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अब मन में भविष्य की चिंता नहीं, आशा, संतोष और आत्मसम्मान
रायपुर
एक सुरक्षित और पक्का घर हर परिवार का सपना होता है। यह सपना केवल चार दीवारों का नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का भी होता है। दुर्ग नगर निगम के उरला वार्ड की श्रीमती कुंती जगने के मन में भी वर्षों से खुद के पक्के घर का सपना पल रहा था, जो अब प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 से साकार हो गया है।
श्रीमती कुंती जगने मजदूर हैं। उनके पति श्री प्रभुदास जगने मोची का काम करते हैं। सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना ही उनके लिए बड़ी चुनौती थी। ऐसे में घर बनाना उनके लिए दूर की कौड़ी थी। कई वर्षों तक उनका परिवार किराये के मकान में रहा, जहां उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
बरसात में मकान की छत से पानी टपकता था, जिससे परिवार की चिंता और परेशानी बढ़ जाती थी। बच्चों की सुरक्षा के लिए रातभर जागना पड़ता था। गर्मियों में कमरा इतना गर्म हो जाता था कि आराम से रहना और सोना भी मुश्किल हो जाता था। इन परिस्थितियों के बीच उनका परिवार हमेशा एक ऐसे घर का सपना देखता था, जहां वे सुरक्षित और सम्मानपूर्वक रह सकें।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत आवास की स्वीकृति के साथ कुंती के खुद के आशियाने के सपने को पंख मिला। दुर्ग नगर निगम के सहयोग और योजना से मिली राशि से आवास निर्माण का काम शुरू हुआ और उनके बरसों पुराने सपने को नई उड़ान मिली। मकान पूर्ण होते ही कुंती का सपना हकीकत में बदल गया।
आज कुंती अपने परिवार के साथ अपने नए पक्के घर में सुखपूर्वक रह रही हैं। खुद का घर, सुरक्षित वातावरण और स्थायित्व के अहसास ने उन्हें नया आत्मविश्वास दिया है। मन में हमेशा रहने वाली भविष्य की चिंता की जगह अब आशा, संतोष और आत्मसम्मान ने ले ली है।
कुंती कहती हैं, “यह केवल ईंट, सीमेंट और दीवारों से बना मकान नहीं है, बल्कि उनके संघर्ष, मेहनत और सपनों का साकार रूप है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को न केवल पक्का घर दिया है, बल्कि सम्मान और सुरक्षित जीवन भी सुनिश्चित किया है।“
कुंती के सपने का हकीकत में बदलना प्रमाण है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं और स्थानीय निकायों द्वारा उसका प्रभावी क्रियान्वयन गरीब परिवारों के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव ला सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) ने कुंती की ही तरह अनेक परिवारों के खुद के पक्के घर के सपने को साकार कर बेहतर, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन दिया है।
]]>प्रधानमंत्री की यह अपील सिर्फ एक अस्थायी सलाह नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा बचत और शहरी ट्रैफिक संकट से जुड़ा बड़ा आर्थिक संदेश है. अगर देश में बड़े पैमाने पर कंपनियां हफ्ते में 2 से 3 दिन वर्क फ्रॉम होम लागू कर दें, तो इसका असर सिर्फ कर्मचारियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा हो सकता है।
दरअसल भारत के बड़े शहरों- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम में करोड़ों लोग रोज ऑफिस आने-जाने के लिए निजी वाहन इस्तेमाल करते हैं. एक औसत कर्मचारी रोज 20 से 40 किलोमीटर तक सफर करता है. अगर सिर्फ एक करोड़ कर्मचारी भी हफ्ते में 3 दिन घर से काम करें और रोज औसतन 30 किलोमीटर की यात्रा बच जाए तो हर दिन करीब 30 करोड़ किलोमीटर की वाहन आवाजाही कम हो सकती है. सामान्य माइलेज के हिसाब से यह रोज लगभग दो करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की बचत के बराबर बैठता है।
70,000 करोड़ रुपये की बचत
इसी गणना को सालभर के स्तर पर देखें तो करीब 700 से 750 करोड़ लीटर ईंधन की बचत संभव है. मौजूदा कीमतों के हिसाब से इसकी आर्थिक वैल्यू 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है. यह रकम कई राज्यों के सालाना बजट के बराबर है. यानी सिर्फ काम करने के तरीके में बदलाव से भारत हजारों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बीती रात देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल संयम के साथ करना समय की जरूरत है. उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि जहां संभव हो, वहां कंपनियां और संस्थान घर से काम करने की व्यवस्था पर फिर से विचार करें. पीएम का संकेत साफ था कि ऊर्जा बचत अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।
