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सेब का कमाल
हेल्थलाइन के मुताबिक, प्याज खाने के बाद अगर आप एक सेब खाते हैं तो यह काफी मददगार होता है. सेब में मौजूद नेचुरल एंजाइम्स प्याज के सल्फर कंपाउंड्स को ब्रेक करने का काम करते हैं. यदि आप प्याज खाने की थोड़ी देर बाद सेब जैसे फल का सेवन करते हैं तो सांसों की दुर्गंध को कम करने में मदद मिल सकती है.
नींबू और साइट्रस फ्रूट्स
केयर फ्री डेंटल के मुताबिक, हाथों की बदबू दूर करने के लिए नींबू का रस एक बेहतरीन ऑपशन है. नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड न केवल बैक्टीरिया को मारता है बल्कि प्याज की स्मेल को भी खत्म करता है. नींबू पानी से कुल्ला करना या हाथों पर इसे रगड़ना बदबू को तुरंत कम कर सकता है.
ग्रीन टी का सेवन
Vinmec Health की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीन टी में पॉलीफेनोल्स नाम के पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. ये कंपाउंड प्याज में मिलने वाले गंध पैदा करने वाले कंपाउंड्स को खत्म करने में मदद करते हैं. इसलिए खाने के बाद 1 कप गर्म ग्रीन टी पीने से मुंह की ताजगी बनी रहती है और बैक्टीरिया का असर कम होता है.
स्टेनलेस स्टील और नमक
क्या आप जानते हैं कि हाथों को स्टेनलेस स्टील पर रगड़ने से प्याज की गंध गायब हो जाती है. इसका कारण है कि स्टील के मॉलिक्यूल्स प्याज के सल्फर के साथ बाइंड होकर उसे स्किन से हटा देते हैं. साथ ही हाथों पर थोड़ा नमक रगड़कर धोने से भी स्मेल काफी हद तक कम हो जाती है.
बेकिंग सोडा और विनेगर
मुंह की स्मेल के लिए एप्पल साइडर विनेगर या बेकिंग सोडा का पानी से कुल्ला करना एक अच्छा उपाय है. यह मुंह के pH लेवल को बैलेंस करता है जिससे बैक्टीरिया नहीं पनपते. WebMD के मुताबिक, बेकिंग सोडा ओरल हाइजीन बनाए रखने और बदबू को कंट्रोल करने में काफी प्रभावी हो सकते हैं.
नींद क्यों है हमारे लिए जरूरी?
इस स्टडी को कोलंबिया यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ रेडियोलॉजी जुनहाओ वेन ने लीड किया. उन्होंने कहा कि हमारी रिसर्च दिखाती है कि बहुत कम और बहुत ज्यादा दोनों तरह की नींद शरीर के लगभग हर अंग की उम्र बढ़ने की रफ्तार तेज कर सकती है. इससे ये साफ होता है कि अच्छी नींद ब्रेन और पूरी बॉडी को हेल्दी रखने में बेहद जरूरी है.
रिसर्च में क्या पता लगाया गया?
रिसर्चर्स ने एजिंग को मापने के लिए मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया. टीम ने 17 अलग-अलग ऑर्गन सिस्टम्स के लिए 23 बायोलॉजिकल क्लॉक्स तैयार किए. इन क्लॉक्स में मेडिकल स्कैन, ब्लड टेस्ट और बॉडी प्रोटीन से जुड़ी जानकारी शामिल की गई, जिससे पता लगाया गया कि किसी इंसान के अंग उसकी असली उम्र के मुकाबले कितनी तेजी से बूढ़े हो रहे हैं.
किन लोगों की उम्र तेजी से बढ़ती है?
इस स्टडी में यूके बायोबैंक के करीब पांच लाख लोगों के हेल्थ डेटा का एनालिसिस किया गया. रिसर्च में एक यू-शेप पैटर्न सामने आया. यानी जो लोग रोज 6 घंटे से कम सोते थे और जो 8 घंटे से ज्यादा सोते थे, दोनों में एजिंग की स्पीड ज्यादा पाई गई. सबसे हेल्दी स्लीप रेंज करीब 7 घंटे मानी गई. कम नींद लेने वाले लोगों में डिप्रेशन, एंग्जायटी, मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का खतरा ज्यादा देखा गया. वहीं कम और ज्यादा दोनों तरह की नींद फेफड़ों की बीमारियों जैसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अस्थमा से भी जुड़ी मिली. इसके अलावा एसिड रिफ्लक्स जैसी पेट की समस्याओं का रिस्क भी बढ़ता पाया गया.
