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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक आईपीएस अधिकारी की 16 वर्षीय बेटी ने खुदकुशी कर ली. यह दिल दहला देने वाला हबीबगंज थाने क्षेत्र में चार इमली स्थित सरकारी बंगले का है, जहां नाबालिग ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस की टीम को वहां से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. ऐसे में बच्ची ने यह कदम क्यों उठाया, इसकी वजह सामने नहीं आ सकी है।
बताया जा रहा है कि घर के हेल्पर ने लड़की को दुपट्टे से बने फंदे पर झूलते देखा और चीख-पुकार मच गई. फिलहाल, पुलिस ने मृतक लड़की का मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने आखिरी बात किससे की थी या फिर मैसेज आदि में ऐसी कोई वजह मिले जिसकी वजह से लड़की यह कदम उठा सकती है।
AIG हैं मृतक लड़की के IPS पिता
बता दें, मृतक नाबालिग लड़की के IPS अधिकारी पिता पुलिस हेडक्वॉर्टर्स (PHQ) में असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (AIG) पद पर पोस्टेड हैं. लड़की की मां रजिस्ट्रार गैस राहत के पद पर हैं।
घर में अकेली थी लड़की
जब लड़की ने यह खौफनाक कदम उठाया, उस समय घर में उसके अलावा और कोी मौजूद नहीं था. बुधवार (27 मई) की सुबह माता-पिता दोनों ऑफिस गए हुए थे. उनका एक बड़ा बेटा भी है जो उस समय घर के बाहर था. अब पुलिस मृतक लड़की के परिजनों, दोस्तों, स्कूल में टीचर्स आदि से बात कर यह समझने की कोशिश करेगी कि सुसाइड के पीछे की वजह क्या है. वहीं, नाबालिग के कमरे में उसके फोन, अन्य इलेक्ट्रॉनिक चीजों की भी जांच की जाएगी।
अंबुज पांडेय, 2012 से सक्रिय पत्रकारिता में हैं. वर्तमान में ABP न्यूज़ में बतौर प्रिंसिपल कॉरस्पॉडेंट, भोपाल मध्य प्रदेश में कार्यरत हैं. न्यूज़ पॉइंट, NNIS न्यूज़ एजेंसी, APN न्यूज़, ANI, और PTI में बतौर राजनैतिक संवाददाता काम किया . पॉलिटिकल रिपोर्टिंग के साथ-साथ, जन सरोकारों से जुड़ी खबरें, सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें और विषम परिस्थिति में प्राकृतिक आपदाएं कवर करने का अनुभव है।
]]>वहीं जानकारी सामने आ रही है कि इस बार तबादलों का आधार कई पहलू हैं , इनमें परफॉर्मेंस से लेकर फीडबैक जैसे अहम फैक्टर्स भी भूमिका निभाएंगे। मतलब की अधिकारियों की परफार्मेंस पर नजर है और यही आधार अगली पोस्टिंग के लिए कारगर होगा।
जानकारी ये है कि करीब 8 जिलों के कप्तानों का काम मुख्यमंत्री मोहन यादव की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। वही 6 जिलों के पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ से शिकायतें मिलने की सूचना है। वहीं इसके अलावा 5 जिलों में तैनात आईपीएस अधिकारियों का प्रमोशन हो चुका है, जिसके चलते उन्हें नई जिम्मेदारी मिलेगी।
जानकारी के मुताबिक शाजापुर, शिवपुरी, डिंडौरी, मंडला, छतरपुर, बुरहानपुर, निवाड़ी और नीमच के एसपी को हटाने पर काम हो चुका है। वही दमोह, सिवनी, आगर मालवा, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे जिलों के लिए प्रभावशाली चेहरों की जरुरत है। जिनके नाम फाइनल होने वाले हैं।
प्रशासनिक गलियारों में हलचल
तबादलों की आहट ने पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक बेचैनी बढ़ गई है। ये सूची किसी भी वक्त मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद जारी हो सकती है। लिहाजा हलचल तेज है।
