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अगर आप खेती के नाम पर गलत तरीके से इनकम टैक्स बचा रहे हैं तो आपके ऊपर कार्रवाई हो सकती है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (IT विभाग) उन लोगों की जांच कर रहा है जो खेती के नाम पर गलत तरीके से इनकम टैक्स बचा रहे हैं। बता दें कि खेती की आमदनी पर इनकम टैक्स और जीएसटी दोनों ही नहीं लगता।
दरअसल, कई दशकों से खेती की आमदनी और जमीन बेचने का इस्तेमाल ब्लैक मनी को सफेद करने और टैक्स बचाने के लिए होता रहा है। अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पूरे देश में छानबीन कर रहा है। कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोगों और कंपनियों ने बिना जमीन के ही 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा की खेती की आमदनी दिखाई है।
विभाग की किन मामलों पर नजर?
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कई ऐसे मामलों पर भी नजर रखे हुए है जहां 5 लाख रुपये प्रति एकड़ की फर्जी खेती की आमदनी दिखाई गई है। ये आंकड़े आम चलन और सरकारी आंकड़ों से बिलकुल मेल नहीं खाते। अगर विभाग इस मामले की गहराई से जांच करता है तो कई जगहों पर बवाल हो सकता है। क्योंकि कई बड़े नेता और रसूखदार लोग सीधे-सीधे या परोक्ष रूप से जमीन के मालिक हैं। ये जांच उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
जयपुर से शुरू हुई जांच
इकॉनमिक टाइम्स के मुताबिक यह जांच जयपुर के कुछ मामलों से शुरू हुई है। इन मामलों में कुछ लोगों ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में 50 लाख रुपये से ज्यादा की खेती की आमदनी दिखाई थी। 'हाई-रिस्क केस' के तौर पर चिन्हित इन मामलों में विभाग टैक्स भरने वालों के दावों की जांच करेगा। ये मामले साल 2020-21 के हैं।
आशीष करुंडिया एंड कंपनी के फाउंडर आशीष करुंडिया बताते हैं कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जिन लोगों की पहचान की है उन्हें ये साबित करना होगा कि उन्होंने अपनी जमीन खेती के लिए इस्तेमाल की है। खासकर जब पहले भी सैटेलाइट इमेज से खेती की जांच की जाती रही है।
ये आमदनी में शामिल नहीं
जमीन की प्लॉटिंग और बिक्री, शहर की जमीन बेचना, कमर्शियल इस्तेमाल के लिए फार्महाउस किराए पर देना, मुर्गी पालन और ऐसी ही दूसरी गतिविधियों से होने वाली आमदनी खेती से मिलने वाली आमदनी में शामिल नहीं है। इस पर टैक्स देना होगा। अगर किसी ने अपनी गैर-खेती जमीन स्टांप ड्यूटी वैल्यू से कम दाम पर बेची है तो उन पर भी टैक्स लग सकता है।
ये शामिल हो सकता है
खेती की आमदनी में फसल बेचने से होने वाली कमाई या जमीन का किराया शामिल हो सकता है। ये जमीन नगर निगम की सीमा से बाहर होनी चाहिए और कानून में तय न्यूनतम आबादी वाले इलाके में होनी चाहिए। खेती की जमीन बेचने से होने वाला मुनाफा भी टैक्स से छूट सकता है। ये तब होगा जब जमीन इनकम टैक्स ऐक्ट, 1961 की धारा 2(14)(iii) में दी गई 'कैपिटल असेट' की परिभाषा में नहीं आती हो।
इन मामलों में टैक्स
'कैपिटल असेट' के तौर पर पहचान के लिए, खेती की जमीन गांव की या शहरी, दोनों ही हो सकती है। जब गांव की जमीन बेची जाती है तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता। लेकिन शहरी खेती की जमीन बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है। सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि दूसरे लोग भी खेती की जमीन खरीदते हैं। वो इसका इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए करते हैं।
इसके लिए जरूरी मंजूरियां और शुल्क चुकाना पड़ता है। खेती की आमदनी के मामले में खेती की उपज के सबूत दिखाए जा सकते हैं। लेकिन अगर किसी के पास इतनी आमदनी है जिसके लिए उपज या बिक्री का कोई सबूत नहीं है तो गलत तरीके से छूट का दावा करने पर जुर्माना लग सकता है।
]]>हालांकि यह सर्च क्यों हो रहा है? इसकी वजह सामने नहीं आ पाई है. छापेमारी पूरी होने के बाद इसके पीछे के कारणों का खुलासा हो सकता है. फिलहाल इनकम टैक्स विभाग कंपनी के दस्तावेज खंगालने में जुटा हुआ है.
