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भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश की स्थिति अभी भी बहुत अच्छी नहीं है. बांग्लादेश की आंतरिक स्थिति के अलावा भारत समेत दूसरे देशों के साथ अतंरराष्ट्रीय संबंध भी खराब हो रहे हैं. क्योंकि शेख हसीना का इस्तीफा और देश छोड़ने के बाद अब बांग्लादेश में स्थितियां भारत के खिलाफ जाती दिख रही हैं. लेकिन सवाल ये है कि अगर भविष्य में भारत के सामने बांग्लादेश की सेना खड़ी होती है,तो क्या स्थिति होगी.
भारत के पड़ोसी देश
भारत की आजादी और बंटवार के बाद से ही पाकिस्तान हमेशा भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता आया है. लेकिन हमेशा भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना और घुसपैठियों पर पलटवार किया है. वहीं गौरतलब है कि बांग्लादेश एक वक्त पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा था, जिसे एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने में भारत की अहम भूमिका थी. यही कारण है कि इतने सालों तक बांग्लादेश भारत के साथ मित्रता का संबंध रखता था. लेकिन तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की स्थिति बदल चुकी है.
भारतीय सेना सतर्क
बता दें कि आज के वक्त भारतीय सेना पाकिस्तान के अलावा बांग्लादेश की सीमा पर भी चौकन्नी है, भारतीय सेना और खुफिया एजेंसी सभी जगहों पर नजर बनाए हुए हैं. लेकिन सवाल ये है कि अगर कभी बांग्लादेश की सेना भारत के खिलाफ जाने की कोशिश करती है, तो क्या होगा? वहीं पाकिस्तान एक समस्या बना ही हुआ है.
बांग्लादेश और पाकिस्तान की सैन्य ताकत?
पाकिस्तान और बांग्लादेश की सैन्य ताकत भारत से काफी कमजोर है. बता दें कि 145 देश की इस रैंकिंग में बांग्लादेश 37 में पायदान पर है, जबकि पाकिस्तान 9 नंबर पर है. हालांकि भारत दुनिया की चौथी सैन्य महाशक्ति के तौर पर जाना जाता है. भारत में 14.44 लाख एक्टिव सैनिक हैं, जो दुनिया में दूसरे नंबर पर है. वहीं भारत की तुलना में पाकिस्तान के सैनिक आधे से भी कम हैं.
भारतीय सेना में ज्यादा फोर्स
भारत के पास पैरामिलिट्री फोर्स भी पाकिस्तान से ज्यादा है. भारत की पैरामिलिट्री फोर्स में 25,27,000 सैनिक हैं. वहीं पाकिस्तान में इनकी संख्या सिर्फ पांच लाख है. इसके अलावा भारतीय सेना के पास 4,500 टैंक और 538 लड़ाकू विमान हैं. सुपरसोनिक मिसाइल से लेकर न्यूक्लियर वेपन तक भारत हर एक मोर्चे पर पाकिस्तान या बांग्लादेश दोनों से बहुत आगे हैं. बांग्लादेश की सैन्य ताकत
बांग्लादेश में 1,75,000 एक्टिव सैनिक हैं, इसमें बॉर्डर गार्ड के साथ तटरक्षक बल भी शामिल है. बांग्लादेशी सेना के जवानों की तैनाती संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भी की गई है. इस मिशन में बांग्लादेश के 7 हजार सैनिकों की तैनाती की गई है. बांग्लादेश के पास करीब की सेना के पास 13,100 बख्तरबंद वाहन, 281 टैंक, 30 ऑटोमैटिक तोप हैं. इसके अलावा इस देश के पास 370 टो आर्टिलरी और 70 रॉकेट आर्टिलरी भी है. बांग्लादेश हर साल 3.8 बिलियन डॉलर अपनी सेना पर खर्च करता है. बांग्लादेश का रक्षा बजट दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान के बाद तीसरा सबसे बड़ा बजट माना जाता है.
पाकिस्तान की सैन्य ताकत
ये सच है कि पाकिस्तान की सैन्य ताकत बांग्लादेश से कहीं ज्यादा है. ग्लोबल फायरपावर की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में कुल सक्रिय सैनिकों की संख्या 6,54,000 से भी ज्यादा है. इतना ही नहीं पाकिस्तान के पास कुल 1,434 विमान हैं और 60 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट हैं, वहीं 4 एरियल रिफ्यूलर विमान भी हैं. पाकिस्तान के पास 3,742 टैंक और 50 हजार से ज्यादा आर्ल्ड व्हीकल हैं. इसके अलावा 602 रॉकेट लॉन्चर, 752 सेल्फ प्रॉपेल्ड आर्टिलरी, 2 विध्वंसक पोट, 8 पनडुब्बी और 114 नौसिक जहाज भी हैं. फाइटर जेट्स में पाकिस्तान के पास 387 लड़ाकू विमान हैं.
आर्थिक स्थिति
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक पिछले चार सालों से बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से ज्यादा है. वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति GDP 2,688 डॉलर है. वहीं भारत का 2,411 डॉलर है. लेकिन बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति छात्रों के विरोध प्रदर्शन के कारण बेहद खराब हो चुकी है. वहीं भारत हाल ही में भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़कर विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश भारत के सामने कहीं पर खड़े नहीं होते हैं. लेकिन ये भी सच है कि युद्ध जैसी स्थिति बनने पर किसी भी देश को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है.