कोरोना काल में हो चुका है सफल प्रयोग
कोरोना काल में भारत ने पहली बार बड़े स्तर पर देखा कि डिजिटल इकोनॉमी और रिमोट वर्किंग मॉडल कैसे लाखों लोगों के लिए प्रभावी साबित हो सकते हैं. आईटी, मीडिया, बैंकिंग, कंसल्टिंग और कई सर्विस सेक्टर कंपनियों ने बिना ऑफिस आए भी कामकाज जारी रखा. उस दौर में शहरों की सड़कों पर ट्रैफिक कम हुआ, प्रदूषण घटा और ईंधन की खपत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी. अब सरकार उसी अनुभव को सीमित लेकिन रणनीतिक रूप में फिर अपनाने की बात कर रही है।
वर्क फ्रॉम होम का सबसे बड़ा फायदा केवल ईंधन बचत नहीं है. इससे ट्रैफिक जाम कम होंगे, सार्वजनिक परिवहन पर दबाव घटेगा और शहरों में प्रदूषण का स्तर नीचे आएगा. कर्मचारी रोज के सफर में खर्च होने वाला समय परिवार या उत्पादक काम में लगा सकेंगे. कंपनियों के लिए भी ऑफिस स्पेस, बिजली और ऑपरेशन कॉस्ट में कमी संभव है।
हाइब्रिड मॉडल में हो सकती करोड़ों नौकरियां
हालांकि, यह मॉडल हर सेक्टर में लागू नहीं हो सकता. मैन्युफैक्चरिंग, परिवहन, रिटेल, हेल्थकेयर और फिजिकल सर्विस सेक्टर में कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी रहती है. लेकिन भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में करोड़ों नौकरियां ऐसी हैं जिन्हें हाइब्रिड मॉडल में आसानी से चलाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर केंद्र सरकार कंपनियों को प्रोत्साहन दे, राज्यों के साथ मिलकर ग्रीन वर्क पॉलिसी जैसी पहल शुरू करे और बड़े शहरों में हाइब्रिड ऑफिस संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए, तो भारत अपने तेल आयात बिल में बड़ी कमी ला सकता है. इससे चालू खाते के घाटे पर दबाव घटेगा और रुपया भी मजबूत हो सकता है।
]]>छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के सफल क्रियान्वयन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 50 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए हैं। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), पीएम जन मन योजना एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है, जिसके माध्यम से जिले के हजारों जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित व सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत मिली है।
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर बिलासपुर जिले ने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए 50 हजार 44 परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए हैं। जिला प्रशासन द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई। कुल 781.13 करोड़ रुपये की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की गई, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई और कार्यों में तेजी आई।
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मस्तूरी विकासखंड 14 हजार 973 आवासों के साथ जिले में शीर्ष पर रहा। इसके बाद बिल्हा में 13 हजार 762, कोटा में 11हजार 205 और तखतपुर में 10 हजार 104 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया। यह आंकड़े न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाते हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को भी साबित करते हैं।
