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बीते साल पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. इसके साथ ही भारत ने सिंधु नदी तंत्र की नदियों के पानी को रोकने के लिए काम भी शुरू कर दिया था. इसके लिए भारत ने कई प्रोजेक्ट्स पर एक साथ काम शुरू किया था. इसी क्रम में रावी नदी पर बन रहे शाहपुर कांडी डैम का काम पूरा होने वाला है. इस डैम के बनने के बाद भारत से रावी नदी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान नहीं जाएगा. यह डैम पंजाब-जम्मू-कश्मीर बॉर्डर के पास बन रहा है. काफी लंबे समय से यह प्रोजेक्ट चल रहा था. इससे पाकिस्तान की परेशान और बढ़ने वाली है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राणा ने सोमवार को कहा कि इस साल 31 मार्च तक इस बांध का काम पूरा हो जाएगा. इस बांध के बनने के बाद सूखा प्रभावित कठुआ और सांबा जिले में सिंचाई की सुविधाएं विकसित हो सकेंगी. इस बांध के बनने के बाद पंजाब में पांच हजार हेक्टेयर और जम्मू क्षेत्र के कठुआ और सांबा में 32,172 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा विकसित होगी. इस सिंचाई परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 485 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है.
सिंधु जल संधि के दायरे में नहीं आती यह नदी
राज्य के पूर्व सिंचाई मंत्री ताज मोहिदीन ने कहा कि यह बांध सिंधु जल संधि के दायरे में नहीं आता है, क्योंकि रावी नदी के पानी पर भारत का विशेष अधिकार है. हालांकि राणा ने कहा कि इस संधि को स्थगित किए जाने के बाद राज्य में बांध परियोजनाओं में तेजी आई है. 1960 के दशक में हुई इस संधि के तहत सतलुज, ब्यास और रावी नदी के पानी पर भारत को अधिकार मिला था, जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का पानी पाकिस्तान को देने की बात कही गई थी. पहलगाम हमले के बाद भारत ने इस संधि को स्थगित कर दिया था. संधि स्थगित होने बाद भारत नदियों के पानी को लेकर डेटा शेयर करना बंद कर दिया था. इसके साथ ही सिंधु तंत्र के पश्चिमी नदियों के पानी का इस्तेमाल बढ़ा देगा.
मात्र 8 साल में बन गया बांध
रिपोर्ट में कहा गया है कि रावी के पानी पर भारत का अधिकार है. बावजूद इसके बांध न होने से काफी पानी पाकिस्तान चला जाता था और पंजाब-जम्मू के इलाके सूखे रह जाते थे. इस बांध के बनने से बेकार होने वाले पानी का इस्तेमाल बढ़ेगा. इस प्रोजेक्ट को सबसे पहले नवंबर 2001 में मंजूरी मिली थी. लेकिन, दो राज्यों के बीच विवाद के कारण काम काफी दिनों तक रुका रहा. लंबी बातचीत के बाद सितंबर 2018 में पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच सहमति बनी और उसके बाद काम शुरू हो सका. उसी साल यानी 6 दिसंबर 2018 को केंद्रीय कैबिनेट इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी. इसके बाद करीब आठ सालों में इस बांध का काम पूरा हो गया.
]]>डार ने यांग से कहा कि भारत की ओर से इस संधि का उल्लंघन किया जा रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र और दुनिया की संस्थाओं को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और भारत पर दबाव डाला जाना चाहिए। पाक मीडिया के मुताबिक, इशाक डार ने फिलेमोन यांग से अपनी बैठक में खासतौर से भारत को चर्चा का केंद्र रखा। डार ने भारत के आक्रामक रुख, ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि से पाकिस्तान को हो रही परेशानी से यांग को अवगत बताया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है पाक
पाकिस्तान फिलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है। उसे रोटेशन के आधार पर ये पद मिला है। ऐसे में उसकी कोशिश इसका फायदा भारत विरोधी रुख को बढ़ाने के लिए करने की है। पाक चाहता है कि कश्मीर और सिंधु जल संधि को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर उठाया जाए। इसके लिए पाकिस्तान की कोशिश जारी है।
इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष के सामने एक बार फिर कश्मीर कैा मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पाकिस्तान की पुरानी बयानबाजी को दोहराते हुए कहा कि कश्मीर में भारत की ओर से लगातार मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
शांति से हो जाए समाधान
इशाक डार ने अंतर्राष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के माध्यम से बातचीत के माध्यम से पाकिस्तान और भारत के बीच सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया।
पहलगाम के बाद शुरू हुआ विवाद
भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव की शुरुआत 22 अप्रैल के बाद हुई। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की बर्बरता से हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ कई स्तरों पर संबंध तोड़ने का फैसला लिया।
भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय भी लिया है। ये संधि भारत-पाक में नदियों का पानी बांटती है। भारत ने इस समझौते से हटते हुए पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोकने की बात कही है। इससे पाकिस्तान में चिंता बढ़ी हुई है।
]]>पाकिस्तान की बडे़ पैमाने पर खेती-बाड़ी सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर निर्भर है। अगर इन नदियों के जलस्तर में कमी आई तो पाकिस्तान दाने-दाने को मोहताज हो जाएगा और बूंद-बूंद पानी को तरस जाएगा।
पाक पीएम शहबाज शरीफ ने नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर के दौरे के दौरान इस मसले पर बात की। सरकारी न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक, उन्होंने कहा कि दुश्मन जल समझौते के खिलाफ कदम उठाना चाहता है।
जियो न्यूज के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने देश में जल भंडारण क्षमता बढ़ाने का फैसला किया है। ऐसे में उन्होंने संभावित विभागों को वाटर स्टोरेज परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। शरीफ ने भारत पर झुंझलाहट निकालते हुए कहा कि देश में पानी की सुरक्षा को लेकर फैसला लेना जरूरी है क्योंकि दिल्ली की मंशा पानी को हथियार बनाने की है।
भारत नहीं तोड़ सकता सिंधु समझौता
शहबाज शरीफ ने देश का जल भंडारण बनाने की बात कही तो साथ ही भारत पर गुस्सा भी निकाला। उन्होंन कहा कि भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का ऐलान किया है लेकिन वह इसे एकतरफा तरीके से निलंबित नहीं कर सकता है। शरीफ ने स्थायी मध्यस्थता न्यायालय के आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत ने भी साफ किया है भारत को सिंधु जल संधि को एकतरफा निलंबित करने का कोई अधिकार नहीं है।
शरीफ ने आगे कहा, 'सिंधु जल संधि पर अंतरराष्ट्रीय बाध्यताओं के बावजूद पाकिस्तान के लिए भारत के इरादे अच्छे नहीं हैं। वह पानी को हमारे खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की तरफ देख रहा है। इस खतरे को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने अपनी प्रांतों की सरकारों के साथ गैर-विवादास्पद जल भंडारण क्षमता परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का फैसला किया है।
पहलगाम के बाद शुरू हुआ विवाद
भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव की शुरुआत 22 अप्रैल के बाद हुई। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की बर्बरता से हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ कई स्तरों पर संबंध तोड़ने का फैसला लिया। इसमें सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय भी है। ये संधि भारत-पाक में नदियों का पानी बांटती है। भारत ने इस समझौते से हटते हुए पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोकने की बात कही है।
'हम पानी को स्टोर करने के लिए कोशिशें करेंगे'
शहबाज शरीफ ने कहा, "हमारी हुकूमत ने फैसला किया है कि हम अपनी पानी के भंडार बनाएंगे।" उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तानी सरकार पानी को बरतने के तरीके पर काम करेगी और भंडारण इसमें अहम कड़ी होगी, जिसमें डायमर भाशा डैम जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।
उन्होंने कहा, "हम अपनी ताकत से अगले कुछ सालों में पानी को स्टोर करने की क्षमता तैयार कर लेंगे। इसमें नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी का अहम किरदार होगा।"
पहलगाम हमले के बाद अब पाकिस्तान को सता रही पानी की चिंता
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाए। भारत सरकार ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया। ये समझौता दोनों मुल्कों के बीच पानी के बंटवारे का अहम जरिया है। पाकिस्तान का मानना है कि पानी के बहाव में किसी भी तरह की रुकावट उसकी खेती के लिए बड़ा खतरा है।
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बताया जा रहा कि यह इस्तीफा सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर नागरिक प्रशासन और सेना के बीच मतभेदों के कारण हुआ है। सूत्रों के अनुसार, WAPDA और पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय के भीतर भी मतभेद थे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गनी का इस्तीफा मंजूरी के लिए कैबिनेट डिवीजन को भेज दिया है।
कुछ लोगों का कहना है कि पाकिस्तान का नागरिक प्रशासन सेना के बड़े अधिकारियों को सिंधु जल संधि रोकने के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है। उनका मानना है कि सेना की वजह से ही भारत ने यह कदम उठाया। लेफ्टिनेंट जनरल सज्जाद गनी (रिटायर्ड) को अगस्त 2022 में WAPDA का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
कौन हैं सज्जाद गनी, जिन्होंने दिया इस्तीफा
