्थल से एक किलोमीटर के दायरे में चार से पांच गांव बसे हुए हैं और एक गांव तो उस साइट के 250 मीटर के दायरे में है. गांव वालों को अभी तक वहां से हटाया नहीं गया है, जिसकी वजह इन गांवों के लोगों का जीवन और स्वास्थ्य पर अत्यधिक जोखिम है.
याचिका में कहा गया है कि इंदौर शहर पीथमपुर से 30 किलोमीटर दूर है, जो मध्य प्रदेश का एक घनी और बड़ी आबादी वाला शहर है. निस्तारण की शर्तों के मुताबिक न तो कोई SOP है, न ही कोई रिपोर्ट है जो यह दर्शाती है कि कोई सफल परीक्षण किया गया है. साथ ही जल और मृदा (मिट्टी) प्रदूषण की निगरानी के लिए कोई समिति गठित नहीं की गई है और प्रदूषित जल के लिए कोई प्रस्तावित ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं है.
इसके अलावा, इंदौर शहर को पानी की आपूर्ति करने वाली नदी के पास अपशिष्ट निपटान को तय किया गया है. साथ ही क्षेत्र में आपदा प्रबंधन, जागरूकता और चिकित्सा सुविधाएं भी स्थापित नहीं की गई हैं.
यहां तक कि वहां पर सुरक्षा उपायों और साल 2023 में CPCB की निगरानी में परीक्षण के लिए केंद्र द्वारा 126 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं किया गया. जो कि राज्य सरकार की ओर से लापरवाही बरती जा रही है और कथित तौर पर बिना उचित सुरक्षा और पुनर्वास उपायों के 337 मीट्रिक टन कचरे को पीथमपुर ले जाया जा रहा है.
दरअसल, भोपाल गैस त्रासदी की घटना से निकले हजारों टन जहरीले कचरे का निपटान अभी भी नहीं किया जा सका है. हालांकि, इस कचरे के निस्तरण के लिए मध्य प्रदेश सरकार और पर्यावरण मंत्रालय ने पीथमपुर में निपटान स्थल तय किया और नवीनतम रिपोर्टों की बजाय 2015 में किए गए परीक्षणों की रिपोर्ट को हाईकोर्ट में दिखाकर से इसके लिए आदेश लिया गया.
इस अपील से पहले एक जनहित याचिका दाखिल कर मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाया गया था, जिस पर शीर्ष अदालत ने उन्हें हाईकोर्ट के सामने अपनी बात रखने को कहा था. जबकि यह याचिका मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निस्तारण के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है.
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घटना की जानकारी लगते ही बिजावर विधायक राजेश बबलू शुक्ला मौके पर पहुंचे और प्रशासन को घटनाक्रम की जानकारी दी। सूचना मिलते ही कलेक्टर पार्थ जैसवाल और एडीएम अरविंद नागदवे सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और घायलों को दो एंबुलेंसों से बिजावर अस्पताल और छतरपुर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां घायलों को प्राथमिक उपचार दे दिया गया है।
20 से ज्यादा लोग घायल
घायलों में एक 12 साल के बच्चे की हालत गंभीर बताई गई है। हादसे में यह लोग हुए घायल सिलेंडर ब्लास्ट होने की घटना में राधे नामदेव, मीना अहिरवार, क्रिस, अंकित, नरेंद्र राजपूत, प्रिंस, प्रीतम, नीलम कुशवाह, बालकिशन, दिनेश, जमुना, गुड्डी, आशीष शर्मा, यश साहू, नारायण साहू सहित करीब 20 से ज्यादा लोग सिलेंडर ब्लास्ट की घटना में घायल हुए हैं।
कोई तीन फीसदी, कोई पांच फीसदी तो कोई 15 फीसदी से ज्यादा जल गया है, जिसका इलाज कराया जा रहा है। रविवार को हाट बाजार भी लगा हुआ था। इस कारण बाजार में भीड़ थी और सिलेंडर ब्लास्ट होने से वह घायल हो गए।
अधिकारियों की निगरानी पर सवाल
शहर सहित जिलेभर में घरेलु सिलेंडर दुकानों में उपयोग किए जा रहे हैं, जिनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। नगर कस्बों के अलावा छतरपुर शहर में बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन सहित अस्पताल के आसपास ठेलों और दुकानों पर घरेलु गैसे सिलेंडरों का उपयोग धड़ल्ले से होता रहता है, जिनके खिलाफ फूड विभाग व अन्य अधिकारी कार्रवाई तक नहीं करते।
