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भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने जर्मनी के खिलाफ दो मैचों की द्विपक्षीय सीरीज से पहले अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सीरीज “राजधानी में हॉकी की भावना को फिर से जागृत करने” के बारे में है। दो मैचों की सीरीज 23 और 24 अक्टूबर को प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में खेली जाएगी। यह सीरीज एक दशक के बाद राजधानी में पुरुषों की अंतरराष्ट्रीय हॉकी की वापसी का प्रतीक होगी, जिसका आखिरी मैच जनवरी 2014 में हॉकी वर्ल्ड लीग फाइनल – पुरुष राउंड 4 के दौरान खेला गया था।
आगामी सीरीज के बारे में बात करते हुए, हरमनप्रीत ने कहा, “इतने वर्षों के बाद दिल्ली में घरेलू प्रशंसकों के सामने खेलना एक टीम के रूप में हमारे लिए वास्तव में विशेष है। मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में बहुत सारा इतिहास और यादें हैं और यहां टीम का नेतृत्व करना एक बड़ा सम्मान होगा। अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेलने की ऊर्जा बेजोड़ है और मुझे पता है कि प्रशंसक बड़ी संख्या में हमारा समर्थन करने के लिए आएंगे।
उन्होंने आगे कहा, “जर्मनी विश्व हॉकी की शीर्ष टीमों में से एक है और उनके खिलाफ खेलना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती होगी। यह हमारी तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हम आगे आने वाले प्रमुख टूर्नामेंटों के लिए तैयार हैं। हम कड़ी मेहनत कर रहे हैं और यह श्रृंखला हमें एक बहुत मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ खुद को परखने का अवसर देगी।” दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय हॉकी की वापसी पर हरमनप्रीत ने कहा, “दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैच की मेजबानी किए हुए एक दशक से अधिक समय हो गया है और हम इस खेल को राजधानी में वापस लाने के लिए उत्साहित हैं। यह श्रृंखला केवल दो टीमों के खेलने के बारे में नहीं है; यह दिल्ली में हॉकी की भावना को पुनर्जीवित करने के बारे में है। हमें उम्मीद है कि यह क्षेत्र के अधिक युवा खिलाड़ियों को खेल को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।”
उल्लेखनीय रूप से, यह दो मैचों की श्रृंखला न केवल दिल्ली के लिए एक आकर्षण है, बल्कि देश भर में खेल को बढ़ावा देने के हॉकी इंडिया के दृष्टिकोण का भी हिस्सा है। हाल के वर्षों में हॉकी इंडिया ने ओडिशा से आगे बढ़कर इस खेल को अन्य शहरों में भी लाने का प्रयास किया है। ओडिशा हॉकी का केंद्र बन गया है। पिछले साल चेन्नई ने पुरुष एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी की थी, जबकि रांची ने महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी और एफआईएच हॉकी ओलंपिक क्वालीफायर दोनों का स्वागत किया था। इस नवंबर में बिहार का एक शहर राजगीर आगामी महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी करेगा, जो भारत में हॉकी के बढ़ते प्रभाव में एक और अध्याय जोड़ेगा। अब, जब अंतरराष्ट्रीय हॉकी दिल्ली में वापस आ रही है, तो हॉकी इंडिया यह सुनिश्चित कर रहा है कि खेल विभिन्न क्षेत्रों में फलता-फूलता रहे।
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उन्होंने कहा ‘‘एफआईएच प्लेयर ऑफ द ईयर अवार्ड के लिए फिर से नामांकित होना एक बड़ा सम्मान है। मैं दुनिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़यिों में अपना नाम शामिल होने से बहुत खुश हूँ, लेकिन मैं यह स्वीकार करना चाहूँगा कि यह मेरी टीम के समर्थन के बिना संभव नहीं होता। एफआईएच हॉकी प्रो लीग और पेरिस 2024 ओलंपिक खेलों में मैंने जो भी गोल किए हैं, वे इसलिए हैं क्योंकि टीम ने मेरे लिए गोल करने के मौके बनाए हैं।’’ टेस्ट मैचों, एफआईएच हॉकी प्रो समेत 2024 में आयोजित सभी अंतरराष्ट्रीय मैचों को ध्यान में रखते हुए हरमनप्रीत को नीदरलैंड के थिएरी ब्रिंकमैन, जोएप डी मोल, जर्मनी के हेंस मुलर और इंग्लैंड के ज़ैक वालेस के साथ नामांकित किया गया है।
हरमनप्रीत ने एफआईएच हॉकी नेशंस कप, एफआईएच हॉकी ओलंपिक क्वालीफायर और ओलंपिक गेम्स पेरिस 2024 में अपनी शानदार रक्षा और पेनल्टी कॉर्नर पर उत्कृष्ट गोल स्कोरिंग के साथ भारतीय टीम को कांस्य पदक दिलाया है। उन्होंने ओलंपिक में आठ मैचों में 10 गोल किए, जिनमें से सात गोल पेनल्टी कॉर्नर से आए और बाकी तीन गोल पेनल्टी स्ट्रोक थे।