कम नींद लेने के क्या होते हैं नुकसान?
जुनहाओ वेन के मुताबिक नींद सिर्फ दिमाग से जुड़ी चीज नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी बॉडी पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि स्लीप ड्यूरेशन हमारी पूरी फिजियोलॉजी से जुड़ी होती है और इसका असर शरीर के लगभग हर हिस्से पर दिखाई देता है. रिसर्च टीम ने बुजुर्ग लोगों में डिप्रेशन पर भी असर देखा. एनालिसिस में सामने आया कि कम नींद सीधे तौर पर डिप्रेशन को बढ़ा सकती है, जबकि ज्यादा नींद ब्रेन और बॉडी फैट में होने वाले बदलावों के जरिए इसका असर डाल सकती है. रिसर्चर्स का मानना है कि कम और ज्यादा सोने वाले लोगों के लिए अलग-अलग तरह की हेल्थ केयर की जरूरत पड़ सकती है.
हालांकि स्टडी ये साबित नहीं करती कि सिर्फ नींद ही तेजी से बूढ़ा होने की वजह है, लेकिन रिसर्चर्स का कहना है कि सही स्लीप हैबिट्स बढ़ती उम्र में हेल्थ को बेहतर बनाए रखने का अहम हिस्सा हो सकती हैं.
]]>छाछ (Buttermilk)
छाछ यानी मट्ठा में कैलोरी काफी कम होती है और इसमें पानी की मात्रा भी अच्छी होती है. छाछ में पोटैशियम और विटामिन B12 जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो पसीने के जरिए शरीर से निकले मिनरल्स की कमी को तुरंत पूरा करते हैं.
छाछ में मौजूद प्रोबायोटिक्स पेट को ठंडा रखते हैं और भारी भोजन के बाद होने वाली एसिडिटी को कम करने में मदद करते हैं. गर्मी में लू से बचने के लिए छाछ एक नेचुरल रिहाइड्रेशन ड्रिंक की तरह काम करती है.
लस्सी (Lassi)
लस्सी छाछ के मुकाबले काफी गाढ़ी और हैवी होती है. इसमें दही की मात्रा ज्यादा होती है जो प्रोटीन और कैल्शियम का बेहतरीन सोर्स है. रिपोर्ट के मुताबिक, लस्सी शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है.
अगर आप मीठी लस्सी पीते हैं तो यह ग्लूकोज लेवल को बनाए रखती है, लेकिन वजन कम करने वालों के लिए इसकी कैलोरी अधिक हो सकती है. लस्सी मांसपेशियों की रिकवरी और हड्डियों की मजबूती के लिए भी काफी अच्छी मानी जाती है.
पाचन के लिए कौन है ज्यादा असरदार?
अगर डाइजेशन की बात करें तो छाछ को लस्सी से अधिक फायदेमंद मानी जाती है. मेडिकल न्यूज टुडे के अनुसार, छाछ में भुना हुआ जीरा, काला नमक और पुदीना मिलाकर पीने से डाइजेशन अच्छा होता है, शरीर के तापमान कम होता है और मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करती है. वहीं, लस्सी को पचाने में शरीर को थोड़ा अधिक समय लगता है इसलिए इसे सुबह या दोपहर के समय पीना बेहतर होता है. रात के समय लस्सी पीने से सुस्ती या भारीपन महसूस हो सकता है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
तपती धूप में जब आपका शरीर पानी खो रहा हो, तो छाछ सबसे बेहतरीन ऑप्शंस है. फर्मेंटेड डेयरी प्रोडक्ट्स शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने और गट हेल्थ को सुधारने में मददगार होते हैं. अगर आप वेट लॉस डाइट पर हैं तो मसाला छाछ आपके लिए बेस्ट है. लेकिन अगर आप एक मील रिप्लेसमेंट या भारी वर्कआउट के बाद कुछ हेल्दी चाहते हैं तो लस्सी एक शानदार चॉइस हो सकती है. कुल मिलाकर हाइड्रेशन के लिए छाछ और पोषण के लिए लस्सी का अपना-अपना महत्व है.
