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प्री-मानसून (Pre-Monsoon) ने जब से देश में दस्तक दी है, असर दिखा रहा है। देश के कई राज्यों में बादल बरस रहे हैं और यह सिलसिला बना हुआ है। मानसून (Monsoon) के 2025 सीज़न में देशभर में शानदार बारिश हुई और कई राज्यों में तो पिछले कई सालों से ज़्यादा बारिश हुई। इसी को ध्यान में रखते हुए एक्सपर्ट्स ने पूर्वानुमान लगाया था कि 2026 में भी जोरदार बारिश होगी, लेकिन अल-नीनो के असर की भी संभावना बनी हुई है। इसी बीच अब देश में प्री-मानसून रफ्तार पकड़ेगा। ऐसे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) ने कई राज्यों में 3, 4 और 5 मई को भारी बारिश का अलर्ट (Heavy Rain Alert) जारी किया है।
उत्तरपश्चिम भारत
उत्तरपश्चिम भारत में प्री-मानसून रफ्तार पकड़ेगा। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 3, 4 और 5 मई को राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कई जगह भारी बारिश होगी। साथ ही कई जगह रिमझिम बारिश का भी अलर्ट है। इस दौरान तेज़ हवा चलने, धूल भरी आंधी चलने और बिजली गरजने का भी अलर्ट है। हवा की रफ्तार 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की संभावना है।
दक्षिण भारत
दक्षिण भारत में भी मौसम बदल गया है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 3, 4 और 5 मई को केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, माहे, यनम, कराईकल और रायलसीमा में जमकर बादल बरसेंगे। इस दौरान कई जगह 30-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने, आंधी चलने और बिजली गरजने का भी अलर्ट है।
पूर्वी और मध्य भारत
पूर्वी और मध्य भारत में भी प्री-मानसून रफ्तार पकड़ेगा। ऐसे में मौसम विभाग ने 3, 4 और 5 मई को मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में कई जगह भारी बारिश तो कई जगह हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तेज़ हवा चलने, धूल भरी आंधी चलने और बिजली गरजने और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि का भी अलर्ट है। हवा की रफ्तार 50-70 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की संभावना है।
उत्तरीपूर्व भारत
उत्तरीपूर्व भारत में भी मौसम बदल गया है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 3, 4 और 5 मई को असम, त्रिपुरा, मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में तेज़ बारिश होगी। इस दौरान कई जगह 50-70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने, धूल भरी आंधी चलने और बिजली गरजने का भी अलर्ट है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार अब तक के तापमान के अध्ययन से पता चला है कि बीते 100 सालों में हिमाचल प्रदेश में तापमान में औसतन 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ौतरी हुई है. इसी का परिणाम है कि हिमाचल में लगातार प्राकृतिक आपदाओं की घटनाओं में बढ़ौतरी हुई है. साल 2023 की त्रासदी के जख्म अभी तक भरे नहीं हैं और 2025 में लगातार जख्म पर जख्म मिल रहे हैं.
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में इस मॉनसून सीजन में 20 जून से 5 सितंबर की सुबह 10 बजे तक 355 लोगों की मौत हो चुकी है और 49 लोग लापता हैं. इसी तरह 416 घायल हुए हैं. आपदा में 5194 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. साथ ही 1945 मवेशियों की मौत और 25 हजार 755 पोल्ट्री वर्ड्स की भी जान गई है. आपदा से अब तक प्रदेश को 3787 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है.
बीते 2 सालों में हुए नुकसान की बात करें तो आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 में आई भीषण आपदा में हिमाचल में 509 लोगों मौत हुई थी और 12 हजार 034 घरों को नुकसान हुआ था, जिनमें 2944 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए थे. 2023 में 528 घायल हुए थे और 38 लोग लापता हो गए थे. हिमाचल को 9 हजार 712 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ था. वर्ष 2024 में हिमाचल में आई आपदा में 174 लोगों की जान गई थी, 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे और 31 लोग लापता हुए थे. प्रदेश में 1613 करोड़ की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा था.
