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कीमत कम हुई तो मुकाबला हुआ और दिलचस्प
कुछ समय पहले तक iPhone 16 को प्रीमियम विकल्प माना जाता था, जबकि iPhone 15 बजट के हिसाब से बेहतर डील माना जाता था. लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. ऑनलाइन सेल, बैंक ऑफर और एक्सचेंज डील्स की वजह से दोनों डिवाइसेज की कीमतों में अंतर कम हो गया है.
यही कारण है कि अब फैसला सिर्फ कीमत पर नहीं, बल्कि लंबे समय तक मिलने वाली वैल्यू और फीचर्स पर भी निर्भर करता है. कई खरीदारों के लिए यह तय करना आसान नहीं है कि अतिरिक्त रकम खर्च करने का फायदा वास्तव में मिलेगा या नहीं.
प्रॉसेसर में है सबसे बड़ा अंतर
दोनों स्मार्टफोन देखने में काफी हद तक एक जैसे लगते हैं, लेकिन अंदर की ताकत अलग है. iPhone 15 में ए16 बायोनिक चिपसेट मिलता है, जबकि iPhone 16 में नया ए18 प्रॉसेसर दिया गया है.
रोजमर्रा के इस्तेमाल में दोनों फोन शानदार परफॉर्मेंस देते हैं. सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग, मल्टीटास्किंग और गेमिंग जैसे काम दोनों डिवाइसेज आसानी से संभाल लेते हैं. हालांकि आने वाले वर्षों में नए फीचर्स और सॉफ्टवेयर अपडेट्स के मामले में iPhone 16 को बढ़त मिल सकती है. जो लोग 4 से 5 साल तक एक ही फोन इस्तेमाल करने का सोच रहे हैं, उनके लिए यह एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है.
कैमरा क्वाॅलिटी में दोनों हैं दमदार
फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए अच्छी खबर यह है कि दोनों स्मार्टफोन्स में 48 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा मिलता है. इससे हाई-क्वाॅलिटी फोटो और वीडियो कैप्चर किये जा सकते हैं.
iPhone 16 में कैमरा सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए कुछ सुधार किए गए हैं, लेकिन सामान्य यूजर के लिए दोनों फोन्स के बीच का अंतर बहुत बड़ा महसूस नहीं होगा. अगर आप पुराने iPhone या किसी एंड्रॉयड फोन से अपग्रेड कर रहे हैं, तो दोनों ही डिवाइस कैमरा के मामले में बड़ा सुधार साबित हो सकते हैं.
बैटरी और रोजमर्रा का अनुभव
बैटरी लाइफ के मामले में iPhone 16 को उसके नए प्रॉसेसर का फायदा मिलता है. बेहतर पावर एफिशिएंसी की वजह से यह थोड़ी लंबी बैटरी लाइफ देने में सक्षम है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि iPhone 15 कमजोर है. सामान्य उपयोग में यह भी पूरे दिन आराम से साथ निभा सकता है.
दोनों फोन्स में यूएसबी-सी पोर्ट, डायनामिक आइलैंड और प्रीमियम बिल्ड क्वाॅलिटी जैसे फीचर्स मौजूद हैं. यानी दैनिक उपयोग का अनुभव दोनों में काफी स्मूद और फ्लैगशिप स्तर का मिलता है.
किसके लिए सही है iPhone 15 और किसे लेना चाहिए iPhone 16?
अगर आपका मकसद कम बजट में Apple इकोसिस्टम में एंट्री लेना है, तो iPhone 15 अभी भी सबसे आकर्षक विकल्पों में से एक है. इसमें वे लगभग सभी जरूरी फीचर्स मिल जाते हैं जिनकी आम यूजर को जरूरत होती है.
वहीं अगर आप लेटेस्ट हार्डवेयर चाहते हैं, भविष्य में आने वाले एआई फीचर्स का फायदा उठाना चाहते हैं और लंबे समय तक फोन बदलने का इरादा नहीं है, तो iPhone 16 ज्यादा समझदारी भरा विकल्प साबित हो सकता है.
