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गुजरात सरकार ने मंगलवार देर रात एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 72 अधिकारियों का तबादला कर दिया है। 13 मई की रात सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, राज्य के कई जिलों के कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और विभिन्न सरकारी विभागों के टॉप पदों पर बैठे लोग इस फेरबदल से प्रभावित हुए हैं। इसके तहत अहमदाबाद, सूरत, भरूच, नवसारी, मोरबी, दाहोद और जूनागढ़ जैसे महत्वपूर्ण जिलों में नए कलेक्टरों की नियुक्ति की गई है।
अहमदाबाद के कलेक्टर सुजीत कुमार को अब राज्य कर (State Tax) का विशेष आयुक्त नियुक्त किया गया है, जबकि उनकी जगह भव्य वर्मा को अहमदाबाद का नया कलेक्टर बनाया गया है। इसी तरह, सूरत के कलेक्टर डॉ. सौरभ पारधी को गांधीनगर में नागरिक आपूर्ति निदेशक के पद पर भेजा गया है और उनकी जगह तेजस दिलीपभाई परमार सूरत के नए कलेक्टर होंगे।
कच्छ-भुज के कलेक्टर आनंद बाबूलाल पटेल को गांधीनगर में स्कूलों का आयुक्त नियुक्त किया गया है, साथ ही उन्हें पीएम-पोषण योजना और जीसीईआरटी (GCERT) के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
गांधीनगर में विकास आयुक्त बनाए गए डीएन मोदी
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीएन मोदी को जामनगर नगर निगम के नगर आयुक्त पद से हटाकर गांधीनगर में विकास आयुक्त नियुक्त किया गया है। इस पद पर वह केएल बचानी के अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी को खत्म करेंगे। वहीं, आनंद बाबूलाल पटेल को कच्छ-भुज के कलेक्टर पद से हटाकर गांधीनगर में स्कूल आयुक्त बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें पीएम-पोषण योजना (मिड-डे मील) आयुक्त और गुजरात काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (GCERT) के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इन पदों का अतिरिक्त प्रभार अब तक रचित राज के पास था।
कई अन्य बड़े अधिकारियों का भी हुआ तबादला
अहमदाबाद के कलेक्टर सुजीत कुमार का तबादला कर उन्हें अहमदाबाद में राज्य कर विभाग का विशेष आयुक्त नियुक्त किया गया है। इस पद का अतिरिक्त प्रभार पी. भारती संभाल रही थीं। अजय प्रकाश को गुजरात ऊर्जा विकास एजेंसी (GEDA) के निदेशक पद से हटाकर ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल विभाग में भेजा गया है। उन्हें वडोदरा स्थित गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (GETCO) का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया जाएगा। सूरत के कलेक्टर डॉ. सौरभ पारधी को गांधीनगर में नागरिक आपूर्ति निदेशक और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग में पदेन अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। वह इस पद पर मयूर मेहता की जगह लेंगे।
बड़े पैमाने पर हुआ था IPS अफसरों का तबादला
बता दें कि इसके पहले मार्च की शुरुआत में गुजरात में बड़े पैमाने पर IPS अफसरों का तबादला हुआ था। उस समय राज्य के IB चीफ के साथ-साथ कई रेंजेस के चीफ भी बदले गए थे। वहीं, लंबे समय से पोस्टिंग का इंतजार कर रहे कई अधिकारियों को पोस्टिंग अलॉट की गई थी।
नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में भी बदलाव
नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अजय प्रकाश को गुजरात ऊर्जा ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (GETCO) का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है, जबकि जामनगर के नगर आयुक्त डी एनमोदी अब गांधीनगर में विकास आयुक्त की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके अलावा, अहमदाबाद नगर निगम (AMC) में भी नए उप-आयुक्तों की नियुक्ति की गई है और मिरांत जतिन पारिख को अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण (AUDA) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया गया है।
इन अधिकारियों के भी तबादले
भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2013 बैच के अधिकारी और वर्तमान में दाहोद के कलेक्टर के रूप में कार्यरत योगेश बबनराव निर्गुडे का ट्रांसफर कर उन्हें एडिशनल डेवलपमेंट कमिश्नर गांधीनगर के पद पर नियुक्त किया गया है। उनकी इस नियुक्ति से स्तुति चरण, IAS, इस पद के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगी।
इसी तरह अमित प्रकाश यादव, जो 2013 बैच के अधिकारी हैं और खेड़ा-नडियाद के कलेक्टर के पद पर तैनात थे, उनका ट्रांसफर कर उन्हें गांधीनगर में एडिशनल कमिश्नर ऑफ इंडस्ट्रीज नियुक्त किया गया है।
]]>मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले और नवीन पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। नए आदेश के तहत दो वरिष्ठ अधिकारियों के दायित्वों में बदलाव किया गया है, वहीं एक अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
