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दौर नगर निगम के चर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड और निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ED की जांच में अब तक करीब 92 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेजी प्रमाण सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी धन की हेराफेरी कर अर्जित राशि से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में संपत्तियां खरीदी गईं। इसी के तहत 43 संपत्तियों को अटैच किया गया है।
फर्जी बिलों के जरिए निकाली गई करोड़ों की राशि
जांच में सामने आया है कि ड्रेनेज, सीवरेज और अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिल तैयार किए गए। आरोप है कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने मिलीभगत कर ऐसे कामों के भुगतान मंजूर कराए, जो या तो धरातल पर अस्तित्व में ही नहीं थे या फिर वास्तविक कार्य की तुलना में कई गुना अधिक दर्शाए गए।
ED के अनुसार कई प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपएका भुगतान किया गया, लेकिन मौके पर जांच के दौरान संबंधित कार्यों का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
जांच के प्रमुख बिंदु
करीब 92 करोड़ रुपएके कथित घोटाले के साक्ष्य मिले।
पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर समेत तीन आरोपी गिरफ्तार।
स्पेशल कोर्ट ने तीन दिन की ईडी रिमांड मंजूर की।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की 43 संपत्तियां अटैच।
फर्जी निर्माण कार्यों और जाली बिलों के माध्यम से राशि निकाले जाने का आरोप।
अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की भूमिका जांच के दायरे में।
घोटाले की परतें खुलने की उम्मीद
ED की कार्रवाई के बाद नगर निगम के /यह चर्चित घोटाले में फिर चर्चाओं में है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान पूछताछ से रुपयों के लेन-देन, संपत्तियों की खरीद और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
मेयर पुष्यमित्र भार्गव खुद इस मार्ग पर अतिक्रमण हटाने से पहले रहवासियों से मिलने पहुंचे और रहवासियों से आग्रह किया कि वे अगले दो से तीन दिनों के भीतर अपने-अपने अतिक्रमण खुद हटा लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाने पर नगर निगम द्वारा कार्रवाई कर उन्हें हटाया जाएगा। कुछ रहवासी स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने के लिए तैयार हो चुके हैं।
भार्गव ने बताया कि मधुमिलन चौराहे से छावनी तक का यह मार्ग शहर के ट्रैफिक के लिए महत्वपूर्ण है। इसका निर्माण निगम की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के तहत इस सड़क को प्रथम चरण में 60 फीट चौड़ा किया जाएगा। इसके बाद यातायात की स्थिति के अनुसार आगे की योजना बनाई जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि 60 फीट चौड़ाई को लेकर क्षेत्र के अधिकांश रहवासी सहमत हैं, जिससे कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। आपको बता दें कि छह साल पहले भी तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने इस सड़क को चौड़ा करने की योजना बनाई थी और तब मथुरवाला स्वीट्स का निर्माण भी तोड़ा गया था, लेकिन बाद में उनका तबादला हो गया और सड़क चौड़ी नहीं हो पाई थी।