आठ साल में कितनी बार बादल फटे
इस वर्ष जुलाई माह से पहले राज्य आपदा प्रबंधन की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में साल 2018 से लेकर जुलाई 2025 बादल फटने की 148 घटनाएं हो चुकी हैं. इसके अचानक बाढ़ आने की 294 और भूस्खलन की 5 हजार से ज्यादा घटनाएं हो चुकी है. इस बार 20 जून से अब तक 45 बार बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं. वहीं, 105 बड़े भूस्खलन, 91 फ्लैश फ्लड आए हैं. फ्लैश और लैंडस्लाइड में 161 लोगों की मौत और 154 लोगों की सड़क हादसों में जान गई है.
मौसम में आए इस बदलाव को लेकर टीम ने शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र में कार्यरत मौसम विज्ञानी संदीप शर्मा से बात की. प्रदेश में इस वक्त हो रही लगातार बारिश को लेकर संदीप शर्मा ने बताया कि 8 सितंबर तक मॉनसून थोड़ा कमजोर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि इस वर्ष इतनी ज्यादा बारिश होने का कारण यही है कि मॉनसून पूरा समय सक्रिय रहा है. संदीप शर्मा ने कहा कि इस वर्ष जून माह में सामान्य से 34 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, जुलाई में सामान्य बारिश हुई है जबकि अगस्त में रिकार्ड 68 प्रतिशत अधिकत बारिश हुई है.
बीते 100 सालों में 9वीं बार सबसे अधिक हुई बारिश
संदीप सिहं बताते हैं कि 1901 से लेकर अब तक के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अगस्त महीने में हुई बारिश बीते 100 सालों में 9वीं बार सबसे अधिक हुई बारिशों में से एक है. इससे पहले 1948 में अगस्त में हिमाचल में 456.5 मिलीमीटर बारिश हुई थी औऱ इस वर्ष 431 मिलीमीटर बारिश हुई है. संदीप शर्मा ने बताया कि तापमान में अप्रत्याशित बढ़ौतरी हुई है, पिछले 100 सालों में हिमाचल में तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ौतरी हुई है. उन्होंने कहा कि जलवायु में लगातार हो रहे परिवर्तन के लिए बहुत से कारण जिम्मेदार हैं, अब पर्यावरण और पारिस्थितिकी को ध्यान में रख कर हर कार्य करने की जरूरत है.
]]>वहीं, अन्य राज्यों की बात करें तो 30 अग्सत तक कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात, केरल, तटीय कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। आज गुजरात में अत्यधिक भारी बरसात हो सकती है। अगले पांच दिनों तक उत्तर पश्चिम भारत में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश जारी रहने वाली है। 29-31 अगस्त के दौरान हिमाचल प्रदेश, 29 अगस्त से दो सितंबर के दौरान उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बरसात होगी।
उत्तर-पश्चिम भारत की बात करें तो उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान में अगले सात दिनों तक, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त से दो सितंबर, पश्चिमी राजस्थान में 31 अगस्त और एक सितंबर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त, एक और दो सितंबर को अलग अलग जगहों पर भारी बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में 29-31 अगस्त तक, उत्तराखंड में 29 अगस्त से दो सितंबर तक, पंजाब में 30 अगस्त को बहुत भारी बारिश होगी।
दक्षिण भारत की बात करें तो तटीय कर्नाटक में अगले सात दिनों तक, केरल में 29, 30 अगस्त और तीन व चार सितंबर, आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, तेलंगाना, लक्षद्वीप, तमिलनाडु में 29 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने वाली है। तटीय कर्नाटक में 29 और 30 अगस्त को और केरल में 29 अगस्त को बहुत भारी बरसात होगी। अगले सात दिनों तक इलाके में अधिकांश जगह गरज और बिजली के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।
पूर्व और मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश में अगले सात दिनों तक, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 29-31 अगस्त तक, विदर्भ में 29 अगस्त और चार सितंबर को, बिहार में 29 और 30 अगस्त को, झारखंड में 30 अगस्त, दो सितंबर, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में 31 अगस्त से तीन सितंबर तक अलग-अलग स्थानों में भारी बारिश की संभावना है। उत्तर पूर्व भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश में 29, 30 अगस्त, चार सितंबर, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 29 अगस्त से चार सितंबर तक अलग अलग जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम में 29 अगस्त को बहुत भारी बरसात होगी।
