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मध्य प्रदेश के 4 लाख शिक्षकों के लिए खुश खबरी है. सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले टीचर्स की गर्मियों की छुट्टियों को 15 दिन और बढ़ाया जा रहा है. स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा टीचर्स की छुट्टियों को 15 जून तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. टीचर्स एसोसिएशन द्वारा शिक्षकों की छुट्टियां बढ़ाए जाने की मांग की जा रही थी, जिसे विभागीय मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने हरी झंडी दे दी है. प्रदेश में सरकारी स्कूल स्टूडेंट्स के लिए 23 जून से रीओपन होने जा रहे हैं।
जनगणना ड्यूटी को अतिरिक्त छुट्टी का बनाया गया आधार
प्रदेश में सरकारी टीचर्स की गर्मियों की छुट्टियां 1 मई से 31 मई तक निर्धारित थीं. हालांकि, इस बार गर्मियों की छुट्टियों के दौरान ही 7 मई से हायर सेकंडरी और हाई स्कूल की दूसरी बोर्ड परीक्षाएं शुरू हुईं, जो 27 मई तक चलीं. इसके अलावा जनगणना भी चलती रही. इसमें अधिकांश शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी. छुट्टियों के दौरान दूसरे सरकारी काम कराए जाने को आधार बनाकर शिक्षक संगठनों द्वारा स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप से मुलाकात की गई और शिक्षकों का ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाने की मांग की गई थी. शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर के नेतृत्व में मंत्री को ज्ञापना सौंपा गया था।
मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने दी हरी झंडी
उधर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के मुताबिक, '' प्रदेश में स्कूली टीचर्स का ग्रीष्मकालीन अवकाश का समय बढ़ाया जा रहा है. शिक्षकों को 15 जून तक का अवकाश दिया जा रहा है. इसके लिए अधिकारियों को प्रस्ताव बनाने के लिए कहा गया है. जल्द ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा.'' उधर विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार कर स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. संजय गोयल के पास इसे भेजा जाएगा. प्रमुख सचिव के अनुमोदन के बाद इस संबंध में आदेश जारी किया जाएगा।
अब 23 जून को खुलेंगे स्कूल
प्रदेश में पहले स्कूली शिक्षकों को 2 माह का ग्रीष्मकालीन अवकाश मिलता था, जिसे घटा कर 40 दिन कर दिया गया था. 2024-25 में शिक्षकों की छुट्टियों को 10 दिन और कम कर दिया गया. 2025 के बाद इस साल भी शिक्षकों को 31 दिन का अवकाश दिया गया. हालांकि, अब शिक्षकों के अवकाश को 15 दिन और बढ़ाया जा रहा है. प्रदेश में सरकारी स्कूल अब स्टूडेंट्स के लिए 23 जून को खुलेंगे।
वित्त विभाग ने राज्य के शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते (डीए) में वृद्धि का निर्णय लिया है। जारी आदेश के अनुसार सातवें वेतनमान के अंतर्गत कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता अब दिनांक एक जुलाई 2025 से (भुगतान माह अगस्त 2025 से) 55 प्रतिशत से 3 प्रतिशत बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया गया है।
वित्त विभाग के परिपत्र के अनुसार यह बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2025 से कुल 58 प्रतिशत देय माना जाएगा। हालांकि कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ 1 अप्रैल 2026 (भुगतान माह मई 2026) से प्राप्त होगा।
सरकार द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 3 प्रतिशत की इस वृद्धि के बाद कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत हो जाएगा। यह निर्णय राज्य के लाखों कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत लेकर आएगा।
एरियर का भुगतान छह किश्तों में
वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों को महंगाई भत्ते में हुई वृद्धि का लाभ एक जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक की एरियर राशि का भुगतान छह समान किश्तों में दिया जाएगा। इन किश्तों का भुगतान मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में किया जाएगा।
सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान
वित्त विभाग ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनका निधन हो गया है, उन्हें अथवा उनके नामांकित सदस्य को एरियर की पूरी राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी।
भुगतान संबंधी अन्य निर्देश
महंगाई भत्ते की गणना में 50 पैसे या उससे अधिक राशि को अगले पूर्ण रुपये में जोड़ा जाएगा, जबकि 50 पैसे से कम राशि को छोड़ दिया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि महंगाई भत्ते का कोई भी हिस्सा किसी अन्य प्रयोजन के लिए वेतन का भाग नहीं माना जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि महंगाई भत्ते के भुगतान पर होने वाला व्यय संबंधित विभाग के स्वीकृत बजट प्रावधान के भीतर ही सुनिश्चित किया जाए।
]]>केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशखबरी आई है। लंबे इंतज़ार के बाद आखिरकार आठवें वेतन आयोग का गठन औपचारिक रूप से कर दिया गया है। यह आयोग सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, भत्ते और अन्य वित्तीय लाभों की समीक्षा करेगा और ज़रूरी सुधारों की सिफारिश केंद्र को सौंपेगा। इस फैसले से करीब 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा फायदा पहुंचने की संभावना है।
आयोग का काम क्या होगा?
