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बरेली में एक जिम के अंदर महिलाओं के साथ नशीला पदार्थ देकर शोषण और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. आरोप है कि प्री-वर्कआउट ड्रिंक में नशा मिलाकर महिलाओं को बेहोश किया जाता था और फिर वीडियो बनाकर लंबे समय तक ब्लैकमेल किया जाता था।
थाना कोतवाली क्षेत्र में स्थित एक जिम में महिलाओं को वजन कम करने और फिटनेस सुधारने का झांसा देकर बुलाया जाता था. शुरुआत में सब कुछ सामान्य था. वर्कआउट, डाइट प्लान और ट्रेनिंग. लेकिन धीरे-धीरे यही भरोसा एक खतरनाक साजिश में बदल गया. पीड़िता के मुताबिक, जिम संचालक अकरम और उसका भाई आलम महिलाओं को तेजी से वजन घटाने का लालच देते थे. इसके लिए उन्हें खास प्री-वर्कआउट ड्रिंक ऑफर की जाती थी. लेकिन इस ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाया जाता था. ड्रिंक पीने के बाद महिला धीरे-धीरे बेहोशी की हालत में पहुंच जाती थी. इसी दौरान उसे जिम के अंदर बने एक प्राइवेट कमरे में ले जाया जाता था. आरोप है कि वहां उसके साथ दुष्कर्म किया जाता और पूरी घटना को रिकॉर्ड कर लिया जाता।
10 हजार से 50 लाख तक की डिमांड
आरोपियों ने इस पूरे अपराध को एक संगठित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क में बदल दिया था. वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद पीड़िता को उसी के जरिए धमकाया जाता था. पहले डराया जाता, फिर पैसे मांगे जाते. अगर महिला विरोध करती या पैसे देने से मना करती, तो वीडियो वायरल करने की धमकी दी जाती. इतना ही नहीं, आरोपियों ने पीड़िता के परिवार पति और बच्चे तक को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी. शुरुआत में आरोपियों ने महिला से 10 हजार रुपये की वसूली की. लेकिन जब उन्हें लगा कि डर का असर काम कर रहा है, तो रकम बढ़ाकर 10 लाख और फिर 50 लाख रुपये तक मांगने लगे. पीड़िता पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया. उसे फोन, मैसेज और व्हाट्सएप के जरिए धमकियां दी जाती रहीं. आरोपियों ने उसके निजी फोटो और वीडियो पेन ड्राइव में सेव कर लिए थे, जिन्हें वायरल करने की बात कही जाती थी।
आखिरकार टूटा डर, पहुंची पुलिस के पास
लगातार ब्लैकमेलिंग और डर के माहौल में जी रही महिला ने आखिरकार हिम्मत जुटाई और पुलिस के पास पहुंची. उसकी शिकायत ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया. शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और तुरंत कार्रवाई शुरू की गई. थाना कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर तीन टीमों का गठन किया और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी. पुलिस ने जिम पर छापा मारा तो अंदर का नजारा चौंकाने वाला था. वहां से कई आपत्तिजनक और संदिग्ध सामान बरामद हुए. जिसमें 10 हजार रुपये नकद, 9 शक्तिवर्धक दवाइयों की शीशियां, 6 इंजेक्शन, 2 मोबाइल फोन और पेन ड्राइव जिसमें वीडियो और फोटो स्टोर थे. इसके अलावा जिम के अंदर मौजूद प्राइवेट कमरे ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दोनों आरोपी गिरफ्तार, वीडियो भी बरामद
पुलिस ने मुख्य आरोपी अकरम को पहले गिरफ्तार किया. उसकी निशानदेही पर उसके भाई आलम को भी हिरासत में लिया गया. दोनों के पास से डिजिटल सबूत मिले हैं. जांच के दौरान पुलिस को मोबाइल फोन और पेन ड्राइव में कई आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं, जिन्हें सुरक्षित कर लिया गया है. अब इन वीडियो के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं और महिलाएं भी इस गिरोह का शिकार तो नहीं बनीं।
पुलिस का वीडियो हुआ वायरल
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें दोनों आरोपी हाथ जोड़कर माफी मांगते नजर आ रहे हैं. वे बार-बार कह रहे हैं कि उनसे गलती हो गई और उन्हें माफ कर दिया जाए. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है. क्षेत्राधिकारी आषुतोष शिवम ने बताया कि मामले में सभी जरूरी धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों को अदालत में पेश किया जा रहा है. साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि इस मामले में और कौन-कौन शामिल हो सकता है. पुलिस अब जिम के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल डिवाइस की गहराई से जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