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ब्यूनर जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां 237 लोगों की मौत हुई और 128 लोग घायल हुए। इसके अलावा, विभिन्न जिलों में भी भारी तबाही दर्ज की गई है, स्वाबी में 42, शांगला में 36, मानसेहरा में 25, बाजौर में 22 और स्वात में 20 लोगों की मौत हुई है। पीडीएमए की रिपोर्ट के मुताबिक, भारी बारिश और बाढ़ से केपी में 2,810 मकानों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें 2,136 आंशिक और 674 पूरी तरह नष्ट हुए। केवल ब्यूनर जिले में ही 1,469 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं।
इसके अलावा, 324 शैक्षणिक संस्थान प्रभावित हुए हैं, जिनमें 18 स्कूल पूरी तरह और 306 आंशिक रूप से नष्ट हुए। साथ ही, बाढ़ और बारिश से 5,916 पशुओं की मौत भी हो गई। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पूरे पाकिस्तान में 26 जून से अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,000 से अधिक घायल हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के आंकड़ों के अनुसार, मृतकों में 200 बच्चे, 117 महिलाएं और 471 पुरुष शामिल हैं।
प्रांतवार आंकड़ों में, पंजाब में 165, खैबर पख्तूनख्वा में सर्वाधिक 469, सिंध में 51, बलूचिस्तान में 24, पाकिस्तान-आकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में 45, पाकिस्तान-आकृत कश्मीर में 23 और इस्लामाबाद में आठ लोगों की मौत हुई है।
]]>पूर्वी और मध्य भारत की बात करें तो पांच से 11 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश होगी। इसके अलावा, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, विदर्भ, छत्तीसगढ़ में 5-8 जुलाई, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में पांच, 8-10 जुलाई, अंडमान और निकोबार द्वीप में छह जुलाई को बहुत भारी बारिश होने वाली है। वहीं, छत्तीसगढ़ में 5-7 जुलाई, विदर्भ में 7 और 8 जुलाई, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा में 5, 6 जुलाई को भारी वर्षा होगी।
उत्तर पश्चिम भारत की बात करें तो उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान में 5-11 जुलाई, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान में 5, छह जुलाई, 10 और 11 जुलाई, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तर प्रदेश, 5-9 जुलाई के दौरान जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, 7 और 8 जुलाई को हिमाचल प्रदेश, 5-7 जुलाई उत्तराखंड, छह और सात को पंजाब, हरियाणा, पांच, 9 और 10 जुलाई को पूर्वी राजस्थान में बहुत भारी बारिश होने वाली है।
पश्चिम भारत की बात करें तो अगले सात दिनों के दौरान कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र के घाट इलाकों, गुजरात, पांच से सात जुलाई के दौरान सौराष्ट्र, कच्छ में अलग अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने वाली है। इसके अलावा, छह और सात जुलाई को मराठवाड़ा में भारी बरसात होगी। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अगले सात दिनों के दौरान ज्यादातर जगहों पर हल्की से मध्यम व गरज के साथ तूफान, बिजली चमकने की संभावना है। पांच जुलाई को मेघालय में बहुत भारी बारिश हो सकती है।
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असम में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं. रविवार तक 15 जिलों में 78,000 से ज्यादा लोग बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित थे. ब्रह्मपुत्र समेत 10 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. गुवाहाटी में भूस्खलन से पां लोगों की मौत हो गई. लखीमपुर के घुनासुटी इलाके में बाढ़ ने कई गांवों को डुबो दिया. असम के मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने पीड़ितों के लिए चार लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया. राहत शिविरों में 28,317 लोग शरण लिए हुए हैं. लेकिन कई इलाकों में मदद पहुंचाना मुश्किल हो रहा है. सिलचर में 42 सेमी बारिश दर्ज की गई. करीमगंज में 35 सेमी बारिश हुई. हालाकांडी में 30 सेमी बारिश ने तबाही मचा दी.
मणिपुर और सिक्किम में लगातार बारिश
मणिपुर में इंफाल शहर पानी में डूब गया है. यहां 31 मई से लगातार बारिश हो रही है. इंफाल नदी और नंबुल नदी खतरे के निशान से ऊपर हैं. 3800 से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. 883 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं. सुरक्षा बलों ने कई लोगों को सुरक्षित निकाला. सिक्किम में 1500 पर्यटक उत्तरी क्षेत्र में फंसे हैं. मंगन जिले में तीस्ता नदी में एक गाड़ी बह गई. इसमें 8 लोग लापता हैं. एक की मौत हो गई.