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वहीं इस प्रस्तावित सूची के अनुसार लगभग 20 जिलों में नए एसपी की पदस्थापना होगी। शाजापुर के एसपी यशपाल सिंह राजपूत, शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौर, डिंडौरी एसपी वाहिनी सिंह, मंडला एसपी रजत सकलेचा, छतरपुर एसपी अगम जैन, बुरहानपुर एसपी देवेंद्र कुमार पाटीदार, निवाड़ी एसपी राय सिंह नरवरिया, नीमच एसपी अंकित जायसवाल, दमोह एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी, सिवनी एसपी सुनील कुमार मेहता, आगर मालवा एसपी विनोद कुमार सिंह, ग्वालियर एसपी धर्मवीर सिंह, उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा और जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय को भी बदला जा सकता है।
इनमें से छोटे जिलों के एसपी को बड़े जिलों की कमान सौंपी जा सकती है। इसके अलावा खंडवा एसपी मनोज राय, एसपी रेल भोपाल राहुल लोढा, एसपी रेल जबलपुर सिमाला प्रसाद, एसपी भिंड असित यादव, और एसपी धार मयंक अवस्थी डीआईजी बन चुके हैं, लिहाजा उन्हें भी बदला जाना प्रस्तावित है। इसके अलावा रीवा एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान, डीसीपी भोपाल विवेक सिंह, डीसीपी इंदौर कुमार प्रतीक और एसपी झाबुआ डॉ शिवदयाल भी इस साल एक जनवरी को डीआईजी बन चुके हैं और इन्हें भी नई पोस्टिंग मिलना तय है, ऐसे में इन जिलों में नए एसपी की तैनाती होगी।
]]>यूपी पुलिस सेवा में इन दिनों एक IPS जोड़ी सबसे ज्यादा चर्चा में है. वजह सिर्फ प्रदेश के तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों में शामिल होना नहीं है बल्कि उनकी प्रेम कहानी है, जो अब सात जन्मों के बंधन में बंधने जा रही है. जी हां, एक ओर बरेली में महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण को लेकर लेडी सिंघम की छवि बना चुकी आईपीएस अंशिका वर्मा हैं, तो दूसरी ओर संभल में कानून व्यवस्था को लेकर कड़े फैसले लेने वाले एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई हैं. दोनों 29 मार्च को राजस्थान के जोधपुर में सात फेरे लेने वाले हैं।
लेडी सिंघम के नाम से चर्चित हैं अंशिका वर्मा
बरेली में एसपी साउथ के पद पर तैनात आईपीएस अंशिका वर्मा को अक्सर उनकी सख्त कार्यशैली के कारण लेडी सिंघम कहा जाता है. मूल रूप से प्रयागराज की रहने वाली अंशिका वर्मा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई वहीं से पूरी की. इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुईं. बरेली में तैनाती के दौरान उन्होंने कई संवेदनशील मामलों में तेजी से कार्रवाई की. हत्या, एनडीपीएस और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में पुलिस टीमों के साथ मिलकर कम समय में कई खुलासे किए. उनकी कार्यशैली का असर यह रहा कि कई मामलों में पुलिस को त्वरित सफलता मिली और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई।
आईपीएस अंशिका वर्मा उस समय सबसे ज्यादा सुर्खियों में आईं जब उन्होंने महिला सुरक्षा के लिए एक नई पहल शुरू की. वर्ष 2025 में बरेली में उन्होंने वीरांगना यूनिट का गठन कराया. यह उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी यूनिट मानी जाती है जिसमें विशेष रूप से प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया. इस यूनिट की महिला कमांडो को ताइक्वांडो, आत्मरक्षा और दंगा नियंत्रण जैसी ट्रेनिंग दी गई ताकि वे संवेदनशील मामलों में तुरंत कार्रवाई कर सकें. महिला सशक्तिकरण की दिशा में इस पहल को महत्वपूर्ण कदम माना गया और इसके लिए उन्हें राज्य सरकार की ओर से सम्मानित भी किया गया।
कई बड़े मामलों में निभाई अहम भूमिका
