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आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज के बोझ से जूझ रहे पाकिस्तान को आईएमएफ यानी इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड से बड़ी राहत मिली है. पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने बुधवार को जानकारी दी कि देश को IMF से कुल 1.3 अरब डॉलर की फंडिंग मिल गई है. यह रकम दो अलग-अलग वित्तीय कार्यक्रमों के तहत जारी की गई है।
पाकिस्तान के स्टेट बैंक के मुताबिक, IMF ने एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी यानी EFF के तहत 1.1 अरब डॉलर और रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी यानी RSF के तहत करीब 22 करोड़ डॉलर जारी किए हैं. यह राशि 12 मई को पाकिस्तान को ट्रांसफर की गई।
दरअसल, IMF ने सितंबर 2024 में पाकिस्तान के लिए 37 महीनों की अवधि वाला 7 अरब डॉलर का EFF पैकेज मंजूर किया था. इसके अलावा जलवायु और पर्यावरण से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए RSF के तहत 1.4 अरब डॉलर की अतिरिक्त मदद देने का भी फैसला किया गया था।
पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि IMF के एग्जीक्यूटिव बोर्ड ने 8 मई को हुई बैठक में EFF की तीसरी समीक्षा पूरी की और पाकिस्तान के लिए 76 करोड़ स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स यानी SDR जारी करने को मंजूरी दी. साथ ही RSF के तहत दूसरी किस्त के रूप में 15.4 करोड़ SDR भी मंजूर किए गए।
इन दोनों रकम को मिलाकर पाकिस्तान को कुल 91.4 करोड़ SDR मिले हैं, जिसकी कीमत करीब 1.3 अरब डॉलर बताई जा रही है. स्टेट बैंक ने कहा कि इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी होगी और 15 मई को खत्म होने वाले सप्ताह के रिजर्व आंकड़ों में इसका असर दिखाई देगा।
पिछले हफ्ते भी IMF ने पाकिस्तान के लिए करीब 1 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता को मंजूरी दी थी. अब तक पाकिस्तान IMF से कुल 8.4 अरब डॉलर के दो बड़े पैकेजों में से लगभग 4.5 अरब डॉलर हासिल कर चुका है।
IMF की यह मंजूरी ऐसे समय आई है, जब पाकिस्तान सरकार ने वित्तीय और मॉनेटरी गोल पर कुछ हद तक बेहतर प्रदर्शन दिखाया है. हालांकि देश की अर्थव्यवस्था अब भी भारी दबाव में है और विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर अलग-अलग राय है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष के बाकी महीनों में हालात कितने सुधर पाएंगे।
फिलहाल पाकिस्तान के लिए यह फंडिंग बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि देश लंबे समय से विदेशी मुद्रा संकट, महंगाई और कमजोर आर्थिक वृद्धि जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।
]]>मिडिल ईस्ट में गहराए इस तनाव को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने बड़ी चेतावनी दी है. आईएमएफ चीफ ने कहा है कि अगर ये युद्ध 2027 तक चला, तो इसके सबसे बुरे परिणाम देखने को मिलेंगे।
अनुमान से ज्यादा बुरे परिणाम
आईएमएफ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि दुनिया में महंगाई पहले से ही बढ़ रही है. इस बीच मिडिल ईस्ट युद्ध एक और बड़ा संकट बनकर सामने आया है. IMF Chief क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच ये युद्ध 2027 तक खिंचता है और इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनुमान से कहीं ज्यादा बुरे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
जॉर्जीवा ने आगे कहा कि US-Iran War को लेकर अब तक जो पूर्वानुमान जताए गए थे, वो धरे रहते जा रहे हैं. इसके साथ ही इनमें जाहिर किए गए ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ में गिरानट के बाद इसके 3.1 फीसदी और महंगाई के 4.4 फीसदी रहने के अनुमान पीछे छूटते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हर बीतते दिन के साथ ये अनुमान बेकार होते जा रहे हैं।
IMF Chief के मुताबिक, युद्ध का जारी रहना, तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे अधिक पर बने रहना और इसके चलते महंगाई के बढ़ते दबाव का साफ मतलब है कि हालात आगे खराब होने वाले हैं और आईएमएफ का आउटलुक अब आधार बन चुका है. इसमें कहा गया है कि 2026 में वैश्विक ग्रोथ 2.5 फीसदी तक गिर सकती है, जबकि महंगाई का बम फूट सकता है और ये 5.4 फीसदी पर पहुंच सकती है।
Hormuz बंद होने से बिगड़ेंगे हालात