1994 बैच के आईएएस अधिकारी संजय कुमार शुक्ल को अपर मुख्य सचिव गृह विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है, इसके साथ ही शुक्ल को विमानन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। वहीं दूसरी ओर 1994 बैच के ही वरिष्ठ अधिकारी शिवशेखर शुक्ल को अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग का दायित्व सौंपा गया है। इसके अलावा उन्हें संस्कृति विभाग एवं आयुक्त-सह-संचालक, स्वराज संस्थान का प्रभार दिया गया है।
]]>मध्यप्रदेश सरकार के लिए सिविल सर्विस डे (21 अप्रैल) पर एक बड़ी चुनौती सामने आई है। प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस (IAS) के अफसरों की पहले से ही कमी है। ऊपर से अगले पांच साल में 90 और अनुभवी अफसर सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
एमपी कैडर में कुल 459 पद स्वीकृत हैं। इनमें से अभी सिर्फ 390 आईएएस काम कर रहे हैं। यानी 69 पद पहले से खाली पड़े हैं। अब जैसे-जैसे और अफसर रिटायर होंगे, यह संख्या और बढ़ेगी।
2027 में सबसे बड़ा झटका
आंकड़े देखें तो 2026 में 14 आईएएस रिटायर होंगे। इसके बाद 2027 में सबसे ज्यादा 26 अफसर एक साथ सेवानिवृत्त होंगे। 2028 में 16, 2029 में 21 और 2030 में 13 अफसर रिटायर हो जाएंगे। इस तरह 2026 से 2030 के बीच कुल 90 आईएएस प्रदेश की सेवा से हट जाएंगे।
2027 इसलिए भी अहम है क्योंकि इस साल अपर मुख्य सचिव (एसीएस) स्तर के चार बड़े अफसर रिटायर हो रहे हैं। इनमें एसीएस जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा मई 2027 में, एसीएस स्वास्थ्य अशोक वर्णवाल जनवरी 2027 में, एसीएस नवीकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव सितंबर 2027 में और एसीएस कुटीर एवं ग्रामोद्योग केसी गुप्ता अगस्त 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। ये चारों अफसर अपने-अपने विभागों में लंबे अनुभव के साथ काम कर रहे हैं।
सीएम दफ्तर के करीबी अफसर भी जाएंगे
मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार सिंह सितंबर 2027 में रिटायर होंगे। वहीं मुख्यमंत्री के ही एक और सचिव चंद्रशेखर वालिम्बे नवंबर 2026 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। ये दोनों अफसर सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली से जुड़े हैं।
| प्रमुख अधिकारी और सेवानिवृत्ति का समय | ||
| नाम | पद | सेवानिवृत्ति |
| आईएएस अनुराग जैन | मुख्य सचिव | सितंबर 2026 |
| आईएएस अशोक वर्णवाल | एसीएस, स्वास्थ्य | जनवरी 2027 |
| आईएएस मनु श्रीवास्तव | एसीएस, नवीकरणीय ऊर्जा | सितंबर 2027 |
| आईएएस कैलाश चंद गुप्ता | एसीएस, कुटीर एवं ग्रामोद्योग | अगस्त 2027 |
| आईएएस उमाकांत उमराव | प्रमुख सचिव, पशुपालन | सितंबर 2026 |
| आईएएस राजेश राजौरा | एसीएस, जल संसाधन | मई 2027 |
| आईएएस आलोक कुमार सिंह | सचिव, मुख्यमंत्री | सितंबर 2027 |
| आईएएस अलका उपाध्याय | सचिव, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग | मई 2026 |
| आईएएस आशीष श्रीवास्तव | सचिव, अंतरराज्यीय काउंसिल सचिवालय | अगस्त 2026 |
| आईएएस अरुणा गुप्ता | सचिव, लोकायुक्त मप्र | अक्टूबर 2026 |
| आईएएस माल सिंह | एमडी, एमपी खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड | जून 2026 |
| आईएएस सुरेश कुमार | संभागायुक्त, चंबल संभाग | सितंबर 2026 |
| आईएएस चंद्रशेखर वालिम्बे | सचिव, मुख्यमंत्री | नवंबर 2026 |
| आईएएस केदार सिंह | कलेक्टर, शहडोल | नवंबर 2026 |
| आईएएस वीएल कांताराव | सचिव, खनिज मंत्रालय | दिसंबर 2027 |
| आईएएस बाबू सिंह जामोद | संभागायुक्त, रीवा संभाग | मई 2027 |
| आईएएस अनिल सुचारी | संभागायुक्त, सागर | सितंबर 2027 |
| आईएएस मनीष सिंह | आयुक्त, जनसंपर्क | दिसंबर 2027 |
नए जिले बनाने की मांग, अफसर कहां से आएंगे?
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग का गठन कर दिया है। नए जिले, नए संभाग और नई जिला पंचायतें बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। वहीं, सवाल यह है कि इन नई इकाइयों को चलाने के लिए अफसर कहां से आएंगे?
जानकार बताते हैं कि प्रदेश की आबादी तेजी से बढ़ रही है। सरकार की योजनाओं का दायरा भी लगातार फैल रहा है। ऐसे में आईएएस अफसरों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। पहले जहां ये अफसर सिर्फ नीति बनाने का काम करते थे, अब संचालनालयों में नीतियों को लागू करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं के कंधों पर है।
नगरीय विकास, स्वास्थ्य जैसे विभागों में आईएएस अफसर ही आयुक्त, संचालक और अपर संचालक की भूमिका निभा रहे हैं। यानी एक-एक अफसर कई जिम्मेदारियां संभाल रहा है।
कैडर रिवीजन क्यों जरूरी?