बाजार में मिलने वाला बादाम शरबत न केवल काफी महंगा होता है, बल्कि उसमें अत्यधिक चीनी और प्रिजर्वेटिव्स भी मिले होते हैं जो सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में यहां हम आपको घर पर ही शुद्ध शाही बादाम शरबत बनाने का तरीका बता रहे हैं.
बादाम शरबत के लिए आपको चाहिए होंगी ये चीजें
बादाम: 1 कप (रात भर भीगे हुए और छिले हुए)
मिठास के लिए: आधा कप धागे वाली मिश्री या खजूर (मिश्री को चीनी का हेल्दी विकल्प माना जाता है)
इलायची: 8-10 (ताजी खुशबू और ठंडक के लिए)
केसर: 10-12 धागे (शाही रंग और स्वाद के लिए)
खरबूजे के बीज: 2 बड़े चम्मच (ठंडक बढ़ाने के लिए)
पानी/दूध: आवश्यकतानुसार
बनाने का तरीका
पहले पेस्ट तैयार करें
छिले हुए बादाम, इलायची और खरबूजे के बीज को थोड़े से पानी या दूध के साथ मिक्सर में डालकर एक बहुत ही महीन पेस्ट बना लें.
चाशनी (मिश्री का घोल) बनाएं
एक बर्तन में 2 कप पानी लें और उसमें मिश्री डालकर धीमी आंच पर उबालें जब तक मिश्री पूरी तरह घुल न जाए. अगर खजूर डाल रहे हैं तो उन्हें बादाम के साथ ही पीस लें.
मिश्रण को पकाएं
तैयार बादाम पेस्ट को मिश्री वाले पानी में मिलाएं. इसे धीमी आंच पर 10-15 मिनट तक लगातार चलाते हुए पकाएं जब तक कि यह थोड़ा गाढ़ा न हो जाए.
केसर का तड़का लगाएं
केसर के धागों को थोड़े गुनगुने दूध में भिगोकर मिश्रण में डाल दें. इससे शरबत को प्राकृतिक रंग और शाही खुशबू मिलेगी.
स्टोर और सर्व करने का सही तरीका
मिश्रण ठंडा होने के बाद इसे कांच की बोतल में भरकर फ्रिज में रख दें. सर्व करते समय एक गिलास ठंडे दूध या पानी में 2-3 चम्मच यह सिरप मिलाएं और ठंडे-ठंडे शाही बादाम शरबत का मजा लें.
1- कंसंट्रेशन पर असर पड़ सकता है
डॉक्टर भावना आगे बताती हैं कि शोध बताते हैं कि अगर बच्चों के शरीर में थोड़ी भी पानी की कमी हो जाए, तो इसका सीधा असर उनकी एनर्जी, ध्यान लगाने की क्षमता और ओवर ऑल हेल्थ पर पड़ सकता है।
2-हीट एग्जॉशन का रहता है खतरा
एक्सपर्ट कहती हैं कि शरीर का तापमान बनाए रखने, बच्चों को पाचन में मदद करने और पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचाने में पानी बहुत जरूरी होता है। गर्मी में ज्यादा पसीना आने से शरीर से पानी के साथ- साथ सोडियम और पोटेशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम हो सकते हैं। अगर इनकी पूर्ति न की जाए, तो थकान, चक्कर आना और गंभीर मामलों में हीट एग्जॉशन (गर्मी से थकावट) जैसी समस्या हो सकती है।
1. नींबू पानी
सामग्री: नींबू का रस, पानी, एक चुटकी नमक, चीनी या गुड़
विधि: सभी सामग्रियों को ठंडे पानी में मिलाकर अच्छे से मिक्स करें।
लाभ: यह विटामिन C से भरपूर, इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है।
2. छाछ
सामग्री: दही, पानी, भुना जीरा पाउडर, नमक
विधि: दही को पानी में मिलाकर उसमें मसाले डालें और अच्छे से फेंट लें।
लाभ: पाचन में मदद करती है, शरीर को ठंडक देती है और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है।
नारियल का पानी और आम पन्ना
नारियल का पानी और आम पन्ना
3. नारियल पानी