अरुणाचल प्रदेश में नौ की मौत
अरुणाचल प्रदेश में भूस्खलन और बाढ़ से 9 लोगों की मौत हुई. रविवार को भारतीय वायु सेना ने बोमजीर नदी में फंसे 14 लोगों को बचाया. यह इलाका लोअर दिबांग घाटी में है. एक कार बाढ़ में बह गई. इसमें 7 लोग मारे गए. किबिथू में 17 सेमी बारिश हुई. हायूलियांग में 15 सेमी बारिश दर्ज की गई. भूस्खलन से कई सड़कें बंद हैं. गांव मुख्य क्षेत्र से कट गए हैं.
मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा की तबाही
मेघालय में 6 लोगों की मौत हुई. मिजोरम में भी 6 लोग मारे गए. मिजोरम में एक होटल भूस्खलन से ढह गया. इसमें 3 म्यांमार नागरिक मारे गए. त्रिपुरा में 1300 परिवार प्रभावित हैं. मुख्यमंत्री माणिक साहा ने लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का निर्देश दिया. 4 जून तक भारी बारिश की चेतावनी है.
एक्शन में केंद्र सरकार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को असम, मणिपुर, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बात की. उन्होंने हर संभव मदद का भरोसा दिया. शाह ने कहा कि मोदी सरकार पूर्वोत्तर के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है. राहत और बचाव कार्य तेज किए गए हैं. सेना और आपदा प्रबंधन टीमें काम कर रही हैं.
राहत की उम्मीद नहीं
मौसम विभाग ने 6 जून तक भारी बारिश की भविष्यवाणी की है. 1 से 5 जून तक तेज बारिश, तूफान और बिजली गिरने का अनुमान है. 5 और 6 जून को बारिश कम हो सकती है. लेकिन सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है.
मौमस में बदलाव की वजह से बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और तीस्ता नदी में खतरनाक उफान आया है, जिससे बचाव और निकासी अभियान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. बढ़ते जल स्तर और नदी की तेज़ धाराओं की वजह से कई रास्ते भी बह गए. अधिकारियों ने बताया कि रविवार को लगातार तीसरे दिन भी मंगन जिले में भारी बारिश जारी रहने के कारण उत्तरी सिक्किम में करीब 1,500 पर्यटक फंसे हुए हैं. उन्होंने बताया कि खराब मौसम की वजह से दो पुल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए.
पूर्वी सिक्किम में नीमचेन प्रेमलखा के पास भूस्खलन हुआ है. अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों को सतर्क रहने और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है. उन्होंने बताया कि सड़क संपर्क बाधित होने की वजह से लाचेन में करीब 112 पर्यटक और लाचुंग में 1,350 पर्यटक फंसे हुए हैं. लाचुंग से चुंगथांग और चुंगथांग से थेंग सुरंग तक सड़क साफ करने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) की भारी मशीनरी तैनात की गई है.
थेंग में एक बड़े भूस्खलन ने शुरू में सड़क को अवरुद्ध कर दिया था, लेकिन अब बताया जा रहा है कि जीआरईएफ कैंप के पास शिपगेयर तक इसे साफ कर दिया गया है. हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि कैंप से कुछ सौ मीटर आगे एक बड़ा पत्थर अभी भी हटाया जाना बाकी है.
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि भारी बारिश की वजह से तीस्ता नदी में तेज़ बहाव के कारण द्ज़ोंगू इलाके में स्थित फ़िदांग पुल क्षतिग्रस्त हो गया. उन्होंने बताया, "नदी के बहाव ने इसके आधार को नष्ट कर दिया है, जिससे पुल की संरचनात्मक स्थिरता प्रभावित हो सकती है."
अधिकारियों ने बताया कि मंगन को चुंगथांग से जोड़ने वाला संगकालांग बेली ब्रिज भी तीस्ता नदी के बहाव के कारण आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है. एक अधिकारी ने बताया कि पुल की हालत बहुत खराब है और अब यह सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है. उन्होंने बताया कि मानसून की बारिश तेज हो गई है, जिससे तीस्ता नदी उफान पर आ गई है, जिस पर यह पुल बना हुआ है.