मध्यप्रदेश कैडर का आखिरी रिवीजन 2022 में हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि अब फिर से कैडर रिवीजन का समय आ गया है। जब तक केंद्र से नए आईएएस अफसरों का आवंटन नहीं बढ़ता, तब तक प्रदेश में प्रशासनिक दबाव बना रहेगा।
कैडर रिवीजन (Cadre Revision) वह प्रक्रिया है जिसमें राज्य की जरूरत के आधार पर केंद्र सरकार आईएएस पदों की संख्या तय करती है। यह प्रदेश की बढ़ती जरूरतों के लिहाज से बेहद जरूरी कदम है।
32 सीनियर अफसर होंगे सेवा मुक्त
नया साल 2026 मध्य प्रदेश की नौकरशाही और पुलिस महकमे के लिए बड़े बदलाव लेकर आने वाला है। मध्य प्रदेश कैडर के 16 आईपीएस और 16 आईएएस अधिकारी अगले वर्ष अपनी सेवाएं पूरी कर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इनमें पुलिस महानिदेशक से लेकर मुख्य सचिव, एडीजी, आईजी, कलेक्टर और संभागायुक्त स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों के बाहर जाने से शासन और पुलिस व्यवस्था में व्यापक फेरबदल तय माना जा रहा है। गृह विभाग की ओर से जारी सूची के अनुसार प्रदेश के मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाणा भी 2026 में रिटायरमेंट की सूची में शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो साल होना जरूरी है, इसी कारण उनकी रिटायरमेंट तिथि बढ़ाई गई है।
डीजी से लेकर एसपी तक खाली होंगे पद
वर्तमान सूची के मुताबिक 2026 में पुलिस विभाग से डीजी रैंक के 4 अधिकारी, एडीजी के 2, आईजी के 5, डीआईजी के 3 और एसपी रैंक के 2 अधिकारी सेवानिवृत्त होंगे। इससे पुलिस मुख्यालय से लेकर रेंज और जिला स्तर तक कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हो जाएंगे। इसमें डीजीपी कैलाश मकवाना, अजय कुमार शर्मा, आलोक रंजन, सोनाली मिश्रा, संजीव समी, आशुतोष राय, ए साई मनोजर, संजय तिवारी, अंशुमान सिंह, अरविंद सक्सेना, हिमानी खन्ना, मिथिलेस शुक्ला, शशिकांत शुक्ला, महेश चंद्र जैन, सविता सोहाने और जगदीश डावर शामिल हैं।
आईएएस कैडर में भी बड़ा बदलाव
सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक सेवा में भी 2026 अहम रहने वाला है। 16 आईएएस अधिकारी अगले साल रिटायर होंगे। इनमें सबसे बड़ा नाम मुख्य सचिव अनुराग जैन का है, जिनका कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को पूरा होगा। यदि केंद्र सरकार उन्हें दोबारा सेवा विस्तार नहीं देती है, तो राज्य को नया मुख्य सचिव चुनना पड़ेगा। मुख्य सचिव के अलावा एसीएस स्तर की अलका उपाध्याय और आशीष श्रीवास्तव, चंबल संभाग के कमिश्नर सुरेश कुमार, शिवपुरी कलेक्टर रविंद्र चौधरी और शहडोल कलेक्टर केदार सिंह भी 2026 में रिटायरमेंट की सूची में हैं। इसके साथ ही शिक्षा, खनिज, राजस्व, आयुष और लोकायुक्त जैसे विभागों से जुड़े वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी सेवा से बाहर होंगे।
यह आईएएस होंगे रिटार्यड
सितंबर में- मुख्य सचिव अनुराग जैन, अलका उपाध्याय, आशीष श्रीवास्तव, स्मिता भारद्वाज, उमाकांत उमराव, अरुणा गुप्ता, माल सिंह भयडिया, उर्मिला शुक्ला, ललित दाहिमा, सुरेश कुमार, चंद्रशेखर वालिम्बे, रविंद्र कुमार चौधरी, संजय कुमार, संजय कुमार मिश्रा, केदार सिंह और जीएस धुर्वे शामिल हैं।
मध्यप्रदेश सरकार के लिए सिविल सर्विस डे (21 अप्रैल) पर एक बड़ी चुनौती सामने आई है। प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस (IAS) के अफसरों की पहले से ही कमी है। ऊपर से अगले पांच साल में 90 और अनुभवी अफसर सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
एमपी कैडर में कुल 459 पद स्वीकृत हैं। इनमें से अभी सिर्फ 390 आईएएस काम कर रहे हैं। यानी 69 पद पहले से खाली पड़े हैं। अब जैसे-जैसे और अफसर रिटायर होंगे, यह संख्या और बढ़ेगी।
2027 में सबसे बड़ा झटका
आंकड़े देखें तो 2026 में 14 आईएएस रिटायर होंगे। इसके बाद 2027 में सबसे ज्यादा 26 अफसर एक साथ सेवानिवृत्त होंगे। 2028 में 16, 2029 में 21 और 2030 में 13 अफसर रिटायर हो जाएंगे। इस तरह 2026 से 2030 के बीच कुल 90 आईएएस प्रदेश की सेवा से हट जाएंगे।
2027 इसलिए भी अहम है क्योंकि इस साल अपर मुख्य सचिव (एसीएस) स्तर के चार बड़े अफसर रिटायर हो रहे हैं। इनमें एसीएस जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा मई 2027 में, एसीएस स्वास्थ्य अशोक वर्णवाल जनवरी 2027 में, एसीएस नवीकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव सितंबर 2027 में और एसीएस कुटीर एवं ग्रामोद्योग केसी गुप्ता अगस्त 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। ये चारों अफसर अपने-अपने विभागों में लंबे अनुभव के साथ काम कर रहे हैं।
सीएम दफ्तर के करीबी अफसर भी जाएंगे
मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार सिंह सितंबर 2027 में रिटायर होंगे। वहीं मुख्यमंत्री के ही एक और सचिव चंद्रशेखर वालिम्बे नवंबर 2026 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। ये दोनों अफसर सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली से जुड़े हैं।
| प्रमुख अधिकारी और सेवानिवृत्ति का समय | ||
| नाम | पद | सेवानिवृत्ति |
| आईएएस अनुराग जैन | मुख्य सचिव | सितंबर 2026 |
| आईएएस अशोक वर्णवाल | एसीएस, स्वास्थ्य | जनवरी 2027 |
| आईएएस मनु श्रीवास्तव | एसीएस, नवीकरणीय ऊर्जा | सितंबर 2027 |
| आईएएस कैलाश चंद गुप्ता | एसीएस, कुटीर एवं ग्रामोद्योग | अगस्त 2027 |
| आईएएस उमाकांत उमराव | प्रमुख सचिव, पशुपालन | सितंबर 2026 |
| आईएएस राजेश राजौरा | एसीएस, जल संसाधन | मई 2027 |
| आईएएस आलोक कुमार सिंह | सचिव, मुख्यमंत्री | सितंबर 2027 |
| आईएएस अलका उपाध्याय | सचिव, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग | मई 2026 |
| आईएएस आशीष श्रीवास्तव | सचिव, अंतरराज्यीय काउंसिल सचिवालय | अगस्त 2026 |
| आईएएस अरुणा गुप्ता | सचिव, लोकायुक्त मप्र | अक्टूबर 2026 |
| आईएएस माल सिंह | एमडी, एमपी खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड | जून 2026 |
| आईएएस सुरेश कुमार | संभागायुक्त, चंबल संभाग | सितंबर 2026 |
| आईएएस चंद्रशेखर वालिम्बे | सचिव, मुख्यमंत्री | नवंबर 2026 |
| आईएएस केदार सिंह | कलेक्टर, शहडोल | नवंबर 2026 |
| आईएएस वीएल कांताराव | सचिव, खनिज मंत्रालय | दिसंबर 2027 |
| आईएएस बाबू सिंह जामोद | संभागायुक्त, रीवा संभाग | मई 2027 |
| आईएएस अनिल सुचारी | संभागायुक्त, सागर | सितंबर 2027 |
| आईएएस मनीष सिंह | आयुक्त, जनसंपर्क | दिसंबर 2027 |
नए जिले बनाने की मांग, अफसर कहां से आएंगे?