एकता, छह महीने से ग्रीन पार्क के जिम में व्यायाम करने जाती थी। उसके गायब होने के बाद पति ने जिम ट्रेनर विमल सोनी के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तब से पुलिस तलाश कर रही थी, लेकिन न एकता का सुराग मिला न विमल सोनी मिला। शनिवार को पुलिस के हत्थे चढ़े ट्रेनर की निशानदेही पर पुलिस ने एकता का शव डीएम कंपाउंड से सटे ऑफिसर्स क्लब में खुदाई के बाद बरामद कर लिया। यह परिसर डीएम के आवास से सटा है। करीब ही पुलिस लाइन और जेल भी है। कड़ी सुरक्षा में करीब दो घंटे की खुदाई के बाद कंकाल हो चुका शव बरामद किया गया। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले विमल सोनी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
फिल्म 'दृश्यम' में हत्या के बाद लाश उस जगह छिपाई जाती है, जहां थाना बन रहा है। सोच यह कि पुलिस कभी अपने ही थाने की खुदाई कर लाश तलाशने की नहीं सोचेगी। विमल को थाने में तो लाश दफ्न करने का मौका नहीं मिला पर उसने ‘किले’ जैसे डीएम कंपाउंड को जरूर चुन लिया। वह इलाके की कड़ी सुरक्षा, डीएम बंगले के सुरक्षा स्टाफ के बीच कैसे लाश वहां तक ले जा सका, यह बड़ा सवाल है।
आईबी डायरेक्टर तक ने की थी बरामदगी की सिफारिश
राहुल ने बताया कि पुलिस उसकी पत्नी के जाने को गंभीरता से नहीं ले रही थी। इसलिए उसको तलाशने में इतनी देर लग गई। बहनोई की बहन आईबी में अफसर है। उनके जरिए अईबी डायरेक्टर से सिफारिश कराई थी। कई अफसरों को फोन कराए। तब जाकर पुलिस के अफसर सक्रिय हुए।
घंटाघर में मंगाए कपड़े
24 को एकता को अगवा करने के बाद विमल ने शाम को जूही मिलेट्री कैम्प स्थित बहन के घर पर कार खड़ी कर दी थी। पुलिस को कार वहीं से मिली थी। उसी दिन रात में विमल ने अपने भांजे से घंटाघर पर कपड़े मंगवाए थे। खुद विमल अपनी बहन के रिश्तेदार के घर में महोबा में छुपा था। वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। इसलिए पुलिस उसको तलाश नहीं पा रही थी।
लोअर और बाल से शिनाख्त
खुदाई के बाद आफिसर क्लब में एकता का सिर्फ कंकाल बरामद हुआ। पति ने बताया कि उसने शव की शिनाख्त एकता के लोअर और उसके बाल से की थी। मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी कि वह एकता को इस तरह से मार देगा। कोई जालिम भी ऐसे नहीं मारता है।
आगे और सनसनीखेज खुलासे की संभावना
सूत्रों के मुताबिक विमल ने एकता के अपहरण और हत्या का ताना-बाना जिस शातिराना ढंग से बनाया, उससे आगे और सनसनीखेज खुलासे होने की संभावनाएं हैं। मसलन बहुत संभव है कि उसने अपनी बेगुनाही के तमाम सबूत दृश्यम की तरह गढ़ रखे हों, जो वह अदालत में पेश करे। पुलिस को इस नजरिए से भी गहन छानबीन करनी होगी। दूर की कौड़ी यह भी कि कंकाल के रूप में मिला शव भी बदल तो नहीं दिया गया। क्या डीएनए जांच में यह हड्डियां एकता की होने की तस्दीक हो सकेंगी या डीएनए सैंपल बदलवाने के लिए भी विमल ने कोई जाल नहीं बुन रखा है?
नीचे दफ्न थी एकता, ऊपर अफसर खेलते रहे
अचरज ऐसे ही होते हैं। जिस जगह अफसर रोज बैडमिंटन और वॉलीबॉल खेलते रहे, वहीं पांच फिट गहराई में एकता का शव दफन था। कभी तो यहां गड्ढा खोदा गया होगा। एकता जिंदा या मुर्दा वहां तक लाई गई होगी। दफनाने में भी कुछ तो वक्त लगा होगा। त्रिनेत्र का नेटवर्क, डीएम बंगले की गारद और ऑफिसर्स क्लब में आने-जाने वालों को कुछ क्यों नहीं दिखा। ताजा खोदा या भरा गया गड्ढा वैसे तो दूर से ही दिख जाता है, पर वहां करीब ही खेलने वाले अनुभवी अफसरों को संदेह क्यों नहीं हुआ?
करतूत में क्लब का कोई मिला है क्या
आखिर जिम ट्रेनर विमल सोनी को क्लब में इतनी आसान एंट्री कैसे मिल गई? क्या अंदर का कोई इस करतूत में उसके साथ मिला है? किसकी मदद से वह ऐसे सुरक्षित स्थान तक लाश लेकर पहुंचा और बेखौफ होकर उसे दफन करने में कामयाब रहा। लाश के कंकाल में बदलने से जाहिर है कि यह ताजा मामला नहीं है। हत्या और दफनाने के महीनों बाद तक किसी को इस कांड की हवा क्यों नहीं लगी? खुलासा भी तब ही हो सका, जब खुद विमल पकड़ा गया।
डीएम कैंपस की सुरक्षा में लगा दी ट्रेनर ने सेंध
शातिर जिम ट्रेनर विमल सोनी का 2010 से आफिसर क्लब से लेकर डीएम आवास तक खूब आना जाना था। इसका उसने फायदा उठाकर रात में बंद रहने वाले आफिसर क्लब में एकता की हत्या करके उसके शव को दफना दिया। फिर भी शहर के सबसे सुरक्षित आवासीय परिसर में किसी को भनक तक नहीं लगी। डीएम आवास में पूरी रात गारद बैठती है, किसी को भी खुदाई और दफनाने की भनक तक न लगी। जिम ट्रेनर ने डीएम कैम्प की पूरी सुरक्षा में ही सेंध लगाकर अफसरों को खुली चुनौती दे डाली।