90 मीटर ऊंची विश्वस्तरीय सुविधाओं वाली बिल्डिंग का निर्माण पीपीपी आधार पर
आइडीए के सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े ने बताया, पार्क के लिए हाईराइज बिल्डिंग मंजूरी मिली है। 90 मीटर ऊंची विश्वस्तरीय सुविधाओं वाली बिल्डिंग का निर्माण पीपीपी आधार पर होगा। 2 साल में निर्माण का लक्ष्य है। 15 दिन में टेंडर जारी होगा।
पहले चरण में शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, स्टार्टअप ऑफिस, कॉर्पोरेट ऑफिस, दूसरे चरण में आइटी बिल्डिंग
आइडीए की योजना के अनुसार, करीब 1200 करोड़ से सुपर कॉरिडोर पर 8.2 हेक्टेयर जमीन पर स्टार्टअप पार्क बनेगा। अलग अलग फेज में निर्माण होगा। पहले चरण में तल मंजिल पर शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, स्टार्टअप ऑफिस, कॉर्पोरेट ऑफिस होंगे। दूसरे चरण में आइटी बिल्डिंग व तीसरे चरण में कन्वेंशन सेंटर तथा 5 स्टार होटल बनाने का प्रस्ताव है।
आइडीए ने मूल डिजाइन तैयार की है। इसमें बड़े शहरों की तरह ट्विन बिल्डिंग बनाने की योजना है। हालांकि, पीपीपी मॉडल पर काम होगा। एजेंसी भी अलग डिजाइन भी बना सकती है।
लाखों खर्च कर बनाई योजना रद्द, अब नए तरीके से काम
आइडीए ने करीब तीन साल पहले स्टार्टअप पार्क की योजना बनाई थी। तब इसे आइडीए ही बनाने की तैयारी में था। जिसे इसकी डिजाइन बनाने का काम दिया, उसने बंगलूरु, हैदराबाद और पुणे आदि बड़े शहरों में आइटी और स्टार्टअप कंपनियों के लिए सुविधाओं का सर्वे कर योजना बनाई। बाद में आइडीए ने पीपीपी मॉडल पर स्टार्टअप बनाने की योजना बनाई।
ऐसी सुविधाएं
पार्किंग के लिए 3 बेसमेंट।
4 फ़्लोर पर शॉपिंग मॉल, 1 फ़्लोर पर सर्विस।
पार्क में देशी-विदेशी 100 से अधिक कंपनियों को मिलेगी जगह।
1000 आइटी प्रोफशनल्स को यहां नौकरी मिलेगी।
सभी सुविधाएं विकसित होने पर 10 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार
पार्क बनाने वाली कंपनी से प्रीमियम राशि लेकर ऑफिस बेचकर आय का विकल्प दे सकता है आइडीए।
इंदौर के ब्रजेश्वरी (एनएक्स) स्थित अर्हम विला अग्निकांड में अब वो सच सामने आ गया है, जिसने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी है। सात दिन की चुप्पी के बाद आखिरकार पुगलिया परिवार के बेटों ने कबूल लिया कि हादसे वाली रात इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पर लगी थी। यानी जिस ‘संदेह’ को अफवाह बताया जा रहा था, वही अब हकीकत बनकर सामने आ गया है।
बेटों के बयान दर्ज
बुधवार को पुलिस की सख्त पूछताछ में मनोज पुगलिया के बेटों सौरभ और हर्षित के बयान दर्ज किए गए। घंटों चली पूछताछ में हर्षित ने साफ किया कि उसने रात करीब 11 बजे कार को चार्जिंग पर लगाया था। वहीं सौरभ ने पहले इनकार किया, लेकिन बाद में माना कि कार चार्जिंग पर थी, हालांकि उसे इसकी जानकारी बाद में हुई। इस कबूलनामे ने बिजली कंपनी और फायर सेफ्टी की शुरुआती रिपोर्ट पर मुहर लगा दी है। याद रहे कि पिछले बुधवार को अर्हम विला में लगी भीषण आग ने 8 लोगों को जिंदा जला दिया था। इस दर्दनाक हादसे में मनोज पुगलिया, सिमरन पुगलिया, विजय सेठिया, सुमन सेठिया, रुचिका संचेती, राशि, तनय और कार्तिक की मौत दम घुटने और जलने से हुई थी।
हर्षित ने रात 11 बजे चार्जिंग पर लगाई थी कार
