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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनें अडियाला जेल के बाहर फिर से धरने पर बैठ गई हैं। तीनों को चेक पोस्ट पर रोका गया जिसके विरोध में उन्होंने धरना दिया। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को बताया कि पुलिस ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं को भी पीछे धकेल दिया, जो जेल की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे।
मंगलवार को जेल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए, इमरान खान की अलीमा खान ने इसे बेहद निराशाजनक रवैया करार दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के ऑर्डर के बावजूद परिवार के लोगों को पीटीआई संस्थापक से मिलने नहीं दिया गया। पीटीआई के आधिकारिक एक्स हैंडल पर अलीमा खान की एक वीडियो क्लिप अपलोड की गई है, जिसमें वह गुस्से और हताशा में कह रही हैं कि उन्हें यकीन है कि भाई को ईद में भी रिहा नहीं किया जाएगा। एक सवाल के जवाब में, अलीमा खान ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि उनके भाई को ईद से पहले रिहा कर दिया जाएगा।
पाकिस्तान के अनुसार, अलीमा ने उन खबरों को लेकर पूछे गए सवाल पर जवाब दिया जिसमें इमरान खान को ईद में रिहा किए जाने का दावा किया गया था। उन्होंने कहा, "वे उसे रिहा नहीं करना चाहते। आजकल जो दुनिया में हो रहा है उस पर ध्यान देंगे तो, और आपको पता चल जाएगा कि इमरान खान जेल में क्यों हैं? उनके साथ जो हो रहा है उसे तारीख (इतिहास) याद रखेगी।" इससे पहले फरवरी में, जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेताओं ने पाकिस्तान के चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था, जिसमें इमरान खान को कानूनी और मेडिकल मदद देने में कथित रुकावटों पर गंभीर चिंता जताई गई थी।
नेताओं ने चीफ जस्टिस याह्या अफरीदी को लिखे अपने खत में उनसे इस मामले में दखल देने की अपील की ताकि इस मामले में इंसाफ हो सके। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अफरीदी से यह भी अनुरोध किया कि वे इस मामले पर ध्यान दें और यह पक्का करें कि इमरान खान को कानून के मुताबिक निजी चिकित्सक, कानूनी सलाहकार और परिवार के लोगों से मिलने की इजाजत मिले।
पत्र में, पीटीआई नेताओं ने इमरान खान के इलाज की तुलना पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के 2019 में हुए मेडिकल ट्रीटमेंट से की। उन्होंने कहा कि तब की सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि नवाज शरीफ को लाहौर के सर्विसेज हॉस्पिटल ले जाया जाए और जब उनका प्लेटलेट काउंट कम था तो उन्हें सही मेडिकल केयर दी जाए। उन्होंने आगे कहा कि नवाज शरीफ के पर्सनल डॉक्टर मेडिकल बोर्ड की सभी मीटिंग में शामिल होते थे, उनका परिवार और वकील भी उनसे नियमित तौर पर मिलते थे।
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पाकिस्तान में सत्ता से हटने के बाद नेताओं के लिए जिंदगी आसान नहीं रही है। पूर्व पीएम इमरान खान 3 साल से ज्यादा वक्त से जेल में बंद हैं और उनके परिवार या समर्थकों को मिलने तक की परमिशन नहीं है। यही नहीं उनके निजी डॉक्टर और वकीलों तक को मिलने नहीं दिया जा रहा है। इस बीच मंगलवार को पाकिस्तान में उस वक्त हलचल मच गई, जब उनके समर्थकों को तड़के ही पता चला कि इमरान खान को रात दो बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें पाकिस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज लाया गया था। उनकी आंख में समस्या है और इलाज के लिए उन्हें लाया गया था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्हें तीन इंजेक्शन लगने हैं। यह दूसरा इंजेक्शन था। जानकारी मिल रही है कि उनकी दाईं आंख की रोशनी 15 फीसदी ही बची है।
अब तीसरा इंजेक्शन 24 मार्च को लगाया जाएगा। उन्हें रात 2 बजे अस्पताल ले जाने के वीडियो वायरल हो रहे हैं। इसी को लेकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता बैरिस्टर गोहर खान ने सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि मुझे रात को 2 बजे यह पता चला कि इमरान खान को लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह चोरी-छिपे आखिर कौन सा इलाज हो रहा है। गोहर खान ने कहा कि इमरान खान के इलाज की जानकारी उनके समर्थकों को मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका इलाज शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में होना चाहिए। उनका इलाज तभी हो, जब उनके निजी डॉक्टर मौजूद रहें। इसके अलावा परिवार के सदस्य भी मौके पर हों।