शेवरॉन (Chevron) के चेयरमैन और सीईओ माइक विर्थ ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण दुनिया भर में तेल आपूर्ति में भौतिक कमी दिखाई देने लगेगी, जिसके माध्यम से युद्ध से पहले वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का 20% हिस्सा गुजरता था. विर्थ के मुताबिक, लंबे समय तक युद्ध चला तो दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं सिकुड़ने लगेंगी, सबसे पहले एशिया में बुरा असर देखने को मिलेगा।
IMF की हालात पर पैनी नजर
क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि IMF इस संघर्ष के सप्लाई चेन पर पड़ने वाले धीमे असर पर बारीकी से नजर रख रहा है. इसके असर को देखें, तो खाद पहले से ही 30% से 40% महंगी हो चुकी है, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम 3% से 6% तक बढ़ सकती हैं. सिर्फ खाने-पीने की चीजें ही नहीं, बल्कि दूसरे बिजनेस भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, 'मैं जिस बात पर जोर देना चाहती हूं, वह यह है कि यह वाकई बहुत गंभीर मामला बनता जा रहा है. कई पॉलिसी मेकर्स अभी भी ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, मानो यह संकट कुछ ही महीनों में खत्म हो जाएगा. वे उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिससे तेल की डिमांड लगातार हाई पर बनी हुई है।
]]>वैश्विक तनाव और ईरान-अमेरिका युद्ध जैसे हालात के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय संस्था IMF (International Monetary Fund) ने भारत की ग्रोथ को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है, जो यह संकेत देता है कि देश की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। खास बात यह है कि जहां एक तरफ वेस्ट एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्ष के कारण दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव है, वहीं भारत इस माहौल में भी बेहतर प्रदर्शन करता नजर आ रहा है। आइए इस रिपोर्ट को जरा विस्तार से समझते हैं।
IMF (International Monetary Fund) के अनुसार, भारत की GDP ग्रोथ FY26 में 7.6% रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से 1% ज्यादा है। यह बढ़ोतरी इसलिए भी खास है, क्योंकि यह दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। वहीं IMF (International Monetary Fund) ने FY27 और FY28 के लिए ग्रोथ अनुमान 6.5% रखा है, जो स्थिर और संतुलित विकास की ओर इशारा करता है।
इस सुधार के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण भारत की मजबूत घरेलू मांग और पिछले साल का बेहतर आर्थिक प्रदर्शन है, जिसका असर आगे भी दिख रहा है। इसके अलावा अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर टैरिफ में कटौती से भी निर्यात को राहत मिली है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को सपोर्ट मिला है।
महंगाई यानी (Inflation) के मोर्चे पर भी अच्छी खबर है। IMF (International Monetary Fund) का अनुमान है कि FY27 में महंगाई 4.7% और FY28 में 4% तक आ सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में आम लोगों पर महंगाई का दबाव धीरे-धीरे कम हो सकता है।
हालांकि, वैश्विक स्तर पर स्थिति इतनी मजबूत नहीं दिख रही है। IMF (International Monetary Fund) ने दुनिया की कुल ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है। वैश्विक ग्रोथ 2026 में 3.1% और 2027 में 3.2% रहने का अनुमान है, जो पिछले औसत से कम है। इसका मुख्य कारण बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, महंगे कमोडिटी दाम और वैश्विक व्यापार में गिरावट है।
IMF ने चेतावनी भी दी है कि अगर मध्य-पूर्व का संकट और बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर असर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक ग्रोथ पर दबाव आ सकता है। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। IMF का यह अपडेट न सिर्फ निवेशकों बल्कि आम लोगों के लिए भी भरोसा बढ़ाने वाला है कि आने वाले समय में भारत आर्थिक मोर्चे पर मजबूत बना रह सकता है।
]]>डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बड़ी चेतावनी (IMF Warning On Tariff) दी है. आईएमएफ की चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने इसे ग्लोबल ट्रेड को नुकसान पहुंचाने वाला कदम करार दिया है और कहा है कि ये उभरते बाजारों की ग्रोथ को धीमा कर सकता है. इसे साथ ही उन्होंने एक बार फिर इंडियन इकोनॉमी की तारीफ करते हुए कहा कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इसका खुला रहना दुनिया के लिए जरूरी है.
बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का हथियार बना टैरिफ
आईएमएफ चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने टैरिफ से होने वाले संभावित नुकसानों के बारे में अलर्ट करते हुए कहा कि वर्तमान में दुनिया की कुछ कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाएं संरक्षणवादी उपायों की ओर मुड़ गई हैं और टैरिफ को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं. वहीं ज्यादातक देश अभी भी खुले और निष्पक्ष व्यापार का समर्थन करना जारी रखे हुए हैं, क्योंकि उनका मानना है कि ग्लोबल ग्रोथ के लिए यही सबसे महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि टैरिफ के बढ़ते प्रयोग से वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंच सकता है.
जॉर्जीवा ने अमेरिकी टैरिफ को लेकर कहा कि, 'दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने साझेदारों के साथ अपने संबंधों में टैरिफ को एक साधन के रूप में इस्तेमाल करना चुना है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि बाकी दुनिया ने इसका अनुसरण नहीं किया है, कम से कम अभी तक तो नहीं.'
191 देशों में से 3 टैरिफ के पक्ष में
आईएमएफ चीफ ने आगे बताया कि IMF के 191 सदस्य देशों में से महज तीन देशों अमेरिका, चीन और कुछ हद तक कनाडा ने टैरिफ लगाने के लिए ज्यादा जोरदार कदम उठाए हैं. वहीं बाकी बचे 188 देशों ने कहा है, 'शुक्रिया, लेकिन नहीं.' इन सभी देशों ने मोस्ट फेवर्ड नेशन के नियमों के तहत ही व्यापार जारी रखने का विकल्प चुना है. क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से अपील की है कि वे एक खुली, निष्पक्ष और नियम-आधारित व्यापार प्रणाली की दिशा में काम करें.
भारत पर IMF को भरोसा
वैश्विक संगठन आईएमएफ की निदेशक ने भारत पर फिर से भरोसा जताते हुए कहा है कि Indian Economy दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और अपने सुधार प्रयासों के कारण ग्लोबल ग्रोथ में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि भारत एक ओपन इकोनॉमी है और खुला, प्रतिस्पर्धी और सुधार-संचालित बने रहना ही आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका है. गौरतलब है कि IMF ने हाल ही में FY26 के लिए भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाकर 6.6% किया है. इसके साथ ही भारत को दुनिया के विकास के लिए ग्रोथ इंजन करार दिया था.
