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आज पूरे प्रदेश सहित राजधानी भोपाल में हनुमान जन्मोत्सव श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। शहर के सभी प्रमुख हनुमान मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और रामधुन में लीन दिखाई दे रहे हैं, जिससे पूरे शहर का माहौल भक्तिमय हो गया है।
हनुमान जयंती के अवसर पर आज गुरुवार काे विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा भव्य आयोजन किए जा रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद् भोपाल द्वारा आज शाम 4:30 बजे पुराने शहर स्थित कार्यालय से भव्य गदा यात्रा निकाली जाएगी, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए विभिन्न हनुमान मंदिरों तक पहुंचेगी।
इसके अलावा, जय मां भवानी हिंदू संगठन द्वारा कालीघाट मंदिर से बैरसिया रोड तक हिंदू एकता शोभायात्रा निकाली जा रही है। इस यात्रा में 15 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा, आकर्षक झांकियां, ढोल-नगाड़े और आतिशबाजी मुख्य आकर्षण हैं। वहीं बजरंग दल की वीर बजरंगी गदा यात्रा भी शाम 4:30 बजे छोला रोड से प्रारंभ होगी।
प्रदेशभर में भी उमड़ा आस्था का जनसैलाब
भोपाल के खेड़ापति हनुमान मंदिर के साथ-साथ इंदौर के पितरेश्वर और रणजीत हनुमान, उज्जैन के गेबी हनुमान, जबलपुर के अर्जी वाले हनुमान और ग्वालियर के मंशापूर्ण हनुमान मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। जगह-जगह भंडारे, शोभायात्राएं और धार्मिक आयोजन हो रहे हैं।
दुर्लभ संयोग में मनाया जा रहा प्राकट्य उत्सव
पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार, इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पर गुरुवार, हस्त नक्षत्र और ध्रुव योग के दुर्लभ संयोग में मनाया जा रहा है। कन्या राशि में स्थित चंद्रमा इस शुभ अवसर का साक्षी है। यह विशेष योग साधना और उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है, जिससे हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है।
ट्रैफिक प्लान लागू, कई मार्गों पर डायवर्जन
हनुमान जन्मोत्सव के जुलूसों को देखते हुए भोपाल में विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है। आज शाम 4 बजे से पुराने शहर के कई मार्गों पर यातायात प्रभावित रहेगा।
दो प्रमुख जुलूस मार्ग तय
पहला जुलूस – तलैया क्षेत्र से शुरू होकर बुधवारा चौराहा, इतवारा, आजाद मार्केट, छोटेभैया, घोड़ा नक्कास, बस स्टैंड, भोपाल टॉकीज होते हुए सिंधी कॉलोनी तक जाएगा। दूसरा जुलूस – ओम अग्रवाल धर्मशाला स्थित विश्व हिंदू परिषद कार्यालय से शुरू होकर छोला रोड, गणेश मंदिर, जेपी नगर तिराहा, डीआईजी बंगला चौराहा, काजी कैंप होते हुए सिंधी कॉलोनी चौराहा तक पहुंचेगा।
बसों के रूट में बड़ा बदलाव
हलालपुर बस स्टैंड से चलने वाली बसें नादरा नहीं जाएंगी, वहीं से संचालित होंगी नादरा से विदिशा-बैरासिया रूट की बसें बेस्ट प्राइस तक सीमित रहेंगी
सभी प्रकार के व्यावसायिक, लोक परिवहन और भारी वाहन जुलूस मार्गों पर प्रतिबंधित रहेंगे .
200 साल पुराना खटलापुरा हनुमान मंदिर
राजधानी स्थित खटलापुरा श्री हनुमान मंदिर अपनी प्राचीनता और चमत्कारी मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। करीब 200 वर्ष पुराने इस मंदिर की महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है, जहां हर दिन भक्तों की भीड़ रहती है।
मंदिर की खासियत क्या है?