बिजली कंपनी और फायर सेफ्टी ने पहले ही कहा था कि आग ईवी से लगी है, मगर सौरभ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शिकायत कर कहा था कि पुलिस द्वारा अफवाह फैलाई जा रही है और कार का चार्जर कनेक्ट ही नहीं था। बुधवार को पुलिस ने सौरभ, सौमिल, हर्षित और दोस्त ऋषभ जादौन व शिवेंद्र के कथन लिए। करीब चार घंटे चले बयानों में सौरभ ने कहा कि कार चार्जिंग पर लगी थी, इसका उसको बाद में पता चला है। वह तो चार्जर निकाल कर सो गया था, लेकिन सबसे छोटा भाई हर्षित कार लेकर आया और करीब 11 बजे उसने चार्जिंग पर कार लगा दी थी।
चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के बाद सौरभ ने खुद मुख्यमंत्री से शिकायत कर पुलिस पर ‘अफवाह फैलाने’ का आरोप लगाया था और दावा किया था कि कार चार्जिंग पर थी ही नहीं। लेकिन अब उसी परिवार के भीतर से निकली सच्चाई ने उस दावे की पोल खोल दी है।
स्मार्ट मीटर डेटा और गैस सिलेंडर पर खुलासा
हर्षित के बयान से बिजली कंपनी के अधिकारियों के दावों की पुष्टि हो गई है। स्मार्ट मीटर का विश्लेषण कर कंपनी ने कहा था कि कार रात 11 बजे से तीन बजे तक चार्जिंग पर थी, क्योंकि मीटर में नौ किलोवाट तक लोड नोट हो रहा था। घर में बड़ी संख्या में रखे गैस सिलेंडरों पर सौरभ ने बताया कि 23 जनवरी को भाई सौमिल की शादी थी और कुछ सिलेंडर बच गए थे। पापा (मनोज पुगलिया) ने एक कार्यक्रम के लिए सिलेंडर रखे थे। मां सुनीता के नाम अवंतिका गैस और सौरभ के नाम इंडियन गैस का कनेक्शन है।
पहले इनकार, अब स्वीकार
सौरभ पुगलिया ने पहले दावा किया था कि कार चार्जिंग पर नहीं लगी थी और उसमें चार्जर भी नहीं था। लेकिन अब उसने बयान में कहा कि कार 85% चार्ज थी, इसलिए उसने चार्जर निकाल दिया था, हालांकि बाद में हर्षित ने रात करीब 11 बजे फिर से चार्जिंग पर लगा दी। हर्षित के बयान से स्पष्ट हुआ कि घटना के दौरान कार चार्जिंग पॉइंट से जुड़ी हुई थी।
15 किलोवाट के कनेक्शन पर था भारी लोड
बिजली कंपनी की रिपोर्ट और एक्सपर्ट पहले ही ईवी से आग लगने की संभावना जता चुके हैं। उन्होंने स्मार्ट मीटर और ट्रांसफार्मर का डेटा भी निकाल लिया है। कार प्रतिदिन रात 11 बजे से चार्जिंग पर लगाई जाती थी। घर में 15 किलोवाट का कनेक्शन स्वीकृत था और कार चार्ज करने पर 9 किलोवाट तक की खपत होती थी। आगे फोरेंसिक और बिजली कंपनी की रिपोर्ट के बाद अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचा जाएगा। ईवी कार एक्सपर्ट भी रिपोर्ट बना रहे हैं। तीनों के मत के आधार पर ही अंतिम निर्णय होगा, हालांकि अभी तक ईवी से ही आग लगने की प्रबल संभावना है।
घर में बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर भी मौजूद थे, जिसने आग को और भयावह बना दिया। परिजनों के मुताबिक, ये सिलेंडर हाल ही में हुए पारिवारिक कार्यक्रम के बाद बचे हुए थे।
जांच की आंच और तेज
फिलहाल फोरेंसिक, बिजली कंपनी और EV एक्सपर्ट की रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन शुरुआती तथ्यों ने साफ कर दिया है कि यह हादसा लापरवाही और तकनीकी दबाव का खतरनाक मेल था।
इंदौर के ब्रजेश्वरी (एनएक्स) स्थित अर्हम विला अग्निकांड में अब वो सच सामने आ गया है, जिसने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी है। सात दिन की चुप्पी के बाद आखिरकार पुगलिया परिवार के बेटों ने कबूल लिया कि हादसे वाली रात इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पर लगी थी। यानी जिस ‘संदेह’ को अफवाह बताया जा रहा था, वही अब हकीकत बनकर सामने आ गया है।
बेटों के बयान दर्ज