यह अस्पताल भी इस्लामाबाद में ही है। डॉक्टरों का कहना है कि इमरान खान की हालत स्थिर है। इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी उनकी निगरानी की गई और देखरेख में रखे जाने के बाद जब सब सामान्य दिखा तो उन्हें छोड़ा गया। इस संबंध में संसदीय कार्य मंत्री तारिक फजल चौधरी ने एक्स पर लिखा, 'यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इमरान खान को अस्पताल लाया गया था। इस दौरान कड़ी सुरक्षा रखी गई। इसके अलावा सभी कानूनी और मानवीय सहायता भी उन्हें दी गई।' मंत्री ने यह भी बताया कि डॉक्टरों का कहना है कि इमरान खान की नजर में सुधार हो रहा है। उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा बेहतर दिख रहा है।
हमें सरकार के किसी इलाज या रिपोर्ट पर भरोसा नहीं: इमरान की बहन
उन्हें इलाज के बाद अदियाला जेल में भी शिफ्ट कर दिया गया है। इस मामले में इमरान खान की बहन अलीमा ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, 'हम सरकार के इलाज या उनकी टेस्ट रिपोर्ट्स पर भरोसा नहीं करते।' हमें खबरों से पता चला कि इमरान खआन को आधी रात में अस्पताल लाया गया। अलीमा ने कहा कि कानून कहता है कि यदि किसी कैदी का कोई इलाज होता है तो परिवार को बताया जाता है। हमें इस संबंध में कोई जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि हमें सरकारी इलाज पर भरोसा नहीं है। अलीमा ने कहा कि डॉक्टरों को धमकियां दी गई हैं कि यदि उन्होंने कुछ भी लीक किया तो खैर नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार रिपोर्ट्स को पब्लिक भी करती है तो हमें उन पर भरोसा नहीं होगा।
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जल्द अस्पताल शिफ्ट किए जाने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक उनकी आंख के इलाज के लिए 21 फरवरी से 26 फरवरी के बीच आइलिया इंजेक्शन की एक और डोज दी जानी है. उन्हें आंखों के इलाज के लिए रावलपिंडी के अस्पताल में भर्ती किया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक इस बार उन्हें रावलपिंडी के अल शिफा आई ट्रस्ट हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया जा सकता है.
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह अस्पताल में कितने दिन रहेंगे. अंतिम फैसला डॉक्टरों से सलाह-मशविरा करने के बाद लिया जाएगा. सूत्रों का यह भी कहना है कि इलाज के दौरान या उसके बाद इमरान खान को अपने कुछ करीबी सहयोगियों और जेल में बंद उनकी पत्नी बुशरा बीबी से मुलाकात की अनुमति मिल सकती है. सरकार व्यापक मेडिकल जांच कराने की भी योजना बना रही है. इनमें एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्स-रे, हृदय संबंधी जांच और पूरे शरीर के ब्लड टेस्ट जैसे प्रमुख परीक्षण शामिल हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि इन सभी टेस्ट के जरिए उनकी सेहत की विस्तृत और आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की जाएगी.
दुनियाभर में हो रही है इमरान के इलाज की मांग
इमरान खान को सरकार ने अकेले ही एक कोठरी में बंद कर रखा है, जहां न तो उनसे किसी को मिलने की इजाजत है और न ही वे वहां से निकल सकते हैं. उनसे मिलकर आए उनके वकील ने बताया था कि उनकी आंखों की रोशनी 85 फीसदी तक जा चुकी है और उन्हें दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो रही हैं. इसके अलावा उन्हें फ्रिज और टीवी जैसी बेसिक सुविधाएं भी नहीं दी गईं जबकि मच्छरों की वजह से वहां सोना तक मुश्किल हो रहा है. वकील ने मांग की थी कि उन्हें टीवी नहीं तो कम से कम किताबें ही दी जाएं, ताकि वे अपना समय बिता सकें. इमरान खान की ये हालत सामने आने के बाद पूरी दुनिया में उनके समर्थन में रैलियां हुईं और ये अपील की गई कि उनका इलाज हो. दुनिया में क्रिकेट जगत के 12 पूर्व कप्तानों ने मिलकर पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी भी लिखी कि इमरान खान को उचित इलाज दिया जाए.