सामग्री: ताजा नारियल पानी
विधि: सीधे ताजा परोसें, किसी तैयारी की जरूरत नहीं।
लाभ: प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर, डिहाइड्रेशन से बचाता है और ऊर्जा बनाए रखता है।
4. आम पन्ना
सामग्री: कच्चा आम, चीनी या गुड़, भुना जीरा पाउडर, काला नमक
विधि: कच्चे आम को उबालकर उसका गूदा निकालें और बाकी सामग्री व पानी के साथ मिलाएं।
लाभ: लू से बचाव करता है और विटामिन A व C से भरपूर होता है।
5. तरबूज का रस
सामग्री: ताजे तरबूज के टुकड़े
विधि: ब्लेंड करें और चाहें तो छान लें।
लाभ: पानी की मात्रा अधिक होती है, शरीर को ठंडक देता है और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है।
6- घर का बना फ्रूट स्मूदी
सामग्री: केला, आम या सेब, दूध या दही विधि: सभी चीजों को ब्लेंड करके स्मूदी तैयार करें। लाभ: ऊर्जा देता है, पोषक तत्वों से भरपूर होता है और बच्चों को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है।
बच्चों के डेली रूटीन में ये समर ड्रिंक्स शामिल करना उन्हें हाइड्रेटेड और पोषित रखने का एक आसान और असरदार तरीका है। कम सामग्री और सरल विधि से बने ये ड्रिंक्स गर्मी से प्राकृतिक रूप से बचाव करते हैं। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को इन ताजगी भरे ड्रिंक्स का नियमित सेवन कराएं, ताकि वे पूरे मौसम में स्वस्थ, ऊर्जावान और फिट बने रहें।
AC से कैसे बढ़ती हैं परेशानियां?
एसी की ठंडी हवा न केवल नमी सोख लेती है बल्कि यह हमारे गले और नाक की म्यूकस मेम्ब्रेन को भी सुखा देती है. इससे सर्दी-खांसी और साइनस जैसी समस्याएं होने लगती हैं.
मीडिया के पल्मोनरी एक्सपर्ट के हवाले से कहा गया है कि अधिक सूखी हवा सांस की नली में जलन पैदा कर सकती है और खांसी, गले में खराश, नाक बंद होने जैसी दिक्कतें बढ़ा सकती है. वहीं डॉक्टरों का भी कहना है कि AC कमरे की नमी कम कर देता है, जिससे सांस की नली और गला सूखने लगते हैं.
हेल्थलाइन के मुताबिक, गंदे एसी से निकलने वाली हवा सिक बिल्डिंग सिंड्रोम का कारण बनती है, जिससे सिरदर्द और थकान महसूस होती है. इसलिए अगर एसी की सर्विस समय पर न हो तो उसके फिल्टर में बैक्टीरिया और मोल्ड पनपने लगते हैं.
यदि किसी रूप में खराब वेंटिलेशन है तो उस रूम में सिक बिल्डिंग सिंड्रोम (Sick building syndrome) का जोखिम बढ़ सकता है जिससे सिरदर्द, चक्कर, थकान, नाक और सांस की तकलीफ हो सकती हैं. CDC भी साफ कहता है कि कम वेंटिलेशन और कमजोर एयर सर्कुलेशन इनडोर एयर क्वालिटी को बिगाड़ सकते हैं.
जोड़ों का दर्द और ड्राई स्किन
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक कम तापमान में बैठने से मसल्स में खिंचाव और जोड़ों में अकड़न की समस्या देखी जाती है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से ही अर्थराइटिस है. इसके अलावा एसी हवा की नमी पूरी तरह खत्म कर देता है जिससे स्किन और आंखों में सूखापन आ जाता है. मेडिकल न्यूज टुडे की रिपोर्ट बताती है कि एयर कंडीशनिंग से त्वचा की प्राकृतिक नमी छिन जाती है जिससे खुजली और डर्मेटाइटिस की समस्या बढ़ सकती है.