FY24 में पारले-जी इतना बढ़ा प्रॉफिट
सबसे पहले बात कर लेते हैं Parle-G बिस्कुट को वित्त वर्ष 2023-24 में हुए प्रॉफिट के बारे में, तो पीटीआई के मुताबिक, FY24 में इसका मुनाफा दोगुना होकर 1,606.95 करोड़ रुपये रहा है, जो कि FY23 में 743.66 करोड़ रुपये रहा था. इसके बीते वित्त वर्ष में पारले बिस्कुल की ऑपरेशनल इनकम दो फीसदी के इजाफे के साथ बढ़कर 14,349.4 करोड़ रुपये हो गई है. अगर रेवेन्यू की बात करें, तो ये 5.31 फीसदी उछलकर 15,085.76 करोड़ रुपये रहा है. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि Parle Biscuit की डिमांड अभी भी जोरदार बनी हुई है.
कब हुई थी कंपनी की शुरुआत?
पारले की शुरुआत की बात करें, तो इसे देश को आजादी मिलने से पहले साल 1929 में हुई थी. 90 के दशक के बच्चों को तो अपना वह दौर भी याद होगा, जब चाय के साथ पारले-जी का कॉम्बिनेशन सबसे ज्यादा फेमस हुआ करता था. रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसा कहा जाता है कि कंपनी ने पारले नाम मुंबई के विले-पार्ले इलाके से लिया है.
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हालांकि यह सर्च क्यों हो रहा है? इसकी वजह सामने नहीं आ पाई है. छापेमारी पूरी होने के बाद इसके पीछे के कारणों का खुलासा हो सकता है. फिलहाल इनकम टैक्स विभाग कंपनी के दस्तावेज खंगालने में जुटा हुआ है.
FY24 में पारले-जी इतना बढ़ा प्रॉफिट
सबसे पहले बात कर लेते हैं Parle-G बिस्कुट को वित्त वर्ष 2023-24 में हुए प्रॉफिट के बारे में, तो पीटीआई के मुताबिक, FY24 में इसका मुनाफा दोगुना होकर 1,606.95 करोड़ रुपये रहा है, जो कि FY23 में 743.66 करोड़ रुपये रहा था. इसके बीते वित्त वर्ष में पारले बिस्कुल की ऑपरेशनल इनकम दो फीसदी के इजाफे के साथ बढ़कर 14,349.4 करोड़ रुपये हो गई है. अगर रेवेन्यू की बात करें, तो ये 5.31 फीसदी उछलकर 15,085.76 करोड़ रुपये रहा है. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि Parle Biscuit की डिमांड अभी भी जोरदार बनी हुई है.
कब हुई थी कंपनी की शुरुआत?
पारले की शुरुआत की बात करें, तो इसे देश को आजादी मिलने से पहले साल 1929 में हुई थी. 90 के दशक के बच्चों को तो अपना वह दौर भी याद होगा, जब चाय के साथ पारले-जी का कॉम्बिनेशन सबसे ज्यादा फेमस हुआ करता था. रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसा कहा जाता है कि कंपनी ने पारले नाम मुंबई के विले-पार्ले इलाके से लिया है.