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां विराजित हनुमान जी की अर्ध शिला रूप में स्थापित प्रतिमा है, जो बेहद दुर्लभ मानी जाती है। मान्यता है कि यह प्रतिमा बड़ा तालाब (लोअर लेक) से प्राप्त हुई थी, जिससे इस स्थान की पवित्रता और भी बढ़ जाती है। भक्त इसे सिद्ध और चमत्कारी स्थल मानते हैं। बताया जाता है कि नवाबों के जमाने में केवल भोपाल में चार मंदिर हुआ करते थे उन चार मंदिरों में यह मंदिर भी शामिल था जहां भक्त पहुंचते थे।
मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता
स्थानीय श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। संकटों से मुक्ति, साहस और सफलता की कामना लेकर लोग बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। यही आस्था इस मंदिर को खास पहचान दिलाती है।
हनुमान जयंती पर उमड़ती है भीड़
हनुमान जयंती के अवसर पर इस मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है। हर साल इस दिन यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सुबह से ही मंदिर में लंबी कतारें लग जाती हैं और पूरा परिसर भक्ति के माहौल में डूब जाता है।
नियमित दिनों में भी रहता है आकर्षण
वैसे तो हर मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की अच्छी-खासी भीड़ रहती है, लेकिन हनुमान जयंती पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है और मंदिर आस्था के बड़े केंद्र के रूप में नजर आता है। पिछले कई वर्षों से हर मंगलवार यहां पर भंडारे का आयोजन किया जाता है खास बात है कि भंडारे में मिलने वाला प्रसाद बनाने का काम भक्त मंडल ही करता है।
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314 करोड़ की लागत से 30 एकड़ में बन रहा है हनुमान लोक
मंदिर समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने बताया कि "करीब 30 एकड़ में बन रहे हनुमान लोक के पहले फेज का काम पूरा हो गया है. पहले फेज में करीब 35 करोड़ की लागत से यहां चिरंजीवी पथ, श्रद्धालुओं व पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था, फूड कोर्ट, हनुमानजी की बाल लीलाओं को प्रदर्शित करती प्रतिमाएं, महाराष्ट्रीयन संस्कृति को दर्शाता स्वागत द्वार और परिसर में लाइटिंग की व्यवस्था की गई है.
दूसरे फेज में होगा गर्भ गृह का निर्माण
हनुमान लोक के सेकंड फेज का काम अभी बाकी है. बताया जा रहा है कि हनुमान लोक प्रोजेक्ट का निर्माण 10 साल में पूरा होना है. जिसके तहत अभी पहले फेज का काम पूरा हुआ है. सेकंड फेज का निर्माण अभी बाकी है. सेकंड फेज के लिए भी शासन द्वारा दो भागों में फंड दिया जाना है. सेकंड फेज में मंदिर से लगे नाले का संरक्षण व सौंदर्यीकरण, चिरंजीवी पथ का निर्माण होना है. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और आस्था को देखते हुए एमपी शासन द्वारा मंदिर परिसर में सुविधाओं का विस्तार करते हुए 'हनुमान लोक' का निर्माण किया जा रहा है.
जिसे उज्जैन के 'महाकाल लोक' की तर्ज पर भव्य रूप दिया जा रहा है. मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में बनाए जा रहे इस भव्य 'हनुमान लोक' परियोजना पर 314 करोड़ रुपए की लागत आएगी."
दूसरे फेज में होगा गर्भ गृह का निर्माण
हनुमान लोक के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. जिसमें भक्ति सागर एवं प्रवचन हॉल का निर्माण, यज्ञशाला का निर्माण, दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग का निर्माण, संस्कृत महाविद्यालय का निर्माण, भोजशाला का निर्माण, धर्मशाला का निर्माण, चिकित्सा केंद्र की स्थापना, अष्ट सिद्धि केंद्र का निर्माण, ओपन एयर थिएटर का निर्माण, वाटर फ्रंट पाथवे का निर्माण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की स्थापना, शेष बचे पाथ वे का निर्माण एवं परिसर का सौंदर्यीकरण का कार्य शामिल है.