इस सफलता के पीछे ‘नारी शक्ति’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिले में 113 महिलाओं को ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में प्रशिक्षित कर उन्हें निर्माण कार्य में सक्रिय भागीदारी दी गई, जिससे वे आत्मनिर्भर बनीं। वहीं 331 महिलाओं को ‘डीलर दीदी’ बनाकर निर्माण सामग्री की आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे स्थानीय स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता बढ़ी। इसके अलावा 2,231 महिलाओं को शटरिंग सामग्री किराये पर उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे निर्माण कार्यों में तेजी आई और महिलाओं की आय के नए स्रोत विकसित हुए।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक जिले ने कुल एक लाख 3 हजार 873 आवास पूर्ण कर छत्तीसगढ़ में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि जिले की मजबूत कार्ययोजना, सतत मॉनिटरिंग और जनसहभागिता का परिणाम है। इस योजना का मानवीय पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ग्राम डारसागर की झांगली बैगा और ग्राम नेवसा की कैलाशा बाई जैसी हितग्राही, जो वर्षों से कच्चे मकान में कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही थीं, आज पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन जी रही हैं। उनके लिए यह केवल एक मकान नहीं, बल्कि सुरक्षा, आत्मसम्मान और बेहतर भविष्य का प्रतीक है।
कलेक्टर बिलासपुर ने इस उपलब्धि को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि ये 50 हजार से अधिक घर केवल ईंट और सीमेंट की संरचनाएं नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान और सुरक्षा की नींव हैं। वहीं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा कि भविष्य में भी पारदर्शिता और प्रतिबद्धता के साथ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता रहेगी।
]]>Boss के प्रोजेक्टर पर मालामाल ऑफर
लेटेस्ट फुल एचडी एंड्रॉयड स्मार्ट वाई-फाई और ब्लूटूथ प्रोजेक्टर BOSS S13A अभी बेहद सस्ते में मिल रहा है। बता दें कि इसकी MRP 1,25,000 रुपये है। अभी इस प्रोजेक्टर को 17,887 रुपये में खरीदने का मौका मिल रहा है। हालांकि, यह ऑफर सीमित समय के लिए है। फ्लिपकार्ट पर बिग बैंग दिवाली सेल चल रही है। यह सेल अगले लगभग 12 घंटे में खत्म होने वाली है। इसका मतलब है कि आपके पास यह ऑफर पाने के लिए केवल 12 घंटे 52 मिनट का समय है। इसके बाद यह ऑफर खत्म हो जाएगा।
प्रोजेक्टर के फीचर्स
यह प्रोजेक्टर 4000 Lumens के साथ 250 इंच तक की स्क्रीन की सुविधा देता है। इसका पिक्सल रेजलूशन 1920X1080P है। इसे रिमोट से कंट्रोल किया जा सकता है। इसमें कनेक्टिविटी के लिए 2 HDMI पोर्ट दिए गए हैं। इसकी अधिकतम प्रोजेक्शन दूरी 25 फीट है। इसका साइज भी काफी बड़ा नहीं है। इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है।
कम दाम में ये प्रोजेक्टर भी हैं अच्छे ऑप्शन
इसके अलावा और भी कई प्रोजेक्टर पर ऑफर्स मिल रहे हैं। अगर आप कम पैसे में अच्छे ऑप्शन देख रहे हैं तो Portronics Beem अच्छा ऑप्शन है। यह फ्लिपकार्ट पर 4,740 रुपये में मिल रहा है। ZEBRONICS Zeb – Pixaplay भी अभी सस्ते में मिल रहा है। 30,999 रुपये वाले इस प्रोजेक्टर को अभी 9,199 रुपये में खरीद सकते हैं। ध्यान रखें कि यह सेल जल्द ही खत्म होने वाली है। आपके पास ऑफर का लाभ उठाने के लिए सीमित समय है। इसके बाद प्रोजेक्टर महंगे हो जाएंगे और आपको अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
सरकार का उद्देश्य बस्तर को पर्यटन का केंद्र बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना है। राज्य सरकार ने इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है, ताकि आर्थिक मदद प्राप्त हो सके। पॉलिसी के तहत आदिवासी गांवों में छोटे-छोटे पर्यटन केंद्र विकसित किए जाएंगे।
इसके लिए ग्रामीणों को उनके घर के अतिरिक्त एक और घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। पर्यटक इन घरों में ठहरेंगे, स्थानीय व्यंजन खाएंगे और गांव की संस्कृति को करीब से जानेंगे। इससे ग्रामीणों की आय में इजाफा होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया जीवन मिलेगा।
बताते चलें कि एक होम स्टे विकसित करने में औसतन एक लाख रुपये तक का खर्च आता है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल इसकी डिजाइन खुद तैयार करेगा। इससे ग्रामीणों के रोजगार का नया रास्ता मिलेगा और प्रदेश के पर्यटन को पंख लगेंगे।
बस्तर, सरगुजा के बाद अन्य जिलों में विस्तार
पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने बताया कि केंद्र से प्रस्ताव स्वीकृत होते ही योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया जाएगा। ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी जाएगी और इच्छुक लोगों का पंजीयन किया जाएगा। इसके बाद उन्हें होम स्टे निर्माण के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।
चित्रकोट और धुड़मारास जैसे गांवों होंगे विकसित
बस्तर जिले के चित्रकोट और धुड़मारास गांवों को हाल ही में ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज 2024’ प्रतियोगिता में विशेष सम्मान मिला है। यह सम्मान केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रदान किया। धुड़मारास गांव अपनी एडवेंचर गतिविधियों के लिए लोकप्रिय है।
वहीं, चित्रकोट जलप्रपात अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व प्रसिद्ध है। सरकार अब ऐसे अन्य गांवों की पहचान कर रही है जो पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
छोटेबोडाल : बस्तर का पहला मिलिस्टिक विलेज होम स्टे
बस्तर जिले में होम स्टे की शुरुआत सबसे पहले छोटेबोडाल गांव से हुई। यह गांव नांगूर के पास स्थित है और बस्तर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर है। यहां 2007 में शकील रिजवी ने जिले का पहला होम स्टे शुरू किया, जो तीन कमरों वाला एक पारंपरिक मिट्टी का घर है।
इस घर में 12 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। यहां आने वाले पर्यटक न केवल ग्रामीण परिवेश का आनंद लेते हैं, बल्कि आदिवासी जीवनशैली, परंपराएं, और स्थानीय वनस्पतियों के बारे में भी जानकारी प्राप्त करते हैं।
पर्यटन मंडल कर रहा विस्तार की तैयारी
बस्तर में वर्तमान में 27 होम स्टे चल रहे हैं। चित्रकोट के आस-पास के गांवों में भी जिला प्रशासन की मदद से होम स्टे विकसित किए गए हैं। यह ग्रामीणों के लिए आय के नए स्रोत बन रहा है।
माओवाद सिमटा, सुरक्षित हुए पर्यटन क्षेत्र
बस्तर के कोंडागांव और बस्तर जिले माओवादी प्रभाव से लगभग पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर जैसे जिलों में अब भी कुछ हद तक नक्सली गतिविधियां हैं।
मगर, राज्य सरकार की रणनीति और सुरक्षाबलों की मुस्तैदी से हालात तेजी से बदल रहे हैं। अब पर्यटन विभाग का फोकस उन क्षेत्रों पर है जो अब सुरक्षित हो चुके हैं।
]]>डेटा एनालिटिक्स फर्म प्रॉपइक्विटी के अनुसार, 2024 में दिल्ली-एनसीआर में कुल मकानों का बिक्री मूल्य 63% बढ़कर 1.53 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसी दौरान मुंबई का बिक्री मूल्य 13% बढ़कर 1.38 लाख करोड़ रुपये और हैदराबाद का बिक्री मूल्य 18% घटकर 1.05 लाख करोड़ रुपये रह गया है. साल 2023 में दिल्ली-एनसीआर में बेचे गए घरों की कुल बिक्री मूल्य 94,143 करोड़ रुपये रहा था, जबकि इसी दौरान मुंबई में 1.22 लाख करोड़ रुपये और हैदराबाद में 1.28 लाख करोड़ रुपये के मकान बिके थे.
हैदराबाद से आगे निकला गुरुग्राम
गुरुग्राम में साल 2023 में कुल बिक्री मूल्य 64,314 करोड़ रुपये था, जो हैदराबाद का लगभग आधा था. लेकिन, 2024 में गुरुग्राम ने हैदराबाद को भी पीछे छोड़ दिया. प्रॉपइक्विटी के संस्थापक और सीईओ समीर जसूजा ने कहा कि गुरुग्राम ने अकेले ही 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री के साथ दिल्ली-एनसीआर की कुल बिक्री मूल्य का 66% से अधिक हिस्सा बेचा है. यह शहर शीर्ष पर उभर कर आया है. गुरुग्राम का बिक्री मूल्य मुंबई के बाद दूसरे स्थान पर है. गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और नई दिल्ली जैसे शहरों में भी 2024 में बिक्री मूल्य में काफी वृद्धि देखी गई है. बस नोएडा में थोड़ी गिरावट आई है.
लग्जरी मकानों की डिमांड बढ़ी
दिल्ली-एनसीआर में औसत बिक्री मूल्य 12,469 रुपये प्रति वर्ग फुट तक बढ़ गया है और 2024 में यूनिट्स का औसत आकार 2,229 वर्ग फुट हो गया है. आधे से अधिक बिक्री 2 करोड़ रुपये और उससे अधिक कीमत वाले घरों की हुई है और एक चौथाई बिक्री 1-2 करोड़ रुपये के बीच कीमत वाले घरों की हुई है. इसका मतलब है कि कुल बिक्री में 75 फीसदी हिस्सेदारी तो सिर्फ 1 करोड़ से ज्यादा की कीमत वाले घरों की है.