बरेली में तैनाती के दौरान अंशिका वर्मा ने कई चर्चित मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई. धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों, एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई और हत्या के मामलों में पुलिस टीमों का नेतृत्व करते हुए उन्होंने कई आरोपियों को गिरफ्तार कराया. संवेदनशील मामलों में उनकी सक्रियता के कारण पुलिस की कार्यवाही को गति मिली और कई मामलों में कम समय में खुलासा संभव हुआ।
सख्त फैसलों के लिए जाने जाते हैं केके बिश्नोई
दूसरी ओर संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई भी अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं. वर्ष 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी बिश्नोई मूल रूप से राजस्थान के बाड़मेर जिले के रहने वाले हैं. सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला. वर्ष 2024 में उन्हें गोरखपुर से संभल जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात किया गया. संभल पहुंचने के बाद उन्होंने कानून व्यवस्था को लेकर कई सख्त फैसले लिए और प्रशासन के साथ मिलकर जिले में व्यवस्था मजबूत करने के प्रयास किए. नवंबर 2024 में संभल जिले में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी. इस दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आईं. हालात बिगड़ते देख पुलिस प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया. बताया जाता है कि पुलिस ने कम समय में हालात को नियंत्रित कर लिया था. हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. कानून व्यवस्था संभालने की इस कार्रवाई के बाद पुलिस प्रशासन की सक्रियता की चर्चा प्रदेश स्तर तक हुई।
बिजली चोरी और आर्थिक अपराधों पर कार्रवाई
संभल में पुलिस ने कानून व्यवस्था के साथ-साथ आर्थिक अपराधों पर भी कार्रवाई की. बिजली चोरी के खिलाफ अभियान चलाते हुए पुलिस और बिजली विभाग की संयुक्त टीमों ने कई जगहों पर छापेमारी की. इस दौरान बड़ी संख्या में अवैध कनेक्शन पकड़े गए. इसके अलावा जिले में एक बड़े बीमा घोटाले का भी खुलासा हुआ. जांच के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और करोड़ों रुपये के फर्जी दावों की जांच की गई।
प्रशासनिक गलियारों में चर्चित जोड़ी
पुलिस सेवा में काम करने वाले अधिकारियों के लिए व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता. ऐसे में दो तेजतर्रार अधिकारियों का जीवनसाथी बनने का फैसला अपने आप में चर्चा का विषय बन गया है. दोनों अधिकारियों को उनके काम को लेकर प्रदेश स्तर पर पहचान मिल चुकी है. कई मौकों पर उनकी कार्यशैली की चर्चा भी होती रही है. अब यह जोड़ी जीवन की नई पारी शुरू करने जा रही है. 29 मार्च को राजस्थान के जोधपुर में होने वाला विवाह समारोह दोनों परिवारों के लिए खास होगा. कानून व्यवस्था संभालने वाले दो सख्त अधिकारी अब निजी जीवन में भी एक दूसरे का साथ निभाने की कसमें लेंगे. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश पुलिस की यह जोड़ी इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में बनी हुई है.
गोरखपुर से शुरू हुई थी प्रेम कहानी
आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई संभल में तैनाती से पहले 29 महीने तक गोरखपुर में एसपी सिटी के पद पर तैनात रहे थे. वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काफी करीब माने जाते हैं और जब भी मुख्यमंत्री गोरखपुर मठ आते थे, तो बिश्नोई सुरक्षा व्यवस्था में पूरी मुस्तैदी के साथ कमान संभालते थे. इसी दौरान उनकी मुलाकात 2021 बैच की आईपीएस अंशिका वर्मा से हुई थी, जो उस समय वहां एएसपी के पद पर तैनात थीं.
