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झाबुआ के गोपालपुरा हवाई पटटी के नए सिरे से निर्माण की दिशा में कयावद शुरू हो गई है। विस्तार के लिए 120 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी। इसमें से वर्तमान में 23.62 हेक्टेयर जमीन पूर्व से हवाई पट्टी के नाम से दर्ज है। इसके अलावा 71.33 हेक्टेयर वन भूमि और 0.41 हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण करना होगा।
जबकि पास की 24.64 हेक्टेयर शासकीय जमीन का उपयोग भी इस कार्य के लिए किया जाएगा। विस्तारीकरण के बाद वर्तमान 792 मीटर की हवाई पटटी बढकऱ 1660 मीटर लंबी हो जाएगी। यहां 2 हेलीपेड के साथ 2250 वर्ग मीटर के एक हैंगर का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा अन्य कार्य भी होंगे। जिन पर कुल 95.37 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कलेक्टर नेहा मीना ने प्रस्ताव तैयार करवाकर विमानन आयुक्त को भेज दिया है।
सिंहस्थ के दौरान उतर सकेंगे छोटे विमान
उज्जैन सिंहस्थ-2028 को देखते हुए जिला मुख्यालय से 4 किमी दूरी स्थित हवाई पट्टी के विस्तार का निर्णय लिया है, ताकि यहां छोटे विमान उतर सके। वर्तमान में एयर स्ट्रीप का उपयोग वीआईपी विजिट के दौरान हेलीकॉप्टर उतारने के लिए किया जाता है। दो बार झाबुआ दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हेलीकॉप्टर से यहीं उतरे थे। पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा और पीएम श्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा में भी झाबुआ की एयर पट्टी का नाम शामिल है।
1660 मीटर तक बढ़ेगी लंबाई
निर्धारित मानक के अनुसार हवाई पटटी की लंबाई बढ़ाकर 1660 मीटर की जाएगी। जबकि चौड़ाई पूर्व की तरह ही 30 मीटर रहेगी। यहां 2 हेलीपेड के निर्माण के साथ प्लेन रखने के लिए हेंगर बनाया जाएगा। 1000 वर्ग मीटर में प्रशासकीय भवन और कर्मचारियों के रहने के लिए आई टाइप के दो मकान भी बनाए जाएंगे। 70 मीटर चौड़ाई में पुलिया का निर्माण होगा। पूरे क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए 6621 मीटर लंबी और 2.10 मीटर ऊंची बाउंड्रीवाल बनाई जाएगी।
झाबुआ जिले में वर्षों से निष्क्रिय पड़ी गोपालपुरा एयर स्ट्रीप को अब सक्रिय बनाने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए झाबुआ में हवाई सेवाओं की शुरुआत की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। जिला मुख्यालय से मात्र 4 किलोमीटर दूर स्थित इस एयर स्ट्रीप के विस्तार के लिए लगभग 52 करोड़ रुपये का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है, जिसे जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल सीमित उपयोग, रनवे विस्तार की दरकार
वर्तमान में यह एयर स्ट्रीप केवल वीआईपी हेलीकॉप्टर लैंडिंग के लिए उपयोग की जाती है, क्योंकि इसका रनवे केवल 792 मीटर लंबा है, जो बड़े विमानों की लैंडिंग के लिए पर्याप्त नहीं है। नए प्रस्ताव के तहत रनवे को 2600 मीटर तक बढ़ाया जाएगा, ताकि छोटे हवाई जहाज भी यहां उतर सकें। इसके साथ ही विमान हेंगर, कंट्रोल रूम, विद्युतीकरण और बाउंड्रीवॉल जैसी आधारभूत संरचनाओं के निर्माण की योजना भी शामिल है।
भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में वन विभाग की भूमिका
रनवे विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता पड़ेगी, जो फिलहाल वन विभाग के अधीन है। ऐसे में वन विभाग से अनुमति लेकर जमीन का हस्तांतरण किया जाना प्रस्तावित है। यह प्रक्रिया जैसे ही पूरी होती है, विस्तारीकरण कार्यों की शुरुआत की जा सकती है।
उज्जैन सिंहस्थ में निभाएगा अहम भूमिका
सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान इंदौर एयरपोर्ट पर भीड़ अत्यधिक बढ़ सकती है। ऐसे में झाबुआ एयर स्ट्रीप का विकल्प के रूप में विकसित होना न केवल यात्री भार को बांटेगा, बल्कि यहां से सड़क मार्ग द्वारा तीर्थयात्रियों को सीधे उज्जैन पहुंचने की सुविधा भी मिल सकेगी। झाबुआ को पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा और धार्मिक पर्यटन हेली सेवा योजनाओं में भी शामिल किया गया है, जो इसके महत्व को और बढ़ाता है।
35 साल पुराना है एयर स्ट्रीप का इतिहास
यह एयर स्ट्रीप वर्ष 1989-90 में बनाई गई थी और अब तक इसका उपयोग सीमित रूप से वीआईपी मूवमेंट के लिए होता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने झाबुआ दौरे के दौरान इसी एयर स्ट्रीप पर हेलीकॉप्टर से उतरे थे, जिससे इसकी रणनीतिक उपयोगिता साबित होती है।
विफल रही एविएशन ट्रेनिंग सेंटर की योजना