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मान लीजिए आपके पास एक गुप्त तिजोरी है जिसमें आप काला धन छिपाते हैं, तो आयकर विभाग उसे खोल सकता है। वर्तमान कानूनों के तहत ऐसा करने का एक तरीका यह है कि किसी भी दरवाजे, बॉक्स या लॉकर का ताला तोड़ा जा सकता है। ऐसा तब किया जा सकता है जब उनकी चाबियां उपलब्ध न हों और अगर उन्हें शक हो कि कोई अघोषित संपत्ति या खाता-बही वहां रखा जा रहा है। जैसे पुराने जमाने में चोर ताला तोड़कर अंदर घुसते थे, वैसे ही। लेकिन अब यह ताला आपके घर का नहीं, आपके कंप्यूटर का भी हो सकता है।
क्या कहते हैं जानकार
नए आयकर बिल के तहत आयकर अधिकारियों को आपके कंप्यूटर सिस्टम या वर्चुअल डिजिटल स्पेस का एक्सेस दिया गया है। मतलब अब आपका कंप्यूटर, आपका ईमेल, आपका सोशल मीडिया, सब कुछ सरकार की नजर में है। आयकर विधेयक के क्लौज 247 के अनुसार यदि किसी अधिकृत अधिकारी के पास यह मानने का कारण है कि किसी व्यक्ति के पास अघोषित आय या संपत्ति है जो आयकर अधिनियम के दायरे में आती है, तो वह किसी भी दरवाजे, बॉक्स, लॉकर, तिजोरी, अलमारी या अन्य इंस्ट्रूमेंट का ताला तोड़ सकता है। वे किसी भी कंप्यूटर सिस्टम या वर्चुअल डिजिटल स्पेस में एक्सेस कोड को ओवरराइड करके एक्सेस प्राप्त कर सकते हैं।
इसका मतलब है कि अगर अधिकारियों को आप पर जानबूझकर आयकर चोरी करने का संदेह है तो वे आपके कंप्यूटर सिस्टम, ईमेल या सोशल मीडिया अकाउंट में सेंध लगा सकते हैं। सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर (हेड-टैक्सेशन) एस.आर. पटनायक का मानना है कि ऐसी तलाशी और जब्ती केवल एक अपवाद के रूप में की जा सकती है, नियम के रूप में नहीं। इसकी वजह यह है कि जब वर्चुअल डिजिटल स्पेस की बात आती है तो किसी व्यक्ति को गोपनीयता की उचित अपेक्षा होती है। मतलब आपकी ऑनलाइन निजता का सम्मान किया जाना चाहिए।
]]>व्यक्तिगत आयकरदाताओं को कर में सबसे बड़ी छूट देने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, हमने मध्यम वर्ग के लोगों की आवाज सुनी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को अब्राहम लिंकन को उद्धृत करते हुए आम बजट 2025-26 को 'लोगों द्वारा, लोगों के लिए, लोगों का' बताया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करों में कटौती के विचार के पूरी तरह समर्थन में थे, लेकिन नौकरशाहों को समझाने में समय लगा। सीतारमण ने एक साक्षात्कार में कहा, हमने मध्यम वर्ग की आवाज सुनी है, जो ईमानदार करदाता होने के बावजूद अपनी आकांक्षाओं की पूर्ति न होने की शिकायत कर रहे थे।
]]>छत्तीसगढ़ में एक बार इनकम टैक्स ने छापा मारा है। प्रदेश के रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई में राइस मिलर्स और अन्य कारोबारियों के ठिकानों पर रेड मारी है। इनकम टैक्स की टीम सुबह-सुबह ही राइस मिलर्स और कारोबारियों के ठिकानों पर पहुंची थी। बड़ी संख्या में आयकर विभाग के अधिकारी जांच में जुटे हैं।
सूत्रों से मिली जानकरी के अनुसार, इनकम टैक्स की टीम सुबह से रायपुर में सत्यम बालाजी ग्रुप के ठिकानों पर जांच कर रही है। इसके साथ ही दस्तावेज खंगाला जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक आईटी की टीम रायपुर के रामसागरपारा, राठौर चौक ,जवाहर मार्केट स्थित कारोबारियों के घर और ऑफिसों में दबिश दी है। आईटी टीम ने बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की आशंका जताई है।