]]>इंटेलीजेंस फेलियर था कारगिल युद्ध
डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, कारगिल पर कब्जा करने की पाकिस्तान की कार्रवाई जनवरी, 1999 से शुरू हुई थी, मगर भारत का इसका पता चला मई, 1999 के आखिर में। तब भारत ने ऑपरेशन विजय चलाया था। जनवरी से मई तक 6 महीने तक सेना को यह नहीं पता चला कि पाकिस्तानी फौजी हमारे बनाए हुए हमारे पहाड़ों पर बने मोर्चों पर वो तैनात हो गए हैं। यह एक बड़ी चूक थी।
पता लगते ही भारतीय सेना ने क्या किया
भारतीय सेना को जैसे ही यह जानकारी पता चली कि पाकिस्तानी फौजियों ने हमारी कुछ चौकियों पर कब्जा कर लिया तो भारत ने इसे पूर्ण रूप से युद्ध मानते हुए पाकिस्तानियों को अपने मोर्चे से खदेड़ने की रणनीति अपनाई। अपने हर मोर्चे और कब्जे वाली हर इंच जमीन से पाक फौजियों को भगाने के लिए मल्टी प्रोन अटैक की स्ट्रैटजी अपनाई। भारत की जीत की शुरुआत टाइगर हिल्स पर दोबारा कब्जे के साथ हुई थी, जो 4 जुलाई, 1999 को पाकिस्तानी फौजियों को हराने के साथ संपन्न हुई थी।
पहाड़ों पर लड़ाई में 1 के मुकाबले 9 सैनिक
भारतीय सेना आमतौर पर किसी भी लड़ाई के लिए अटैकर टू डिफेंडर रेश्यो 3:1 अपनाती है। इसका मतलब यह होता है कि दुश्मन के 1 फौजी के मुकाबले भारतीय सेना के 3 जवान तैनात किए जाते हैं। यह रणनीति पहाड़ों में बदल जाती है। पहाड़ों में अटैकर टू डिफेंडर का अनुपात 9:1 होता है। इसका मतलब यह है कि पहाड़ों की लड़ाई में दुश्मन के 1 फौजी के मुकाबले भारत के 9 जवान तैनात किए जाते हैं। कारगिल में भी यही रणनीति अपनाई गई थी।
15-16 हजार फीट की ऊंचाई पर दुश्मन को हराया
पाकिस्तान ने कारगिल में 15-16 हजार की फीट पर हमारे कई मोर्चों पर कब्जा कर लिया था। जवाब में भारतीय सेना के जवानों ने मुश्किल इलाकों से होते हुए पाकिस्तानी फौजों पर हमला बोला था। इस स्ट्रैटेजी से पाकिस्तानी पस्त हो गए थे। भारत ने कारगिल के हर इंच को छुड़ा लिया था।
भारतीय सेना ने तोपों से टार्गेट को सॉफ्ट कर दिया
भारतीय सेना ने बड़ी-बड़ी तोपों से टार्गेट को पहले सॉफ्ट कर दिया था। सेना की भाषा में सॉफ्ट करने का मतलब है दुश्मन के ठिकानों को तहस-नहस कर देना। भारतीय सेना ने वायुसेना का भी इस्तेमाल किया था, जिससे यह जंग जीतना और आसान हो गया।
कारगिल जंग में 2.5 लाख दागे गए थे गोले
कारगिल युद्ध में बड़ी संख्या में रॉकेट और बमों का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान करीब 2.5 लाख गोले दागे गए। वहीं 5,000 बम फायर करने के लिए 300 से ज्यादा मोर्टार, तोपों और रॉकेटों का इस्तेमाल किया गया। युद्ध के 17 दिनों में हर रोज प्रति मिनट में एक राउंड फायर किया गया। यह ऐसा युद्ध था जिसमें दुश्मन देश की सेना पर इतने बड़े पैमाने पर बमबारी की गई थी।
इंटेलीजेंस का क्या रोल होता है
इंटेलीजेंस का बेहद अहम रोल होता है। किसी भी सैन्य ऑपरेशन में सबसे ज्यादा अहम इंटेलीजेंस होता है। इसी से यह पता चलता है कि दुश्मन के कितने सैनिक कहां बैठे हैं, उनके पास क्या और किस तरह के हथियार हैं? जहां हमला करना है, उसमें दुश्मन की जवाबी कार्रवाई क्या हो सकती है।
इंटेलीजेंस इन्फॉर्मेशन कई तरह से जुटाते हैं
डिफेंस एक्सपर्ट सोढ़ी के अनुसार, इंटेलीजेंस कई तरह से जुटाई जाती हैं। जैसे इंसानों के जरिए कुछ इन्फॉर्मेशन जुटाई जाती हैं। कारगिल युद्ध में लकड़हारों और चरवाहों ने पाकिस्तानी फौजियों के बारे में जरूरी इनपुट दिए थे। इसके अलावा, सैटेलाइट इमेज से भी जानकारी जुटाई जाती है। खुफिया जानकारी जुटाने वाले हेलीकॉप्टर्स से भी जरूरी जानकारी जुटाई जाती है। इन सभी जानकारियों को एकसाथ रखकर उसका एनालिसिस करते हैं। इसके बाद ही काम की जानकारी को फोकस में रखते हुए दुश्मन के खिलाफ किसी ऑपरेशन को अंजाम दिया जाता है।
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