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर के कैलेंडर वर्ष 2025 में 6.7 प्रतिशत और 2026 में 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा कि देश की स्थिर वृद्धि सुधारों की गति से प्रेरित है जिससे मजबूत उपभोग वृद्धि को समर्थन और सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा मिल रहा है। आईएमएफ ने मंगलवार को अपना अद्यतन विश्व आर्थिक परिदृश्य (डब्ल्यूईओ) जारी किया। इसमें कहा गया, भारत में 2025 और 2026 में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर रहने का अनुमान है।
दोनों ही आंकड़ों को थोड़ा बढ़ाया गया है जो अप्रैल के संदर्भ पूर्वानुमान की तुलना में अधिक ‘‘सौम्य बाह्य वातावरण'' को दर्शाता है। आईएमएफ ने विश्व आर्थिक परिदृश्य में दी अतिरिक्त जानकारी में कहा कि भारत के लिए आंकड़े और अनुमान वित्त वर्ष के आधार पर प्रस्तुत किए जाते हैं। कैलेंडर वर्ष के आधार पर भारत के वृद्धि अनुमान 2025 के लिए 6.7 प्रतिशत और 2026 के लिए 6.4 प्रतिशत हैं। आईएमएफ अनुसंधान विभाग की प्रमुख डेनिज इगन ने प्रेस वार्ता में भारत पर पूछे गए एक प्रश्न पर कहा, ‘‘ देश में वास्तव में काफी स्थिर वृद्धि हुई है।'' भारत ने 2024 में 6.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि की थी। इसके 2025 और 2026 में 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।
आईएमएफ ने कहा कि उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में 2025 में वृद्धि दर 4.1 प्रतिशत और 2026 में 4.0 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। अप्रैल में किए गए पूर्वानुमान के सापेक्ष 2025 में चीन की वृद्धि दर को 0.8 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया गया है। यह संशोधन 2025 की पहली छमाही में अपेक्षा से अधिक मजबूत गतिविधि और अमेरिका-चीन शुल्कों में उल्लेखनीय कमी को दर्शाता है। आईएमएफ ने कहा कि 2026 में वृद्धि दर 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो कि कम प्रभावी शुल्क दरों को दर्शाता है। आईएमएफ ने कहा कि 2025 के लिए वैश्विक वृद्धि दर तीन प्रतिशत और 2026 में 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर के कैलेंडर वर्ष 2025 में 6.7 प्रतिशत और 2026 में 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा कि देश की स्थिर वृद्धि सुधारों की गति से प्रेरित है जिससे मजबूत उपभोग वृद्धि को समर्थन और सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा मिल रहा है। आईएमएफ ने मंगलवार को अपना अद्यतन विश्व आर्थिक परिदृश्य (डब्ल्यूईओ) जारी किया। इसमें कहा गया, भारत में 2025 और 2026 में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर रहने का अनुमान है।
दोनों ही आंकड़ों को थोड़ा बढ़ाया गया है जो अप्रैल के संदर्भ पूर्वानुमान की तुलना में अधिक ‘‘सौम्य बाह्य वातावरण'' को दर्शाता है। आईएमएफ ने विश्व आर्थिक परिदृश्य में दी अतिरिक्त जानकारी में कहा कि भारत के लिए आंकड़े और अनुमान वित्त वर्ष के आधार पर प्रस्तुत किए जाते हैं। कैलेंडर वर्ष के आधार पर भारत के वृद्धि अनुमान 2025 के लिए 6.7 प्रतिशत और 2026 के लिए 6.4 प्रतिशत हैं। आईएमएफ अनुसंधान विभाग की प्रमुख डेनिज इगन ने प्रेस वार्ता में भारत पर पूछे गए एक प्रश्न पर कहा, ‘‘ देश में वास्तव में काफी स्थिर वृद्धि हुई है।'' भारत ने 2024 में 6.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि की थी। इसके 2025 और 2026 में 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।
आईएमएफ ने कहा कि उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में 2025 में वृद्धि दर 4.1 प्रतिशत और 2026 में 4.0 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। अप्रैल में किए गए पूर्वानुमान के सापेक्ष 2025 में चीन की वृद्धि दर को 0.8 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया गया है। यह संशोधन 2025 की पहली छमाही में अपेक्षा से अधिक मजबूत गतिविधि और अमेरिका-चीन शुल्कों में उल्लेखनीय कमी को दर्शाता है। आईएमएफ ने कहा कि 2026 में वृद्धि दर 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो कि कम प्रभावी शुल्क दरों को दर्शाता है। आईएमएफ ने कहा कि 2025 के लिए वैश्विक वृद्धि दर तीन प्रतिशत और 2026 में 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज प्रदान करने की घोषणा की है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय (पीएमओ) ने इसकी पुष्टि की। पीएमओ ने बताया कि आईएमएफ ने शुक्रवार (9 मई, 2025) को मौजूदा विस्तारित निधि सुविधा के तहत पाकिस्तान को तत्काल लगभग 1 अरब डॉलर की राशि देने की मंजूरी दे दी है।