थर्मल शॉक और थकान
जब हम तपती धूप से सीधे बेहद ठंडे कमरे में आते हैं तो शरीर के तापमान में अचानक बदलाव आता है. इसे थर्मल शॉक कहा जा सकता है. तापमान में यह अचानक उतार-चढ़ाव शरीर में थकान पैदा कर देता है और कमजोरी महसूस कराता है. एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि एसी का तापमान हमेशा 24 से 26 डिग्री के बीच रखना चाहिए ताकि बैलेंस बना रहे.
गंदा AC भी बनता है वजह
पुराने या ठीक से साफ न किए गए एसी, मोल्ड और एलर्जी को हवा में फैला सकते हैं जिससे एलर्जी और सांस की समस्या बढ़ सकती है. एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि गंदे फिल्टर, कॉइल और डक्ट्स में धूल, फफूंद और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं.
साफ AC एलर्जी कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन खराब रखरखाव वाला HVAC सिस्टम माइक्रोबियल एलर्जन का घर बन सकता है इसलिए फिल्टर समय पर बदलना और साल में एक बार सर्विस कराना जरूरी माना गया है.
]]>यह सड़क किनारे मार्केट में आसानी से मिल जाती है और सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. आप इसे ऐसे ही खा सकते हैं या सलाद में मिलाकर भी खा सकते हैं. आइए जानते हैं कि गर्मी के इस मौसम में ककड़ी खाना आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है.
शरीर को रखे हाइड्रेट
गर्मियों में शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है लेकिन ककड़ी खाने से यह समस्या कम हो सकती है. इसमें लगभग 96% पानी होता है जो शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने में मदद करता है. धूप में बाहर रहने पर इसे खाना बहुत फायदेमंद होता है.
स्किन के लिए फायदेमंद
गर्मी में धूप, पसीना और प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा हमारी स्किन पर पड़ता है. ऐसे में ककड़ी स्किन को अंदर से ठंडक देती है और उसे फ्रेश बनाए रखने में मदद करती है. इसमें मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को ग्लोइंग बनाते हैं और झुर्रियों को कम करने में भी मदद करते हैं.
शरीर को ठंडक देता है
जब गर्मी बहुत ज्यादा होती है तो ऐसे खाने की जरूरत होती है जो शरीर को ठंडा रखे. ककड़ी में नेचुरल ठंडक होती है, इसलिए यह बॉडी टेंपरेचर कम करने में मदद करती है. इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होने के कारण यह गर्मियों में शरीर को ठंडा और तरोताजा बनाए रखती है.
वजन कम करने में मददगार
अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो ककड़ी एक बेहतर ऑप्शन है. इसमें कैलोरी बहुत कम होती है और पानी ज्यादा होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है. इससे बार-बार खाने की आदत कम होती है और वजन कंट्रोल में रहता है.
डाइजेशन को बेहतर बनाती है
अगर आपको पेट भारी लग रहा है या ब्लोटिंग की समस्या है तो ककड़ी खाना फायदेमंद हो सकता है. इसमें फाइबर होता है जो डाइजेशन को बेहतर बनाता है और पेट को हल्का रखता है. यह आसानी से पच जाती है, इसलिए भारी खाना खाने के बाद भी इसे खाया जा सकता है.
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स्वास्थ्य को हर तरह से फायदा पहुंचाने की वजह से हेल्थ एक्सपर्ट इसे फॉलो करने की काफी सलाह देते हैं। जैसा कि आप देख रहे हैं कि मोटापा, डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां बढ़ती जा रही हैं तो ऐसे माहौल में इस डाइटरी पैटर्न को फॉलो करने पर लंबे समय तक स्वास्थ्य को बेहतर रखा जा सकता है।
मेडिटेरियन डाइट क्यों है इतनी खास?