हैदराबाद में बड़ी गिरावट क्यों
हैदराबाद के आवासीय बाजार ने साल 2024 में महत्वपूर्ण गिरावट देखी, जिसमें नए लॉन्च 2020 के बाद से सबसे कम और बिक्री 2021 के बाद से सबसे कम रही. इस तरह देखा जाए तो डिमांड और सप्लाई में 25% व 49% की वार्षिक गिरावट आई है. लिहाजा तैयार खड़े मकानों की संख्या 2023 में 17 महीनों से बढ़कर 2024 में 20 महीनों तक पहुंच गया है. देश में हुई कुल बिक्री मूल्य में दिल्ली-एनसीआर का हिस्सा 2023 के 16% से बढ़कर 2024 में 23% हो गया. मुंबई का हिस्सा 2023 में 20% से बढ़कर 2024 में 21% हो गया, जबकि हैदराबाद का हिस्सा 2023 के 21% से घटकर 2024 में 16% रह गया. 2024 में शीर्ष 9 शहरों का कुल बिक्री मूल्य 12% बढ़कर 6.73 लाख करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 6 लाख करोड़ था. इन शहरों में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, नवी मुंबई, पुणे, ठाणे, कोलकाता, बैंगलोर, चेन्नई और हैदराबाद शामिल है.
अध्ययन में विकसित हो रहे उपभोक्ता रुझानों पर प्रकाश डाला गया है, जिससे पता चलता है कि ऑनलाइन शॉपिंग 2021 में 69% तक बढ़ गई, 2023 में 48% तक गिर गई, और 2024 में 53% तक फिर से बढ़ गई। इन-स्टोर शॉपिंग के पुनरुत्थान के बावजूद, डिजिटल कॉमर्स एक प्रमुख शक्ति बना हुआ है, जो काफी हद तक महिलाओं और युवा उपभोक्ताओं द्वारा संचालित है।
स्टडी के निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए, होम क्रेडिट इंडिया के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर, आशीष तिवारी ने कहा: "भारत में डिजिटल शॉपिंग का परिदृश्य महिलाओं द्वारा फिर से परिभाषित किया जा रहा है, जो न केवल ऑनलाइन शॉपिंग को अपनाने में आगे हैं बल्कि एम्बेडेड फाइनेंस में बदलाव को भी प्रभावित कर रही हैं। हमारी 'हाउ इंडिया बारोज 2024' स्टडी से पता चलता है कि महिलाएं आत्मविश्वास से डिजिटल टूल्स का लाभ उठा रही हैं, एआई-चालित सहायता पर भरोसा कर रही हैं, और अपने खरीदारी के अनुभव को बढ़ाने के लिए स्मार्ट ऋण साल्यूशन्स को अपना रही हैं। होम क्रेडिट इंडिया में, हम इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में मानते हैं, जो महिलाओं की बढ़ती वित्तीय स्वतंत्रता और उनकी विकसित हो रही आकांक्षाओं के अनुरूप निर्बाध, सुलभ क्रेडिट समाधानों की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।"
ऑनलाइन शॉपिंग को आगे बढ़ाने वाली प्रमुख आबादी:
महिलाएं ऑनलाइन शॉपिंग को अपनाने में सबसे आगे हैं, जहां 60% सक्रिय रूप से ऑनलाइन खरीदारी कर रही हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 52% है। युवा पीढ़ी भी इस प्रवृत्ति को अपनाने में आगे है, जहां जेन जेड के 58% और मिलेनियल्स के 59% ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, जबकि जेन एक्स के केवल 39% ही डिजिटल कॉमर्स में भाग लेते हैं। भौगोलिक रूप से, टियर-2 शहरों ने मेट्रो क्षेत्रों को टक्कर दे दी है, दोनों में 56% ऑनलाइन शॉपिंग अपनाने की दर दर्ज की गई है, जो विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती डिजिटल उपस्थिति को दर्शाता है।
यह उछाल विशेष रूप से पूर्वी और दक्षिणी शहरों में निम्न-मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के बीच स्पष्ट है, जहां कोलकाता (71%), कोच्चि (66%), हैदराबाद (64%) और चेन्नई (60%) आगे हैं, जो ई-कॉमर्स की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।