श्री हनुमान लोक परियोजना के दूसरे चरण में श्री मूर्ति गर्भगृह का निर्माण भी प्रस्तावित है, जो मंदिर की पारंपरिक आस्था और आधुनिक सुविधा दोनों का समन्वय होगा. मंदिर न्यास द्वारा इस गर्भगृह की डिजाइनिंग और योजना तैयार की जा रही है. यह निर्माण कार्य श्रद्धालुओं को करीब से दिव्य दर्शन की अनुभूति देगा.
ऐतिहासिक मान्यताएं और रहस्य
मंदिर के पुजारी कमलेश तिवारी ने बताया कि "इस स्थान पर हनुमानजी की श्रीमूर्ति स्वयंभू प्रकट हुई थी. इस तरह की लेटी हुई और ऊर्ध्वमुखी प्रतिमा पूरे भारतवर्ष में कहीं और देखने को नहीं मिलती है, जो इसे अत्यंत विशिष्ट बनाती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्रारंभ में हनुमानजी की प्रतिमा खड़ी अवस्था में थी. वर्षों पूर्व कुछ चोरों ने प्रतिमा के नीचे खजाना छिपे होने की अफवाह के कारण इसे हटाने का प्रयास किया.
इस दौरान मूर्ति अपने स्थान से हिली नहीं, बल्कि अपने-आप विश्राम अवस्था में लेट गई. कई प्रयासों के बावजूद मूर्ति को हिलाया नहीं जा सका, यहां तक कि 20 बैलों की सहायता से भी मूर्ति को टस से मस नहीं किया जा सका. मंदिर के इतिहास के बारे में कोई प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, लेकिन लगभग 100 वर्ष पहले के राजस्व अभिलेखों में यहां हनुमान जी की उपस्थिति का उल्लेख मिलता है. कुछ लोगों का मानना है कि भगवान श्रीराम इस स्थान पर पीपल के पेड़ के रूप में विराजमान हैं, जबकि हनुमान जी उनके चरणों में लेटे हुए हैं."
]]>इंदौर में रणजीत हनुमान मंदिर का कायापलट होने जा रहा है। यहां रणजीत लोक बनाकर मंदिर का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस पर कुल 7 करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्लान तैयार हो चुका है, टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है।
मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने कहा- रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की संख्या हजारों में पहुंच जाती है।
मंदिर प्रशासक एनएस राजपूत ने बताया कि रणजीत लोक तैयार होने के बाद श्रद्धालु मंदिर के पास बने बड़े मैदान से प्रवेश करेंगे। वहां से एक पाथ-वे के माध्यम से छोटी पार्किंग तक पहुंचेंगे। पाथ-वे में जिग-जैग पैटर्न पर रेलिंग लगाई जाएंगी। इनकी संख्या भीड़ के अनुसार घटाई या बढ़ाई जा सकेगी।इसके बाद श्रद्धालु दत्त मंदिर से होते हुए दर्शन की मुख्य लाइन में पहुंचेंगे। भगवान के दर्शन कर वहीं से वापस बाहर निकलेंगे।
पाथ-वे की दीवारों पर रामायण और सुंदरकांड की झलक मंदिर प्रशासक राजपूत ने बताया- यहां सभी तरह के मौसम के मुताबिक व्यवस्थाएं जुटाई जाएंगी ताकि सर्दी, गर्मी और बारिश में भक्तों को परेशानी न हो। बैठने के लिए नई बेंच लगेंगी। बाउंड्रीवाल भी बनाई जाएगी।25 फीट का पाथ-वे बनेगा, इसकी दीवारों पर पत्थरों से भगवान हनुमान से जुड़े दृश्य उकेरे जाएंगे। रामायण और सुंदरकांड को तस्वीरों में दर्शाया जाएगा।
छत पर कशीदाकारी, बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी रोशनी रणजीत लोक की छत पर भी कशीदाकारी की जाएगी। बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी लाइटिंग लगेगी। यहां भी सुंदरकांड का चित्रण होगा। मंदिर का एक्सटेंशन 40 फीट आगे तक होगा। नया मुख्य द्वार बनेगा। शेड तैयार किए जाएंगे।मंदिर परिसर में ही पुलिस चौकी बनाई जाएगी। नया जूता स्टैंड, पेय जल की व्यवस्था की जाएगी। बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी।
भक्त पाथ-वे के जरिए दर्शन करने जाएंगे। यहां एलईडी पर भगवान के लाइव दर्शन होंगे।स्मार्ट सिटी संभाल रहा निर्माण की जिम्मेदारी मंदिर प्रशासक राजपूत ने बताया- रणजीत लोक निर्माण की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और दान की राशि का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते इसका काम शुरू किया जा चुका है।