संभल की संवेदनशीलता और CM का भरोसा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अति संवेदनशील जिले संभल की सुरक्षा को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केके बिश्नोई को वहां भेजने का फैसला किया था. संभल में जॉइनिंग से पहले उन्होंने सीएम योगी से मुलाकात की थी, जहां उन्हें अपराधियों पर सख्त कार्यवाही के आदेश मिले थे. संभल हिंसा पर बड़ी कार्यवाही करने वाले बिश्नोई को उनके साहसिक नेतृत्व के लिए 2025 में 'मुख्यमंत्री मेडल' से सम्मानित किया गया था।
माता-पिता के साथ CM की वो यादगार तस्वीर
मुख्यमंत्री मेडल सम्मान समारोह के दौरान आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई के माता-पिता, गंगा देवी और सुजाना राम बिश्नोई की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं. अब यह परिवार अपनी बहू के रूप में 'लेडी सिंघम' के नाम से मशहूर अंशिका वर्मा का स्वागत करने के लिए तैयार है।
जानकारी के मुताबिक, प्रशिक्षु आईपीएस लेखराज मीणा अब तक जिले में विभिन्न गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। उनके कार्यशैली और अनुशासन को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण थाना ओरछा रोड की कमान सौंपी गई है।
ओरछा रोड थाना क्षेत्र शहर का संवेदनशील और व्यस्त इलाका माना जाता है, जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में एक युवा आईपीएस अधिकारी की तैनाती को विभाग ने सख्ती और बेहतर मॉनिटरिंग की दिशा में अहम कदम माना है।
पुलिस अधीक्षक अगम जैन द्वारा आदेश जारी
पुलिस अधीक्षक अगम जैन द्वारा जारी आदेश के बाद थाना स्तर पर पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही नए थाना प्रभारी क्षेत्र में भ्रमण कर आमजन से संवाद भी स्थापित करेंगे।
युवा नेतृत्व से बढ़ी उम्मीदें..
शहर के सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि नए थाना प्रभारी अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और जनसुनवाई में तेजी लाएंगे। अब देखना होगा कि प्रशिक्षु आईपीएस लेखराज मीणा अपने कार्यकाल में ओरछा रोड थाना क्षेत्र में किस तरह की कार्यशैली और परिणाम प्रस्तुत करते हैं।
]]>जानकारी के मुताबिक, प्रशिक्षु आईपीएस लेखराज मीणा अब तक जिले में विभिन्न गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। उनके कार्यशैली और अनुशासन को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण थाना ओरछा रोड की कमान सौंपी गई है।
ओरछा रोड थाना क्षेत्र शहर का संवेदनशील और व्यस्त इलाका माना जाता है, जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में एक युवा आईपीएस अधिकारी की तैनाती को विभाग ने सख्ती और बेहतर मॉनिटरिंग की दिशा में अहम कदम माना है।
पुलिस अधीक्षक अगम जैन द्वारा आदेश जारी
पुलिस अधीक्षक अगम जैन द्वारा जारी आदेश के बाद थाना स्तर पर पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही नए थाना प्रभारी क्षेत्र में भ्रमण कर आमजन से संवाद भी स्थापित करेंगे।
युवा नेतृत्व से बढ़ी उम्मीदें..