कुल मिलाकर फैसला कीमत के अंतर पर निर्भर करेगा. यदि iPhone 15 काफी कम कीमत में उपलब्ध है, तो यह 2026 में भी सबसे वैल्यू-फॉर-मनी iPhones में शामिल रहेगा. लेकिन अगर दोनों मॉडल्स के बीच अंतर बहुत कम है, तो iPhone 16 पर थोड़ा अतिरिक्त खर्च भविष्य के लिए बेहतर निवेश साबित हो सकता है.
]]>Apple के आईफोन की पॉपुलैरिटी किसी से छिपी नहीं है. कंपनी अब iPhone 18 सीरीज को अनवील करेगी, जिसके बाद कंपनी iPhone 18 Pro और 18 Pro Max को भी लॉन्च करेगी. इसके लिए कंपनी हर साल सितंबर में इवेंट आयोजित करती है और इस बार सितंबर में लॉन्चिंग की उम्मीद है।
हाल ही के दिनों में iPhone 18 Pro और 18 Pro Max को लेकर ढेरों लीक्स और जानकारियां सामने आई हैं. हालांकि कंपनी की तरफ से किसी भी जानकारी की कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं दी गई है।
iPhone 18 Pro सीरीज का डिजाइन
अपकमिंग iPhone सीरीज के डिजाइन लैंग्वेज में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं किया जाएगा. कंपनी आगे भी एल्युमिनियम फ्रेम का यूज करना जारी रखेगी. साथ ही कंपनी एक नया कलर वेरिएंट लॉन्च कर सकती है. अपकमिंग डिवाइस की थिकनेस 8.8mm तक पहंच सकती है।
डिस्प्ले की बात करें तो फ्रंट पर ऐपल डाइनैमिक आइलैंड को रिमूव करने की जगह उसका साइज घटाया जा सकता है. ऐसा करने से यूजर्स को ज्यादा बड़ा डिस्प्ले मिलेगा।
iPhone 18 Pro max में 6.9 इंच का OLED डिस्प्ले पैनल दिया जा सकता है, जिसके अंदर प्रो-मोसश सपोर्ट और 120hz का रिफ्रेश रेट्स मिलेगा।
A20 Pro चिपसेट का यूज किया जाएगा
ऐपल अपकमिंग आईफोन सीरीज में A20 Pro चिपसेट का यूज करेगी, जिसको 2 नैनोमीटर (2nm) प्रोसेस पर तैयार किया जा सकता है. आने वाले डिवाइस में परफॉर्मेंस से लेकर बैटरी एफिसिएंसी को बेहतर किया जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में लॉन्च होने वाले iPhone 18 Pro और 18 Pro Max में 5,100mAh से 5,200mAh तक की बैटरी का यूज किया जा सकता है।
बेहतर होगा कैमरा
iPhone 18 और 18 Pro सीरीज के अंदर लॉन्च होने वाले डिवाइस को लेकर बताया गया है कि इसके कैमरा सेंसर बेहतर होंगे. मेन सेंसर में वेरिएबल अपर्चर को दिया जा सकता है, जिसमें ज्यादा बेहतर कंट्रोल भी मिलेगा. कंपनी सैमसंग द्वारा तैयार किए गए नए सेंसर टेक्नोलॉजी का यूज करेगी।
iPhone 18 Pro सीरीज कब होगी लॉन्च
iPhone 18 और iPhone 18 Pro सीरीज की लॉन्चिंग टाइम लाइन को लेकर अभी तक कंपनी ने कोई ऑफिशियल जानकारी शेयर नहीं की है. लेकिन हर साल की तरह ही इस साल भी कंपनी न्यू आईफोन सीरीज को सितंबर में लॉन्च कर सकती है।
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रिपोर्ट में कहा गया कि एप्पल वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष लगभग 22-23 करोड़ आईफोन का उत्पादन करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। इसकी वजह सरकार द्वारा प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) के तहत मिलने वाला प्रोत्साहन है। पीएलआई के तहत मिलने वाले प्रोत्साहन ने चीन की तुलना में कमजोर आपूर्ति श्रृंखलाओं और रसद संबंधी चुनौतियों जैसी संरचनात्मक लागत संबंधी कमियों को दूर करने में मदद की है।
एप्पल अब भारत में फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और पेगाट्रॉन कॉर्प जैसे आपूर्तिकर्ताओं के माध्यम से आईफोन 17 सीरीज के सभी मॉडल, जिनमें प्रो और प्रो मैक्स मॉडल भी शामिल हैं, का निर्माण करती है। आईफोन 15 और 16 जैसे पुराने मॉडल घरेलू बिक्री और निर्यात के लिए स्थानीय स्तर पर ही बनाए जा रहे हैं। भारत में बिक्री 9 अरब डॉलर से अधिक हो जाने के बाद, एप्पल अपने रिटेल नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और अब इसके छह स्टोर हो चुके हैं। साथ ही, कंपनी इस साल के अंत में भारत में एप्पल पे लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।
इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत से निर्यात होने वाली सबसे मूल्यवान वस्तु एप्पल का आईफोन बन गया है। इस दौरान देश में स्थित प्लांट्स से एप्पल ने लगभग 23 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन निर्यात किए गए, जिनमें से अधिकतर अमेरिका भेजे गए। जनवरी-दिसंबर की अवधि में कुल 30.13 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात के साथ, स्मार्टफोन पहली बार भारत की शीर्ष निर्यात श्रेणी बन गई है। कुल स्मार्टफोन निर्यात में एप्पल की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही है।
]]>फोन के एंटीना नहीं होते इतने पावरफुल
Apple ने iPhone 14 के साथ सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS की शुरुआत की थी। इस फीचर के साथ कंपनी ने लोगों को चौंका दिया था। यूजर्स अपने आईफोन को लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट की ओर पॉइंट करके इमरजेंसी सर्विस से संपर्क कर सकते हैं। लेकिन फोन के अंदर दिए गए एंटीना का सरफेस एरिया और पावर सीमित होती है, इसलिए डेटा ट्रांसमिशन भी सीमित हो जाता है। बिल्डिंग, पेड़ और जमीन के कारण सैटेलाइट के साथ कनेक्शन बनाए रखना में मुश्किल आती है।
कवर बड़े ग्रुप के साथ बनाता है कनेक्शन
इस समस्या को हल करने और अपनी सैटेलाइट SOS को और भी बेहतर बनाने के लिए Apple ने एक हटाने वाले कवर के लिए पेटेंट फाइल किया है। इसे फेज्ड ऐरे एंटीना के तौर पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सिग्नल बीम बनाने और उन्हें चलाने के लिए कई ट्रांसमीटर और रिसीवर का इस्तेमाल करता है। कवर किसी एक सैटेलाइट पर लॉक होने के बजाय बड़े ग्रुप के साथ कनेक्शन बनाए रखता है। यह आसमान में घूमते हुए सैटेलाइट के बीच आसानी से शिफ्ट हो सकता है। पेटेंट के इलस्ट्रेशन में एक फोल्ड-आउट कवर दिखाया गया है। यह आसमान की ओर पॉइंट करता है और डेडिकेटेड रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) लिंक या नियर-फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) के जरिए iPhone के साथ सिंक होता है।
ज्यादा डेटा भेजने में मिलेगी मदद
केस में एक बड़ा एंटीना लगा है, जो iPhone को ज्यादा डेटा भेजने में मदद कर सकता है। इसके बाद, फोन शायद ज्यादा सैटेलाइट कनेक्टिविटी को सपोर्ट कर सकता है। यह होने वाली रुकावट को कम कर सकता है और ट्रांसमिशन की ताकत को भी बढ़ा सकता है। हालांकि, इसे कब मार्केट में लाया जाएगा या नहीं, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। लेकिन ये साफ है कि आईफोन कवर के साथ अगर एनटीना लगा होगा तो SOS सर्विस काफी बेहतर हो जाएगी।
एक शख्स के लिए उसके iPhone का खो जाना बेहद फायदेमंद साबित हुआ। दरअसल Reddit यूजर 'ScienceFuture2300' ने आप बीती शेयर करते हुए बताया कि किस तरह उसका 256GB स्टोरेज वाला iPhone 17 Pro Max खो गया था। इसके बाद जब उसने AppleCare+ प्लान के तरह फोन के चोरी या गुमशुदगी का क्लेम फाइल किया, तो ऐपल ने उसे 8 गुना ज्यादा स्टोरेज वाला iPhone लौटा दिया। गौर करने वाली बात है कि इस शख्स का iPhone सिर्फ 256 GB का था लेकिन बदले में उसे 2TB वाला मॉडल मिल गया।
सर्विस सेंटर की गलती से यूजर की मौज
रेडिट पर शेयर किया गया ये मामला,(REF.) काफी दिलचस्प है। Reddit यूजर 'ScienceFuture2300' को उनके 256GB वाले iPhone 17 Pro Max के बदले 2TB वाला मॉडल थमा दिया गया। इसे लेकर यूजर ने अपने पोस्ट में फोन के सीरियल नंबर और स्टोरेज से जुड़ी तस्वीरें भी शेयर की हैं। बता दें कि iPhone के सीरियल नंबर के जरिए पता लगाया जा सकता है कि फोन नया है या Apple द्वारा रिप्लेस किया गया यूनिट।
खोने पर क्यों मिला रिप्लेसमेंट?