उन्होंने कहा ‘‘ओलंपिक गेम्स पेरिस 2024 न केवल वर्ष का मुख्य आकर्षण था, बल्कि मेरे अब तक के पूरे करियर का मुख्य आकर्षण था। टीम ने हमेशा मेरा समर्थन किया है, खासकर पिछले साल विश्व कप के दौरान जहां मैं पेनल्टी कॉर्नर पर गोल नहीं कर सका। लेकिन टीम ने मुझे किसी भी तरह से निराश होने या खुद को दोष देने नहीं दिया और जबकि ओलंपिक में प्रदर्शन करने और पदक के साथ वापस आने के कई कारण थे, उनमें से एक था कि टीम ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, मेरे दिमाग में हमेशा यह बात रहती थी कि मुझे इसका बदला चुकाना होगा।
ओलंपिक खेलों के बाद थोड़ी राहत के साथ, हरमनप्रीत ने चीन के मोकी में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2024 पर अपनी नजरें जमा लीं। एक बार फिर उदाहरण पेश करते हुए टीम का नेतृत्व करते हुए, उन्होंने सात मैचों में सात गोल किए और उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। हरमनप्रीत देश के लिए 226 मैचों में 205 गोल करके खेल के शिखर पर रहे हैं। यह उपलब्धि केवल खेल के दिग्गज मेजर ध्यानचंद और बलबीर सिंह सीनियर ने ही हासिल की है।
उन्होंने कहा ‘‘मेरे जीवन का उद्देश्य पुराने गौरवशाली दिनों को वापस लाना है। हम इस सपने को साकार करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे लेकिन हम इसे अपने दम पर नहीं कर सकते; हमें अपने प्रशंसकों के समर्थन की जरूरत है। जैसा कि टीम अगले ओलंपिक चक्र के लिए तैयारी कर रही है, मैं भारतीयों से खेल देखने और हमारा समर्थन करने का आग्रह करता हूं।
पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह को शनिवार को एफआईएच वर्ष के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के पुरस्कार के लिये नामांकित किया गया। 28 वर्ष के ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत ने पेरिस ओलंपिक में आठ मैचों में दस गोल किये थे। वह 2020 और 2022 में लगातार दो बार पुरस्कार जीत चुके हैं।
हॉकी इंडिया द्वारा जारी विज्ञप्ति में उन्होंने कहा, ‘‘एफआईएच वर्ष के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के पुरस्कार की दौड़ में एक बार फिर शामिल होना गर्व की बात है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ मुझे नामांकन मिला है। लेकिन यह मेरी टीम के सहयोग के बिना संभव नहीं था। मैं एफआईएच प्रो लीग और पेरिस ओलंपिक में भी इतने गोल इसलिये कर सका क्योंकि टीम ने गोल करने के मौके बनाये।’’
हरमनप्रीत के अलावा नीदरलैंड के थियरी ब्रिंकमैन और योएप डि मोल, जर्मनी के हानेस म्यूलेर और इंग्लैंड के जाक वालास भी दौड़ में हैं। इसके लिये 2024 में हुए सभी मैचों को गिना जायेगा जिसमें टेस्ट मैच, एफआईएच हॉकी प्रो लीग, एफआईएच हॉकी नेशंस कप, ओलंपिक क्वालीफायर और ओलंपिक शामिल है।
हरमनप्रीत ने कहा, ‘‘पेरिस ओलंपिक अभी तक मेरे कैरियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है। टीम ने हमेशा मेरा साथ दिया, खासकर पिछले साल विश्व कप में जब मैं एक भी गोल नहीं कर सका था। लेकिन टीम ने मुझे दोष नहीं दिया। मेरे दिमाग में हमेशा से था कि टीम के भरोसे पर खरा उतरना है।’’ भारतीय टीम ने हाल ही में चीन में एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी भी जीती है। हरमनप्रीत सात गोल करके प्लेयर आफ द टूर्नामेंट रहे। पुरस्कार के लिये मतदान 11 अक्टूबर तक होगा।
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हॉकी इंडिया की विज्ञप्ति के अनुसार हरमनप्रीत ने कहा, ‘फाइनल वास्तव में तनावपूर्ण था। चीन की टीम ने पूरे मैच के दौरान हमारे सामने कड़ी चुनौती पेश की जिससे गोल करने के लिए मौका बनाना आसान नहीं था।' उन्होंने कहा, ‘लेकिन पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों का एक दूसरे पर भरोसा काफी बढ़ा है। हम एक दूसरे के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं। इस तरह की एकजुटता से हमें मैच जीतने में मदद मिलती है।'
भारतीय कप्तान ने कहा, ‘पिछले साल चेन्नई में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में स्वर्ण पदक, हांगझोउ एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक और पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने से टीम के अंदर गहरा सौहार्द पैदा हुआ है।' हरमनप्रीत ने इन प्रतियोगिताओं में आगे बढ़कर नेतृत्व किया। उन्होंने पेरिस ओलंपिक में 10 गोल किए। भारत ने एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में कुल 26 गोल किए जिनमें सात गोल हरमनप्रीत ने दागे। उन्होंने अपने सभी गोल पेनल्टी कार्नर पर किये। हरमनप्रीत ने कहा कि आगे भी इस सफलता को बरकरार रखना महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने कहा, ‘हमें गर्व है कि हम अपना खिताब बचाने में सफल रहे लेकिन काम यही पर समाप्त नहीं हुआ है। अभी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें सुधार की जरूरत है। हमें एक टीम के रूप में मजबूत बनना होगा।' उप-कप्तान विवेक सागर ने कहा कि ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद प्रत्येक टीम का लक्ष्य भारत को हराना था। उन्होंने कहा, ‘ग्रुप चरण में किसी भी टीम के खिलाफ खेलना आसान नहीं था। ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद प्रत्येक टीम ने भारत को हराना अपना लक्ष्य बनाया था। लेकिन हमारे प्रत्येक खिलाड़ी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।'
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पेरिस ओलंपिक के बाद ब्रेक खत्म करके टीम एशियाई टीमों का सामना करने के लिये तैयार है : हरमनप्रीत
भारतीय पुरुष हॉकी टीम एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के लिए चीन रवाना
बेंगलुरू
भारतीय पुरूष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि लगातार दूसरी बार ओलंपिक कांस्य पदक जीतने का जश्न खत्म करके अब चीन में इस महीने होने वाली एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी में खिताब बरकरार रखने पर फोकस करना होगा।
हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारत ने पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीता। हरमनप्रीत ने हालांकि कहा कि अब ब्रेक के बाद आठ से 17 सितंबर तक होने वाली एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
हरमनप्रीत ने चीन रवाना होने से पहले कहा, ‘‘पेरिस ओलंपिक के बाद ब्रेक खत्म करके टीम एशियाई टीमों का सामना करने के लिये तैयार है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पेरिस ओलंपिक में हमारा प्रदर्शन अच्छा रहा लेकिन हॉकी काफी करीबी खेल है। हम अतीत के अच्छे प्रदर्शन के भरोसे नहीं रह सकते।’’
भारत के अलावा कोरिया, मलेशिया, पाकिस्तान, जापान और मेजबान चीन इस टूर्नामेंट में भाग ले रहे हैं। भारत को आठ सितंबर को चीन से खेलना है।इसके बाद नौ सितंबर को जापान से, 11 सितंबर को मलेशिया, 12 सितंबर को कोरिया और 14 सितंबर को पाकिस्तान से मुकाबला है। शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में खेलेंगी जबकि फाइनल 17 सितंबर को है। भारत ने चार बार और पाकिस्तान ने तीन बार खिताब जीता है। पिछली बार चेन्नई में भारत ने मलेशिया को 4.3 से हराकर खिताब जीता था।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के लिए चीन रवाना
भारतीय पुरुष हॉकी टीम एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भाग लेने के लिए चीन के हुलुनबुइर के लिए रवाना हुई। पेरिस 2024 ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता अपना खिताब बचाने का प्रयास करेंगे। इस टूर्नामेंट में कोरिया, मलेशिया, पाकिस्तान, जापान और चीन भी शामिल हैं।
भारत अपने अभियान की शुरुआत 8 सितंबर को मेजबान चीन के खिलाफ करेगा। उसके बाद 9 सितंबर को जापान, 11 सितंबर को मलेशिया और 12 सितंबर को कोरिया से भिड़ेगा। 14 सितंबर को अंतिम पूल चरण मैच में भारत का सामना चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से होगा। पूल में शीर्ष चार टीमें 16 सितंबर को होने वाले सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। इसके बाद विजेता टीमें 17 सितंबर को फाइनल में भिड़ेंगी।
चीन रवाना होने से पहले कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा, "पेरिस ओलंपिक के बाद हमें एक छोटा ब्रेक मिला। एक नई ऊर्जा और फ्रेश माइंड के साथ टीम एशिया में सर्वश्रेष्ठ हॉकी खेलने वाले देशों से भिड़ने और अपनी क्षमता साबित करने के लिए तैयार है। पेरिस में हमारा प्रदर्शन अच्छा रहा। हमारा लक्ष्य उच्च स्तर की हॉकी खेलना और अपनी लय बरकरार रखना होगा।"
उप कप्तान विवेक सागर प्रसाद ने कहा, "इतनी कम उम्र में टीम का उप कप्तान बनना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। हालांकि, एक तरह से हम सभी टीम में कप्तान और उप कप्तान हैं और पूरी टीम की जिम्मेदारियां साझा हैं। इस बार टीम में कुछ नए खिलाड़ी हैं, जिनमें अपार संभावनाएं हैं और जो प्रदर्शन करने के लिए उत्सुक हैं। हम अपने खिताब की रक्षा के लिए अपना हुनर दिखाने के लिए उत्सुक हैं। हम उनके लिए एक अनुकूल माहौल बनाने की पूरी कोशिश करेंगे।"
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