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग का गठन कर दिया है। नए जिले, नए संभाग और नई जिला पंचायतें बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। वहीं, सवाल यह है कि इन नई इकाइयों को चलाने के लिए अफसर कहां से आएंगे?
जानकार बताते हैं कि प्रदेश की आबादी तेजी से बढ़ रही है। सरकार की योजनाओं का दायरा भी लगातार फैल रहा है। ऐसे में आईएएस अफसरों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। पहले जहां ये अफसर सिर्फ नीति बनाने का काम करते थे, अब संचालनालयों में नीतियों को लागू करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं के कंधों पर है।
नगरीय विकास, स्वास्थ्य जैसे विभागों में आईएएस अफसर ही आयुक्त, संचालक और अपर संचालक की भूमिका निभा रहे हैं। यानी एक-एक अफसर कई जिम्मेदारियां संभाल रहा है।
कैडर रिवीजन क्यों जरूरी?
मध्यप्रदेश कैडर का आखिरी रिवीजन 2022 में हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि अब फिर से कैडर रिवीजन का समय आ गया है। जब तक केंद्र से नए आईएएस अफसरों का आवंटन नहीं बढ़ता, तब तक प्रदेश में प्रशासनिक दबाव बना रहेगा।
कैडर रिवीजन (Cadre Revision) वह प्रक्रिया है जिसमें राज्य की जरूरत के आधार पर केंद्र सरकार आईएएस पदों की संख्या तय करती है। यह प्रदेश की बढ़ती जरूरतों के लिहाज से बेहद जरूरी कदम है।
32 सीनियर अफसर होंगे सेवा मुक्त
नया साल 2026 मध्य प्रदेश की नौकरशाही और पुलिस महकमे के लिए बड़े बदलाव लेकर आने वाला है। मध्य प्रदेश कैडर के 16 आईपीएस और 16 आईएएस अधिकारी अगले वर्ष अपनी सेवाएं पूरी कर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इनमें पुलिस महानिदेशक से लेकर मुख्य सचिव, एडीजी, आईजी, कलेक्टर और संभागायुक्त स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों के बाहर जाने से शासन और पुलिस व्यवस्था में व्यापक फेरबदल तय माना जा रहा है। गृह विभाग की ओर से जारी सूची के अनुसार प्रदेश के मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाणा भी 2026 में रिटायरमेंट की सूची में शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो साल होना जरूरी है, इसी कारण उनकी रिटायरमेंट तिथि बढ़ाई गई है।
डीजी से लेकर एसपी तक खाली होंगे पद
वर्तमान सूची के मुताबिक 2026 में पुलिस विभाग से डीजी रैंक के 4 अधिकारी, एडीजी के 2, आईजी के 5, डीआईजी के 3 और एसपी रैंक के 2 अधिकारी सेवानिवृत्त होंगे। इससे पुलिस मुख्यालय से लेकर रेंज और जिला स्तर तक कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हो जाएंगे। इसमें डीजीपी कैलाश मकवाना, अजय कुमार शर्मा, आलोक रंजन, सोनाली मिश्रा, संजीव समी, आशुतोष राय, ए साई मनोजर, संजय तिवारी, अंशुमान सिंह, अरविंद सक्सेना, हिमानी खन्ना, मिथिलेस शुक्ला, शशिकांत शुक्ला, महेश चंद्र जैन, सविता सोहाने और जगदीश डावर शामिल हैं।
आईएएस कैडर में भी बड़ा बदलाव
सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक सेवा में भी 2026 अहम रहने वाला है। 16 आईएएस अधिकारी अगले साल रिटायर होंगे। इनमें सबसे बड़ा नाम मुख्य सचिव अनुराग जैन का है, जिनका कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को पूरा होगा। यदि केंद्र सरकार उन्हें दोबारा सेवा विस्तार नहीं देती है, तो राज्य को नया मुख्य सचिव चुनना पड़ेगा। मुख्य सचिव के अलावा एसीएस स्तर की अलका उपाध्याय और आशीष श्रीवास्तव, चंबल संभाग के कमिश्नर सुरेश कुमार, शिवपुरी कलेक्टर रविंद्र चौधरी और शहडोल कलेक्टर केदार सिंह भी 2026 में रिटायरमेंट की सूची में हैं। इसके साथ ही शिक्षा, खनिज, राजस्व, आयुष और लोकायुक्त जैसे विभागों से जुड़े वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी सेवा से बाहर होंगे।
यह आईएएस होंगे रिटार्यड
सितंबर में- मुख्य सचिव अनुराग जैन, अलका उपाध्याय, आशीष श्रीवास्तव, स्मिता भारद्वाज, उमाकांत उमराव, अरुणा गुप्ता, माल सिंह भयडिया, उर्मिला शुक्ला, ललित दाहिमा, सुरेश कुमार, चंद्रशेखर वालिम्बे, रविंद्र कुमार चौधरी, संजय कुमार, संजय कुमार मिश्रा, केदार सिंह और जीएस धुर्वे शामिल हैं।
भारत की प्रशासनिक सेवा में एक अहम बदलाव के तहत मध्य प्रदेश कैडर से आने वाली 2011 बैच की आईएएस अधिकारी अनुग्रह पी (Anugraha P IAS) ने चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी में चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) का पदभार संभाल लिया है।
यह नियुक्ति न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश के प्रमुख बंदरगाहों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह फैसला केंद्र सरकार के उच्चस्तरीय निकाय Appointments Committee of the Cabinet (ACC) द्वारा लिया गया है, जो वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार होता है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर रह चुकीं अनुग्रह पी का यह पदभार पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी वे विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक और केंद्रीय विभागों में सेवाएं दे चुकी हैं।
चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी का महत्व
Chennai Port Authority देश के सबसे पुराने और व्यस्त बंदरगाहों में से एक है। यह दक्षिण भारत के व्यापार और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र है। चेन्नई पोर्ट का महत्व केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भी इसे एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
मुख्य विशेषताएं
भारत के प्रमुख आयात-निर्यात केंद्रों में शामिल
ऑटोमोबाइल, कंटेनर और बल्क कार्गो का बड़ा हब
हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करता है
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका
ऐसे महत्वपूर्ण संस्थान में CVO की भूमिका बेहद संवेदनशील और जिम्मेदारीपूर्ण होती है।
क्या होता है CVO?
चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) किसी भी सरकारी संस्था में भ्रष्टाचार की रोकथाम और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त किया जाता है। CVO का मुख्य उद्देश्य संस्थान में कार्यरत अधिकारियों के आचरण की निगरानी करना और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करना होता है।
मुख्य जिम्मेदारियां
भ्रष्टाचार के मामलों की जांच
कर्मचारियों की गतिविधियों पर निगरानी
शिकायतों का निवारण
नियमों के पालन को सुनिश्चित करना
नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यकाल
अनुग्रह पी की नियुक्ति Appointments Committee of the Cabinet (ACC) द्वारा अनुमोदित की गई है। आमतौर पर CVO का कार्यकाल 3 से 5 वर्षों का होता है, जिसमें अधिकारी को संस्थान में सतर्कता तंत्र को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जाती है।
यह नियुक्ति सरकार की “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” (Minimum Government, Maximum Governance) नीति के तहत की गई है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जाता है। IAS अनुग्रह पी की नियुक्ति को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकारी संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।
नई भूमिका में प्रमुख चुनौतियां
1. भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
पोर्ट जैसे बड़े संस्थान में वित्तीय लेनदेन की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण होता है। बड़ी मात्रा में आने-जाने वाला माल और संबंधित प्रक्रियाएं भ्रष्टाचार के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
2. डिजिटल ट्रांसपेरेंसी
ई-गवर्नेंस और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से निगरानी को मजबूत बनाना, ताकि हर लेन-देन और गतिविधि पारदर्शी और ट्रैक की जा सके।
3. शिकायत निवारण तंत्र
कर्मचारियों और हितधारकों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना ताकि संस्थान में कार्यक्षमता बनी रहे।
]]>2013 बैच के IAS प्रियंक मिश्रा को धार कलेक्टर से अब भोपाल के नए कलेक्टर बनाया गया है. वहीं, कौशलेंद्र विक्रम सिंह (2010) निवर्तमान भोपाल कलेक्टर को अब मुख्यमंत्री का सचिव नियुक्त किया गया है. साथ ही उन्हें नगर और ग्राम निवेश का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
इनको मिली नई जिम्मेदारी
भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को मुख्यमंत्री का सचिव बनाया गया है। वहीं धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा अब भोपाल के नए कलेक्टर होंगे। नर्मदापुरम की कलेक्टर सोनिया मीणा को वित्त विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। वहीं मंडला के कलेक्टर रहे सोमेश मिश्रा नर्मदापुरम के नए कलेक्टर होंगे।
तबादलों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच गुरुवार को लंबी बैठक हुई। इसके बाद सूची को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने इस अहम बैठक के लिए पूरा दिन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में रिजर्व रखा था। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने तबादलों को अंतिम रूप देते हुए आदेश जारी कर दिए।
दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में शुरू कराई गई SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया के बाद ही इन तबादलों की तैयारी शुरू हो गई थी। योजना के अनुसार 22 फरवरी के बाद तबादले किए जाने थे, लेकिन त्योहारों और बजट सत्र के चलते यह फैसला लगातार टलता रहा।
14 अफसरों में 9 महिलाएं शामिल
14 आईएएस अफसरों में 9 महिलाएं हैं। इनमें शिल्पा गुप्ता, प्रतिभा पाल, सोनिया मीणा, शीतला पटले, नेहा मीना, रानी बाटड, राखी सहाय, शीला दाहिमा और बिदिशा मुखर्जी का नाम शामिल हैं। इनमें से 5 को कलेक्टर पद पर पदस्थापना मिली है। इनमें प्रतिभा पाल और नेहा मीना पहले से ही अन्य जिलों में कलेक्टर थीं, जबकि राखी सहाय, शीला दाहिमा और बिदिशा मुखर्जी को अन्य पदों से हटाकर पहली बार जिले की कमान सौंपी गई है।
पहली बार जिले की कमान
राखी सहाय – कलेक्टर, उमरिया
शीला दाहिमा – कलेक्टर, श्योपुर
बिदिशा मुखर्जी – कलेक्टर, मैहर
पहले से कलेक्टर, अब नई जिले की जिम्मेदारी
प्रतिभा पाल – कलेक्टर, सागर।
नेहा मीना – कलेक्टर, सिवनी।
प्रतिभा दूसरी अफसर जिसे रीवा के बाद सागर कलेक्टर बनाया
प्रीति मैथिल के बाद प्रतिभा पाल ऐसी दूसरी आईएएस हैं जो रीवा जिले की कलेक्टर बनने के बाद सागर कलेक्टर बनी हैं। इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में प्रीति मैथिल को रीवा कलेक्टर के बाद सागर कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
तीन महिला अधिकारी को कलेक्टर बनाया, दो के जिले बदले, तीन को हटाया
तबादला सूची में महिला अधिकारियों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। इंदौर लोक सेवा आयोग की सचिव राखी सहाय को उमरिया कलेक्टर, सहकारिता विभाग की उप सचिव शीला दाहिमा को श्योपुर कलेक्टर और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की उप सचिव बिदिशा मुखर्जी को मैहर कलेक्टर बनाया गया है। इसके अलावा, नेहा मीना को झाबुआ से स्थानांतरित कर सिवनी कलेक्टर तथा प्रतिभा पाल को रीवा से सागर कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, नर्मदापुरम की कलेक्टर सोनिया मीना को हटा कर वित्त विभाग में अपर सचिव और सिवनी कलेक्टर शीतला पटले को लोक सेवा आयोग में सचिव बनाया गया है। मैहर कलेक्टर रानी बाटड़ को सहकारिता विभाग में उपसचिव बनाया है।
नर्मदापुरम संभाग के आयुक्त बदले
नर्मदापुरम संभाग के आयुक्त कृष्णगाेपाल तिवारी को हटा कर आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण बनाया गया है। उनकी जगह पर आयुक्त सह संचालक नगर तथा ग्राम निवेश श्रीकांत बनोठ को आयुक्त नर्मदापुरम संभाग बनाया गया है।
इनको जिले से हटाया