एम्बेडेड फाइनेंस महिला खरीदारों के लिए ई-कॉमर्स को आसान बनाता है:
अध्ययन यह भी उजागर करता है कि कैसे एम्बेडेड फाइनेंस ऑनलाइन शॉपिंग अनुभवों को नया रूप दे रहा है, विशेष रूप से महिलाओं के लिए ऋण लेने को अधिक निर्बाध बनाकर और खरीदारी के निर्णयों को तेज करके। एम्बेडेड फाइनेंस सॉल्यूशंस को पसंद करने वाले सभी ऋण लेने वालों में से आधे का मानना है कि यह ई-कॉमर्स लेनदेन को सरल बनाते हैं। इसके अतिरिक्त, ईएमआई कार्ड, जिन्हें 38% निम्न-मध्यम वर्ग की महिला ऋण लेने वालों द्वारा पसंद किया जाता है, विश्वसनीयता और तेजी से वितरण प्रदान करते हैं, जिससे डिजिटल शॉपिंग बूम को और बढ़ावा मिलता है।
इसके साथ ही, प्रौद्योगिकी-संचालित वित्तीय साल्यूशन्स में विश्वास बढ़ रहा है। स्टडी में लगभग 30% उत्तरदाता, विशेष रूप से महिलाएं और मेट्रो में रहने वाले ऋण प्राप्तकर्त्ता, चैटबॉट रिस्पांसों को विश्वसनीय मानते हैं, जबकि 26% व्हाट्सएप के माध्यम से दिए जाने वाले ऋण प्रस्तावों पर भरोसा करते हैं। एआई-चालित वित्तीय उपकरणों में यह बढ़ता विश्वास डिजिटल वित्तीय सहायता की ओर एक व्यापक बदलाव को दर्शाता है।
डिजिटल वित्तीय साक्षरता के अंतर को पाटना:
जैसे-जैसे ऑनलाइन शॉपिंग, एम्बेडेड फाइनेंस और डिजिटल लेंडिंग बढ़ते जा रहे हैं, जिम्मेदारी के साथ ऋण लेने को बढ़ावा देने और ऋण के जाल को रोकने के लिए वित्तीय जागरूकता आवश्यक हो जाती है। विशेष रूप से, हर पांच में से एक महिला ने वित्त, इंटरनेट बैंकिंग, ऋण आवेदनों और डिजिटल भुगतान के बारे में सीखने की बढ़ी हुई इच्छा दिखाई है।
वित्तीय योजना, बजट और क्रेडिट प्रबंधन के ज्ञान के साथ महिलाओं को सशक्त बनाना उनकी वित्तीय सुरक्षा को बढ़ाता है और व्यापक आर्थिक प्रगति को जारी रखता है। इस साक्षरता के अंतर को संबोधित करना महिलाओं को अपने वित्त पर नियंत्रण रखने और आत्मविश्वास से डिजिटल अर्थव्यवस्था में नेविगेट करने में सक्षम बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
]]>अध्ययन में विकसित हो रहे उपभोक्ता रुझानों पर प्रकाश डाला गया है, जिससे पता चलता है कि ऑनलाइन शॉपिंग 2021 में 69% तक बढ़ गई, 2023 में 48% तक गिर गई, और 2024 में 53% तक फिर से बढ़ गई। इन-स्टोर शॉपिंग के पुनरुत्थान के बावजूद, डिजिटल कॉमर्स एक प्रमुख शक्ति बना हुआ है, जो काफी हद तक महिलाओं और युवा उपभोक्ताओं द्वारा संचालित है।
स्टडी के निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए, होम क्रेडिट इंडिया के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर, आशीष तिवारी ने कहा: "भारत में डिजिटल शॉपिंग का परिदृश्य महिलाओं द्वारा फिर से परिभाषित किया जा रहा है, जो न केवल ऑनलाइन शॉपिंग को अपनाने में आगे हैं बल्कि एम्बेडेड फाइनेंस में बदलाव को भी प्रभावित कर रही हैं। हमारी 'हाउ इंडिया बारोज 2024' स्टडी से पता चलता है कि महिलाएं आत्मविश्वास से डिजिटल टूल्स का लाभ उठा रही हैं, एआई-चालित सहायता पर भरोसा कर रही हैं, और अपने खरीदारी के अनुभव को बढ़ाने के लिए स्मार्ट ऋण साल्यूशन्स को अपना रही हैं। होम क्रेडिट इंडिया में, हम इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में मानते हैं, जो महिलाओं की बढ़ती वित्तीय स्वतंत्रता और उनकी विकसित हो रही आकांक्षाओं के अनुरूप निर्बाध, सुलभ क्रेडिट समाधानों की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।"