बुधवार को पुलिस की सख्त पूछताछ में मनोज पुगलिया के बेटों सौरभ और हर्षित के बयान दर्ज किए गए। घंटों चली पूछताछ में हर्षित ने साफ किया कि उसने रात करीब 11 बजे कार को चार्जिंग पर लगाया था। वहीं सौरभ ने पहले इनकार किया, लेकिन बाद में माना कि कार चार्जिंग पर थी, हालांकि उसे इसकी जानकारी बाद में हुई। इस कबूलनामे ने बिजली कंपनी और फायर सेफ्टी की शुरुआती रिपोर्ट पर मुहर लगा दी है। याद रहे कि पिछले बुधवार को अर्हम विला में लगी भीषण आग ने 8 लोगों को जिंदा जला दिया था। इस दर्दनाक हादसे में मनोज पुगलिया, सिमरन पुगलिया, विजय सेठिया, सुमन सेठिया, रुचिका संचेती, राशि, तनय और कार्तिक की मौत दम घुटने और जलने से हुई थी।
हर्षित ने रात 11 बजे चार्जिंग पर लगाई थी कार
बिजली कंपनी और फायर सेफ्टी ने पहले ही कहा था कि आग ईवी से लगी है, मगर सौरभ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शिकायत कर कहा था कि पुलिस द्वारा अफवाह फैलाई जा रही है और कार का चार्जर कनेक्ट ही नहीं था। बुधवार को पुलिस ने सौरभ, सौमिल, हर्षित और दोस्त ऋषभ जादौन व शिवेंद्र के कथन लिए। करीब चार घंटे चले बयानों में सौरभ ने कहा कि कार चार्जिंग पर लगी थी, इसका उसको बाद में पता चला है। वह तो चार्जर निकाल कर सो गया था, लेकिन सबसे छोटा भाई हर्षित कार लेकर आया और करीब 11 बजे उसने चार्जिंग पर कार लगा दी थी।
चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के बाद सौरभ ने खुद मुख्यमंत्री से शिकायत कर पुलिस पर ‘अफवाह फैलाने’ का आरोप लगाया था और दावा किया था कि कार चार्जिंग पर थी ही नहीं। लेकिन अब उसी परिवार के भीतर से निकली सच्चाई ने उस दावे की पोल खोल दी है।
स्मार्ट मीटर डेटा और गैस सिलेंडर पर खुलासा
हर्षित के बयान से बिजली कंपनी के अधिकारियों के दावों की पुष्टि हो गई है। स्मार्ट मीटर का विश्लेषण कर कंपनी ने कहा था कि कार रात 11 बजे से तीन बजे तक चार्जिंग पर थी, क्योंकि मीटर में नौ किलोवाट तक लोड नोट हो रहा था। घर में बड़ी संख्या में रखे गैस सिलेंडरों पर सौरभ ने बताया कि 23 जनवरी को भाई सौमिल की शादी थी और कुछ सिलेंडर बच गए थे। पापा (मनोज पुगलिया) ने एक कार्यक्रम के लिए सिलेंडर रखे थे। मां सुनीता के नाम अवंतिका गैस और सौरभ के नाम इंडियन गैस का कनेक्शन है।
पहले इनकार, अब स्वीकार
सौरभ पुगलिया ने पहले दावा किया था कि कार चार्जिंग पर नहीं लगी थी और उसमें चार्जर भी नहीं था। लेकिन अब उसने बयान में कहा कि कार 85% चार्ज थी, इसलिए उसने चार्जर निकाल दिया था, हालांकि बाद में हर्षित ने रात करीब 11 बजे फिर से चार्जिंग पर लगा दी। हर्षित के बयान से स्पष्ट हुआ कि घटना के दौरान कार चार्जिंग पॉइंट से जुड़ी हुई थी।
15 किलोवाट के कनेक्शन पर था भारी लोड
बिजली कंपनी की रिपोर्ट और एक्सपर्ट पहले ही ईवी से आग लगने की संभावना जता चुके हैं। उन्होंने स्मार्ट मीटर और ट्रांसफार्मर का डेटा भी निकाल लिया है। कार प्रतिदिन रात 11 बजे से चार्जिंग पर लगाई जाती थी। घर में 15 किलोवाट का कनेक्शन स्वीकृत था और कार चार्ज करने पर 9 किलोवाट तक की खपत होती थी। आगे फोरेंसिक और बिजली कंपनी की रिपोर्ट के बाद अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचा जाएगा। ईवी कार एक्सपर्ट भी रिपोर्ट बना रहे हैं। तीनों के मत के आधार पर ही अंतिम निर्णय होगा, हालांकि अभी तक ईवी से ही आग लगने की प्रबल संभावना है।