]]>बता दें कि आयकर विभाग ने पूर्व मुख्य सचिव से जुड़े कारोबारी त्रिशूल कंस्ट्रक्शन के मालिक राजेश शर्मा की 375 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति अटैच की। आयकर विभाग के बेनामी संपत्ति विंग ने कार्रवाई की थी। शर्मा की पत्नी और अन्य कर्मचारी इनके बारे में जानकारी नहीं दे पाए थे। शर्मा ने कर्मचारियों और पत्नी के नाम ये प्रॉपर्टी खरीदी थी। क्रेशर पर काम करने वाले समेत घर के कर्मचारी के नाम भी संपत्ति मिली। घर के प्यून के नाम पर ही महज 10 करोड़ रुपए की संपत्ति मिली था। 18 दिसम्बर को रियल एस्टेट कारोबारी पर कार्रवाई की गईं थी। त्रिशूल, ईशान और क्वालिटी बिल्डर पर कार्रवाई की गई थी। राजेश शर्मा पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बेस का करीबी है।
]]>अधिकारी ने कहा कि व्यापक और अधिक सख्त टैक्स कलेक्शन और स्रोत पर कटौती (TDS) व्यवस्था ने हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन को ट्रैक करने में मदद की है। ये ऐसे ट्रांजैक्शन थे जो किसी तरह टैक्स अधिकारियों की नजरों से छूट गए थे। कई ऐसे भी मामले भी हैं जिनमें लोगों ने जमकर खर्च किया और टैक्स देनदारी के बावजूद जीरो इनकम घोषित करते हुए रिटर्न दाखिल किया। अधिकारी ने कहा कि ₹37,000 करोड़ में से हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन करने वाले लोगों से ₹1,320 करोड़ की वसूली की गई। विभाग उन टैक्सपेयर्स से संपर्क साध रहा है जिनका खर्च पैटर्न और आईटी रिटर्न में गड़बड़ी है।
कैसे पकड़ी गई चोरी
इनकम टैक्स विभाग टैक्स चोरी का पता लगाने के लिए डेटा और एनालिटिक्स का उपयोग कर रहा है और ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने के लिए वित्त वर्ष 2021 से गैर-फाइलर मॉनीटरिंग सिस्टम को तैनात किया गया है। अधिकारी ने कहा कि कई स्रोतों से प्राप्त डेटा टैप और सिंक्रोनाइज किया जा रहा है। इससे विभाग के लिए टैक्स चोरी की पहचान करना और ऐसे लोगों को पकड़ना आसान हो जाता है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-नवंबर में प्रत्यक्ष कर संग्रह 15.4% बढ़कर ₹12.10 लाख करोड़ हो गया। इसमें ₹5.10 लाख करोड़ का कॉर्पोरेट कर और ₹6.61 लाख करोड़ का गैर-कॉर्पोरेट कर शामिल है।
]]>इनकम टैक्स विभाग ने ‘एक्स’ पोस्ट पर एक बयान में करदाताओं को रिफंड प्राप्त करने के लिए बैंक खाते को सत्यापित करने हेतु एक अनुस्मारक भी जारी की है। विभाग ने कहा कि जिन करदाताओं के पास कोई वैध बैंक अकाउंट नहीं है, उन्हें ई-मेल और एसएमएस के माध्यम से सूचित भी किया गया है।
आयकर विभाग ने करदाताओं से कहा कि कृपया ध्यान दें! ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने बैंक खाते की सत्यापन स्थिति की जांच https:ncometax.gov.in/iec/foportal/ पर जाकर करें। कृपया सुचारु रिफंड पाने के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर बैंक खाते की सत्यापन स्थिति की जांच करें! आयकर विभाग ने बैंक अकाउंट की सत्यापन के लिए स्टेप-बाई-स्टेप बताया है, जो इस प्रकार हैं-