आपके मन में सवाल आ सकता है कि इस यूजर को आखिर फोन खोने पर रिप्लेसमेंट क्यों मिला। बता दें कि AppleCare+ प्लान लेने पर यूजर फोन खराब होने, टूटने और खो जाने पर ऐपल से रिप्लेसमेंट मांग सकता है। iPhone के टूटने या खराब होने पर अगर फोन रिपेयर हो सकता है, तो ऐपल फोन ठीक करके देता है।
वहीं अगर फोन ठीक होने की हालत में न हो या खो जाए, तो AppleCare+ प्लान के तहत बदले में फोन उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए कुछ चार्ज ऐपल लेता है। हालांकि जिस फोन के खोने की शिकायत की जाती है, उसे ऐपल बैकएंड से ब्लॉक कर देता है ताकि उसका इस्तेमाल कोई न कर पाए।
ऐपल ने क्यों दिया ज्यादा महंगा फोन?
कई बार यूजर जिस फोन के लिए क्लेम करता है, वह अगर ऐपल के पास न हो तो ऐपल हर्जाने के तौर पर उससे बेहतर मॉडल अपने यूजर को उपलब्ध कराता है। ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि संभव है इस यूजर के फोन का मॉडल ऐपल के पास स्टॉक में नहीं होगा। इसके साथ ही ऐसा होने पर ऐपल किसी तरह का एक्सट्रा चार्ज नहीं लेता। ऐसा ही इस यूजर के साथ भी हुआ है।
Apple ने पहले भी दिखाई है उदारता
ऐसा पहली बार नहीं है कि ऐपल ने किसी के साथ इतनी उदारता दिखाई हो। 2018 में इंटेल मैकबुक प्रो के मालिक को रिपेयर के बदले सीधे M4 Max चिप वाला मैकबुक प्रो दे दिया गया था। इसी तरह 2019 में मैकबुक प्रो के मालिक को M5 मॉडल वाला लेटेस्ट मैकबुक प्रो रिप्लेसमेंट में मिला था। यही वजह है कि अक्सर लोग ऐपल के प्रोडक्ट लेते समय Apple का Care+ प्लान जरूर लेते हैं।
सिंगरौली जिले की एक महिला ने आईफोन की खरीद में धोखाधड़ी का दावा किया है.महिला ने इसकी शिकायत कोतवाली थाने में भी की है. बलियरी निवासी महिला संतोषी साकेत ब्यूटी पार्लर चलाती है.उसने शहर के कॉलेज मोड़ स्थित एक शॉप से 49 हजार 700 रुपए में इस आई फोन को खरीदा था.
संतोषी साकेत ने बताया कि पिछले वर्ष अक्टूबर माह में क्लासिक कंप्यूटर एंड मोबाइल शॉप से उसने आई फोन खरीदा था.एक दो माह बाद आईफोन के कई फीचर्स ठीक से काम नहीं कर रहे थे.खराबी समझ में आने पर फोन को ठीक कराने जबलपुर स्थित सर्विस सेंटर ले गई थी.12 दिन बाद जब वह वापस फोन लेने गई तो बताया गया कि उसका आईफोन मोडिफाइड है.
महिला के मुताबिक आईफोन का ब्ल्यूटूथ,कैमरा और वाईफाई सही से काम नहीं कर रहे थे.सर्विस सेंटर से वापस आने के बाद 8 महीने से संतोषी साकेत दुकानदार से आईफोन को बदलने या मरम्मत करने की मांग कर रही थी.पीड़ित महिला ने बताया कि दुकानदार फोन के डैमेज होने का बहाना बना रहा है. जिसके बाद अब पीड़ित महिला ने धोखाधड़ी की शिकायत कोतवाली पुलिस के पास की है.जिसकी जांच की जा रही है.