शहर के सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि नए थाना प्रभारी अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और जनसुनवाई में तेजी लाएंगे। अब देखना होगा कि प्रशिक्षु आईपीएस लेखराज मीणा अपने कार्यकाल में ओरछा रोड थाना क्षेत्र में किस तरह की कार्यशैली और परिणाम प्रस्तुत करते हैं।
]]>वहीं इससे पहले मंगलवार को योगी सरकार ने पुलिस विभाग में पांच फेरबदल किया था। सरकार ने आईपीएस अफसरों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया था जबकि एडीजी प्रशासन प्रशांत कुमार द्वितीय को एडीजी पुलिस मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार दिया। फेरबदल में यूपी पॉवर कारपोरेशन के डीजी एमके बशाल को होमगार्ड विभाग का डीजी बनाया गया। इसी तरह सीतापुर पीटीसी के एडीजी जयनारायण सिंह को एडीजी पॉवर कारपोरेशन बनाया गया। आईजी पीएसी लखनऊ उपेन्द्र कुमार अग्रवाल को आईजी अभिसूचना मुख्यालय की जिम्मेदारी मिली। प्रतीक्षा में चल रहे डीआईजी सतेन्द्र कुमार को डीआईजी पीएसी अनुभाग आगरा बनाया गया। उपेन्द्र कुमार अग्रवाल का पिछले कुछ समय में यह चौथा तबादला किया गया।
आपको बता दें कि इससे पहले जुलाई के आखिरी हफ्ते में योगी सरकार ने 10 जिलों के जिलाधिकारी समेत 23 आईएएस अफसरों का तबादला किया था। इस दौरान कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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भोपाल
मध्य प्रदेश में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल की गई है। राज्य सरकार ने आठ IPS अफसरों के तबादले किए हैं। इसमें राजगढ़ और बालाघाट के पुलिस अधीक्षक (SP) भी शामिल है। साथ ही सागर रेंज के आईजी का भी तबादला कर दिया गया है। जबकि उन्हें दो दिन पहले ही यह जिम्मेदारी दी गई थी।
बुधवार को गृह विभाग ने 8 अफसरों के तबादले के आदेश जारी किए। प्रतिनियुक्ति से लौटे अमित तोलानी को राजगढ़ का नया एसपी बनाया गया है। वे 24वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल सेनानी जावरा रतलाम में पदस्थ थे। वहीं, राजगढ़ एसपी आदित्य मिश्रा को बालाघाट एसपी पदस्थ किया है। बालाघाट एसपी नागेंद्र सिंह को सेनानी 25वीं वाहिनी विसबल भोपाल पदस्थ किया है।
राज्य सरकार ने सागर रेंज के आईजी को दो दिन में ही बदल दिया है। बुधवार रात जारी आदेश में आईजी महिला सुरक्षा हिमानी खन्ना को आईजी सागर बनाया है। उन्हें डायरेक्टर जेएनपीए का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। इससे पहले 1 जून को जारी आदेश में चंद्रशेखर सोलंकी को इंदौर रेंज के एसएएफ आईजी के पद से आईजी सागर के पद पर पदस्थ किया था। बुधवार देर रात जारी आदेश में यह तबादला निरस्त कर दिया गया है।
सुनील कुमार पांडे को डीआईजी सागर बनाया डीआईजी प्रबंध पुलिस मुख्यालय सुनील कुमार पांडे को डीआईजी सागर बनाया है। डी कल्याण चक्रवर्ती को डीआईजी एसएएफ मुख्यालय पुलिस मुख्यालय से डीआईजी छिंदवाड़ा रेंज में पदस्थ किया है। बालाघाट एसपी नागेंद्र सिंह को सेनानी 25वीं वाहिनी विसबल भोपाल पदस्थ किया है।
अमित तोलानी बने राजगढ़ एसपी 24वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल सेनानी जावरा रतलाम में पदस्थ आईपीएस अमित तोलानी को पुलिस अधीक्षक राजगढ़ और राजगढ़ एसपी आदित्य मिश्रा को बालाघाट एसपी पदस्थ किया है। इसके साथ ही सोनाली दुबे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जबलपुर को एआईजी पीएचक्यू पदस्थ किया है।
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कौन हैं आईपीएस अफसर वाहिनी सिंह