सिलेंडर ब्लास्ट होने की घटना हुई है। हम सभी घायलों को देख रहे हैं। कोई कम तो कोई ज्यादा जल गया है। घायलों को अस्पताल में इलाज के लिए भिजवाया गया है।
]]>भीषण गर्मी के कारण इस साल देशभर में रिकॉर्ड 1.4 करोड़ एयर कंडीशनर (एसी) बिक सकते हैं। कन्ज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं अप्लायंसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सिएमा) के अध्यक्ष सुनील वाचानी ने कहा, मई में एसी की रिकॉर्ड बिक्री हुई है। गर्मी में बिक्री में 30-40 फीसदी बढ़ सकती है।
वाचानी ने कहा, बढ़ते तापमान और गर्म हवाओं ने अब शहरी क्षेत्रों में घरेलू एसी को अनिवार्य जरूरत बना दिया है। बाजार विकसित होने के साथ उम्मीद है कि देश में सालाना बिक्री करीब 1.4 करोड़ इकाई होगी, जो क्षेत्र के मजबूत विस्तार को बताती है। भारतीय रिहायशी एयर कंडीशनर की बिक्री बढ़कर लगभग एक से 1.11 करोड़ इकाई तक पहुंचने की उम्मीद है।
आइसक्रीम-शीतल पेय पदार्थों की बिक्री में तेजी
देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के बीच कोला, पेय पदार्थ, आइसक्रीम और ठंडक प्रदान करने वाले अन्य उत्पादों की बिक्री में जोरदार तेजी आई है। पेप्सिको इंडिया और कोका कोला जैसी कंपनियों का कहना है कि मांग में भारी बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए हमने अपना भंडार (इन्वेंट्री) तैयार कर रखा है।
रेटिंग एजेंसियों का दावा: कमजोर बहुमत के बाद भी बनी रहेगी विकास की रफ्तार, ऊर्जा क्षेत्र पर जोर
भाजपा की अगुवाई में बनने वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की नई सरकार के लिए महत्वाकांक्षी सुधारों को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण होगा। देश-दुनिया की विभिन्न रेटिंग एजेंसियों का दावा है कि कमजोर जनादेश की वजह से इन सुधारों पर कानून पारित करने में सहयोगी दल बाधा डाल सकते हैं। इन चुनौतियों के बावजूद भूमि और श्रम कानूनों में बड़े सुधार नई सरकार के एजेंडे में बने रहेंगे, क्योंकि वह भारत के विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ाना चाहती है। हालांकि, कमजोर बहुमत के बावजूद भारत के विकास की रफ्तार कायम रहेगी।
रेटिंग एजेंसी फिच का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को कमजोर बहुमत के बावजूद भारत का मध्यम अवधि का विकास प्रदर्शन 2027-28 तक हमारे अनुमान 6.2 फीसदी के आसपास रहेगा। बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने के लिए जारी सार्वजनिक पूंजीगत खर्च अभियान, डिजिटलीकरण के उपायों, महामारी से पहले की स्थिति की तुलना में बैंक और कॉरपोरेट बैलेंसशीट में सुधार से निजी निवेश के लिए एक मजबूत दृष्टिकोण की सुविधा मिलनी चाहिए। वहीं, मूडीज ने मोदी के तीसरे कार्यकाल में कमजोर नीतियों को लेकर आशंकाओं को दरकिनार करते हुए कहा, भारत के ऊर्जा क्षेत्र में विकास जारी रहेगा। अक्षय ऊर्जा और बिजली ट्रांसमिशन 6-7 वर्षों में भारत के बिजली क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना जारी रखेगा। इस अवधि में बिजली की मांग सालाना 5-6 फीसदी बढ़ सकती है।
सहयोगी दलों से समर्थन की उम्मीद