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दुनिया में हर पांचवां आईफोन भारत में बना
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब दुनिया में बनने वाले हर पांच आईफोन में से एक भारत में बन रहा है। यह $22 बिलियन का आंकड़ा आईफोन की फैक्ट्री से निकलने वाली कीमत है। यह उसकी रिटेल बिक्री कीमत। इस उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा फॉक्सकॉन की दक्षिण भारत स्थित विशाल फैक्ट्री से आता है। टाटा ग्रुप जिसने विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन के ऑपरेशन्स को अपने नियंत्रण में ले लिया है वह ऐपल की भारत बेस्ड सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इन सबमें बड़ी भूमिका सेमीकंडक्टरों की है, जिसे लेकर अमेरिका और चीन के बीच बड़ी जंग छिड़ी हुई है।
सेमीकंडक्टर क्या हैं, इसे समझते चलिए
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरूरी कंपानेंट्स में से एक अर्धचालक यानी सेमीकंडक्टर है, जिसे एकीकृत सर्किट (IC) भी कहा जाता है। सेमीकंडक्टर माइक्रोचिप्स आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, यातायात, स्वास्थ्य सेवा, सैन्य प्रणाली, संचार को सक्षम बनाते हैं। माइक्रोचिप्स इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आवश्यक हैं: रेडियो, टीवी, कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन, वाहन और मेडिकल डायग्नोस्टिक उपकरण। माइक्रोचिप्स इतने महत्वपूर्ण हैं कि कुछ लोग उन्हें 21वीं सदी का 'नया तेल' भी कहते हैं। ऐपल आईफोन के लिए ये जरूरी चीज है। बीते साल Apple ने भारत में भी सेमीकंडक्टर चिप्स के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए चर्चा की है, जिससे भारत में भी चिप्स का निर्माण शुरू हो सके।
ऐपल आईफोन के लिए 2026 मील का पत्थर
ऐपल आईफोन के लिए सेमीकंडक्टर बनाने वाली प्रमुख कंपनी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट के अनुसार, ऐपल को 2026 तक सेमीकंडक्टर चिप्स की बड़ी मात्रा में जरूरत होगी। तब तक आईफोन निर्माता अपनी वैश्विक विनिर्माण क्षमता का 26 प्रतिशत भारत में ट्रांसफर कर चुके होंगे। ऐपल की वर्तमान सेमीकंडक्टर खपत लगभग 72 बिलियन डॉलर है, क्योंकि इसके सभी हाई क्वालिटी प्रोडॅक्ट जैसे आईफोन, आईपैड, मैक, ऐपल वॉचेज और एयरपॉड्स सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में भारत की संभावना इस मामले में काफी बड़ी है।
ट्रंप के टैरिफ को देखते हुए ऐपल ने बढ़ाया एक्सपोर्ट
ऐपल ने पिछले वित्तीय वर्ष में भारत से 1.5 ट्रिलियन रुपए (लगभग $17.4 बिलियन) के आईफोन निर्यात किए। अमेरिका को होने वाले शिपमेंट में तब तेजी आई, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में 'रेसिप्रोकल' टैरिफ की घोषणा की। इसके बाद ऐपल ने भारत से निर्यात को तेजी से बढ़ाया। हालांकि, हाल ही में हुई घोषणा में स्मार्टफोन सहित इलेक्ट्रॉनिक्स को उन टैरिफ से छूट दी गई थी, लेकिन चीन पर लगने वाले बाकी टैक्स (कुल 245%) अभी भी लागू हैं। ट्रंप का चीन से आने वाले सामान पर 20% का अलग शुल्क, जिसका उद्देश्य फेंटानिल को लेकर बीजिंग पर दबाव डालना है, वह भी अभी जारी है।
भारत में बने डिवाइस पर अमेरिका नहीं लगाता टैक्स
ऐपल के लिए भारत एक अपेक्षाकृत सुरक्षित जगह है। भारत में बने डिवाइस पर अभी अमेरिका में कोई टैक्स नहीं लगता है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी अमेरिकी ग्राहकों के लिए अपनी भारतीय उत्पादन लाइनों पर ज़्यादा निर्भर करेगी।
चीन को लेकर यह पेंच अभी तक बरकरार