खराब सेहत को बता रहे सियासी ड्रामा
वहीं पाकिस्तान के पंजाब की सूचना मंत्री अज्मा बुखारी ने इमरान खान की हालिया मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि उनकी सेहत और आंखों की रोशनी पूरी तरह ठीक है. उन्होंने बताया कि खान साहब को जेल में सभी जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं, जिनमें पौष्टिक भोजन और टहलने के लिए अलग स्थान भी शामिल है. अजमा बुखारी ने कहा कि मेडिकल जांच में किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की पुष्टि नहीं हुई है. उनके मुताबिक इमरान खान एक आंख से घड़ी की सुइयां तक साफ देख सकते हैं. उन्होंने इमरान खान पर निशाना साधते हुए इसे उनका राजनीतिक ड्रामा करार दिया.
]]>पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने आरोप लगाया कि इमरान को जेल से गुप्त रूप से अस्पताल में भेजा जा रहा है। पार्टी का दावा है कि इस कदम से उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और उनकी जान को खतरा पैदा हो सकता है।
इमरान खान की फैमिली को इस ट्रांसफर के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। पीटीआई ने मांग की है कि कोई भी मेडिकल जांच या इलाज उनके निजी डॉक्टरों की मौजूदगी में और कम से कम एक परिवार के सदस्य के साथ होना चाहिए। जेल नियमों के अनुसार भी परिवार और डॉक्टरों को पहले सूचित करना जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इमरान खान 73 वर्ष के हैं। वह अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। उन्हें लाहौर में उनके घर से गिरफ्तार किया गया था और भ्रष्टाचार के आरोपों में अदियाला जेल में रखा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेल में रहते हुए उनकी सेहत बिगड़ गई है, खासकर दाहिने आंख में लगभग 85 प्रतिशत विजन लॉस हो चुका है। परिवार और लीगल टीम का आरोप है कि जेल अथॉरिटीज ने उन्हें उचित मेडिकल केयर नहीं दिया, जिससे यह स्थिति बनी। जनवरी 2026 के अंत में उन्हें आंख की समस्या के लिए अस्पताल ले जाया गया था, जहां एक छोटी प्रक्रिया हुई, लेकिन फैमिली को पहले सूचित नहीं किया गया था।
पीटीआई ने लगाए गंभीर आरोप
पीटीआई ने बयान जारी कर गंभीर चिंता जताई है कि इमरान खान को बिना परिवार की जानकारी के अस्पताल शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है। पार्टी ने कहा, 'ऐसा कदम मौलिक मानवाधिकारों और कानूनी प्रावधानों का खुला उल्लंघन है।' उन्होंने इसे इमरान खान की सेहत और जान के साथ छेड़छाड़ करार दिया और इलाज में देरी को अमानवीय बताया। पार्टी ने तत्काल इलाज शुरू करने की मांग की है, बिना किसी समझौते के। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने भी विजन लॉस की रिपोर्ट्स पर ध्यान देते हुए मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है, ताकि उनकी आंखों की जांच हो सके।
इमरान खान की सेहत को लेकर गरमाई राजनीति
इस मुद्दे पर राजनीतिक विरोध बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को पाकिस्तान के विपक्षी गठबंधन ने संसद के पास धरना दिया और इमरान खान को तुरंत अल-शिफा अस्पताल में भर्ती करने की मांग की। प्रदर्शनकारी तब तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कह रहे हैं। सरकार की ओर से जानकारी मंत्री ने कहा कि इमरान खान को स्पेशलाइज्ड आंखों के इलाज के लिए ले जाया जा रहा है और स्पेकुलेशन से बचने की अपील की है। हालांकि, परिवार और पीटीआई का कहना है कि बिना उनकी सहमति के कोई कदम नहीं उठाया जाए। यह घटनाक्रम पाकिस्तान की राजनीति में तनाव को और बढ़ा रहा है।
लंबे समय से जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के हेल्थ अपडेट से पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है। पाक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खान की दाहिनी आंख की रोशनी 85 फीसदी खत्म हो चुकी है। उसमें अब सिर्फ 15 फीसदी को रोशनी बची है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इमरान खान की आंख की जांच के लिए एक स्पेशल मेडिकल टीम बनाने का आदेश दिया है। यह आदेश कोर्ट में पेश की गई एक रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें PTI फाउंडर ने दावा किया था कि उनकी दाहिनी आंख में “सिर्फ़ 15 फीसदी” रोशनी बची है।