PMO के बयान के अनुसार, "प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आईएमएफ द्वारा पाकिस्तान के लिए 1 अरब डॉलर की किस्त को मंजूरी देने और इसके खिलाफ भारत की मनमानी को विफल करने पर संतोष व्यक्त किया है।" बयान में कहा गया कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और देश विकास के पथ पर अग्रसर है।
भारत ने जताया कड़ा विरोध
भारत ने शुक्रवार को आईएमएफ के पाकिस्तान को 2.3 अरब अमेरिकी डॉलर का नया ऋण देने के प्रस्ताव का विरोध किया और कहा कि इस धन का दुरुपयोग राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए हो सकता है। भारत ने इस मुद्दे पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की महत्वपूर्ण बैठक में मतदान से दूरी बनाए रखी।
मतदान के परिणाम पाकिस्तान के पक्ष में रहे और उसे आईएमएफ से ऋण प्राप्त हो गया। भारत ने एक जिम्मेदार सदस्य देश के रूप में पाकिस्तान के खराब पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए आईएमएफ कार्यक्रमों पर चिंता व्यक्त की। वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान को मिलने वाली इस धनराशि का उपयोग राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए किया जा सकता है।
'आतंकी संगठनों को जा रहा IMF का पैसा'
भारत ने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय सहायता अप्रत्यक्ष रूप से उसकी खुफिया एजेंसियों और आतंकी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद की मदद करती है, जो भारत पर हमलों को अंजाम देते रहे हैं.
IMF पर निर्भर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था
बता दें कि कंगाली से जूझ रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था IMF सहायता पर बुरी तरह निर्भर है. भारत के इस मतदान से दूरी बनाने को IMF और अन्य बहुपक्षीय वित्तीय संस्थाओं को यह संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है कि पाकिस्तान को बिना ठोस कदम उठाए वित्तीय मदद देना क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकता है.
कैसे सोचता है अंतर्राष्ट्रीय समुदाय…
जम्मू-कश्मीर के सीए उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि मुझे यकीन नहीं है कि "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय" कैसे सोचता है कि उपमहाद्वीप में मौजूदा तनाव कम हो जाएगा, जब आईएमएफ अनिवार्य रूप से पाकिस्तान को उन सभी आयुधों के लिए प्रतिपूर्ति करेगा, जिनका उपयोग वह पुंछ, राजौरी, उरी, तंगधार और कई अन्य स्थानों को तबाह करने के लिए कर रहा है।
वैश्विक समुदाय के लिए खतरनाक संदेश- बोला भारत
गौरतलब है कि विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) ऋण कार्यक्रम की समीक्षा के लिए आईएमएफ बोर्ड की शुक्रवार को बैठक हुई, जिसमें भारत ने अपना विरोध दर्ज किया। इस बैठक में पाकिस्तान के लिए एक नए लचीलापन और स्थिरता सुविधा (आरएसएफ) ऋण कार्यक्रम (1.3 अरब डॉलर) पर भी चर्चा हुई।
भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले को बार-बार पुरस्कृत करने से वैश्विक समुदाय को एक खतरनाक संदेश जाता है। इससे वित्तपोषण करने वाली एजेंसियों और दाताओं की प्रतिष्ठा खतरे में पड़ती है तथा वैश्विक मूल्यों का उपहास होता है।
2 अरब डॉलर का कर्ज मांगा
पाकिस्तानी न्यूज बेवसाइट 'समा टीवी' के मुताबिक पाकिस्तान ने IMF से 2 अरब डॉलर का कर्ज मांगा था, जिसमें किश्त और क्लाइमेट फाइनेंसिंग के लिए 1 अरब डॉलर की मांग रखी गई थी. पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक क्लाइमेट फाइनेंसिंग के लिए 1 बिलियन डॉलर को किश्तों में दिया जाएगा.