हालांकि एप्पल ने भारत में उत्पादन बढ़ाया है, लेकिन वह अभी भी चीन से काफ़ी जुड़ा हुआ है। कंपनी लगभग 200 सप्लायरों और दशकों से बने एक मजबूत सिस्टम पर निर्भर है। यहां तक कि ऐपल के CEO टिम कुक ने भी चीन की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को माना है।
चीन से भारत मार्केट शिफ्ट में लगेगा बहुत वक्त
ट्रंप अरसे से अमेरिका में आईफोन के प्रोडॅक्शन पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, ऐपल के लिए निकट भविष्य में ऐसा करना मुश्किल है। क्योंकि अमेरिका में उपयुक्त सुविधाएं और कुशल श्रमिक उपलब्ध नहीं हैं। ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के 2022 के एक आकलन में अनुमान लगाया गया था कि ऐपल के मैन्युफैक्चरिंग का सिर्फ 10% हिस्सा चीन से बाहर निकालने में आठ साल लगेंगे। इससे पता चलता है कि चीन का सप्लाई बेस कितना मजबूत है।
क्या भारत बन पाएगा चीनी मार्केट का विकल्प
भारत में लगातार ऐसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है कि वह आईफोन जैसे प्रोडक्ट का शानदार उत्पादन कर सकता है। ऐपल अब भारत में अपने सभी आईफोन मॉडल बनाता है, जिसमें प्रीमियम टाइटेनियम प्रो मॉडल भी शामिल हैं। दरअसल, नरेंद्र मोदी सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए दिए जाने वाले $2.7 बिलियन के नए सब्सिडी का भी योगदान है। PLI स्कीम का मतलब है कि सरकार उत्पादन बढ़ाने पर कंपनियों को प्रोत्साहन देती है।
भारत के स्मार्टफोन मार्केट का 8% हिस्सा ऐपल का
पिछले वित्तीय वर्ष में भारत में ऐपल की बिक्री लगभग $8 बिलियन थी, जिसमें ज्यादातर आईफोन शामिल थे। हालांकि कंपनी के पास अभी भी भारत के स्मार्टफोन बाजार का सिर्फ 8% हिस्सा है। मगर, कंपनी अभी भारत को रिटेल डेस्टिनेशन के बजाय अपने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग का बनाना चाहती है। माना जा सकता है कि कंपनी भारत में अपने बेहतर भविष्य की संभावनाओं की उम्मीद लगाए हुए है।
ये उम्मीद है…10 लाख नौकरियां सेमीकंडक्टर से
बीते साल नवंबर में आई एक रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2026 तक भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र 10 लाख नौकरियां पैदा करेगा। टैलेंट सॉल्यूशंस कंपनी एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनने वाला है, लिहाजा यह उद्योग 2026 तक अनेक क्षेत्रों में 10 लाख नौकरियां देने के लिए तैयार है।चिप सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन में अनुमानित 3,00,000 नौकरियां, एटीएमपी में करीब 2,00,000 पद और चिप डिजाइन, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, सिस्टम सर्किट और मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन मैनेजमेंट में अतिरिक्त भूमिकाएं शामिल हैं।
]]>ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुराता के प्रेजिडेंट नोरियो नाकाजिमा ने कहा कि कंपनी भारत में अपने निवेश की गति बढ़ाने के लिए सिमुलेशन चला रही है। नाकाजिमा ने कहा, 'हम अपने नवीनतम कैपेसिटर ज्यादातर जापान में बना रहे हैं, लेकिन ग्राहक व्यावसायिक निरंतरता योजना के उद्देश्यों के कारण अधिक विदेशों में ज्यादा निर्माण करने के लिए कह रहे हैं।' मुराता के पार्ट्स लगभग सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में पाए जाते हैं। ऐपल और सैमसंग के स्मार्टफोन से लेकर एनवीडिया के सर्वर और सोनी के गेम कंसोल तक में इनका इस्तेमाल होते हैं। कंपनी ने नासा के एक हेलिकॉप्टर को मंगल ग्रह पर भेजने में भी मदद की है।
भारत क्यों?