पांचवीं पीढ़ी संभाल रही पूजा-अर्चना का काम वर्तमान पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा स्व. पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। व्यास ने कहा- शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया। 1992 में आरसीसी छत डाली गई।
व्यास के अनुसार, होलकर राजा जब भी युद्ध के लिए जाते थे तो यहां पूजा-हवन करते थे। विजय की कामना के साथ यहां आते और फिर युद्ध के लिए जाते थे इसलिए मंदिर का नाम रणजीत हनुमान पड़ा।
उन्होंने कहा- पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर यहां रणजीत अष्टमी मनाई जाती है। सुबह 5 बजे प्रभात फेरी निकाली जाती है। दिनभर पूजा-अर्चना और विशेष आरती की जाती है। 21 लाख रुपए के रथ पर सवार होकर रणजीत हनुमान नगर भ्रमण करते हैं।
महाकाल लोक के बाद अब मध्यप्रदेश में हनुमान लोक नजर आएगा। इसका निर्माण सौंसर के जाम सांवली में होगा। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड 314 करोड़ की लागत से करीब 30 एकड़ में इसका निर्माण करवा रहा है। उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर 6 फेज में हनुमान लोक कॉरिडोर का काम होगा। फर्स्ट फेज में 35 करोड़ की लागत से एंट्रेंस प्लाजा से हनुमान लोक तक का काम किया जाएगा।
हनुमान जयंती के पावन अवसर और मंदिर की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में जबलपुर स्थित पचमठा मंदिर में विशेष आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए हनुमान मंदिर सेवा समिति और महिला मंडल की ओर से तीन दिवसीय महोत्सव का आयोजन किया गया। इस महोत्सव को भव्य और यादगार बनाने के लिए 56 भोग की विशेष महा थाली और पांच हजार किलोग्राम का विशाल लड्डू तैयार किया गया है। वहीं थाली में देश के विभिन्न हिस्सों के पारंपरिक व्यंजन शामिल किए गए। इसका उद्देश्य "विविधता में एकता" का संदेश देना था।
महाथाली में शामिल सामग्री
इस महा थाली में कश्मीर के ड्राई फ्रूट्स, गुजरात के फाफड़ा, जलेबी और ढोकला, उत्तर प्रदेश का लइया, बनारस का पान, लस्सी और बेल शरबत, तथा बिहार की प्रसिद्ध लिट्टी-चोखा जैसे व्यंजन शामिल किए गए हैं।
हनुमान जी से जुड़ने का माध्यम
जगद्गुरु राघव देवाचार्य ने इस अवसर पर कहा कि यह हनुमान जी की शक्ति है जो हमें याद दिलाती है कि हम कौन हैं। जिस तरह उन्होंने भगवान राम के साथ चलकर अपना उद्देश्य पाया, उसी तरह हम भी उनकी (हनुमान जी) आत्मा से जुड़े रहकर अपनी हिंदू पहचान को समझ और व्यक्त कर सकते हैं। हनुमान जयंती भगवान हनुमान के जन्म का प्रतीक है और यह हिंदू महीने चैत्र की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इसे चैत्र पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस शुभ अवसर पर, दुनिया भर के भक्त उपवास रखते हैं और देवता की पूजा करते हैं।
उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि भगवान श्री हनुमान, शक्ति, भक्ति, साहस, सेवा और समर्पण के प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें निष्ठा, अनुशासन और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति और निष्काम सेवा प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणा स्रोत है।
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-शांति, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की है। उन्होंने भगवान हनुमान से सभी के जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और संकल्प की भावना का संचार करने की प्रार्थना की है।
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आचार्य के अनुसार इस वर्ष हनुमान जयंती विशेष रूप से शुभ मानी जा रही है. क्योंकि यह 12 अप्रैल 2025 को पंचग्रही योग में मनाई जाएगी. जो कि पूरे 57 वर्षों बाद का एक अद्भुत ज्योतिषीय संयोग है. इस दुर्लभ अवसर पर हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं को हनुमान चालीसा, हनुमान वडवानल स्तोत्र और पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए.