SC ने यह भी निर्देश दिया कि इमरान को उनके बच्चों से बात करने की इजाज़त दी जाए। यह आदेश दिया गया कि आंखों की जांच और फोन कॉल दोनों 16 फरवरी (सोमवार) से पहले किए जाएं। SC का यह निर्देश तब आया जब पाकिस्तान के चीफ जस्टिस (CJP) याह्या अफरीदी की अगुवाई वाली और जस्टिस शाहिद बिलाल हसन सहित दो अन्य जजों की बेंच ने PTI संस्थापक के अदियाला जेल में रहने की स्थिति से जुड़े मामले की सुनवाई फिर से शुरू की।
खून का थक्का जमने से गई रोशनी
कोर्ट में पेश रिपोर्ट में बताया गया कि इमरान खान ने कहा है कि उनकी दाईं आंख की केवल लगभग 15% दृष्टि बची है। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक उनकी दोनों आंखों की दृष्टि सामान्य थी, लेकिन बाद में धुंधलापन शुरू हुआ और इलाज में देरी के कारण स्थिति बिगड़ गई। बताया गया कि बाद में डॉक्टरों ने जांच में खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) जैसी समस्या की पहचान की और इंजेक्शन सहित इलाज किया गया, लेकिन दृष्टि पूरी तरह वापस नहीं आ सकी।
कैदी की सेहत राज्य की जिम्मेदारी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कैदी की सेहत सर्वोच्च प्राथमिकता है और राज्य का दायित्व है कि उसे उचित इलाज मिले। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के तहत सभी कैदियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। कोर्ट ने माना कि परिवार से संपर्क भी महत्वपूर्ण मानवीय पहलू है। इसलिए बच्चों से टेलीफोन पर बातचीत की अनुमति देने के निर्देश दिए गए।
सुनवाई के दौरान टॉप जज ने कहा, “हम उनकी (इमरान की) हेल्थ के मामले पर सरकार का स्टैंड जानना चाहते हैं।” इस पर पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल (AGP) मंसूर उस्मान अवान ने कन्फर्म किया कि मेडिकल फैसिलिटी देना सरकार की ज़िम्मेदारी है। AGP अवान ने कहा, “अगर कैदी सैटिस्फाइड नहीं है, तो सरकार कदम उठाएगी।” इस पर CJP अफरीदी ने फिर कहा कि इमरान के “अपने बच्चों के साथ टेलीफोन कॉल का मामला भी जरूरी है”।
जेल में इलाज पर उठे सवाल
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इमरान खान ने पहले जेल प्रशासन को आंख की समस्या की शिकायत की थी, लेकिन समय पर विशेष इलाज नहीं मिला। बाद में विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाए गए। यह मामला सिर्फ एक कैदी के स्वास्थ्य का नहीं बल्कि जेलों में मेडिकल सुविधाओं, मानवाधिकार और राजनीतिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा माना जा रहा है। इस बीच, इन्फॉर्मेशन मिनिस्टर अताउल्लाह तरार ने कहा कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार द्वारा फैलाई जा रही कहानी रिपोर्ट के सामने “पूरी तरह से गलत साबित हुई है।”
लाहौर के इस वाकये के अलावा एक और घटना गुजरांवाला जिले में हुई है। यहां पुलिस ने एक शादी से 7 लोगों को हिरासत में ले लिया। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने विवाह समारोह के दौरान इमरान खान के पोस्टर लहराए और उनके समर्थन में नारेबाजी की। इस मामले में पुलिस ने वैमनस्यता पैदा करने, शांति भंग करने और जनता में सरकार के प्रति विद्रोह पैदा करने के आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया गया है।
शादी से क्यों उठा लिए गए 7 लोग, इमरान की तस्वीर दिखाने पर ऐक्शन
इन लोगों को 14 दिन की हिरासत में रखने का फैसला लिया गया है। फिलहाल इन्हें गुजरांवाला जेल में भेज दिया गया है। बता दें कि पाकिस्तान में इन दिनों इमरान खान के समर्थकों की शामत आई हुई है। पाकिस्तान की सेना भी पीटीआई के खिलाफ और राजनीतिक नेतृत्व से भी पूर्व पीएम की अदावत चल रही है। ऐसे में इमरान खान के नाम पर समर्थन करने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट की रिहाई की शर्त
सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की रिहाई का आदेश दिया, लेकिन शर्त रखी कि उन्हें किसी अन्य मामले में वांछित नहीं होना चाहिए। यही कारण है कि इमरान खान अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि वे भ्रष्टाचार के एक मामले में पहले ही दोषी ठहराए जा चुके हैं। क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान पर भ्रष्टाचार से लेकर आतंकवाद तक के कई मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि, वे इन सभी मामलों को झूठा और राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताते हैं।
किस मामले में मिली जमानत?