वाहिनी सिंह 2014 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। 2013 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। पहले ही अटेम्पट में वाहिनी सिंह को 173वीं रैंक आई थी। एक इंटरव्यू के दौरान वाहिनी सिंह ने कहा था कि इसकी उम्मीद मुझे नहीं थी। वाहिनी ने ग्रेजुएशन बॉयोटेक में किया है। इसके बाद फायनेंस में एमबीए किया है। उनका जन्म 19 मार्च 1988 में हुआ था।
बचपन में बनना चाहता था डॉक्टर
आईपीएस वाहिनी सिंह ने कहा था कि ऐसा नहीं था कि मैं शुरू से ही आईएएस या आईपीएस बनना चाहती थी। बचपन में मैं डॉक्टर बनना चाहती थी, फिर पायलट बनने की भी चाहत हुई। साथ ही लगता था कि मैं अच्छे से पढ़ाई कर विदेश में जाकर नौकरी करूं। मेरे पिता राजस्थान स्टेट सर्विस के अधिकारी हैं। उनका सम्मान मैंने लोगों में देखा है। इसके बाद मेरे मन में यह जरूर था कि मैं एक दिन परीक्षा दूंगी। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद ही मैंने यूपीएससी देने का मन बनाया। इसके बाद दिल्ली जाकर तैयारी शुरू कर दी।
चयन के बाद मिला पंजाब कैडर
वहीं, आईपीएस बनने के बाद वाहिनी सिंह को पंजाब कैडर मिला था। उन्होंने कुछ दिनों तक पंजाब में काम भी किया। दिसंबर 2015 में शादी के नाम पर वाहिनी सिंह का कैडर ट्रांसफर हो गया। इसके बाद वह एमपी कैडर की आईपीएस अधिकारी बन गईं। वाहिनी सिंह ने कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि यह जॉब नाइन टू फाइव की नहीं है। हमेशा चुनौती भरा काम रहता है।
पति भी हैं आईपीएस अफसर
डिंडोरी एसपी वाहिनी सिंह की शादी मध्य प्रदेश में हुई है। उनके पति आईपीएस नागेंद्र सिंह हैं। नागेंद्र सिंह 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। अभी वह बालाघाट के एसपी हैं। डिंडोरी और बालाघाट आसपास ही हैं।
पति के कारण पड़ चुकी है डांट
वहीं, आईपीएस वाहिनी सिंह को कुछ साल पहले तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान से पति के कारण डांट पड़ चुकी है। तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान सभी कलेक्टर्स और एसपी की मीटिंग ले रहे थे। उस समय वाहिनी सिंह निवाड़ी की एसपी थीं और उनके पति नागेंद्र सिंह भिंड एसपी थे। तब शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि आपके लाइफ पार्टनर आपके सरकारी काम में इंटरफियर करते हैं। नागेंद्र सिंह पर रेत माफिया से सांठगांठ के आरोप लगे थे। हालांकि फटकार की बात पर वाहिनी सिंह ने चुप्पी साथ ली थी।
वाहिनी सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मुझे हसबैंड से बहुत सपोर्ट मिलता है। डिंडोरी में एसपी रहते हुए उन्होंने एक अलग मिसाल पेश की है। वाहिनी सिंह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जागरूक भी करती हैं। साथ ही उन्हें मोटिवेट करती हैं।
8 दिन में सौंपना होगी जांच रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को 28 मई तक जांच करने के आदेश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने शाह को गिरफ्तारी से राहत देते हुए जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह को फटकार लगाई है. कोर्ट ने सरकार और पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि एफआईआर के बाद आपने क्या किया? जांच कहां पहुंची? पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को कुछ और ठोस कदम उठाने चाहिए थे.
इस बयान से बढ़ीं विजय शाह की मुश्किलें
मंत्री विजय शाह की मुश्किलें 11 मई को उनके द्वारा दिए गए बयान से बढ़ी हैं. उन्होंने महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मंच से बयान दिया था. उन्होंने नाम लिए बिना कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकियों की बहन बता दिया था. उन्होंने कहा था कि, उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी तैसी करने उनके घर भेजा.''