घर में बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर भी मौजूद थे, जिसने आग को और भयावह बना दिया। परिजनों के मुताबिक, ये सिलेंडर हाल ही में हुए पारिवारिक कार्यक्रम के बाद बचे हुए थे।
जांच की आंच और तेज
फिलहाल फोरेंसिक, बिजली कंपनी और EV एक्सपर्ट की रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन शुरुआती तथ्यों ने साफ कर दिया है कि यह हादसा लापरवाही और तकनीकी दबाव का खतरनाक मेल था।
दस दिनों के भीतर पार्किंग व्यवस्था बहाल करने के निर्देश
नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा द्वारा जारी किए गए इन नोटिसों में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि भवन संचालकों को 10 दिन का समय दिया जा रहा है। इस अवधि के भीतर उन्हें तलघर में किए गए अवैध व्यावसायिक निर्माण को हटाना होगा और वहां पार्किंग की व्यवस्था को फिर से सुचारू करना होगा। निगम के अधिकारियों ने साफ किया है कि यदि इस समय सीमा के बाद भी भवनों में पार्किंग की जगह व्यापारिक गतिविधियां संचालित पाई गईं, तो निगम की टीम स्वयं वहां पहुंचकर निर्माण कार्य को ध्वस्त करने की सीधी कार्रवाई करेगी।
हर साल चलने वाले अभियान की सार्थकता पर सवाल
उल्लेखनीय है कि इंदौर नगर निगम द्वारा बेसमेंट की जांच और नोटिस देने की यह प्रक्रिया हर एक या दो साल में दोहराई जाती है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, हर बार भवन अधिकारियों और भवन निरीक्षकों द्वारा जोनल स्तर पर इमारतों की सघन जांच की जाती है और नोटिस भी बांटे जाते हैं। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और जानकारों का कहना है कि इन अभियानों का परिणाम अक्सर सिफर ही रहता है। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है, जिससे पार्किंग की समस्या जस की तस बनी रहती है।
जोनल कार्यालयों में सक्रिय हुए भवन अधिकारी और निरीक्षक
वर्तमान में नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा के निर्देशों के बाद सभी जोनल कार्यालयों में तैनात भवन अधिकारी और भवन निरीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों की इमारतों का सर्वे कर रहे हैं। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन इमारतों ने भवन अनुज्ञा के समय पार्किंग के लिए जगह मंजूर करवाई थी लेकिन बाद में वहां व्यावसायिक निर्माण कर लिया। निगम का कहना है कि इस बार लापरवाही बरतने वाले भवन स्वामियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और पार्किंग नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
इंदौर की रंगपंचमी पर निकलने वाली गेर शहर का एक अनोखा और खास त्योहार है। इस दिन पुराने शहर के इलाकों में रंगों के शौकीन बड़ी संख्या में गेर में शामिल होते हैं और रास्ते में खड़े लोगों पर रंग बरसाते हुए आगे बढ़ते हैं।
गेर के दौरान आसमान में दूर-दूर तक रंगों के बादल छा जाते हैं। इन खूबसूरत नजारों का आनंद लेने के लिए इस बार भी शहर के लोग गेर वाले मार्गों पर स्थित मकानों की छतें बुक कर सकेंगे और अपने परिवार के साथ इस आयोजन का मजा ले पाएंगे। प्रशासन ने पिछले साल भी यह व्यवस्था की थी, जो काफी सफल रही थी।