मई 2023 में इमरान खान को एक भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिनमें रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय भी शामिल था। इस हिंसा के बाद इमरान खान और उनकी पार्टी ( पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ) के कई नेताओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों को भी हाल ही में ऐसे ही मामलों में दोषी ठहराया गया है।
क्या जेल से बाहर आ पाएंगे इमरान खान?
सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बावजूद इमरान खान की कानूनी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। उन्हें अन्य मामलों में अभी जेल में रहना होगा। इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। पार्टी ने एक्स पर एक पोस्ट में इसे 'इमरान खान की जीत' करार दिया।
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पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने सोमवार को ऐलान किया कि शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
पाकिस्तानी सूचना एवं प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तरार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि कथित राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में भेजेगी। तरार ने यह भी कहा कि सरकार ने इमरान खान और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के खिलाफ अनुच्छेद 6 के तहत देशद्रोह का मामला दर्ज करने का फैसला किया है। तरार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान और पीटीआई एक साथ नहीं रह सकते।
इमरान की पार्टी के खिलाफ पुख्ता सबूत
पाकिस्तानी सूचना प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तरार ने बैन लगाने की घोषणा करते हुए कहा कि इस कार्रवाई के पक्ष में हमारे पास पुख्ता सबूत मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग मामले, 9 मई के दंगों, सिफर प्रकरण और अमेरिका में पारित प्रस्ताव को देखते हुए हमारा मानना है कि पीटीआई पर बैन लगाने के लिए बहुत पुख्ता सबूत मौजूद हैं।
कब बनी इमरान खान की पार्टी
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पाकिस्तान में एक राजनीतिक पार्टी है। इसकी स्थानपना साल 1996 में पाकिस्तानी क्रिकेटर और राजनेता इमरान खान ने की थी। इन्होंने साल 2018 से 2022 तक देश के प्रधान मंत्री के रूप में काम किया। पीटीआई पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के साथ तीन प्रमुख पाकिस्तानी राजनीतिक दलों में शुमार है और यह 2018 के आम चुनाव के बाद से पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में प्रतिनिधित्व के मामले में सबसे बड़ी पार्टी रही। लेकिन अप्रैल 2022 में विश्वासमत के दौरान वह गिर गई। पाकिस्तान सरकार ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में उसके पिछले हफ्ते दिए गए आदेश के खिलाफ एक रिव्यू पिटीशन दायर करेगी, जिसमें पीटीआई की एक राजनीतिक पार्टी के रूप में स्थिति की पुष्टि की गई थी।
जेल में बंद इमरान खान
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इस समय जेल में बंद हैं। पाकिस्तान के एक कोर्ट ने इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को कथित भ्रष्टाचार के एक नए मामले की जांच के वास्ते रविवार को आठदिन की हिरासत के लिए भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारियों को सौंप दिया। जिले की एक अदालत ने शनिवार को गैर इस्लामी शादी के मामले में दोनों को बरी कर दिया था। हालांकि, इसके तुरंत बाद एनएबी ने उन्हें अरेस्ट कर लिया।
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सूचना मंत्री अट्टा तरार ने कहा है कि शहबाज शरीफ की सरकार पिछले हफ्ते के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के सामने एक समीक्षा याचिका भी दायर करेगी। इस फैसले में पीटीआई को एक राजनीतिक दल के रूप में उसकी स्थिति की पुष्टि की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि इमरान खान की पार्टी राष्ट्रीय विधायिका में 20 से अधिक अतिरिक्त आरक्षित सीटों के लिए पात्र है। इस फैसले से गठबंधन सरकार पर सदन के भीतर दबाव बढ़ा है। इस फैसले को भी सरकार चुनौती देगी।