वर्ष 2006-07 में इस स्थान पर एक एविएशन ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए राज्य सरकार और एयरोस्पेस एकेडमी ऑफ सेंट्रल इंडिया के बीच करार हुआ और एयर स्ट्रीप को 10 वर्षों के लिए लीज पर दिया गया था। परंतु योजना आगे नहीं बढ़ सकी और बाद में समझौता भी समाप्त हो गया।
विकास को गति मिलेगी
गोपालपुरा में स्थित हवाई पटटी के विस्तार का प्रारंभिक प्रस्ताव विमानन आयुक्त को भेजा है। उज्जैन सिंहस्थ को देखते हुए जल्द प्रस्ताव मंजूर होने की उम्मीद है।– नेहा मीना, कलेक्टर, झाबुआ
]]>मध्य प्रदेश में नई नागरिक उड्डयन नीति के तहत हर 45 किलोमीटर के दायरे में एक पक्का हेलीपैड और हर 150 किलोमीटर के दायरे में एक हवाई अड्डा बनाया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट ने मध्य प्रदेश नागरिक उड्डयन नीति-2025 को मंजूरी दे दी.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि राज्य सरकार नए मार्गों के माध्यम से मध्य प्रदेश को देश के अन्य राज्यों से जोड़ने वाली हर नई घरेलू उड़ान पर 7.50 लाख रुपए और विमानन कंपनियों को हर नई अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर 10 लाख रुपएका अनुदान देगी. इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर को जोड़ने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने के लिए जल्द ही निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी.
CM यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट ने राज्य की नई सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विकास नीति को भी मंजूरी दी. इस नीति के विभिन्न प्रावधानों को सूचीबद्ध करते हुए उन्होंने कहा कि 2.50 करोड़ रुपए से अधिक निवेश करके लघु उद्योग स्थापित करने वाले निवेशकों के हितों की भी रक्षा की जाएगी. निजी स्तर पर उद्योगपतियों द्वारा विकसित औद्योगिक क्षेत्रों को भी वे सभी लाभ और सुविधाएं मिलेंगी, जो राज्य सरकार द्वारा विकसित औद्योगिक क्षेत्रों को दी जाती हैं.
पश्चिमी मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही एक महानगर प्राधिकरण की घोषणा की जाएगी, जिसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार और शाजापुर जिलों का कुल 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल होगा.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि इस नीति के मुताबिक राज्य भर में हर 45 किलोमीटर के दायरे में एक पक्का हेलीपैड और हर 150 किलोमीटर के दायरे में एक एयरपोर्ट होगा। उन्होंने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश से नवीन मार्ग के जरिए देश के अन्य राज्यों को जोड़ने वाली हर नई घरेलू उड़ान पर 7.50 लाख रुपये और हर नयी अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर 10 लाख रुपये का अनुदान राज्य सरकार द्वारा विमानन कंपनियों को प्रदान किया जाएगा।
सीएम मोहन यादव ने बताया कि इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर के बीच हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने के लिए जल्द ही निविदाएं बुलाई जाएंगी। यादव की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद ने सूबे की नयी सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) विकास नीति को भी मंजूरी दी है।
सीएम मोहन यादव ने इस नीति के अलग-अलग प्रावधान गिनाते हुए कहा कि 2.50 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश से छोटा उद्योग लगाने वाले निवेशक के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। उद्योगपतियों द्वारा निजी स्तर पर विकसित औद्योगिक क्षेत्रों को भी वे सभी लाभ और सुविधाएं मिलेंगी जो प्रदेश सरकार द्वारा विकसित औद्योगिक क्षेत्रों को प्रदान की जाती हैं।
उन्होंने बताया कि पश्चिमी मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए मेट्रोपोलिटन प्राधिकरण की जल्द ही घोषणा की जाएगी जिसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार और शाजापुर जिलों का कुल 10,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में 2028 के दौरान लगने वाले सिंहस्थ मेले के लिए अलग-अलग समुदाय 2,300 हेक्टेयर के क्षेत्र में अपनी धर्मशालाओं, आश्रमों और भोजनशालाओं का स्थायी निर्माण कर सकते हैं जिनका फायदा इस धार्मिक आयोजन में आने वाले श्रद्धालुओं को भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साल 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ मेले के लिए विभिन्न समुदाय 2,300 हेक्टेयर क्षेत्र में अपनी धर्मशालाएं, आश्रम और भोजनशालाएं स्थायी रूप से बना सकते हैं, जिसका लाभ इस धार्मिक आयोजन में आने वाले श्रद्धालुओं को भी मिलेगा.
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