शीतला माता बाजार से लेकर गौराकुंड और खजूरी मार्केट तक की छतों से लोग गेर की रौनक देख सकेंगे। हर साल इस आयोजन को देखने के लिए दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग इंदौर पहुंचते हैं। जिनके घर गेर के मार्ग पर पड़ते हैं, वहां अब छोटी-छोटी पार्टियों का भी आयोजन होने लगा है, जहां लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बुलाकर रंगपंचमी का उत्सव मनाते हैं। इस साल गेर के मार्ग पर स्थित आठ छतों पर 200 से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इनकी बुकिंग बुक माय शो के माध्यम से की जाएगी, जिसके लिए लोगों को टिकट खरीदना होगा।
इस बार 8 मार्च को रविवार होने के कारण प्रशासन ने अलग से छुट्टी घोषित नहीं की है। रविवार होने की वजह से इस बार गेर में और अधिक भीड़ जुटने की संभावना जताई जा रही है। करीब चार किलोमीटर लंबे गेर मार्ग पर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बिजली के तार और केबल हटाए जा रहे हैं, साथ ही सड़कों की मरम्मत का काम भी किया जा रहा है।
परंपरा के अनुसार इस बार भी चार गेर इस जुलूस का हिस्सा होंगी। लगभग 100 फीट तक रंग फेंकने वाली विशेष रंग मिसाइलें भी तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा डीजे और भजन मंडलियां भी गेर में शामिल होंगी। नगर निगम की गेर भी इस जुलूस का हिस्सा रहेगी, हालांकि शहर में हाल ही में हुई कुछ घटनाओं के कारण मेयर पुष्यमित्र भार्गव इस बार गेर में शामिल नहीं होंगे।
]]>मध्य प्रदेश के इंदौर के द्वारकापुरी थाना क्षेत्र में चार दिन से लापता एमबीए छात्रा की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। दुष्कर्म के बाद रस्सी से गला घोंटकर हत्या करने वाला फरार सहपाठी छात्र पीयूष धामनोदिया मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी की लोकेशन ट्रेस होने के बाद मुंबई पुलिस की मदद से उसे पकड़ा गया।
वहीं आरोपी के परिजन मंदसौर से इंदौर पहुंच चुके हैं, जिनके बयान आज पुलिस दर्ज करेगी। द्वारकापुरी थाना पुलिस की टीम आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेने मुंबई पहुंच गई है और देर शाम तक उसे इंदौर लाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के बाद हत्या की असली वजह और पूरी साजिश का खुलासा होगा। वहीं आज छात्रा का पोस्टमार्टम भी कराया जाएगा।
पुलिस के अनुसार सांवेर रोड स्थित एक कॉलेज में एमबीए सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रही 24 साल की छात्रा 10 फरवरी की दोपहर घर से दस्तावेज अपडेट कराने का कहकर निकली थी। पिता उसे मोती तबेला फायर स्टेशन के पास छोड़कर लौट गए थे। शाम को छात्रा ने छोटी बहन को फोन कर बताया था कि वह द्वारकापुरी की अंकली गली में किराए से रहने वाले अपने सहपाठी पीयूष धामनोदिया के साथ एक दोस्त के जन्मदिन में जा रही है। रात में उसके मोबाइल से बहन को मैसेज आया कि वह घर नहीं आएगी। अगले दिन संपर्क नहीं होने पर 11 फरवरी को परिजनों ने पंढरीनाथ थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
जांच के दौरान पुलिस को छात्रा का नग्न शव उसके घर से करीब आधा किलोमीटर दूर अंकली गली स्थित आरोपी के किराए के कमरे से मिला। शव को कंबल से ढंका गया था और कमरे पर बाहर से ताला लगा हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि छात्रा की हत्या रस्सी से गला घोंटकर की गई। शव पर धारदार हथियार से हमले के निशान भी मिले हैं, जो दरिंदगी की कहानी बयान कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की सटीक परिस्थितियां स्पष्ट होंगी।