मेडिटेरियन डाइट की सबसे बड़ी खासियत दिल को फायदा पहुंचाना है। यह हेल्दी फैट्स देने वाले ऑलिव ऑयल, नट्स और सीड्स से भरी होती है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) लेवल को घटाते हैं। लगातार हो रही रिसर्च बताती हैं कि इस डाइट को फॉलो करने वाले लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम होता है।
यह डाइट वेट मैनेज करने में काफी मदद करती है। यह कैलोरी कम करने की जगह पोषण से भरे साबुत फूड्स का सेवन बढ़ाने पर जोर देती है, जो लंबे समय तक आपकी भूख को शांत रखते हैं। यह प्राकृतिक रूप से ओवरईटिंग से बचाते हैं और वेट लॉस में मदद करते हैं।
मेडिटेरियन डाइट मेटाबॉलिक हेल्थ सुधारने में मदद करती है। यह ब्लड शुगर को रेगुलेट रखने में मदद करती है, जिस कारण टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए बढ़िया विकल्प है। फल, सब्जियां और साबुत अनाज के हाई फाइबर से डायजेशन और गट हेल्थ बेहतर बनता है।
इस डाइट में एंटी-इंफ्लामेटरी इफेक्ट होते हैं। इसके अंदर एंटीऑक्सीडेंट्स और हेल्दी फैट्स होते हैं, जो इंफ्लामेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस घटाने में मदद करते हैं। बता दें कि कैंसर और अल्जाइमर डिजीज जैसी क्रोनिक बीमारियों के पीछे इंफ्लामेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को जिम्मेदार देखा जाता है।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
एक सीनियर डाइटिशियन ने मेडिटेरियन डाइट को लंबे समय तक स्वस्थ रहने और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित डाइटरी पैटर्न में से एक बताया है। यह साबुत फूड्स, हेल्दी फैट्स और लीन प्रोटीन पर जोर देती है, जो हार्ट हेल्थ, मेटाबॉलिक बैलेंस और रिप्रोडक्टिव वेलनेस को सपोर्ट करती है। यह पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता और महिलाओं में हॉर्मोनल बैलेंस को भी सपोर्ट करती है।
मेडिटेरियन डाइट में क्या खाते हैं?
इस डाइट की सबसे बड़ी खासियत इसकी फ्लैक्सिबिलिटी है। यह किसी भी फूड ग्रुप को वर्जित नहीं करती, बल्कि हेल्दी ऑप्शन अपनाने पर जोर देती है।
1. फल और सब्जियां
ताजे फूड इस डाइट की बुनियाद हैं। टमाटर, पालक, ब्रोकली, संतरा, सेब और बेरीज जैसे फूड्स विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं।
2. साबुत अनाज
ओट्स, ब्राउन राइस, क्विनोआ और व्होल व्हीट ब्रेड जैसे साबुत अनाज लंबे समय तक एनर्जी देने का काम करते हैं और ब्लड शुगर लेवल स्टेबल रखते हैं।
3. हेल्दी फैट्स
इस डाइट में फैट्स का प्राइमरी सोर्स ऑलिव ऑयल होता है। इस तेल के अंदर दिल के लिए फायदेमंद मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स होते हैं। बादाम और अखरोट जैसे नट्स और सीड्स भी इस डाइट का अभिन्न हिस्सा हैं।
4. लीन प्रोटीन
इस डाइट में मछली और सीफूड का नियमित सेवन शामिल होता है। खासतौर से सैल्मन, सार्डिन जैसी फैटी फिश शामिल होती हैं, जो ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरी होती हैं। इसके अलावा, पॉल्ट्री, अंडे और दाल व छोले जैसे प्लांट बेस्ड प्रोटीन फूड भी शामिल होते हैं।
5. मॉडरेशन में डेयरी प्रोडक्ट्स
दही, चीज़, योगर्ट जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स मॉडरेशन अमाउंट में खा सकते हैं। यह अपने प्राकृतिक रूप में या कम से कम प्रोसेस्ड होने चाहिए।
6. मसाले और जड़ी-बूटी
नमक का अत्यधिक इस्तेमाल करने की जगह लहसुन, तुलसी, ओरेगैनो, रोजमेरी जैसे मसालों और जड़ी-बूटियों को फ्लेवर बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
7. कम मात्रा में रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड्स
मेडिटेरियन डाइट में रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन बहुत ध्यान से करना चाहिए। इस आदत से अनहेल्दी फैट्स और एडिटिव्स को कम करने में मदद मिलती है।
चाय से पहले पानी पीना चाहिए या नहीं
चाय पीने से पहले पानी पीना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है और इससे आपको बहुत बेनेफिट्स मिलते हैं.