हाई कोर्ट ने लिया था संज्ञान
मंत्री का वीडियो वायरल हुआ तो जबलपुर हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया. हाईकोर्ट ने 14 मई को 4 घंटे में मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए. हालांकि मामले में FIR तो दर्ज हुई, लेकिन हाईकोर्ट ने FIR को खाना पूर्ति बताया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि अब इस मामले में कोर्ट ही पुलिस जांच की निगरानी करेगी. हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी कैविएट दायर की है. यानी आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के मामले को भी सुना जाएगा.
विजय शाह मामले में कब क्या हुआ
11 मई को मंत्री विजय शाह, महू के रायकुंडा गांव पहुंचे और यहां एक कार्यक्रम में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान दिया. बयान में मंत्री ने कर्नल सोफिया को अतंकियों की बहन बता दिया.
13 मई को मंत्री का विवादित बयान वाला वीडियो वायरल होने के बाद मामला गरमाता देख मंत्री विजय शाह ने बयान को लेकर माफी मांगी.
13 मई को वायरल वीडियो बीजेपी नेताओं तक पहुंचा. इसको लेकर पार्टी संगठन ने मंत्री विजय शाह को कड़ी फटकार लगाई. शाम 7 बजे मंत्री विजय शाह बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से मिलने उनके बंगले पर पहुंचे.
14 मई को कांग्रेस नेताओं ने इसको लेकर विरोध जताया. कांग्रेस ने बीजेपी से मंत्री पर मामला दर्ज कराने और बर्खास्त करने की मांग की.
14 मई को मंत्री विजय शाह के विवादित बयान को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 4 घंटे में FIR दर्ज करने के आदेश दिए.
14 मई की रात करीबन सवा 11 बजे इंदौर के मानपुर थाने में विजय शाह के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया.
15 मई को मंत्री की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई. सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें फटकार मिली. उधर जबलपुर हाईकोर्ट ने दर्ज की गई एफआईआर पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे कमजोर और असंतोषजनक बताया. कोर्ट ने अपने आदेश को एफआईआर में शामिल करने और उसके हिसाब से जांच करने का आदेश दिया.
]]>छत्तीसगढ़ में अब जल्द ही पूर्णकालिक डीजीपी (Director General of Police) की नियुक्ति होने वाली है। इसको लेकर आज यूपीएससी (UPSC) की सलेक्शन कमेटी की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने भाग लिया।छत्तीसगढ़ के नए डीजीपी के लिए UPSC से 3 अधिकारियों के नाम काे क्लीयरेंस मिल गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ के स्थायी डीजीपी बनने की रेस में IPS अरुण देव गौतम के अलावा, IPS पवन देव और IPS जीपी सिंह का नाम शामिल है।
वर्तमान में DGP की जिम्मेदारी IPS अरुण देव गौतम के पास है। सरकार ने गौतम को डीजीपी पद की अस्थायी जिम्मेदारी दी है। बताया जा रहा है कि IPS अरुण देव गौतम के लिए प्रदेश के नेताओं की लॉबी लगी हुई है। वहीं IPS पवन देव के लिए बिहार के राजनेता लॉबी कर रहे हैं।
इसी तरह से IPS जीपी सिंह के लिए प्रदेश के राजनेताओं के अलावा दिल्ली के राजनेता और अफसर लॉबी कर रहे हैं। इन तीनों में से कोई एक छत्तीसगढ़ पुलिस का स्थायी मुखिया होगा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अरुण देव का नाम सबसे टॉप पर है।
UPSC से छत्तीसगढ़ वापस आ गई फाइल