शिवपुरी जिले के कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी को नर्मदा घाटी विकास विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। वहीं, उमरिया कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन को विमानन विभाग का अपर सचिव बनाया गया। सागर कलेक्टर संदीप जी आर को विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सह श्रम आयुक्त इंदौर, दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर को मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव तथा पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन के संचालक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
इन अधिकारियों को भी फील्ड में भेजा
विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सह आयुक्त-सह संचालक संस्थागत वित्त तथा संचालक, बजट राजीव रंजन मीना को धार कलेक्टर, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग के उप सचिव प्रताप नारायण यादव को दमोह कलेक्टर, नर्मदा घाटी विकास विभाग तथा जल संसाधन के उप सचिव का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे राहुल नामदेव धोटे को मंडला कलेक्टर, आयुष्मान भारत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी योगेश तुकाराम भरसट को झाबुआ कलेक्टर, नगर पालिक निगम रीवा के आयुक्त डॉ.सौरभ संजय सोनवणे को बैतूल कलेक्टर बनाया गया है।
इन कलेक्टर के जिले बदले
श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा को शिवपुरी कलेक्टर, झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना को सिवनी कलेक्टर, मंडला कलेक्टर सोमेश मिश्रा को नर्मदापुरम कलेक्टर, धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को भोपाल कलेक्टर, बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को रीवा कलेक्टर, रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल को सागर कलेक्टर की कमान सौंपी गई है।
संभाग और मंत्रालय स्तर पर फेरबदल
कृष्ण गोपाल तिवारी (2008): नर्मदापुरम कमिश्नर से अब सामाजिक न्याय विभाग के आयुक्त होंगे.
शिल्पा गुप्ता (2008): लोक शिक्षण आयुक्त से अब गृह विभाग की सचिव होंगी.
अभिषेक सिंह (2009): गृह विभाग से अब आयुक्त, लोक शिक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगे.
श्रीकांत बनोठ (2009): अब नर्मदापुरम संभाग के नए कमिश्नर होंगे.
एसीएस की तर्ज पर डीजी, एडीजी बने संभाग प्रभारी:वरुण कपूर भोपाल, उपेंद्र जैन उज्जैन, पंकज श्रीवास्तव जबलपुर संभाग प्रभारी
राज्य सरकार ने अपर मुख्य सचिवों की तर्ज पर स्पेशल डीजी और एडीजी स्तर के अधिकारियों को संंभागीय स्तर पर कानून व्यवस्था की समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी है। यह अधिकारी रेंज स्तर पर पदस्थ आईजी के अलावा संभागों की कानून व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
डीजी वरुण कपूर को भोपाल, उपेंद्र जैन को उज्जैन तथा स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव को जबलपुर संभाग का प्रभारी बनाया गया है। यह व्यवस्था प्रदेश में यूसीसी लागू करने के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के फैसले के बाद प्रभावी की गई है।
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2013 बैच के IAS प्रियंक मिश्रा को धार कलेक्टर से अब भोपाल के नए कलेक्टर बनाया गया है. वहीं, कौशलेंद्र विक्रम सिंह (2010) निवर्तमान भोपाल कलेक्टर को अब मुख्यमंत्री का सचिव नियुक्त किया गया है. साथ ही उन्हें नगर और ग्राम निवेश का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
इनको मिली नई जिम्मेदारी
भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को मुख्यमंत्री का सचिव बनाया गया है। वहीं धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा अब भोपाल के नए कलेक्टर होंगे। नर्मदापुरम की कलेक्टर सोनिया मीणा को वित्त विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। वहीं मंडला के कलेक्टर रहे सोमेश मिश्रा नर्मदापुरम के नए कलेक्टर होंगे।
तबादलों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच गुरुवार को लंबी बैठक हुई। इसके बाद सूची को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने इस अहम बैठक के लिए पूरा दिन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में रिजर्व रखा था। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने तबादलों को अंतिम रूप देते हुए आदेश जारी कर दिए।
दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में शुरू कराई गई SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया के बाद ही इन तबादलों की तैयारी शुरू हो गई थी। योजना के अनुसार 22 फरवरी के बाद तबादले किए जाने थे, लेकिन त्योहारों और बजट सत्र के चलते यह फैसला लगातार टलता रहा।
14 अफसरों में 9 महिलाएं शामिल
14 आईएएस अफसरों में 9 महिलाएं हैं। इनमें शिल्पा गुप्ता, प्रतिभा पाल, सोनिया मीणा, शीतला पटले, नेहा मीना, रानी बाटड, राखी सहाय, शीला दाहिमा और बिदिशा मुखर्जी का नाम शामिल हैं। इनमें से 5 को कलेक्टर पद पर पदस्थापना मिली है। इनमें प्रतिभा पाल और नेहा मीना पहले से ही अन्य जिलों में कलेक्टर थीं, जबकि राखी सहाय, शीला दाहिमा और बिदिशा मुखर्जी को अन्य पदों से हटाकर पहली बार जिले की कमान सौंपी गई है।
पहली बार जिले की कमान
राखी सहाय – कलेक्टर, उमरिया
शीला दाहिमा – कलेक्टर, श्योपुर
बिदिशा मुखर्जी – कलेक्टर, मैहर
पहले से कलेक्टर, अब नई जिले की जिम्मेदारी
प्रतिभा पाल – कलेक्टर, सागर।
नेहा मीना – कलेक्टर, सिवनी।
प्रतिभा दूसरी अफसर जिसे रीवा के बाद सागर कलेक्टर बनाया
प्रीति मैथिल के बाद प्रतिभा पाल ऐसी दूसरी आईएएस हैं जो रीवा जिले की कलेक्टर बनने के बाद सागर कलेक्टर बनी हैं। इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में प्रीति मैथिल को रीवा कलेक्टर के बाद सागर कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
तीन महिला अधिकारी को कलेक्टर बनाया, दो के जिले बदले, तीन को हटाया