एसिडिटी से बचाव: चाय की तासीर एसिडिक (अम्लीय) होती है. खाली पेट चाय पीने से शरीर में एसिड का स्तर बढ़ जाता है. अगर आप चाय से 10-15 मिनट पहले एक गिलास पानी पीते हैं तो ये पेट में एक सुरक्षा परत बना देता है जिससे एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या कम होती है.
दांतों की सुरक्षा: चाय में टैनिन नामक तत्व होता है जो दांतों पर पीलेपन की परत जमा सकता है. पहले पानी पीने से दांतों पर एक हाइड्रेटेड लेयर बन जाती है जो दाग-धब्बों को रोकने में मदद करती है.
हाइड्रेशन: चाय एक डाइयूरेटिक है जो शरीर से पानी को बाहर निकालती है. पहले पानी पी लेने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती.
चाय के बाद पानी पीना सही है?
चाय पीने के तुरंत बाद पानी पीना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार इसके कई नुकसान होते हैं.
दांतों की सेंसिटिविटी: चाय गर्म होती है और पानी आमतौर पर सामान्य या ठंडा. अचानक तापमान बदलने से दांतों की इनेमल पर बुरा असर पड़ता है जिससे दांतों में झनझनाहट शुरू हो सकती है.
पाचन में गड़बड़ी: आयुर्वेद के अनुसार, बहुत गर्म के बाद तुरंत बहुत ठंडा लेने से शरीर का तापमान असंतुलित हो जाता है. गर्म चाय के बाद तुरंत पानी पीने से पेट का तापमान अचानक गिर जाता है. इससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है और भारीपन या गैस की समस्या हो सकती है.
]]>कब होती है दिक्कत?
लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो इसके पीछे कोई खास कारण भी हो सकता है. theheartysoul की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे आम वजहों में से एक है कार्पल टनल सिंड्रोम, जिसमें कलाई की नस दब जाती है और अंगूठे, उंगलियों में झुनझुनी या दर्द होने लगता है. कभी-कभी समस्या कलाई में नहीं, बल्कि कोहनी या गर्दन से भी जुड़ी हो सकती है. नसों में कहीं भी दबाव आने से हाथ तक इसका असर पहुंच सकता है, जिससे झुनझुनी और कमजोरी महसूस होती है.
ब्लड सर्कुलेशन और डायबिटीड भी कारण
खराब ब्लड सर्कुलेशन भी इसका एक कारण हो सकता है. ठंड में या अचानक तापमान बदलने पर उंगलियां सुन्न पड़ सकती हैं और रंग भी बदल सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, डायबिटीज जैसी बीमारियां भी नसों को प्रभावित कर सकती हैं. जब नसें कमजोर होने लगती हैं, तो हाथ-पैरों में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन महसूस होने लगता है.
विटामिन B12 की कमी
विटामिन B12 की कमी भी एक अहम कारण है, जो धीरे-धीरे नसों को नुकसान पहुंचा सकती है. कई बार लोग थकान या कमजोरी को नजरअंदाज करते रहते हैं, लेकिन यह संकेत हो सकता है कि शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी है. कुछ मामलों में थायरॉयड की समस्या भी हाथों में झुनझुनी का कारण बन सकती है. शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ने से नसों पर असर पड़ता है और यह समस्या बढ़ सकती है.
ये भी होता है कारण
कंधे और गर्दन के बीच नसों या ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ने से भी हाथों में झुनझुनी हो सकती है. खासतौर पर जब हाथ लंबे समय तक ऊपर रखा जाए या भारी वजन उठाया जाए. अगर झुनझुनी के साथ कमजोरी, चीजें गिरना, या दर्द बढ़ने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह संकेत हो सकता है कि नसों पर लगातार दबाव पड़ रहा है या कोई गंभीर समस्या विकसित हो रही है. अचानक एक तरफ हाथ सुन्न हो जाना, बोलने में दिक्कत या चक्कर आना जैसी स्थिति स्ट्रोक का संकेत भी हो सकती है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.