गृह विभाग के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, यूपीएससी से सीएम सचिवालय फाइल और लेटर आ चुका है। राज्य सरकार के जिम्मेदारों ने यूपीएससी से आए पत्र पर अंतिम निर्णय लेने की कवायद शुरू कर दी है।जून माह तक नए डीजीपी का नाम सार्वजनिक किया जाएगा।
4 फरवरी को IPS गौतम को मिली थी डीजीपी की जिम्मेदारी
राज्य सरकार ने 4 फरवरी को आईपीएस अरुण देव गौतम को डीजीपी की अस्थायी जिम्मेदारी दी थी। इस संबंध में गृह विभाग के विशेष सचिव ने निर्देश जारी किया था। जिस समय आईपीएस गौतम को डीजीपी बनाया गया था, उस समय उनके पास नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा नवा रायपुर के महानिदेशक, लोक अभियोजन नवा रायपुर के संचालक की भी जिम्मेदारी थी।
स्थायी DGP की रेस में शामिल IPS वर्तमान में यहां हैं पदस्थ
IPS अरुण देव गौतम: अस्थायी डीजीपी, नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा नवा रायपुर के महानिदेशक, लोक अभियोजन नवा रायपुर के संचालक
IPS पवन देव: चेयरमेन पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन
IPS जीपी सिंह: डीजी पीएचक्यू
पहले मुख्यमंत्री सीधे करते थे डीजीपी की नियुक्ति
छत्तीसगढ़ में पहले मुख्यमंत्री खुद ही डीजीपी की नियुक्ति करते थे। इस प्रक्रिया को लेकर कोई निर्धारित नियम नहीं था। 2011 में एएन उपध्याय की नियुक्ति के बाद तक यूपीएससी को नाम भेजने का नियम लागू नहीं हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गाइडलाइन जारी की गई, जिसमें कहा गया था कि डीजीपी की नियुक्ति कम से कम दो साल के लिए की जानी चाहिए। साथ ही अगर नियुक्ति के बाद छह महीने से कम समय में रिटायरमेंट का समय बचा हो, तो भी उन्हें दो साल का कार्यकाल पूरा करना होगा।
छत्तीसगढ़ में इस गाइडलाइन का पालन करते हुए, अशोक जुनेजा को इसका लाभ मिला था। अब इस नियम के तहत छत्तीसगढ़ को जल्द ही अपना नया और पूर्णकालिक डीजीपी मिलेगा, जो राज्य की कानून व्यवस्था को मजबूती से संभालेगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन नामों का पैनल:
यूपीएससी सलेक्शन कमेटी केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन नामों का पैनल तैयार कर भेजेगा। वहां से छत्तीसगढ़ सरकार को फिर पेनल आएगा। जिस पर मुख्यमंत्री को अधिकार होगा कि वह इन तीन नामों के पेनल में से किसी एक नाम पर वे टिक लाएंगे, हालांकि, पहले डीजीपी की नियुक्ति मुख्यमंत्री सीधे करते थे। और एएन उपध्याय की नियुक्ति होने तक यूपीएससी को नाम भेजने का कोई नियम नहीं बना था। मुख्यमंत्री उस समय सीधे डीजीपी अपाइंट करते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इसके बाद गाइडलाइन आ गया, जिसके अब कम-से-कम दो साल के लिए डीजीपी की नियुक्ति होगी।
अशोक जुनेजा को इसका लाभ :
इसके साथ ही अगर उनकी नियुक्ति के बाद रिटायरमेंट में छह महीने भी टाईम बचा हो तो भी उन्हें दो साल का नियुक्ति के बाद अवसर दिया जाएगा। इसका लाभ छत्तीसगढ़ में अशोक जुनेजा को मिला है।छह महीने से छत्तीसगढ़ के डीजीपी के लिए मामला यूपीएससी में लटका था। वहीं इससे पहले डीपीसी हुई भी मगर जीपी सिंह की इंट्री के बाद एक बार फिर से कई तरह की जानकारियां राज्य सरकार से यूपीएससी ने मंगवाई थी। ज्ञात हो कि डीजीपी सलेक्शन के लिए सरकार ने दिसंबर 2024 में प्रस्ताव भेज दिया था। लेकिन अब यह समझा जाता है कि भारत सरकार को यूपीएससी जल्द अब पेनल बनाकर भेज सकती है।
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