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संवत 2083 का नाम क्या है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर साल का एक विशिष्ट नाम होता है. विक्रम संवत 2083 को रौद्र संवत्सर के नाम से जाना जाएगा. रौद्र भगवान शिव का एक रूप है, जो अनुशासन, शक्ति और परिवर्तन का प्रतीक है. माना जा रहा है कि यह साल वैश्विक स्तर पर बड़े नीतिगत बदलावों और साहसिक निर्णयों का गवाह बनेगा.
इस बार राजा गुरु और मंत्री मंगल
इस बार नववर्ष गुरुवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इस साल के राजा देवगुरु बृहस्पति होंगे. गुरु के राजा होने से शिक्षा, धर्म और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में प्रगति होगी. समाज में नैतिकता बढ़ेगी और ज्ञान का प्रसार होगा. वहीं इस साल के मंत्री मंगल देव होंगे. राजा गुरु और मंत्री मंगल का यह मेल बताता है कि इस साल दुनिया भर में कड़े और अनुशासन प्रिय फैसले लिए जाएंगे. सैन्य शक्ति और तकनीक के क्षेत्र में भारत का दबदबा बढ़ सकता है.
12 नहीं, इस बार होंगे 13 महीने
संवत 2083 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह 13 महीनों का साल होगा. गणना के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ का अधिक मास (मलमास) जुड़ रहा है. अधिक मास के कारण यह साल 354 दिनों के बजाय लगभग 384 दिनों का होगा. यह समय आध्यात्मिक शुद्धि और दान-पुण्य के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है.
नववर्ष का पौराणिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने ब्रह्मांड की रचना शुरू की थी. यह वह समय है जब पेड़ों पर नई पत्तियां आती हैं और फसलें पककर तैयार होती हैं. वैज्ञानिक रूप से भी यह ऋतु परिवर्तन का काल है जो नई ऊर्जा का संचार करता है. इसी दिन महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, दक्षिण भारत में उगादी और उत्तर भारत में चैत्र नवरात्रि का महापर्व शुरू होता है.
राशियों पर क्या प्रभाव होगा?
ज्योतिषियों के अनुसार, राजा गुरु और मंत्री मंगल की यह जुगलबंदी मिथुन, तुला, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से फलदायी रहने वाली है. इन राशियों को करियर में तरक्की और आर्थिक लाभ के प्रबल योग बनेंगे. कुल मिलाकर नया हिंदू नववर्ष नई उम्मीदों और बदलावों के साथ आ रहा है.
संवत 2083 का नाम क्या है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर साल का एक विशिष्ट नाम होता है. विक्रम संवत 2083 को रौद्र संवत्सर के नाम से जाना जाएगा. रौद्र भगवान शिव का एक रूप है, जो अनुशासन, शक्ति और परिवर्तन का प्रतीक है. माना जा रहा है कि यह साल वैश्विक स्तर पर बड़े नीतिगत बदलावों और साहसिक निर्णयों का गवाह बनेगा.
इस बार राजा गुरु और मंत्री मंगल
इस बार नववर्ष गुरुवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इस साल के राजा देवगुरु बृहस्पति होंगे. गुरु के राजा होने से शिक्षा, धर्म और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में प्रगति होगी. समाज में नैतिकता बढ़ेगी और ज्ञान का प्रसार होगा. वहीं इस साल के मंत्री मंगल देव होंगे. राजा गुरु और मंत्री मंगल का यह मेल बताता है कि इस साल दुनिया भर में कड़े और अनुशासन प्रिय फैसले लिए जाएंगे. सैन्य शक्ति और तकनीक के क्षेत्र में भारत का दबदबा बढ़ सकता है.
12 नहीं, इस बार होंगे 13 महीने
संवत 2083 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह 13 महीनों का साल होगा. गणना के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ का अधिक मास (मलमास) जुड़ रहा है. अधिक मास के कारण यह साल 354 दिनों के बजाय लगभग 384 दिनों का होगा. यह समय आध्यात्मिक शुद्धि और दान-पुण्य के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है.
नववर्ष का पौराणिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने ब्रह्मांड की रचना शुरू की थी. यह वह समय है जब पेड़ों पर नई पत्तियां आती हैं और फसलें पककर तैयार होती हैं. वैज्ञानिक रूप से भी यह ऋतु परिवर्तन का काल है जो नई ऊर्जा का संचार करता है. इसी दिन महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, दक्षिण भारत में उगादी और उत्तर भारत में चैत्र नवरात्रि का महापर्व शुरू होता है.
राशियों पर क्या प्रभाव होगा?
ज्योतिषियों के अनुसार, राजा गुरु और मंत्री मंगल की यह जुगलबंदी मिथुन, तुला, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से फलदायी रहने वाली है. इन राशियों को करियर में तरक्की और आर्थिक लाभ के प्रबल योग बनेंगे. कुल मिलाकर नया हिंदू नववर्ष नई उम्मीदों और बदलावों के साथ आ रहा है.