71 साल के इमरान खान पाकिस्तान के लोकप्रिय क्रिकेटर रहे हैं। उनकी कप्तानी में पाकिस्तान ने 1992 में एकदिवसीय वर्ल्डकप जीता था। खेल के बाद वह राजनीति में आए। 1996 में उन्होंने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का गठन किया। 1996 से 2023 तक वह पीटीआई के अध्यक्ष रहे हैं। अगस्त 2018 से अप्रैल 2022 तक वह पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। 2022 पीएम पद से हटने के बाद उनकी मुश्किलें शुरू हुईं। उन पर कई मामले दर्ज हुए और उनको गिरफ्तार कर लिया गया। इमरान फिलहाल रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। उनको दो मामलों में सजा भी सुनाई जा चुकी है।
]]>अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एडीएसजे अफजल मजोका ने मंगलवार को इस मामले में सुनवाई हुई थी और तब इस फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद आज फिर अदालत ने इस मामले में सुनवाई की तो इससे रावलपिंडी की अदियाला जेल से इमरान खान और बुशरा बीबी की रिहाई की उम्मीदें धराशायी हो गईं, बता दें कि जहां 71 साल के इमरान खान पर कई मामले दर्ज हैं, वहीं उनकी 49 साल की पत्नी बुशरा भी कई मामलों का सामना कर रही हैं।
2023 में दर्ज हुआ था मामला
इस केस को इद्दत केस के नाम से जाना जाता है, बीबी के पूर्व पति खावर मनेका ने नवंबर 2023 में जोड़े के खिलाफ मामला दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने इद्दत की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि का पालन किए बिना बीबी से शादी की। उन्होंने कोर्ट से इस शादी को अमान्य घोषित करने की मांग की। इससे पहले, पति पत्नी ने जिला और सत्र न्यायाधीश शाहरुख अर्जुमंद के समक्ष दोषसिद्धि को चुनौती दी थी, जिन्होंने उस समय खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था जब सुनवाई पूरी हो चुकी थी और अदालत को फैसला सुनाना था।
10 दिनों में फैसला करने का दिया था आदेश
मामला पिछले हफ्ते एडीएसजे मजोका को ट्रांसफर कर दिया गया था और इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने सत्र अदालत को 10 दिनों में फैसला करने का आदेश दिया था। खान और बीबी ने 2018 में शादी की, जिस साल खान चुनाव जीते और प्रधान मंत्री बने। बता दें कि बुशरा बीबी इमरान खान की तीसरी पत्नी हैं, इमरान खान अपने खेल करियर के सुनहरे दिनों में एक प्लेबॉय के रूप में जाने जाते थे।
खबर में बताया गया है कि खान (71) की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के नेताओं ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया और नेशनल असेंबली (संसद का निचला सदन) के अन्य सदस्यों के साथ राजधानी इस्लामाबाद में संसद से पाकिस्तान निर्वाचन आयोग (ईसीपी) के कार्यालय तक एक रैली निकाली। नेता प्रतिपक्ष और पीटीआई के नेता उमर अयूब के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने चुनाव में कथित धांधली को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजा और निर्वाचन आयोग के सदस्यों के इस्तीफे की मांग की।
पाकिस्तान में आठ फरवरी को हुए विवादास्पद आम चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली किये जाने के आरोप लगे थे। ‘द न्यूज इंटरनेशनल’ अखबार ने अपनी खबर में बताया कि रैली के दौरान अयूब ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजा और पाकिस्तान निर्वाचन आयोग के अन्य सदस्यों के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपने संवैधानिक कर्तव्य को पूरा करने में विफल रहा।
खबर में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग के केंद्रीय कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया गया, क्योंकि निर्वाचन आयोग के भवन के बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। इस दौरान पार्टी के संस्थापक और क्रिकेटर से राजनीतिक नेता बने खान की रिहाई के लिए नारे भी लगाए गए।
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