लोकेशन मुंबई की मिलते ही भेजी फोटो, ऐसे पकड़ा गया आरोपी
डीसीपी जोन-1 कृष्ण लालचंदानी ने बताया कि आरोपी की तलाश में पुलिस टीमें लगातार सक्रिय थीं। जांच में पता चला कि आरोपी मूल रूप से मंदसौर के कालाखेत रोड का निवासी है और उसके पिता की धानमंडी में किराना दुकान है। पूछताछ में छात्रा के परिजनों ने खुलासा किया कि कॉलेज के वाट्सएप ग्रुप पर छात्रा के मोबाइल से आपत्तिजनक वीडियो वायरल किए गए थे, जिनमें छात्रा का चेहरा स्पष्ट दिख रहा था जबकि युवक ने अपना चेहरा इमोजी से छिपा रखा था। परिजनों ने आरोप लगाया कि पीयूष वीडियो बनाकर छात्रा को ब्लैकमेल कर रहा था और उसके परिचितों को भी वीडियो भेज रहा था। मोबाइल टॉवर लोकेशन मुंबई मिलने पर तत्काल अंधेरी पुलिस स्टेशन को सूचना देकर आरोपी की फोटो भेजी गई, जिसके आधार पर मुंबई पुलिस ने उसे दबोच लिया। अब इंदौर पुलिस आरोपी को शहर लाकर गहन पूछताछ करेगी, जिससे पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने की उम्मीद है।
]]>उज्जैन में ढाई साल बाद लगने वाले सिंहस्थ मेले की तैयारियां जोरों पर है। हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक लेकर अफसरों को तय सयमसीमा में काम करने के निर्देश दिए। 25 से ज्यादा विभागों को अलग-अलग निर्माणों की जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश के बजट में भी सिंहस्थ मद में राशि बढ़ाकर रखी जाएगी, लेकिन इस मद से इंदौर में अभी तक कोई बड़ा काम नही हुआ है, जबकि पिछले दो सिंहस्थ मेलों को दौरान इस मद में इंदौर में भी करोड़ों काम हुए,क्योकि इंदौर उज्जैन का निकटवर्ती शहर है और इंदौर से होकर ही ज्यादातर भक्त उज्जैन जाते है।
सरकार का फोकस उज्जैन की कनेक्टिविटी और शिप्रा नदी के शुद्धिकरण पर है। अफसरों का अनुमान है कि सिंहस्थ मेले मेें पंद्रह करोड़ के करीब लोग सकते है, उसके हिसाब से ही घाटों के विस्तार, मेला क्षेत्र के दायरे के प्रोजेक्ट डिजाइन किए गए है। शाही स्नान के दौरान डेढ़ करोड़ से अधिक भक्तों के आने का अनुमान भी जताया जा रहा है। इंदौर-उज्जैन छह लेन का काम चल रहा है। इसके अलावा इंदौर-उज्जैन फोरलेन का काम भी अब जल्दी ही शुरू होगा, लेकिन इंदौर शहर के लिए अलग से कोई प्रोजेक्ट सिंहस्थ मद में मंजूर नहीं हुआ है।
पिछले सिंहस्थ में बनी थी एमआर-4 सड़क
पिछले सिंहस्थ मेले के समय इंदौर विकास प्राधिकरण को 30 करोड़ रुपये सिंहस्थ मद में मिले थे। यह राशि एमआर-4 के निर्माण पर खर्च की गई थी। इसे लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन से जोड़ा गया था। वर्ष 2004 के सिंहस्थ के समय रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास के अतिक्रमण हटाकर रोड चौड़ी की गई थी,लेकिन इस साल एमआर-12 सड़क इंदौर विकास प्राधिकरण अपने खर्च पर बना रहा है। इसके अलावा कुर्मेडी में बस स्टैंड बनकर तैयार हो चुका है। इसका निर्माण भी प्राधिकरण ने किया है।
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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण होने वाली मृत्यु का दौर जारी है. हालांकि 2 महीने बीतने के बाद भी न तो सरकार मृत्यु का कारण स्पष्ट कर पाई न ही मरने वालों की संख्या सार्वजनिक कर पाई. इस मामले में दायर जनहित याचिका के बाद हाईकोर्ट ने खुद एक सदस्य जांच आयोग गठित किया है. लेकिन इसके बावजूद सरकार भागीरथपुरा की स्थिति पर अब तक नियंत्रण नहीं कर पाई.