फिच ने कहा, भूमि-श्रम कानूनों में बड़े सुधार विवादास्पद रहे हैं। इस बार मिलीजुली सरकार के कारण इनका पारित होना और जटिल हो सकता है। हालांकि, मोदी के पीएम बने रहने पर सहयोगी दलों से पर्याप्त समर्थन मिलने की उम्मीद है। एजेंसी ने कहा, जुलाई में पेश होने वाले पूर्ण बजट से पांच वर्षों के आर्थिक सुधार की प्राथमिकताओं और राजकोषीय योजनाओं पर अधिक स्पष्टता सरकार को देनी चाहिए। राजग के पहले दो कार्यकाल में आर्थिक सुधारों का कार्यान्वयन मिश्रित था।
मोदी 2.0 का एजेंडा 3.0 में भी जारी रहेगा : मोतीलाल ओसवाल
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि मोदी 2.0 का नीतिगत एजेंडा मोदी 3.0 में भी जारी रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, नई सरकार कर के मोर्चे पर राहत देकर और जीएसटी ढांचे को तर्कसंगत बनाकर सौदे को आसान बना सकती है। निवेश आकर्षित करने, पूंजीगत खर्च में वृद्धि, बुनियादी ढांचे और विनिर्माण पर ध्यान देने के संबंध में पिछले कार्यकाल के नीतिगत निर्णय, नई सरकार में भी जारी रहेंगे।
बना रहेगा पीएलआई
फिच को उम्मीद है कि नई सरकार में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना बनी रहेगी। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश लाने में मदद मिलेगी। हालांकि, निजी निवेश में अभी तक सार्थक वृद्धि नहीं हुई है।
बीबीबी(-) रेटिंग जारी रहेगी: फिच ने स्थिर आउटलुक के साथ भारत की लंबे समय की विदेशी मुद्रा जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग बीबीबी(-) पर बनाए रखी है। एजेंसी का मानना है भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली जीडीपी बना रहेगा।
गैस से बिजली उत्पादन मई में कई साल के उच्चस्तर पर, एलएनजी के आयात में तेज वृद्धि का अनुमान
भीषण गर्मी के कारण देश में मई, 2024 में गैस आधारित बिजली उत्पादन कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। गैस आधारित बिजली का इस्तेमाल लगातार बढ़ने से दो वर्षों में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात में तेज वृद्धि का अनुमान है। ग्रिड इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल और मई में देश में गैस आधारित बिजली का उत्पादन एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में दोगुना होकर 8.9 अरब किलोवाट घंटे पहुंच गया। इसके साथ ही, बिजली बनाने में इस्तेमाल कोयले की हिस्सेदारी में कोरोना महामारी के बाद पहली बार गिरावट आई है। मई में बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी एक साल पहले की समान अवधि के 75.2 फीसदी से घटकर 74 फीसदी रह गई। वहीं, गैस की हिस्सेदारी 1.6 फीसदी से दोगुना होकर 3.1 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। चालू वित्त वर्ष के दौरान देश में गैस आधारित बिजली के उत्पादन में 10.5 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
शाकाहारी थाली एक साल में नौ फीसदी महंगी, मांसाहारी थाली सात फीसदी सस्ती
शाकाहारी थाली एक साल में 9 फीसदी महंगी हो गई है। हालांकि, मांसाहारी थाली की कीमत घटी है। क्रिसिल की जारी रिपोर्ट के अनुसार, मई, 2023 में शाकाहारी थाली की कीमत 25.5 रुपये थी, जो इस साल मई में बढ़कर 27.80 रुपये पहुंच गई है। वहीं, मांसाहारी थाली 7 फीसदी सस्ती होकर 55.90 रुपये पर आ गई। हालांकि, मासिक आधार पर शाकाहारी थाली एक फीसदी ही महंगी हुई है। टमाटर, आलू और प्याज की बढ़ती कीमतों से शाकाहारी थाली महंगी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, टमाटर के दाम एक साल में 39 फीसदी, आलू के 41 फीसदी और प्याज के 43 फीसदी बढ़े हैं। मांसाहारी थाली की कीमत में गिरावट का श्रेय ब्रॉयलर को जाता है। एक साल में इसकी कीमत 16 फीसदी तक घटी है।
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