ऑनलाइन शॉपिंग को आगे बढ़ाने वाली प्रमुख आबादी:
महिलाएं ऑनलाइन शॉपिंग को अपनाने में सबसे आगे हैं, जहां 60% सक्रिय रूप से ऑनलाइन खरीदारी कर रही हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 52% है। युवा पीढ़ी भी इस प्रवृत्ति को अपनाने में आगे है, जहां जेन जेड के 58% और मिलेनियल्स के 59% ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, जबकि जेन एक्स के केवल 39% ही डिजिटल कॉमर्स में भाग लेते हैं। भौगोलिक रूप से, टियर-2 शहरों ने मेट्रो क्षेत्रों को टक्कर दे दी है, दोनों में 56% ऑनलाइन शॉपिंग अपनाने की दर दर्ज की गई है, जो विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती डिजिटल उपस्थिति को दर्शाता है।
यह उछाल विशेष रूप से पूर्वी और दक्षिणी शहरों में निम्न-मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के बीच स्पष्ट है, जहां कोलकाता (71%), कोच्चि (66%), हैदराबाद (64%) और चेन्नई (60%) आगे हैं, जो ई-कॉमर्स की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।
एम्बेडेड फाइनेंस महिला खरीदारों के लिए ई-कॉमर्स को आसान बनाता है:
अध्ययन यह भी उजागर करता है कि कैसे एम्बेडेड फाइनेंस ऑनलाइन शॉपिंग अनुभवों को नया रूप दे रहा है, विशेष रूप से महिलाओं के लिए ऋण लेने को अधिक निर्बाध बनाकर और खरीदारी के निर्णयों को तेज करके। एम्बेडेड फाइनेंस सॉल्यूशंस को पसंद करने वाले सभी ऋण लेने वालों में से आधे का मानना है कि यह ई-कॉमर्स लेनदेन को सरल बनाते हैं। इसके अतिरिक्त, ईएमआई कार्ड, जिन्हें 38% निम्न-मध्यम वर्ग की महिला ऋण लेने वालों द्वारा पसंद किया जाता है, विश्वसनीयता और तेजी से वितरण प्रदान करते हैं, जिससे डिजिटल शॉपिंग बूम को और बढ़ावा मिलता है।
इसके साथ ही, प्रौद्योगिकी-संचालित वित्तीय साल्यूशन्स में विश्वास बढ़ रहा है। स्टडी में लगभग 30% उत्तरदाता, विशेष रूप से महिलाएं और मेट्रो में रहने वाले ऋण प्राप्तकर्त्ता, चैटबॉट रिस्पांसों को विश्वसनीय मानते हैं, जबकि 26% व्हाट्सएप के माध्यम से दिए जाने वाले ऋण प्रस्तावों पर भरोसा करते हैं। एआई-चालित वित्तीय उपकरणों में यह बढ़ता विश्वास डिजिटल वित्तीय सहायता की ओर एक व्यापक बदलाव को दर्शाता है।
डिजिटल वित्तीय साक्षरता के अंतर को पाटना:
जैसे-जैसे ऑनलाइन शॉपिंग, एम्बेडेड फाइनेंस और डिजिटल लेंडिंग बढ़ते जा रहे हैं, जिम्मेदारी के साथ ऋण लेने को बढ़ावा देने और ऋण के जाल को रोकने के लिए वित्तीय जागरूकता आवश्यक हो जाती है। विशेष रूप से, हर पांच में से एक महिला ने वित्त, इंटरनेट बैंकिंग, ऋण आवेदनों और डिजिटल भुगतान के बारे में सीखने की बढ़ी हुई इच्छा दिखाई है।
वित्तीय योजना, बजट और क्रेडिट प्रबंधन के ज्ञान के साथ महिलाओं को सशक्त बनाना उनकी वित्तीय सुरक्षा को बढ़ाता है और व्यापक आर्थिक प्रगति को जारी रखता है। इस साक्षरता के अंतर को संबोधित करना महिलाओं को अपने वित्त पर नियंत्रण रखने और आत्मविश्वास से डिजिटल अर्थव्यवस्था में नेविगेट करने में सक्षम बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
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