ढैय्या-साढ़ेसाती से बचने के लिए करें ये उपाय
ज्योतिषियों के मुताबिक हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर आप हनुमान जी को पान का बीड़ा चढ़ाएं। इसके बाद कुछ कागजी बादाम लेकर उसे काले रंग के कपड़े में बांध लें। फिर इसे आप घर की दक्षिण दिशा में किसी गुप्त स्थान पर रख दें। अगले दिन शनि मंदिर में जाकर इसे रख दें। इससे साढ़ेसाती से मिलने वाले नकारात्मक परिणामों से मुक्ति प्राप्त होती हैं।
हनुमान जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर आप उपवास रखें। फिर बजरंगबली को सिंदूर व चमेली का तेल चढ़ाएं। अब बरगद के कम से कम 8 पत्तों पर सिंदूर से राम-नाम लिखें। इसकी एक माला बनाकर हनुमान जी को अर्पित करें। कहते हैं कि इस उपाय को करने से शनि साढ़ेसाती व ढैय्या के प्रभाव में कमी आती है।
ज्योतिषियों के मुताबिक आप सरसों के तेल में सिंदूर मिलाकर घर के सभी दरवाजों पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। इससे शनि देव की कृपा प्राप्त होती है।
हनुमान जन्मोत्सव के दिन आप हनुमान जी की पूजा करें। इसके बाद आप एकांत में भगवान राम के नाम का जप करें। मान्यता है कि ऐसा करने पर हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
हनुमान जन्मोत्स के दिन हनुमान मंदिर में चमेली के तेल का दीपक जलाएं। इस दौरान प्रभु को गुड़ का भोग लगाएं और हनुमान चालीसा का 11 बार पाठ करें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से करियर में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
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हनुमान जयंती 2025 तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल 2025 को प्रात: 03 बजकर 20 मिनट पर होगा। साथ ही अगले दिन 13 अप्रैल 2025 को सुबह 05 बजकर 52 मिनट पर इसका अंत होगा। इसलिए हनुमान जयंती 12 अप्रैल को मनाया जाएगा।
हनुमान जन्मोत्सव शुभ मुहूर्त 2025
इस बार हनुमान जन्मोत्सव पर पूजा के लिए दो शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। पहला मुहूर्त 12 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 34 मिनट से सुबह 9 बजकर 12 मिनट तक है। इसके बाद दूसरा शुभ मुहूर्त शाम को 6 बजकर 46 मिनट से लेकर रात 8. 8 मिनट तक रहेगा।
हनुमान जी के मंत्र
1. ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट
2. ॐ नमो भगवते हनुमते नमः
3. ॐ महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते. हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये। नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।
4. ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।
हनुमान जयंती का धार्मिक महत्व
धर्म ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी ही एक ऐसे देव हैं जो आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं। इसलिए हनुमान जंयती के दिन बजरंगबली की पूजा- अर्चना करने से बल और बुद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।
हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुधि लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
पैठी पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे।
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संत जन तारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।