सज्जाद गनी एक कश्मीरी हैं। उनके पिता अभिनेता अहमद ताहा गनी हैं। सेना में वह जीओसी 19 DIV (झेलम) थे। 2009 में वह उत्तरी स्वात के मुख्यालय चले गए। स्वात में रहने के दौरान गनी पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे। बाद में, उन्होंने पाकिस्तान सेना के 5 कोर कराची (2013-2015) का नेतृत्व किया। कोर कमांडर के रूप में, उन्होंने दक्षिणी पाकिस्तान में ऑपरेशनल तैयारियों की निगरानी की। वह 2016 में सेना से सेवानिवृत्त हुए। गनी को 17 अगस्त, 2022 को कोट अदु पावर कंपनी (KAPCO) के निदेशक मंडल में भी नियुक्त किया गया था।
सिंधु जल संधि पर भारत की पाकिस्तान को खरी-खरी
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद बहुत खराब हो गए थे। इसके बाद नई दिल्ली ने सिंधु जल संधि को रोक दिया था। केंद्र सरकार का कहना है कि IWT तब तक रुकी रहेगी, जब तक इस्लामाबाद सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह से बंद नहीं कर देता। भारत का कहना है कि पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते। इसका मतलब है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक सिंधु नदी के पानी पर समझौता सस्पेंड रहेगा।
]]>पाकिस्तान सरकार के इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) की रिपोर्ट के अनुसार इस साल 16 जून को सिंधु नदी से सिंध प्रांत को 1.33 लाख क्यूसेक पानी मिला। पिछले साल इसी दिन 1.6 लाख क्यूसेक पानी मिला था। यानी यह लगभग 17% की कमी है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत को भी इस साल पिछली बार से थोड़ा कम पानी मिला है। इस साल उसे 1.26 लाख क्यूसेक पानी मिला है, जबकि पिछले साल 1.29 लाख क्यूसेक पानी मिला था। यह 2.25% की कमी है।
खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा असर
इंडस वॉटर ट्रीटी के पूर्व आयुक्त और केंद्रीय जल आयोग के पूर्व प्रमुख एके बजाज ने पाकिस्तान में आए इस जल संकट को लेकर बात की.उनका कहना था कि पाकिस्तान में सिंधु नदी से जुड़ी नदियों और जलाशयों में पानी कम बचा है. इससे वहां के किसानों के सामने संकट पैदा हो गया है.पाकिस्तान में इन दिनों खरीफ फसलों की बुवाई चल रही है.ऐसे में पानी के संकट का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी पड़ रहा है. मुश्किल यह है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मॉनसून जून के आखिरी में या जुलाई के पहले हफ्ते तक पहुंचता है. इसका मतलब यह हुआ कि अगले तीन हफ्ते में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पानी का संकट और बड़ा हो सकता है.
भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के बाद पाकिस्तान से इंडस रिवर सिस्टम से जुड़ी नदियों के जलस्तर के बारे में जानकारी शेयर करना बंद कर दिया है. ऐसे में जब मॉनसून सीजन के दौरान इंडस रिवर सिस्टम से जुड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ेगा तो इससे पाकिस्तान में बाढ़ का खतरा और बड़ा हो सकता है. ऐसे में पाकिस्तान को आपदा झेलनी पड़ सकती है.
भारत ने स्थगित किया सिंधु जल समझौता
भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया था. भारत-पाकिस्तान ने यह संधि 1960 में की थी.इसके तहत सिंधु वाटर सिस्टम की तीन पूर्वी नदियों का पानी भारत इस्तेमाल कर सकता है. वहीं तीन पश्चिमी नदियों के पानी पर पाकिस्तान को अधिकार दिया गया था.
पाकिस्तानी नदियों-जलाशयों में खत्म होने लगा पानी
रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में सिंधु नदी से जुड़ी नदियों और जलाशयों में कम पानी बचा है। खरीफ की फसलों की बुआई का समय है और ऐसे में पानी की कमी किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। मानसून आने में अभी कम से कम दो हफ्ते बाकी हैं, इसलिए स्थिति और खराब हो सकती है। सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद भारत ने पाकिस्तान को नदियों के जल स्तर की जानकारी देना भी बंद कर दिया है। इससे पाकिस्तान को बाढ़ की तैयारी करने में मुश्किल हो सकती है। अगर भारत में नदियों का जल स्तर बढ़ता है तो पाकिस्तान को बाढ़ से निपटने में परेशानी हो सकती है।
1960 में हुई भारत-पाकिस्तान सिंधु जल संधि क्या है
सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच कई तनावों के बावजूद बनी रही। लेकिन, 22 अप्रैल को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इसे निलंबित कर दिया। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। विश्व बैंक ने इस संधि को कराने में मदद की थी। संधि के अनुसार, भारत को सिंधु नदी की तीन पूर्वी सहायक नदियों – रावी, ब्यास और सतलुज के जल पर पूरा अधिकार है। वहीं, पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों,सिंधु, झेलम और चिनाब से लगभग 135 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी मिलता रहा है। ये सभी नदियां भारत से पाकिस्तान की ओर बहती हैं। पाकिस्तान ने संधि के निलंबन पर आपत्ति जताई है। लेकिन, भारत का कहना है कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।' मतलब, जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक पानी साझा नहीं किया जा सकता।
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