मुराता फिलहाल अपने लगभग 60% MLCC जापान में बनाती है। लेकिन नाकाजिमा का कहना है कि यह रेश्यो आने वाले वर्षों में 50% के करीब आ सकता है। मुराता दुनिया की अग्रणी कैपेसिटर सप्लायस है। कैपेसिटर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बिजली की आपूर्ति को नियंत्रित करते हैं। ऐपल चीन से बाहर अपने प्रोडक्शन को डाइवर्सिफाई कर रही है। हाल ही में उसने भारत में अपने एयरपॉड्स वायरलेस ईयरफोन का परीक्षण के तौर पर उत्पादन शुरू किया है। चीन के कई मिड-रेंज स्मार्टफोन मेकर्स के भी भारत में और प्लांट खोलने की उम्मीद है।
मुराता ने तमिलनाडु के वनहब चेन्नई इंडस्ट्रियल पार्क में एक प्लांट किराए पर लिया है। कंपनी अगले वित्त वर्ष में इस प्लांट से सिरेमिक कैपेसिटर की पैकेजिंग और शिपिंग की योजना बना रही है। मुराता भारत में एक बड़ा प्लांट लगाने से पहले देश में लॉन्ग-टाइम डिमांड की थाह लेने के लिए 1 अरब येन (66 लाख डॉलर) में पांच साल का पट्टा ले रही है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स की उपभोक्ता मांग बढ़ रही है। जब भारत घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए नए प्रोत्साहन पेश करेगा तो हमें तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
]]>टिम कुक ने रिलीज़ किया टीज़र
टिम कुक ने कुछ घंटे पहले अपने 'एक्स' अकाउंट के जरिए एक पोस्ट किया है. इस पोस्ट में 7 सेकंड का एक टीज़र दिखाई दे रहा है, जिसमें एप्पल का लोगो ग्लो करता हुआ दिखाई दे रहा है. इस टीज़र के साथ टिम कुक ने लिखा है कि, "हमारे परिवार में एक नए सदस्य से मिलने के लिए तैयार हो जाइए. बुधवार, 19 फरवरी, एप्पल लॉन्च."
एप्पल के सीईओ द्वारा किए गए इस टीज़र पोस्ट से यह पता चलता है कि एप्पल कंपनी 19 फरवरी 2025, बुधवार को अपना एक नया प्रोडक्ट लॉन्च करने वाली है. हालांकि, टिम कुक ने अपने पोस्ट में किसी भी डिवाइस या अपकमिंग प्रोडक्ट का नाम मेंशन नहीं किया है, लेकिन पिछले कई रिपोर्ट्स के जरिए हमें पता है कि एप्पल अपने आईफोन के एसई लाइनअप की नई जनरेशन फोन को लॉन्च करने वाली है.
ऐसे में हमारा अनुमान है कि एप्पल 19 फरवरी को ही iPhone SE 4 को लॉन्च करने वाली है. अगर आप टिम कुक के पोस्ट पर गौर करें तो उन्होंने एप्पल इकोसिस्टम के सबसे नए सदस्य (The Newest Member) पर फोकस किया है, इससे ऐसा लगता है कि कंपनी 19 फरवरी को सिर्फ एक ही प्रोडक्ट लॉन्च करेगी. इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्ट्स का भी मानना है कि कंपनी iPhone SE 4th Gen को लॉन्च करने वाली है. ऐसे में टिम कुक ने शायद अपने इसी फोन का टीज़र रिलीज़ करके लॉन्च डेट का ऐलान किया है.
iPhone SE 4 के संभावित फीचर्स
बहरहाल, iPhone SE 4 के फीचर्स की बात करें तो इसका एक डमी यूनिट लीक हुआ था, जिससे पता चला था कि फोन का डिजाइन iPhone 14 की तरह होने वाला है. हाल ही में फोन का एक केस भी गलती से लीक हुआ था, जिससे फोन का डिजाइन पता चला था. फोन दिखने में iPhone 14 के बेस मॉडल की तरह हो सकता है, जिसमें यूएसबी टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट, सिंगल बैक कैमरा लेंस, ग्लास फिनिश और एप्पल इंटेलीजेंस (Apple Intelligence) वाले एप्पल के लेटेस्ट A18 Chipset का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो कि कुछ महीने पहले लॉन्च हुए एप्पल के लेटेस्ट फोन iPhone 16 में भी दिया गया था.
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