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छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और निलंबित आईएएस अधिकारी सौम्या चौरसिया से जुड़ा एक कथित AI जनित आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कांग्रेस ने इसे गंभीर साजिश और चरित्र हनन का मामला बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। दुर्ग, भिलाई और ग्रामीण कांग्रेस नेताओं ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है। बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो इंस्टाग्राम पर एक सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया, जिसमें भूपेश बघेल और सौम्या चौरसिया को कथित रूप से निजी संबंधों में दिखाया गया है। वीडियो में दोनों को बाइक पर घूमते, साथ समय बिताते और धूम्रपान करते हुए दर्शाया गया है।
कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरा वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य पूर्व मुख्यमंत्री की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना है। गौरतलब है कि भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान सौम्या चौरसिया उनकी सचिव रह चुकी हैं। इसी वजह से इस वीडियो ने राजनीतिक हलकों में और अधिक चर्चा पैदा कर दी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की छवि खराब करने का प्रयास नहीं, बल्कि राजनीतिक षड्यंत्र के तहत विपक्ष को बदनाम करने की सुनियोजित कोशिश है।
दुर्ग जिला कांग्रेस, भिलाई कांग्रेस और ग्रामीण कांग्रेस के पदाधिकारियों ने पुलिस प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि जब भाजपा से जुड़े लोग शिकायत करते हैं तो तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन कांग्रेस नेताओं के मामले में प्रशासन चुप्पी साध लेता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि दो दिनों के भीतर FIR दर्ज नहीं की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीण दुर्ग कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह की अश्लील और भ्रामक सामग्री लगातार फैलाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फर्जी कंटेंट के जरिए कांग्रेस नेताओं की छवि खराब करने में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि बिना किसी प्रमाण के किसी व्यक्ति के खिलाफ इस तरह का वीडियो जारी करना न केवल अनैतिक है, बल्कि उसके परिवार और सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।
पुलिस अधीक्षक ने मामले में जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि कांग्रेस कार्यकर्ता इस बार केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं दिख रहे। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह मामला सड़क से लेकर सदन तक गूंजेगा।
AI तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग ने अब राजनीति को भी अपनी चपेट में ले लिया है। सवाल केवल एक वीडियो का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादा, व्यक्तिगत सम्मान और तकनीक के जिम्मेदार उपयोग का है। आने वाले दिनों में यह विवाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।
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मप्र के 9 आईएएस अफसरों ने कलेक्टर और अपर कलेक्टर रहते हुए आदिवासियों की अरबों रुपए की करीब 1500 एकड़ जमीन गैर आदिवासियों को बेचे जाने की अनुमति दी थी। इंदौर जिले में लगभग 500 एकड़ आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी गई। बड़े मामलों में ये अनुमतियां इंदौर में कलेक्टर रहे 6 आईएएस ने दी। इनमें 28 केस में तो सीधे कलेक्टरों ने अनुमति दी, जबकि 72 में अपर कलेक्टर ने दीं। यह जानकारी गुरुवार को विधानसभा में कांग्रेस विधायक बाला बच्चन के सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने दी है। खास बात यह है कि खंडवा जिले में सबसे ज्यादा 288.631 हैक्टेयर जमीन गैर आदिवासियों को बेचे जाने की अनुमति 2009 से 2023 के बीच कलेक्टर रहते दी गई, उनके नाम नहीं दिए हैं।
बड़वानी में 4, खरगौन में 11 और धार में 143 प्रकरणों में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी गई, लेकिन किन कलेक्टरों ने अनुमति दीं, यह नहीं बताया है।
इन तत्कालीन कलेक्टर, अपर कलेक्टरों ने दी परमिशन… राकेश श्रीवास्तव(9.94 हैक्टे.), राघवेंद्र सिंह (2.25 हैक्टे.), पी नरहरि (6.20 हैक्टे.), इलैया राजा टी (1 हैक्टे.), निशांत वरवड़े (2.5 हैक्टे.), आनंद शर्मा (1.25 हैक्टे.), रवींद्र सिंह (1.92 हैक्टे.),आशुतोष अवस्थी (192 हैक्टे.) और जेपी आइरिन (4 हैक्टे.)।
]]>मप्र के 9 आईएएस अफसरों ने कलेक्टर और अपर कलेक्टर रहते हुए आदिवासियों की अरबों रुपए की करीब 1500 एकड़ जमीन गैर आदिवासियों को बेचे जाने की अनुमति दी थी। इंदौर जिले में लगभग 500 एकड़ आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी गई। बड़े मामलों में ये अनुमतियां इंदौर में कलेक्टर रहे 6 आईएएस ने दी। इनमें 28 केस में तो सीधे कलेक्टरों ने अनुमति दी, जबकि 72 में अपर कलेक्टर ने दीं। यह जानकारी गुरुवार को विधानसभा में कांग्रेस विधायक बाला बच्चन के सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने दी है। खास बात यह है कि खंडवा जिले में सबसे ज्यादा 288.631 हैक्टेयर जमीन गैर आदिवासियों को बेचे जाने की अनुमति 2009 से 2023 के बीच कलेक्टर रहते दी गई, उनके नाम नहीं दिए हैं।
बड़वानी में 4, खरगौन में 11 और धार में 143 प्रकरणों में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी गई, लेकिन किन कलेक्टरों ने अनुमति दीं, यह नहीं बताया है।
इन तत्कालीन कलेक्टर, अपर कलेक्टरों ने दी परमिशन… राकेश श्रीवास्तव(9.94 हैक्टे.), राघवेंद्र सिंह (2.25 हैक्टे.), पी नरहरि (6.20 हैक्टे.), इलैया राजा टी (1 हैक्टे.), निशांत वरवड़े (2.5 हैक्टे.), आनंद शर्मा (1.25 हैक्टे.), रवींद्र सिंह (1.92 हैक्टे.),आशुतोष अवस्थी (192 हैक्टे.) और जेपी आइरिन (4 हैक्टे.)।
]]>पंजाब सरकार द्वारा अधिकारियों के तबादलों का दौर जारी है। इसी बीच एक IAS अधिकारी का ट्रांसफर होने की खबर मिली है। जारी हुए सूची के मुताबिक, तरनतारन के डिप्टी कमिश्नर परमवीर सिंह की जगह पर उक्त IAS अधिकारी राहुल को जिले का नया DC लगाया गया है। आपको बता दें कि 1 अक्टूबर 2024: पंजाब सरकार ने तरनतारन के डिप्टी कमिश्नर गुलप्रीत सिंह औलख का तबादला करके उनकी जगह IAS अधिकारी परमवीर सिंह को नियुक्त किया था।
पंजाब डैस्क : पंजाब सरकार की तरफ से अधिकारियों के तबादलों का दौर जारी है, जिसके तहत आज 2 आई.पी.एस. अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया है। अतः जिन दो आई.पी.एस. अधिकारियों का तबादला हुआ है, उनमें आई.पी.एस. गौरव तूरा व अभिमन्यु राणा के नाम शामिल हैं। इन अधिकारियों को अब कहां की जिम्मेदारी दी गई हैं, इस संबंधी ब्यूरो आप लिस्ट में पढ़ सकते हैं।
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