भागीरथपुरा में दो लोगों की मौत
नतीजेतन यहां बॉम्बे अस्पताल में बीते कुछ दिनों से भर्ती भागीरथपुरा निवासी 75 वर्षीय शालिग्राम ठाकुर और 2 साल की मासूम रिया जो सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल में भर्ती थी की मौत हो गई. हालांकि नगर निगम कमिश्नर ने विगत दिनों भागीरथपुरा को लेकर दावा किया था कि वहां पानी की लाइन बदलने का काम अंतिम दौर में है वही नर्मदा के पानी की सप्लाई भी शुरू करवा दी गई है. यह बात और है कि अभी भी लोग वहां नलों से आने वाले पानी को पीने से डर रहे हैं.
नगर निगम का दावा इंदौर के हालात सामान्य
हालांकि नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने अपनी ओर से यह मान लिया है कि अब वहां के हालात पूरी तरह सामान्य है. इसलिए निगम ने अब स्वच्छता रैंकिंग पर फोकस कर दिया है. इसे लेकर मंगलवार को आयोजित एक समारोह में इंदौर को नवमी बार स्वच्छता रैंकिंग में पहले नंबर पर लाने के लिए वार्ड बार स्वच्छता अभियान की प्लानिंग की गई है. इसके अलावा शहर को स्वच्छता अभियान को लेकर प्रेरित करने के लिए नए सिरे से स्वच्छता गान तैयार किया गया है.
स्वच्छता की शपथ दिलाई गई
नगर निगम की परिषद में स्वास्थ्य प्रभारी अश्विनी शुक्ल ने बताया कि, ''स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के अंतर्गत स्वच्छता गीत 2025-26 की लाॅचिंग, स्वच्छ वार्ड रैकिंग लाॅचिंग की शुरुआत की गई.'' इसे लेकर आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री व महापौर ने इंदौर के स्वच्छता अभियान में सहयोगी स्वच्छता चैम्पियन का सम्मान तथा 22 जोनल कार्यालय के उत्कृष्ठ सफाई मित्रों का सम्मान किया. इस अवसर पर समस्त उपस्थित जन को स्वच्छता की शपथ दिलाते हुए, आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण की नवीन टूल किट की भी प्रेजेटेंशन के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी गई.
इस दौरान कार्यक्रम मेंं मौजूद केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया का कहना था, ''इंदौर स्वच्छता का महागुरु है, जिससे की अन्य शहर स्वच्छता का पाठ पढ़ते है. इंदौर स्वच्छता का चैम्पियन है, मुझे पुरी उम्मीद है कि इंदौर नवीं बार भी स्वच्छता में नंबर वन आएगा.'' महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, ''इंदौर की स्वच्छता टीम ने इंदौर को आठ बार नंबर वन स्वच्छ शहर बनाने का गौरव हासिल किया. इसके साथ ही इंदौर जैसा बड़ा शहर अपने साथ ही देपालपुर को भी स्वच्छता में नंबर वन बनाने के लिये सहयोग कर रहा है.''
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