मौजूदा बैंक खाते को अपडेट करने के लिए-
-सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइटhttps:ncometax.gov.in/iec/foportal/ पर जाएं
-अपने खाते में लॉगिन करें
-इसके बाद प्रोफाइल पर जाएं
-बैंक खाता चुनें
-पुनर्वैधीकरण पर क्लिक करें
-बैंक खाता विवरण जैसे खाता संख्या, IFSC, खाता प्रकार आदि अपडेट करें।
-अंत में Validate पर क्लिक करें।
नया बैंक खाता जोड़ने के लिए-
-सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https:ncometax.gov.in/iec/foportal/पर जाएं
-अपने खाते में लॉगिन करें
-इसके बाद प्रोफाइल पर जाएं
-माई बैंक अकाउंट पर क्लिक करें
-इसके बाद बैंक खाता जोड़ें पर क्लिक करें
-अंत में Validate पर क्लिक करें।
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आगरा के तीन जूता कारोबारियों के ठिकानों पर आयकर की कार्रवाई के दौरान बड़े पैमाने पर पर्चियां मिली हैं। इन पर्चियों में हरमिलाप ट्रेडर्स, बीके शूज और मंशु शूज के साथ कारोबार करने वाले जूता व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। पर्चियों के आधार पर उनसे भी पूछताछ की जा सकती है। यह डर सता रहा है। आयकर विभाग दूसरी फर्मों के टर्नओवर का आकलन कर सकता है। दो दिन से चल रही इस कार्रवाई ने इन फर्मों से व्यापार करने वालों को चिंता में डाल रखा है।
वाशिंग मशीन और दीवारों में भी छानबीन
हरमिलाप ट्रेडर्स के यहां से करोड़ों की नकदी की बरामदगी जूतों के डिब्बों, बेड आदि में करने के बाद विभागीय टीमों ने आवासों में वाशिंग मशीन, पेटियां और यहां तक कि दीवारों में भी छानबीन की। उन्हें आशंका थी कि कहीं नकदी अन्य स्थानों पर तो छिपाकर नहीं रखी गई है।
आसपास की कोठियों में सन्नाटा
आयकर की कार्रवाई के दौरान आलोक नगर, गोविंद नगर, हींग की मंडी सहित कारोबारियों के आवासों के आसपास की कोठियों में भी आवाजाही न के बराबर रही। लोगों ने अपने आवासों के बाहर निकलकर भी नहीं देखा। गर्मी के कारण कार्रवाई के दौरान पुलिस व आयकर अधिकारियों के आने जाने का क्रम चलता रहा।
निवेश और सोना खरीद की जानकारी मिली
इन्वेस्टिगेशन विंग की 12 से ज्यादा टीमों ने कार्रवाई की। कारोबारियों के पास से भारी मात्रा में जमीन में निवेश, सोने की खरीद की जानकारी भी मिली है। इनर रिंग रोड के पास कारोबारियों ने बड़ा निवेश किया है। लैपटॉप, कंप्यूटर और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं और उनसे डाटा लिया गया है। रसीदें और बिल के साथ स्टॉक रजिस्टर की जांच में कई हैरान कर देने वाली जानकारियां मिली हैं। एक प्रतिष्ठान के संचालक ने अपने आईफोन का लॉक नहीं खोला। उसमें लेनदेन के कई राज छिपे हैं।
आयकर छापा: टाइम लाइन
शनिवार:
दोपहर 12 बजे टीमें पहुंच गई
दोपहर एक बजे से कार्रवाई शुरू
शाम 6 बजे तक तलाशी चली
शाम 7 बजे नोटों की गिनती शुरू
रात 10 बजे तक 30 करोड़ के नोट गिने
रविवार
सुबह 10 बजे से दोबारा गिनती शुरू
सुबह 11 बजे गिनती के लिए और मशीनें मंगाई
दोपहर 2 बजे तक 40 करोड़ के नोट गिने गए
शाम 5 बजे तक 60 करोड़ के नोट गिने गए
शाम 7 बजे तक अन्य ठिकानों पर गिनती जारी
रात 10 बजे तक टीम ने अन्य दस्तावेज जब्त किए
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