कांग्रेस कार्यकर्ताओं से प्रियंका गांधी की अपील…
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा, "असम, अरुणाचल समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश से हुई मौतों का समाचार अत्यंत दुखद है. लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. ईश्वर सभी की रक्षा करें. केंद्र और राज्य सरकारों से अपील है कि राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाई जाए, जिससे लोगों को कम से कम तकलीफ उठानी पड़े. कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से भी आग्रह करती हूं कि प्रभावित लोगों की यथासंभव मदद करें."
]]>चक्रवात फेंगल के कारण तमिलनाडु में भारी बारिश हो रही है। भारी बारिश के कारण कृष्णागिरी जिले के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। सबसे ज्यादा असर उथांगरई तालुका में देखा जा रहा है। उथांगरई बस अड्डे में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिस वजह से वहां खड़ी कई बसें पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गई हैं।
बाढ़ का पानी सड़कों पर बह रहा है, इससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इलाके के कई घरों में भी पानी घुस गया है। लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। वहीं मिट्टापल्ली, पुरुकलापल्ली और इलाचियूर गांवों में बाढ़ की स्तिथि बन गई है। सिंगारपट्टई में पेरियार झील भर जाने से पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया है। इस कारण इलाके के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बीसी वेलफेयर हॉस्टल में भी पानी भर गया है, जिसके चलते आठ छात्रों को उथांगरई के दूसरे हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया गया। इसके अलावा, जवाधु पहाड़ियों से पानी के आवक में तेजी के कारण उथांगरई तालुका की एक पंचायत में एक झील के पानी से आसपास का इलाका जलमग्न हो गया है। जिला प्रशासन की ओर से रेस्क्यू और रिलीफ का काम किया जा रहा है। जिले में पिछले 24 घंटे में तकरीबन 37 सेंटीमीटर बारिश होने के चलते बाढ़ के हालात पैदा हुए हैं। तूफान का असर कम हो रहा है, ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि धीरे-धीरे हालात सामान्य हो जाएंगे।
]]>समुद्र तटों पर बढ़ाई गई सुरक्षा
प्रशासन ने पुडुचेरी तट पर सुरक्षा भी बढ़ा दी है। पुडुचेरी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलैवानन ने क्षेत्र में समुद्र तटों और तटीय सड़कों का दौरा किया। तमिलनाडु में लोगों को चेन्नई में मरीना बीच, पट्टिनापक्कम और एडवर्ड इलियट बीच समेत समुद्र तटों पर न जाने की सलाह दी गई है। पुडुचेरी में पर्यटन स्थलों को चक्रवात फेंगल के कारण एहतियात के तौर पर बंद कर दिया गया है। पुडुचेरी में तटीय क्षेत्रों मे 300 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। आईएमडी के अनुसार शनिवार सुबह पुडुचेरी में मध्यम बारिश हुई। तमिलनाडु के विलुप्पुरम के मरकानम में भारी बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। चेन्नई के बेसेंट नगर इलाके में पेड़ उखड़ गए हैं।
चेन्नई में सड़कें जलमग्न
चेन्नई में भारी बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो गई हैं। कई इलाकों में लोग जलभराव से जूझ रहे हैं। न्यू वाशरमैनपेट, जेमिनी फ्लाईओवर और माउंट रोड इलाके में टखने तक जलभराव है। तूफान की वजह से तटीय इलाकों में बारिश और तेज हवाओं की वजह से मौसम बदल चुका है। चेन्नई में शुक्रवार की रात से आज सुबह तक लगातार भारी से मध्यम बारिश दर्ज की गई। आईएमडी के अनुसार बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम में चक्रवात 'फेंगल' पहले पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ गया और आज शाम तक उत्तर तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटों को पार करने की उम्मीद है।
कई इलाकों में रेड अलर्ट जारी