तबादला सूची में महिला अधिकारियों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। इंदौर लोक सेवा आयोग की सचिव राखी सहाय को उमरिया कलेक्टर, सहकारिता विभाग की उप सचिव शीला दाहिमा को श्योपुर कलेक्टर और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की उप सचिव बिदिशा मुखर्जी को मैहर कलेक्टर बनाया गया है। इसके अलावा, नेहा मीना को झाबुआ से स्थानांतरित कर सिवनी कलेक्टर तथा प्रतिभा पाल को रीवा से सागर कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, नर्मदापुरम की कलेक्टर सोनिया मीना को हटा कर वित्त विभाग में अपर सचिव और सिवनी कलेक्टर शीतला पटले को लोक सेवा आयोग में सचिव बनाया गया है। मैहर कलेक्टर रानी बाटड़ को सहकारिता विभाग में उपसचिव बनाया है।
नर्मदापुरम संभाग के आयुक्त बदले
नर्मदापुरम संभाग के आयुक्त कृष्णगाेपाल तिवारी को हटा कर आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण बनाया गया है। उनकी जगह पर आयुक्त सह संचालक नगर तथा ग्राम निवेश श्रीकांत बनोठ को आयुक्त नर्मदापुरम संभाग बनाया गया है।
इनको जिले से हटाया
शिवपुरी जिले के कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी को नर्मदा घाटी विकास विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। वहीं, उमरिया कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन को विमानन विभाग का अपर सचिव बनाया गया। सागर कलेक्टर संदीप जी आर को विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सह श्रम आयुक्त इंदौर, दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर को मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव तथा पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन के संचालक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
इन अधिकारियों को भी फील्ड में भेजा
विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सह आयुक्त-सह संचालक संस्थागत वित्त तथा संचालक, बजट राजीव रंजन मीना को धार कलेक्टर, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग के उप सचिव प्रताप नारायण यादव को दमोह कलेक्टर, नर्मदा घाटी विकास विभाग तथा जल संसाधन के उप सचिव का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे राहुल नामदेव धोटे को मंडला कलेक्टर, आयुष्मान भारत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी योगेश तुकाराम भरसट को झाबुआ कलेक्टर, नगर पालिक निगम रीवा के आयुक्त डॉ.सौरभ संजय सोनवणे को बैतूल कलेक्टर बनाया गया है।
इन कलेक्टर के जिले बदले
श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा को शिवपुरी कलेक्टर, झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना को सिवनी कलेक्टर, मंडला कलेक्टर सोमेश मिश्रा को नर्मदापुरम कलेक्टर, धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को भोपाल कलेक्टर, बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को रीवा कलेक्टर, रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल को सागर कलेक्टर की कमान सौंपी गई है।
संभाग और मंत्रालय स्तर पर फेरबदल
कृष्ण गोपाल तिवारी (2008): नर्मदापुरम कमिश्नर से अब सामाजिक न्याय विभाग के आयुक्त होंगे.
शिल्पा गुप्ता (2008): लोक शिक्षण आयुक्त से अब गृह विभाग की सचिव होंगी.
अभिषेक सिंह (2009): गृह विभाग से अब आयुक्त, लोक शिक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगे.
श्रीकांत बनोठ (2009): अब नर्मदापुरम संभाग के नए कमिश्नर होंगे.
एसीएस की तर्ज पर डीजी, एडीजी बने संभाग प्रभारी:वरुण कपूर भोपाल, उपेंद्र जैन उज्जैन, पंकज श्रीवास्तव जबलपुर संभाग प्रभारी
राज्य सरकार ने अपर मुख्य सचिवों की तर्ज पर स्पेशल डीजी और एडीजी स्तर के अधिकारियों को संंभागीय स्तर पर कानून व्यवस्था की समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी है। यह अधिकारी रेंज स्तर पर पदस्थ आईजी के अलावा संभागों की कानून व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
डीजी वरुण कपूर को भोपाल, उपेंद्र जैन को उज्जैन तथा स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव को जबलपुर संभाग का प्रभारी बनाया गया है। यह व्यवस्था प्रदेश में यूसीसी लागू करने के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के फैसले के बाद प्रभावी की गई है।
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देश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ईडब्ल्यूएस पात्रता की शर्तों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के सनावद की रहने वाली और केरल कैडर की 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी निमिषी त्रिपाठी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट को लेकर जांच के दायरे में हैं। मामला इसलिए अहम हो गया है क्योंकि यदि जांच में सर्टिफिकेट उपयोग में तकनीकी त्रुटि पाई जाती है, तो उनकी सेवा में बदलाव तक हो सकता है।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
निमिषी त्रिपाठी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा 2023 में 368वीं रैंक हासिल की थी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत उन्हें आईपीएस सेवा मिली। अब नियुक्ति के बाद उनके ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने जांच शुरू कर दी। फिलहाल मध्यप्रदेश का गृह विभाग इस पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है। इस मामले में खरगोन कलेक्टर ने जिले से जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है।
केंद्र और राज्य के नियमों में फर्क बना वजह
इस मामले की जड़ में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के नियमों में अंतर बताया जा रहा है। केंद्र सरकार के नियम के अनुसार 1000 वर्ग फीट या उससे अधिक के प्लॉट वाले परिवार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में नहीं आते, जबकि मध्य प्रदेश के नियम के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट तक, नगर पालिका क्षेत्र में 1200 वर्ग फीट तक और नगर पंचायत क्षेत्र में 1000 वर्ग फीट तक पात्रता का नियम है। यही अंतर अब विवाद का कारण बन गया है।
कहां उलझा मामला?
