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इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट की सारी डिजाइन तय होने और काम शुरू होने के बाद मध्य हिस्से के अंडग्राउंड रुट में बदलाव की तैयारी के कारण मेट्रो प्रोजेक्ट का काम और पिछड़ सकता है, साथ ही लागत भी बढ़ेगी।
शहर विकास को लेकर सोमवार को हुई बैठक में मेट्रो ट्रेन का रूट खजराना क्षेत्र से ही अंडरग्राउंड करने का निर्णय गया। पहले इंदौर में मेट्रो का रुट का अंडरग्राउंड हिस्सा 8.7 किलोमीटर था, लेकिन यदि बदलाव होता है तो अब अंडग्राउंड हिस्सा 12 किलोमीटर हो जाएगा।
मंत्री विजयवर्गीय ने भले ही यह कहा कि रूट के बदलाव में जो लागत बढ़ेगी, उसकी भी व्यवस्था की जाएगी, लेकिन इससे डिजाइन में बड़ा बदलाव करना होगा और स्टेशनों में भी बदलाव होगा, जबकि केंद्र सरकार की तरफ से स्टेशनों का नोटिफिकेशन हो चुका है और प्रशासन ने जरुरत के हिसाब से जमीन भी आवंटित की है। बदलाव के बाद नए सिरे से सर्वे होगा, फिर डिजाइन में बदलाव के बाद कैबिनेट बैठक में इस बारे में अनुमति लेना होगी। इसके बाद केंद्र सरकार से भी मंजूरी मिलेगी। फिर काम नए सिरे से शुरू होगा।
एक हजार करोड़ ज्यादा खर्च
मेट्रो ट्रेक की प्लानिंग में बदलाव के कारण अब एक हजार करोड़ रुपये ज्यादा खर्च होंगे। अभी मेट्रो प्रोेजेक्ट की लागत पंद्रह हजार करोड़ है। बदलाव के बाद लागत और बढ़ेगी। मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट पूरा होने में भी देरी होगी। इसके अलावा अंडग्राउंड हिस्से में अलग से मिट्टी परीक्षण व अन्य परीक्षण होंगे। बंगाली चौराहे वाले हिस्से से अब मेट्रो ट्रेन अंडरग्राउंड होगी। शहर का यह हिस्सा पथरीला है। यहां निर्माण में भी ज्यादा समय लग सकता है।
मेट्रो ट्रेन-फैक्ट फाइल
-इंदौर में मेट्रो का रुट 31 किलोमीटर का है। सुपर काॅरिडोर से रिंग रोड, एमजी रोड, एरोड्रम रोड होते हुए ट्रेन एयरपोर्ट तक जाएगी।
-इंदौर मेट्रो एयरपोर्ट, दो बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन को कवर करेगी। शहर के मध्य हिस्से के ट्रैफिक को कम करने में मददगार साबित होगी।
-हर 30 मिनट के अंतर से मेट्रो ट्रेन चलेगी।शहर में कुल 28 स्टेशनों से ट्रेन गुजरेगी। फिलहाल 15 जगह स्टेशनों का काम चल रहा है। 20 से लेकर 80 रुपये तक मेट्रो ट्रेन का किराया होगा। मेट्रो ट्रेन कार्पोेरेशन ने किराए के लिहाज से मेट्रो रुट को पांच जोन में बांटा है।
-मेट्रो ट्रेन का संचालन सुबह आठ बजे से शुरू होगा और रात आठ बजे तक चलेगी। । फिलहाल मेट्रो का संचालन सात किलोमीटर हिस्से में होगा। यहां मेट्रो का किराया अधिकतम 30 रुपये होगा।
– 20 से ज्यादा मेट्रो ट्रेन का संचालन होगा। एक ट्रेन में साढ़े चार सौ यात्री संवार हो सकेंगे। बैठने के अलाए खड़े रहकर सफर करने में भी आसानी होगी।
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ऐसे में टर्मिनल बिल्डिंग की कैनोपी वाले हिस्से में जमीन के करीब 15 मीटर नीचे इस अंडर ग्राउंड पैसेज में जाने का प्रवेश व निकासी गेट बनाया जाएगा। इस संबंध में मेट्रो कंपनी के अधिकारियों की दिल्ली में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों के साथ चर्चा में सहमति बनी। अंडर ग्राउंड पैसेज में स्वचलित ट्रेवलेटर लगाया जाएगा।
ट्रेवलेटर से पहुंच सकेंगे मेट्रो स्टेशन तक
ऐसे में भविष्य में एयरपोर्ट से उतरने वाले यात्री मेट्रो स्टेशन तक ट्रेवलेटर पर खड़े हो मेट्रो स्टेशन तक पहुंच सकेंगे। गौरतलब है कि पहले एयरपोर्ट प्रबंधन द्वारा बाउंड्रीवाल के पास तक ही मेट्रो का प्रवेश व निकासी गेट बनाने पर सहमति दी गई थी। मेट्रो प्रबंधन चाहता था कि टर्मिनल बिल्डिंग के अंदर तक मेट्रो के अंडर ग्राउंड पैसेज से प्रवेश व निकासी की व्यवस्था की जाए।
इस पर एयरपोर्ट प्रबंधन सहमत नहीं हुआ। इसके बाद एयरपोर्ट टर्मिनल इमारत के प्रवेश व निकासी के गेट के बाहर वाले हिस्से में टर्मिनल के सामने प्रवेश व निकासी गेट बनाने पर सहमति बनी। अंडर ग्राउंड पैसेज टर्मिनल इमारत के सामने पिक एंड ड्राप लेन के लिए नीचे से जाएगी।
दो हिस्सो में तैयार करने की योजना
ऐसे में मेट्रो प्रबंधन द्वारा अंडर ग्राउंड हिस्सों को दो हिस्सों में तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। एयरपोर्ट से रीगल तक प्रस्तावित हिस्सा एक एजेंसी को देकर काम शुरू करवाया जाएगा। मेट्रों के अंडर ग्राउंड हिस्से को रीगल से बंगाली चौराहे तक बढ़ाने पर बजट भी बढ़ रहा है। ऐसे में राशि स्वीकृत होने के बाद मेट्रो के दूसरे अंडर ग्राउंड हिस्से के लिए दूसरी एजेंसी तय की जाएगी।
गांधी नगर से एयरपोर्ट की ओर किया जा रहा निर्माण
गांधी नगर स्टेशन से एयरपोर्ट की ओर मेट्रो के ओवरहेड हिस्से के निर्माण के लिए भुजा का निर्माण किया जा रहा है। गांधी नगर नगर चौराहे से एयरपोर्ट तक मेट्रो का ढलान रहेगा और मेट्रो अंडर ग्राउंड होगी। इस वजह से मेट्रो पिलर को यहां से ढलान देने के लिए पिलर का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है।
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