इकोनॉमिक टारगेट को लेकर बातचीत
पाकिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ( IMF) के बीच जारी नीति स्तर की चर्चा पर IMF ने पाकिस्तान को रेवेन्यू जनरेशन को बढ़ाने और लागत में कटौती करने के लिए कहा है. दोनों के बीच इस बातचीत का फोकस जारी फाइनेंशियल ईयर के प्रदर्शन और अगले साल के आर्थिक लक्ष्यों पर है.
IMF और पाकिस्तान की बातचीत
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक IMF अधिकारियों को सरकार के उन उपायों के बारे में जानकारी दी गई है जो सार्वजनिक खजाने पर बोझ को कम करने के लिए हैं, जिनमें अगले वित्त वर्ष के लिए टैक्स रेवेन्यू टारगेट को 15,000 अरब रुपये से ज्यादा रखने का प्रस्ताव शामिल है. वहीं टैक्स- टू- GDP का अनुपात 13 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है, जबकि नॉन टैक्स रेवेन्यू कलेक्शन 2,745 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.
]]>वहीं, जर्मनी की अर्थव्यवस्था कुछ कठिनाइयों से जूझने के बावजूद 4,591 बिलियन डॉलर के अनुमान के साथ तीसरे स्थान पर रहेगी। यह संकेत देता है कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में स्थिरता बनाए रखने में जर्मनी ने उल्लेखनीय काम किया है। आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम 3,685 बिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ छठे स्थान पर बना रहेगा, जबकि फ्रांस 3,223 बिलियन डॉलर के साथ सातवें स्थान पर रहेगा। ब्राज़ील और इटली के बीच भी मामूली अंतर है, जिसके चलते ब्राज़ील आठवें स्थान पर और इटली नौवें स्थान पर आ जाएगा। ब्राजील के जीडीपी का अनुमान 2,438 बिलियन डॉलर और इटली का अनुमान 2,390 बिलियन डॉलर है। कनाडा 2,361 बिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ दसवें स्थान पर रहेगा।
भारत की जीडीपी अगले साल उत्पाद 4,340 बिलियन डॉलर पहुंचेगी
रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2025 में जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। अनुमान के मुताबिक, भारत का सकल घरेलू उत्पाद 4,340 बिलियन डॉलर पहुंच सकता है। भारत ने तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़कर पांचवें स्थान से चौथे स्थान पर छलांग लगाई है। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और सरकार द्वारा आर्थिक सुधारों और विभिन्न योजनाओं के परिणामस्वरूप आई है। जापान जो आर्थिक मंदी का सामना कर रहा है, 4,310 बिलियन डॉलर के अनुमानित जीडीपी के साथ पांचवें स्थान पर होगा।
भारत का भविष्य उज्जवल
आईएमएफ की रिपोर्ट बताती है कि आर्थिक अस्थिरता और वैश्विक बदलावों के बीच कई देशों ने अपनी स्थिति को बनाए रखने और सुधारने में सफलता प्राप्त की है। विशेष रूप से भारत की आर्थिक प्रगति से यह संकेत मिलता है कि यह देश निकट भविष्य में और भी ऊंचाइयों पर पहुंच सकता है। जबकि अमेरिका, चीन और जर्मनी जैसी अर्थव्यवस्थाएं अब भी स्थिरता बनाए हुए हैं।
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