सरकार ने आयोग के साथ उसका टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) भी जारी किया है। इसके तहत आयोग को कई अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं —
मौजूदा वेतन ढांचे, सेवा शर्तों और रिटायरमेंट लाभों की गहन समीक्षा करना।
देश की आर्थिक स्थिति, मुद्रास्फीति (महंगाई) और विकास दर को ध्यान में रखते हुए वेतन और पेंशन में संशोधन के सुझाव देना।
सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ और कर्मचारियों की आय — दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना।
हर 10 साल में सरकार नया वेतन आयोग गठित करती है ताकि कर्मचारियों की आय को महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समायोजित किया जा सके।
कब लागू होंगे नए वेतन नियम?
पिछला, यानी सातवां वेतन आयोग, 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुआ था। उसी क्रम में माना जा रहा है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती हैं। सरकार ने आयोग को 18 महीने का समय दिया है ताकि वह सभी मंत्रालयों, विभागों और कर्मचारी संगठनों से विचार-विमर्श कर रिपोर्ट सौंप सके। अगर रिपोर्ट में देरी होती है, तो कर्मचारियों को एरियर (arrears) के रूप में बढ़ा हुआ वेतन मिल सकता है।
कितना बढ़ेगा वेतन और पेंशन?
कर्मचारियों के लिए सबसे अहम रहेगा फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) — यानी पुराने वेतन से नए वेतन में कितनी गुना बढ़ोतरी होगी।
सातवें वेतन आयोग में यह 2.57 था।
जानकारों का अनुमान है कि इस बार यह 2.8 से 3.0 के बीच रह सकता है।
अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों के बेसिक पे (Basic Pay) में उल्लेखनीय इज़ाफा देखा जा सकता है।
इसके साथ ही, महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य Allowances में भी बदलाव संभव है, जिससे पेंशनर्स को भी सीधा लाभ मिलेगा।
क्यों अहम है यह फैसला?
सरकार का उद्देश्य है कि वेतन वृद्धि आर्थिक रूप से टिकाऊ हो — यानी न तो सरकारी बजट पर असंतुलित दबाव पड़े और न ही कर्मचारियों की वास्तविक आय घटे। 8वां वेतन आयोग इसलिए खास है क्योंकि यह एक ऐसे दौर में आ रहा है जब महंगाई दर बढ़ रही है, और सरकारी कर्मचारियों के लिए यह राहत भरी खबर साबित हो सकती है।
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मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने प्रदेश के कर्मचारियों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों का इंपेनलमेंट किया है। अब प्रदेश के अधिकारी और कर्मचारी इन अस्पतालों में अपना इलाज करा सकेंगे। इस फैसले से कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। इन अस्पतालों में कर्मचारी भोपाल सीजीएचएस दरों पर इलाज करा सकेंगे। सरकार ने 55 अस्पतालों की लिस्ट जारी की है।
ऑपरेशन से लेकर आईसीयू और नर्सिंग सेवाएं होंगी शामिल
सरकार द्वारा तय की गई पैकेज दरों में रजिस्ट्रेशन, एडमिशन, ऑपरेशन, जांच, दवाएं, आईसीयू, डॉक्टर की फीस, फिजियोथेरेपी और नर्सिंग सेवाएं शामिल हैं। अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी मरीज से अलग से दवाएं या चिकित्सा उपकरण खरीदने के लिए बाध्य न करें। सभी सेवाओं का खर्च तय पैकेज में शामिल होगा।
इन 55 अस्पतालों का नाम शामिल
बिना सूचना मान्यता होगी रद्द