आईएमडी ने कहा कि मौसम विभाग चेन्नई, श्रीहरिकोटा और चेन्नई के डॉपलर मौसम रडार के अलावा उपग्रह अवलोकनों से चक्रवात फेंगल पर लगातार नजर रख रहा है। आईएमडी के अनुसार चक्रवात आज शाम उत्तरी तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों से टकराएगा और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों समेत दक्षिणी राज्यों के विभिन्न हिस्सों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।
गिरिनाथ ने केंद्रीय विहार अपार्टमेंट का दौरा किया। यहां करीब 3 फीट पानी जमा हो गया था। उन्होंने अधिकारियों को समस्या के समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया। निवासियों को अपार्टमेंट परिसर में प्रवेश करने और बाहर निकलने में मदद करने के लिए दो ट्रैक्टरों की व्यवस्था की गई है। समस्या के समाधान के लिए 20 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी मौके पर हैं।
गिरिनाथ ने रमणश्री कैलिफोर्निया लेआउट का भी दौरा किया और अधिकारियों को पानी बाहर निकालने के निर्देश दिए। उन्होंने मीडिया से बताया कि सोमवार से मंगलवार तक 30 मिमी बारिश हुई है। मंगलवार को सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक करीब 60 मिमी से 70 मिमी बारिश दर्ज की गई। उन्होंने कहा, “बेंगलुरु के उत्तरी हिस्से में भारी बारिश हुई है। सभी झीलें भर गई हैं और पानी के ओवरफ्लो होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। हर साल यह समस्या रही है। हम येलहंका के जलमग्न निचले इलाकों से पानी निकालने के लिए कदम उठा रहे हैं।”
लगातार जारी बारिश के कारण मुख्य आयुक्त ने आज सुबह एक वर्चुअल बैठक की। बैठक के दौरान सभी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने उनसे मौके पर स्थिति का आकलन करने और स्थायी समाधान खोजने की दिशा में काम करने को कहा है।
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बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने लोगों को संदेश देते हुए कहा, ''वर्तमान में मौसम में बदलाव के आधार पर अतिवृष्टि के आधार पर बहुत सारा कष्ट हमारे समूचे संभाग में उत्पन्न हो रहा है. नदियां उफान पर हैं, तालाब भरी हुई हैं. इस समय में आम जनता को संकट का सामना करना पड़ रहा है.''
पीएम से लेकर सीएम और कार्यकर्ता तक सभी साथ खड़े- सिंधिया
उन्होंने आगे कहा, ''इस प्राकृतिक विपदा के वातावरण में मैं ग्वालियर चंबल संभाग के समस्त वासियों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हमारे मुख्यमंत्री मोहन यादव, बीजेपी की डबल इंजन की सरकार, पार्टी के एक-एक कार्यकर्ता आप सब के साथ खड़ा है. प्रशासन पूरी तरह से मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार, एक एक व्यक्ति की जान की रखवाली करने के लिए पूरी तरह से संकल्पित है.''
आम लोगों के साथ जानवरों और फसलों की सुरक्षा की कोशिश- सिंधिया
ज्योतिरादित्य सिंधिया आश्वासन देते हुए कहा, ''हमारी यही कोशिश होगी कि चाहे व्यक्ति की सुरक्षा हो, पशुओं की सुरक्षा हो, फसल की सुरक्षा हो तीनों को सुरक्षित रखने की हमारी पूरी कोशिश रहेगी. आप सचेत रहें, आप सुरक्षित रहें, आपके संपूर्ण परिवार सुरक्षित रहें, यही मेरी ईश्वर से कामना है. मैं आपके साथ खड़ा था, खड़ा हूं और सदैव आपकी सेवा में रहूंगा.''
जिलों के कलेक्टर के साथ की वर्चुअल बातचीत
इसके साथ ही उन्होंने ग्वालियर, गुना, शिवपुरी और अशोकनगर कलेक्टर से वर्चुअल बातचीत करते हुए अतिवृष्टि के दौरान प्रशासन द्वारा किए जा रहे बचाव कार्यों की समीक्षा की. उन्होंने गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से बातचीत की. उन्होंने चारों जिलों के कलेक्टर को बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए. इसके अलावा उन्होंने कहा कि राज्य शासन के मंत्रियों और प्रभारी मंत्री को 24 घंटे के अंदर क्षेत्र का दौरा करते हुए बचाव कार्य की समीक्षा करते रहना चाहिए. सिंधिया ने राज्य सरकार के मंत्री तुलसी सिलावट, प्रद्युमन सिंह तोमर और राजेंद्र शुक्ल (उप मुख्यमंत्री) को क्षेत्र का दौरा करने का भी निर्देश दिया.
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