जानकारी के मुताबिक, निमिषी त्रिपाठी का परिवार नगर पालिका क्षेत्र में रहता है और उनकी मां के नाम करीब 1000 वर्ग फीट का प्लॉट है, जो राज्य के नियमों के अनुसार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आता है। लेकिन केंद्रीय सेवाओं के लिए आवेदन करते समय केंद्र सरकार के निर्धारित प्रारूप का प्रमाण पत्र जरूरी होता है, यहीं से पूरा विवाद खड़ा हुआ। मामले में जांच एजेंसियां दो मुख्य पहलुओं पर फोकस कर रही हैं। क्या प्रमाण पत्र फर्जी है? क्या गलत प्रारूप का उपयोग किया गया? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रमाण पत्र वैध तरीके से जारी हुआ है, लेकिन इसके उपयोग को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि ईडब्ल्यूएस श्रेणी अमान्य पाई जाती है, तो नौकरी समाप्त होने की संभावना कम है। हालांकि, सेवा में बदलाव संभव है। ऐसी स्थिति में उन्हें उनकी रैंक के अनुसार अन्य सेवा, जैसे इंडियन रेवेन्यू सर्विस में भेजा जा सकता है।
देश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ईडब्ल्यूएस पात्रता की शर्तों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के सनावद की रहने वाली और केरल कैडर की 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी निमिषी त्रिपाठी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट को लेकर जांच के दायरे में हैं। मामला इसलिए अहम हो गया है क्योंकि यदि जांच में सर्टिफिकेट उपयोग में तकनीकी त्रुटि पाई जाती है, तो उनकी सेवा में बदलाव तक हो सकता है।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
निमिषी त्रिपाठी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा 2023 में 368वीं रैंक हासिल की थी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत उन्हें आईपीएस सेवा मिली। अब नियुक्ति के बाद उनके ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने जांच शुरू कर दी। फिलहाल मध्यप्रदेश का गृह विभाग इस पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है। इस मामले में खरगोन कलेक्टर ने जिले से जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है।
केंद्र और राज्य के नियमों में फर्क बना वजह
इस मामले की जड़ में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के नियमों में अंतर बताया जा रहा है। केंद्र सरकार के नियम के अनुसार 1000 वर्ग फीट या उससे अधिक के प्लॉट वाले परिवार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में नहीं आते, जबकि मध्य प्रदेश के नियम के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट तक, नगर पालिका क्षेत्र में 1200 वर्ग फीट तक और नगर पंचायत क्षेत्र में 1000 वर्ग फीट तक पात्रता का नियम है। यही अंतर अब विवाद का कारण बन गया है।
कहां उलझा मामला?
जानकारी के मुताबिक, निमिषी त्रिपाठी का परिवार नगर पालिका क्षेत्र में रहता है और उनकी मां के नाम करीब 1000 वर्ग फीट का प्लॉट है, जो राज्य के नियमों के अनुसार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आता है। लेकिन केंद्रीय सेवाओं के लिए आवेदन करते समय केंद्र सरकार के निर्धारित प्रारूप का प्रमाण पत्र जरूरी होता है, यहीं से पूरा विवाद खड़ा हुआ। मामले में जांच एजेंसियां दो मुख्य पहलुओं पर फोकस कर रही हैं। क्या प्रमाण पत्र फर्जी है? क्या गलत प्रारूप का उपयोग किया गया? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रमाण पत्र वैध तरीके से जारी हुआ है, लेकिन इसके उपयोग को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि ईडब्ल्यूएस श्रेणी अमान्य पाई जाती है, तो नौकरी समाप्त होने की संभावना कम है। हालांकि, सेवा में बदलाव संभव है। ऐसी स्थिति में उन्हें उनकी रैंक के अनुसार अन्य सेवा, जैसे इंडियन रेवेन्यू सर्विस में भेजा जा सकता है।
प्रस्तावित सूची में करीब 20 जिलों में नए एसपी की पदस्थापना हो सकती है। जिन जिलों में बदलाव की संभावना है। इनकी सूची नीचे है…
इन जिलों के एसपी बदले जा सकते हैं
शाजापुर से यशपाल सिंह राजपूत, शिवपुरी से अमन सिंह राठौर,डिंडौरी से वाहिनी सिंह, मंडला से रजत सकलेचा, छतरपुर से अगम जैन, बुरहानपुर से देवेंद्र कुमार पाटीदार, निवाड़ी से राय सिंह नरवरिया, नीमच से अंकित जायसवाल, दमोह से श्रुतकीर्ति सोमवंशी, सिवनी से सुनील कुमार मेहता, आगर मालवा से विनोद कुमार सिंह, ग्वालियर से धर्मवीर सिंह, उज्जैन से प्रदीप शर्मा, जबलपुर से संपत उपाध्याय के नाम शामिल हैं।
कहा जा रहा है कि गृह विभाग इसा दिशा में तैयारी कर चुका है और कभी भी आदेश जारी हो सकते हैं। तबादला सूची में सबसे ज्यादा फायदा 2020 बैच के पांच आईपीएस अफसरों को होगा, जिन्हें जिलों में एसपी पद की कमान सौंपी जाएगी। क्योंकि अब तक 2019 बैच के आईपीएस भी जिलों में एसपी पद पर आ चुके हैं। इसके अलावा कोर्ट के आदेश से प्रमोटी आईपीएस बने अधिकारी भी जिले के एसपी बन सकते हैं।
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