अगर कोई प्राइवेट अस्पताल तय की गई दरों से अधिक चार्ज लेते हैं या फैसलिटी सरकार द्वारा तय मानकों से नीचे पाई जाती हैं, तो उस अस्पताल की मान्यता बिना पूर्व सूचना के तत्काल प्रभाव से रद्द की जा सकती है। इसका उद्देश्य मरीजों के साथ पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखना है।
सीजीएचएस भोपाल ने अपने पैकेज में विभिन्न चिकित्सा सेवाओं के लिए शुल्क निर्धारित किए हैं।
रजिस्ट्रेशन शुल्क
एडमिशन शुल्क
भर्ती और मरीज का भोजन
ऑपरेशन शुल्क
ऑपरेशन थिएटर शुल्क
इंजेक्शन शुल्क
ड्रेसिंग शुल्क
डॉक्टर की फीस
दवाओं की लागत
प्रोसीजर फीस
सर्जन फीस
एनेस्थीसिया शुल्क
जांच शुल्क
सर्जिकल डिस्पोजेबल और अन्य सामग्री की लागत
फिजियोथेरेपी शुल्क
नर्सिंग देखभाल शुल्क
इलाज के लिए जरूरी होंगे सरकारी पहचान पत्र और कर्मचारी आईडी
सरकारी कर्मचारियों को इलाज के लिए अपना पहचान पत्र, आधार कार्ड और कर्मचारी आईडी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। साथ ही अस्पतालों को रिसेप्शन पर इलाज की सूची और मान्यता की वैधता स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी, जिससे भ्रम की स्थिति न बने और मरीजों को पूरा लाभ मिल सके।
रूम के हिसाब से दरें तय, जनरल और प्राइवेट वार्ड में होगा फर्क
सीजीएचएस दरें सेमी प्राइवेट वार्ड के लिए मान्य होंगी। यदि मरीज जनरल वार्ड का चयन करता है तो 10% कम राशि प्रतिपूर्ति योग्य होगी। वहीं, प्राइवेट वार्ड में इलाज के लिए 15% अधिक राशि प्रतिपूर्ति के अंतर्गत आ सकती है। इससे कर्मचारियों को अपनी आवश्यकता और सुविधा के अनुसार विकल्प मिलेंगे।
क्या हैं CGHS दरें
केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना है, जिसका लाभ केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके परिवार के सदस्य उठा सकते हैं। इस योजना के तहत, सरकारी कर्मचारियों को अस्पताल में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। इसमें केंद्र इलाज के लिए अस्पताल को शुल्क निर्धारित करता है। अब एमपी में भी केंद्र की दरों के बराबर ही दरों पर ही सरकारी कर्मचारियों का इलाज होगा।
17 तरह के चार्जेज CGHS भोपाल के पैकेज में शामिल
CGHS भोपाल ने जो पैकेज बनाया है उसमें 17 तरह के फ़ीस जैसे रजिस्ट्रेशन फ़ीस , एडमिशन फ़ीस, भर्ती एवं मरीज का भोजन, ऑपरेशन चार्ज, ऑपरेशन थियेटर चार्ज, इंजेक्शन चार्ज, ड्रेसिंग, डॉक्टर की फ़ीस, दवाएं, प्रोसेस फ़ीस, सर्जन फ़ीस, एनेस्थीसिया चार्ज, जांच शुल्क, अस्पताल में भर्ती होने के दौरान इस्तेमाल होने वाले सर्जिकल डिस्पोजेबल और सभी तरह के सामान का चार्ज फिजियोथेरेपी, नर्सिंग देखभाल शुल्क आदि शामिल हैं।
लापरवाही पर इम्पेनल्ड सूची से बाहर हो जायेगा अस्पताल
विभाग ने निर्देशित किया है कि इलाज कराने वाले शासकीय कर्मचारी अथवा उसके आश्रित के सम्बन्ध में शासन द्वारा वांछित जानकारी समय पर न भेजने, शासकीय कर्मचारियों अथवा उनके आश्रितों के उपचार हेतु निर्धारित सीजीएचएस भोपाल के पैकेज दर से अधिक शुल्क लेने, अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएं उपयुक्त/मानक स्तर का न पाए जाने पर अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर यह अधिमान्यता किसी भी समय बिना पूर्व सूचना के समाप्त की जा सकेगी यानि अस्पताल को इम्पेनल्ड सूची से हटा दिया जायेगा।
क्या-क्या मिलेगा इस योजना में
इस योजना में किसी बीमा या एडवांस राशि की आवश्यकता नहीं होगी. सामान्य वार्ड में 10% कम राशि और निजी वार्ड में 15% अधिक राशि प्रतिपूर्ति योग्य है. डायलिसिस सहित डे केयर उपचार सुविधा शामिल है. सेमी प्राइवेट वार्ड के लिए CGHS दरें लागू होंगी